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‘दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगे’ : ‘पिंजरा तोड़’ की एक्टिविस्ट निकली ‘द वायर’ और ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ की कॉलम‌निस्‍ट‌

द वायर फाउंडर सिद्धार्थ वरदराजन, पिंजरा तोड़ फाउंडर नताशा नरवाल
द वायर फाउंडर सिद्धार्थ वरदराजन,
पिंजरा तोड़ फाउंडर नताशा नरवाल
जिन दिनों दिल्ली और देश के अन्य भागों में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में शांति प्रदर्शन के नाम हो रहे प्रदर्शनों में आगजनी और पत्थरबाज़ी की घटनाएं होने पर अक्सर एक बात लिखता था, "कहीं ये पत्थरबाज़ी और आगजनी गोधरा न बन जाये", लेकिन इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जो आज हकीकत में सच हो रहा है। गोधरा का मतलब शायद मार-काट से लिया, परन्तु वास्तविकता को नहीं भांप पाए। 
शांति प्रदर्शन के नाम पर दंगा करते वक़्त दंगाइयों ने यह नहीं सोंचा कि "आज देश में मनमोहन सिंह की सरकार नहीं, जो उन्हें बचाने के लिए बेकसूरों को जेलों में डाल देगी। जिस तरह इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए बेकसूर हिन्दू साधु-संत जैसे स्वामी असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित आदि को जेल में डाल वो यातनाएं दी गयीं, उनका .00000001% भी किसी आतंकवादी को देने का नहीं हुआ। आज देश में वह सरकार है, जो दंगाइयों को सात समुन्दर पार से भी खींच लाएगी।" खूब नारेबाजी हुई "हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी", "मोदी तेरी कब्र खुदेगी", "योगी तेरी कब्र खुदेगी" आदि के अलावा #not in my name, #award vapasi, #metoo, #mob lynching और #intolerance आदि गैंगस्टर सक्रिय हो गए थे। देश का सौहार्द बिगाड़ने का प्रयत्न किए जा रहे थे।      
मई 23 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नताशा नरवाल और देवांगना कलिता नाम की दो महिलाओं को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे के मामले में गिरफ्तार किया था। दोनों महिलाएँ लेफ्ट एक्टिविस्ट ग्रुप पिंजरा तोड़ की सदस्य हैं।
पिंजरा तोड़ के सदस्यों ने 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काया और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहा। जानकारी के अनुसार “22 फरवरी की रात 10 बजे मेट्रो स्टेशन पर सीएए के खिलाफ विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। हमने सोचा कि वे सीलमपुर सर्विस लेन पर पुरानी साइट पर इकट्ठा होंगे, जो लगभग एक किलोमीटर दूर है।”
पता चला है कि दिल्ली के दंगों को भड़काने के लिए गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएँ लेफ्ट ग्रुप पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य थीं जिसे 2015 में स्थापित किया गया था। पिंजरा तोड़ को मुख्य रूप से दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हॉस्टल कर्फ्यू के विरोध में शुरू किया गया था, हालाँकि, इस संगठन का मक़सद असल में अपनी लेफ्टिस्ट विचारधारा को आगे बढ़ाना है।
पिंजरा तोड़ के सह-संस्थापक “नताशा नरवाल” जिसे दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों को उकसाने के लिए गिरफ्तार किया गया है, वो पहले कई वामपंथी झुकाव वाले ऑनलाइन पोर्टल्स की कॉलम‌निस्‍ट‌ भी रह चुकी है।
नताशा नरवाल ने वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के लिए तीन लेख लिखे थे।
नफरत से भरी और हिंदूपोबिया की शिकार, नताशा नरवाल ने फिल्म पैडमैन की रिलीज के दौरान न्यूज़लॉन्ड्री के लिए भी लेख लिखा था।
अपनी नफरत को दिखाते हुए, नताशा नरवाल ने अपने न्यूज़ लांड्री के लेख में पैडमैन के लॉन्च से ठीक पहले एबीवीपी द्वारा आयोजित मैराथन के बारे में लिखा था जिसे अक्षय कुमार ने हरी झंडी दिखाई थी। कथित तौर पर इस मैराथन में भारत सरकार से सैनिटरी पैड पर जीएसटी को हटाने की माँग की गई थी।
अपनी अज्ञानता को दर्शाते नताशा 
“सशक्तीकरण के लिए आरएसएस से जुड़े संगठन का कदम हिंदू राष्ट्र की अपनी कल्पनाओं के साथ है, जिसमें एक महिला की भूमिका उसके सदस्यों (“बेटों”) के बायोलॉजिकल रिप्रोडूसर तक सीमित हो जाती है; सुरक्षा की आवश्यकता में माताओं / पत्नियों / बहनों तक सीमित; सांस्कृतिक भूमिकाओं में शामिल हैं जो सांस्कृतिक सीमाओं / मतभेदों के मार्कर और रिप्रोडूसर हैं; और उन आकृतियों में मूर्तिमान है जिनकी बहादुरी को आत्म-बलिदान के माध्यम से महसूस किया जाता है। राष्ट्र की इस कल्पना में, महिलाएँ हर दिन अपना बोझ ढोती हैं, विभिन्न प्रकार के नियमों और प्रतिबंधों में बंधी होती हैं जो उन्हें उनकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता को शासन में बांधती और पिंजरे में रखती हैं, उसे इन चीज़ों का विरोध करना पड़ता है, और यहाँ तक ​​कि हर दिन खुद से कई समझौते करने पड़ते हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि नताशा अपनी दोनों लेख में हिंदुओं और उनकी परंपराओं के प्रति काफी घृणा प्रदर्शित करती हैं, यहाँ तक ​​कि हिंदू समाज में महिलाओं का स्थान को लेकर गलत बयानबाजी और झूठ बोलती है। उसके लेखों से ऐसा लगता है कि वे इस्लाम और मुस्लिम समुदाय में महिलाओं के साथ क्या होता है इस बारे में नहीं जानती है।
दिल्ली पुलिस ने भेजा नोटिस 
इससे पहले, दिल्ली पुलिस के विशेष सेल ने जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी के 50 सदस्यों, छात्र संघ के कॉन्ग्रेस के पूर्व पदाधिकारियों, नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया, वामपंथी संगठन पिंजरा तोड़ को दंगाई और आपराधिक षड़यंत्र के साथ उनके कथित संबंध के लिए नोटिस जारी किया था। गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी और 400 से अधिक घायल हो गए थे।
पिछले रिपोर्ट में यह बताया गया था कि पुलिस का कहना ​​है कि पिंजरा तोड़ के कार्यकर्ता 22 फरवरी की शाम सीलमपुर-जाफराबाद इलाके में मौजूद थे और धरना स्थल पर सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को भड़काया कि वे अपने इस विरोध प्रदर्शन में जाफराबाद मेट्रो स्टेशन रोड को ब्लॉक करके और अधिक अधिक प्रभावशाली बना दें। रिपोर्ट के अनुसार, यह वही घटना थी जिसकी वजह से दूसरी तरफ से भी शक्ति प्रदर्शन की बात कही गई थी। जिसके बाद ही दिल्ली में दंगे भड़के थे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में, पुलिस अधिकारी ने बताया कि जफराबाद के छोटे धरने से एन्टी सीएए महिला प्रदर्शनकारियों को शिफ़्ट करने के पीछे दो कारण हो सकते हैं। एक शाहीन बाग में धरना समाप्त करने के लिए उच्चतम न्यायालय के आने की आशंका में एक वैकल्पिक विरोध स्थल बनाने का प्रयास और दूसरा अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे में भारत की नकारात्मक छवि बनाने के लिए।
पुलिस को यह भी लगता है कि पिंजरा तोड़ के कार्यकर्ता न केवल प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने में शामिल थे, बल्कि विरोध प्रदर्शन को भड़काने और आगे बढ़ाने में भी बढ़-चढ़कर शामिल थे। पुलिस सूत्रों ने यह भी कहा है कि पिजरा तोड़ के इन कार्यकर्ताओं के उस तनावपूर्ण स्थिति में इनकी पहले से भागीदारी को संदेह के रूप में देखा जा रहा है और इस संदर्भ में आगे की जाँच की जा रही है।
द वायर का कॉलमनिस्ट शरजील इमाम 
इससे पहले, द वायर के साथ एक अन्य ˈकॉलम‌निस्‍ट्, शरजील इमाम द्वारा लोगों को ‘हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों’ के लिए उकसाया गया था। दिल्ली में दंगे भड़काने से पहले शरजील इमाम ने द वायर में अपने जहरीले इस्लामिक कट्टरवाद के बारे में लिखा था। जहाँ उसने द वायर के लिए अपने लेख में जिन्ना की प्रशंसा की थी।
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नताशा नरवाल और देवांगना कालिता उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों को भड़काने के आरोप में पिंजरा तोड़ संग.....
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दिल्ली पुलिस ने महिलावादी संगठन ‘पिंजरा तोड़’ की दो महिला कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया है। उन दोनों का नाम नताशा ....

पिंजरा तोड़ की दोनों सदस्य जमानत पर बाहर आते ही हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने फिर किया गिरफ्तार

पिंजड़ा तोड़ दिल्ली हिंसा
नताशा नरवाल और देवांगना कालिता
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों को भड़काने के आरोप में पिंजरा तोड़ संगठन की 2 सदस्य देवांगना कालिता और नताशा नरवाल को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फिर गिरफ्तार कर लिया है।
ये गिरफ्तारी उन्हें रविवार (मई 24, 2020) को बेल मिलने के कुछ देर बाद दोबारा हुई। अब उन्हें 2 दिन की हिरासत में लिया गया है। इस संबंध में जफर अब्बास ने ट्वीट करके जानकारी दी है। रविवार को हुई दोनों महिलाओं की गिरफ्तारी किसी हत्या से संबंधित है।
इससे पहले इनके ख़िलाफ़ पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 149, 353, 283, 323,332, 307, 302, 427, 120-b, 188 के तहत मामला दर्ज किया था।
क्राइम ब्रांच की स्पेशल इनवेंस्टिगेशन टीम ने दोनों महिलाओं को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगे और आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया था।

पुलिस टीम ने इनकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के लिए कोर्ट से 14 दिनों की पुलिस हिरासत की माँग की थी। मगर, कोर्ट ने हर पक्ष की दलीलें सुनते हुए दोनों महिला सदस्यों को 2 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
इससे पहले पिंजरा तोड़ की दोनों महिला सदस्यों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। इन पर आरोप था कि इन्होंने 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काया और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहा।
लेकिन, रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने यह कहते हुए उन्हें बेल दे दी कि केस फाइल और एफआईआर देखने के बाद यह लगता है कि धारा 353 मेंटेनेबल नहीं लगती है।
उन्होंने कहा कि केस के फैक्ट्स बताते हैं कि आरोपित केवल सीएए और एनआरसी का विरोध कर रही थीं और वे किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थीं। आरोपितों की समाज में अच्छी पकड़ है और वे काफी पढ़ी-लिखी भी हैं। वे पुलिस के साथ जाँच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
कुछ प्रबुद्ध सामाजिक वर्ग के लोगों और ‘पिंजरा तोड़’ जैसे कथित सामाजिक संगठनों के कारण दिल्ली यमुना के आसपास रहने वाले लोग ख़ासी परेशानी में थे। वहाँ के सभी स्थानीय लोग पीड़ित और दुःखी महसूस कर रहे थे। चारों तरफ़ भगदड़ का माहौल था। ये संगठन और कथित प्रबुद्ध जन प्रतिदिन हिंसा भड़काने के काम में लगे रहते थे और उन्होंने ही जाफराबाद मेन रोड को ही जाम करवा दिया था। जिससे राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
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दिल्ली पुलिस ने महिलावादी संगठन ‘पिंजरा तोड़’ की दो महिला कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया है। उन दोनों का नाम नताशा ....
दरियागंज दिल्ली गेट पर इसी ‘पिंजरा तोड़’ के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पुलिस के साथ झड़प की थी लेकिन इनमें से किसी एक को भी गिरफ़्तार नहीं किया गया था। वो सभी हिंसक हरकतें कर के भाग खड़े हुए थे। फँस गए स्थानीय लोग। स्थानीय लोगों में से कई आज भी पुलिस केस और अदालती कार्रवाइयों का सामना कर रहे हैं।