वाराणसी की शिक्षक विधान परिषद सीट पर भाजपा के हारने से ऐसा कोहराम मचा रहे हैं कुछ लोग कि UGC की वजह से अब मोदी योगी दोनों के लिए खतरे की घंटी बज गई

सुभाष चन्द्र

कमाल है यार लोगों की सोच पर। स्नातक विधान परिषद की 5 सीट थी जिनमें 2 सीट मेरठ और आगरा की सीट भाजपा ने जीती। शिक्षक विधान परिषद की 6 सीट थी जिनमें से 4 सीट (मेरठ, बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ और गोरखपुर) भाजपा ने जीती। समाजवादी पार्टी ने वाराणसी और आगरा की शिक्षक विधान परिषद की सीट जीत ली।

स्नातक/शिक्षक विधान परिषद की कुल 28 सीट में भाजपा ने अकेले 13 और भाजपा गठबंधन यानी NDA ने 16 सीट जीती हैं।

लेकिन कुछ लोगों के दिमाग का फितूर देखिए जो केवल एक वाराणसी की सीट पर फोकस कर हल्ला बोल रहे हैं कि UGC rules की वजह से वो सीट भाजपा हार गई और अब मोदी/ योगी के लिए खतरे की घंटी बज गई।

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मतलब एक वाराणसी की सीट पर UGC का प्रभाव रहा जो अन्य 4 शिक्षकों की सीट पर नहीं दिखाई दिया और बस एक सीट ने मोदी/योगी को खत्म कर दिया। इससे बड़ी बेवकूफी भरी अवधारणा हो नहीं सकती। UGC Rules का असर होता तो फिर स्नातक/शिक्षक सभी सीटों पर होता लेकिन वह नहीं हुआ।

एक सज्जन आज मुझसे Whatsapp पर इसी बात को लेकर भिड़ गए और यहां तक कह गए कि मोदी जी योगी को गिराना चाहते हैं। ऐसे बकबक  वालों को मैं आजकल बिना कुछ कहे अपनी मित्रता सूची से बाहर कर देता हूं और उन सज्जन को अपनी Whatsapp की Broadcast लिस्ट से बाहर कर दिया। लेकिन उन्हें इतना जरूर बता दिया कि आप ज्यादा खुश होने से पहले सोच लो कि आप एक ब्राह्मण हो और समाजवादी ब्राह्मणों को वेश्याओं से भी गिरा हुआ कहते हैं। कल को योगी को हटा दोगे तो तुम्हारी क्या गति होगी, कल्पना भी नहीं कर सकते।

कुछ दिन पहले मैंने एक प्रश्न पाठकों से पूछा था कि मोदी का हर बात पर विरोध करने वाले राहुल गांधी और विपक्ष ने, ऐसी कौन से नीति है जिसका विरोध नहीं किया। कई लोगों ने उत्तर में UGC Rules बताया।

अब सोचिए अगर तमाम विपक्ष UGC Rules का विरोध नहीं कर रहा तो उसका कारण क्या है? कारण स्पष्ट है कि ऐसा विरोध करने से SC/ST वोट बैंक का नुक़सान हो सकता है। फिर अकेले मोदी को क्यों टारगेट किया जाए? UGC Roll Back का शोर मचाने वालों में अधिकांश ऐसे लोग होंगे जो चुनाव के दिन छुट्टी पर निकल जाते होंगे। उनमे ऐसे भी बहुत होंगे जो राम मंदिर में चंदा चोरी पर तड़प रहे होंगे लेकिन उन्होंने राम मंदिर बनने पर ख़ुशी नहीं जताई क्योंकि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने के 3 महीने बाद भाजपा की सीट 303 से 240 कर दी।

इस संदर्भ में एक बात और याद कीजिए कि 2015 में मोहन भागवत जी ने केवल इतना कहा था कि Non-Political लोगों की एक समिति को आरक्षण पर पुनर्विचार करना चाहिए। वो समय बिहार विधानसभा चुनाव का था और क्योंकि भाजपा संघ से जुड़ा दल है, विपक्ष ने कोहराम मचा दिया कि भाजपा आरक्षण को ख़त्म करना चाहती है और इससे बिहार चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हुआ। 

UGC पर हायतौबा करने वाले क्या यही चाहते हैं कि मोदी SC/ST/OBC वोट बैंक की क़ुरबानी दे दे और आप वोट डालने भी न जाएं? ऐसे लोगों को यह बात भी नहीं भूलनी चाहिए कि राहुल गांधी का कहना है कि अगर उसकी सरकार बनती है तो प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण लागू कर दिया जाएगा। फिर सर पीटते रहना।

एक बात साफ़ समझ लेनी चाहिए कि आरक्षण अब “unavoidbale evil” बन चुका है जिसे कोई दल ख़त्म नहीं करना चाहता। आरक्षण का विरोध करने वाले चाहें तो चुनाव लड़ें, सरकार बनाएं और आरक्षण ख़त्म कर लें।

मोदी से आरक्षण ख़त्म करने की मांग करने से पहले राहुल गांधी और  विपक्षी दलों से भी बात करें कि क्या वो आरक्षण ख़त्म करने में मदद करेंगे। 

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