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पाकिस्तान बना ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का मेंबर तो लोगों ने इस तरह लिए मजे, कहा- बस लादेन को चेयरमैन बना दो

                                      पाकिस्तान गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर तैयार है(फोटो- एपी)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 20 से अधिक देश शामिल हो गए हैं जिनमें हमारा बदनाम पड़ोसी पाकिस्तान भी है। यूँ तो पाकिस्तान दुनियाभर में आतंक और दहशत फैलाने के लिए कुख्यात है लेकिन अब वो इस ‘शांति बोर्ड’ का फाउंडिंग मेंबर बनकर दुनिया को शांति की राह दिखाने का ख्वाब देख रहा है। पाकिस्तान की इस जॉइनिंग की सोशल मीडिया पर खूब फजीहत हो रही है।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने बुधवार (28 जनवरी) को अपने आधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर पाकिस्तान को संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल किए जाने का स्वागत किया। इसके बाद इंटरनेट पर मीम्स की बाढ़ आ गई और लोगों ने आतंकिस्तान की खूब क्लास लगाई।

पाकिस्तानी राजनेता और पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने एक्स पर लिखा, बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का पाकिस्तान का फैसला दिखाता है कि यह सरकार पाकिस्तानी लोगों की जरा भी परवाह नहीं करती। उन्होंने कहा कि बिना किसी सार्वजनिक बहस और संसद की राय के बगैर इसमें पाकिस्तान शामिल हो गया। उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस को गलत ठहराने के लिए कई वजहें बताई हैं।

इस पोस्ट को जवाब देते हुए लोगों ने मजेदार कमेंट्स किए जो मजाकिया के साथ-साथ पाकिस्तान को उसकी औकात भी दिखाने वाले भी थे। एक यूजर ने कटाक्ष करते हुए ‘X’ पर लिखा, “ओसामा बिन लादेन को वापस लाओ और उसे बोर्ड का चेयरमैन बना दो!” एक यूजर ने लिखा, “सच बताओ, पाकिस्तान के लिए 1 अरब डॉलर की जॉइनिंग फीस कौन देगा?” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “मिया खलीफा, पवित्रता बोर्ड में शामिल हो गईं।”

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए एक यूजर ने लिखा, “पाकिस्तान 1 अरब डॉलर की फीस कैसे दे रहा है, भीख माँगने के कारोबार से या जैसा वे कहते हैं ‘कटोरा फाइनेंसिंग’ से?” वहीं, एक अन्य यूजर ने तुलना करते हुए कहा, “यह वैसा ही है जैसे KFC मुर्गियों को बचाने वाले आंदोलन के बोर्ड में शामिल हो जाए..” सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की खूब फहीजत हो रही है। पाकिस्तान का इस बोर्ड में शामिल होना कुछ वैसा ही है जैसे किसी शराबी को नशामुक्ति अभियान का ब्रांड एंबेसडर बना दिया जाए या किसी जेबकतरे को बैंक की सुरक्षा व्यवस्था सौंप दी जाए।

बोर्ड को कहा औपनिवेशिक कोशिश

उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस को एक 'औपनिवेशिक कोशिश' बताया जिसका 'मकसद न सिर्फ गाजा पर राज करना है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक सिस्टम बनाना है।' बोर्ड ऑफ पीस को लेकर ऐसी आशंका कई एक्सपर्ट जाहिर कर चुके हैं। खोखर ने चिंता जताई कि यह बोर्ड ऐसे तरीकों और संस्थानों से अलग होने की हिम्मत रखेगा जो अक्सर फेल हो गए हैं।

ट्रंप के पास होगी पूरी ताकत

पूर्व पाकिस्तानी सीनेटर ने बोर्ड ऑफ पीस को ट्रंप के निजी समूह की तरह बताया और कहा कि यह 'ट्रंप का ऐसे शाही अधिकार देता है कि वह अपने निजी और अमेरिका के एजेंडे को बिना किसी रोक-टोक के लागू कर सकें।'

  • बाकी सभी सदस्यों को चेयरमैन (ट्रंप) नॉमिनेट कर सकता है या उन्हें हटा सकता है।
  • चेयरमैन तय कर सकता है कि बोर्ड कब मिलेगा या किन मुद्दों पर बात करेगा।
  • इस नए फोरम में सिर्फ ट्रंप के पास ही पूरी तरह से वीटो पावर होगी।
  • खोखर ने स्थायी सीट के लिए सदस्यों पर 1 अरब डॉलर का शुल्क लगाए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक अरब डॉलर का टिकट इसे अमीरों का क्लब बनाता है और ऐसे क्लब अक्सर क्या करते हैं, यह कोई भी अंदाजा लगा सकता है।
  • बोर्ड ऑफ पीस में 8 मुस्लिम देश

    डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में अब तक 8 मुस्लिम देश शामिल हो गए हैं। पाकिस्तान के साथ ही सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया और कतर ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई है। इजरायल ने पहले बोर्ड में तुर्की और कतर की मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी लेकिन बुधवार को प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने इसमें इजरायल के शामिल होने की घोषणा की। ट्रंप ने दुनिया भर के 59 नेताओं को इस बोर्ड में शामिल होने के लिए न्योता भेजा है, जिनमें भारत भी शामिल है। पाकिस्तान ने जहां न्योता स्वीकार कर लिया है वहीं, भारत ने अब तक इस पर फैसला नहीं लिया है। बोर्ड का मकसद गाजा में युद्धविराम समझौते की देखरेख करना और दूसरे झगड़ों को भी सुलझाना है।