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मालदीव में प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक स्वागत: पूरी कैबिनेट के साथ आगवानी करने पहुंचे राष्ट्रपति मुइज्जू

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू खुद पूरी कैबिनेट के साथ  अभिनंदन करते  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को मालदीव की राजधानी माले में ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया गया। जैसे ही पीएम मोदी का विमान वेलाना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू खुद अपनी पूरी कैबिनेट के साथ उनका अभिनंदन करने पहुंचे। राष्ट्रपति के साथ मालदीव के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री आदि सभी प्रमुख मंत्री मौजूद रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।

मोदी के स्वागत में एयरपोर्ट पर बच्चों ने पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे देखकर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू ने ताली बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। मोदी जी खुद बाल कलाकारों से मिलने उनके बीच पहुंचे और उनका हौसला बढ़ाया। एयरपोर्ट के बाहर भारी संख्या में प्रवासी भारतीय हाथों में तिरंगा लहराते हुए वंदे मातरम और भारत माता की जय के साथ मोदी-मोदी के नारे लगा रहे थे।

पिछले दो सालों में भारत और मालदीव के रिश्तों में कई उतार चढ़ाव देखने को मिले हैं। 2 साल पहले मालदीव में ‘इंडिया आउट’ के नारे सुनाई पड़ रहे थे। भारत की मौजूदगी का विरोध मालदीव का एक तबका करता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के चलते मालदीव का फोकस झगड़ों से हटकर सहयोग पर आ गया है।

2 साल के भीतर ही मालदीव को समझ आ गया कि उसे भारत के साथ अपने रिश्तों को सुधारना होगा। मालदीव को समझ आया कि हमेशा उसके साथ भारत खड़ा रहा है, और जब ऐसा नहीं हुआ है तो वह संकट में पड़ा है।

बीते 2 सालों में रिश्तों में खटास के एक दौर के बावजूद भारत ने मालदीव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद की है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 400 मिलियन डॉलर (3,320 करोड़ रूपए) की करेंसी स्वैप के जरिए मालदीव की मदद की। वहीं भारतीय स्टेट बैंक ने 100 मिलियन डॉलर (830 करोड़ रूपए) के मालदीव के ट्रेजरी बॉन्ड सबस्क्राइब किए।

मालदीव को समझ आया है कि आसपास के देशों में भारत ही मालदीव का सबसे भरोसेमंद और अहम पार्टनर है।

मालदीव का ऐतिहासिक साझेदार है भारत

भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से हिंद महासागर में व्यापार, सांस्कृतिक रिश्ते और सुरक्षा को लेकर सहयोग रहा है। मालदीव की रणनीतिक स्थिति और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग के पास होने की वजह से यह भारत के लिए समुद्री सुरक्षा में एक अहम साथी है।

1965 में मालदीव की आजादी के बाद भारत पहला ऐसा देश था जिसने उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए जाए थे। भारत ने उसे देश के तौर पर मान्यता दी थी। 1988 में जब मालदीव में तख्तापलट का प्रयास हुआ था, तब भारत ने ऑपरेशन कैक्टस के जरिए समय पर मदद की, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और प्रगाढ़ हो गए।

भारत ने जरूरत खत्म होने पर अपनी सेना वापस भी बुला ली, जिससे मालदीव में भारत के प्रभुत्व को लेकर चिंताएँ कम हुईं। 2004 की सुनामी और 2014 के जल संकट के वक्त भी भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आया।

ये तीनों संकट दिखाते हैं कि भारत हर मुश्किल में मालदीव और उसकी जनता के साथ खड़ा रहा है। जनवरी 2020 में भारत ने मालदीव को खसरे के टीके की 30,000 डोज भेजकर महामारी से लड़ने में मदद की।

‘इंडिया आउट’ अभियान

मालदीव में विपक्षी दलों द्वारा चलाए गए ‘इंडिया आउट’ आंदोलन ने भारत को मालदीव के अंदरूनी और सुरक्षा मामलों में दखल देने वाला बताया। इंडिया आउट चलाने वालों का दावा था कि भारत की मालदीव के भीतर सैन्य मौजूदगी उसकी संप्रभुता के लिए खतरा है। सच्चाई यह थी कि भारतीय सुरक्षाबल मालदीव भीतर राहत बचाव जैसे कामों में लगे हुए थे।

फरवरी 2021 में विदेश मंत्री एस जयशंकर की यात्रा के दौरान, भारत और मालदीव ने उथुरु थिलाफल्हू (UTF) बंदरगाह के निर्माण पर सहमति जताई थी। इस परियोजना से मालदीव के तटरक्षक बल की क्षमता मजबूत होगी और दोनों देश विकास और सुरक्षा में साझेदार बनेंगे।

उसी समय भारत ने मालदीव को हथियारों की खरीद के लिए 50 मिलियन डॉलर (₹415 करोड़) का लोन भी दिया था। इस दौरान भी भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने की कोशिश भारत विरोधी कुछ समूहों ने की थी।

उन्होंने दावा किया था कि भारत ने मालदीव को जो गश्ती पोत (Patrol vessels) दी हैं, उन पर भारतीय सैनिक तैनात हैं। इस दावे को पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी ने खारिज किया और बताया कि भारतीय दल केवल प्रशिक्षण के लिए वहाँ थे, अब नाव पूरी तरह मालदीव के नियंत्रण में है।

राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के सत्ता में आने के बाद नवंबर 2023 में मालदीव ने भारत से दूरी बनाना शुरू किया और चीन के करीब आने का रुख अपनाया। मुइज़्ज़ू ने अपने चुनाव अभियान में ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था, ताकि देश में भारत के प्रभाव को कम किया जा सके।

प्रधानमंत्री मोदी की जनवरी 2024 में हुई लक्षद्वीप यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए। मुइज़्ज़ू के तीन उप-मंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी ने स्थिति को और खराब कर दिया।

मालदीव : बाहर आया ‘काला जादू’ का जिन्न, महिला मंत्री फातिमाथ शमनाज अपने ही राष्ट्रपति का ‘वशीकरण’ करने में लगी

            मालदीव की मंत्री फातिमाथ गिरफ्तार, काला जादू का आरोप (फोटो साभार : X_Maldives/AI Bing)
मालदीव में दावा किया जा रहा है कि महिला मंत्री अपने राष्ट्रपति पर ही काला जादू करवा रही थी, ताकि वो राष्ट्रपति के और भी करीब जा सके। यही नहीं, इन करीबियों का इस्तेमाल कर वो और भी ज्यादा ताकत हासिल करना चाहती थी, लेकिन अब उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित राज्यमंत्री का नाम फातिमाथ शमनाज है, जो मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पुरानी सहयोगी है। वो मुइज्जू के माले के मेयर रहने के दौरान सिटी काउंसिल की सदस्य रह चुकी है और मौजूदा सरकार में मंत्री है, लेकिन और भी ज्यादा ताकतवर बनने की चाह में अब सलाखों के पीछे पहुँच चुकी है।

अल अरबिया ने एएफपी के हवाले से बताया है कि मालदीव की पर्यावरण राज्य मंत्री फातिमाथ शमनाज को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू पर काला जादू करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। फातिमाथ के अलावा 2 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने सभी को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। हालाँकि, मालदीव की सरकार की तरफ से अब तक इस मामले में कोई बयान नहीं दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने फातिमाथ के घर की तलाशी ली थी। इस दौरान वहाँ से काला जादू से जुड़ा काफी सामान बरामद हुआ था। फातिमाथ राष्ट्रपति कार्यालय में काम करने वाले मंत्री एडम रामीज की बीवी हैं। फातिमाथ इससे पहले भी राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ माले की सिटी काउंसिल की सदस्य रह चुकी हैं। तब मुइज्जू राजधानी माले के मेयर थे। पिछले साल उनके राष्ट्रपति बनने के बाद फातिमाथ ने भी काउंसिल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास मुलिआज की राज्य मंत्री बन गई। बाद में उन्हें ट्रांसफर कर पर्यावरण मंत्रालय में शिफ्ट कर दिया गया।

 मालदीव में काले जादू को फंदिता या सिहुरु नाम से जाना जाता है। इस्लामिक कानूनों में इसे हराम कहा गया है और काला जादू करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाता है। हालाँकि बताया ये जा रहा है कि मालदीव में काला-जादू जैसी चीजों की जड़ें काफी गहरी हैं। ऐसे ही एक मामले में करीब एक महीने पहले मुइज्जू की पार्टी के एक नेता पर काला जादू करने के मामले में 60 साल के बुजुर्ग को गिरफ्तार किया था।

अब इजरायल ने निकाली मालदीव की हेकड़ी कहा- भारत के लक्षद्वीप जैसे समुद्री तटों पर घूमने जाएँ

मालदीव और उसके राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु को अब इजरायल ने झटका दिया है। इजरायल ने अपने नागरिकों को कहा है कि वो भारत भ्रमण करें, साथ ही भारत के सुन्दर पर्यटन स्थलों की तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि इस्लामी मुल्क मालदीव ने इजरायल के पासपोर्ट धारकों को अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया है, इसीलिए इजरायल ने उसे सबक सिखाया है। भारत स्थित इजरायली दूतावास ने लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और केरल की मनोरम तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की।

साथ ही लिखा, “जैसा कि मालदीव ने अब इजरायलियों के आने पर बैन लगा दिया हैं, नीचे दिए यह कुछ खूबसूरत और अद्भुत भारतीय समुद्र तट हैं जहाँ इजरायली पर्यटकों का हार्दिक स्वागत होता है और बेहद आदर सत्कार दिया जाता हैं। हमारे डिप्लोमेट्स द्वारा यात्रा की गई जगहों के आधार पर ये हमारे कुछ सुझाव हैं।” नीचे कमेंट्स में भारतीयों ने भी दिल खोलते हुए कहा कि इजरायलियों का हमारे देश में स्वागत है, यहाँ उनका भरपूर स्वागत किया जाएगा।

 इजरायल पर गाजा पट्टी में बमबारी और गोलीबारी का आरोप लगाते हुए मालदीव ने वहाँ के पर्यटकों पर बैन लगा दिया है। मुल्क के गृहक्षेत्र सुरक्षा एवं तकनीकी मंत्री अली इहुसान ने कहा कि राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बैन के लिए कानूनी बदलाव शुरू करने पर मुहर लगी। इसके लिए मंत्रियों की एक विशेष समिति भी बनाई गई है। मालदीव ने फिलिस्तीन की मदद के लिए एक विशेष राजदूत की नियुक्ति का भी निर्णय लिया है।

साथ ही फिलिस्तीनियों के लिए फंड भी जुटाया जाएगा। फिलिस्तीन के समर्थन में एक राष्ट्रीय मार्च का भी आयोजन किया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका ने भी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1200 लोगों का नरसंहार किया था, जिसके बाद से ही इजरायल जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा है कि इजरायल ने सीजफायर का नया प्रस्ताव क़तर के माध्यम से हमास को भिजवाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में लक्षद्वीप का दौरा किया था और वहाँ से कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसके बाद मालदीव भड़क गया था। लक्षद्वीप की सुंदरता देख वहाँ पर्यटन भी बढ़ा। मालदीव के 3 मंत्रियों को पद से हाथ धोना पड़ा, उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। भारतीयों द्वारा बहिष्कार के बाद मालदीव के पर्यटन और राजस्व में भारी कमी आई। अब इजरायल का साथ भी भारत को मिल गया है।


मालदीव : मुस्लिम महिला मंत्री ने अपना ही थूका चाटा, तिरंगे के अपमान पर माँगी माफी

मरियम शिउना मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के साथ (बाएँ) और फर्जी पोस्टर (दाएँ) (चित्र साभार: @shiuna_m/X)
सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल कर भारतीय ध्वज तिरंगा का अपमान करने वाली मालदीव की मंत्री मरियम शिउना ने माफी माँग ली है। शिउना ने कहा है कि उसने जानबूझ कर यह नहीं किया है। शिउना ने इससे पहले मालदीव के विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी को निशाना बनाने के साथ ही भारतीय झंडे का भी अपमान किया था।

मालदीव की मंत्री मरियम शिउना ने अपने एक्स (पहले ट्विट्टर) पर लिखा, “मैं अपनी एक हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में बात करना चाहती हूँ जिस पर काफी बवाल और आलोचना हुई है। मैंने अपनी इस पोस्ट द्वारा पैदा हुई भ्रम की स्थिति या आहत होने को लेकर माफी माँगती हूँ। यह मेरे ध्यान में लाया गया है कि MDP के जवाब में उपयोग की तस्वीर भारतीय झंडे तिरंगा से मिलती जुलती है। मैं यह साफ़ करना चाहती हूँ कि यह जानबूझकर नहीं किया गया था और मुझे इसका अफ़सोस है।

आगे शिउना ने लिखा, “मालदीव भारत के साथ अपने रिश्ते और आपसी सम्मान को काफी महत्व देता है। मैं आगे भविष्य में अपने द्वारा साझा किए जाने वाले कंटेंट को वेरीफाई करुँगी ताकि ऐसी गड़बड़ी ना हो।” शिउना ने भारत का का अपमान करने वाली पोस्ट पहले ही हटा दी थी।

शिउना ने क्या किया था?

शिउना ने शनिवार (6 अप्रैल, 2024) की रात्रि को अपनी पार्टी PPM के लिए समर्थन जुटाने वाला एक पोस्ट किया था। इसमें विपक्षी पार्टी PPM को निशाना बनाते हुए अशोक चक्र को शामिल करके पोस्टर बनाया गया था और इस पर लिखा था, “MDP उनके (भारत) जाल में फंस रही है, हमें (मालदीव) उनके जाल में दोबारा फँसने की जरूरत नहीं है।”
इस पोस्टर को विपक्ष की पार्टी मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के संसदीय चुनावी अभियान के लिए जारी किए गए पोस्टर को बिगाड़ करके बनाया गया था। जहाँ MDP के पोस्टर में एक कम्पास था, तो मंत्री शिउना के फर्जी पोस्टर में कम्पास की जगह पर भारत के तिरंगा में शामिल अशोक चक्र लगा दिया गया था। यह भारतीय ध्वज का अपमान करके के उद्देश्य से किया गया।
इस फर्जी पोस्टर में मात्र अशोक चक्र ही नहीं बल्कि भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल भी शामिल किया गया था। यह चुनाव चिन्ह MDP के चुनाव चिन्ह के साथ उपयोग किया गया था और दोनों पार्टियों के बीच किसी गठबंधन का इशारा किया गया था। गौरतलब है कि MDP मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत विरोधी नीतियों का विरोध करती रही है।
यह पोस्ट शिउना ने हटा दिया था। शिउना की करतूत का काफी विरोध हुआ है। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि जहाँ एक तरफ मालदीव भारत से मदद माँगता है वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री भारत का अपमान करते हैं और भारत के खिलाफ विषवमन करते हैं। शिउना ने इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। शिउना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जोकर’ और ‘इजरायल की कठपुतली’ कहा था। यह पोस्ट बाद में हटा दिया गया था।
अवलोकन करें:-
भारत सरकार ने मरियम शिउना की टिप्पणी को लेकर मालदीव से कड़ी आपत्ति जताई थी। शिउना को मालदीव की सत्तारूढ़ पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ बाद में निलंबित कर दिया गया था। इस पूरे विवाद के बाद बड़ी सँख्या में भारतीयों ने मालदीव की यात्रा ना करने को लेकर अभियान चलाया था। इन सभी विवादों के बाद भी मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत को ‘निकटतम सहयोगी’ बताया था। उन्होंने इसके बाद भारत से कर्ज में राहत देने की माँग की थी। अब शिउना ने भारतीय ध्वज के अपमान के विवाद पर भी माफ़ी माँग ली है।

मालदीव : जिस मुस्लिम महिला मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को दी थी गाली, उसने अब हमारे तिरंगे का किया अपमान: विरोध के बाद पोस्ट डिलीट कर भागी

भारत विरोधी एजेंडा करने वाली मरियम शिउना (बाएँ) और  मोदी (दाएँ) (चित्र साभार: Opindia Archive & ET)
मालदीव की सरकार में मंत्री मरियम शिउना ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। शिउना ने मालदीव की विपक्षी पार्टी, भारत और भाजपा को निशाना बनाने के लिए एक फर्जी पोस्टर पोस्ट किया। इस पोस्टर में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा में शामिल अशोक चक्र का अपमान किया गया।

शिउना ने शनिवार (6 अप्रैल, 2024) की रात्रि को अपनी पार्टी PPM के लिए समर्थन जुटाने वाला एक पोस्ट किया। इसमें विपक्षी पार्टी PPM को निशाना बनाते हुए अशोक चक्र को शामिल करके पोस्टर बनाया गया था और इस पर लिखा था, “MDP उनके (भारत) जाल में फंस रही है, हमें (मालदीव) उनके जाल में दोबारा फँसने की जरूरत नहीं है।”

इस पोस्टर को विपक्ष की पार्टी मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के संसदीय चुनावी अभियान के लिए जारी किए गए पोस्टर को बिगाड़ करके बनाया गया था। जहाँ MDP के पोस्टर में एक कम्पास था, तो मंत्री शिउना के फर्जी पोस्टर में कम्पास की जगह पर भारत के तिरंगा में शामिल अशोक चक्र लगा दिया गया था। यह भारतीय ध्वज का अपमान करके के उद्देश्य से किया गया।

इस फर्जी पोस्टर में मात्र अशोक चक्र ही नहीं बल्कि भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल भी शामिल किया गया है। यह चुनाव चिन्ह MDP के चुनाव चिन्ह के साथ उपयोग किया गया है और दोनों पार्टियों के बीच किसी गठबंधन का इशारा किया गया है। गौरतलब है कि MDP मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत विरोधी नीतियों का विरोध करती रही है।

यह पोस्ट शिउना ने हटा दिया है। शिउना की करतूत का काफी विरोध हुआ है। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि जहाँ एक तरफ मालदीव भारत से मदद माँगता है वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री भारत का अपमान करते हैं और भारत के खिलाफ विषवमन करते हैं।

शिउना का यह भारत विरोधी पोस्ट तब आया है जब भारत ने हाल ही में मालदीव को भेजी जाने वाली सामग्रियों का कोटा बढ़ाया है। भारत ने चावल, दाल और अन्य खाद्य सामग्रियों से सम्बन्धित कोटा को मालदीव के आग्रह के बाद बढाया था। इसको लेकर मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने भारत का धन्यवाद किया था।

भारत और मालदीव के रिश्ते बीते वर्ष के अंत से ही ठीक नहीं है। मालदीव में 2023 में मोहम्मद मुइज्जू चुनाव जीते थे। मुइज्जू ने भारत के खिलाफ अभियान चला कर यह चुनाव जीता था। इसके बाद भारत और मालदीव के बीच काफी बड़ा राजनयिक विवाद भी हुआ था। अब मालदीव में संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं तो मुइज्जू की पार्टी फिर से उसी हथकंडे को अपना रही है।

मालदीव के मंत्रियों की वजह से हुआ था राजनयिक विवाद

पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद एक्स (पहले ट्विटर) पर रौशन सिन्हा ने पीएम मोदी का ‘लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने वाला’ वीडियो शेयर किया था। सिन्हा ने कहा था कि यह “मालदीव की नई चीनी कठपुतली सरकार के लिए एक बड़ा झटका” है।
इस पोस्ट से मालदीव की युवा, सूचना और कला मामलों उप मंत्री मरियम शिउना चिढ़ गई। शिउना ने मिस्टर सिन्हा की पोस्ट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जोकर’ और ‘इजरायल की कठपुतली’ कहा। यह पोस्ट बाद में हटा दिया गया। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में कहीं भी मालदीव का जिक्र नहीं किया था।
भारत सरकार ने मरियम शिउना की टिप्पणी को लेकर मालदीव से कड़ी आपत्ति जताई थी। शिउना को मालदीव की सत्तारूढ़ पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ बाद में निलंबित कर दिया गया था। इस पूरे विवाद के बाद बड़ी सँख्या में भारतीयों ने मालदीव की यात्रा ना करने को लेकर अभियान चलाया था।
इन सभी विवादों के बाद भी मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत को ‘निकटतम सहयोगी’ बताया था। उन्होंने इसके बाद भारत से कर्ज में राहत देने की माँग की थी। अब शिउना के भारतीय ध्वज के अपमान के बाद दोंनो देशों के बीच राजनयिक तनाव फिर बढ़ सकता है।

मोदी से पंगा पड़ा भारी, दिवालिया हो गया मालदीव ; भारत के लोगों से एक-एक डॉलर दान देने की गुहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में अपने प्राकृतिक सौंदर्य के मशहूर लक्षद्वीप का दौरा किया था। यह दौरा मालदीव पर इतना बड़ा वज्रपात साबित होगा, इसके बारे में किसी को अंदाजा नहीं था। लेकिन पिछले दो दिनों में जो खबरें सामने आई हैं, उससे पता चलता है कि भारत और प्रधानमंत्री मोदी से पंगा लेना मालदीव पर भारी पड़ गया है। अब मालदीव दिवालिया हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से भीख मांग रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की एक अपील, भारतीय पर्यटकों की संख्या में आई कमी और चीन के कर्ज ने मालदीव की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

मालदीव की आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की मांग

फ्रंटलफोर्स नाम के एक ट्विटर अकाउंट ने 16 फरवरी, 2024 को एक पोस्ट शेयर कर बताया कि मालदीव ने खुद को आईएमएफ के सामने दिवालिया घोषित कर दिया है और बेलआउट पैकेज की मांग की है। दरअसल भारत से पंगा लेने के बाद मालदीव की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। मालदीव के ऊपर बाहरी कर्ज 4.038 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, इसमें एक बड़ा हिस्सा चीन के कर्ज का है। आर्थिक संकट से उबरने के लिए राष्ट्रपति मुइज्जू आईएमएफ के साथ ही चीन, तुर्की और अरब देशों से कर्ज की भीख मांग रहे हैं। मालदीव को कर्ज के जाल में फंसा देखकर अब दोस्त चीन भी उसे और कर्ज देने से बच रहा है। ऐसे में मालदीव का आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

दुनिया भर के लोगों से मालदीव को दान देने की अपील

फ्रंटलफोर्स की इस खबर के बाद अब सोशल मीडिया में मालदीव के दिवालियापन की खूब चर्चा हो रही है। मालदीव के लोग भी खबरें शेयर कर खूब मजे ले रहे हैं। सोशल मीडिया ‘x’ पर हसन कुरुसी नाम के एक यूजर ने अपने हैंडल @HKurusee से मालदीव का मजाक उड़ाते हुए पोस्ट किया कि क्या किसी के पास सरकार का सार्वजनिक बैंक खाता नंबर है? मैं इसे यहां साझा करना चाहता हूं ताकि दुनिया भर से लोग मालदीव को दान भेज सकें। हसन कुरुसी ने एक और पोस्ट में मालदीव के लोगों की तरफ से भारत, चीन, पाकिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से मदद करने की अपील की है।

भारत के लोगों से एक-एक डॉलर दान देने की गुहार

अब मालदीव के नागरिक ही भारतीयों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। हसन कुरुसी ने भारतीयों से अपील की है कि मालदीव के वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए 1.3 बिलियन डॉलर की जरूरत है। अगर एक भारतीय एक डॉलर का दान करें तो 1.3 बिलियन डॉलर आसानी से मिल सकता है। हसन ने मालदीव सरकार के पब्लिक बैंक अकाउंट 220301 शेयर करते हुए इसमें दान देने की अपील की है। हालांकि परफॉर्म इंडिया इस अकाउंट की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन सोशल मीडिया में जिस तरह मालदीव की अर्थव्यवस्था का माखौल उड़ रहा है, वह राष्ट्रपति मुइज्जू के लिए काफी शर्मनाक है।

भारतीयों ने पुराने पोस्ट की दिलाई याद 

अब भारत के लोग भी हसन कुरुसी के पुराने पोस्ट की याद दिलाते हुए खूब मजे ले रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय फिल्म अभिनेता शाहरुख खान से मदद की सलाह दे रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने अपने पोस्ट में सवाल किया, “क्या हुआ @HKurusee ? जोश कैसा है? हमसे भीख क्यों मांग रहे हैं? अपने मित्र देश पाकिस्तान और चीन से भीख क्यों न मांग रहे हैं? मालदीव को हमारी ज़रूरत नहीं है और हम भारतीयों को मालदीव की ज़रूरत नहीं है।”

आईएमएफ ने दी थी चीन के कर्ज के जाल में फंसने की चेतावनी

अब सवाल उठ रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप यात्रा के डेढ़ महीने के भीतर ही ऐसा क्या हुआ कि मालदीव दिवालिया हो गया ? इस सवाल का जवाब आईएमएफ की चेतावनी से मिलता है। 7 फरवरी, 2024 को आईएमएफ ने मालदीव को चेतावनी दी थी। साथ ही बताया था कि मालदीव ने चीन से काफी ज्यादा कर्ज लिया है और अब भारत से भी अपने रिश्ते खराब कर चुका है। इस वजह से देश में ऋण संकट का खतरा बहुत ज्यादा हो गया है। आईएमएफ ने तत्काल पॉलिसी एडजस्टमेंट की बात कही थी। आईएमएमफ ने चेताया था कि अगर उसने चीन से कर्ज लेना बंद नहीं किया तो श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह हाल हो जाएगा। मालदीव के कर्ज का जोखिम उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। 

मोदी की एक अपील ने भीख मांगने पर कर दिया मजबूर 

प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप के दौरे से मालदीव को जबरदस्त झटका लगा है। इसे इत्तेफ़क कहे या सोची समझी रणनीति, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक दौरे से कई निशाने साध दिए। उन्होंने लक्षदीप को 1150 करोड़ रुपये की सौगात के साथ ही इसे टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की अपील की। देखते ही देखते उनके दौरे की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लक्षद्वीप एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में चर्चित हो गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने इशारों-इशारों में मालदीव को भी संदेश दे दिया। इस दौरान मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। अब जो खबरें सामने आ रही है, उससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मकसद में कामयाब रहें।

मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में भारी गिरावट

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे और उनकी अपील से मालदीव के पर्यटन मुसीबत में फंस गया है। मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मालदीव जाने वाले भारतीयों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहां भारतीय मालदीव जाने में विश्व में तीसरे स्थान पर थे, अब पांचवें स्थान पर आ गए हैं। गौरतलब है कि भारतीय पर्यटक मालदीव के लिए बेहद जरूरी हैं क्योंकि भारत से बड़ी संख्या में लोग हर साल मालदीव जाते हैं। साल 2023 में मालदीव के टूरिज्म मार्केट में भारतीयों का योगदान 11 प्रतिशत था। लेकिन हालिया विवाद के बाद मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है।

मालदीव के पर्यटन उद्योग को लगा बड़ा झटका

मालदीव पर्यटन मंत्रालय ने हाल ही में जो आंकड़े जारी किए थे, उनके मुताबिक 2023 में भारत मालदीव में पर्यटकों के आगमन के प्रमुख स्रोत के रूप में उभरा है। भारत से पिछले साल करीब 209,198 पर्यटक मालदीव पहुंचे। वहीं, 2022 में 241,369 भारतीय यात्रियों ने मालदीव की यात्रा की थी। पर्यटन मालदीव का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा अर्जक और जीडीपी का सबसे बड़ा सहयोगी भी है। मालदीव में पर्यटन का कुल जीडीपी में 30 प्रतिशत और विदेशी मुद्रा अर्जक में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। भारत से बढ़ते तनाव और प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद मालदीव के पर्यटन मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लक्षद्वीप को लेकर एक प्राइवेट सर्च प्लेटफॉर्म पर सर्च 3400 प्रतिशत बढ़ गया है। यहां तक की लोग अब मालदीव का टिकट कैंसिल करवाकर लक्षद्वीप का रूख कर रहे हैं।

मालदीव : संसद में लत्तम-जुत्तम, एक-दूसरे को पटक कर पीटने लगे सांसद: सबसे बड़ी पार्टी ने मोहम्मद मुइज्जु को हटाने के लिए जुटा लिए हस्ताक्षर

                                                               संसद में जम कर लड़ाई
मालदीव की संसद में फ़िलहाल ‘मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP)’ सबसे बड़ी पार्टी है। अब उसने वहाँ के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए अभियान छेड़ दिया है। इतना ही नहीं, उसने इसकी प्रक्रिया शुरू करते हुए उतने सांसदों के हस्ताक्षर भी जुटा लिए हैं जितने की ज़रूरत है। MDP के एक नेता ने बताया कि एक अन्य विपक्षी दल ‘द डेमोक्रेट्स’ की सहायता से उसने महाभियोग प्रस्ताव के लिए हस्ताक्षर जुटा लिए हैं। अब इसे स्पीकर के समक्ष पेश किया जाना बाकी है।

मोहम्मद मुइज्जु की सरकार चीन के हाथों की कठपुतली बन गई है। चीन को फायदा पहुँचाने के लिए वहाँ की सरकार 4 नए कानून लेकर आई है। इस पर पक्ष-विपक्ष के सांसदों के बीच संसद में लत्तम-जुत्तम भी हुई। सरकार समर्थक सांसदों ने इसके बाद प्रदर्शन किया, जिससे संसद का कामकाज भी बाधित हुआ। कंडीथीमु के सांसद अब्दुल्ला शाहीन अब्दुल हकीम ने केंदिकूलहूधु के सांसद अहमद ईशा को ठोकर मार कर गिरा दिया, जिसके बाद दोनों के बीच लड़ाई हुई।

दोनों सांसद चैंबर में ही गिर पड़े। इस दौरान शाहीन के सिर में भी चोटें आई हैं। अल्पसंख्यक नेता मूसा सिराज ने इस झगड़े को रोकने का प्रयास किया। असल में विपक्ष ने मोहम्मद मुइज्जु के कुछ मंत्रियों को मान्यता नहीं दी, जिससे ‘प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (PPM)’ और ‘पीपल्स नेशनल कॉन्ग्रेस (PNC)’ के नेता भड़क गए। वीडियो में भी देखा जा सकता है कि कैसे स्पीकर की कुर्सी के पास सांसद आपस में लड़ पड़े। सरकार का कहना है कि विपक्ष द्वारा नए मंत्रियों को मान्यता न देना नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है।

एक सांसद तो सीटी बजा आकर स्पीकर को डिस्टर्ब करते हुए देखा गया। माथीवेरी के सांसद हसन ज़हीर को भी चोटें आई हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद मालदीव के 3 मंत्रियों ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उसके बाद तीनों को इस्तीफा देना पड़ा था। लक्षद्वीप के प्रमोशन से भड़के मालदीव को चीन का साथ मिला। लेकिन, वहाँ के आम लोग और विपक्षी दल भारत के प्रति अच्छा रुख रखते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने वहाँ के राजदूत को भी तलब किया था।

भारत विरोधी मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू द्वारा बीमार भारतीय के लिए भारतीय विमान को इलाज के लिए इजाजत न देने से तड़प-तड़प कर मर गया बीमार बच्चा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक बीमार बच्चे की मेडिकल इमरजेंसी के दौरान भारत के प्लेन में ले जाने की मंजूरी ना देकर इंसानियत को शर्मसार करने का काम किया है। मुइज्जू के इस निर्णय के कारण 14 साल के बच्चे को वक्त पर इलाज नहीं मिला पाया और शनिवार (20 जनवरी 2024) को उसकी मौत हो गई।

दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू को भारत विरोधी माना जाता है। वे जब से मालदीव राष्ट्रपति बने हैं, तभी से भारत द्वारा दिए गए हेलीकॉप्टरों और प्लेनों का इस्तेमाल इमरजेंसी निकासी (Emergency Evacuation) के लिए नहीं किया जाता है। इनका इस्तेमाल केवल राष्ट्रपति से सीधे मंजूरी मिलने पर ही किया जा सकता है।

चीन की कठपुतली राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इस बीमार बच्चे को एयरलिफ्ट करके एक द्वीप से मुख्य द्वीप पर भारत के डोर्नियर प्लेन से ले जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। बच्चे के लिए मालदीव के रक्षामंत्री ने मुइज्जू से इसके लिए अनुमति माँगी थी। मुइज्जू के इस निर्णय के भारत ही नहीं, बल्कि मालदीव में भी आलोचना हो रही है।

ब्रेन ट्यूमर और फिर स्ट्रोक से पीड़ित इस बच्चे के परिवार ने मालदीव के एविएशन अधिकारियों पर तुरंत चिकित्सा निकासी मुहैया न कराने का आरोप लगाया है। मालदीव की समाचार एजेंसी अधाधु ने बच्चे के पिता के हवाले से लिखा है कि आइलैंड एविएशन ने परिवार की कॉल का तुरंत जवाब नहीं दिया।

उन्होंने कहा, “स्ट्रोक के तुरंत बाद बेटे को माले ले जाने के लिए हमने आइलैंड एविएशन को फोन किया था, लेकिन उसके कर्मचारियों ने हमारी कॉल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने गुरुवार सुबह 8:30 बजे फोन का जवाब दिया। ऐसे मामलों के लिए समाधान केवल एक एयर एम्बुलेंस ही है।”

मालदीव के सांसद मीकैल नसीम ने मिहारू न्यूज की रिपोर्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रीट्वीट कर लिखा है, “भारत के लिए राष्ट्रपति की दुश्मनी को संतुष्ट करने के लिए लोगों को अपनी जान की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।”

परिवार के आपातकालीन निकासी का आग्रह करने के 16 घंटे बाद बीमार बच्चे को माले ले जाया गया। निकासी आग्रह लेने वाली आसंधा कंपनी लिमिटेड ने दावा किया कि विमान में तकनीकी दिक्कत की वजह से देरी हुई।

इस पर रक्षा मंत्री मोहम्मद घासन ने सफाई में कहा है कि 93 फीसदी निकासी अभी भी मालदीव एयरलाइंस ही करती है। उन्होंने कहा, “मेडिकल ऑपरेशन के एसओपी (मानक संचालन प्रक्रियाओं) में राष्ट्रपति को सूचित करने या उनसे इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। यह संबंधित संस्थानों के समन्वय के जरिए किया गया काम है।”

जनवरी 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद से ही भारत और मालदीव के बीच तनाव का माहौल है। वहाँ की सरकार के तीन मंत्रियों ने पीएम मोदी को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की थी। इसके बाद इन्हें निलंबित कर दिया गया था, लेकिन दोनों के बीच राजनयिक टकराव अभी चल ही रहा है।

मुइज्जू की पार्टी ने बीते साल 2023 में इंडिया आउट आंदोलन के आधार पर चुनाव जीता था। इसके तहत मालदीव में तैनात लगभग 100 भारतीय सैनिकों को देश से हटाना था। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने भारतीय सशस्त्र बलों को मार्च 2024 तक मालदीव छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। मुइज्जू ने हाल ही में अपनी पहली आधिकारिक यात्रा चीन से शुरू की थी और वहाँ कई समझौतेे किए।

मालदीव की राजधानी में भारत समर्थक MDP की जीत, भारत विरोधी मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी की बड़ी हार

                                                    मोहम्मद मुइज्जू (चित्र साभार: OfficeNewz)
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को बड़ा झटका लगा है। उनकी पार्टी मालदीव में जमीन खो रही है। मुइज्जू की पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस मालदीव की राजधानी माले के मेयर का चुनाव हार गई है। वहीं, भारत समर्थक पार्टी ने इस चुनाव को जीत लिया है। यह नतीजा मालदीव में उठी भारत विरोधी भावनाओं के बाद आया है।

मुइज्जू की पार्टी के उम्मीदवार ऐशथ अजीमा शकूर बुरी तरह से हारी हैं। इन चुनावों में भारत समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार आदम अजीम को भारी जीत मिली है। जिस पार्टी को जीत मिली है, उसके मुखिया इब्राहिम मोहम्मद सोलिह हैं। वह साल 2023 तक मालदीव के राष्ट्रपति थे। उन्होंने मालदीव को चीन के चंगुल से निकाल कर भारत से दोस्ती बढ़ाई थी।

आदम अजीम ने मुइज्जू की उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया है। यह चुनाव माले के मेयर की सीट खाली होने के बाद करवाए गए थे। यह सीट मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने से खाली हुई थी। वह नवम्बर 2023 में मालदीव के राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले वह माले के मेयर ही थे। वह 2021 में माले के मेयर बने थे। मालदीव में माले शहर का मेयर काफी प्रभावशाली व्यक्ति होता है।

यह चुनाव नतीजे ऐसे समय में आए हैं, जब मुइज्जू की पार्टी के समर्थक और उनकी सरकार में मंत्रियों ने भारत विरोधी भावनाओं को भड़काया है। उनके मंत्रियों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया था। ऐसे में ऐसी पार्टी का जीतना जो भारत का समर्थन करती है, साथ ही मालदीव के मूड को भी बताता है।

दूसरी ओर, मालदीव ने सैनिकों की उपस्थिति को लेकर भारत से बातचीत भी शुरू की है। मुइज्जू ने भारत विरोधी भावनाओं को भड़काकर और भारतीय सैनिकों को बाहर करने के वादे पर सत्ता में आए हैं। मालदीव में लगभग 75 भारतीय सैनिक हैं, जो भारत द्वारा मालदीव को दिए गए दो हेलिकॉप्टर और एक डोर्निएर विमान की देखरेख करते हैं। मालदीव के राष्ट्रपति इन्हें देश से निकालना चाहते हैं।

क्या हुआ मालदीव भारत विवाद में?

हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत सत्ताधारी पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।
भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।
इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।
प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ,ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।
भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की थी।
इस संस्था ने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया था। संस्था ने कहा था, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”

इतना दोगलापन कहां से लाते हैं? भारत के खिलाफ बस कुछ होना चाहिए, पाकिस्तान के मुसलमान को मोदी में करिश्मा दिखता है, लेकिन भारत के मुसलमानों को भड़काते हैं

 

सुभाष चन्द्र

कांग्रेस आजकल मालदीव की भारत विरोधी हरकतों पर गदगद है जैसे सारा कसूर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। कांग्रेस के मुख्यालय में “चपरासी” जैसा दिखाई देने वाला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कह रहा है कि “मोदी हर चीज़ को निजी तौर पर ले रहे हैं” मतलब जो कुछ भी मालदीव और उसके मंत्रियों ने कहा, वह सब ठीक था कांग्रेस पढ़ा रही है कि मोदी को विदेश नीति की कुछ समझ है ही नहीं

इस्लामिक आतंकवाद को अपना समर्थन देने 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' का ढोल पीट हिन्दुओं को कलंकित किया जाता था। बेकसूर साधु, साध्वी और कर्नल को आतंकवाद के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर जेलों में डाला गया। साध्वी प्रज्ञा को जबरदस्ती अंडा क्यों खिलाया? क्या इसको धर्म-निरपेक्षता कहते हैं? फिर मोदी सरकार द्वारा सर्जिकल और एयर स्ट्राइक करने पर पाकिस्तान की बोली बोल सबूत मांगते इन छद्दम देशप्रेमियों को शर्म नहीं आयी। 

दूसरी तरफ शरद पवार ने कहा है कि “हम अपने पीएम के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकते अगर किसी देश का कोई भी व्यक्ति हमारे प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करता है, तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे” 

लेखक 
बड़ी अच्छी बात है शरद पवार जी लेकिन आप बताएं कि राहुल “कालनेमि” और कांग्रेस के नेता विदेश में जाकर जब प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक बातें करते हैं, तब क्या आपने कभी उनका विरोध किया? अमेरिका में पिछले जून में पीएम मोदी के सामने जब कुछ पत्रकारों ने भारत के खिलाफ बयानबाजी की थी, तब क्या आपने उनका विरोध किया था? इस Double Standard का भेद क्या है?

फारूक अब्दुल्ला तो और भी हदें पार कर गए, उन्होंने मालदीव की तरफ से बिगड़े बोलों के कारण रिश्तों में आई खटास पर कहा है कि क्या इसके लिए भारत में हो रहे हिन्दू मुसलमानों की बीच पैदा हो रही नफ़रतें जिम्मेदार नहीं हैं? 

कौन सी नफ़रतें पैदा हो रही हैं नामाकूल अब्दुल्ला? जब 5 लाख कश्मीरी हिन्दुओं पर बर्बरता हुई आपके राज में, मस्जिदों से महिलाओं को छोड़ सारे पुरुषों को कश्मीर छोड़ने का ऐलान किया जा रहा था, तब वह कौन सी मोहब्बत चल रही थी और आज तब से हर आतंकी हमले पर तुम कहते फिरते हो कि पाकिस्तान से बात करो, तुम्हें पाकिस्तान से बात करने का इतना ही शौक है तो पाकिस्तान चले जाओ, वहां बैठ कर Staretegy बनाया करो भारत से उलझने की

इतना दोगलापन कहां से लाते हो अब्दुल्ला मियां जो मालदीव नापाक हरकत करे तो उसके लिए भी भारत को दोष दे देते हो कल UAE के राष्ट्रपति  Mohamed bin Zayed Al Nahyan के भारत आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें एयरपोर्ट पर लेने स्वयं गए और उनके साथ गांधीनगर में roadshow किया इसे देख कर पाकिस्तान के लोग Youtube channels पर कहते सुने गए कि नरेंद्र मोदी एक world leader है जिसके साथ आज सभी बड़े बड़े इस्लामिक देश खड़े हैं जबकि पाकिस्तान के साथ एटॉमिक ताकत होने के बावजूद कोई नहीं है क्योंकि हम सबके कर्जदार हैं मोदी के भारत में निवेश सुरक्षित है जबकि पाकिस्तान में निवेश के सुरक्षित होने की बात तो दूर, हर इस्लामिक देश पाकिस्तान के लोगों को बाहर निकाल रहा है

नरेंद्र मोदी ने गुजरात Vibrant Summit में UAE के राष्ट्रपति Nahyan को अपना “भाई” कह कर पुकारा जरा सोचिए पाकिस्तान, तुर्की और ईरान के हुक्मरानों की छातियों पर यह सुनकर कैसे सांप लोटे होंगे कि एक इस्लामिक मुल्क का राष्ट्रपति मोदी के इतना करीब कैसे है

यानी पाकिस्तान के मुसलमान तो नरेंद्र मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़ते हैं जबकि भारत के मुसलमानों के दिलों में मोदी को उनका दुश्मन बना कर बिठाया हुआ है पाकिस्तान के मुसलमान बेशक अब भी भारत को “काफिर” कह कर बुलाते हैं मगर उन्हें समझ आ गया है कि 75 साल में पाकिस्तान बना कर भी वो कुछ नहीं बिगाड़ सके लेकिन भारत में अभी भी अनेक मुस्लिम हैं जो “पाकिस्तान जिंदाबाद” करते फिरते हैं और यह सब इसलिए क्योंकि सेकुलर दलों ने मुस्लिम वोट बैंक को फसाद की जड़ बना कर रखा हुआ है 

इसी मुस्लिम वोट बैंक के फसाद की वजह से ही आज सोनिया गांधी और खड़गे ने राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा को BJP / RSS का उत्सव बता कर उसमे जाने से मना कर कांग्रेस के हिन्दू विरोधी चेहरे को उजागर कर दिया है। इतना ही नहीं, कांग्रेस समर्थक सनातन का विरोध करने वाली पार्टियों को वोट देने वाले कौन-सी प्रजाति है, इस पर गूढ़ चिंता करने की जरुरत है। वामपंथियों द्वारा मुस्लिम पक्षकार बनने की नौटंकी पर भी मंथन जरुरी है, क्योकि वामपंथी किसी धर्म अथवा मजहब को नहीं मानना ही पार्टी नीति है। 

जिस तरह धीरे-धीरे इतिहास के पृष्ठ खुलने का श्रीगणेश हो चुका है, वह दिन भी अधिक दूर नहीं रहने वाला जब यही मुसलमान अपने मुल्लावाद के साथ-साथ इन सभी के विरुद्ध सड़क पर आकर इन पाखंडियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल कर देगा। क्योकि इन लोगों द्वारा अपनी तिजोरियां भरने के लालच में केवल भारत में ही नहीं, विश्व में भारतीय मुसलमानों को बेइज्जत करने का काम किया है। जिसका नूपुर शर्मा विवाद में Jaipur Dialogue, Sach, News Nation के 'इस्लाम क्या कहता है' और कई चैनल हैं, जहाँ मुल्ला पाखंड खुलकर सामने आ चूका है। एक से बढ़कर एक मौलाना को वातानुकूलित कमरे में बैठ पसीना पोंछते दुनिया ने देखा।    

मंदिर अपवित्र होने से बच गया

मालदीव की जनता भी दोषी है - भारत विरोधी मोहम्मद मुइज़्ज़ू को सत्ता जनता ने ही दी थी - लक्षद्वीप के लिए मालदीव वरदान साबित होगा

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सुभाष चंद्र 

आज जो हालात मालदीव में पैदा हुए हैं, उनके लिए काफी हद तक जिम्मेदार मालदीव की जनता भी है क्योंकि मोहम्मद मुइज़्ज़ू का रुख भारत के विरोध में और चीन के समर्थन में जानते हुए जनता ने उसे सत्ता सौंपी थी। जिसका परिणाम यह हुआ कि मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने आते ही सबसे पहले सबसे बड़े मददगार देश भारत को मालदीव से बाहर कर दिया और इस पर प्रतिक्रिया तो होनी ही थी। उस समय जनता ने क्यों नहीं विरोध किया? लेकिन जैसे ही भारत की ओर आर्थिक चोट लगी, विलाप शुरू कर दिया, परन्तु भारत के प्रति इन लोगों में कितनी घृणा है, यह जहर बाहर आ चुका है। भारत से रिश्ते सुधारने से पहले मालदीव की जनता और नेताओं को अपने दिलों से भारत के प्रति घुसी घृणा को निकालना होगा। भारतीयों को भी तब तक मालदीव जाने के लिए सोंचना भी नहीं चाहिए। पाकिस्तान भी भारत से बातचीत की गुहार लगाता रहता है लेकिन भारत के प्रति खून में रमी घृणा को नहीं निकाल रहा।   

लेखक 
वर्ष 2018 के चुनाव में प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव के अब्दुल्ला यामीन को हरा कर भारत का समर्थन करने वाले इब्राहिम मोहम्मद सोलिह (मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी) राष्ट्रपति बने सोलिह की पार्टी को 58.38% वोट मिला था जबकि अब्दुल्ला यामीन की पार्टी को मात्र 41.62% वोट मिले थे

वर्ष 2019 में प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ़ मालदीव को तोड़ कर 31 जनवरी को यामीन अब्दुल गयूम ने Peoples National Congress (PNC) का गठन किया और इसके नेता मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने भारत विरोधी प्रोपैगैंडा पर चुनाव लड़ा जिसमे वह पूरी तरह चीन के साथ खड़ा नज़र आया जनता ने PNC नेता मोहम्मद मुइज़्ज़ू को 54.06% वोट देकर सत्ता की बागडोर उसके हाथ में दे दी जबकि पिछले चुनाव (2018 के) में 58.38% वोट पाने वाले इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की पार्टी को केवल 45.96% वोट मिले, यानी पिछली बार से करीब 13% कम और यह बहुत बड़ी संख्या होती है किसी भी चुनाव में

शत प्रतिशत सुन्नी मुस्लिम देश मालदीव की जनता ने इस बार भारत विरोधी को सत्ता दी है - अब्दुल्ला यामीन मुइज़्ज़ू का mentor है लेकिन अभी भ्रष्टाचार के आरोपों में 11 साल की सजा भुगत रहा है जिसे  मुइज़्ज़ू  माफ़ करने के मूड में है - चीन की लंबी यात्रा पर निकला मुइज़्ज़ू कितना बटोर कर लाएगा, यह समय ही बताएगा लेकिन चीन मालदीव को अपने कब्जे में रखने की ही कोशिश करेगा जैसे पाकिस्तान और अन्य देशों के साथ कियावह बात अलग है पाकिस्तान आज मालदीव के लिए तड़प रहा है शायद इसलिए कि 100% सुन्नी मुस्लिम देश है मालदीव

मालदीव के विपक्ष ने मोहम्मद मुइज़्ज़ू सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है उसका अंजाम क्या होगा, ये वहां की राजनीति पर निर्भर करता है परंतु मालदीव के लिए आने वाला समय कठिन होगा

जो भी मालदीव की जनता ने किया, वह उसके लिए जिम्मेदार होगी लेकिन मालदीव भारत के लक्षद्वीप के लिए वरदान बन जाएगा प्रधानमंत्री मोदी पहले ही 1200 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू कर आये हैं और कल टाटा ग्रुप ने लक्षद्वीप में 2 Taj Branded Resorts बनाने की घोषणा कर दी - दोनों में 110 - 110 कमरे होंगे ( एक में 60 villas, 50 water villas) और दूसरे में (75 beach villas, 35 water villas) 

अब चाहे तो विपक्ष कह सकता है मोदी ने लक्षद्वीप टाटा को बेच दिया लेकिन टाटा के अलावा भी  सकता है अन्य और ग्रुप भी होटल खोलें जिससे लक्षद्वीप के लोगों को भरपूर रोजगार मिलेगा कोई नौकरी चाहे तो राहुल “कालनेमि” को भी मिल सकती है। मालदीव यदि भारत विरोध में खड़ा न होता तो शायद लक्षद्वीप में इतना विकास न होता जो अब होगा

मालदीव : राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की जाएगी कुर्सी? अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू: एक्शन में डेमोक्रेट नेता, टूरिस्ट यूनियन ने भी घेरा

भारत एवं भारत से बाहर जितने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिन्दू विरोधी चेहरे हैं, धीरे-धीरे बेनकाब होने शुरू हो गए हैं। पाकिस्तान हो, कनाडा हो या कोई भी देश, अब ताजा मामला मालदीव का आया है। 

हकीकत में जब तक भारत अथवा हिन्दू विरोधियों को आर्थिक चोट नहीं पहुंचाए जायगी, ये सुधरने वाले नहीं। यदि #boycott Maldive  भविष्य में भी जारी रहा, इसकी पाकिस्तान से ज्यादा बुरी हालत हो जाएगी। 

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Maldives President Mohamed Muizzu) की कुर्सी जा सकती है, उनकी सरकार गिर सकती है। मालदीव में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मालदीव की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अली अजीम ने राष्ट्रपति मुइज्जू को पद से हटाने और उनकी सरकार को गिराने के लिए अन्य नेताओं से अपील की है।

मालदीव में संसदीय अल्पसंख्यक नेता अली अजीम ने सोमवार (8 जनवरी 2024) को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का आह्वान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से बेदखल करने में मदद करने की अपील की। अली अजीम ने लिखा: “डेमोक्रेट पार्टी से जुड़े हम लोग देश की विदेश नीति की स्थिरता को बनाए रखने और किसी भी पड़ोसी देश को अलग-थलग होने से रोकने के लिए समर्पित हैं। क्या आप राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से हटाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं? क्या मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की शुरुआत करेगी?”

सांसदों, कई बड़े नेताओं, पूर्व राष्ट्रपतियों के अपने ही सरकार के खिलाफ बयान के बाद मालदीव की टूरिस्ट यूनियन (MATI: Maldives Association of Tourism Industry) ने मुइज़्ज़ू सरकार के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। उधर मालदीव को जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी कमी आ गई है। भारत की सबसे बड़ी व्यापार संस्था CAIT ने भी भारतीय व्यापारियों से मालदीव से व्यापार ना करने की अपील की है। यह भी सामने आया है कि वर्तमान में चीन की यात्रा पर गए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा को लेकर भी मालदीव ने प्रस्ताव रखा है।

मालदीव की टूरिस्ट यूनियन ने की आलोचना

मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। इसने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया है। MATI ने कहा है, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”
MATI ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के समय भारत ने उनकी काफी सहायता की थी। उसके कारण भारत और मालदीव के रिश्ते बढ़ते रहे। MATI ने लोगों को ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी, जिनका रिश्तों पर बुरा असर हो।

सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था ने किया मालदीव का बहिष्कार

भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने देश के सभी कारोबारियों से अपील की है कि वह मालदीव के साथ कोई भी व्यापार ना करें। खंडेलवाल ने कहा है कि मालदीव के साथ व्यापार ना करके भारत के व्यापारी उसे एक कड़ा सन्देश भेजें कि दोनों देशों के रिश्ते एक दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने से ही चल सकते हैं।

मालदीव जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी आई कमी

मालदीव के बहिष्कार की माँग के चलते अब भारतीय यहाँ जाने की अपेक्षा देश में ही घूमने को तरजीह दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव को भारत से जोड़ने वाली उड़ानों को ऑपरेट करने वाली एयरलाइन्स ने कहा है कि बीते कुछ दिन में यहाँ की उड़ान की बुकिंग में कमी आई है। वहीं भारत में टूर ऑपरेटर की संस्था इंडियन एसोशिएसन ऑफ़ टूर ऑपरेटर्स ने कहा है कि बीते दो दिनों से उनके पास मालदीव जाने के लिए कोई नई पूछताछ नहीं आ रही है।

भारत आना चाहते हैं मालदीव के मुखिया मुइज़्ज़ू

मालदीव के मंत्रियों के भारत और पीएम मोदी को लेकर दिए गए बयान के बाद उपजे विवाद के बीच मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू भारत आना चाहते हैं। मालदीव की सरकार ने यह प्रस्ताव भारत के सामने रखा है। वह अभी चीन की यात्रा पर हैं। इससे पहले वह तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। मालदीव के राष्ट्रपतियों का चुने जाने के बाद पहली विदेश यात्रा में भारत आना एक परम्परा रही है। हालाँकि, भारत विरोधी भावनाओं को हवा देकर चुनाव जीते मुइज्जू ने इससे किनारा किया।
मीडिया पोर्टल WION के अनुसार इस यात्रा के लिए प्रस्ताव यह विवाद चालू होने से पहले रखा गया था। हालाँकि, अब इसको लेकर भारत का क्या रुख होगा, यह देखने वाली बात होगी। मुइज्जू, मालदीव में भारत विरोधी कैम्पेन ‘India Out’ को हवा देते रहे हैं।

भारत-मालदीव विवाद में अब तक क्या हुआ?

हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।
भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।
इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।
प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।
अवलोकन करें:-
भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।