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राहुल गांधी के ‘मिलने ना देने’ के एक और ‘झूठ’ का पर्दाफाश


लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शायद लगा कि उनका कद इतना बड़ा हो गया है कि अब हर विदेशी मेहमान को उन्हें ‘सलाम’ ठोकना चाहिए। और जब कुछ विदेशी राष्ट्राध्यक्षों ने उनसे मुलाकात नहीं की, तो उन्होंने सीधे मोदी सरकार पर ‘मिलने ना देने’ का आरोप लगा दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत पहुंचने से ठीक पहले राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर एक गंभीर और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार विदेश से आने वाले राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों को नेता प्रतिपक्ष से न मिलने की ‘सलाह’ देती है। राहुल गांधी ने कहा कि यह एक पुरानी परंपरा है कि विदेशी मेहमान विपक्ष के नेता से मिलते हैं, लेकिन मोदी सरकार इस परंपरा को तोड़ रही है और चाहती है कि विपक्ष को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नजरअंदाज किया जाए।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी, कांग्रेस और इसके समर्थक दलों का जो अंधभक्त बन राहुल ही नहीं गाँधी परिवार का रहे हैं, क्या किसी ने गिरिवान में झाँकने की कोशिश की कि किस तरह देश की संवैधानिक संस्थानों पर हमले, विदेशों में जाकर कहना भारत में लोकतंत्र खतरे में हैं, संविधान को बदलने की कोशिश की जा रही है, क्या देशहित में है? क्या भारत की इकोनॉमी dead economy है? क्या यह भारत विरोधी नहीं। राहुल को LoP के मानदंडों का पालन करना चाहिए नाकि उपद्रवियों की भाषा बोले कि मोदी को लोग डंडों से मारेंगे। क्या ये सब?         

उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि तब ऐसा कभी नहीं हुआ। राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बयान का सपोर्ट करते हुए कहा कि सरकार प्रोटोकॉल फॉलो नहीं कर रही।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के दावा से ऐसा लगता है जैसे विदेश मंत्रालय बाहर से आने वाले डेलिगेट्स के कान में फुसफुसा कर कहता है कि देखो, उस LoP से मत मिलना! यह इल्जाम किसी राजनीतिक नौसिखिए की तरह था, लेकिन जब सरकारी सूत्र और बीजेपी ने हकीकत सामने रखी, तो राहुल गांधी का सारा ड्रामा और ज्ञान धड़ाम हो गया। सरकारी सूत्रों के अनुसार विदेशी डेलिगेशन अक्सर व्यस्त एजेंडे के साथ भारत आते हैं। वे किससे मिलना चाहते हैं और किसे नजरअंदाज करते हैं, यह उनका निजी फैसला होता है। ऐसे में बीजेपी प्रवक्ता ने जो तंज कसा है, वह राहुल गांधी के राजनीतिक कद पर सीधा वार है कि “अगर कोई विदेशी मेहमान राहुल गांधी से नहीं मिलना चाहता, तो इसमें सरकार क्या कर सकती है?”

चर्चा में बने रहने और अपनी वैल्यू बढ़ाने के लिए राहुल गांधी अक्सर सरकार पर झूठा इल्जाम लगाते रहते हैं। लेकिन उनके दावों पर एक नजर डाली जाए तो एक अलग ही तस्वीर नजर आती है। हकीकत एकदम उलट है और राहुल का रोना-धोना बिल्कुल बेबुनियाद है। मजे की बात यह कि LOP बनने के बाद खुद राहुल गांधी से कई बड़े विदेशी नेता मिल चुके हैं. फिर भी कहते घूम रहे हैं कि ‘मिलने नहीं देते’।

कांग्रेस के ‘युवराज’ राहुल गांधी झूठों के सरताज, झूठ की लंबी होती जा रही फेहरिस्त

भारत और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए विदेशी ताकतें तरह-तरह के नैरेटिव बनाती हैं। बिना किसी तर्क के ऐसे नैरेटिव्स को आगे बढ़ाने में काम कांग्रेस के युवराज और सांसद राहुल गांधी करते हैं। इसलिए उनके झूठ की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि यदि वे खुद इसे देख लें तो शर्मसार हो जाएं। गांधी परिवार में झूठों के सरदार राहुल गांधी तो झूठ बोलने में नित-नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। यहां तक कि अपने झूठ और गलतबयानी के लिए राहुल गांधी को कोर्ट तक से माफी मांगनी पड़ी है। लेकिन झूठ बोलने की आदत है कि जाती ही नहीं। किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि झूठ दर झूठ बोले हैं तुमने सनम, सोचोगे तो दिल भी दहल जाएगा…राहुल गांधी के झूठ के कारोबार पर यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती हैं। क्योंकि वे एक के बाद एक कितने झूठ बोल रहे हैं कि इसका अंदाजा खुद उन्हें भी नहीं हैं। राहुल गांधी ने तो चीन से लेकर पाकिस्तान तक, सेना से लेकर राफेल तक और ईवीएम से लेकर वोट चोरी तक इतने झूठ बोले हैं कि खुद झूठ को ही अपने-आपसे शर्म आ रही है।