ध्रुव राठी-पाकिस्तानी-बांग्लादेशी गठजोड़ का प्लान लीक! भारत को फ्रांस-इटली की तरह जलाने की तैयारी

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली बार सरकार बनते ही कांग्रेस पार्टी के नेता रिजीम चेंज करने की कोशिशों में लग गए थे। नवंबर 2015 में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान के निजी न्यूज चैनल ‘दुनिया टीवी’ के एक पैनल डिस्कशन में शामिल हुए थे। इस चर्चा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान से अपील की थी, “सबसे पहले मोदी को हटाओ और हमें बातचीत फिर से शुरू करने का मौका दो। हमें (कांग्रेस को) वापस सत्ता में लाओ और उन्हें हटाओ।” 2015 से लेकर अब तक कई बार प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने की कोशिशें हो चुकी हैं। हाल के दिनों में दिल्ली से लेकर लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर तक जो कुछ देखने को मिला, वो भारत में रिजीम चेंज करने वाले ‘विदेशी टूलकिट’ का हिस्सा है। ध्रुव राठी का दिल्ली से लंदन पहुंच कर प्रदर्शन करना बताता है कि मोदी सरकार विरोधी ताकतों का भारत में कोई जनाधार नहीं है। जनता उनके बहकावे में आने वाली नहीं है। इसलिए उन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश की मदद लेनी पड़ रही है।

लंदन प्रदर्शन में ज्यादातर पाकिस्तानी और बांग्लादेशी 
दरअसल, 17 अक्टूबर को लंदन में एसआईआर के खिलाफ भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन हुआ। भारत में स्थित ध्रुव राठी के समर्थक खुश है कि लंदन के इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। ध्रुव राठी के समर्थकों ने इसे सरकार विरोधी नैरेटिव की एक बड़ी सफलता के रूप में प्रचारित किया और सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी उत्साह दिखाया। हालांकि इस प्रदर्शन को ध्रुव राठी के व्यक्तिगत प्रभाव के रूप में दिखाया गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इस प्रदर्शन में भारत के लोगों की तुलना में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी शामिल थे। उनकी उपस्थिति बता रही है कि यह प्रदर्शन आईएसआई के निर्देशन में ध्रुव राठी के पाकिस्तानी और बांग्लादेशी दोस्तों ने आयोजित किया था।

ध्रुव राठी के आस-पास पाकिस्तानी और बांग्लादेशी
जब प्रदर्शन में शामिल एक-एक चेहरे की पड़ताल की गई, तो चौकाने वाले खुलासे हुए। ध्रुव राठी के आस-पास जो चेहरे थे, वो पाकिस्तानी और बांग्लादेशी थे। ध्रुव राठी के बगल में मौजूद ऐसे दो लोगों की तस्वीरें सामने आई हैं। एक तस्वीर में एक व्यक्ति, जिसने लाल जैकेट के साथ टोपी पहन रखी है। दूसरा, जिसने ब्लू स्वेटर पहन रखा है और कान में एक छोटा-सा डिवाइस लगाया हुआ है। इन दो लोगों का परिचय जानकर हैरान रह जाएंगे। सोशल मीडिया में किए जा रहे दावे के मुताबिक टोपी वाले व्यक्ति का नाम है वक़ार अहमद है। ये कोई भारतीय नहीं, बल्कि मुरीदके का रहने वाला एक पाकिस्तानी नागरिक हैं। यह महज़ एक सप्ताह पहले ही इंग्लैंड पहुंचा था। स्वेटर पहने अधेड़ व्यक्ति का नाम जमशेद बाजवा हैं। ये भी पाकिस्तानी-ब्रिटिश नागरिक हैं और पहले भी खालिस्तान समर्थक व भारत-विरोधी प्रदर्शनों में इसकी स्पष्ट भूमिका रही है।

ध्रुव राठी के साथ पाकिस्तानी न्यूज चैनल के रिपोर्टर
पाकिस्तान और आईएसआई के लिए काम करने वाले ‘ARY न्यूज़’ के रिपोर्टर फरीद अहमद को लंदन में ध्रुव राठी के साथ देखा गया। फ़रीद अहमद 2014 से पाकिस्तान के प्रमुख न्यूज चैनल ‘ARY न्यूज़’ के यूके स्थित रिपोर्टर के रूप में काम कर रहा है। 17 अक्टूबर को लंदन में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास हुए प्रदर्शन के दौरान उनकी उपस्थिति और यूट्यूबर ध्रुव राठी के पास खड़े होने की तस्वीरें सामने आने के बाद स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान की मीडिया भी भारत को बदनाम करने में लगी है। भारत के वामपंथी और सेकुलर गैंग के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त और पूरी चुनाव प्रणाली के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, ताकि भारत की निर्वाचित सरकार को अवैध साबित किया जा सके।

लंदन में पाकिस्तानी झंडे के साथ भारत-विरोधी गैंग
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को लंदन प्रोटेस्ट का वीडियो शेयर कर निशाना साधा है। अपने पोस्ट में किरेन रिजिजू ने लिखा कि, ‘लंदन में कांग्रेस पार्टी के झंडे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान के झंडों के साथ! इन लोगों को लगता है कि लंदन में भारत विरोधी गैंग के जमावड़े देशभक्त भारतीयों को डरा देंगे।’ बता दें कि, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने पोस्ट में जो विडियो शेयर किया,उस पर लिखा था.. ‘लंदन में भारत-विरोधी सभी गैंग एक ऐसे यूट्यूबर के इशारे पर काम करते हैं, जो खुद को भारतीय बताता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है।’

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पाकिस्तानी नागरिक आमिर हाशमी का वीडियो शेयर किया है। आमिर हाशमी ने इस प्रदर्शन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उसने अपने इंस्टाग्राम हैंडल amir.hashmi22 पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार राजनीति के माध्यम से भारत और पाकिस्तान को विभाजित नहीं कर सकती। हालांकि हाशमी ने जो वीडियो शेयर किया है वो पुराना (अगस्त 2026) प्रतीत होता है, लेकिन प्रदर्शन के प्रति एकजुटता व्यक्त करने वाली उसकी सोशल मीडिया पोस्ट हाल ही की है।

प्रदर्शन में शामिल इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन का भारत विरोधी इतिहास
लंदन प्रदर्शन में इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन, ग्रेट ब्रिटेन (IWA-GB) भी शामिल था। यह एक वामपंथी झुकाव वाला संगठन है जो ब्रिटेन में अपने लाल झंडे के साथ भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। सितंबर 2026 में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे के दौरान, IWA (Great Britain) ने ‘साउथ एशियन सॉलिडैरिटी ग्रुप’, ‘यूके इंडियन मुस्लिम काउंसिल’ और ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ के साथ मिलकर लंदन में भारी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस पर फासीवादी और अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के पारित होने के बाद, IWA ने ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी भारतीयों, छात्रों और मानवाधिकार संगठनों के साथ मिलकर लंदन में भारतीय उच्चायोग और संसद के बाहर प्रदर्शन किए थे। साल 2019 में जब भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया, तब भी IWA ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।

प्रदर्शन में शामिल बांग्लादेशी नागरिक का बड़ा खुलासा
एसआईआर प्रकिया उन लोगों के लिए परेशानी पैदा करने वाला है, जो बिना वैध दस्तावेजों, वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद या अवैध रास्तों से प्रवेश कर भारत में रह रहे हैं। दरअसल, उन पर कानूनी कार्रवाई और देश से बाहर निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा है। इसलिए ऐसे लोगों में एसआईआर को लेकर खलबली मची है। ध्रव राठी के प्रदर्शन में शामिल एक बांग्लादेशी नागरिक ने हैरान करने वाला खुलासा किया। The Fauxy से बात करते हुए बांग्लादेशी नागरिक ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में उनके परिवार के लोगों का नाम था, लेकिन एसआईआर की वजह से उनका नाम कट गया है।

ध्रुव राठी के प्रदर्शन में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी झंडे
विदेशी धरती पर एसआईआर के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में अपने-अपने देश के झंडे के साथ बाग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिकों का शामिल होना भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का स्पष्ट प्रमाण है। विदेशी नागरिकों या मीडिया कर्मियों द्वारा इसमें रुचि दिखाना बताता है कि उनके हित कैसे प्रभावित हो रहे हैं। वो कांग्रेस और वामपंथी संगठनों को समर्थन दे रहे हैं ताकि उनके जो रिश्तेदार भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं, उनकी सुरक्षा हो सके। इसलिए एसआईआर प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय रंग देकर भारत की आंतरिक व्यवस्था को अस्थिर करने या दबाव बनाने की साजिश हो रही है। यहां तक कि बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और इटली की तरह जलाने की कोशिशें हो रही हैं। इसे देश की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील घटना माना जा रहा है।

SIR पर ‘जन गण मन’, आतंकवादी घटनाओं पर मौन
पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक अपने झंडे के साथ भारत का राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ गाकर एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं। लेकिन राष्ट्र की संप्रभुता, आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर इस तरह की मुखर एकजुटता अक्सर नदारद रहती है। जब भी भारत को सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद, उग्रवादी हमलों या देश के सुरक्षा बलों (सेना और अर्धसैनिक बलों) पर हमलों का सामना करना पड़ता है, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या पड़ोसी देश के नागरिकों/मंचों से उस प्रकार की एकजुटता और निंदा देखने को नहीं मिलती। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि ऐसे समूहों की प्राथमिकताएं वास्तव में लोकतंत्र के प्रति हैं या फिर भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने के प्रति। लंदन में हुए प्रदर्शन और उसमें बाहरी तत्वों की उपस्थिति ने इस बहस को और गहरा कर दिया है कि घरेलू राजनीतिक विरोध की आड़ में किस तरह से राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को पीछे धकेल दिया जाता है। लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन जब यह विरोध ऐसे मंचों और माध्यमों से होने लगे जहां बाहरी और अवांछित ताकतों को हस्तक्षेप करने का अवसर मिले, तो यह देश की संप्रभुता के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

No comments: