दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को लेकर देश-दुनिया में काफी ढिंढोरा पीटते रहते हैं। हर जगह दिल्ली शिक्षा मॉडल की बात करते हैं। लेकिन पिछले आठ साल में केजरीवाल ने एक भी नया स्कूल नहीं खोला है। जबकि शराब के ठेके खोलने में उनकी सरकार ने जो फुर्ती दिखाई वह सबके सामने है। आठ साल पहले जब केजरीवाल ने दिल्ली की सत्ता संभाली थी तब उन्होंने कहा था कि 500 नए सरकारी स्कूलों का निर्माण करना है। लेकिन हैरानी की बात है कि पिछले आठ साल में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने स्कूलों के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार को 13 भूमि आवंटित की है, लेकिन अब तक एक भी स्कूल नहीं बनाया गया।
वहीं दूसरी तरफ वह पुराने स्कूलों का रंगरोगन और कुछ क्लास बढ़ाकर दिल्ली में शिक्षा क्रांति की बात करते हैं। दिल्ली के शिक्षा का स्तर इस कदर गिर चुका है पिछले साल दसवीं कक्षा की रैंकिंग में दिल्ली टॉप 10 से बाहर हो गई। दिल्ली को 15वें नंबर से संतोष करना पड़ा। अब ऐसे में उनसे पूछा जाना चाहिए कि जब 13 जगह जमीन दी गई थी तो स्कूलों का निर्माण क्यों नहीं किया गया?
New York Times ने दिल्ली स्कूलों की इतनी प्रशंसा प्रकाशित करने से पूर्व जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की, यदि नहीं क्यों? किस आधार पर चंद रुपयों के लालच में जनता गुमराह किया? हैरानी तो इस बात को लेकर है कि किसी भी भारतीय पार्टी ने झूठी खबर छापने और छपवाने के लिए मुकदमा दायर क्यों नहीं किया? क्या सभी पार्टियां जनता को पागल बना रही हैं?
दिल्ली के वर्ल्ड क्लास स्कूल में टीचर ही नही आते हैं @ArvindKejriwal जी? देखिए बच्चों ने बताई सच्चाई.pic.twitter.com/FOxJ5tc1UW
— Rahul Kumar Valmiki (@irahulvalmiki) September 19, 2022
डीडीए ने 13 जगह भूमि आवंटित की, एक पर भी स्कूल नहीं बना
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने पिछले 8 वर्षों में शहर में स्कूलों के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार को 13 जगह भूमि आवंटित की, लेकिन अब तक इन पर एक भी स्कूल नहीं बनाया गया। जानकारी के अनुसार, उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने हाल ही में एक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकृष्ट किया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 1,600 और 8,000 वर्ग मीटर के बीच के 13 भूखंडों को डीडीए द्वारा दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को आवंटित किया गया था। वर्ष 2015 और अगस्त 2022 के बीच 13 भूखंड आवंटित किए गए। इन भूखंडों में सबसे छोटा, 1,600 वर्ग मीटर में फैला हुआ है, जो उत्तरी दिल्ली में शाही ईदगाह में स्थित है और सबसे बड़ा वसंत कुंज में 8,093.72 वर्ग मीटर है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सभी भूखंड वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के निर्माण के लिए आवंटित किए गए थे, लेकिन इनमें से एक भी काम शुरू नहीं हो पाया।
गजब बेशर्मी लेकर घूम रहे हो @ArvindKejriwal
— Lalan Kumar (@LalanKumarINC) September 21, 2022
जी, थोड़ी तो शर्म कर लेते...!
आखिर बच्चे कैसे "खूब पढ़ेंगे और खूब बढ़ेंगे" बोलिए जवाब दीजिए..!
जब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के 84% पद और टीचर के 33% पद खाली हैं।
यही है तुम्हारा "गोलमाल शिक्षा मॉडल"..! pic.twitter.com/rBAf5DiOp6
वर्ष 2015 में गीता कालोनी और वसंत कुंज में आवंटित किए गए थे दो प्लाट
डीडीए ने पहला प्लॉट 3 जुलाई 2015 को गीता कॉलोनी में और दूसरा उसी साल 15 अक्टूबर को वसंत कुंज में आवंटित किया गया था। आने वाले वर्षों में दो और भूखंड आवंटित किए गए – एक 18 दिसंबर, 2018 को शाही ईदगाह में और 3 मार्च, 2021 को रोहिणी में। इसके अलावा शालीमार बाग, रोहिणी और नरेला जैसे क्षेत्रों में भूमि आवंटित किए गए थे। वर्ष 2022 की बात करें तो जनवरी 2022 में एक भूखंड आवंटित किया गया था, जबकि दो फरवरी में सौंपे गए थे वहीं अगस्त के महीने में छह भूमि आवंटित किए गए। अधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों या उनके आसपास के क्षेत्रों में भूखंड आवंटित करने का उद्देश्य वहां शिक्षा को बढ़ावा देना सुनिश्चित करना था। उपराज्यपाल ने 13 जनवरी 2023 को बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया था।
दिल्ली में 25 हजार गेस्ट टीचर की नियुक्ति में बड़ा घोटाला, शिक्षकों के स्कूल में नाम नहीं फिर भी सैलरी बांटी गई
दिल्ली में 25 हजार गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति प्रक्रिया पर अब सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में किए गए एक ऑडिट में हेराफेरी का मामला सामने आया है। इसमें पाया गया कि दिल्ली के मानसरोवर पार्क के सीनियर सेकेंडरी स्कूल (GBSSS-I) में गेस्ट टीचर्स के नाम पर तीन लोगों को 4 लाख 21 हजार रुपए सैलरी दी गई, जबकि इनकी नियुक्ति इस स्कूल में थी ही नहीं। सक्सेना ने पैसे के गबन के मामले में पिछले हफ्ते ही दिल्ली सरकार के एक स्कूल के चार वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कर रही है।
भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ा शहीद भगत सिंह सैनिक स्कूल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 27 अगस्त, 2022 को दिल्ली के झरोदा कलां में शहीद भगत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी स्कूल का उद्घाटन किया। यह दिल्ली का पहला सैनिक स्कूल है। लेकिन इस स्कूल के खुलने की पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। केजरीवाल सरकार ने अपनी ही आम आदमी पार्टी की नेता श्रीशा राव को कंपनी खुलवाकर ठेका दे दिया। हैरानी की बात यह है कि अभी कंपनी के खुले हुए दो महीने भी नहीं हुए थे और कंपनी के पास सैनिक स्कूल के प्रबंधन का कोई अनुभव भी नहीं था, फिर भी दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की मेहरबानी से सरकारी खजाने को लूटने का ठेका मिल गया।
दिल्ली के अधिकांश सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल ही नहीं, 84 प्रतिशत पद खाली
देश की राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल, वाइस-प्रिंसिपल और शिक्षकों के ढेरों पद खाली हैं। इससे दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के अधिकतर स्कूल कई सालों से बिना प्रिंसिपल के ही चल रहे हैं। स्वयं दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) की तरफ से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, शहर के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के 84 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के सरकारी स्कूलों के लिए प्रिंसिपल के कुल 950 पद स्वीकृत हैं जिसमें से अब तक केवल 154 ही भरे गए हैं, जबकि 796 पद खाली हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ज्यादातर स्कूल को वाइस-प्रिंसिपल चला रहे हैं। हालांकि, इन स्कूलों में वाइस-प्रिंसिपल की भी भारी कमी है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में वाइस-प्रिंसिपल के कुल 1,670 पद हैं और इनमें से 565 पद अभी भी खाली हैं।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में गिरता रिजल्ट केजरीवाल के वर्ल्ड क्लास शिक्षा मॉडल की खोल रहा पोल@ArvindKejriwal pic.twitter.com/CzkVFrvI6g
— Angry Yogi (@angryyogiji) July 23, 2022
दिल्ली के स्कूलों में TGT के 13,421 और PGT के 3,838 पद खाली
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर्स (TGT) के कुल 33,761 पदों में से 13,421 खाली हैं, जबकि 20,340 पद भरे जा चुके हैं। वहीं पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (PGT) की अगर बात करें तो कुल 17,714 पदों में से 13,886 पद भरे गये हैं और 3,838 पद अभी भी खाली हैं। बता दें कि TGT पास शिक्षक कक्षा 10 तक के छात्रों को पढ़ाते हैं, जबकि PGT पास शिक्षक कक्षा 12 तक के छात्रों को पढ़ाते हैं।

