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‘शव पर तिरंगा लपेटा जाना चाहिए था’: कांग्रेस नेता राजकुमार उर्फ़ रज्जू भैया ने अतीक अहमद को ‘भारत रत्न’ देने की माँग की

कांग्रेस नेता ने अतीक अहमद को भारत रत्न देने की माँग की (दाएँ), महाराष्ट्र में शहीद बता कर लगे पोस्टर (बाएँ)
आज तुष्टिकरण की घिनौनी सियासत करने वालों को जब इतनी भी समझ नहीं कि ;भारत रत्न' की क्या कीमत है, क्या सम्मान है, क्या ऐसे पाखंडी नेताओं को सत्ता के पास भी नहीं भेजना चाहिए। क्या इनकी अक्लों पर पत्थर पर गए है कि एक माफिया को 'भारत रत्न' देने की मांग कर रहे हैं? क्यों उसके अपराधों पर पर्दा डाल, जनता को गुमराह किया जा रहा है? 

प्रयागराज के सबसे बड़े माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद से लगातार उसे महान बताने की कोशिश जारी है। जहाँ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उसकी हत्या पर सवाल खड़े किए, बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उसे ‘जी’ कह कर संबोधित किया और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने ‘मुस्लिम कार्ड’ खेला, वहीं अब उसे शहीद बताने से लेकर उसे ‘भारत रत्न’ देने तक की माँग हो रही है।

‘अतीक अहमद को मिले भारत रत्न सम्मान’: प्रयागराज का कांग्रेस नेता

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक कांग्रेस नेता ने अतीक अहमद को शहीद बताते हुए माँग की है कि उसे ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाए। ये बयान कांग्रेस पार्टी के पार्षद प्रत्याशी राजकुमार उर्फ़ रज्जू भैया ने दिया है। इसका वीडियो भी सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि अतीक अहमद ने शहादत पाई है, इसीलिए उसके शव पर तिरंगा रखा जाना चाहिए था। साथ ही उसने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अतीक अहमद की हत्या करवाई।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक, भारत के रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह का नाम लेते हुए कहा कि अगर उन्हें ‘पद्म विभूषण’ मिल सकता है तो फिर अतीक अहमद को ‘भारत रत्न’ क्यों नहीं? शहर में कांग्रेस के पुराने नेता राजकुमार नगर निगम के वार्ड नंबर 43 साउथ मलाका से पार्षद प्रत्याशी हैं। वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर कोतवाली भी ले जाया गया। वो पहले भी पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। ताज़ा खबर ये है कि कांग्रेस ने उन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया है।

महाराष्ट्र में अतीक अहमद को शहीद बताते हुए लगाए गए पोस्टर्स

उधर महाराष्ट्र के बीड में अतीक अहमद को शहीद बताते हुए पोस्टर लगाए गए हैं, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है। इन पोस्टरों में न सिर्फ अतीक अहमद, बल्कि उसके भाई अशरफ को भी शहीद बताया गया है। इस मामले में ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा 293, 294 और 153 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन पोस्टरों में सार्वजनिक रूप से दोनों की हत्या की निंदा की गई। ये बैनर माजलगाँव इलाके में लगाया गया था।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई। इस पोस्टर को भी त्वरित रूप से कार्रवाई करते हुए हटवा दिया गया है। इसे मोहसिन पटेल की ‘मोहसिन भैया मित्र मंडल’ ने लगाया था। पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया है। अतीक गिरोह से इन लोगों के रिश्ते की भी जाँच की जा रही है। बता दें कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या से पहले अतीक का बेटा असद भी एनकाउंटर में मारा जा चुका था। अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन अब तक फरार है।

तिहाड़ में हिन्दू आरोपितों को मारने की साजिश : परफ्यूम की बोतल में थर्मामीटर का पारा, ISIS कनेक्शन

जनवरी 2021 का पहला हफ्ता। तिहाड़ जेल से किए गए एक कॉल ने दिल्ली पुलिस के कान खड़का दिए। कॉल पर जो डिमांड की गई थी, वह जेल में बंद एक कैदी की ओर से अपने परिचित या परिजनों से किया जाने वाला सामान्य डिमांड नहीं था। जेल में बंद कैदी ने मर्करी (पारा) की डिमांड की थी।

टाइम्स आफ इंडिया ने तिहाड़ में हिन्दू आरोपितों की हत्या से जुड़ी साजिश को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित कर यह जानकारी दी है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस साजिश का पर्दाफाश करते हुए शाहिद और उसके साथी असलम को गिरफ्तार किया था। शाहिद के निशाने पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों में गिरफ्तार हुए दो हिन्दू आरोपित थे। इनको मारने के लिए शाहिद ने असलम से मर्करी की डिमांड की थी।

शक गहराने पर पुलिस ने असलम पर नजर रखनी शुरू की। पाया कि वह काफी थर्मामीटर खरीद रहा है और उसे तोड़कर मर्करी परफ्यूम की छोटी बोतल में इकट्ठा कर रहा है। पुलिस ने उसके हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसने बताया कि शाहिद दो लोगों की हत्या करना चाहता है। लेकिन, ये लोग कौन हैं यह उसे पता नहीं।
इसके बाद स्पेशल सेल ने शाहिद को रिमांड पर लिया। पूछताछ में पता चला कि उसके सम्पर्क में अजीमुशान और अब्दुस शमी नाम के दो ISIS ऑपरेटिव्स थे। उन्होंने ही उसे जेल में बंद उन दो लोगों को मारने का काम दिया था, जिन पर कथित तौर पर मस्जिद को नुकसान पहुँचाने व समुदाय विशेष के लोगों को मारने का आरोप था।

शाहिद ने बताया कि उसे जो बातें बताई गईं उनसे वह काफी प्रभावित हुआ। उसे इस्लामिक स्टेट की विचारधारा पसंद आई। वह फौरन काम करने को तैयार हो गया। उनकी योजना थी कि जब कैदी इकट्ठा होंगे तो उसको मर्करी दिया जाएगा। उसने बताया कि उन तीनों की मुलाकात जेल नंबर 3 में हुई थी। वहीं प्लान भी बना। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि अजीमुशान का आईएस मॉड्यूल का एक साथी यूनानी डॉक्टर था, उसी ने बताया था कि मर्करी कितना खतरनाक होता है।

अभी इस केस में पुलिस ने आईएस के दोनों ऑपरेटिव्स को नहीं पकड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पुलिस ने बताया कि पड़ताल चल रही है। वह जाँच पूरी होने के बाद जानकारी साझा करेंगे।
आईएस ऑपरेटिव्स के बारे में पता चला है कि शमी उन 15 लोगों में से एक है जिसे आईएस केस की जाँच में दोषी पाया गया था। अजीमुशान भी एक आतंकी मामले में गिरफ्तार हुआ था। दोनों अमरोहा से हैं। 2013 और 2015 में आईएस आतंकियों ने  शमी और अजीमुशान को अपने साथ जोड़ा था। इन्हें हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम और जुनूद-उल-खिलाफा-फिल-हिंद का नाम दिया गया था।
तिहाड़ जेल में बंद शाहिद ने पर आरोप है कि साल 2015 में दिल्ली के ख्याला में महिला से बलात्कार किया था। उसके बाद महिला और उसके 2 बच्चों की हत्या कर दी थी। 
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 से 25 फरवरी के दौरान हिंदू विरोधी दंगों में करीब 53 लोग मारे गए थे। 200 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। मारे गए लोगों में 15 साल के लड़के से लेकर आईबी के कॉन्स्टेबल तक थे। कुछ ने अपनी आँखों के सामने जीवन भर की कमाई को स्वाहा होते देखा। दंगाइयों ने न हिन्दुओं की संपत्ति को छोड़ा था न उनके धार्मिक स्थलों को।
दंगों की अब तक की जॉंच से यह बात सामने आई है कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा को अंजाम देने की पूरी प्लानिंग की गई थी। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान दंगों को लेकर पहले से ही तैयारी की गई थी। ताहिर हुसैन, उमर खालिद, खालिद सैफी सहित 18 के खिलाफ दंगों के सिलसिले में पिछले दिनों ही दिल्ली की एक अदालत ने यूएपीए के तहत आरोपों का संज्ञान लिया था।