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भारत-वियतनाम रिश्तों को मिली नई ऊंचाई: प्रधानमंत्री मोदी- तो लाम की बैठक में रणनीतिक साझेदारी


नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आज 6 मई को कूटनीति की एक नई इबारत लिखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत ने भारत-वियतनाम रिश्तों को एक नया आयाम दे दिया। ज्वाइंट प्रेस मीट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के महज एक महीने के भीतर तो लाम का भारत दौरा इस बात का संकेत है कि वे इस साझेदारी को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति तो लाम का स्वागत करते हुए उनके बोधगया दौरे का विशेष जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच केवल व्यापार का ही नहीं, बल्कि आत्मा और संस्कृति का भी रिश्ता है। वियतनाम की 15 प्रतिशत आबादी ने पिछले साल भारत से गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन किए थे, जो यह बताता है कि बुद्ध के विचार हमें कितनी मजबूती से जोड़ते हैं।

अब इस विरासत को डिजिटल युग में ले जाने की तैयारी है। भारत वियतनाम की प्राचीन चम्पा सभ्यता के मंदिरों का जीर्णोद्धार तो कर ही रहा है, साथ ही अब वहां की प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts) को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल धरोहर को सहेजने की मोदी सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है।

एक दशक पहले पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों देश ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनर’ बने थे। लेकिन आज इस रिश्ते को एक कदम और ऊपर ले जाते हुए ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का नाम दिया गया है। इससे साफ है कि अब सहयोग सिर्फ बातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिफेंस, सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे गंभीर क्षेत्रों में दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे।

व्यापार के मोर्चे पर दोनों देशों ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं। पिछले 10 सालों में व्यापार दोगुना होकर 16 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जिसे 2030 तक 25 बिलियन डॉलर करने का टारगेट है। जल्द ही वियतनाम के लोग भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेंगे, जबकि भारतीय बाजारों में वियतनाम के डूरियन और पोमेलो जैसे फल देखने को मिलेंगे।

इतना ही नहीं, अब वियतनाम में भारतीय दवाओं की पहुंच और आसान होगी। डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का UPI और वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम जल्द ही आपस में जुड़ने जा रहे हैं। यानी अब पैसे का लेन-देन चुटकियों में होगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को पंख लगेंगे।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को लेकर दोनों देशों का नजरिया एक जैसा है। पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए वियतनाम का आभार जताया। उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एक साथ हैं। रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग न केवल भारत और वियतनाम के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने बुद्ध की एक सीख का जिक्र करते हुए अपनी बात खत्म की- “यदि आप किसी और के लिए दीप जलाते हैं, तो वह आपके अपने मार्ग को भी प्रकाशमान करता है।” इसी भावना के साथ भारत और वियतनाम एक-दूसरे की तरक्की में मददगार बनेंगे। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद ये दोनों देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं और अब इनका लक्ष्य मिलकर ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के सपने को सच करना है।