Showing posts with label #Parliamentary Delimitation Bill. Show all posts
Showing posts with label #Parliamentary Delimitation Bill. Show all posts

चंद्रशेखर हिम्मत है तो ईसाईओं और मुसलमानों को जातियों में विभाजित करके दिखाओ


हिन्दुओं को जातियों में बाँटने वाले किसी भी जीवट नेता में मुस्लिमों को जातियों में बाँटने की हिम्मत है? किसी ने माँ का दूध नहीं पिया। हिन्दुओं को विभाजित करने में इसलिए सफल हो जाते हैं क्योंकि हिन्दू पागलों की तरह इनकी भड़काऊ चालों में आ जाता है जबकि मुसलमान नहीं। इन विघटनकारी नेताओं को वोट देने वालों की सोंच पर हैरानी होती है। इन कालनेमि हिन्दू नेताओं को वोट देने वाले हिन्दुओं देश को अंधकार मत लेकर जाओ। योगी आदित्यनाथ की बात मत भूलो "बंटे तो कटे"
। जिन हिन्दुओं ने कटने की कसम खा ली है जरूर इन तुष्टिकरण करने वालो को वोट दो, फिर मत रोना, सरकार से मदद मत मांगना और जब तुम कट रहे होंगे इन नेताओं में से कोई तुम्हे बचाने आगे नहीं आएगा उल्टे दोषियों को बचाने तुम्हे ही दोषी बताएंगे। उन्हें भटका हुआ, गरीब, मज़लूम, दिमाग से पागल आदि कहने के अलावा दुष्प्रचार करेंगे कि मुसलमान होने की वजह से उन पर जुल्म किया जा रहा है।    

हिन्दुओं को जातियों में विभाजित करने वाले नेताओं हिन्दुओं में चाहे जितनी भी जातियां हो फिर भी जाते सब एक ही मन्दिर और शमशान में जबकि ईसाई और मुस्लिमों में सब जातियों के अलग चर्च, मस्जिद और कब्रिस्तान हैं। कोई दूसरे के चर्च या मस्जिद में नहीं जा सकता और न ही कब्रिस्तान में अपना मुर्दा दफ़न कर सकता है।        

संसद में परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। चंद्रशेखर ने दलितों के लिए ‘सेपरेट इलेक्टोरेट’ (अलग निर्वाचक मंडल) की माँग उठाई।

इसका सीधा मतलब यह है कि देश में ऐसी सीटें बनाई जाएँ जहाँ केवल दलित उम्मीदवार खड़े हों और उन्हें वोट देने का अधिकार भी सिर्फ दलित मतदाताओं को ही हो। इस माँग के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर का Video वायरल हो गया है और आलोचक इसकी तुलना 1916 में मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा की गई मुस्लिम निर्वाचन क्षेत्र की माँग से कर रहे हैं।

क्या है चंद्रशेखर की माँग और क्यों मचा है बवाल?

संसद में अपनी बात रखते हुए चंद्रशेखर आजाद ने दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में दलित प्रतिनिधि अपनी कौम के प्रति कम और अपनी राजनीतिक पार्टियों के प्रति ज्यादा वफादार रहते हैं।

चंद्रशेखर ने डॉ अंबेडकर और कांशीराम की ‘चमचा युग’ अवधारणा का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जब तक दलितों को अपना प्रतिनिधि खुद चुनने का स्वतंत्र अधिकार (सेपरेट इलेक्टोरेट) नहीं मिलता, उनका असली सशक्तिकरण नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘पूना पैक्ट’ के कारण दलितों की स्वतंत्र राजनीति की आवाज छीन ली गई थी।

जिन्ना के मॉडल और विभाजन की आशंका

चंद्रशेखर की इस माँग पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। जानकारों का कहना है कि इसी तरह की माँग 1916 में जिन्ना ने मुस्लिमों के लिए की थी, जिसकी परिणति अंततः देश के विभाजन के रूप में हुई। आजाद भारत के संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर इस व्यवस्था को ठुकराया था क्योंकि यह समाज को जोड़ने के बजाय धर्म और जाति के आधार पर राजनीतिक रूप से तोड़ती है। आलोचकों का मानना है कि केवल एक विशेष वर्ग को वोट का अधिकार देना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और यह देश को एक नए बँटवारे की ओर धकेलने जैसी ‘देशद्रोही’ सोच है।

दलित और मुस्लिम महिलाओं के हक की बात

वायरल वीडियो में चंद्रशेखर ने महिला आरक्षण के भीतर भी आरक्षण की बात की। उन्होंने सवाल उठाया कि 33% आरक्षण में एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा (कोटा भीतर कोटा) क्यों नहीं है? उन्होंने कहा कि बिना इसके इन वर्गों की सबसे वंचित महिलाएँ कभी संसद तक नहीं पहुँच पाएँगी। उनके भाषण में दलित और मुस्लिम एकजुटता का सुर साफ दिखाई दिया, जिसे लेकर अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह न्याय की माँग है या तुष्टीकरण और समाज को बाँटने वाली राजनीति।