चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो (Vivo) को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (7 जुलाई 2022) को बड़ा खुलासा किया। ईडी ने बताया कि वीवो ने भारत में टैक्स चोरी के लिए 62,476 करोड़ रुपए ‘गैरकानूनी तरीके से’ चीन को भेज दिया। यह रकम वीवो के कुल टर्नओवर 1,25,185 करोड़ रुपए का लगभग आधा है। बताया जा रहा है कि यह रकम 2017 से 2021 के बीच भेजी गई। ईडी ने चीनी कंपनियों और कई भारतीय फर्मों से जुड़े एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले को सुलझाने का दावा किया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई भारत में 23 कंपनियाँ बनाने में चीन के तीन नागरिकों के शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद की है। इनमें से एक चीनी नागरिक की पहचान वीवो के पूर्व निदेशक बिन लाऊ के रूप में हुई है, जो अप्रैल 2018 में देश छोड़कर चला गया था। अन्य दो चीनी नागरिकों ने साल 2021 में भारत छोड़ा था। इन कंपनियों के गठन में नितिन गर्ग नाम के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने भी मदद की थी।
News18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने एक बयान में कहा, “इन 23 कंपनियों ने वीवो इंडिया को भारी मात्रा में फंड ट्रांसफर किया है। इसके अलावा, 1,25,185 करोड़ रुपए की कुल टर्नओवर में से, वीवो इंडिया ने 62,476 करोड़ रुपए (टर्नओवर का लगभग 50 प्रतिशत) भारत से बाहर भेज दिया। यह रकम मुख्य रूप से चीन भेजी गई। वीवो इंडिया ने भारत में टैक्स भुगतान से बचने के लिए यहाँ गठित कंपनियों में भारी घाटा दिखाने के नाम पर यह राशि विदेश भेजी है।”
VIVO ने 62,000 करोड़ रुपए 'चीन' भेज दिए और भारत सरकार को पता भी नहीं चलता, कैसे? : रवीश कुमार pic.twitter.com/fvR24FzKtG
— Bolta Hindustan (@BoltaHindustan) July 8, 2022
देश का पैसा पहुंच रहा था चीन।
— Panchjanya (@epanchjanya) July 7, 2022
ED का VIVO पर छापा , 465 करोड़ रुपए समेत जब्त किया 2 किलो सोना।
इस कार्रवाई को चीनी कंपनियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और उनके लिए काम करने वाले भारतीय एजेंटों पर नकेल कसने के सरकार के प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। कथित तौर पर ये कंपनियाँ यहाँ अपने व्यवसाय के दौरान टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे बड़े वित्तीय अपराधों में शामिल हैं।
इससे पहले, मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को प्रवर्तन निदेशालय ने चीनी मोबाइल कंपनी वीवो से जुड़े देश भर में 44 स्थानों पर छापे मारे थे। चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी के खिलाफ मनी-लॉन्ड्रिंग जाँच में तलाशी ली गई थी। इस तलाशी अभियान के बाद उनके 66 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट सहित 465 करोड़ रुपए के 119 बैंक खातों को जब्त कर लिया गया। इसके अलावा 73 लाख रुपए की नकदी और दो किलोग्राम सोने की छड़ें भी जब्त की गई।
प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी आरोप लगाया है कि वीवो इंडिया के कर्मचारियों ने उनकी तलाशी अभियान के दौरान सहयोग नहीं किया और फरार होने एवं डिजिटल उपकरणों को छिपाने की कोशिश भी की। हालाँकि, एजेंसी की तलाशी टीमें इन डिजिटल सूचनाओं को हासिल करने में सफल रहीं। ईडी ने वीवो की एक सहयोगी कंपनी GPICPL के खिलाफ दिल्ली पुलिस की FIR के आधार पर 3 फरवरी को 2022 अपनी FIR दर्ज की थी। इस कंपनी और उसके शेयरधारकों पर फर्जी पहचान पत्र लगाने एवं गलत पता देने का आरोप था। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने एक पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि कंपनी के दिसंबर 2014 के रजिस्ट्रेशन के दौरान, GPICPL और उसके शेयरधारकों ने झूठे पते और जाली पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया।
ईडी ने कहा, “आरोप (मंत्रालय द्वारा लगाए गए) सही पाए गए क्योंकि जाँच से पता चला कि GPICPL के डायरेक्टरों द्वारा बताए गए पते उनके नहीं, बल्कि सरकारी भवन और एक वरिष्ठ अधिकारी का घर था।” इसमें कहा गया है कि वीवो मोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड को 1 अगस्त 2014 को हांगकांग स्थित कंपनी मल्टी एकॉर्ड लिमिटेड की सहायक कंपनी के रूप में शामिल किया गया था।
