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दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ताहिर ने जुटाए लिए थे 10 करोड़ रूपए , 1.25 करोड़ से पेट्रोल, तेजाब, पिस्तौल, गोली, तलवार…

आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद और दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (अक्टूबर 17, 2020) को आरोप-पत्र दायर किया है, जिसमें उसके द्वारा की गई ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का ब्यौरा है। ED ने खुलासा किया है कि ताहिर हुसैन ने दिल्ली दंगों में इस्तेमाल किए जाने के लिए 1.25 करोड़ रुपए सिर्फ हथियार खरीदने के लिए लगाए थे।

कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के साथ ही सह-आरोपी अमित गुप्ता के खिलाफ दाखिल आरोप-पत्र पर संज्ञान लिया। ‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, ED ने अपनी जाँच के दौरान पाया कि दिल्ली दंगों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी और ताहिर हुसैन व उसके गुर्गों द्वारा हेरफेर की गई कुल राशि करीब 10 करोड़ रुपए हो जाती है।

दंगों के लिए इकट्ठा की गई इस धनराशि को शेल व डमी कंपनियों के माध्यम से नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में चल रहे धरना-प्रदर्शनों में लगाया गया। दंगों के लिए घातक हथियार जैसे पेट्रोल, तेजाब, पिस्तौल, गोली, तलवार व चाकू जैसे हथियार खरीदने के लिए सवा करोड़ रुपयों का इस्तेमाल हुआ। इन दंगों की तैयारी काफी पहले से चल रही थी। इस मामले में उसका साथ अमित गुप्ता ने दिया, जिसके नाम पर सारी फर्जी कम्पनियाँ खोली गईं।

दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन के खिलाफ ED की चार्जशीट में धारा 3 (धनशोधन), धारा 70 (कंपनियों द्वारा अपराध), और धनशोधन (रोकथाम) अधिनियम 2002 की धारा 4 के तहत आरोप तय किए गए हैं। अमित गुप्ता के खिलाफ समन और ताहिर हुसैन के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया है। अब जेल प्रशासन सोमवार (अक्टूबर 19, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्य आरोपित को अदालत में पेश करेगा।

चूँकि इस मामले की जाँच समाप्त नहीं हुई है, इसीलिए ED का कहना है कि पूरा आरोप-पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) भी दायर की जा सकती है। वहीं ताहिर के वकील रिजवान और केके मेनन ने अपने मुवक्किल को ‘परिस्थितियों का शिकार’ बताते हुए कहा कि उसे कई मामलों में आरोपित बना दिया गया है, वो एक ही साथ इतनी जगह कैसे उपस्थित रह सकता है? उन्होंने इसे ‘राजनीतिक द्वेष’ के तहत की गई साजिश करार दिया।

ED के विशेष अधिवक्ता एन के माट्टा ने अदालत को जानकारी दी कि कि ताहिर पर धोखाधड़ी, दस्तावेजों से जालसाजी और आपराधिक साजिश का भी आरोप है। उसके घर व दफ्तर सहित कई ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक सामग्रियाँ जब्त की गई हैं। इनमें दस्तावेजों के अलावा डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं। दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

इस मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट का कहना है, “अभियुक्तों की संलिप्तता के बारे में प्रथम दृष्टया पर्याप्त भड़काऊ सामग्री है।” इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (अक्टूबर 16, 2020) को इस साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए साम्प्रदायिक दंगे के मामलों में दाखिल चार आरोप-पत्रों पर संज्ञान लिया था। इनमें से दो आरोप पत्र आम आदमी पार्टी से बर्खास्त पार्षद ताहिर हुसैन और दो आरोप-पत्र निजी स्कूल मालिक फैसल फारूक के खिलाफ थे।

दिल्ली दंगा और CAA विरोधी उपद्रव : ताहिर और इशरत जहाँ सहित 5 के खाते में हुई थी 1.61 करोड़ रुपए की फंडिंग

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत में नागरिकता संशोधक कानून कई वर्षों से तुष्टिकरण पुजारियों ने ठंठे बस्ते में डाला हुआ था, क्योकि उन्हें मुस्लिम वोट के खिसकने का डर सता रहा था। तुष्टिकरण पुजारी जानते थे कि इस कानून के बनने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या मुसलमानों को बाहर निकालने का मतलब है अपने वोट बैंक को कठोर प्रहार होने से उनकी ही कुर्सी नहीं रहेगी। इस कारण इस कानून से ये सब दूरी बनाए हुए थे, लेकिन मोदी सरकार द्वारा इस कानून को बनाकर तुष्टिकरण पुजारियों के वोट बैंक पर हथौड़ा मारा जाने पर इन सब को बौखलाहट होने के कारण जगह-जगह शाहीन बाग़ बना कर समस्त देश को गुमराह कर रहे थे। 
दिल्ली सीएए विरोधी दंगों की फंडिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, एक्टिविस्ट खालिद सैफी, आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा उर रहमान और जामिया के ही मीरान हैदर को हिन्दू-विरोधी दंगों के लिए 1.61 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली थी। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में ये खुलासा हुआ है।
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों को लेकर पुलिस ने 15 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, जिन्होंने इस पूरे वारदात की साजिश रची। दिसंबर 10, 2019 को ही इशरत जहाँ के बैंक अकाउंट में एक कॉर्पोरेशन बैंक अकाउंट से 4 लाख रुपए पहुँच गए थे। जाँच में पता चला कि ये अकाउंट मूल रूप से महाराष्ट्र के महादेव विजय कस्ते के नाम से रजिस्टर्ड है। महादेव को इस बारे में कुछ पता नहीं था। वो समीर अब्दुल साई नामक व्यक्ति के पास बतौर ड्राइवर कार्यरत थे।
महादेव ने बताया कि उन्होंने समीर अब्दुल साई के कहने पर आईसीआईसीआई बैंक से 4.137 लाख का गोल्ड लोन लिया और बैंक द्वारा इतनी ही रकम उनके कॉर्पोरेशन बैंक अकाउंट में डाली गई। इसके बाद साई ने उसमें से 4 लाख रुपए इशरत जहाँ को भेजे। साई ने पूछताछ में खुलासा किया कि गाजियाबाद का इमरान सिद्दीकी उसका बिजनेस पार्टनर है। दिसंबर 2019 में उसने इशरत जहाँ, गुलजार अली और बिलाल अहमद के बैंक अकाउंट डिटेल्स देकर उनमें तुरंत 10-10 लाख रुपए ट्रांसफर करने को कहा था।
जब साई ने इतनी रकम भेजने में असमर्थता जताई तो फिर उसने इशरत जहाँ के अकाउंट में 5 लाख रुपए तुरंत डालने को कहा। वहीं इमरान रिश्ते में इशरत का देवर लगता है और उसने इशरत से 4 लाख रुपए लिए थे। उसने दावा किया कि ये रकम उसने बिजनेस के लिए ली थी। हालाँकि, उसे अपने आईटी रिटर्न में न सिर्फ ये बातें छिपाई, बल्कि पूछताछ में उन रुपयों के खर्च का हिसाब-किताब भी नहीं दे पाया।
वहीं जाँच में आगे पता चला कि इशरत जहाँ ने जनवरी 10, 2020 को खुद ही अपने बैंक अकाउंट से 4.609 लाख रुपए की निकासी कैश के रूप में की थी। जाँच में पता चला कि इस रकम का इस्तेमाल उसने अपने परिचित अब्दुल खालिद के माध्यम से हथियार खरीदने और सीएए विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग में की थी। इन हथियारों का दंगों में इस्तेमाल हुआ। दिसंबर 1, 2019 से फ़रवरी 26, 2020 तक ताहिर हुसैन से जुड़े एक बैंक अकाउंट से भी 17.25 लाख रुपए निकाले गए।
साथ ही ‘श्री साई ट्रेडर्स’ को आरटीजीएस के जरिए जनवरी 7 को 20 लाख रुपए, जनवरी 13 को 10 लाख रुपए और जनवरी 14 को 14 लाख रुपए और फिर उसी दिन 16 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। ताहिर हुसैन ने 60 लाख रुपए को कैश में बदलने के लिए ये सब किया और इसके लिए उसने कमीशन चैनल का सहारा लिया। ताहिर हुसैन ने लोगों को दंगों के लिए जुटाने, हथियार व अन्य चीजों की व्यवस्था करने और विरोध प्रदर्शनों को संचालित करने में बड़ी रकम खर्च की।
जामिया मिल्लिया इस्मालिया के एलुमनाई असोसिएशन ने इसमें बड़ा किरदार अदा किया। AAJMI के दो बैंक एकाउंट्स थे। ऊपर दी गई अवधि में इनमें से एक बैंक अकाउंट में 87.5 हजार रुपए डाले गए। शिफा उर रहमान ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के प्रबंधन के लिए 70,000 रुपए निकाले थे। AAJMI को इन कार्यों के लिए कुल 7.6 लाख रुपए मिले थे। इनमें से 5.55 लाख रुपए विदेश में कार्यरत जामिया के पूर्व छात्रों ने भेजे।
इस मामले में और जाँच जारी है लेकिन इतना खुलासा हुआ है कि इस फंडिंग को छिपाने के लिए अलग-अलग खर्चों का फेक बिल भी तैयार किया गया था। सऊदी, यूएई, ओमान और क़तर से जामिया के पूर्व छात्रों ने रुपए भेजे थे। मीरान हैदर के अकाउंट में भी इस अवधि में 86,644 रुपए ट्रांसफर हुए थे। उसके पास से मिले रजिस्टर के हिसाब से उसे दंगों को भड़काने के लिए 4.825 लाख रुपए प्राप्त हुए थे। इससे साफ़ है कि दिल्ली दंगों की फंडिंग के लिए ताहिर और इशरत सहित इन पाँचों ने जम पर फंडिंग का जुगाड़ किया था।

26 पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने दिल्ली दंगों की जांच का समर्थन कर जूलियो रिबेरियो सहित पूर्व आईपीएस अधिकारियों की मंशा पर उठाए सवाल

दिल्ली दंगों की जांच पर उठ रहे सवालों के बीच 26 पूर्व आईपीएस अधिकारी भी दिल्ली पुलिस के समर्थन में सामने आ गए हैं। उन्होंने दंगों की जांच का बचाव करते हुए पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक जूलियो रिबेरियो सहित दस पूर्व आईपीएस अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाए। 

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने जांच पर सवाल उठाने वालों को आड़े-हाथों लेते हुए कहा कि कुछ अधिकारी खुद से किसी को निर्दोष नहीं ठहरा सकते और पुलिस बल की छवि खराब करने की कोशिश नहीं कर सकते। उन्होंने दिल्ली पुलिस का समर्थन किया और एक बयान में कहा कि रिबेरियो और अन्य को इस तरह की “भारत विरोधी अभिव्यक्ति और सांप्रदायिक रवैये” का समर्थन नहीं करना चाहिए।

उन्होंने उमर खालिद और अन्य लोगों द्वारा कथित तौर पर लगाए गए कुछ विवादास्पद नारों का उल्लेख किया, जो अभी हिरासत में है। उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस के पास ऐसे किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच करने का हर अधिकार और कर्तव्य है और हिरासत में लेकर जांच, कानून की एक उचित प्रक्रिया का एक हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि अभियुक्त के पास कानून के अंतर्गत अग्रिम जमानत या नियमित जमानत पाने का अधिकार है। इसके अलावा उनके पास एक निष्पक्ष जांच का अधिकार है, जहां वह खुद को निर्दोष साबित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारियों का एक वर्ग किसी को निर्दोष घोषित करने के लिए अदालत की शक्तियों को बेकार नहीं कर सकता है। ऐसे अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा के अपने उत्तराधिकारियों की ईमानदारी या व्यावसायिकता पर संदेह करने का कोई अधिकार नहीं है।”

दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त आर एस गुप्ता, उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी आर एन सिंह, त्रिपुरा के पूर्व डीजीपी बी एल वोहरा और केरल के पूर्व डीजीपी एस गोपीनाथ समेत 26 पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने पुलिस के समर्थन वाले बयान पर हस्ताक्षर किए हैं।

पूर्व आपीएस अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि उनकी इस तरह की प्रतिकूल टिप्पणी सेवारत पुलिस अधिकारियों के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के संकल्प को कमजोर कर सकती है, जो भारत में सांप्रदायिक दंगे भड़काने के मामले में शामिल रहे हैं।

जूलियो रिबेरियो सहित कुछ पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाया है और दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के एक समूह को निशाने पर लेने जबकि कुछ भाजपा नेताओं सहित अन्य लोगों के प्रति नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।