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प्रयागराज महाकुंभ : सृजित हुआ 3 लाख करोड़ रूपए का कारोबार, 56.25 करोड़ श्रद्धालु लगा चुके हैं डुबकी: व्यापार और आस्था-संस्कृति का नया बेंचमार्क स्थापित

                                                            प्रयागराज महाकुंभ
महाकुम्भ को लेकर सनातन विरोधी खुलकर सामने आ गए हैं। अभिनेता से लेकर नेता तक सब बेनकाब हो गए हैं। महाकुम्भ को आरोपित करने हिन्दू नहीं बल्कि कालनेमि राक्षस जाति के हैं। राक्षसों का काम उपद्रव करना, ऋषि-मुनियों के यज्ञ में विध्न डालना होता था, वही काम कलयुगी कालनेमि कर रहे हैं। हिन्दू तीर्थों को विवादित बना साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाले ये ही लोग हैं। 

इतिहास साक्षी है कि सनातन विरोधी धीरे-धीरे पतन की ओर जा चुके हैं। 'हवा में उड़ गए जय श्रीराम' कहने वाली मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी ही हवा हो गयी और उसी राह पर समाजवादी पार्टी जा रही है और कांग्रेस भी पीछे नहीं। कांग्रेस पुरानी पार्टी होने की वजह से अपनी कुछ पहचान रखे हुए हैं।        

प्रयागराज महाकुंभ अपने अवसान पर है। दुनिया का सबसे बड़ा समागम कुंभ सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक केंद्र बनकर भी उभरा है। कुंभ के लगभग 40 दिनों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए (360 अरब अमेरिकी डॉलर) का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसकी जानकारी अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) ने दी है।

CAIT के महासचिव और चाँदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कुंभ ने आस्था और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के कारण स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि महाकुंभ थीम पर आधारित उत्पादों जैसे डायरी, कैलेंडर, जूट बैग और स्टेशनरी की माँग में भारी वृद्धि हुई है। सावधानीपूर्वक ब्रांडिंग के कारण बिक्री में वृद्धि हुई है।

खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ के शुरुआत होने से पहले प्रारंभिक अनुमानों में 40 करोड़ लोगों के आने और लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का कारोबार होने का अनुमान लगाया गया था। हालाँकि, 40 दिनों में महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 18 फरवरी तक 56 करोड़ पहुँच चुकी है। महाकुंभ 26 फवरी तक है। ऐसे में यह आँकड़ा कम से कम 60 करोड़ पहुँचने का अनुमान है।

श्रद्धालुओं की इस आँकड़े के साथ ही कारोबार भी 3 से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके कारण उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त वृद्धि हुई है और रोजगार के नए साधन भी पैदा हुए हैं। खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ के कारण कई व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियाँ देखी गई हैं, जिनमें आतिथ्य और आवास, खाद्य और पेय क्षेत्र, परिवहन और रसद प्रमुख हैं।

इसके अलावा, धार्मिक पोशाक, पूजा सामग्री, हस्तशिल्प, वस्त्र, अन्य उपभोक्ता सामान, स्वास्थ्य देखभाल एवं कल्याण सेवाएँ, मीडिया, विज्ञापन एवं मनोरंजन, नागरिक सेवाएँ, दूरसंचार, मोबाइल, एआई-आधारित तकनीक, सीसीटीवी कैमरे और अन्य उपकरण आदि से संबंधित व्यवसायिक क्षेत्रों के कारोबार में भारी उछाल देखने को मिला है।

खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ से संबंधित आर्थिक फायदा सिर्फ प्रयागराज तक ही सीमित नहीं है। इसका असर प्रयागराज के 150 किलोमीटर क्षेत्र की परिधि में देखने को मिला है। इसके अलावा, अयोध्या, काशी, मथुरा, विंध्याचल में श्रद्धालुओं के जाने के कारण इन शहरों एवं उसके आसपास के इलाकों में भी भारी आर्थिक गतिविधियाँ हुई हैं, जिसका फायदा लोगों और सरकार को हुआ है।

खंडेलवाल के अनुसार, महाकुंभ ने भारत में व्यापार, वाणिज्य, कारोबार, सांस्कृतिक क्षेत्र में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ को लेकर प्रयागराज में फ्लाईओवर, सड़कों और अंडरपास के सुधार के लिए 7500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इनमें से 1,500 करोड़ रुपए महाकुंभ व्यवस्था के लिए निर्धारित किए गए थे।

महाकुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 19 फरवरी को 2 बजे तक 56.25 करोड़ लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। उन्होंने कहा, “जब हम सनातन धर्म, मां गंगा, भारत या महाकुंभ के खिलाफ कोई निराधार आरोप या फर्जी वीडियो बनाते हैं तो यह इन 56 करोड़ लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।”

सीएम योगी ने कहा, “यह आयोजन किसी पार्टी या संगठन विशेष का नहीं, यह आयोजन समाज का है। सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सेवक के रूप में है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमारी सरकार को इस सदी के महाकुंभ से जुड़ने का अवसर मिला। देश और दुनिया ने इस आयोजन में भाग लिया है और तमाम झूठे अभियानों को दरकिनार करते हुए इसे सफलता की नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है।”

भगदड़ में हुई मौत को लेकर सीएम योगी ने कहा, “महाकुंभ के सात दिन बचे हैं। हमारी संवेदनाएँ उन सभी लोगों के साथ हैं, जो 29 जनवरी को भगदड़ के शिकार हुए। हम उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने कुंभ के लिए यात्रा करते समय सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गँवाई। हमारी संवेदनाएँ परिजनों के साथ हैं। सरकार उनके साथ खड़ी है और उन्हें हरसंभव मदद करेगी। इस पर राजनीति करना उचित नहीं है।”

मालदीव : राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की जाएगी कुर्सी? अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू: एक्शन में डेमोक्रेट नेता, टूरिस्ट यूनियन ने भी घेरा

भारत एवं भारत से बाहर जितने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिन्दू विरोधी चेहरे हैं, धीरे-धीरे बेनकाब होने शुरू हो गए हैं। पाकिस्तान हो, कनाडा हो या कोई भी देश, अब ताजा मामला मालदीव का आया है। 

हकीकत में जब तक भारत अथवा हिन्दू विरोधियों को आर्थिक चोट नहीं पहुंचाए जायगी, ये सुधरने वाले नहीं। यदि #boycott Maldive  भविष्य में भी जारी रहा, इसकी पाकिस्तान से ज्यादा बुरी हालत हो जाएगी। 

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Maldives President Mohamed Muizzu) की कुर्सी जा सकती है, उनकी सरकार गिर सकती है। मालदीव में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मालदीव की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अली अजीम ने राष्ट्रपति मुइज्जू को पद से हटाने और उनकी सरकार को गिराने के लिए अन्य नेताओं से अपील की है।

मालदीव में संसदीय अल्पसंख्यक नेता अली अजीम ने सोमवार (8 जनवरी 2024) को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का आह्वान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से बेदखल करने में मदद करने की अपील की। अली अजीम ने लिखा: “डेमोक्रेट पार्टी से जुड़े हम लोग देश की विदेश नीति की स्थिरता को बनाए रखने और किसी भी पड़ोसी देश को अलग-थलग होने से रोकने के लिए समर्पित हैं। क्या आप राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से हटाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं? क्या मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की शुरुआत करेगी?”

सांसदों, कई बड़े नेताओं, पूर्व राष्ट्रपतियों के अपने ही सरकार के खिलाफ बयान के बाद मालदीव की टूरिस्ट यूनियन (MATI: Maldives Association of Tourism Industry) ने मुइज़्ज़ू सरकार के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। उधर मालदीव को जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी कमी आ गई है। भारत की सबसे बड़ी व्यापार संस्था CAIT ने भी भारतीय व्यापारियों से मालदीव से व्यापार ना करने की अपील की है। यह भी सामने आया है कि वर्तमान में चीन की यात्रा पर गए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा को लेकर भी मालदीव ने प्रस्ताव रखा है।

मालदीव की टूरिस्ट यूनियन ने की आलोचना

मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। इसने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया है। MATI ने कहा है, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”
MATI ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के समय भारत ने उनकी काफी सहायता की थी। उसके कारण भारत और मालदीव के रिश्ते बढ़ते रहे। MATI ने लोगों को ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी, जिनका रिश्तों पर बुरा असर हो।

सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था ने किया मालदीव का बहिष्कार

भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने देश के सभी कारोबारियों से अपील की है कि वह मालदीव के साथ कोई भी व्यापार ना करें। खंडेलवाल ने कहा है कि मालदीव के साथ व्यापार ना करके भारत के व्यापारी उसे एक कड़ा सन्देश भेजें कि दोनों देशों के रिश्ते एक दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने से ही चल सकते हैं।

मालदीव जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी आई कमी

मालदीव के बहिष्कार की माँग के चलते अब भारतीय यहाँ जाने की अपेक्षा देश में ही घूमने को तरजीह दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव को भारत से जोड़ने वाली उड़ानों को ऑपरेट करने वाली एयरलाइन्स ने कहा है कि बीते कुछ दिन में यहाँ की उड़ान की बुकिंग में कमी आई है। वहीं भारत में टूर ऑपरेटर की संस्था इंडियन एसोशिएसन ऑफ़ टूर ऑपरेटर्स ने कहा है कि बीते दो दिनों से उनके पास मालदीव जाने के लिए कोई नई पूछताछ नहीं आ रही है।

भारत आना चाहते हैं मालदीव के मुखिया मुइज़्ज़ू

मालदीव के मंत्रियों के भारत और पीएम मोदी को लेकर दिए गए बयान के बाद उपजे विवाद के बीच मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू भारत आना चाहते हैं। मालदीव की सरकार ने यह प्रस्ताव भारत के सामने रखा है। वह अभी चीन की यात्रा पर हैं। इससे पहले वह तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। मालदीव के राष्ट्रपतियों का चुने जाने के बाद पहली विदेश यात्रा में भारत आना एक परम्परा रही है। हालाँकि, भारत विरोधी भावनाओं को हवा देकर चुनाव जीते मुइज्जू ने इससे किनारा किया।
मीडिया पोर्टल WION के अनुसार इस यात्रा के लिए प्रस्ताव यह विवाद चालू होने से पहले रखा गया था। हालाँकि, अब इसको लेकर भारत का क्या रुख होगा, यह देखने वाली बात होगी। मुइज्जू, मालदीव में भारत विरोधी कैम्पेन ‘India Out’ को हवा देते रहे हैं।

भारत-मालदीव विवाद में अब तक क्या हुआ?

हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।
भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।
इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।
प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।
अवलोकन करें:-
भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

इस दीपावली 3.75 लाख करोड़ रूपए का कारोबार, लेकिन ‘वोकल फॉर लोकल’ से चीन को 1 लाख करोड़ रूपए का नुकसान

दीपावली के इस त्योहारी सीजन में देश में करीब 3.75 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड कारोबार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ अपील के असर से चीन को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है।

देश के व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कारोबार का यह आँकड़ा दिया है। यह आँकड़ा धनतेरस, छोटी दीवाली और दीवाली तक के कारोबार का है। भाई दूज और छठ के आँकड़े आने के बाद इसमें करीब 50 हजार करोड़ रुपए का और इजाफा होने की संभावना है। इसी तरह चीन को होने वाले नुकसान में भी वृद्धि की संभावना है।

CAIT ने बताया है कि इस वर्ष बाजार में चीन की हिस्सेदारी घटी है। उसके उत्पादों की बिक्री काफी घट गई है। गौरतलब है कि देश भर में धनतेरस से लेकर दीवाली तक सजावट के सामान, सोना-चाँदी, खाने-पीने के समान और गाड़ियों की बम्पर बिक्री होती है। इसके कारण कुछ ही दिनों में लाखों करोड़ का व्यापार हो जाता है।

CAIT का कहना है कि कुछ वर्ष पहले चीन के सस्ते उत्पादों का कब्जा बाजार पर था। दीवाली के दौरान बिकने वाले लगभग 70% उत्पादों पर चीन ने कब्ज़ा कर लिया था। बीते कुछ वर्षों में यह स्थिति बदली है। CAIT ने इस बार यह स्थिति बदलने के लिए ‘भारतीय उत्पाद-सबका उस्ताद’ जैसी मुहिम चलाई थी।

इस स्थिति के बदलने में भारत के ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल को बढ़ाने और प्रधानमंत्री मोदी के स्थानीय उत्पादों को खरीदने की अपील सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हुई है। अब लोग चीन से बनकर आने वाली लड़ियाँ और मूर्तियाँ तथा अन्य सजावट के सामान ना खरीद कर भारतीय सामान पसंद कर रहे हैं।

CAIT ने बताया है कि इस खरीददारी में से 13% खाने-पीने के सामान पर, 9% सोने-चाँदी और गहनों पर, 12% कपड़ों पर तथा बाकी छोटे-छोटे हिस्सों में मिठाइयों, सजावट के सामान, बर्तन और मोबाइल जैसे उत्पादों का हिस्सा रहा।

CAIT का कहना है कि अभी भाई दूज और छठ जैसे त्यौहारों में 50,000 करोड़ रूपए का और व्यापार होने की आशा है। इस प्रकार इस त्योहारी सीजन का यह आँकड़ा 4.25 लाख करोड़ के पार पहुँच जाएगा। इसके अलावा 23 नवम्बर से चालू हो रहे शादियों के सीजन में भी लगभग 4 लाख करोड़ रूपए का व्यापार होने की उम्मीद है।