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डॉ मनमोहन सिंह जी राष्ट्र को जवाब दो


पूरा देश भूतपूर्व प्रधानमन्त्री डॉ मनमोहन सिंह से कर्इ सवाल पूछ रहा है- पद के लालच में आपने अपना ज़मीर क्यों बेचा ? अर्थशास्त्री होते हुए भी क्यों आप देश की अर्थव्यवस्था को बदहाल करने वाले घोटालेबाज से जुड़े रहें ? आप र्इमानदार कहे जाते थे, फिर बेर्इमानों के साथ क्यों रहे ? आंखे बंद किये क्यों घोटालेबाजों की करतूतों को असहाय हो कर देखते रहें ? हो सकता है-घोटालेबाजो का साथ देने के पीछे धनार्जन की मंशा नहीं रही होगी, पर पद का लालच तो था।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आपने र्इमानदारी का नकाब ओढ़ कर पूरे देश की जनता को धोखा दिया है। निश्चय ही आप इस बात से अनजान नहीं है कि बारह लाख करोड़ रुपये लूटने का षड़यंत्र रचने वाला मुख्य अभियुक्त कौन है ? यदि नहीं है तो कह दीजिये- मुझे कुछ नहीं मालूम। मैं कुछ नहीं जानता। मैं प्रधानमंत्री बनने की पात्रता नहीं रखता था, पर मुझे बनाया गया, इसलिए पद के लालच में मैंने वह सब कुछ होने दिया, जो नहीं होना चाहिये था। मैंने देश के साथ दग़ाबाजी की है। मैं भारत की बदहाली और बर्बादी का जिम्मेदार हूं। करोड़ो भारतीयों को मैंने गरीबी, बैरोजगारी, महंगार्इ की सौगात बांटी थी।
कोलगेट घोटाले के मुख्य अभियुक्त मनमोहन सिंह ही हैं। धन ले कर फर्जी कम्पनियों को कोल ब्लॉक आंवटन से कोल उत्पादन ठप्प हो गया। बिजली के कारखानों को कोयला नहीं मिलने से उत्पादन कम हो गया या बंद हो गया। बिजली की कमी से पूरे देश के कारखानों में उत्पादन घट गया। फलत: कामगारों की छटनी की गर्इ। नये रोजगारों का सृजन बंद हो गया। बिजली उत्पादन बढ़ाने के नाम पर कर्इ कम्पनियों ने परियोजनाएं प्रारम्भ की, वे बंद हो गर्इ। इन परियोजनाओं में बैंको का पैसा डूब गया। देश की अर्थव्यवस्था गहरे भंवर में फंस गर्इ। एक अर्थशास्त्री होते हुए क्या आप इस मर्म को नहीं समझते थे ? निश्चय ही आप सब जानते थे। लूटेरों ने र्इमानदारी और विद्वता का नकाब ओढ़े एक शख्स को आगे कर लूट की इंतहा कर दी और वह शख्स चुपचाप गर्दन झुकाये आगे- आगे चलता रहा। देश कैसे मानेगा कि उस व्यक्ति का कोर्इ दोष नहीं है, जिसके नेतृत्व में भारी भरकम लूट को अंजाम दिया गया था ? क्षमा कीजिये, भारत की जनता इतनी मूर्ख नहीं है, जितना एक परिवार पार्टी और उसके चाटुकार समझते हैं।
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बॉथरुम में रेनकोट पहन कर नहाने के तंज पर कांग्रेस पार्टी के नेता आगबबुला हो कर प्रधानमंत्री से माफी की अपील कर रहे हैं, किन्तु पूरा देश मनमोहन सिंह के अक्षम्य अपराध पर उन्हें जेल भेजने की मांग कर रहा है। जो व्यक्ति करोड़ो भारतीयों को गरीब बनाने का दोषी है, उसे राष्ट्र क्यों क्षमा करें ? जिस व्यक्ति ने हर्षद मेहता घोटाले के साथ अपने राजनीतिक जीवन की यात्रा प्रारम्भ की थी, वह कॉलगेट घोटाले के साथ समाप्त जरुर होगी, पर जेलयात्रा प्रारम्भ होने की सम्भावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। अत: प्रधानमंत्री मोदी संसद में माफी नहीं मांगेगे, वरन मनमोहन सिंह को अपने अपराध के लिए पूरे देश से माफी मांगनी होगी।
मनमोहन सिंह के साथ घोंटालेबाजों का लम्बा साथ मात्र संयोग नहीं है, अपितु राष्ट्र के साथ किये गये छल की पराकाष्ठा है। कांग्रेसी चाहे संसद में उत्पात कर मनमोहन सिंह को पाक साफ करने के लिए शोर मचाये, किन्तु न्यायालयों के निर्णय आने अभी बाकी है। अच्छा होगा मनमोहन सिंह जी स्वयं ही आगे आ कर अपना दोष कबूल कर लें और कांग्रेसियों से स्पष्ट कह दें- मेरे नाम पर अब सियासत नहीं करें। मैने अपने तप के बल पर जो कुछ जीवन में कमाया वह आपके साथ रह कर गंवा दिया। मेरा अंत:करण अब मुझे घिक्कार रहा है-मैंने अपने पेशे के साथ छल कर जो अपराध किया है, उसका निर्णय न्यायालय से आने तक मैं इस संसार में रहूं या नहीं रहूं, पर ऊपर वाला मुझे कभी क्षमा नहीं करेगा, इस बात को मैं अच्छी तरह जानता हूं।