रिजीम चेंज तो ऐसे मांग रहे हैं जैसे मंदिर का प्रसाद बंट रहा हो; उनकी औकात भी तो देखो

सुभाष चन्द्र

रिजीम चेंज और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा तो देश में दंगों के हालात पैदा करके वो लोग मांग रहे हैं जिन्हें जनता ने ठुकरा दिया और जिनकी जनता में कोई औकात भी नहीं है। प्रशांत भूषण की क्या औकात है, नेहा बोरा की क्या औकात है, CJP दिपके गैंग तो कभी चुनाव भी नहीं लड़ा और राहुल गांधी कांग्रेस को कहीं कहीं ही जीत दिला पाता है।

रिजीम चेंज मांग रहा है उद्धव ठाकरे जिसकी पार्टी को महाराष्ट्र में केवल 20 सीट मिली, वामपंथी उछल रहे हैं जिनकी जमीन बंगाल के बाद अब केरल में भी खिसक गई। प्रियंका वाड्रा कह रही है इस सरकार को हटाना होगा वरना देश खाई में चला जाएगा। अगर मोदी के किए गए विकास को ये देश को खाई में ले जाना मानती है तो हमें ऐसी खाई में जाना मंजूर है।

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राहुल गांधी सरकार को न जाने कब से गिरा रहा है। कहता है उसके पास मोदी की कुंडली है, उसने कुंडली पढ़ी है। क्या पढ़ा कुंडली में जो मोदी को 13 साल गुजरात में नहीं हरा सके और 2014 से लोकसभा में नहीं हरा सके। मोदी की कुंडली पढ़ी होती तो पता चलता उसकी कुंडली में शत्रुहंता योग है।

मोदी की सरकार हटाने के लिए संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने की हिम्मत करो और ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग चलाने की हिम्मत करो। सड़कों पर दंगा करके उन्हें नहीं हटा सकते। संजय राउत कह रहा है कि अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट को आग लगा दी गई, हमें वहां से कुछ सीखना चाहिए। CJI सूर्यकांत संजय राउत के खिलाफ Contempt of Court की सुनवाई करते हुए उससे पूछें कि क्या हमारे सुप्रीम कोर्ट भी आग लगाना चाहते हो?

रिजीम चेंज मांगने वालों में अखिलेश यादव भी पीछे नहीं हैं जो 2017 और 2022 में दो बार लगातार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।

2014 में बीजेपी को 31.34% वोट मिली और 282 सीट मिली जो 30 साल बाद पहली बार मिला बहुमत था। कांग्रेस को 19.31% वोट मिली और ऐतिहासिक तौर पर सबसे कम 44 सीट मिली। तब ज्ञानेश कुमार नहीं थे। राहुल गांधी रोना रोता है कि बीजेपी को बहुमत का वोट नहीं मिला जबकि उसे पता नहीं है कि कांग्रेस को 1952 से अभी तक कभी भी 50% से ज्यादा वोट नहीं मिले। 1984 में भी इंदिरा गांधी की मौत के बाद सीट बेशक 415 मिली लेकिन वोट 49.1% मिला।

2014 में समाजवादी पार्टी को केवल 3.43% वोट मिला और सीट 5 जबकि बसपा को 4% वोट मिला और सीट एक भी नहीं। 2019 में कांग्रेस को 19.55% वोट मिले और सीट 52। बस 2024 में 99 सीट मिली जिनके दम पर राहुल गांधी रिजीम उखाड़ कर फ़ेंक देना चाहता है।

हाय हाय वोट चोरी हो गई लेकिन राहुल गांधी यह क्यों बताता कि कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल और केरल में कांग्रेस की सरकार कैसे बन गई? वहां वोट चोरी क्यों नहीं हुई? और सबसे बड़ी बात बीजेपी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में वोट चोरी क्यों नहीं करा पाती?

रिजीम चेंज का शोर मचाने वाले बुझे हुए पटाखे हैं जिन्हें जनता नकार चुकी है। एक बात और चीफ जस्टिस को प्रशांत भूषण से पूछनी चाहिए कि तुझे रिजीम चेंज की खुजली क्यों हो रही है? तेरी कौन से भैंस खोल ली है वर्तमान रिजीम ने?

विपक्ष बंगाल में बीजेपी की जीत को नहीं पचा पा रहा। लगता है बांग्लादेशी और रोहिंग्या के वोट कटने से ज्यादा दर्द हुआ है।

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