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गुजरात: जामा मस्जिद में हिंदू-जैन मूर्तियाँ मिलने के बाद ASI का सर्वे, प्राचीन प्रतिमाएँ और नक्काशी मिली; हटाया गया अतिरिक्त ‘वजू खाना’


गुजरात के भरूच में स्थित कथित जामा मस्जिद के तहखाने में मिली मूर्तियों के बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने तहखाने का सर्वे किया है। दरअसल, हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें इस कथित मस्जिद के बंद पड़े तहखाने में हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियाँ नजर आ रही थीं।

इस वीडियो में भगवान गणेश, हनुमान और जैन तीर्थंकर मल्लिनाथ की प्रतिमा दी थीं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके के विभिन्न हिंदू व जैन संगठनों ने मामले की जाँच की माँग उठाई। इसके बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया है और फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

पुरातत्व विभाग की जाँच और सामने आए दावे

पुरातत्व विभाग की टीम ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच जामा मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया और तहखाने की वीडियोग्राफी भी कराई। जाँच के दौरान कुछ संरचनात्मक निशान, स्तंभों पर पारंपरिक नक्काशी और एक प्रतिमा पर संवत 1213 अंकित होने के दावे सामने आए हैं।

हालाँकि, विभाग ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

इस बीच शंकराचार्य मठ के महंत स्वामी मुक्तानंद ने कहा है कि यह खोज उनके पुराने दावों को मजबूत करती है और उनका दावा है कि यह स्थान पहले जैन धर्म से जुड़ा हुआ था। उन्होंने इसे ‘जैन समरी विहार’ बताते हुए श्री चक्रधर स्वामी के जन्मस्थल से भी जोड़ा है।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी बीच पुरातत्व विभाग ने मस्जिद परिसर में बिना अनुमति बनाए गए अतिरिक्त ‘वजू खाने’ को हटा दिया है। इसके साथ ही एक विवादित दरवाजे को भी सील कर दिया गया है।

मस्जिद ट्रस्ट और प्रशासन की स्थिति

इसी बीच मुस्लिम समाज के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और निष्पक्ष जाँच की माँग की। फिलहाल पूरा मामला पुरातत्व विभाग की अंतिम रिपोर्ट पर टिका हुआ है, जिसके बाद आगे की प्रशासनिक और कानूनी दिशा तय होगी।

गुजरात: भरूच की जामा मस्जिद के तहखाने में मिलीं हिंदू-जैन देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, Video सामने आया


गुजरात के भरूच की विवादित जामा मस्जिद के बेसमेंट में हिंदू और जैन देवी-देवताओं की पुरानी मूर्तियाँ दिखाने वाला एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में मस्जिद के बेसमेंट में भगवान गणेश, हनुमान और जैन तीर्थंकर मल्लिनाथजी की मूर्तियाँ दिख रही हैं।

ऑपइंडिया से बातचीत में भरूच के स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि यह वीडियो सही है और संतों द्वारा लंबे समय से कही जा रही बातों की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कि इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता और सच्चाई आज सबके सामने है।

गौरतलब है कि हिंदू संत और संगठन लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि भरूच में जामा मस्जिद हिंदू-जैन मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थी। जनवरी की शुरुआत में ऑपइंडिया ने एक डिटेल्ड रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें बताया गया था कि यह दावा कितना सच है और इसके लिए क्या ऐतिहासिक सबूत और फैक्ट्स मौजूद हैं।

स्वामी मुक्तानंद ने कहा कि भरूच में जामा मस्जिद ASI से सुरक्षित स्मारक होने के बावजूद कुछ नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। हमारी माँग है कि इसका मैनेजमेंट ASI नियमों के तहत किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

                                                         तहखाने का सील दरवाजा

हाल ही में, स्थानीय प्रशासन ने यहाँ अवैध रूप से निर्मित एक शेड को ध्वस्त कर अतिक्रमण हटा दिया। इसके अलावा, तहखाने की ओर जाने वाले एक दरवाजे को भी सील कर दिया गया है।

दिल्ली : जामा मस्जिद का भी हो सर्वे: सीढ़ियों में दबे हैं सैकड़ों मंदिरों के अवशेष एवं मूर्तियाँ, हिंदू संगठन ने ASI के डायरेक्टर जनरल को लिखी चिट्ठी; देखिए आधा-अधूरा सच बताती वीडियो


दिल्ली स्थित जामा मस्जिद की सर्वे कराने की माँग करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के डायरेक्टर जनरल को चिट्ठी लिखी गई है। इसमें कहा गया है कि मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने जोधपुर और उदयपुर के कृष्ण मंदिर को तोड़कर उसके देव प्रतिमा को दिल्ली की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवाए थे। इसके पीछे औरंगजेब पर साकी मुस्तक खान की पुस्तक मसीर-ई-आलमगीरी को आधार बनाया गया है। अभी सिर्फ जामा मस्जिद ही नहीं फतेहपुरी मस्जिद भी लपेटे में आने वाली है। 

ASI के डायरेक्टर को चिट्ठी हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्त ने लिखी है। इससे पहले हिंदू सेना प्रमुख ने राजस्थान के अजमेर स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को संकटमोचन महादेव मंदिर बताते हुए कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय, ASI और दरगाह कमिटी को नोटिस देकर 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।

विष्णु गुप्ता ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि जोधपुर और उदयपुर के सैकड़ों मंदिरों को तोड़कर औरंगजेब ने हिंदुओं को अपमानित करने के लिए उनके अवशेषों को दिल्ली की जामा मस्जिद की सीढ़ियों पर लगवा दिया। जामा मस्जिद ASI के नियंत्रण में है और वह इसके पीछे की सच्चाई पता लगाने के लिए उसका सर्वे कराए। मस्जिदों की सीढ़ियों के नीचे दबे मंदिरों के अवशेषों से हिंदुओं की भावना आहत होती है।

विष्णु गुप्ता ने कहा कि मसीर-ई-आलमगीरी में लिखा है कि 24-25 मई 1689 को रविवार का दिन था। उस दिन खान जहाँ बहादुर जोधपुर से मंदिरों को तबाह करके लौटा। खान जहाँ बहादुर द्वारा मंदिरों को लूटने, प्रतिमाओं को खंडित करने और फिर उन्हें ध्वस्त कर के बाद बैल गाड़ियों से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष को दिल्ली रवाना कर दिया। इससे औरंगजेब बहुत खुश हुआ था।

इस वीडियो में अधूरा सच बताया गया है। जब अंग्रेजों ने जामा मस्जिद ही नहीं फतेहपुरी मस्जिद को भी नामस्जिद घोषित कर अपनी फौज और फौज के घोड़ों को इसमें रखा तब सैकड़ों हिन्दुओं ने इसे अंग्रेजों से मुक्त करवाने धरने और प्रदर्शन पुलिस की लाठियां खाई थी। तब उस समय दो व्यापारियों- सेठ छुन्ना मल और सत्य नारायण गुड़ वाले- मैदान में उतरे और दोनों मस्जिदों की नीलामी कर ख़रीदा था। यही वजह है अडानी अम्बानी को रोने वाले इस व्यापारियों का नाम नहीं लेते। इनके नामों को इन छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं और पार्टियों ने मिटटी में दबा दिया। छुन्ना मल ने जामा मस्जिद का मुतवल्ली, जामा मस्जिद के पीछे इंद्रप्रस्थ स्कूल के पास, उनके निवास पर बड़ा सा लोहे का गेट है, क्षेत्रीय निवासी को नियुक्त किया था। 1987 के लगभग इस परिवार का क़ौमी आवाज़, उर्दू दैनिक में पत्र प्रकाशित भी हुआ था कि मस्जिद के प्रबंधन में हमें क्यों नहीं शामिल किया जाता? छुन्ना मल ने हमें इस मस्जिद का मुतवल्ली नियुक्त किया था। इस गंभीर मुद्दे पर अपने युवा जीवन में रामजन्मभूमि विवाद के कई मुस्लिम नेताओं, मौलानाओं से भी प्रश्न किया था, शुरू में तो मुझे फिरकापरस्त आदि कहने लगे लेकिन जब उन्हें उन्ही की भाषा में जवाब देते दोगला और मुस्लिमों का दुश्मन बताते बहुत कुछ कहना शुरू करने पर कबूला कि 'हाँ, जब 1865 के बाद की तवारीख पढ़ते है, तब ऐसा हवाला आता है।'         

विष्णु गुप्ता का कहना है कि हिंदू सेना चाहती है कि दिल्ली स्थित जामा मस्जिद का ASI सर्वे कराए और उन मूर्तियों को बाहर निकाल कर फिर से मंदिरों में स्थापित किया जाए। इस सर्वे से मुगल आक्रांता औरंगजेब की क्रूरता और मंदिर तोड़ने की सच्चाई भी दुनिया के सामने आ सकेगी। विष्णु गुप्ता द्वारा ASI को लिखी गई चिट्ठी की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

अजमेर के मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का सर्वे कराने की माँग को लेकर भी उन्होंने एक याचिका दी है। इसके बाद कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय और ASI से जवाब माँगा है। इस याचिका के बाद विष्णु गुप्ता को जान से मारने की धमकी भी मिली है। तीन दिन पहले उन्हें कनाडा से के एक नंबर से धमकी भरा कॉल आया था।

 विष्णु गुप्ता को फोन करने वाले कॉल करने वाले कॉलर ने उन्हें ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी थी। विष्णु गुप्ता ने बताया था कि धमकी देने वाले ने कहा था, “तेरा सिर कलम कर दिया जाएगा, गर्दन काट दी जाएगी। तुमने अजमेर दरगाह का केस फाइल करके बहुत बड़ी गलती कर दी है। अब तू नहीं बचेगा।”

‘जहाँ हो रहा G20 समिट, वहाँ बढ़ रहा विस्फोटक-हथियार लदा ऑटो’, जामा मस्जिद में भी बम : जिस फोन कॉल के बाद पुलिस महकमे में मची खलबली, वो निकली फर्जी


दिल्ली के भलस्वा डेयरी और जामा मस्जिद इलाकों से पुलिस को फर्जी कॉल कर के गड़बड़ी की सूचना दी गई। पुलिस ने दोनों मामलों की जाँच की और सूचनाओं को अफवाह बताया। भलस्वा डेयरी से बंदूक और विस्फोटक वाले संदिग्ध की अफवाह उड़ाने वाला 21 वर्षीय एक युवक निकला। जामा मस्जिद इलाके से इसी तरफ की अफवाह उड़ाने वाला मदरसे का एक नाबालिग छात्र। पुलिस ने शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) को भलस्वा डेयरी के आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है।

पहले मामले में शुक्रवार को दिल्ली पुलिस को फोन पर एक अज्ञात कॉलर ने एक संदिग्ध ऑटो रिक्शा के प्रगति मैदान की तरफ बढ़ने की जानकारी दी। इसी जगह पर G 20 के सम्मेलन का एक हिस्सा आयोजित हो रहा है जिसमें देश-विदेश की कई बड़ी हस्तियाँ मौजूद हैं। कॉलर ने आगे बताया कि ऑटो में संदिग्ध विस्फोटक और हथियारों के साथ मौजूद है। मामले की सूचना पर पुलिस फ़ौरन हरकत में आई। पुलिस ने कॉलर के बताए रास्तों की तलाशी ली तो सूचना झूठी पाई गई। अंत में कॉलर की लोकेशन ट्रेस की गई तो वो भलस्वा डेयरी की निकली।

पुलिस ने शुक्रवार को ही संदिग्ध आरोपित को हिरासत में ले कर पूछताछ की। आरोपित ने झूठी सूचना देना कबूल किया। पुलिस ने उसे समुचित धाराओं में गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। साथ ही मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

                                                                       दिल्ली पुलिस प्रेसनोट

मदरसा छात्र ने भी उड़ाई अफवाह

दूसरा मामला जामा मस्जिद इलाके से सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ,घटना शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) की है। इस दिन सुबह 7:50 पर दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम में एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले कॉलर ने जामा मस्जिद के आगे एक संदिग्ध व्यक्ति के मूवमेंट की जानकारी दी। कॉलर ने संदिग्ध के पास बंदूक होने का भी दावा किया। साथ ही जामा मस्जिद में बम होने की भी सूचना दी। आनन-फानन में सक्रिय हुआ पुलिस दस्ता घटनास्थल पर पहुँचा और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। पुलिस को गहन छानबीन के बावजूद कुछ नहीं मिला।
बाद में सूचना देने वाले मोबाइल नंबर को ट्रेस किया गया। कॉलर का नंबर मदरसे में पढ़ रहे एक 14 साल के नाबालिग का निकला। यह मदरसा जामा मस्जिद के पास ही है। कॉल करने वाले छात्र से पूछताछ की गई तब उसने इस करतूत में अपने एक साथी और उसी मदरसे के छात्र के भी शामिल होने की सूचना दी। दोनों ने बताया कि वो मदरसे में छुट्टी करवाना चाह रहे थे इसलिए उन्होंने फर्जी कॉल पुलिस को की। दोनों नाबालिगों से पुलिस के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने भी पूछताछ की। हालाँकि इस पूछताछ में कुछ भी संदिग्ध निकल कर नहीं आया।
पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। बताते चलें कि G20 सम्मेलन को देखते हुए प्रशसन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जमीन से आसमान तक नजर रखने के साथ सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी की जा रही है। पुलिस बार-बार लोगों को अफवाहों से बचने की अपील भी जारी कर रही है।

दिल्ली : जामा मस्जिद में अकेली लड़कियों की नो एंट्री; क्या अब कोई आरफा अकेली नहीं खिंचवा सकती तस्वीर?

जामा मस्जिद में लड़कियों की एंट्री बैन (तस्वीर साभार: आरफा खानम का फेसबुक)
जामा मस्जिद में लड़कियों की एंट्री बैन करने को लेकर बवाल बढ़ता जा रहा है। हाल में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा है कि वो मस्जिद के इमाम को नोटिस भेजेंगीं। वहीं जामा मस्जिद के जनसंपर्क अधिकारी सबीउल्लाह खान की भी इस संबंध में सफाई आई है। 

सबीउल्लाह ने मीडिया से बातचीत में बताया, “महिलाओं पर रोक नहीं लगाई गई है। जो अकेली लड़कियाँ यहाँ आती हैं, लड़कों को टाइम देती हैं, यहाँ आकर वीडियोज बनाई जाती हैं, केवल उस चीज को रोकने के लिए इस पर पाबंदी लगाई गई है।”

अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा, “अगर आप देखेंगे तो अभी भी चारों तरह महिलाएँ मौजूद हैं। परिवार के साथ आएँगी तो कोई दिक्कत नहीं। शादीशुदा जोड़े आएँगे तो भी कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन इस तरह यहाँ अकेले आना, इसे मीटिंग प्वाइंट बनाना, इसे पार्क समझ लेना, टिकटॉक वीडियो बनाना, डांस करना, किसी भी धर्मस्थल के लिए मुनासिब नहीं है। चाहे वो मंदिर हो, मस्जिद हो या गुरुद्वारा हो। किसी भी धर्मस्थल का प्रोटोकॉल रखना बहुत जरूरी है। हमारा पाबंदी लगाने का सिर्फ यही मकसद है कि मस्जिद इबादत के लिए है और उसका इस्तेमाल सिर्फ इबादत के लिए किया जाए।"

वीडियो में वह आगे कहते हैं, “अगर कोई यहाँ इबादत करना चाहे तो प्लीज आएँ। उसमें किसी तरह की पाबंदी नहीं है। बस यही कहना है कि मस्जिद का इस्तेमाल मस्जिद की तरह हो।”

जामा मस्जिद में अकेली लड़कियों की एंट्री पर बैन

उल्लेखनीय है कि इससे पहले खबर आई थी कि राजधानी दिल्ली में स्थित जामा मस्जिद में लड़कियों के अकेले प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है और यह फरमान मस्जिद प्रशासन की तरफ से जारी हुआ है। इस आदेश की एक प्लेट बाकायदा मस्जिद की दीवार पर भी देखी गई थी। विश्व हिन्दू परिषद प्रवक्ता ने मस्जिद प्रशासन के इस निर्णय की आलोचना की थी। वहीं मस्जिद प्रशासन ने अपने फैसले को सही ठहराया था। कई मुस्लिम महिला कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले का विरोध किया था।

आरफा खानम को कट्टरपंथियों ने किया था गलत साबित

मस्जिद में महिलाओं की एंट्री को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। अप्रैल 2022 में भी मस्जिद में महिलाओं की एंट्री का मुद्दा उठा था। हालाँकि तब द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी सामने आईं और तस्वीरें साझा करते हुए संघ पर निशाना साधा। उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि महिलाएँ मस्जिद के अंदर जा सकती हैं जिसके बाद कट्टरपंथी ही उनके विरोध में आ गए और उनपर बेहयाई फैलाने का आरोप लगाया।

The Kashmir Files : ज़हर उगलने वाले मौलाना फ़ारूक़ ने माफ़ी मांगी

                                                               साभार- JK मीडिया
ज़हर उगल कर माफ़ी मांगने वाले मौलानाओं की वजह से कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार नहीं बल्कि देश में साम्प्रदायिक दंगे होते हैं। और जब कोई कपिल मिश्रा या अनुराग बोलता है, इनके समर्थक victim card खेलते हुए सारा दोष कपिल और अनुराग पर डाल मज़लूम, गरीब और नादान साबित करने की कोशिश करते हैं। सरकार को ऐसे मौलानाओं पर माफ़ी मांगने के बावजूद सख्त कार्यवाही करनी चाहिए, क्योकि माफ़ी से पहले ज़हर तो फैला चुके होते हैं। 
जम्मू कश्मीर के राजौरी के एक मौलवी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुदा की कसम खाते हुए हिंदुओं के मिट जाने का ऐलान करता है। मौलवी फारूक कश्मीरी पंडितों पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फ़ाइल्स (The Kashmir Files)’ नाम की फिल्म को बैन करने की माँग करता है। इस वीडियो के वायरल होने और उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग होने पर उसने प्रतिक्रिया है। मौलवी का कहना है कि वह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार के खिलाफ बोला है।

कानूनी कार्रवाई को देखते हुए एक अन्य वीडियो में सफाई देते हुए मौलवी फारूक ने कहा, “आज से दो रोज पहले जुमे की खुतबे (धार्मिक भाषण) में ये कश्मीर फाइल्स के नाम से एक मूवी बनाई गई है, जिसमें हमारे कश्मीरी पंडित भाइयों के ऊपर जुल्म दिखाया गया है, उस सिलसिले में हमने मौजूदा हुकूमत से एक मुतालबा (अनुरोध) किया था कि इस तरह की फिल्में समाज में इंतसार का सबब होती हैं।”

उन्होंने कहा, “उसमें (खुतबे में) हमने मौजूदा हुकूमत से मुतालबा किया था कि वो ऐसी ‘फिलम’ पर पाबंदी लगाए। हमारा न किसी मजहब को, ना किसी तबके को टारगेट करना है, बल्कि मैं तो ये कहता हूँ कि कश्मीरी पंडित हमारे जम्मू-कश्मीर की शान हैं, आन हैं, बान हैं और उनके बगैर जम्मू-कश्मीर अधूरा है। मेरे बयान को शायद किसी के समझने में, क्योंकि मेरी तकरीर में किसी जात से कोई मतलब नहीं है। मेरा हुकूमत से इस बात का मुतालबा था।”

मौलवी कश्मीरी पंडितों को भाई बताते हुए माफी के दौरान भी फिल्म को एकतरफा करार दिया और कहा, “इसमें एक रूख दिखाया गया है। कश्मीरी पंडित हमारी भाई हैं, इसलिए उनके खिलाफ वाली कोई बात नहीं है।”

उन्होंने कहा कि अगर उनका जुमला कि किसी के समझ में ना आया हो तो वे एक ‘वसी उल कल्बी’ (बड़े दिल का) आदमी हैं, इसलिए माफी माँग रहे हैं। मौलवी कहा कि वे अमन का ही पैगाम देते हैं। उन्होंने किसी मजहब या जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार से सवाल किया था।

जुमे की तकरीर में क्या था मौलाना ने

सामने आए वीडियो में राजौरी के जामा मस्जिद का मौलवी फारुक भारत पर 800 साल राज करने की बात करता है। इसके बाद वो खुदा की कसम खाते हुए हिंदुओं (जो सिर्फ 70 साल से राज कर रहे हैं) के मिट जाने का ऐलान कर रहा। जब फारूक जहर उगल रहा होता है, उस समय उसके सामने बैठी भीड़ ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाती है।
अवलोकन करें:-
The Kashmir Files बैन हो : ‘हमने 800 साल भारत पर हुकूमत की… खुदा कसम तुम मिट जाओगे’
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The Kashmir Files बैन हो : ‘हमने 800 साल भारत पर हुकूमत की… खुदा कसम तुम मिट जाओगे’
द कश्मीर फ़ाइल्स (The Kashmir Files) के निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा, “राजौरी के मौलवी साहब का कहना है कि यह फ़िल्म बंद होनी चाहिए। हमने 800 साल तुम पर हुकूमत की। तुम 70 साल की हुकूमत में हमारा निशान मिटाना चाहते हो? दोस्तों, बिलकुल इसी तरह कश्मीर से कश्मीरी हिंदुओं का नाम-ओ-निशान मिटा दिया गया था।”