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पाकिस्तान : मरने के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं अहमदी, ‘कुत्ता’ लिख कर कब्रों को किया तहस-नहस

       पाकिस्तान में अहमदी समुदाय की कई कब्रों के साथ की गई बेअदबी (प्रतीकात्मक फोटो साभार: ईटीवी)
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से अल्पसंख्यक अहमदी समुदाय की कई कब्रों के साथ बेअदबी का मामला सामने आया है। कट्टरपंथियों ने अहमदियों की कब्रों पर अपशब्द लिखकर उन्हें नुकसान पहुँचाया। अल्पसंख्यक समुदाय के प्रवक्ता ने मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को यह जानकारी दी। जमात अहमदिया पाकिस्तान के अधिकारी अमीर महमूद ने बताया कि लाहौर से लगभग 100 किलोमीटर दूर हाफिजाबाद जिले के प्रेम कोट कब्रिस्तान में कब्रों के पत्थरों पर अपशब्द लिखा गया था।

उन्होंने कहा कि कब्रों को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों ने उस पर ‘अहमदी डॉग‘ (Ahmadi Dog) भी लिखा है, जो उनके परिवार वालों के लिए बेहद तकलीफदेह है। महमूद ने अल्पसंख्यक समुदाय की कब्रों को अपवित्र करने की घटना में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने की माँग की है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान में रह रहे अहमदी मरने के बाद भी अपनी कब्रों में सुरक्षित नहीं हैं।

पाकिस्तान में यह कोई पहला मामला नहीं है, जब अल्पसंख्य समुदाय के साथ दुर्व्यवहार किया गया हो। पहले भी पंजाब प्रांत के अन्य अहमदी कब्रिस्तानों में इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। लेकिन अभी तक इन मामलों में एक भी अपराधी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और ना ही उन पर कोई मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस साल अगस्त में भी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अहमदी समुदाय की 16 कब्रों को नुकसान पहुँचाने का मामला सामने आया था। बताया गया था कि लाहौर से लगभग 150 किलोमीटर दूर फैसलाबाद जिले के चक 203 आरबी मनावाला में एक कब्रिस्तान में कट्टरपंथियों ने कब्रों पर इस्लामी प्रतीकों का उपयोग करने के लिए उसे नुकसान पहुँचाया था।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय अहमदी बेहद कमजोर हैं। यही कारण के वहाँ के इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें अक्सर निशाना बनाते हैं। पाकिस्तानी संसद ने 1974 में अहमदी समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। एक दशक बाद उन्हें अपने आप को मुस्लिम कहने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया था। यही नहीं उन्हें हज पर सऊदी अरब जाने से भी रोक दिया गया था। वहीं, पूर्व तानाशाह जनरल जिया-उल हक ने अहमदियों के लिए खुद को मुस्लिम कहने को एक दंडनीय अपराध बना दिया था। पाकिस्तान में हिंदुओं, ईसाई के अलावा अहमदी, सिख और पारसी भी अल्पसंख्यक हैं।