Showing posts with label #CBI probe. Show all posts
Showing posts with label #CBI probe. Show all posts

दिल्ली : शराब के बाद अब दवा घोटाला! सरकारी अस्पतालों की दवाएँ निकलीं नकली तो LG ने दिए CBI जाँच के आदेश

शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह जेल की हवा खा रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर AAP (आम आदमी पार्टी) के एक अन्य पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन पहले से जेल में हैं। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ED का समन मिला है, लेकिन वो पूछताछ के लिए उपलब्ध होने में असमर्थता जता कर विपश्यना के लिए निकल गए हैं। अब दिल्ली सरकार एक और घोटाले में फँसी है। उप-राज्यपाल VK सक्सेना ने दवा घोटाले में CBI जाँच के आदेश दिए हैं। 

हकीकत में केजरीवाल सरकार घोटालों में लिप्त है। केजरीवाल भी खुद अच्छी तरह जानते हैं कि हर घोटाले में वह भी लिप्त है, उनको डर है कि ED द्वारा पूछताछ के दौरान ही गिरफ्तार करने पर उनका ईमानदारी का चोला उतर जाएगा। केजरीवाल के गिरफ्तार होते ही सम्भावना है आम आदमी पार्टी के कई धुरंदर भी बहुत जल्दी गिरफ्तार हो सकते हैं, क्योकि घोटालेबाज़ों की एक कड़ी लम्बी है।  

आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में दवा खरीद के मामले में नियमों की अनदेखी की गई और घोटाला हुआ। दिल्ली के अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं में बड़ी गड़बड़ी हुई है। न सिर्फ खरीद में लापरवाही बरती गई, बल्कि सरकारी एवं प्राइवेट लैब में जब इनकी टेस्टिंग की गई तो उसमें भी ये फेल साबित हुए। सतर्कता विभाग ने इस संबंध में LG के पास रिपोर्ट भेजी थी, जिसके बाद सीबीआई जाँच का आदेश दिया गया। ये दवाएँ तय मापदंडों पर खड़ी नहीं उतरीं।

उप-राज्यपाल विजय कुमार सक्सेना ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को भी पत्र लिख कर जाँच करने के लिए कहा है। 2024 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में उससे पहले लगातार घोटालों का सामने आना केजरीवाल सरकार के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। उधर 19 जनवरी तक मनीष सिसोदिया और 10 जनवरी तक संजय सिंह की हिरासत की अवधि अदालत ने बढ़ा दी है। यानी, दोनों नेताओं का नया साल सलाखों के पीछे ही मनेगा।

LG ने ये भी आदेश दिया है कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से नकली दवाएँ हटाई जाएँ। भाजपा नेता हरीश खुराना ने AAP सरकार पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कितने मरीजों पर बुरा असर पड़ा और कब से ये सब चल रहा था, इसका जवाब उन्होंने सरकार से माँगा है। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने याद दिलाया कि कैसे मोहल्ला क्लिनिक में भी बच्चों को दी गई दवाएँ जानलेवा साबित हुई थीं। वहीं RP सिंह ने कहा कि जल बोर्ड से लेकर DTC बसों तक, हर जगह दिल्ली में घोटाले हो रहे हैं।

अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति सबसे बड़ा घोटाला : 2007-2008 में 22000 करोड़ रूपए: इनमें 97% मदरसा, एक मोबाइल नंबर से 22 लड़कों को स्कॉलरशिप

आखिर भाजपा का विरोध क्यों हो रहा है, उसका कारण है कि हर बीतते समय एक से बढ़कर एक घोटाला उजागर हो रहा है। पिछली सरकारें किस तरह अल्पसंख्यक छात्रों के नाम पर घोटाले कर रही थी, जिससे हर आम मुस्लिम बिल्कुल अनजान है। लेकिन छद्दम धर्म-निरपेक्षों के मकड़जाल में फंस मुसलमान भाजपा को मुस्लिम विरोधी समझ गुमराह है। ऐसे में हर मुस्लिम को इन छद्दम धर्म-निरपेक्षों से पूछना चाहिए कि उनके नाम पर किये घोटाले में कमाए रूपए कहाँ गए?  
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने इस मामले की जाँच CBI को सौंप दिया है। घोटाले में सामने आया है कि फर्जी संस्थानों के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपए लिए गए। सरकार से छात्रवृत्ति लेने वाले इन अल्पसंख्यक संस्थानों में करीब 53 प्रतिशत यानी आधे से अधिक फर्जी हैं।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा की गई एक आंतरिक जाँच में ऐसे 830 संस्थानों में गहरे भ्रष्टाचार का पता चला। इन फर्जी संस्थानों के जरिए पिछले 5 वर्षों में 144.83 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मामले को आगे की जाँच के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के पास भेज दिया है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 10 जुलाई 2023 को इस मामले में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। जाँच के तहत 34 राज्यों के 100 जिलों में पूछताछ की गई। जाँच में 1572 संस्थानों में से 830 को धोखाधड़ी में शामिल पाया गया। ये संस्थान 34 में से 21 राज्यों के हैं, जबकि बाकी राज्यों में संस्थानों की जाँच अभी भी चल रही है।

फिलहाल, अधिकारियों ने इन 830 संस्थानों से जुड़े खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह घोटाला 2007-08 से ही चल रहा है। अब तक करीब 22,000 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। बीते चार साल से सालाना 2,239 करोड़ रुपए की छात्रवृत्तियाँ दी गई हैं।

सीबीआई इन फर्जी संस्थानों के उन जिला नोडल अधिकारियों की भी जाँच करेगी, जिन्होंने फर्जी संस्थानों का सत्यापन किया और अपनी अनुमोदन रिपोर्ट दी। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मंत्रालय ने यह भी सवाल उठाया है कि बैंकों ने फर्जी आधार कार्ड और केवाईसी दस्तावेजों के साथ लाभार्थियों के लिए फर्जी खाते खोलने की अनुमति कैसे दी।

इतना ही नहीं, जिन संस्थानों का अस्तित्व ही नहीं था या जिनका परिचालन नहीं हो रहा था, ऐसे फर्जी संस्थान जाँच के बाद राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) दोनों पर पंजीकृत होने में कामयाब रहे। इसमें भी संलिप्त अधिकारी जाँच के दायरे में रहेंगे।

राज्य के अनुसार विवरण

  • छत्तीसगढ़: जाँच में सभी 62 संस्थान फर्जी या निष्क्रिय पाए गए।
  • राजस्थान: जाँच के दौरान 128 संस्थानों में से 99 फर्जी या गैर-परिचालन वाले थे। यानी 77 प्रतिशत संस्थान फर्जी हैं।
  • असम: यहाँ के 68 प्रतिशत संस्थान फर्जी पाए गए।
  • कर्नाटक: 64 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।
  • उत्तर प्रदेश: 44 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।
  • पश्चिम बंगाल: 39 फीसदी संस्थान फर्जी पाए गए।

जाँच के दौरान कई खामियाँ मिलीं

  • केरल के मलप्पुरम में एक बैंक की शाखा ने 66,000 छात्रवृत्तियाँ वितरित कीं। यह छात्रवृत्ति के लिए पंजीकृत संख्या से अधिक है।
  • जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 5,000 पंजीकृत छात्रों वाले एक कॉलेज ने 7,000 छात्रवृत्ति दी गई।
  • एक अभिभावक का मोबाइल नंबर 22 विद्यार्थी से जुड़ा था। ये सभी छात्र नौवीं कक्षा में थे।
  • एक अन्य संस्थान में छात्रावास नहीं था, लेकिन प्रत्येक छात्र ने छात्रावास छात्रवृत्ति लिया।
  • पंजाब में अल्पसंख्यक छात्रों को स्कूल में नामांकित नहीं होने के बावजूद छात्रवृत्ति मिलती थी।
  • असम में एक बैंक शाखा में कथित तौर पर 66,000 लाभार्थी सूचीबद्ध थे। जब इन लाभार्थियों का सत्यापन करने के लिए पहुँची तो एक मदरसे में टीम को धमकी दी गई।
मंत्रालय का छात्रवृत्ति कार्यक्रम से लगभग 1,80,000 संस्थान जुड़े हुए हैं। इनमें 1.75 लाख मदरसे हैं, जिनमें सिर्फ 27,000 मदरसे ही पंजीकृत हैं और छात्रवृत्ति के पात्र हैं। इसमें कक्षा 1 से लेकर उच्च शिक्षा तक के छात्र शामिल हैं। इसे शैक्षणिक वर्ष 2007-2008 में शुरू की गई थी।
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति भले ही केंद्र सरकार देती है, लेकिन उसका सत्यापन और अन्य प्रक्रिया राज्य सरकार करती है। संस्थानाें का पंजीकरण जिला स्तर पर अल्पसंख्यक विभाग में होता है। छात्रवृत्ति के खाते स्थानीय बैंकों में खोले जाते हैं। विद्यार्थियों और संस्थानाें का सत्यापन भी राज्य सरकार का अल्पसंख्यक विभाग करता है।