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अभिनंदन की रिहाई : लिबरल-सेकुलर पत्रकारों की फिर खुली पोल

भारतीय सेना (थल, नभ या वायु) की वीरता के किस्से पूरी दुनिया में मशहूर हैं। लेकिन इनके चरम शौर्य का किस्सा सुनना हो तो दुश्मन देश की सेना पर क्या बिती है, वह सुनिए। ताजा किस्सा भारतीय वायु सेना के फायटर पायलट अभिनंदन को लेकर है। इनके माध्यम से पाकिस्तान की संसद में भारतीय सेना की खौफ के चर्चे हुए।

पाकिस्तान की संसद में भारतीय सेना की खौफ के चर्चे! जी हाँ, यह सच है – 100 फीसदी सच। देश के कथित लिबरल-सेकुलर पक्षकारों का एक बार फिर पर्दाफाश हुआ है। खान मार्केट गैंग के पक्षकारों ने भारत वायुसेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई का पूरा श्रेय उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को दे दिया था। उस नाजुक समय में जहां एक तरफ पूरा भारत अभिनंदन की सकुशल वापसी के लिए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर रहा था, वहीं मोदी विरोध में ये पक्षकार विरोधी देश के पीएम की जय-जयकार करने में लगे थे। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि अभिनंदन की रिहाई पाकिस्तान ने भारत के खौफ से किया था।

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पूर्व स्पीकर और सांसद अयाज सादिक ने दावा किया कि उस समय विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था अगर अभिनंदन वर्धमान को रात नौ बजे तक नहीं छोड़ा गया तो भारत हमला कर देगा। अयाज ने ये भी कहा कि बैठक में कुरैशी के पैर कांप रहे थे, माथे पर पसीना था। साफ है पाकिस्तान ने मोदी सरकार के डर से अभिनंदन को रिहा किया था, जबकि भारतीय लिबरल पक्षकारों ने इमरान का गुणगान किया था और विजेता बता दिया था।

लेकिन दूसरा सच यह भी है कि दुश्मन देश जहाँ हमारी सेना और सेना के पीछे स्टील-फ्रेम की भाँति खड़े राजनीतिक दल की चर्चा कर रहा है, वहीं अपने देश के चंद लिबरल (धूर्त) इस घटना के वक्त अपने देश की सेना और सत्ता के साथ न खड़े होकर दुश्मन देश के PM इमरान खान की तारीफ में गीत गा रहे थे।

पहले नंबर पर हैं राजदीप। उन्होंने इसे भारतीय नेताओं (मतलब जो सत्ता में थे, मतलब बिना नाम लिए PM मोदी को टारगेट) के लिए वोट का मसला बता दिया था जबकि इमरान को विजेता घोषित कर दिया था।

फिर नंबर आता है बरखा जी का। ये इमरान के स्वागत में ट्वीट कर रही थीं।

शोभा डे तो पाकिस्तानियों को ही धन्यवाद कहने लगी थीं।

 रिफत जावेद तो अपने देश के TV चैनलों को ज्ञान देने लगे थे। इसमें ज्ञान से ज्यादा PM मोदी के नाम पर तंज था।

प्रशांत भूषण कैसे पीछे रहते। इमरान खान को उन्होंने परिपक्व और बड़ा निर्णय लेने वाला करार दिया था।

लेकिन इन 11 लिबरलों (धूर्तों) को शायद यह नहीं पता था कि वो या तो किसी (दुश्मन देश) के हाथों कटपुतली की भाँति खेल रहे हैं या फिर अपने ही देश के किसी खास पार्टी के इशारे पर केंद्र सरकार को नीचा दिखाने का अजेंडा चला रहे हैं। पता तो शायद उन्हें यह भी नहीं होगा कि एक दिन उनकी धूर्तता की पोल कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान का ही एक सांसद खोल कर रख देगा।