कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु में YouTuber अजीत भारती पर FIR कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु पुलिस ने YouTuber एवं पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ FIR दर्ज की है। उन पर ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया है। M सैमुअल द्रवियन MC की शिकायत पर ये केस दर्ज किया गया है, जो चेन्नई ईस्ट में कांग्रेस पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि अजीत भारती ने दावा किया था कि राहुल गाँधी अयोध्या के राम मंदिर को ध्वस्त कर उसकी जगह फिर से बाबरी मस्जिद को खड़ी कर देंगे।
FIR में यूट्यूबर पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने और जनता के बीच घृणा फैलाने के लिए द्वेषपूर्ण भावना के साथ भ्रामक सूचना फैलाने का आरोप मढ़ा गया है। इसके लिए ‘X’ को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) के तहत नोटिस भी जारी किया गया है। सोमवार (15 जुलाई, 2024) को चेन्नई के वेपेरी स्थित सेन्ट्रल क्राइम ब्रांच के साइबर क्राइम पुलिस थाने के इंस्पेक्टर ने इस पर हस्ताक्षर किया। जिस पोस्ट को लेकर ये मामला दर्ज किया गया है, वो 13 जून, 2024 का है।
अजीत भारती के खिलाफ पूर्ववर्ती IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (मजहब-भाषा इत्यादि के आधार पर विभिन्न समूहों को लड़ाने के उद्देश्य से काम करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उनके खिलाफ IPC की धारा-505(1)(b) भी लगाई गई है, जो जनता के बीच डर बनाने के उद्देश्य से कोई बयान जारी करने पर दर्ज की जाती है। ‘X’ से अजीत भारती के हैंडल के संबंध में कई जानकारियाँ माँगी गई हैं, जैसे उनके डिवाइस, लॉगिन-लॉआउट का समय और ईमेल-फोन नंबर।
कर्नाटक कॉन्ग्रेस की धमकी और FIR के बाद अब तमिलनाडु कॉन्ग्रेस @tnpoliceoffl का दुरुपयोग कर रही है। जिस केस में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्थगन का आदेश दे रखा है, उस पर कथित घटना और केस पर स्टे के बाद, वापस दूसरे राज्य में केस करना क्या बताता है?
अजीत भारती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि जिस केस में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्थगन का आदेश दे रखा है, उस पर कथित घटना और केस पर स्टे के बाद, वापस दूसरे राज्य में केस करना क्या बताता है? बता दें कि कर्नाटक सरकार ने उनके NCR स्थित फ़्लैट के पास अपने कुछ पुलिसकर्मी भेजे थे। बाद में यूपी पुलिस इन पुलिसकर्मियों को ले गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने अजीत भारती को राहत दी थी। अब तमिलनाडु में केस हुआ है, जहाँ DMK अध्यक्ष MK स्टालिन मुख्यमंत्री हैं और कांग्रेस सत्ता में साझीदार है।
सादे कपड़ों में मौजूद कर्नाटक पुलिस के जवान (बाएँ) उनसे पूछताछ करती यूपी पुलिस (वर्दी में) और पत्रकार अजीत भारती (टीशर्ट में, दाएँ) कॉन्ग्रेस सरकारे राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने पत्रकार अजीत भारती के घर पुलिस भेजी है। कर्नाटक पुलिस के कुछ जवान सादी वर्दी में बिना किसी पूर्व सूचना के अजीत भारती के घर पहुँचे हैं।
जानकारी के अनुसार, कर्नाटक पुलिस के तीन जवान गुरुवार (20 जून, 2024) को नोएडा स्थित अजीत भारती के आवास पर पहुँचे। यहाँ वह लोग कुछ देर खड़े रहे। इसके बाद उन्होंने एक नोटिस अजीत भारती को दिया। कर्नाटक पुलिस के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस भी नहीं थी।
इस विषय में ऑपइंडिया को अजीत भारती ने बताया कि कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने स्थानीय यूपी पुलिस के थाने को सूचना दी थी लेकिन बिना साथ लिए ही वह उनके आवास पर पहुँच गए थे। यह तीनों अजीत भारती के घर एक कैब से पहुँचे थे और उन्होंने वर्दी भी नहीं पहन रखी थी। अपने घर के आसपास अजीत भारती और उनके परिवार ने संदिग्ध गतिविधि देख कर स्थानीय पुलिस थाने को सूचना दी।
इसके बाद स्थानीय पुलिस यहाँ पहुँची और कर्नाटक पुलिस के इन तीनों जवानों को अपने साथ ले गई। कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने अजीत भारती को हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले में एक नोटिस भी थमाया है। यह नोटिस बेंगलुरु के हाई ग्राउंड थाने से जारी किया गया है।
अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने यह नोटिस दिया है
नोटिस में कहा गया है कि अजीत भारती ने समाज में घृणा और शत्रुता बढ़ाने के उद्देश्य से राहुल गाँधी को लेकर एक वीडियो बनाया है। इसी को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने आदेश दिया है कि वह नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर हाई ग्राउंड थाने में पेश हों।
अजीत भारती के खिलाफ यह FIR 15 जून, 2024 को दर्ज करवाई गई थी। ये एफआईआर कॉन्ग्रेस कर्नाटक के कॉग्रेस कमेटी के लीगल सेल सचिव और सचिव बेके बोपन्ना ने कराई थी। FIR दर्ज कराते समय दावा किया गया था कि अजीत भारती ने 13 जून, 2024 को राहुल गाँधी को लेकर एक झूठा वीडियो बनाया जबकि गुरूवार (20 जून, 2024) को उनको दिए गए नोटिस में कहा गया है उनका वीडियो घृणा फैला रहा है इसलिए FIR दर्ज हुई है।
कांग्रेस की फितरत में मोदी से नफरत के सिवा कोई दूसरी सोच है ही नहीं जो उसके हर काम में कमी निकालती है।
दो दिन पहले G7 में वेटिकन से आए पोप ने मोदी को गले लगा कर बड़ी आत्मीयता के साथ भेंट की लेकिन यह कांग्रेस को रास नहीं आई और निशाना साधना चाहा मोदी पर। इसके लिए केरल कांग्रेस ने X पर लिखा - “Finally the Pope Get chance to meet God”
जब भाजपा ने आड़े हाथों लिया तो ट्वीट हटा दिया और ईसाई समुदाय से माफ़ी मांग ली। लेकिन कांग्रेस ने अपमान किसका किया? पोप का या मोदी का? मेरा मानना है कांग्रेस ने मोदी को God कह दिया और जीसस से भी उपर कर दिया मोदी को (भगवान कह दिया)।
एलन मस्क के EVM पर बोलते ही राहुल गांधी ने उल्टा तीर पकड़ लिया और कूद पड़ा बीच में जबकि EVM के रहते ही भाजपा की सीट 240 रह गई और कांग्रेस की 52 से 99 हो गई। मतलब, तू कौन, मैं खामख्वाह?
लेखक चर्चित YouTuber
खुदा ने गंजे को नाखून नहीं दिए। अभी तो कांग्रेस सत्ता में आई नहीं और बिना आये ही Emergency का माहौल बना रही है।
जो हमें पसंद है, वही बात करो। वरना केस पर केस ठोक देंगे।
अर्नब गोस्वामी पर ठोके 100 केस; कांग्रेस जो मर्जी बोले लेकिन अर्नब के सोनिया को original नाम से पुकार लिया तो उस पर 100 FIR कर दी। मतलब बोलने की आज़ादी नहीं देना चाहती कांग्रेस।
अजित भारती पर बेंगलुरु में केस ठोक दिए falsely claimed that Rahul Gandhi intended to restore the Babri Masjid in place of Ram Mandir in Ayodhya.
तो क्या राहुल गांधी राम मंदिर का समर्थन करता है? अजीत भारती ने वही दोहराया जो आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया था कि राहुल गांधी ने कुछ खास लोगों के साथ मीटिंग में कहा था कि यदि कांग्रेस सरकार होती तो Super Commission बना कर राम मंदिर का फैसला पलट देते। प्रमोद कृष्णम पर तो कोई FIR न होने का मतलब है आचार्य कृष्णम ने और अजीत भारती दोनों ने सही कहा।
इसी राहुल गांधी ने पादरी George Ponnaiah से मुलाकात की थी भारत जोड़ो तोड़ो यात्रा में जबकि पादरी ने भारत माता का अपमान करते हुए कहा कि ईसाई जूते इसलिए पहनते हैं क्योंकि भारत की भूमि देवी की गंदगी हमारे पैर में न लगे।
George Ponnaiah ने राहुल से मुलाकात में कहा था कि “Jesus is the only God unlike Shakti (& other Gods)".
शायद तब ही राहुल गांधी के दिमाग में “शक्ति” से लड़ने का भूत सवार हुआ था।
भारत माता का और हिंदू धर्म का अपमान करने वाले और मोदी अमित शाह के लिए अपशब्द कहने वाले पादरी से राहुल गांधी मिलता है तो हिंदू धर्म का समर्थक कैसे हो गया?
आए दिन मुस्लिम और उनके संगठन राम मंदिर को तोड़ने की धमकी देते हैं। कभी राहुल ने विरोध किया है क्या? एक दिन पहले बकरे पर राम लिख कर काटने की तैयारी थी, क्या राहुल ने और कांग्रेस ने विरोध किया?
चंद्रचूड़ का लाड़ले मोहम्मद जुबैर ने भारती के बड़ा वीडियो को 40 सेकंड का बना कर झूठ फैला दिया। लेकिन बंगाल में हुई गऊ हत्या पर उसके घर ईद के दिन मातम होने की वजह से बोल नहीं पा रहा। बंगाल में बकरीद मनाने का दृश्य.. 200 से ज्यादा गाय काटी गई इस रेसिडेंसियल कॉप्लेक्स के सामने वो बकरीद पर खून की नदिया भी बहाए तो सही हम होली को पानी भी बहाए तो अपराध।
भारती ने अगर झूठ बोला भी है तो क्या गलत है क्योंकि चंद्रचूड़ तो मणिपुर के अपने फैसले में कह चुके हैं कि पत्रकार गलत रिपोर्टिंग भी कर सकते हैं।
अमन चोपड़ा, youtuber मनीष कश्यप के खिलाफ भी ऐसे ही फर्जी केस दागे गए और तजिंदर बग्गा का अपहरण करके पंजाब ले जाने की कोशिश की गई।
मतलब साफ़ है हम सत्ता में हों या नहीं “Emergency” लगा देंगे, हम किसी को बोलने की आजादी नहीं देंगे।
विपक्ष का नेता नहीं बना पा रहे लेकिन Speaker NDA का न बने इसका जुगाड़ लगा रहे हो।
आज जयराम रमेश कह रहा है 2014 के बाद से NCERT RSS की शाखा बनकर काम कर रहा है। ये संगठन 1961 में बना था और और 2014 तक 3 साल जनता पार्टी और 6 साल अटल जी की सरकार के निकाल दो तो, फिर 44 साल तक को कांग्रेस का Mouthpiece रहा होगा?
बेशर्म हरामफरमोश 'राष्ट्रीय मुस्लिम मंच' मुस्लिमों का उपयोग नहीं कर पायेगा लेकिन मुस्लिम, RSS का उपयोग कर लेंगे
क्या हुआ? कितने मुगलमान वोट मिले इसके पदाधिकारियों के क्षेत्र में? स्वयं इसके पदाधिकारियों ने वोट नहीं दिए।
इसी तरह सरसंघचालक का 'डीएनए' बयान हो या मोदी जी का 'अब्बास', इनकी आवश्यकता क्या है?
अल्पसंख्यक योजनाओं में नोटों की बारिश और यूपीएससी, सेना में बढ़ते मुगलमान।
बंगाल में हिन्दुओं के जेनो साइड पर चुप्पी।
मोदी सरकार की इस आत्ममुग्ध कूटनीति को न तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय मान्यता देता है और ना मुगलमान, लेकिन हां सनातन समुदाय के शत्रुताबोध को जरूर कन्फ्यूज कर देते हैं।
संघ के अंदर चल रहा राष्ट्रीय मुग्लिम मंच का नाटक बंद किया जाए ।
नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है और उनके साथ-साथ 71 सांसदों ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। इन 71 मंत्रियों में से 30 ने कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार वाले और 36 ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली है। इनमें 27 ओबीसी से हैं, 10 एससी वर्ग से आते हैं, तीन आदिवासी और सात महिलाओं को भी मंत्री बनाया गया है। सबसे अधिक प्रतिनिधित्व ओबीसी को मिला है। मोदी सरकार के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं और अब एक नया रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया है। आजादी के बाद यह पहली सरकार है जिसमें कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है। यह एक तथ्य है कि इस बार एनडीए से कोई भी मुस्लिम जीतकर संसद नहीं पहुंचा है लेकिन मोदी सरकार में मुस्लिम मंत्री नहीं होने से लेफ्ट लिबरल और खान मार्केट गैंग को मिर्ची लग गई है। ये वही लोग हैं जो इजरायस-फिलिस्तीन युद्ध में गाजा के लिए तो हमदर्दी जताते हैं लेकिन अपने ही देश में जम्मू-कश्मीर के रियासी में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा निर्दोष हिंदुओं के मारे जाने पर चुप्पी साध लेते हैं। इस तरह उनका दोहरा चरित्र उजागर होता रहता है लेकिन शर्म इनको मगर नहीं आती!
लेफ्ट लिबरल और खान मार्केट गैंग हर वक्त उस समुदाय के बचाव में खड़ा हो जाता है जो कहता है कि हम टैक्स नहीं देंगे लेकिन हमें खटाखट 8500 चाहिए। हम वोट नहीं देंगे, लेकिन हमें मंत्रालय चाहिए। हम अंगदान नहीं करेंगे लेकिन हम अंग प्राप्त करना चाहते हैं। हम परिवार नियोजन नहीं करेंगे लेकिन हमें नौकरी चाहिए। हमारा धार्मिक पर्सनल लॉ हैं लेकिन आपराधिक कानून धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। इससे समझा जा सकता है कि कोई इतना बेशर्म कैसे हो सकता है?
हिन्दुओं आंखे खोलो, देखो ये सनातन विरोधी हिन्दू कट्टरपंथियों की गोदी में बैठ देश को कहाँ लें जा रहे हैं:
बीजेपी ने कई बार मुस्लिमों को टिकट दिया परन्तु सभी की जमानत जब्त हुई। पिछले चुनावों में विस्तार से लिख चुका हूँ। इस सन्दर्भ में याद आती है बीजेपी (तत्कालीन भारतीय जनसंघ) तत्कालीन चावड़ी बाजार(वर्तमान मटिया महल) विधान सभा क्षेत्र से जीते महानगर पार्षद(विधायक) अनवर अली देहलवी, जो मुस्लिमों पर कटाक्ष करते अक्सर कहते थे कि "मै हिन्दू वोटों से जीता हूँ, मुसलमानों की वोट से नहीं।" संक्षेप में मंडल का अध्यक्ष मुसलमान और उसी के पोलिंग से बीजेपी को वोट मिली 'जीरो', उम्मीदवार हिन्दू क्षेत्रों से जीतता हुआ आ रहा है, लेकिन जब मुस्लिम क्षेत्रों की EVM खुलती है बीजेपी उम्मीदवार अपनी lead(बढ़त) कम ही नहीं करता बल्कि अपनी जमानत जब्त करवा लेता है। दूसरे, इन बेशर्म मुसलमानों को देखो, उत्तर प्रदेश के एक क्षेत्र में 285 PM Awas Yojna में मुसलमान लेकिन बीजेपी को वोट मिला जीरो(0), अब इसे नमक हराम नहीं कहा जायेगा। बेशर्मो को बीजेपी से चाहिए सबकुछ, लेकिन वोट नहीं देंगे।
हिन्दू जात-पात और आरक्षण की चाशनी में बंटा रहता है, लेकिन मुसलमान नहीं। जबकि मुसलमानों में हिन्दुओं से अधिक जातियां है, शिया सुन्नी की मस्जिद में नमाज़ नहीं पढ़ सकता, अपने मुर्दे को दूसरे के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकता। यह एक ही उदाहरण है। सनातन हिन्दू जाति आधारित जनगणना चाहता है, लेकिन मुस्लिम जाति आधारित जनगणना नहीं। याद करो CAA विरोध में अरफ़ा खानम ने क्या बकवास की थी, विस्तार से लिख (शीर्षक: जब तक भारत इस्लामिक मुल्क नहीं बन जाता, तिरंगा उठाना है)चुका हूँ, किसी छद्दम सेक्युलरिस्ट हिन्दू ने इसका विरोध नहीं किया, क्यों? लेकिन बेशर्म हिन्दू जब भी सोया रहा और आज भी सो रहा है।
देखिए हिन्दुओं की दूषित मानसिकता को दर्शाते वीडियो :-
एनडीए से कोई भी मुस्लिम जीतकर संसद नहीं पहुंचा
2024 में एनडीए के किसी भी सहयोगी दल से कोई भी मुस्लिम जीतकर संसद नहीं पहुंचा है। जेडीयू, टीडीपी और एलजेपी से कोई भी मुस्लिम न ही लोकसभा सदस्य है और न ही राज्यसभा सांसद। गुलाम अली खटाना मनोनीत राज्यसभा सांसद हैं, जो जम्मू-कश्मीर से आते हैं और बीजेपी के कद्दावर नेता हैं। आजादी के बाद पहली सरकार है, जिसमें कोई भी मुस्लिम मंत्री शामिल नहीं है।
आजादी के बाद पहली सरकार जिसमें मुस्लिम मंत्री नहीं
मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल आजादी के बाद पहली सरकार है जिसके मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य है। हालांकि शून्य प्रतिनिधित्व का सिलसिला जुलाई 2022 से जारी है, जब सरकार के इकलौते मुस्लिम मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के कारण उच्च सदन में नहीं पहुंच सके थे।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 3 मुस्लिम मंत्री
मोदी सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सिलसिला तीन से शुरू हो कर अब शून्य पर अटक गया है। पहले कार्यकाल में मोदी मंत्रिमंडल में नजमा हेपतुल्ला, एमजे अकबर और नकवी के रूप में तीन मुसलमानों का प्रतिनिधित्व था। हालांकि इसी कार्यकाल में मी टू अभियान के निशाने पर आए अकबर को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा तो हेपतुल्ला के राज्यपाल बनने के बाद नकवी के रूप में मुसलमानों का इकलौता प्रतिनिधित्व रह गया था।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 1 मुस्लिम मंत्री
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुख्तार अब्बास नकवी मंत्रिमंडल में मुसलमानों के इकलौते प्रतिनिधि थे। हालांकि जुलाई 2022 में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहते नकवी का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया। दोबारा टिकट नहीं मिलने के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और इसके साथ ही मोदी मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया।
मोदी समर्थक मुस्लिमों का जीना मुहाल कर देते हैं खान मार्केट गैंग
यही नहीं, अगर कोई मुसलमान मोदी समर्थक बन जाए या बीजेपी उसे किसी अच्छे पद की जिम्मेदारी सौंपे तो ये लेफ्ट लिबरल उसकी धज्जियां उड़ाने में भी कोर-कसर नहीं छोड़ते। इन लोगों का इतिहास उन मुसलमानों पर हमला करने का है जो भाजपा समर्थक हैं। वे केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से नफरत करते हैं। अगर कोई मोदी विरोधी से मोदी प्रशंसक बन जाए तो ये उनका जीना मुहाल कर देते हैं। शेहला रशीद जैसे कई नाम हैं जो पीएम मोदी के विकास कार्य से प्रभावित होकर मोदी प्रशंसक बन गए लेकिन खान मार्केट गैंग ने ट्रोल करके उसे नीचा दिखाने का कोई प्रयास नहीं छोड़ा। शेहला रशीद इसका ताजा उदाहरण है। जब वो मोदी की नीतियों की प्रशंसक बनी हैं उन्हें लगातार ट्रोल किया जाता है।
आरफा खानम शेरवानी: आरफा खानम ने पीएम मोदी के शपथ समारोह में शामिल होने के लिए शाहरुख पर हमला बोला। उन्होंने पहले शाहरुख खान की फोटो के साथ ट्वीट किया- ”ऐसी क्या मजबूरी थी।” लेकिन असल में उनका दर्द कुछ और कारण से ही था कि वहां कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है।
राजदीप सरदेसाईः राजदीप ने लिखा- 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में हर जाति, समुदाय, राज्य का व्यापक प्रतिनिधित्व है, जिसमें 7 पूर्व सीएम अनुभव भी है। बस एक पहलू गायब है: एक बार फिर मंत्री पद की सूची में एक भी मुस्लिम नहीं है। सच तो यह है कि पिछले दशक में भारतीय मुसलमानों को राजनीतिक रूप से ‘अदृश्य’ कर दिया गया है।
72 member council of ministers has wide representation from every caste, community, state, with 7 former CMs providing the weight and wealth of experience. Just one aspect missing: yet again not a single Muslim in the ministerial list . Not one. Truth is, Indian Muslims have been…
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) June 9, 2024
सबा नकवी: मुस्लिम मंत्री को लेकर पत्रकार सबा नकवी ने भी मोदी सरकार को सलाह दे डाली। उन्होंने कहा कि जैसा कि मोदी सरकार ने गैर-निर्वाचित लोगों को कैबिनेट में शामिल करके ईसाई और सिखों को प्रतिनिधित्व दिया है। मोदी शासन के लिए भारत की आबादी का 14 प्रतिशत मुस्लिम को शामिल करना अच्छा होगा।
As they have done with Christian and Sikhs by inducting non elected people into cabinet, it would be good form for #Modi regime to induct a Muslim, 14 per cent of India’s population. On TV last night both JD U and TDP spokies told me not to critique as this is not final cabinet.…
मदरसों में फैलाया जा रहा हिंदू त्योहारों के प्रति नफरत
मदरसों में एक तरफ हिंदू त्योहारों के प्रति नफरत फैलाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ तथाकथित सेक्युलर गैंग सरकार में मुस्लिम मंत्री की मांग कर रहा है। नीचे वीडियो में देखिए किस तरह छोटे-छोटे बच्चों के मन में हिंदू त्योहारों के प्रति नफरत का भाव भरा जा रहा है। इसी तरह के पाठ से बच्चों के मन में कट्टरता का भाव भर जाता है।
मुस्लिम मंत्री की मांग ❓
अगर मुसलमान मोदी को हराने के लिए वोट करता है तो ये साफ है कि मुसलमान मोदी विरोधी नही बल्कि मोदी को अपना दुश्मन समझता है।
जब मुसलमान मोदी को अपना दुश्मन समझता है तो मोदी से उसे कुछ भी मांगने का कोई हक नही।
मोदी सरकार में सबसे ज्यादा ओबीसी मंत्री बनाए गए हैं।
मोदी सरकार में 21 सवर्ण मंत्री
मोदी सरकार में 21 सवर्ण मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें अमित शाह, एस जयशंकर, मनसुख मांडविया, राजनाथ सिंह, जितिन प्रसाद, जयंत चौधरी, धर्मेन्द्र प्रधान, रवणीत बिट्टू, नितिन गड़करी, पीयूष गोयल, मनोहर लाल खट्टर, जितेंद्र सिंह, गजेंद सिंह शेखावत, संजय सेठ, राम मोहन नायडू, सुकांत मजूमदार, प्रह्लाद जोशी, जे पी नड्डा, गिरिराज सिंह, ललन सिंह, सतीश चंद्र दुबे शामिल हैं।
मोदी सरकार में 27 ओबीसी मंत्री
मोदी सरकार में 27 ओबीसी मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें सीआर पाटिल, पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल, बीएल वर्मा, रक्षा खड़से, प्रताप राव जाधव, शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राव इंद्रजीत सिंह, कृष्णपाल गुर्जर, भूपेंद्र यादव, भगीरथ चौधरी, अन्नपूर्णा देवी, शोभा करंदलाजे, एचडी कुमारस्वामी, नित्यानन्द राय शामिल हैं।
मोदी सरकार में 10 दलित मंत्री
मोदी सरकार में 10 दलित मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें एस पी बघेल, कमलेश पासवान, अजय टम्टा, रामदास आठवले, वीरेंद्र कुमार, सावित्री ठाकुर, अर्जुन राम मेघवाल, चिराग़ पासवान, जीतन राम मांझी, रामनाथ ठाकुर शामिल हैं।
मोदी सरकार में 3 आदिवासी मंत्री
मोदी सरकार में 3 आदिवासी मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें जुएल ओराम, श्रीपद येसो नाइक, सर्वानंद सोनोवाल शामिल हैं।
राममोहन नायडू सबसे युवा मंत्री
मोदी की मंत्रिपरिषद में शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, एचडी कुमारस्वामी और जीतन राम मांझी जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को जगह दी गई। टीडीपी के राममोहन नायडू (36) सबसे युवा कैबिनेट मंत्री हैं। 71 में से 33 नेताओं ने पहली बार केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली है।
चुनाव हारने वालों को भी जगह
लुधियाना से लोकसभा चुनाव हारने वाले रवनीत सिंह बिट्टू और तमिलनाडु की नीलगिरि लोकसभा सीट से चुनाव हार चुके एल मुरुगन को भी मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है।
इन महिला नेताओं को मंत्रिपरिषद में मिली जगह
मंत्रिपरिषद में सात महिलाओं को जगह मिली है। झारखंड के कोडरमा से सांसद अन्नपूर्णा देवी को पदोन्नति मिली है। अब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।