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मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर चीन-अमेरिका को पछाड़ भारत ने आर्थिक समानता का रचा इतिहास


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी विजन से पिछले एक दशक में लागू हुईं सरकारी योजनाओं की बदौलत भारत ने आर्थिक समानता के मामले में अमेरिका और चीन को भी पछाड़ दिया है। देश में इनकम इक्वालिटी जी-7 और जी-20 देशों से भी बेहतर है। विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक के बीच भारत में असमानता में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर चौथा सबसे अधिक समानता वाला देश बन गया है। इस वैश्विक उपलब्धि के पीछे मोदी सरकार की योजनाएं, नीतियां और जनहितकारी निर्णय हैं। रिपोर्ट में असमानता में कमी का श्रेय पिछले एक दशक के दौरान अपनाई गई विभिन्न सरकारी योजनाओं को दिया है। समानता की माप करने वाले ‘गिनी इंडेक्स’ में भारत ने पहली बार चौथा स्थान हासिल किया है। गिनी इंडेक्स किसी देश की आबादी में आय वितरण को मापकर समानता का स्तर निर्धारित करता है। गिनी इंडेक्स में भारत की अच्छी रैंकिंग कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह मोदी सरकार की लगातार गरीब कल्याण की योजनाओं से गरीबी कम करने में मिली सफलता का नतीजा है।

 आर्थिक समानता पर वर्ल्ड बैंक ने भारत की ताकत का लोहा माना

पहले अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अब वर्ल्ड बैंक ने भारत की ताकत का लोहा माना है। मोदी सरकार ने एक खास मुकाम हासिल करते हुए चीन-अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस सफलता का प्रमुख आधार बनीं केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाएं बनी हैं। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिनी इंडेक्स अब 25.5 है। इसके साथ ही भारत दुनिया का चौथा सबसे समान देश बन गया है। इस लिस्ट में स्लोवाक रिपब्लिक, स्लोवेनिया और बेलारूस पहले तीन स्थान पर हैं। विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अत्यधिक गरीबी में तेज गिरावट के अतिरिक्त है, जो 2011-12 में 16.2 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 2.3 प्रतिशत हो गई है। गिनी इंडेक्स को 1912 में इतालवी सांख्यिकीविद् कोराडो गिनी द्वारा विकसित किया गया था।
                                                                                                                                             साभार 
कल्याणकारी नीतियों से भारत की स्थिति कई विकसित देशों से भी बेहतर
दरअसल, गिनी इंडेक्स यह समझने में मदद करता है कि किसी देश में घरों या व्यक्तियों के बीच आय और संपत्ति किस तरह समान रूप से वितरित की जाती है। इसका मान शून्य से 100 तक होता है। शून्य स्कोर का मतलब है पूर्ण समानता, जबकि 100 स्कोर का मतलब है कि एक व्यक्ति के पास सारी आय और संपत्ति है। इसलिए इसका मतलब है पूर्ण असमानता। इसलिए गिनी इंडेक्स एक तरीका है, जिससे पता चलता है कि किसी देश में आय, संपत्ति या उपभोग लोगों के बीच कितनी बराबरी से बंटा हुआ है। भारत का स्कोर चीन (35.7) , अमेरिका (41.8), इटली (33.6), यूके (32.4) और फ्रांस (31.2) से बहुत कम है। देश में आर्थिक समानता का स्तर कई विकसित देशों से भी बेहतर है।
गिनी इंडेक्स में भारत की अच्छी रैंकिंग कोई संयोग नहीं
भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ समान समाज में से एक है। गिनी इंडेक्स में भारत की अच्छी रैंकिंग कोई संयोग नहीं है। यह मोदी सरकार की लगातार गरीब कल्याण की योजनाओं से गरीबी कम करने में मिली सफलता का नतीजा है। काबिले जिक्र है कि पिछले दस सालों में 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 2011-12 में 16.2% थी। 2022-23 में यह घटकर 2.3% हो गई। यह आंकड़ा 2.15 डॉलर प्रति दिन से कम कमाने वाले लोगों का है। वर्ल्ड बैंक ने गरीबी की नई सीमा 3 डॉलर प्रति दिन तय की है।
मोदी के विजन और सरकारी योजनाओं ने कर दिया कमाल
भारत की इस सफलता के पीछे मोदी सरकार द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाएं हैं। इन्हीं योजनाओं के दम पर भारत ने आय में समानता लाने की ओर मजबूती से कदम बढ़ाया है। इन योजनाओं में पीएम जन धन योजना, DBT, आयुष्मान भारत, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और पीएम विश्वकर्मा योजना शामिल हैं। जन धन योजना और डीबीटी जैसी योजनाओं से देश के आम नागरिक बैंकिंग सिस्टम से जुड़े हैं। वहीं आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं ने गरीब लोगों को मुफ्त इलाज, पक्के घर जैसी आधारभूत सुविधाएं दी हैं। इसके अलावा स्टैंड अप इंडिया, पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं से लोग अपना खुद का बिजनेस शुरू करने में कामयाबी हासिल कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने भी बांधे भारत की तारीफों के पुल
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके अनुसार पिछले 11 साल में भारत की सामाजिक सुरक्षा काफी बेहतर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 2019 में जहां सिर्फ 19 फीसदी कवरेज था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 64.3 प्रतिशत हो गया है। भारत ने दुनिया में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि को हासिल करने में भी केंद्र द्वारा चलाई जा रही सरकारी योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई है। किसानों के लिए भी पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम जैसी योजनाएं चलाकर उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर की जा रही है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट में गिनी इंडेक्स के प्रमुख बिंदु
• गिनी इंडेक्स जितना अधिक होगा, कोई देश उतना ही असमान होगा। भारत का स्कोर चीन (35.7) और अमेरिका (41.8) से बहुत कम है। मोदी सरकार ने इस उपलब्धि का श्रेय पिछले एक दशक में गरीबी के स्तर में तेजी से आई कमी को दिया है।
• विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में करोड़ों भारतीयों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला गया है। प्रतिदिन 2.15 डालर से कम पर जीवनयापन करना जून 2025 तक अत्यधिक गरीबी की वैश्विक सीमा थी।
• भारत में ऐसे लोगों की हिस्सेदारी 2011-12 में 16.2 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में केवल 2.3 प्रतिशत रह गई। यह बदलाव दिखाता है कि भारत ने आर्थिक विकास को सामाजिक समानता के साथ जोड़ने में लगातार प्रगति की है।
• आय समानता की दिशा में भारत की प्रगति को कई सरकारी योजनाओं का समर्थन प्राप्त है। इन योजनाओं का उद्देश्य वित्तीय पहुंच में सुधार करना, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाना और कमजोर तबके का समर्थन करना है।
भारत की आर्थिक समानता की सफलता का कारण क्या है?
सामाजिक कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि विश्व बैंक की ये रिपोर्ट दिखाती है कि भारत का विकास अपने लोगों के बीच अधिक निष्पक्ष रूप से कैसे साझा किया जा रहा है। केंद्र की एनडीए सरकार ने गरीबी को कम करने, वित्तीय पहुंच बढ़ाने और जरूरतमंदों को सीधे कल्याण सहायता देने पर ध्यान केंद्रित किया है। विश्व बैंक के स्प्रिंग 2025 पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार, 2011 से 2023 तक करोड़ों भारतीय अत्यधिक गरीबी से बाहर निकल आए हैं। 2.15 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन की वैश्विक गरीबी रेखा के आधार पर अत्यधिक गरीबी दर 16.2 फीसदी से घटकर मात्र 2.3 प्रतिशत रह गई है।