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गाय के गोबर से बिजली पैदा कर रहे ब्रिटिश किसान, 1 किलो गोबर से मिल रही 3.75 kWh बिजली

भारत में किसान कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलन कर कोहराम मचा रहे हैं, और हिन्दू विरोधी गाय को काट गौरवविंत हो रहे हैं, विपरीत इसके ब्रिटेन के किसान अब गाय के गोबर से बिजली पैदा कर के अच्छी कमाई कर रहे हैं। ये किसान गाय के गोबर का इस्तेमाल कर के AA साइज की ‘पैटरी (बैटरी)’ तैयार कर रहे हैं। इन ‘Patteries’ को रिचार्ज भी किया जा सकता है। अब माना जा रहा है कि ये रिचार्जेबल ‘पैटरीज’ ब्रिटेन की रिन्यूवेबल एनर्जी की दिशा में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। अनुसंधान में सामने आया है कि 1 किलो गाय के गोबर से 3.75 kWh (किलोवॉट ऑवर) बिजली पैदा की जा सकती है।

इसे कुछ यूँ समझिए कि एक किलो गाय के गोबर से पैदा हुई बिजली से एक वैक्यूम क्लीनर को 5 घंटे तक संचालित किया जा सकता है, या फिर 3.5 घंटे तक आप आयरन का इस्तेमाल करते हुए कपड़ों पर इस्त्री कर सकते हैं। इन बैटरियों को ‘Arla’ नाम की डेयरी कोऑपरेटिव संस्था ने बनाया है। इस कार्य में ‘GP बैटरीज’ नाम की बैटरी कंपनी ने किसानों की मदद की है। दोनों कंपनियों ने बताया है कि एक गाय से मिलने वाले गोबर से 1 साल तक 3 घरों को बिजली दी जा सकती है।

इस हिसाब से देखा जाए तो अगर 4.6 लाख गायों के गोबर को एकत्रित किया जाए और ऊर्जा के उत्पादन में उनका उपयोग किया जाए तो इससे यूनाइटेड किंगडम के (UK) के 12 लाख घरों में साल भर बिजली की कमी नहीं होगी। विशेषज्ञ इसे ‘विश्वसनीय और सुसंगत’ स्रोत बता रहे हैं, जिससे बिजली पैदा हो सकती है। अकेले ‘Arla’ कंपनी की गायों से हर साल 10 लाख टन गोबर मिलता है। ‘Anaerobic Digestion (अवायवीय पाचन)’ की प्रक्रिया द्वारा गोबर से ऊर्जा प्राप्त की जा रही है।

इस प्रक्रिया के तहत गोबर को बायोगैस और बायो-फर्टिलाइजर में तोड़ दिया जाता है। ब्रिटिश किसानों का कहना है कि ये एक इनोवेटिव प्रयास है, जो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध गोबर का सदुपयोग कर के ब्रिटेन की एक बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है। उनका कहना है कि अपने खेतों और पूरे एस्टेट में वो इसी ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसकी क्षमता इससे कहीं ज्यादा है। यहाँ तक कि गोबर से ऊर्जा बनाने के बाद जो वेस्ट बचता है, उसका उपयोग खेतों में खाद के रूप में किया जाता है।

बताई गई प्रक्रिया के तहत जब एक बार बायोगैस को निकाल लिया जाता है, इसे ‘कंबाइंड हीट एंड पॉवर (CHP)’ यूनिट में ले जाया जाता है, जहाँ गोबर से ऊर्जा, अर्थात बिजली का उत्पादन होता है। बायोगैस और बायो-फर्टिलाइजर में गोबर को तोड़ने की प्रक्रिया को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में किया जाता है। इसे एक ‘Anaerobic Digestor’ नाम के सीलबंद ऑक्सीजन रहित टैंक में किया जाता है। इसके एन्ड प्रोडक्ट के रूप में बायोगैस प्राप्त होता है।

ये न्यूट्रिएंट्स में काफी रिच होता है। साथ ही एमिशन को भी कम करता है। ये एक प्राकृतिक खाद भी है, जो खेत की मिट्टी की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देता है। इस तरह सस्टेनेबल फार्मिंग होता है, वो भी अधिक एमिशन के बिना। ‘Arla’ के पास फ़िलहाल 4.60 लाख गायें हैं। हालाँकि, अभी छोटी संख्या में किसान ही गाय के गोबर से बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। लेकिन, रिन्यूवेबल एनर्जी की दिशा में ये गेम चेंजर साबित हो सकता है, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।