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झारखंड : सरकार पर खतरे के बीच बैठक से गायब रहे कांग्रेस और झामुमो के 11 विधायक

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन  के लिए रास्ते मुश्किल होती जा रही हैं। खनन मामले में विधायकी जाने की आशंकाओं के बीच 20 अगस्त 2022 को राँची में आयोजित की गई बैठक में महागठबंधन के 11 विधायक नहीं पहुँचे। इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित हुई इस बैठक में आने वाले राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। महागठबंधन में शामिल सीएम सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) ने अपने-अपने विधायकों से राँची में रहने का आदेश दिया था।

तीनों के दलों द्वारा अपने विधायकों को जारी किए गए निर्देश के बावजूद बैठक में 11 विधायक नहीं पहुँचे। इनमें सबसे अधिक कांग्रेस के हैं। हाल ही में कांग्रेस के तीन विधायक नकदी के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ाए थे। तब कांग्रेस ने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया था।

अपने विधायकों के टूटने के डर से और खनन पट्टा मामले में चुनाव आयोग के आने वाले निर्णय में उनकी विधानसभा सदस्यता जाने के कयासों के बीच इस बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि सीएम सोरेन के नेतृत्व में सभी विधायक एकजुट हैं और अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगे राजनीतिक हालात चाहें जैसे भी हों, राज्य की महागठबंधन सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। गठबंधन के विधायक गाँव-गाँव जाकर हेमंत सरकार के कामकाज के बारे में लोगों को बताएँगे। इसके साथ ही सरकार को अस्थिर करने की भाजपा की साजिश का पर्दाफाश करेंगे।

झामुमो और कॉन्ग्रेस के विधायक रहे गायब

बताया जा रहा है कि जो 11 विधायक बैठक में नहीं पहुँचे उनमें कांग्रेस और झामुमो के विधायक शामिल हैं। इन विधायकों के बैठक में नहीं पहुँचने की वजह निजी काम एवं समस्याएँ बताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि विधायक भूषण बाड़ा की फ्लाइट मौसम खराब होने के कारण देर से राँची पहुँची।
वहीं, पूर्णिमा नीरज सिंह शहर से बाहर होने के कारण बैठक में नहीं पहुँची। विधायक ममता देवी का स्वास्थ्य ठीक नहीं बताई जा रही है। वहीं, शिल्पी नेहा तिर्की वरिष्ठ नेताओं से मिलने के लिए दिल्ली गई हुई हैं। इस कारण ये लोग बैठक में नहीं पहुँचे। 
कांग्रेस के तीन विधायक कैश कांड में गिरफ्तार हैं। वहीं, झामुमो के सरफराज अहमद विदेश में है, जबकि चमरा लिंडा अस्वस्थ बताई जा रही हैं। समीर मोहंती खराब मौसम के कारण देर शाम तक राँची पहुँचे। वहीं, सीएम सोरेन के भाई बसंत दिल्ली में थे।
पार्टी से निर्देश के बावजूद इन विधायकों के अनुपस्थित रहने पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालाँकि, महागठबंधन का कहना है कि सारे विधायक एकजुट हैं और सरकार कोई खतरा नहीं है।

सीएम सोरेन की पत्नी कल्पना को मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी

खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को लेकर चुनाव आयोग का फैसला आने वाला है। सोरेन पर विभागीय मंत्री होते हुए अपने नाम से खनन लीज लेने का आरोप है। मामला राज्यपाल कार्यालय से होते हुए चुनाव आयोग तक पहुँचा और आयोग ने इस पर कई दिनों तक सुनवाई की। 
इसके साथ ही हाल ही में कांग्रेस के तीन विधायक 48 लाख रुपए की नकदी के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़ाए थे। इसके बाद से उन्हें पार्टी में टूट का डर सताने लगा है। इस घटना के बाद से दोनों पार्टियाँ अलर्ट मोड में हैं।
इस पर गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांंत दुबे ट्वीट कर कहा था, “झारखंड में भाभी जी के ताजपोशी की तैयारी, परिवारवादी पार्टी का बेहतरीन नुस्ख़ा गरीब के लिए।” उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की ओर इशारा किया।

बिहार : गठबंधन बचाने के फेर में कमजोर हो गई है लड़ाई

बिहार : गठबंधन बचाने के फेर में कमजोर हो गई है लड़ाई, इन 5 सीटों पर वॉक ओवर जैसी स्थिति
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन की तरफ से लोकसभा चुनाव को लेकर लगभग सीट बंटवारे पर स्थिति साफ हो गई है। सीट बंटवारे से लेकर उम्मीवारों तक का चयन हो गया है।उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद बिहार में कुछ सीटों पर लड़ाई एकतरफा नजर आने लगी है दोनों ही तरफ से ऐसी स्थिति बन रही है
शुरुआत तिरहुत प्रमंडल के मुजफ्फरपुर सीट से करते हैं यहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है वहीं, दूसरी तरफ नई नवेली विकासशील इंशान पार्टी (वीआईपी) भाजपा ने जहां वर्तमान और स्थानीय सांसद अजय निषाद को चुनावी मैदान में उतारा है वहीं, वीआईपी ने राजभूषण चौधरी निषाद को सिंबल दिया है राजनीति में नेताओं की लोकप्रियता मायने रखती है मुजफ्फरपुर मल्लाहों की सीट मानी जाती है इसलिए दोनों ही तरफ से एक ही जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया है
भाजपा प्रत्याशी के साथ है पिता की विरासत
भाजपा प्रत्याशी अजय निषाद के साथ उनके पिता की विरासत तो है ही, साथ ही पांच साल का उनका कार्यकाल भी है
 2014 के लोकसभा चुनाव में वह लगभग 50 प्रतिशत वोट लाकर चुनाव जीतने में सफल रहे थे इस बार जेडीयू भी भाजपा के साथ है ऐसे में एक मजबूत समीकरण के सामने एक नई नवेली पार्टी का एक ऐसा उम्मीवार जिसे पहचानने के लिए मतदाताओं को दिमाग पर बल देना पड़े वह किस हद तक मुकाबला कर पाएंगे यह कहना मुश्किल है वैसे राजनीति अनिश्चितताओं का खेल है कुछ भी संभव है लेकिन मौजूद समीकरण के मुताबिक, महागठबंधन यहां एनडीए को वॉक ओवर देती ही नजर आ रही है
सीतामढ़ी में जेडीयू ने दिया नए नवेले उम्मीदवार को टिकट
सीतामढ़ी को लेकर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है
 जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने जहां एक स्थानीय डॉक्टर वरुण कुमार को लोकसभा का टिकट दिया है वहीं, महागठबंधन की तरफ से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने पूर्व सांसद अर्जुन राय को चुनावी मैदान में उतारा है 2014 में यह सीट राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) ने जीती थी इस चुनाव में अर्जुन राय बतौर जेडीयू उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे आरजेडी ने सीताराम यादव को चुनावी मैदान में उतारा था 2019 के लोकसभा चुनाव में एक तो आरएलएसपी और आरजेडी साथ-साथ चुनाव लड़ रही है वहीं, जेडीयू ने एक नए नवेले उम्मीवार को मैदान में उतारा हैऐसी स्थिति में पलड़ा आरजेडी उम्मीवार का ही भारी दिख रहा है
नालंदा में HAM का कमजोर कैंडिडेट
सीट बंटवारे में तेजस्वी यादव ने नालंदा सीट हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा(हम) के खाते में देकर लगभग जेडीयू की राह आसान कर दी है
 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र नालंदा से जेडीयू ने स्थानीय और वर्तमान सांसद कौशलेंद्र कुमार को फिर मौका दिया है दूसरी तरफ, हम ने यहां से अशोक कुमार आजाद चंद्रवंशी को टिकट दिया है 2014 के चुनाव परिणाम पर अगर नजर डालें तो इस बार जेडीयू उम्मीदवार और मजबूत स्थिति में उभर कर सामने आ रहे हैं 2014 में इस सीट पर लड़ाई लोजपा और जेडीयू के बीच में थी इस चुनाव में दोनों साथ हैं बीते चुनाव के मत प्रतिशत को मिला दें तो यह आंकड़ा 68 प्रतिशत से अधिक का ही रहा है ऐसे में इस सीट पर 2019 की लड़ाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। 
सीवान में आरजेडी को हो सकता है फायदा
अब बात सीवान लोकसभा सीट की
 एनडीए के बंटवारे में यह सीट जेडीयू के खाते में गई है वहीं, महागठबंधन की तरफ से आरजेडी ने यहां से उम्मीदवार उतारा है 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ओमप्रकाश यादव को टिकट दिया था उन्होंने आरजेडी के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को शिकस्त दी थी ओमप्रकाश यादव के कद को जानने के लिए आपको 2009 के परिणाम को भी समझना होगा इस चुनाव में बिहार में जारी प्रचंड नीतीश लहर में भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी भाजपा के खाते से सीट छिनने पर वह खुलकर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं उनके बागी तेवर अपनाने की संभावना भी प्रबल है ऐसे में जेडीयू उम्मीदवार कविता सिंह, हिना शहाब के सामने कमजोर प्रत्याशी साबित हो सकती हैं
सिद्दीकी के उतरने बाद दरभंगा में बीजेपी के लिए मुश्किल लड़ाई 
दरभंगा सीट पर भी भाजपा के लिए स्थिति कुछ उत्साहजनक नहीं है
 सीट बंटवारे में पार्टी ने अपनी परंपरागत सीट तो बचा ली, लेकिन एक कमजोर प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतार दिया है भाजपा ने बेनीपुर से पूर्व विधायक गोपालजी ठाकुर को चुनावी मैदान में उतारा है, जो कि 2015 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट पर 25 हजार से अधिक मतों से चुनाव हार गए थे उनका मुकाबला आरजेडी के कद्दावर नेता और बिहार के पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी से होगा बीते कई चुनावों में यहां से अली अशरफ फातमी चुनाव लड़ते आ रहे थे लेकिन इस बार पार्टी ने उम्मीदवार बदला है यह देखा गया है कि इस सीट पर ध्रुवीकरण की पूरी कोशिश की जाती है लेकिन अब्दुल बारी सिद्दीकी का चेहरा सामने होने के कारण इसकी संभावना कम दिखती है वहीं, दरभंगा सीट पर मल्लाह करीब 70 हजार जाति के वोटर हैं, जो कि इस बार दोनों ही गठबंधन का खेल बना या बिगाड़ सकते हैं

बिहार में टूटने की कगार पर महागठबंधन

बिहार में टूटने की कगार पर महागठबंधन, RJD के रवैये से नाखुश हैं कांग्रेस के कई नेताभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विजयी रथ को रोकने के लिए महागठबंधन की परिकल्पना की गई थी. इसे हकीकत में भी बदला गया था. सबसे पहले 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मिलकर इसे आकार दिया था और बीजेपी के रथ को बिहार में रोक दिया था. परिस्थिति बदली और बिहार में जारी इस गठजोड़ से नीतीश कुमार अलग हो गए.
एकबार फिर देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंका जा चुका है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने महागठबंधन किया है. ठीक उसी तरह बिहार में भी कांग्रेस और आरजेडी के साथ कई छोटे-छोटे दल आए हैं. सीट शेयरिंग को लेकर संख्या स्पष्ट किया जा चुका है, लेकिन सीटों को लेकर पेच फंसा हुआ है.
सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक, आरजेडी के रवैये से कांग्रेस नाखुश है. इसको लेकर दिल्ली में कल यानी बुधवार को देर रात तक पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई. इस बैठक में लगभग सभी नेताओं ने आरजेडी के रवैये के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है. साथ ही कई नेताओं ने महागठबंधन से अगल होने की वकालत भी की.
आज (मार्च 28) को बिहार कांग्रेस के आला नेताओं की राहुल गांधी से मुलाकात होनी है. इस मुलुकात के दौरान बिहार के तमाम पहलुओं के बारे में उन्हें अवगत कराया जाएगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी बिहार कांग्रेस के नेताओं की वकालत को तरजीह देते हुए महागठबंधन खत्म करने का फैसला लेंगे, या फिर किसी भी परिस्थिति में इसे जारी रखने की बात कहेंगे. ज्ञात हो कि तीन राज्यों में मिली जीत के बाद कांग्रेस अध्यक्ष साफ शब्दों में कह चुके हैं कि हम (कांग्रेस) अब बैकफुट पर नहीं खेलेंगे.