फ़ारूक़ अब्दुल्ला का पाकिस्तान प्रेम, चीन की अरुणाचल में शरारत, जामिया में “फ्री कश्मीर” के नारे और JNU में नक्सली नारे सब एक साथ हुए हैं

सुभाष चन्द्र

इन सब बातें को का एक साथ होना कोई संयोग नहीं है। जिस दिन जामिया मिलिया में “फ्री कश्मीर” और “फ्री उमर खालिद” के नारे लिखे गए, उसी दिन फारूक अब्दुल्ला ने सबसे घटिया बयान दिया है कि पाकिस्तान के कारण बच रही है कश्मीरियों की जान। अब्दुल्ला के बूढ़े दिमाग में फितूर घुसा है कि क्योंकि पाकिस्तान कई जगहों पर जाकर कश्मीर और कश्मीरियों के बारे में बात कर रहा है, इसी वजह से कश्मीरियों की जान बच रही है। तो जिन देशों से बात कर रहा है पाकिस्तान, उनसे भारत पर हमला करा के देख ले।

यह बात अब्दुल्ला ने उस दिन कही जिस दिन जामिया मिलिया में “फ्री कश्मीर” के नारे दीवारों पर लिखे गए। इस अब्दुल्ला को पाकिस्तान चले जाना चाहिए लेकिन मुझे नहीं लगता पाकिस्तान इसे अपने मुल्क में रखना चाहेगा। इस हरामखोर को याद होना चाहिए कि 16 अगस्त, 1946 को “Direct Action Day” की कॉल देकर जिस सुहरावर्दी ने हजारों हिंदुओं को मरवा दिया था, वो पाकिस्तान का 1956 में प्रधानमंत्री तो बना लेकिन 13 महीने बाद गद्दारी के आरोप में बर्खास्त कर दिया अय्यूब खान ने और उसे पाकिस्तान में दफ़न के लिए 2 गज़ जमीन भी नसीब नहीं हुई और उसकी मौत बेरूत, लेबनान में हुई। तेरा भी यही हाल होगा एक बार पाकिस्तान जाकर तो देख।

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि हमारे पड़ोसी देश को देखो वह हर जगह कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है। वरना हमारी सरकार की नीयत ठीक नहीं है। अब फारूक अब्दुल्ला के इस बयान पर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रमुख मौलाना खालीद रशीद फिरंगी और मौलाना सैफ अब्बास ने पलटवार किया है।

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा, फारूक अब्दुल्ला कह रहे हैं, कि दिल्ली से हमें कोई उम्मीद नहीं है, हमारा तो पाकिस्तान ही है। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को दो टूक जवाब देते हुए कहा, जिस तरीके से पूर्व सीएम ने बोला है कि दिल्ली से कोई उम्मीद नहीं है, वह पूरी तरह गलत है। दिल्ली से उन्हें किस बात की उम्मीद नहीं है? अगर वे कहते हैं कि उनकी सुरक्षा पाकिस्तान करेगा तो मैं समझता हूं कि पता नहीं वे किस ख्याली दुनिया में हैं। मौलाना ने कहा, अगर फारूक अब्दुल्ला कहते कि हमें दिल्ली से उम्मीद थी कि ऑपरेशन सिंदूर के समय कश्मीर मिल जाएगा, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। तो यह बात समझ में आ सकती है। उन्होंने कहा, देश में हर किसी को यही उम्मीद है कि पाकिस्तान जो है वह हमें जो पाकिस्तान के अंदर हमारे कश्मीर का हिस्सा है, वह निश्चित रूप से मिलेगा और, अखंड भारत का सपना पूरा होगा।'

'वोट बैंक की राजनीति कर रहे अब्दुल्ला'
उन्होंने फारूक अब्दुल्ला पर सियासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा, 'वह कश्मीर में राजनीति कर रहे हैं और वह वोट बैंक की राजनीति को लेकर इस तरह से बयान दे रहे हैं। मैं समझता हूं कि जो पाकिस्तान दर-दर जाकर अपने लिए खुद सुरक्षा का जरिया ढूंढ रहा है और सुरक्षा के बारे में सोच रहा है, वह हमारा क्या कर सकता है? मैं समझता हूं कि अगर हिंदुस्तान आज चाह ले तो पूरा कश्मीर हमारे पास होगा।

ये हरामखोर अब्दुल्ला कश्मीरियों की जान बचाने के लिए पाकिस्तान को श्रेय दे रहा है लेकिन ये नहीं बोलता कि गुलाम कश्मीर में नरसंहार भी वो ही पाकिस्तान कर रहा है। बेशर्म गैंडे कश्मीरियों को बचाया हुआ है तो मोदी ने बचाया हुआ है और जो पाकिस्तान जाकर स्वाद चखना चाहते हैं वो गुलाम कश्मीर में चले जाएं।

चीन ने अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ कर शरारत करने की कोशिश की है जबकि ब्रिक्स सम्मेलन में जिनपिंग बड़ी बड़ी मीठी मीठी बातें करके गया था, जो कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं हुआ। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के बीच MOU यही तो है कि कांग्रेस के इशारे पर जब मर्जी चीन घुसपैठ करेगा जैसे पहले ढ़ोकलाम और लद्दाख में की। चीन की किसी भी शरारत के पीछे कांग्रेस का सीधा हाथ मान कर चलना चाहिए। ये शरारत भी तब  हुई है जब राहुल विंची वियतनाम गया हुआ है। 

कांग्रेस का काम बिना चुनाव सत्ता पाने का है और उसके लिए कांग्रेस के सारे नेता पागल हो रखे हैं। 
 
आज खड़गे को बोलते हुए शर्म नहीं आई कि “मोदी क्या मोदी का बाप भी जाएगा”। इस निशाचर की माँ और बहन को रजाकारों ने जिंदा जलाया था, काश इसे भी ढूंढ कर जला दिया होता तो आज ये भारत पर बोझ न बनता। ये रजाकारों द्वारा की गई इसकी माँ और बहन की निर्मम हत्या को भूल गया और इसका बेटा प्रियांक खड़गे RSS पर बैन लगाना चाहता है।

कांग्रेस के जब रिजीम चेंज के हथकंडे फेल हो गए तो कॉकरोचों और जामिया/JNU का सहारा ले लिया और चीन से हरकत करा दी। जिन माओवादियों का सफाया कर दिया मोदी सरकार के, उनके लिए आज JNU में नारे लगे है “लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी” और “फ्री उमर खालिद”। 

हिम्मत है तो अब “नक्सलबाड़ी” को जिन्दा करके दिखाओ, शुभेंदु अधिकारी बैंड बजा देगा।

अभी तो कांग्रेस की 1 नवंबर की रामलीला मैदान की रैली में भारी हिंसा करने की कोशिश की जाएगी। शायद इसलिए कि कल अमित शाह ने पुलिस मुख्यालय में कुछ रणनीति बनाई होगी। मजे की बात तो ये है कि कांग्रेस की कोई औकात नहीं है उत्तर प्रदेश में क्योंकि विधानसभा में उसके केवल 2 विधायक हैं और अखिलेश से गठबंधन के लिए 200 सीट मांग रही है कांग्रेस। है न मजाक की बात! 

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