भारत में नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों ने लगभग 60 वर्षों तक प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से शासन किया है। इसलिए नेहरू- गांधी परिवार का हर सदस्य भारत पर राज करने का “जन्मसिद्ध अधिकार” मानता है। इससे कांग्रेस के ‘युवराज’ राहुल गांधी को ‘बॉर्न टू रूल’ सिंड्रोम की बीमारी हो गई। यह बीमारी समय के साथ बढ़ती गई। पूर्व कांग्रेसी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने इसे ‘ईसीएस-एंटाइटल्ड चाइल्ड सिंड्रोम’ का नाम दिया। यह ऐसी बीमारी होती है, जिसमें व्यक्ति बिना मेहनत किए सब कुछ मेरा है और मेरी हर जिद तुरंत पूरी होनी चाहिए की मानसिकता रखता है। अपनी हर मांग या इच्छा को तुरंत पूरा होते देखना चाहता है। अपनी गलतियों या कम नंबरों के लिए दूसरों (जैसे शिक्षकों या माता-पिता) को दोष देता है। जब व्यक्ति बार-बार असफल होने लगता है तो ‘ईसीएस-एंटाइटल्ड चाइल्ड सिंड्रोम’ की बीमारी ‘इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर’ में बदल जाती है। इस समय राहुल गांधी में इस बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
क्या है इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर (IED) ?
यदि किसी व्यक्ति में बार-बार अचानक अत्यधिक गुस्सा या हिंसक outbursts आते हैं (चाहे वह भीड़ में हो या अकेले), तो इसे चिकित्सकीय भाषा में ‘इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर’ (Intermittent Explosive Disorder – IED) कहा जाता है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें व्यक्ति को अचानक और बिना किसी उकसावे के गुस्से या हिंसा के छोटे दौरे पड़ते हैं। बहुत छोटी या सामान्य बात पर भी व्यक्ति अचानक बहुत अधिक चिल्लाने, चीखने या हिंसक होने लगता है। कई बार इस तरह के गुस्से के फटने से ठीक पहले व्यक्ति को अंदरूनी तनाव, बेचैनी, मूड में बदलाव या ऊर्जा के स्तर में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है। इसमें व्यक्ति अपना और पराया नहीं देखता है। किसी भी व्यक्ति पर भड़क जाता है।
इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर से पीड़ित हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी ने खुद व्यक्तिगत तौर पर केवल एक बार लोकसभा चुनाव हारा है। राजनीतिक आंकड़ों और भारतीय जनता पार्टी तथा राजनीतिक विश्लेषकों के दावों के अनुसार, उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी अलग-अलग राज्यों के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में करीब 99 बार हार चुकी है। इससे राहुल गांधी का आत्मविश्वास और धैर्य खत्म हो चुका है। वो मानसिक रूप से काफी असंतुलित हो चुके हैं। 12 अक्टूबर, 2026 को दिल्ली के बाराखंभा से सुप्रीम कोर्ट तक कांग्रेस के ‘चलो दिल्ली’ मार्च के दौरान राहुल गांधी के व्यवहार में जो आक्रामकता देखने को मिली, उससे पता चलता है कि वो ‘इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर’ के शिकार हो चुके हैं। जिस तरह उन्होंने भीड़ के बीच अपना व्यक्तिगत नैतिकता या विवेक खोया, उसकी अपेक्षा किसी जिम्मेदार सांसद और नेता प्रतिपक्ष से नहीं की जा सकती।
जो राहुल गांधी कैमरा फुटेज में आने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को कोहनी मार रहा है आप इनसे देश का भला सोचते हैं...?🤣 https://t.co/aL16T5FBOb
— Anant (@singh31919) October 12, 2026
राहुल ने सीएम डी.के. शिवकुमार का कॉलर पकड़कर खींचा
कांग्रेस के ‘चलो दिल्ली’ मार्च के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। भीड़ और हलचल के बीच सामने आए वीडियो में राहुल गांधी कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का कुर्ता/कॉलर पकड़कर उन्हें जबरदस्ती पीछे खींचते हुए नजर आए। इसके अलावा उनके सुरक्षाकर्मियों (गार्ड्स) द्वारा भी धक्का-मुक्की किए जाने का दावा किया गया। राहुल गांधी को अच्छे से पता था कि उनके बगल में दक्षिण भारत के एक प्रमुख राज्य के सीएम चल रहे हैं, फिर भी उन्होंने ऐसा किया। इस घटना को लेकर दिल्ली से लेकर कर्नाटक तक की राजनीति गरमा गई। बेंगलुरू साउथ सीट से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने एक्स पर वह वीडियो शेयर किया, जिसमें राहुल गांधी की हरकत को उन्होंने कर्नाटक की सात करोड़ जनता का अपमान बताया।
If arrogance of inherited privilege, passed down generations, had a face, it would look like this. From Rajiv Gandhi unceremoniously announcing Veerendra Patil’s removal as Karnataka CM at an airport to Rahul Gandhi pulling @DKShivakumar by his kurta in the middle of a road, the Congress dynasty’s sense of entitlement remains unchanged. Politics aside, @CMofKarnataka D.K. Shivakumar represents Karnataka. Such public humiliation is an insult to the dignity of 7 crore Kannadigas. Rahul Gandhi holds no executive office or constitutional authority over Karnataka’s elected leadership, yet his conduct raises questions about the deference expected towards the Congress high command.
— Tejasvi Surya (@Tejasvi_Surya) October 13, 2026
राहुल गांधी ने दीपेंद्र हुड्डा को गाड़ी से नीचे उतारा
सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी ने दीपेंद्र हुड्डा को ट्रक से नीचे उतार दिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि मार्च के दौरान ट्रक पर मौजूद राहुल गांधी अचानक पीछे मुड़ते हुए दिखाई देते हैं। पीछे खड़े दीपेंद्र हुड्डा के कंधे पर हाथ रखकर नीचे जाने का इशारा करते हैं। इस दौरान दीपेन्द्र हुड्डा उनसे बात करने की कोशिश करते हैं। इसके बाद हुड्डा नीचे की ओर चले जाते हैं। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे दीपेंद्र हुड्डा के राजनीतिक कद से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने कांग्रेस और हुड्डा परिवार पर निशाना साधा।
कल दीपेंद्र हुड्डा को राहुल गांधी ने अपने रथ से धक्का देकर नीचे उतार दिया। हर चीज में जाट समाज को लाने वाला हुड्डा परिवार एक ही राज परिवार की गुलामी में घनघोर बेइज्जती करवा रहा है। अब समाज की इज़्ज़त बढ़ रही है क्या?? https://t.co/4doDsM8eqp
— Baliyan (@Baliyan_x) October 13, 2026
राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ता को मारी कोहनी
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कोहनी मारने में एक्सपर्ट है। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए पैदल मार्च के दौरान राहुल गांधी ने अपने कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ा। एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें राहुल गांधी ने भीड़ के बीच रास्ते से हटने के लिए अपने ही पार्टी कार्यकर्ता को कोहनी मारी। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़भाड़ वाले रास्ते से निकलते समय राहुल गांधी का हाथ या कोहनी पास चल रहे एक व्यक्ति से टकराते हुए दिखाई देती है। राहुल गांधी के ‘दिमाग’ की क्या हालत है, उसका अंदाज़ा आप इस वीडियो से लगा सकते हैं।
भाई-बहन दोनों एक जैसे! प्रियंका ने पुलिसवाले को कोहनी मारी, राहुल अपने ही कार्यकर्ता को मार रहे हैं! https://t.co/wbd65gg5dd
— Social Tamasha (@SocialTamasha) October 12, 2026
अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को दिया धक्का
कांग्रेस के ‘चलो दिल्ली’ मार्च के दौरान राहुल गांधी भीड़ में काफी असहज दिखाई दे रहे थे। कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने बीच राहुल गांधी को पाकर काफी जोश में थे, लेकिन राहुल गांधी ने उनके उत्साह पर उस समय पानी फेर दिया, जब वो उनके पास आने की कोशिश कर रहे थे। राहुल गांधी ने ना सिर्फ कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई, बल्कि उन्हें धक्के देकर अपमानित किया। कार्यकर्ताओं के साथ राहुल गांधी का यह बर्ताव उनके अहंकार को साबित करता है, जो कार्यकर्ताओं के बीच भी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। हैरानी की बात यह है कि जो व्यक्ति अपने कार्यकर्ताओं को संभाल नहीं सकता, वो देश संभालने का स्वप्न देख रहा है।
राहुल गांधी ने महिला पत्रकार को दिया धक्का
दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट के मार्च के दौरान बिहार की एक प्रेग्नेंट महिला पत्रकार ऋचा परासर के साथ बदसलूकी का मामला गरमा गया है। महिला पत्रकार ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट के अंदर थी और गेट के पास खड़ी थी कि जब यहां से निकलेंगे तो राहुल गांधी की बाइट ले लूंगा। मैं कोई इनफ्लुएंशर नहीं हूं। राहुल गांधी आते हैं, मैंने जैसे ही माइक बढ़ाया। उन्होंने मेरा माइक हटा दिया। जब बाकी लोग माइक लगाने लगे तो मैंने फिर लगाया। मेरे कैमरामैन मेरे पीछे थे। राहुल गांधी ने मेरा हाथ पकड़ा और आगे की तरफ खींचा। तब तक उनके बॉडीगार्ड्स ने खींचकर धक्का दे दिया। मैं मुंह के बल सीढ़ियों पर गिर गई। सबसे पहले राहुल गांधी ने पकड़ा। इसका वीडियो है। राहुल गांधी ने खुद मेरे कैमरा पर्सन को धक्का दिया। उन्होंने फोन दिखाते हुए कहा, मेरा फोन भी टूट गया।”
शर्म करो राहुल गांधी… लगातार हारों से तिलमिलाए हुए इस व्यक्ति ने बदतमीजी की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ इतनी घटिया, इतनी कायराना हरकत करने वाले को देश कभी माफ नहीं करेगा। #SmashTheHypocrisyRaGa https://t.co/hz8EYkbh0A
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 13, 2026
3 महीने की गर्भवती हैं महिला पत्रकार
ऋचा ने बताया कि वह 3 महीने की गर्भवती हैं और इस घटना के बाद सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं। फिलहाल उनकी हालत ठीक है, लेकिन इस घटना से वह काफी आहत हैं। यह घटना उनके लिए दिल दहलाने वाली है। एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ इस तरह के व्यवहार के बाद कोई संवेदनहीन व्यक्ति ही राहुल गांधी के साथ खड़ा हो सकता है। कांग्रेस की तरफ से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है। वहीं बीजेपी ने इस मामले में राहुल गांधी पर हमला बोला है और उन पर गुंडों जैसा बर्ताव करने का आरोप लगाया है। भीड़ में राहुल गांधी का यह अराजक व्यवहार बताता है कि वो ‘इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर’ से पीड़ित है।
“राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं, कोई गुंडा मवाली नहीं है” महिला पत्रकार ऋचा पाराशर का यह वीडियो देश के हर नागरिक को देखना चाहिए। आपको समझ आएगा कि, राहुल गांधी के भीतर किस तरह का अहंकार है और किस तरह से राहुल दुनिया देखते हैं। एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ इस तरह के व्यवहार के बाद कोई संवेदनहीन व्यक्ति ही राहुल गांधी के साथ खड़ा हो सकता है। कल ढेर सारे ऐसे चित्र/चलचित्र देखने को मिले हैं, जिससे राहुल गांधी के ऊपर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। इसे पूरा सुनिए और समझिए कि, राहुल गांधी देश में क्या करना चाह रहे हैं?
— हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi (@MediaHarshVT) October 13, 2026
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने पैरों में फेंका संविधान
कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के माध्यम से संविधान को बचाने की वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन संविधान बचाने की लड़ाई की सच्चाई 7 अक्टूबर, 2026 को दिल्ली की सड़कों पर सामने आई, जब राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर चल रहे प्रदर्शन में संविधान को अपने पैर के पास नीचे फेंक दिया। राहुल गांधी की इस अपमानजनक हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि राहुल गांधी संविधान फेंक कर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का अपमान कर रहे हैं।
राहुल गाँधी जिस संविधान कि दिन-रात दुहाई देता है! उसी संविधान को पैरों के पास रख दिया! संविधान का इससे ज्यादा अपमान क्या हो सकता है•••और ये मन्दबुद्धि संविधान बचाने कि नौटंकी कर रहा है! कांग्रेस जब सत्ता में रही तो संविधान ताले में था और कांग्रेस के कानून चलते थे! https://t.co/TfzfKVagLk
— Saurabh Srivastava (@Saurabh37244583) October 7, 2026
अनुरोध करता रहा पुलिस अधिकारी, नहीं माने राहुल
राहुल गांधी ने संविधान फेंक कर संदेश दिया है कि उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर के विचारों को भी अपने पैरों तले रौंद दिया है। अब संविधान और लोकतंत्र बचाना उनका मकसद नहीं है। उन्होंने संविधान फेंकर अपने हाथों में विदेशी ताकतों का ‘टूलकिट’ (ऐसी पुस्तिका, जिसमें आंदोलन की कार्ययोजना हो) थाम लिया है, जिसमें भारत की बर्बादी की पटकथा लिखी हुई है। हाल के दिनों में राहुल गांधी इसी पटकथा के मुताबिक दिल्ली की सड़कों पर अराजकता पैदा करते नजर आ रहे हैं। अपने विदेशी आकाओं को खुश करने के लिए कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं। दिल्ली पुलिस का अधिकारी बार-बार अनुरोध करता रहा, “मैं आप से रिक्वेंस्ट कर रहा हूं, हजारों की भीड़ है, किसी को चोट लग जाएगी। आप बताएं कैसे होगा? आप कोऑपरेट कीजिए सर…।’ इसके बावजूद राहुल गांधी अपनी जिद पर अड़े रहे और राजशाही मानसिकता और अहंकार का परिचय देते रहे।
*”हजारों की भीड़ है, किसी को चोट लग जाएगी…”* पुलिस अधिकारी गुहार लगाते रहे, लेकिन राहुल गांधी का अहंकार टस से मस नहीं हुआ। *न कानून का सम्मान, न लोगों की सलामती की फिक्र। कांग्रेस मारपीट और गुंडागर्दी पर उतर आई है!* 🚨 https://t.co/nKfsgYfu9N
— AYODHYAPRASAD NISHAD(HINDU)🚩 (@AyodhyaPrasadN3) October 9, 2026
राहुल गांधी ने महिला पुलिसकर्मी के साथ की बदसलूकी
राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की एक महिला कांस्टेबल को गलत तरीके से छूने की कोशिश की। उन्होंने महिला कांस्टेबल को धक्का दिया और उससे बदसलूकी की। राहुल गांधी ने महिला कांस्टेबल को तब धक्का दिया, जब वह अपनी टीम के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर बुधवार 7 अक्टूबर को प्रदर्शन में शामिल एक महिला प्रदर्शनकारी को हटाने की कोशिश कर रही थी। दिल्ली पुलिस ने वायरल वीडियो की जांच शुरू कर दी है और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से मारपीट, धक्का-मुक्की और महिलाकर्मियों पर हमले के संबंध में विभिन्न थानों में एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि प्रदर्शन के दौरान किन लोगों की ओर से पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर मारपीट या ड्यूटी में बाधा डालने की घटना हुई।
राहुल गाँधी ने महिला पुलिस के साथ की अभद्रता बदसलूकी @DelhiPolice @PMOIndia https://t.co/r13H01BKo9
— CBK SINGH🚩 (@EkNoGhamandi) October 7, 2026
राहुल ने खोया मानसिक संतुलन, हिंसक होता बर्ताव
दरअसल, लगातार हार से कांग्रेस खेमे में हताशा और निराशा है। राहुल गांधी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। तथ्यहीन और काल्पनिक आरोपों के आधार पर चुनाव आयोग पर हमले कर रहे हैं। अगर उनके पास ‘वोट चोरी’ का सबूत है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सबूत पेश करना चाहिए। लेकिन वो ऐसा नहीं करना चाहते हैं। उनका मकसद संवैधानिक संस्थाओं का तमाशा बनाकर उनकी विश्वसनीयता खत्म करना है, ताकि असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर काबिज हो सके। राहुल गांधी की बीमारी इतनी बढ़ चुकी है कि वो अपना धैर्य खो चुके हैं। वो आम चुनाव के लिए ढाई साल तक इंतजार नहीं करना चाहते हैं। इसलिए लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता हासिल करने की जगह अराजकता और अफरातफरी का माहौल बना कर बांग्लादेश और नेपाल की तरह तुरंत सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं। उनके अंदर की हिंसक मनोवृति और इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर को इस वीडियो में देखा जा सकता है।

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