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दिल्ली : शराब के बाद अब दवा घोटाला! सरकारी अस्पतालों की दवाएँ निकलीं नकली तो LG ने दिए CBI जाँच के आदेश

शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह जेल की हवा खा रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर AAP (आम आदमी पार्टी) के एक अन्य पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन पहले से जेल में हैं। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ED का समन मिला है, लेकिन वो पूछताछ के लिए उपलब्ध होने में असमर्थता जता कर विपश्यना के लिए निकल गए हैं। अब दिल्ली सरकार एक और घोटाले में फँसी है। उप-राज्यपाल VK सक्सेना ने दवा घोटाले में CBI जाँच के आदेश दिए हैं। 

हकीकत में केजरीवाल सरकार घोटालों में लिप्त है। केजरीवाल भी खुद अच्छी तरह जानते हैं कि हर घोटाले में वह भी लिप्त है, उनको डर है कि ED द्वारा पूछताछ के दौरान ही गिरफ्तार करने पर उनका ईमानदारी का चोला उतर जाएगा। केजरीवाल के गिरफ्तार होते ही सम्भावना है आम आदमी पार्टी के कई धुरंदर भी बहुत जल्दी गिरफ्तार हो सकते हैं, क्योकि घोटालेबाज़ों की एक कड़ी लम्बी है।  

आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में दवा खरीद के मामले में नियमों की अनदेखी की गई और घोटाला हुआ। दिल्ली के अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं में बड़ी गड़बड़ी हुई है। न सिर्फ खरीद में लापरवाही बरती गई, बल्कि सरकारी एवं प्राइवेट लैब में जब इनकी टेस्टिंग की गई तो उसमें भी ये फेल साबित हुए। सतर्कता विभाग ने इस संबंध में LG के पास रिपोर्ट भेजी थी, जिसके बाद सीबीआई जाँच का आदेश दिया गया। ये दवाएँ तय मापदंडों पर खड़ी नहीं उतरीं।

उप-राज्यपाल विजय कुमार सक्सेना ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को भी पत्र लिख कर जाँच करने के लिए कहा है। 2024 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में उससे पहले लगातार घोटालों का सामने आना केजरीवाल सरकार के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। उधर 19 जनवरी तक मनीष सिसोदिया और 10 जनवरी तक संजय सिंह की हिरासत की अवधि अदालत ने बढ़ा दी है। यानी, दोनों नेताओं का नया साल सलाखों के पीछे ही मनेगा।

LG ने ये भी आदेश दिया है कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से नकली दवाएँ हटाई जाएँ। भाजपा नेता हरीश खुराना ने AAP सरकार पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कितने मरीजों पर बुरा असर पड़ा और कब से ये सब चल रहा था, इसका जवाब उन्होंने सरकार से माँगा है। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने याद दिलाया कि कैसे मोहल्ला क्लिनिक में भी बच्चों को दी गई दवाएँ जानलेवा साबित हुई थीं। वहीं RP सिंह ने कहा कि जल बोर्ड से लेकर DTC बसों तक, हर जगह दिल्ली में घोटाले हो रहे हैं।

दिल्ली शराब घोटाला : ED ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन किया, सुप्रीम कोर्ट ने भी मानी है 338 करोड़ रूपए के लेनदेन की बात


शराब घोटाले की आँच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक पहुँच गई है। दिल्ली में AAP सरकार के मुखिया को अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन भेजा है। सोमवार (30 अक्टूबर, 2023) को ये कार्रवाई की गई। इस मामले में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह पहले से ही जेल में बंद हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी 338 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने जा जिक्र करते हुए मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

ED ने अरविंद केजरीवाल से कहा है कि वो गुरुवार (2 नवंबर, 2023) को जाँच एजेंसी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हों। 55 वर्षीय अरविंद केजरीवाल को PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत समन किया गया है। दिल्ली में उन्हें जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। ED ने इस मामले की चार्जशीट में कई बार अरविंद केजरीवाल के नाम का जिक्र किया है। इसमें बताया गया है कि शराब घोटाले के आरोपित उनसे संपर्क में थे।

शराब नीति बनाने और इसे लागू करने के क्रम में अरविंद केजरीवाल से ये लोग संपर्क में थे। इससे पहले अप्रैल 2023 में इसी मामले को लेकर CBI भी उन्हें समन कर चुकी है। हालाँकि, अगस्त में जब CBI ने FIR दर्ज की तो उसमें आरोपित के रूप में अरविंद केजरीवाल का नाम बतौर आरोपित नहीं शामिल किया गया था। दिल्ली की शराब नीति को विरोध के बाद वापस लिया जा चुका है। ताज़ा कार्रवाई के बाद भड़के AAP नेताओं ने मोदी सरकार पर किस्म-किस्म के आरोप लगाने भी शुरू कर दिए हैं।

मंत्री आतिशी ने दावा कर डाला कि BJP आम आदमी पार्टी से डर गई है। उन्होंने केजरीवाल को समन किए जाने को साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए ये सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम जेल जाने से नहीं डरते। वहीं दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जो अपने आप को कट्टर ईमानदार का सर्टिफिकेट देते फिरते हैं, अब उनकी काली परते खुलने लगी हैं। उन्होंने कहा कि जो सवाल दिल्ली की जनता कई महीनों से मुख्यमंत्री जी से पूछ रही है, अब उसका जवाब उन्हें देना होगा।

वीरेंद्र सचदेवा ने सवाल दागे – शराब नीति में बदलाव क्यों किया गया? 5% से 12% कमीशन क्यों की गई? 7% का किकबैक किसे मिला? इतने बड़े घोटाले का पैसा कहाँ खर्च हुआ? उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से कहती आई है कि इस घोटाले के असली साजिशकर्ता अरविंद केजरीवाल हैं। उन्होंने कहा कि खुद को ईमानदार बताने वाली इस जमात के चेहरे बेनकाब हो गए हैं। दिल्ली भाजपा ने कहा कि बहुत हुआ घोटाले का खेल, अब भ्रष्टाचारी केजरीवाल भी जाएगा जेल।

पार्टी ने कहा, “कट्टर भ्रष्ट मनीष सिसोदिया की सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब शराब घोटाले के सरगना केजरीवाल को ईडी ने पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उम्मीद ही नहीं हमे भरोसा है कि गली गली शराब के ठेके खोलने वाला, दिल्ली को शराब नगरी बनाने वाला, शराब की दलाली खाने वाला भी अब जल्द ही अपने अंजाम तक पहुँचेगा।” भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड अरविंद ही हैं और ‘शीशमहल’ भी इन्हीं पैसों से बना है।

छत्तीसगढ़ : 2000 करोड़ रूपए के NAN और शराब घोटाले की आँच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 6 मई 2023 को कांग्रेस नेता एवं रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया था। इस घोटाले की आँच अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुँच रही है। जिन अधिकारियों की देखरेख में 2000 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ, उन्हें बचाने का आरोप मुख्यमंत्री बघेल पर लगते रहे हैं।

ED ने अनवर की गिरफ्तार के बाद कहा था कि अनवर ढेबर शराब कारोबार का सरगना है। वहीं, IAS अधिकारी अनिल टुटेजा उस पैसे का प्रबंधन करते थे। एजेंसी ने दावा किया था कि शराब घोटाले की अवैध कमाई का इस्तेमाल चुनावों में किया गया। IAS टुटेजा वर्तमान में छत्तीसगढ़ के उद्योग और वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

अनिल टुटेजा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खास माने जाते हैं। ये वही अधिकारी हैं, जिनका नाम राज्य के NAN घोटाले में सामने आया था। हालाँकि, भूपेश बघेल ने इन पर कार्रवाई करने के बजाए, इन्हें उद्योग एवं वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संयुक्त सचिव का पद दे दिया। आरोप है कि सीएम बघेल टुटेजा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

दरअसल, ED ने पहले इस मार्च में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। इसके साथ ही विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान यह निकल कर सामने आया कि साल 2019 से 2022 के बीच 2000 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के किया गया है। ED ने इसके सबूत भी एकत्र किए हैं।

ED का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग जाँच से पता चला कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। अनवर ढेबर की आड़ में उच्च स्तर के राजनीतिक अधिकारियों और नौकरशाहों द्वारा अवैध काम को अंजाम दिया जा रहा था। इसके लिए उन लोगों ने व्यक्तियों एवं संस्थाओं का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।

दरअसल, अनवर ढेबर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बेहिसाब देसी शराब बनवाना शुरू किया था और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचता था। इस तरह वह सरकारी खजाने में एक रुपए भी जमा किए बिना बिक्री की सारी आय खुद रख लेता था। 2019 से 2022 के बीच यह अवैध बिक्री राज्य की कुल शराब बिक्री का लगभग 30-40 प्रतिशत थी।

इस घोटाले को तीन तरीके से अंजाम दिया गया। पहला सरकारी शराब की बोतलों पर 70-150 रुपए प्रति केस अनवर दुकानदारों से कमीशन लेता था। दूसरे पैटर्न में वह नकली शराब बनाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाता था और उसका पैसा खुद रखता था। तीसरा पैटर्न था कि लाइसेंस में कमीशन लेता था। यह एक वार्षिक कमीशन था, जिसका भुगतान मुख्य डिस्टिलर्स द्वारा डिस्टिलरी लाइसेंस प्राप्त करने और सीएसएमसीएल की बाजार खरीद में निश्चित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था।

छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री 800 सरकारी दुकानों के जरिए की जाती है। निजी दुकानों को शराब बेचने का अधिकार नहीं है। दुकान चलाने वाले लोगों के मैन पावर से लेकर कैश कलेक्शन तक का काम राज्य की सरकारी कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) देखती है। अनवर ढेबर अपने राजनीतिक आकाओं एवं अधिकारियों के सहयोग से CSMCL के एक आयुक्त और एमडी तक पहुँच बनाने में कामयाब हो गया।

ईडी का कहना है कि सिंडिकेट में राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह, नेता और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। फरवरी 2019 में ITS अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी राज्य सरकार के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) में शामिल हुए। ढेबर के कहने पर तीन महीने के भीतर त्रिपाठी को इसका प्रबंध निदेशक बना दिया गया। त्रिपाठी का काम था- रिश्वत संग्रह को अधिकतम करना। आईएएस अधिकारी विकास अग्रवाल पैसा इकट्ठा करने और आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह को रसद इकट्ठा करने के काम में लगाया गया था।

इस सिंडिकेट में मैनपावर का इस्तेमाल अग्रवाल के एक सहयोगी की कंपनी सुमसेट फैसिलिटीज लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई थी। होलोग्राम का ठेका प्रिज्म होलोग्राफी एंड फिल्म्स सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कैश कलेक्शन का काम टॉप्स सिक्योरिटीज को दिया गया था, जिसके मालिक सिद्धार्थ सिंघानिया थे, जो अग्रवाल के करीबी सहयोगी थे।

जाँच में ED ने पाया कि मार्च 2019 में देशी शराब निर्माता कंपनी छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड ने ढेबर और त्रिपाठी से मुलाकात की। डिस्टिलर्स को 75 रुपए प्रति केस कमीशन देने का आदेश दिया गया। बदले में ढेबर ने अपनी उधार दरों को बढ़ाने का वादा किया। सिंडिकेट ने कमीशन में एक बड़ी राशि एकत्र की। इसका एक बड़ा हिस्सा एक राजनीतिक दल को दिया गया था।

इतना सब कुछ फिक्स करने के बाद सिंडिकेट ने बेहिसाब कच्ची शराब बनाना शुरू कर दिया। इसे सरकारी दुकानों पर बेचा जा रहा था। इन कच्ची शराब को असली दिखाने के लिए इन पर डुप्लीकेट होलोग्राम भी लगाया गया। डुप्लीकेट बोतलें नकद में खरीदी गईं और एक डिस्टिलर को सप्लाई की गईं, जो उन्हें भरने का काम करता था।

ढेबर ने मासिक लक्ष्य निर्धारित किए। डिस्टिलर्स द्वारा हर महीने 800 पेटी देशी शराब से लदे 200 ट्रकों की आपूर्ति की जाती थी। 560 रुपए प्रति पेटी के हिसाब से शराब की सप्लाई की जाती थी। एमआरपी 2,880 रुपए प्रति केस था। बाद में इसे बढ़ाकर 3,880 रुपए कर दिया गया।

इसके अलावा, विदेशी शराब की माँग को देखते हुए और विदेशी शराब निर्माताओं से पैसे लेने में आने वाली समस्याओं को देखते हुए Fl-10A लाइसेंस को लाया गया। यह ढेबर के तीन परिचितों को मिला। इन लोगों ने विदेशी शराब खरीदने के लिए बिचौलियों की तरह काम किया और इसे सरकारी गोदामों में बेच दिया और विदेशी शराब निर्माताओं से लगभग 10% का कमीशन प्राप्त किया।

ED ने पाया कि इस सिंडिकेट की ‘ऊपर’ तक पहुँच थी। इसमें अन्य कई नेताओं और नौकरशाहों के शामिल होने की आशंका है, जिसकी जाँच केंद्रीय एजेंसी कर रही है। उधर भाजपा ने सीएम भूपेश बघेल की सरकार पर हमला बोला है। भाजपा ने कहा, “भूपेश सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में हुआ 2000 करोड़ का शराब घोटाला… भूपेश जी, जरा आँख उठाकर बताइये तो सही, कितना बँटा और कितना घर पहुँचा?”

विवादित IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और NAN

साल 2015 में रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर कॉन्ग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद रमन सिंह की सरकार ने आरोपों की जाँच का आदेश दिया था। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने NAN (नागरिक आपूर्ति निगम या सार्वजनिक वितरण निगम घोटाला) घोटाले का पर्दाफाश किया।
इस घोटाले में 27 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था। जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया था, उनमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला मुख्य आरोपित थे। साल 2015 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद राज्य में चुनाव हुए और सत्ता बदल गई। कॉन्ग्रेस की सरकार आते ही शुक्ला और टुटेजा के लिए चीजें बदल गईं।
टुटेजा पर लगे आरोपों को अनुचित बताते हुए बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने एक SIT का गठन किया। तब से टुटेजा को बचाने और रमन सिंह को घोटाले में फँसाने की कोशिश की जा रही है। साल 2020 में टुटेजा को मामले में जमानत दिए जाने के तुरंत बाद उन्हें बघेल सरकार ने वाणिज्य और उद्योग का संयुक्त सचिव बना दिया। वहीं, शुक्ला को शिक्षा व अन्य विभागों का प्रभारी प्रमुख सचिव बनाया गया है।
भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा था कि भूपेश बघेल की सरकार ने SIT के प्रमुख GP सिंह को कहा था कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनकी पत्नी और तत्कालीन प्रमुख सचिव अमन सिंह को फँसाना है। जब जीपी सिंह ने ऐसा करने से मना कर दिया तो उन्हें साजिश रचने का अभियुक्त बनाकर उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई।
राजेश मूणत ने कहा था कि भाजपा नेताओं को फँसाने के लिए अधिकारी चैट करते थे। इसमें आलोक शुक्ला निर्देश देते थे और अनिल टुटेजा इसे इसका संचालन करते थे। मूणत ने कहा कि आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा से कॉन्ग्रेस के क्या रिश्ते हैं, ये पार्टी को बताना चाहिए।

ऑपइंडिया को मिले ह्वाट्सएप चैट से हुआ था खुलासा

फरवरी 2020 में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान IPS अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के फोन जब्त कर लिए गए थे। व्हाट्सएप पर टुटेजा के दूसरे अधिकारियों के साथ चैट में विभाग को कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। ऑपइंडिया के पास भी यह एक्सक्लूसिव व्हाट्सएप उपलब्ध है। चैट में टुटेजा के एसआरपी कल्लूरी, इंदिरा कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह और आरिफ शेख जैसे अधिकारियों के साथ की गई बातचीत उपलब्ध है।
चैट में उपलब्ध बातचीत से यह साफ हो गया है कि अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के इशारे पर राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली का जमकर दुरुपयोग किया गया। व्हाट्सएप चैट से यह भी स्पष्ट होता है कि कैसे राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी NAN घोटाले के मुख्य अभियुक्तों के सहायक बनकर रह गए हैं। चैट से पता चलता है कि राज्य के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला आरोपित टुटेजा के साथ मिलकर उनके केस को कमजोर करने और उनके विरोधियों पर मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रच रहे थे।
राज्य के एक प्रमुख आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह द्वारा दिए गए शपथ पत्र और अनिल टुटेजा के साथ हुई व्हाट्सएप चैट से भी मामले में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जानकारी के मुताबिक आलोक शुक्ला के निर्देशन में अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, अन्य बड़े पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिलकर राजनीतिक विरोधियों की एक हिटलिस्ट तैयार की थी।
मुख्यमंत्री बघेल न सिर्फ टुटेजा की मदद कर रहे थे बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके परिवार के लोगों, पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी (पुलिस) मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे अधिकारियों को भी फँसाने की कोशिश कर रहे थे।
19 अक्टूबर 2022 को छत्तीसगढ़ के NAN घोटाला मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दावा किया कि मुख्य आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत है। जो उन्हें बचाने की कोशिश में लगे हैं। ईडी ने मामले को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने की अपील की थी।

शराब घोटाले : पूरी दिल्ली सरकार घिरी, सिसोदिया के बाद संजय सिंह भी आरोपी,

साभार 
शराब घोटाले से लेकर तमाम तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त दिल्ली सरकार के मंत्री एक-एक कर जेल जा रहे हैं। शराब घोटाले में शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया के जेल जाने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी संजय सिंह का नाम भी शराब घोटाले की चार्जशीट में आ गया है। यानी वो भी जेल जा सकते हैं। इसके अलावा शराब घोटाले की आंच अब कट्टर ईमानदार मुख्यमंत्री केजरीवाल तक पहुंच गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने केजरीवाल को 16 अप्रैल को पूछताछ के लिए तलब किया है। सीबीआई का कहना है कि उसके पास सबूत है, यानी अब केजरीवाल की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। ऐसा लगता है कि अगले कुछ दिनों में पूरी केजरीवाल सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में होगी। एक दिलचस्प बात यह भी है कि केजरीवाल ने अपने साथियों और अपने बारे में जो भी भविष्यवाणी की थी वह एक-एक कर सच साबित हो रही है

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केजरीवाल ने कहा था- अगर मैं चोरी करूंगा तो मुझे भी जेल जाना पड़ेगा

अरविंद केजरीवाल ने एक समय कहा था- कल को अगर मनीष सिसोदिया चोरी करेंगे तो मनीष सिसोदिया केजरीवाल का कुछ नहीं लगता, उसको जेल जाना पड़ेगा। कल को अगर हमारा मंत्री चोरी करेगा, ये मेरे कोई सगे नहीं लगते इनको जेल जाना पड़ेगा। कल को कोई हमारा विधायक चोरी करेगा, कोई हमारा सगा नहीं लगता, उसको जेल जाना पड़ेगा। और मनीष, कल को अगर मैं चोरी करूंगा तो मैं भी तुम्हारा सगा नहीं लगता, मुझे भी जेल जाना पड़ेगा।

केजरीवाल की दोमुंही बातें

एक समय केजरीवाल कहते हैं- भ्रष्टाचार हुआ है, जांच कराओ, पकड़ो, जेल में डालो। जब मनीष सिसोदिया को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजा गया तो तब उनके सुर बदल गए। उसके बाद केजरीवाल ने कहा- जिन लोगों ने मनीष सिसोदिया को पकड़ा है वे देश के दुश्मन हैं।

शराब घोटाले में आया संजय सिंह का नाम

शराब घोटाले में दिल्ली सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस समय ईडी की हिरासत में हैं। अब आम आदमी पार्टी के एक और कद्दावर नेता संजय सिंह पर भी इसकी गाज गिर सकती है। ईडी ने इस मामले में अदालत में पेश अपनी चार्जशीट में संजय सिंह को भी आरोपी बना लिया है। संजय सिंह को आरोपी बनाने के लिए दिनेश अरोड़ा के बयान को आधार बनाया गया है। हालांकि, सांसद संजय सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह फर्जी बताया है और कहा है कि अडानी विवाद को संसद में उठाने के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों पर केस दर्ज करने की बात कही।

सीबीआई ने केजरीवाल को पूछताछ के लिए बुलाया

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब नीति केस में सीबीआई ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। एजेंसी ने उन्हें 16 अप्रैल 2023 को CBI दफ्तर बुलाया है। इस पर आम आदमी पार्टी ने प्रतिशोध की राजनीति का आरोप लगाया है। वहीं, जांच एजेंसी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ सबूत होने का दावा किया है। सीबीआई का कहना है कि सबूत के आधार पर ही समन जारी किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से हाल ही में दायर चार्जशीट के अनुसार, अरविंद केजरीवाल ने शराब कारोबारी और आबकारी नीति घोटाले के मुख्य आरोपी समीर महेंद्रू से फेसटाइम पर बात की थी। इस बातचीत में उन्होंने पार्टी के संचार प्रभारी विजय नायर पर भरोसा करने को कहा। ईडी का कहना है कि 12 नवंबर और 15 नवंबर 2022 को पूछताछ के दौरान समीर महेंद्रू ने अधिकारियों को बताया था कि विजय नायर ने अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी मुलाकात तय की थी, लेकिन बात नहीं बनी।

डिप्टी सीएम के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल की बारी

कानून के जानकारों के मुताबिक, दिल्ली आबकारी नीति और शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने अभी सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को अभियुक्त नहीं बनाया है, लेकिन सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल की मुसीबतें भी बढ़ सकती हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ पहली बार अरविंद केजरीवाल का भी नाम शामिल किया था। 03 फरवरी, 2023 को पीएमएलए कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लिया और सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दी। चार्जशीट में सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ-साथ उनके करीबी विजय नायर, इंडोस्पिरिट्स के प्रमुख समीर महेंद्रू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। ईडी ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के सचिव के रूप में तैनात रहे दानिक्स अधिकारी सी अरविंद के बयान के आधार पर केजरीवाल को इस घोटाले में आरोपी बनाया। ईडी के मुताबिक दानिक्स अधिकारी अरविंद ने कहा कि उन्हें उनके बॉस सिसोदिया द्वारा केजरीवाल के आवास पर बुलाया गया था, जहां एक बैठक में उन्हें आबकारी नीति पर मंत्रियों की रिपोर्ट का एक मसौदा सौंपा गया था।

समीर और विजय नायर ने रची थी साजिश

ईडी के मुताबिक, नायर ने महेंद्रू और केजरीवाल को फेसटाइम वीडियो कॉल पर जोड़ा था। अरविंद केजरीवाल ने समीर से कहा कि विजय नायर उनके आदमी हैं और वह उन पर भरोसा कर सकते हैं। नायर इस मामले के आरोपियों में से एक हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि समीर महेंद्रू और विजय नायर ने कथित तौर पर दिल्ली शराब नीति घोटाले में दूसरों के साथ मिलकर साजिश रची थी।

CBI के पास केजरीवाल के खिलाफ सबूत

ईडी के अनुसार, समीर महेंद्रू विजय नायर के साथ मिलकर काम कर रहा था और राजनेताओं और शराब कारोबारियों के साथ कई बैठकों का हिस्सा रहा था। ईडी ने यह भी बताया था कि केजरीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में शराब के कारोबार के सिलसिले में आंध्र प्रदेश के एक सांसद मगुनता श्रीनिवासलु रेड्डी से मुलाकात की थी। वहीं, दो प्रमुख गवाहों ने सीबीआई को बताया कि अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में आबकारी नीति की ड्राफ्ट कॉपी आबकारी अधिकारी को दी गई और बाद में लागू की गई।

लाभ मार्जिन का 6 प्रतिशत हिस्सा अवैध रूप से AAP को दिया गया

दिल्ली में हुए शराब घोटाले में पॉलिसी मेकिंग में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो केजरीवाल और सिसोदिया के करीबी थे। इसमें प्रमुख नाम विजय नायर का है जो मनीष सिसोदिया के ज्यादा करीबी हैं। उसने शराब माफिया से करोड़ों रुपये वसूले और 12 प्रतिशत लाभ मार्जिन का 6 प्रतिशत हिस्सा अवैध रूप से AAP को वापस दिया। इसके लिए पालिसी में ढाई प्रतिशत मार्जिन को बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। इस काम के लिए दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत के सरकारी बंगले का दुरूपयोग से लेकर रेस्टोरेंट और बार मालिकों से इलेक्शन फण्ड के नाम पर वसूली करना भी शामिल है।

गोवा चुनाव में खर्च किया गया शराब घोटाले का पैसा

समीर महेंद्रू का दावा है कि इस मामले में करोड़ों रुपये केजरीवाल के आदेश पर दिए गए थे, जिसे गोवा चुनाव में खर्च किया गया था।

आबकारी विभाग के सचिव ने लिया केजरीवाल का नाम

आबकारी विभाग में सचिव सी. अरविंद का बयान पहले मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किया गया था। जिसमें उन्होंने खुलासा किया था कि मनीष सिसोदिया आबकारी पॉलिसी को लेकर सीधे निर्देश दे रहे थे। सी. अरविंद ने ED और CBI के सामने अपने बयानों में खुलासा किया कि मार्च 2021 में अरविंद केजरीवाल के आवास पर शराब कारोबारियों का लाभ मार्जिन 12 प्रतिशत तय करने का फरमान लिया गया था।

YSRCP सांसद ने की थी केजरीवाल से मुलाकात

जांच एजेंसी के मुताबिक, YSRCP सांसद मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मिले थे। केजरीवाल ने उनका दिल्ली में शराब के कारोबार में शामिल होने के लिए स्वागत किया था। इसके अलावा कई नेता पर्दे के पीछे रहकर आबकारी घोटाले में शामिल थे। जिसमें साउथ की ‘लिकर लॉबी’ की अहम भूमिका है।

17 नवंबर 2022 को दी गई थी नई शराब नीति को मंजूरी

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने पिछले साल 17 नवंबर को नई शराब नीति को मंजूरी दी थी। इसके तहत दिल्ली में शराब की सरकारी दुकानों को बंद कर दिया गया। नई नीति को लागू करने के लिए दिल्ली को 32 जोन में बांटा गया था। हर जोन में 27 शराब की दुकानें थीं। इन दुकानों का मालिकाना हक जोन को जारी किए गए लाइसेंस के तहत दिया गया था। हर वार्ड में 2 से 3 वेंडर को शराब बेचने की अनुमति दी गई।

सुकेश चंद्रशेखर ने कहा था- केजरीवाल शराब घोटाले का वजीर

महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने पटियाला हाउस कोर्ट में अपनी पेशी के दौरान मार्च 2023 में कहा था कि शराब नीति में अगली गिरफ्तारी अरविंद केजरीवाल की होगी। सुकेश ने कहा, “केजरीवाल वजीर है, एक-एक का पर्दाफाश करूंगा। शराब नीति मामले में अभी और गिरफ्तारियां होंगी। केजरीवाल अपनी टास्क को बखूबी निभा रहे हैं। शराब नीति से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। इससे पहले सुकेश चंद्रशेखर ने चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। सुकेश ने आम आदमी पार्टी को महाठग बताया था। इसके साथ ही लिखा था कि आपके सभी उल्टी सीधी कारगुजारियों और कारनामों का खुलासा करने के लिए मैं आ रहा हूं। सुकेश ने दावा किया था कि उसने सिसोदिया के साथ भी काफी नजदीकी से काम किया है और उसे पता है कि वो कैसे हर विभागीय काम में कमीशन खाते हैं।

दिल्ली में AAP के विधायकों और मंत्रियों की गिरफ्तारी

2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से अब तक केजरीवाल की पार्टी के कई नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। आम आदमी पार्टी के अब तक पांच मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक मंत्री को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया और दो मंत्रियों को रिश्वत लेने के मामले में पकड़ा गया। जबकि एक मंत्री को फर्जी डिग्री के मामले में आरेस्ट किया गया था। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के विधायक भी कई मामले में जेले भेजे गए थे। डिप्टी सीएम रहे मनीष सिसोदिया को शराब घटाले में आपराधिक साजिश रचने के आरोप में जेल भेजा गया है। दिल्‍ली कैबिनेट में कुल 6 मंत्री थे, उनमें से दो अब जेल में हैं।

दिल्ली में किन मंत्रियों और विधायकों को अबतक गिरफ्तार किया गया

मनीष सिसोदियाः शराब घोटाले में जेल में

शराब घोटाले में सीबीआई ने 26 फरवरी 2023 को दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। मनीष सिसोदिया को सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान सीबीआई ने उन्हें कई सबूत दिखाए, इसमें कुछ दस्तावेज और डिजिटल सबूत थे। सिसोदिया इन सबूतों के सामने कोई जवाब नहीं दे सके थे। सिसोदिया को पूछताछ के लिए पहले पांच दिन और बाद में दो दिन के लिये सीबीआई की हिरासत में सौंपा गया था। यह अवधि समाप्त होने के बाद सिसोदिया को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

सत्येंद्र जैन : मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को 30 मई 2022 को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा दर्ज है। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैन, उनकी पत्नी पूनम और अन्य पर केस दर्ज किया गया है। सत्येंद्र जैन पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली ने कई शेल कंपनियां बनाई और खरीदी थी। कोलकाता के तीन हवाला ऑपरेटर्स से 54 शेल कंपनियों के जरिए 16.39 करोड़ रुपए का काला धन भी ट्रांसफर किया। ईडी जैन की 4.81 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है। पिछले दिनों सत्येंद्र जैन के एक के बाद एक कई वीडियो जेल से सामने आए थे। इसमें सत्येंद्र जैन जेल की बैरक में मसाज लेते हुए दिख रहे थे।

अमानतुल्ला खानः अवैध भर्तियों और वित्तीय गबन में पहुंचे जेल

दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अवैध भर्तियों और वित्तीय गबन से जुड़े एक मामले में सितंबर 2022 में गिरफ्तार हुए आप विधायक अमानतुल्ला खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। नवंबर 2022 में दिल्ली की एक अदालत ने कहा था कि ओखला विधायक के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के सबडिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ने नवंबर 2016 में दिल्ली वक्फ बोर्ड में विभिन्न मौजूद और गैर-मौजूद पदों पर खान की ओर से मनमानी और अवैध नियुक्तियों का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद सीबीआई ने एक मामला दर्ज कर लिया था और जांच की थी, जिसमें पर्याप्त सबूत मिले थे, जिसके बाद जांच एजेंसी ने उपराज्यपाल से अभियोजन की मंजूरी मांगी थी। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान के विरुद्ध 2016 में दर्ज ‘अवैध’ नियुक्तियों के मामले में सीबीआई को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी थी।

आसिम अहमद खान: बिल्डर से 6 लाख रुपए घूस लेने के मामले में फंसे

साल 2018 में दिल्ली सरकार में मंत्री आसिम अहमद खान का नाम भी भ्रष्टाचार के मामले में सामने आया था। तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने कैबिनेट मंत्री आसिम अहमद खान को हटा दिया था। आसिम पर 6 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। आसिम अहमद खान दिल्ली सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री थे, सीएम केजरीवाल ने आसिम के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। आसिम पर एक बिल्डर से 6 लाख रुपए घूस लेने का आरोप है। केजरीवाल ने कहा था- ‘शिकायत करने वाले ने आसिम से बातचीत की। ऑडियो रिकॉर्डिंग मेरे पास भेजी। इसके बाद मैंने मंत्री के ख‍िलाफ कार्रवाई की।’ जबकि आसिम खान ने कहा था- मेरे खिलाफ साजिश की गई है।

संदीप कुमारः बलात्कार के आरोप में भेजे गए थे जेल

2015 में दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा सीट से विधायक बने संदीप कुमार को दिल्ली सरकार में महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्री और एससी-एसटी कल्याण मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार को बलात्कार और अन्य आरोपों के सिलसिले में सितंबर 2016 में गिरफ्तार किया गया था। एक महिला ने उनके खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की थी और बाद में कुमार ने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया था। यह महिला संदीप कुमार की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले सामने आई एक विवादास्पद सीडी में उनके साथ दिखाई दी थी। महिला ने आरोप लगाया था कि वह राशन कार्ड बनवाने के लिए गई थी लेकिन कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उनके साथ रेप किया गया। घटना के सामने आने के बाद कुमार को पार्टी से भी निलंबित कर दिया गया था।

सोमनाथ भारतीः बीवी की प्रताड़ना के आरोप में गए जेल

दिल्ली सरकार के मंत्री रहे सोमनाथ भारती मालवीय नगर सीट से विधायक रहे हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की पहली बार सरकार बनने के बाद सोमनाथ भारती को कानून, पर्यटन और प्रशासनिक सुधार जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली थी। सोमनाथ भारती की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब उनकी पत्नी लिपिका मित्रा ने 2013 में उनके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया। लिपिका ने अपनी शिकायत में सोमनाथ भारती के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि सोमनाथ भारती ने उन्हें गर्भपात के लिए मजबूर किया। इसके बाद 2014 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। यूपी दौरे पर एक विवादित बयान के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2021 में उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई।

जितेंद्र तोमरः फर्जी डिग्री रखने के आरोप में हुए थे गिरफ्तार

2015 में दिल्ली की त्रिनगर सीट के विधायक बने जितेन्द्र तोमर को केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बनाया गया था। उन्हें दिल्ली के पर्यटन, कला और संस्कृति की भी जिम्मेदारी दी गई थी। उनके ऊपर वकालत की फर्जी डिग्री रखने का आरोप लगा था। इसका खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ था। मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। जहां भागलपुर यूनिवर्सिटी ने उनकी डिग्री को फर्जी बताया। 2016 में जितेन्द्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया। जनवरी 2020 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी रद्द कर दी।

गुलाब सिंहः जबरन वसूली के आरोप में हुए थे गिरफ्तार

दिल्ली के मटियाला से विधायक गुलाब सिंह को अक्टूबर 2016 में गुजरात के सूरत से जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब वह आम आदमी पार्टी के गुजरात के प्रभारी थे। दिल्ली में दर्ज हुए मामले में गुलाब सिंह यादव को गुजरात से गिरफ्तार कर यहां लाया गया था। गुलाब सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ धमकी और वसूली मामले में गैर-जमानती वॉरंट जारी किया गया था। AAP के विधायक गुलाब सिंह यादव नवंबर 2022 में दिल्ली के श्याम विहार में अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। इस दौरान कार्यकर्ता टिकट बेचने को लेकर अचानक आक्रोशित हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। कार्यकर्ता विधायक पर टूट पड़े और उनका कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की करने लगे। कार्यकर्ताओं से बचने के लिए विधायक बाहर निकलकर भागने की कोशिश करने लगे तो कार्यकर्ता उनका पीछा करते हुए उन्हें मुक्के मारते रहे। कार्यालय में मारा इसके बाद पीटते हुए कार्यालय से बाहर लेकर आए। आखिरकार विधायक को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।

‘सत्येंद्र, सिसोदिया, केजरीवाल…शराब घोटाले के तीन दलाल’ : राजघाट पर बीजेपी का मौन प्रदर्शन, दिल्ली मुख्यमंत्री से माँग रहे इस्तीफा

देश में आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनावों में एक नारा "नसबंदी के तीन दलाल इंदिरा, संजय बंसी लाल" प्रमुख था, जिसका नुकसान कांग्रेस को हुआ कि सत्ता चली गयी, और अब 2023 में अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी द्वारा हुए शराब घोटाले में "शराब घोटाले के तीन दलाल सत्येंद्र, सिसोदिया केजरीवाल" नारा चर्चा में है।   
शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आज राजघाट पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता मौन प्रदर्शन कर रहे हैं। इस धरने पर बैठे लोगों के हाथ में कई पोस्टर हैं। जिनमें केजरीवाल, सिसोदिया और सत्येंद्र जैन का नाम लिखा गया है।

धरने के बैनर पर पीछे देख सकते हैं कि लिखा है- “शराब घोटाले के सरगना केजरीवाल इस्तीफा दो। दिल्ली के भ्रष्ट मुख्यमंत्री की सदबुद्धि के लिए मौन व्रत।”

इसके अलावा नेताओं ने जो हाथ में पोस्टर लिए हैं उन पर लिखा है- “केजरीवाल के दो मंत्री गए जेल। केजरीवाल इस्तीफा दो-इस्तीफा दो।”, एक पर लिखा है- “दिल्ली सरकार घोटाले का खेल, मनीष सिसोदिया चले जेल।”, “शराब घोटाले के तीन दलाल, सत्येंद्र, सिसोदिया और केजरीवाल”, “गली-गली में शोर है, सिसोदिया चोर है।”

इस मौन प्रदर्शन में शामिल नेता लगातार धरने की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। उनका कहना है, “भ्रष्टाचारी केजरीवाल के इस्तीफे तक भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा। भ्रष्टाचारी केजरीवाल इस्तीफा दो!”

सुकेश चंद्रशेखर ने लिया केजरीवाल का नाम

मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद से शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल से भी इस्तीफा माँगा जा रहा है। पिछले दिनों जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने भी केजरीवाल को लेकर दावा किया था कि अब अगला नंबर केजरीवाल का आएगा। सुकेश ने कहा था, “मैंने यह लिखित में दिया है कि मैं उनके कितने करीब रहा हूँ और मैं उनमें से हर एक को बेनकाब करने जा रहा हूँ। अरविंद केजरीवाल किंगपिन हैं। वह ‘वजीर’ हैं और उन्हें बहुत जल्द पकड़ लिया जाएगा…मैं उनके साथ चार अलग-अलग मामलों में शामिल था, लेकिन शराब घोटाले में नहीं।”

दिल्ली : पूर्व आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है जब के शिक्षा मंत्री को आबकारी मंत्री भी रहते न्यायिक हिरासत में जेल जाना पड़ा। न्यायिक हिरासत में जाने का मतलब है कि मुद्दा जरुरत से कहीं अधिक गंभीर है। कुछ समाचार सूत्रों के अनुसार माननीय जज साहब ने बिना समय गंवाए जेल के आदेश दे दिए।  
दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की होली तिहाड़ जेल में मनेगी। कोर्ट ने 7 दिन की सीबीआई हिरासत के बाद सिसोदिया को 20 मार्च 2023 तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है। सीबीआई के वकील ने सिसोदिया की रिमांड की माँग नहीं की थी। हालाँकि यह कहा था कि जरूरत पड़ने पर 15 दिनों में फिर से रिमांड की माँग कर सकते है।

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए मनीष सिसोदिया 4 मार्च 2023 को 2 दिनों की रिमांड पर भेजे गए थे। उनकी यह रिमांड सोमवार (6 मार्च 2023) को खत्म हो रही थी। ऐसे में सीबीआई ने उन्हें दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। इस दौरान सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा कि वह मनीष सिसोदिया की रिमांड की माँग नहीं कर रहे हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर अगले 15 दिनों में फिर से रिमांड की माँग कर सकते हैं।

सीबीआई के वकील की इस बात को सुनने के बाद कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब उन्हें आगामी 20 मार्च तक जेल में रहना होगा। इसके अलावा मनीष सिसोदिया के आवेदन पर कोर्ट ने उन्हें जेल के अंदर चश्मा, भगवद गीता, डायरी, पेन तथा एमएलसी द्वारा निर्धारित दवाएँ रखने की अनुमति दी है। साथ ही, जेल अधीक्षक को मनीष सिसोदिया की मेडिटेशन सेल में रखने की अपील पर विचार करने का निर्देश दिया है। उनकी जमानत याचिका पर 10 मार्च को सुनवाई की जाएगी

मनीष सिसोदिया गिरफ्तारी

सीबीआई ने 26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया से करीब 8 घण्टे पूछताछ की थी। पूछताछ में सहयोग न करने के कारण सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 27 फरवरी 2023 को उन्हें कोर्ट में पेश किया था। जहाँ से कोर्ट ने सिसोदिया को 5 दिनों की रिमांड में भेजा था। इसके बाद 28 फरवरी को कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने फौरन सुनवाई की माँग करते हुए सिसोदिया की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
कोर्ट ने सिंघवी की याचिका को स्वीकार कर लिया था। 28 फरवरी को सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने सिसोदिया को फटकार लगाते हुए पहले हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।
फिर शुक्रवार (03 मार्च 2023) को पूर्व डिप्टी सीएम सिसोदिया ने निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में सिसोदिया ने CBI की पूछताछ में सहयोग का हवाला देकर जमानत माँगी। सिसोदिया की तरफ से कहा गया कि पूछताछ के लिए जब भी उन्हें बुलाया जाएगा वे हाजिर हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि उन्हें कस्टडी में रखने की कोई वजह नहीं है। इस जमानत याचिका पर कोर्ट 10 मार्च 2023 को फैसला सुनाएगा।

क्या डिप्टी सीएम के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की बारी?

सीबीआई द्वारा आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया पर कार्यवाही करने जो आम आदमी पार्टी द्वारा हंगामा क्यों किया जा रहा है, जबकि कुछ दिन पूर्व तक दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल स्वयं कहते फिर रहे थे कि अगर मनीष सिसोदिया कसूरवार है तो केंद्र सीबीआई से जाँच करवाकर क्यों नहीं जेल भेजती? ऐसे में चर्चा यह भी है कि क्या केजरीवाल को इस शराब घोटाले की नहीं थी? 

डिप्टी सीएम के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल की बारी

कानून के जानकारों के मुताबिक, दिल्ली आबकारी नीति और शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने अभी सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को अभियुक्त नहीं बनाया गया है, लेकिन सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल की मुसीबतें भी बढ़ सकती हैं। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ पहली बार अरविंद केजरीवाल का भी नाम शामिल किया था। 03 फरवरी, 2023 को पीएमएलए कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लिया और सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दी। चार्जशीट में सीएम केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ-साथ उनके करीबी विजय नायर, इंडोस्पिरिट्स के प्रमुख समीर महेंद्रू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। ईडी ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के सचिव के रूप में तैनात रहे दानिक्स अधिकारी सी अरविंद के बयान के आधार पर केजरीवाल को इस घोटाले में आरोपी बनाया। ईडी के मुताबिक दानिक्स अधिकारी अरविंद ने कहा कि उन्हें उनके बॉस सिसोदिया द्वारा केजरीवाल के आवास पर बुलाया गया था, जहां एक बैठक में उन्हें आबकारी नीति पर मंत्रियों की रिपोर्ट का एक मसौदा सौंपा गया था।

5 दिनों की CBI कस्टडी में भेजे गए मनीष सिसोदिया: अदालत में LG पर फोड़ा ठीकरा, 3 फोन कर चुके हैं नष्ट
शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को सीबीआई (CBI) ने 27 फरवरी 2023 दोपहर को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। इस दौरान जाँच एजेंसी ने CBI के स्पेशल जज एमके नागपाल से सिसोदिया की 5 दिन की कस्टडी माँगी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सिसोदिया को 4 मार्च तक रिमांड में भेजा।

जानकारी के मुताबिक सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा कि यह पूरा मामला प्रॉफिट से जुड़ा है। इस पर हमारी आगे की जाँच होना बाकी है। आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया मंत्रियों के एक समूह को लीड कर रहे थे। शराब नीति के मॉडल को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई।

इसके जवाब में सिसोदिया के वकील दयान कृष्णन ने कहा कि एलजी वीके सक्सेना ने मई 2021 में आबकारी नीति को मंजूरी दी थी। प्रॉफिट मार्जिन के बारे में सारी बहस हो रही है। उन्होंने (LG) बदलावों को लेकर अपनी रजामंदी दी थी। पहले दिन CBI ने फोन के बारे में बात की थी। कहा था कि सिसोदिया ने 4 फोन इस्तेमाल किए, 3 को नष्ट कर दिया। क्या सिसोदिया अपना फोन सेकेंड हैंड शॉप पर नहीं दे सकते हैं। वो क्या अपना फोन रखे रहते, क्या उन्हें पता था कि CBI आएगी और उन्हें गिरफ्तार करेगी।

कृष्णन ने आगे कहा कि CBI कह रही है कि जिस तरह वो चाहती है, सिसोदिया उस तरह जवाब नहीं दे रहे हैं। जहाँ तक जाँच में सहयोग की बात है तो सिसोदिया ने सहयोग किया है। उनके घर पर छापा मारा गया। उनके फोन एजेंसी के पास हैं। अब एजेंसी कह रही है कि सिसोदिया गोलमोल जवाब दे रहे हैं। उनके पास यह अधिकार है। एक व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार होते हैं।

 जाँच में सहयोग करने के लिए सिसोदिया को 19 फरवरी को नोटिस जारी किया गया था। लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए एक सप्ताह का समय माँगा। उनके अनुरोध पर फिर नोटिस जारी किया गया। लेकिन बाद में भी वह जवाब देने में टालमटोल करते रहे। इसलिए उनकी गिरफ्तारी हुई। मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के खिलाफ AAP के कार्यकर्ताओं ने मुंबई और दिल्ली में प्रदर्शन किया।

मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार करने के बाद से सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के अन्य नेता भी निशाने पर आ गए हैं। ज्ञान गंगा नाम के ए​क ट्विटर यूजर ने ‘आप’ के नेताओं पर निशाना साधते हुए लिखा, “आप के ज्यादातर नेता भ्रष्ट हैं। चुनाव से पहले उनके पास कुछ नहीं था। चुनाव के बाद उनके पास कार, बंगले और सभी विलासिता की चीजें हैं। मनीष सिसोदिया जेल गए। लेकिन ‘आप’ के अन्य भ्रष्ट नेता अभी भी खुले घूम रहे हैं।”

सोशल मीडिया पर मनीष सिसोदिया को यूजर्स लुटेरा कह रहे हैं।

वहीं, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सिसोदिया के खिलाफ CBI के पास सबूत नहीं थे। कई अफसर उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ थे। सिसोदिया को राजनीतिक दबाव में गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार हुए दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया: शराब घोटाले में CBI की कार्रवाई

CBI ने दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया है। लंबी पूछताछ के बाद जाँच एजेंसी द्वारा ये कार्रवाई की गई। उनकी गिरफ़्तारी को ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ ने ‘लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन’ करार दिया है। बता दें कि सीएम अरविंद केजरीवाल ने पहले ही घोषित कर दिया था कि सिसोदिया गिरफ्तार होने वाले हैं। सिसोदिया ने भी पूछताछ के लिए जाने से पहले ये दावा किया था।

दक्षिणी दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-144 लागू कर दी गई है। CBI के मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। विरोध प्रदर्शन के दौरान उग्र हुए कई AAP कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया है। कम से कम 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से 8 महिला कार्यकर्ता हैं, जिन्हें रिहा कर दिया जाएगा। AAP सांसद सांसद संजय सिंह को भी हिरासत में लिया गया है, जिन्हें राज्यसभा में हंगामा करने के लिए जाना जाता है।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा और कपिल मिश्रा ने मनीष सिसोदिया को ‘चोर’ करार दिया। बता दें कि CBI की पूछताछ से पहले समर्थकों के साथ मनीष सिसोदिया ने रोडशो किया था और फिर महात्मा गाँधी के समाधि स्थल राजघाट जाकर प्रार्थना की थी। गिरफ़्तारी से पहले लगभग 8 घंटों तक मनीष सिसोदिया से पूछताछ चली। 19 फरवरी को ही उन्हें पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन तब उन्होंने बजट में व्यस्त होने की बात कही थी।

अक्टूबर 2022 में जब मनीष सिसोदिया को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तब भी उन्होंने अपनी गिरफ़्तारी का दावा किया था। हालाँकि, ऐसा कुछ हुआ नहीं। इस दौरान लोगों ने ये भी कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपने पास कोई मंत्रालय नहीं रखा हुआ है और अधिकतर काम मनीष सिसोदिया ही करते रहे थे। ऐसे में उन्हें नई परेशानी झेलनी पड़ी है। पूर्व क्रिकेटर एवं सांसद गौतम गंभीर ने भी पूछा कि आखिर गुनाह कर के जाओगे कहाँ?

छत्तीसगढ़ : शराब बिक्री से मिले ₹2856 करोड़ कौन गटक गया?

छत्तीसगढ़ शराब
कांग्रेस सरकार हो और कोई घोटाला न हो, हो ही नहीं सकता। परन्तु जनता भी अब इन घोटालों पर होते शोर की परवाह नहीं करना चाहती। क्योकि महाराष्ट्र में जिस तरह भाजपा और शिवसेना ने भ्रष्ट अजित पवार से हाथ मिलाकर घोटालों पर पर्दा डालना शुरू कर दिया है, अब जनता भी भाजपा से मुंह मोड़ने का मन बना रही है। घोटालों का शोर राजनीती से ज्यादा कुछ नहीं। कल सत्ता परिवर्तन होने पर जब आबकारी मंत्री सत्तारूढ़ दल में शामिल हो जाएगा, कोई घोटाले की जाँच नहीं होगी, क्योकि वही आबकारी मंत्री गंगाजल की भांति पवित्र हो जाएगा। 
खैर मुद्दे पर आते हैं:
छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री से मिला राजस्व सरकारी खजाने के बदले कहॉं गया? ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब राज्य की कांग्रेस सरकार के मंत्री तक को ठीक से नहीं पता। राज्य सरकार ने इस वर्ष 31 अक्टूबर तक 11,000 करोड़ की शराब बेची है। नियमानुसार, ये पूरी की पूरी रक़म सरकारी खजाने में जमा होनी चाहिए थी। लेकिन, इसमें से मात्र 8271 करोड़ 42 लाख रुपए ही सरकारी खजाने में पहुँचे। शेष 2855 करोड़ 70 लाख रुपए कहाँ गए, इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ये धनराशि कोषालय में पहुँची ही नहीं और ख़र्च भी कर दी गई। मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस मामले ने तूल पकड़ा।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायक धर्मजीत सिंह ने इस बाबत विधानसभा में सवाल पूछा। सरकार ने बताया कि ये रक़म शराब की नई खेप ख़रीदने, उनके परिवहन, ढुलाई और कर्मचारियों को वेतन देने में ख़र्च हो गई, इसीलिए सरकारी खजाने में इसका रिकॉर्ड नहीं है। 
चर्चा यह भी हो गयी है कि "क्या शराब की नई खेप खरीदने, परिवहन, और कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन का कोई हिसाब नहीं रखा जाता? आखिर किस मद में इन खर्चों का अंकित किया जाता है?" 
विपक्षी विधायकों ने इसे क़ानून के ख़िलाफ़ बताते हुए कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। नियमानुसार, इस रक़म को पहले कोषालय में जमा किया जाना चाहिए था और फिर ख़र्च किया जाना था। विपक्षी नेताओं ने कहा कि बिना सरकारी खजाने में रुपए डाले इसे बाहर ही बाहर ख़र्च कर देना मनमानी है।
आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने दावा किया कि ये कोई गड़बड़ी नहीं है, जबकि विधायक धर्मजीत जाँच कराने पर अड़े रहे। मंत्री ने कहा कि जाँच की कोई ज़रूरत ही नहीं है। आबकारी मंत्री ने बताया कि शराब दुकानों में लूटपाट और गबन की वजह से इस वर्ष सरकार को 13 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सरकार अभी तक 4 करोड़ रुपए ही रिकवर कर सकी है। वहीं भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा शराब पी जा रही है, सरकार को ‘उड़ता छत्तीसगढ़’ फ़िल्म बनानी चाहिए। बता दें कि शाहिद कपूर अभिनीत ‘उड़ता पंजाब’ में पंजाब की ड्रग्स समस्या दिखाई गई थी। चंद्राकर ने पूरी छत्तीसगढ़ कैबिनेट को ही अवैध करार दिया।

धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और कर्जमाफी के फ्लॉप होने जैसे मुद्दों को लेकर पहले से ही विपक्ष के विरोध का सामना कर रही भूपेश बघेल सरकार अब शराब से हुई कमाई में गड़बड़ी के सामने आने से चारों ओर से घिर गई है। यहाँ तक कि बसपा विधायकों ने भी सदन में कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य में जनप्रतिनिधियों का कोई सम्मान नहीं रह गया है।