UN अधिकारी क्या भारत के खिलाफ भौंकने वाले “कुत्तों” का गिरोह है?

सुभाष चन्द्र

वैसे अपने आप में किसी काम का नहीं है UNO क्योंकि किसी वैश्विक मामले को सुलझाने का इसमें दम नहीं है लेकिन लगता है इसके अधिकारी भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले “कुत्तों का गिरोह” बन गया है और भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए कुछ भारत विरोधी दलों को खाद पानी देने का काम कर रहे है। 

UN के 20 से अधिक स्वतंत्र कथित “मानवाधिकार विशेषज्ञों” (जो वास्तव में ‘दानवाधिकार विशेषज्ञ” है) ने स्पेशल रिपोर्टर्स सहित एक संयुक्त बयान जारी कर भारत में पिछले कुछ महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की ‘बार बार’ अत्यधिक प्रतिक्रिया पर चिंता जाहिर की है। 

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विदेश मंत्रालय ने UN में इन टिप्पणियों को एकतरफा, पक्षपात पूर्ण और असत्यापित बताया है। मानवाधिकार को सुनी सुनाई बातो के आधार पर किसी को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने का औजार नहीं बनाया जाना चाहिए।

इसके अलावा आज UNO की एक अन्य रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के नेतृत्व वाली डी कंपनी को “भारत स्थित” आपराधिक समूह बताया है। भारत ने इस पर भी UNO को फटकार मारी है कि ऐसे “factually Incorrect” बयानों से UN जैसी वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान होता है। भारत ने दोहराया कि दाऊद पाकिस्तान में रह रहा है ठीक उसी तरह जैसे पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को छुपाया हुआ था। भारत ने UN को अपना रिकॉर्ड सुधारने के लिए कहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी UN की टिप्पणियों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उनकी बातों में “विरोधाभास” है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यह उसका आंतरिक मामला है। अमेरिका में भी रोज प्रदर्शन होते हैं, इसलिए वह अन्य देश के घरेलू मामलों में टिप्पणी नहीं करेंगे।

ये UNO के कुत्ते ट्रंप के बयान पर नहीं बोलते जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान में 6 महीनों में 75,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई है। UN के कुत्तों की नज़र में वह “अत्यधिक बल प्रयोग” नहीं था।

UNO के कुत्ते फ्रांस, इटली, अल्बानिया और अन्य यूरोपीय देशों में हो रहे दंगों पर खामोश है। ये लोग क्या भारत को भी इस देशों की तरह आग के हवाले करना चाहते हैं और क्या भारत को दंगाइयों को खुला छोड़ देना चाहिए।

UNO के बयानों से साफ़ हो गया कि जो भारत में तख्तापलट के साजिश के तहत प्रदर्शन हुए उनके लिए पैसा UN की एजेंसियों ने ही दिया। अभी कोई बड़ी बात नहीं होगी अगर अभिजीत दिपके गैंग के लोगों और नेहा बोरा को Ramon Magsaysay Award दे दिए जाएं।

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