अभी तक विदेशी कहते थे कि महामूर्ख भारत में हो रहते हैं जो घुसपैठियों को बचाने घुसपैठियों को बचाने वाली पार्टियों और नेताओं की वकालत करते हैं लेकिन अमेरिका में हुए चुनावों से मालूम हुआ कि महामूर्ख भारत ही नहीं अमेरिका में भी रहते हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अमेरिका भी बहुत जल्द फ्रांस, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसा ज्वलंत माहौल देखेगा,जिसे डोनाल्ड ट्रम्प बचाए हुए थे। लेकिन एक बात जरूर सामने आयी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधियों को परमपिता परमेश्वर मात दे रहे हैं। चाहे वह भारत में हो या दुनियां के किसी भी कोने में।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
ट्रंप की हार पर अमेरिका के लोग भी खुश है और भारत में भी लोग खुश हैं लेकिन एक खतरे से अमेरिकी अनजान हैं कि Democrats मुस्लिमों को सिर चढाने वाली वैसी ही पार्टी है जैसे भारत की कांग्रेस और अन्य सेक्युलर पार्टियां। Democrats के पास वैसे तो अभी हुकूमत नहीं है अलबत्ता दोनों सदनों में बहुमत है लेकिन यदि वो सत्ता में आते है तो मुस्लिमों की एंट्री अमेरिका में बेतहाशा बढ़ेगी। अमेरिकी मौलाना बहुत हैं जो अमेरिका को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की बात करते हैं। और Democrats के सत्ता में आने के बाद अमेरिका भी फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों की तरह जल उठेगा। Democrats की सत्ता में अमेरिका का इस्लामीकरण तेजी से बढ़ेगा।
साभार सोशल मीडिया
अमेरिका में मुस्लिम जनसंख्या का खेल देखिए। 1970 में अमेरिका में मुस्लिम 1 से 2 लाख की बीच थे जो 1990 में बढ़ कर 25 लाख हो गए और आज 2026 में उनकी संख्या 55 लाख है। अमेरिकी अभी इस्लामिक खतरे से अनभिज्ञ हैं, तभी मिशिगन से कोई मुस्लिम पहली बार सीनेट के लिए चुना गया है। मिशिगन से ही कट्टरपंथी मुस्लिम राशिदा तैलब और मिनिसोटा से इल्हान ओमर जीती है। ऐसे ही एक मिस्र-अमेरिकी सर्जन एडम हमावी(जिसने गाज़ा में एक डॉक्टर के रूप में स्वेच्छा से काम किया) न्यू जेरसी से पहला मुस्लिम कांग्रेस का सदस्य बना है। न्यूयॉर्क का मेयर पहले ही मुस्लिम ममदानी बन चुका है।
इज़रायल में भी अरब पार्टीज के लिए मुस्लिमों ने एकजुट वोट किया और 19 सांसद चुने गए और अब सत्ता की चाबी उनके हाथ में। नेतन्याहू को डर है कि इज़रायल को इस्लामिक देश बनाने की साजिश चल रही है। मुख्य विपक्षी नेता भी इज़रायल को यहूदी राष्ट बनाए रखने की बात कर रहे हैं लेकिन नेतन्याहू को किसी कीमत पर हटाना चाहते हैं जिसके लिए उन्हें अरब दलों का समर्थन लेना पड़ेगा जो बहुत घातक साबित होगा।
कुछ लोग बहुत खुश हैं कि 6 भारतीय अमेरिकी भी कांग्रेस के लिए चुने गए हैं जबकि उन 6 में 3 तो भारत के कट्टर दुश्मन हैं। वो हैं Ami Bora, RO Khanna, Pramila Jayapal. लेकिन सीनेट के लिए एक भी भारतीय अमेरिकी नहीं चुना गया है।
2025 में ट्रंप ने मोदी के लिए कहा था “I don't want to destroy his political career”. इसका मतलब यह भी निकलता है कि वो चाहे तो ऐसा कर सकता है। लेकिन फिर मोदी की भूरी भूरी प्रशंसा भी की थी।
अब दो साल बेशक ट्रंप राष्ट्रपति रहेंगे लेकिन उन्हें हर काम सदनों से पारित कराने के लिए Democrats के आगे झुकना पड़ेगा। कुछ लोगों का कहना है वो Lame Duck President हो गए। मुझे नहीं पता अब वो भारत के साथ ट्रेड डील कर भी सकेंगे या नहीं लेकिन ट्रेड डील के लिए अमेरिकी संसद की अनुमति की जरूरत नहीं है।
जो होता है अच्छा होता है। हो सकता है अगले 2 वर्ष के कार्यकाल में ट्रंप Republican Party के लिए कुछ करिश्मा कर दें या स्वयं जनता को समझ आ जाए कि Democrats को सत्ता देना अमेरिका के हित में नहीं है।


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