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हरियाणा : मनोहर लाल खट्टर साहब नुहुं में रोहिग्यों ने मदरसा कैसे बना लिया? मुख्यमंत्री रहते तुम और तुम्हारा प्रशासन क्या कर रहा था? जवाब दो ! घुसपैठ कर हरियाणा में बसे ही नहीं हैं रोहिंग्या मुस्लिम, चला रहे मदरसे भी: मौलवी बोले- हम ब्लैक में म्यांमार से आए

रोहिंग्या और नूहं का मदरसा (साभार: ऑर्गेनाइजर वीडियो)
हरियाणा के मुस्लिम बहुत मेवात क्षेत्र के नूहं में बाहर से आए हुए रोहिंग्या मुस्लिमों की एक बड़ी आबादी अवैध रूप से रह रही है। ये सभी म्यामांर से अवैध रूप से भारत में आए और यहाँ से नूहं में स्थापित हो गए। इन अवैध घुसपैठियों के रहने वाले अस्थायी आवास बनाया गया है। ये सभी साल 2016 में ही भारत आ गए थे और तभी से यहाँ रह रहे हैं। इनमें रहने के साथ-साथ मदरसा भी संचालित किया जा रहा है।

दरअसल, ऑर्गनाइजर ने हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान इन अवैध घुसपैठियों से बात की थी। इसका वीडियो अब जारी किया गया है। ऑर्गेनाइजर की ओर से पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने यहाँ मदरसे में पढ़ाने वाले मौलाना और यहाँ पढ़ने वाले बच्चों से बात की। यहाँ पढ़ाने वाले यूनुस ने कहा कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं। हालाँकि, उनकी जुबानी ये संख्या है, लेकिन वास्तविक संख्या कितनी है, ये किसी को नहीं पता।

ये वही क्षेत्र है, जहाँ से हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरन कॉन्ग्रेस नेता मामन खान से रिकॉर्ड जीत हासिल की है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में उन्हें एकतरफा मत मिले। चुनाव प्रचार के दौरान मामन यहाँ के हिंदुओं को धमकाते हुए कहा था कि जिन लोगों ने मुस्लिमों के खिलाफ अन्याय किया है, उन्हें कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही मेवात छोड़ना पड़ेगा। मामन का नाम 2023 के मेवात दंगों में आया था।

नूहं के नांगली गाँव में पत्रकार पहुँचे। यहाँ बाँस आदि से छप्पर के रूप में एक अस्थायी ढाँचा बनाया गया है, जिस पर लिखा है ‘मदरसा इस्लामिया दारूल उलूम इल्यासिया’। ये ढाँचा एक बड़े भूभाग पर बनाया गया है। इसमें नमाजी टोपी पहने हुए बहुत सारे बच्चे और किशोर दिखाई देते हैं। इसमें जियाउर रहमान नाम के एक व्यक्ति है, जो खुद को मौलवी बताता है।

रहमान कहता है कि वह नहूँ में रहता है कि मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए वह गाँव में आता है। रहमान खुद भी म्यामांर (बर्मा) का रहने वाला है। रहमान ने बताया कि साल 2016 से यह मदरसा चल रहा है। यहाँ पढ़ने वाले सारे बच्चे म्यामांर के ही है। मदरसे में ही बच्चों को खाना भी मिलता है। रात में रहते भी हैं। उसने बताया कि यहाँ कभी रेड नहीं पड़ी और ना ही किसी ने पूछा कि वे कहाँ के रहने वाले हैं।

 रहमान ने बताया कि उसे भारत में किसी तरह का खतरा नहीं है, क्योंकि वह यहाँ मेहमान के हिसाब से रह रहा है। बर्मा से आया और व्यक्ति मोहम्मद यूनुस नाम का मिला। उसने बताया कि वह बच्चों को अरबी और अंग्रेजी पढ़ाता है। यूनुस ने बताया कि यहाँ रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी लगभग 400 है। यूनुस ने बताया कि भारत में आने के लिए उन सबों के पास कुछ भी नहीं है।

यूनुस ने कहा, “ना हमारे पास पासपोर्ट है, ना वीजा है। हम कैसे-कैसे करके यहाँ आ गए, यह बहुत मुश्किल काम है। हम ब्लैक में आ गए।” ब्लैक से संभवत: यहाँ पैसे देकर अवैध तरीके से घुसपैठ करने से संबंधित है। यूनुस ने बताया कि वह बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए भारत में घुसा। उन्होंने कहा कि वहाँ कुछ लोग उसे मिले, जिन्होंने उसे बॉर्डर पार कराया और वहाँ से वह बंगाल में रहने लगा।

यूनुस ने बताया कि बॉर्डर पार कराने वालों ने कुछ लोगों से पैसा भी लिया और कुछ लोगों को बिना पैसे का ही बॉर्डर पार करा दिया। यूनुस ने बताया कि वह उसके साथ अधिकांश लोग म्यामांर में लड़ाई शुरू होने के बाद 2016 में भारत में आए। उसका कहना है कि कुछ लोग तो भारत में साल 2012 में ही आ गए थे और तभी वे यहाँ रह रहे हैं। यूनुस का दावा है कि उसके पास UN का रिफ्यूजी कार्ड है।

हालाँकि, जब पत्रकारों ने उससे रिफ्यूजी कार्ड दिखाने के लिए कहा तो वह बोला कि वह घर पर है और घर कहीं और है। यूनुस ने बताया कि इलाके में कुछ भी होता है तो उसे खबर कर दिया जाता है कि घर से बाहर नहीं निकलना है। यूनुस ने बताया कि म्यामांर से भागे हुए रोहिंग्या हैदाराबाद, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा में रह रहे हैं।

इस मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों से जब पूछा गया कि वे पढ़ाई करके क्या करेंगे तो 99 प्रतिशत ने कहा कि वे हाफिज बनेंगे और अल्लाह की सेवा करेंगे। इन बच्चों को जाकिर नाईक के बारे में अच्छे से पता है। लगभग 12 साल के एक बच्चे ने कहा कि जाकिर नाईक इसलिए अच्छा लगता है, क्योंकि वह लोगों को दीन (इस्लाम) के रास्ते पर लाता है। यानी लोगों का इस्लाम में धर्मांतरण कराता है।

किशोर ने कहा कि जो अल्लाह को नहीं मानता है कि वह दोजख की आग में जलेगा। एक छोटे से बच्चे ने कलमा पढ़ कर सुनाया और कहा कि इसका मतलब है कि अल्लाह के सिवा और कोई भगवान नहीं है। यही बात एक किशोर ने भी कहा है। हालाँकि, बच्चे हर शब्द बोलने से पहले अपने मौलवी या हाफिज की तरफ देख रहे थे। जाहिर है कि वो काफी सोचकर बोल रहे थे।

दरअसल, इस मदरसे में पढ़ाने वाले यूनुस ने दावा किया कि रोहिंग्या मुस्लिम UN के रिफ्यूजी कार्ड पर भारत में आकर रह रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ वह कह रहा है कि बांग्लादेश सीमा के जरिए पैसे देकर कुछ लोगों की सहायता से भारत में घुसा था। इस तरह की विरोधाभासी बातें संदेह पैदा करती है। अगर यूनुस स्वयं स्वीकार करता है कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं तो वास्तविक संख्या कितनी होगी, इसकी सही जानकारी शायद ही किसी को होगी।


नूहं : हिंदू महिलाओं पर मदरसे से पथराव करने वालों में 9 से 12 साल के आरोपित: दो को भेजा बाल सुधार गृह

                                                                                                           साभार: ANI वीडियो स्क्रीन ग्रैब
हरियाणा के नूहं में कुआं पूजन के लिए जा रही हिंदू महिलाओं पर गुरुवार (16 नवंबर 2023) की शाम मदरसे से पथराव किया गया था। इस पथराव में 8 महिलाएँ घायल हो गई थीं। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया था। महिलाओं पर पत्थर फेंकने वाले मुस्लिम समाज के तीन नाबालिगों में से दो को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। इन पर कार्रवाई सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई है।

पुलिस ने शनिवार (18 नवंबर 2023) को कहा कि पत्थरबाजी को लेकर तीन नाबालिगों को पकड़ा गया था। इनमें से 9 साल के नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया और फिर उसे जमानत दे दी गई। वहीं 12 साल के दो नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। इसके बाद वहाँ से दोनों को बाल सुधार गृह भेजा गया।

नूहं पुलिस के प्रवक्ता कृष्ण कुमार के मुताबिक, “तीनों मदरसे के छात्र हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्हें पकड़ा गया। अभी अन्य लोगों की संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन मामले में आगे की जाँच चल रही है। अगर हमें जाँच के दौरान किसी अन्य के शामिल होने के सुबूत मिलते हैं तो कानून के मुताबिक उन पर कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद तीनों नाबालिगों से उनकी अभिभावकों की मौजूदगी में पूछताछ के बाद उन्हें पकड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक नूहं के वार्ड नंबर 10 में रहने वाले राम अवतार के यहाँ बेटा पैदा हुआ था। रिवाज के मुताबिक, उनके परिवार की महिलाएँ 16 नवंबर को कुआँ पूजन के लिए पास के शिव मंदिर में जा रही थी। इस दौरान रात करीब 8:20 उन पर मदरसे से पथराव किया गया।

घटना की सूचना पाकर नूहं पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए। तब पथराव की घटना पर एसपी बिजारणिया ने कहा था, “महिलाओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मदरसे से फुटेज आए थे जिसमें 3 लड़के खड़े दिख रहे थे। उसके आधार पर तीनों लड़कों की पहचान की गई है।”

उन्होंने आगे कहा था, “इन तीनों को राउंडअप कर लिया गया है और अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। 8 महिलाओं ने FIR दर्ज कराई है और इन्हें मामूली चोटें आई हैं। हम तीनों लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं कि यह घटना क्यों हुई। तीनों बच्चे नाबालिग हैं। हम महिलाओं के लगाए गए सभी आरोपों की जाँच करेंगे। स्थिति नियंत्रण में है।”

आखिर इन पत्थरबाजों को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से क्यों नहीं वंचित किया जाता? कभी शोभा यात्रा पर पत्थरबाज़ी तो कभी पारिवारिक समारोह में। आखिर ये कट्टरपंथी कब तक अपना बहशीपन दिखाते रहेंगे? कब लगेगा और कौन लगाएगा इन पर लगाम? क्या हिन्दू को अपनी संयमता को त्याग ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा? बर्दाश्त की एक सीमा होती है, जिस पर सरकार और कोर्ट को गंभीरता से सोंचना होगा। 

नूहं की इस घटना को लेकर शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीएचपी प्रदेशाध्यक्ष पवन कुमार ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की थी। बताते चले कि नूहं में इस साल 31 जुलाई को ब्रजमंडल यात्रा में शमिल हिंदू श्रद्धालुओं पर भी हमला किया गया था।

‘नूहं हिंसा : कांग्रेस का किया-धरा, मम्मन खान के खिलाफ मिले सबूत’: अनिल विज, हरियाणा के गृह मंत्री

नूहं हिंसा में कांग्रेस विधायक मम्मन खान का हाथ 
गुजरात दंगे 2002 से लेकर अब हरियाणा में हुए दंगों से कांग्रेस और इसके समर्थक दलों ने नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के जितने भी प्रयास किया, परिणाम विपरीत ही निकले। 2002 से पहले गुजरात में इतने दंगे हुए, कभी चर्चा तक नहीं हुई, लेकिन मोदी के कार्यकाल में हुए दंगों ने दंगाइयों पर ऐसी नकेल डाली कि विपक्ष चारों खाने चित हो गया। किसान आंदोलन हो, पहलवानों का धरना हो, या फिर CAA विरोध में बने शाहीन बाग हो आदि में कांग्रेस और इसके समर्थक देश में अराजकता फ़ैलाने का प्रयास जरूर किया, लेकिन हर दांव विपक्ष के ही विरुद्ध गया और नरेंद्र मोदी गुजरात मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक उतने ही अधिक शक्तिशाली होते गए। 

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई को हुई हिंसा को लेकर राज्य सरकार ने कांग्रेस पार्टी को दोषी ठहराया है। बता दें कि मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर हमला किया था। हिंसा में 7 लोगों की मौत हो गई थी। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने अब तक हुई जाँच के निष्कर्षों के आधार पर कहा है कि इस हिंसा के लिए कांग्रेस जिम्मेदार लग रही है। उन्होंने बताया कि फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस के विधायक मम्मन खान के खिलाफ सबूत मिले हैं। गिरफ्तार आरोपितों से जो पूछताछ हुई है, उसमें भी हिंसा में कॉन्ग्रेस का हाथ होने की पुष्टि की गई है।

मम्मन खान को हरियाणा पुलिस की नोटिस भी जा चुकी है और उसे पुलिस की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है। अनिल विज ने जानकारी दी कि अब तक 500 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि जाँच में पता चला है कि ये सब कांग्रेस पार्टी का किया-धरा है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता अनिल विज के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने इसके बाद आश्वासन दिया कि अनिल विज का ये बयान सदन की कार्यवाही से डिलीट कर दिया जाएगा।

विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन कॉन्ग्रेस ने इस बयान को लेकर जम कर हंगामा किया। स्पीकर ने नूहं में अवैध इमारतों को ध्वस्त किए जाने के संबंध में चर्चा से इनकार करते हुए कहा कि मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहा है, ऐसे में जो मामला न्यायिक रूप से विचाराधीन है उस पर चर्चा नहीं हो सकती। दिल्ली से 85 किलोमीटर की दूरी पर नूहं में हुई हिंसा के बाद इलाके के हिन्दुओं में भय व्याप्त है। सोमवार (28 अगस्त, 2023) को पुलिस की भारी तैनाती के बीच कुछ लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से जलाभिषेक की प्रक्रिया पूर्ण की।

हरियाणा में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा ने नूहं हिंसा की न्यायिक जाँच की माँग की। हालाँकि, स्पीकर ने कहा कि सरकार से ये सब कहना उनका काम नहीं है। विपक्ष ने जहाँ आरोप लगाया कि भाजपा-JJP सरकार नूहं हिंसा पर चर्चा से भाग रही है, वहीं भाजपा विधायकों ने कांग्रेस के विरोध में नारे लगाए। अनिल विज ने कहा कि उनके पास सबूतों की पूरी लिस्ट है। इसके बाद स्पीकर ने 2 घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

नूँह दंगों में AAP नेता जावेद को बचाने में जुटी पार्टी: स्थानीय कह रहे – ‘सोहना में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर’


हरियाणा के मेवात के नूँह में हुए दंगों में एक नाम जो सामना आया है, वो है AAP नेता जावेद अहमद का। आपको याद होगा कि दिल्ली दंगों के मुख्य अभियुक्तों में भी AAP का ही तत्कालीन पार्षद रहा ताहिर हुसैन शामिल था। उसने अपने घर को हिन्दुओं पर हमले के लिए लॉन्चपैड बना दिया था और सशस्त्र दंगाइयों की भीड़ का नेतृत्व किया था। उस समय भी AAP शुरू में उसके बचाव में थी। ठीक उसी तरह, अब पार्टी अपने नेता जावेद अहमद को बचाने में लग गई है। इसके लिए FIR तक को झुठला रही है।

जावेद अहमद हरियाणा में ‘आम आदमी पार्टी’ का स्टेट कोऑर्डिनेटर है। 31 जुलाई, 2023 को सोहना में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार की हत्या के मामले में उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, जावेद अहमद का दावा है कि वो घटना के वक्त वहाँ से 100 किलोमीटर दूर था, इसीलिए इस वारदात में उसकी संलिप्तता का सवाल ही नहीं उठता है। अगर आप याद करेंगे तो पाएँगे कि एक वीडियो बना कर ताहिर हुसैन ने भी दावा किया था कि वो खुद पीड़ित है और बार-बार पुलिस को कॉल कर रहा था।

कई विश्लेषकों ने उसके इस वीडियो को फर्जी और एडिट किया हुआ भी बताया था। अब आते हैं वापस नूँह दंगे पर, जिसमें नल्हड स्थित प्राचीन शिव मंदिर को चारों तरफ से निशाना बना कर गोलीबारी की गई। ये हमला ‘ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ के दौरान किया गया था। स्थिति ये हुई कि भीड़ अस्पताल तक में घुस गई और मरीजों को मारा-पीटा। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने भी इसे सुनियोजित साजिश के तहत हुआ हमला माना। आखिर भीड़ के पास इतने अत्याधुनिक हथियार आए कहाँ से, ये अभी तक चर्चा का विषय है।

जावेद अहमद को लेकर ऑपइंडिया का स्टिंग, जानिए स्थानीय लोगों ने क्या बताया

ऑपइंडिया की टीम नूँह में ग्राउंड पर पहुँची थी, जहाँ उसने ये स्टिंग किया। इस स्टिंग में स्थानीय लोगों ने बताया कि जावेद का यहाँ बहुत दहशत है। इस दौरान एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद की उम्र 50 के आसपास है, लेकिन वो खुद को मेंटेन (फिट) रखता है। उन्होंने बताया कि जावेद युवाओं को जिम कराने से लेकर उनका पूरा सर्कल बना रखा है। उन्होंने बताया कि भाजपा से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उस दौरान ‘सोनिया गाँधी के किसी करीबी अहमद’ से उसकी अच्छी-खासी जान-पहचान थी।
इस दौरान इन लोगों ने बताया कि पूरे सोहना में जावेद के खिलाफ कोई नहीं बोलेगा, क्योंकि उसका खौफ है। उन्होंने ये भी बताया कि निकिता तोमर हत्याकांड में भी इसका कुछ न कुछ हाथ था, इसका भतीजा इसमें शामिल था। बता दें कि बता दें कि फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में कॉलेज के सामने निकिता तोमर की तौसीफ और रहमान की हत्या कर दी थी। स्थानीय लोगों ने कुछ साल पहले एक अन्य दंगे में भी जावेद का हाथ होने की बात कही और कहा कि अरावली की पहाड़ियों पर से पत्थर चलता था।
उन्होंने बताया कि कई डम्फर चलते थे। लोगों ने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी से रिश्ते के कारण जावेद अहमद बचता रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि नूँह से कॉन्ग्रेस का विधायक चौधरी आफताब अहमद, जावेद अहमद का चाचा है। उन्होंने बताया कि चाचा-भतीजे की कॉन्ग्रेस आलाकमान से सीधी बातचीत थी। उन्होंने बताया कि 2009-10 में तहसील को विकसित करने के लिए एक मास्टर प्लान आया था। उन्होंने इलाके में अवैध खनन की बात भी स्वीकारी। नूँह में ही जुलाई 2022 में अवैध खनन की जाँच करने गए डीएसपी सुरेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी।
उन्हें ट्रक से कुचल कर मार डाला गया था। उन्होंने ये भी इंगित किया कि अवैध खनन के मामले में भी जावेद अहमद का हाथ है, लेकिन फिर भी वो नहीं पकड़ा जाता। उन्होंने बताया कि जो भी अपराधी चोरी-चकारी वगैरह में पकड़ा जाता है, उन सबको जावेद छुड़वाता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि किसी को फँसाना हो तो जावेद अहमद सुंदर लड़कियों को भी प्रशिक्षित कर के भेजता है और फिर केस करवा देता है। उन्होंने बताया कि सोहना में हमेशा से बाहर का ही विधायक बनता रहा है।
उन्होंने बताया कि गुज्जर यहाँ से चुनाव लड़ते हैं, लेकिन उन्हें वोट नहीं पड़ते। इस दौरान उन्होंने एक गुज्जर नेता रोहतास की बात करते हुए कहा कि रिठोस गाँव में वो रहते हैं और 350 करोड़ रुपए की उनकी संपत्ति है, वो जीत सकते हैं लेकिन वो खड़े नहीं होते। उन्होंने ये स्वीकार किया कि इलाके में हिन्दुओं में एकता नहीं है। एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद उस समय पुन्हाना में होने की बात कह रहा है, लेकिन मुंबई हाइवे से कहा कि 20-25 मिनट में उस टोल तक पहुँचा जा सकता है, जिस टोल का वीडियो सामने आया है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि अगर आम आदमी पर हत्या का आरोप होता तो उन्हें न सिर्फ उठा लिया जाता, बल्कि टॉर्चर भी किया जाता। उन्होंने बताया कि उस दिन कोई आम आदमी दंगों की सुन कर आता ही नहीं, फिर भी जावेद अहमद आया। उन्होंने बताया कि इलाके के लोग खुल कर नहीं कह रहे, लेकिन इसका (जावेद अहमद का) कहीं न कहीं इस दंगे में हाथ है। उन्होंने कहा कि AAP ऐसे लोगों को ही टिकट देती है, जावेद अहमद भी 2024 के विधानसभा चुनाव में ‘आम आदमी पार्टी’ से खड़ा होगा और जीतेगा।
जावेद इससे पहले दूसरे-तीसरे नंबर पर आता रहा है, ऐसे में बिखरे वोटों को इकट्ठा करने के लिए ये साजिश रची गई – ये भी स्थानीय व्यक्ति ने बताया। साथ ही कहा कि डर के कारण कुछ हिन्दू भी जावेद अहमद की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि AAP के कुछ नेता सोहना आए थे, दिल्ली से। इस दौरान उन्होंने सोहना के ‘चाइल्ड पॉइंट’ में एक गुज्जर समुदाय के लड़के की हत्या का मामला बताया, जो 8-10 साल पहले का है। उन्होंने बड़ा खुलासा किया कि जेल से निकल कर आने के बाद जावेद को कंधे पर उठा कर लाया गया था और उसका स्वागत किया गया था।
लोगों का सवाल है कि इतनी जल्दी छतों पर पत्थर कैसे आ गए, हथियार कैसे जुटा लिए गए? उन्होंने बताया कि ये सामान्य हथियार नहीं थे, 100-200 मीटर की रेंज में लड़कों को गोली लगी है। उन्होंने बताया कि जिधर दंगे हुए, उस तरफ जाने से पहले सोचना पड़ेगा, कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए – इसका डर रहेगा। उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी घटना बताते हुए कहा कि जान-माल के साथ कारोबार का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि बाहर के लोगों को भी इन्हीं लोगों ने बुलाया।
उन्होंने बताया कि किसी भी टोल तक 35-40 मिनट में पहुँचा जा सकता है, ऐसे में ये दावा सही नहीं है कि ये वहाँ से दूर था। साथ ही कहा कि सोहना में हुए दंगों में अधिकतर जावेद अहमद के लड़के थे, जो इसकी मर्जी के बिना पत्थर चलाना तो दूर, ये सड़क भी पार न करें। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जो हिंसा वगैरह हुई है, उसमें जावेद अहमद का हाथ था। साथ ही इलाके में 5-7000 रोहिंग्या मुस्लिमों के होने की बात भी कही गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मम्मन खान, आफताब अहमद और जावेद अहमद का एक गिरोह है, जिसने ये दिखाने के लिए ये सब किया कि अभी भी हमारा दबदबा है और आपलोग खुल कर नहीं जी सकते। ये बात भी सामने आई है कि ‘जावेद कॉलोनी’ इसने खुद के नाम पर बसाई थी। स्थानीय लोगों ने ये भी बताया कि जंगल की जमीनों पर भी अवैध बस्तियाँ बसाई जा रही हैं। साथ ही उनका ये भी दावा है कि इन कॉलनियों में अधिकतर अपराधी किस्म के युवक ही रहते हैं।

सोहने में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर

इस दौरान ऑटो में यात्रा कर रहे कुछ लोगों से भी ऑपइंडिया की टीम ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम इन दंगों में पक्का आ रहा है, सोहना में जब भी कोई हिंसा होती है तो जावेद का हाथ होता ही होता है। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम भले ही राजनीति के कारण छिपाया जा रहा हो, लेकिन सोहना में कोई भी दंगा होता है तो जावेद का नाम एक नंबर पर आता ही आता है।
स्थानीय व्यक्ति ने ये भी बताया कि बाईपास के उधर उसने ‘जावेद कॉलोनी’ बसा रखी है, जहाँ मकान और कोठियाँ हैं, जहाँ सारी साजिश रची जाती है। उसने बताया कि 2-3 साल पहले एक लड़के की हत्या हुई थी और सड़कों पर पत्थर बिछा दिए गए थे। उसने कहा कि जावेद अहमद उस समय कहीं और जाने की बात कह रहा है। उसने जावेद के खतरनाक व्यक्ति होने की भी पुष्टि की। उसने कहा कि यहाँ दंगा होगा तो वही करवाएगा – ये निश्चित है। उक्त व्यक्ति लखवा गाँव का है।

AAP नेता जावेद अहमद का दावा – हत्याकांड के समय वो घटनास्थल से दूर था

जावेद अहमद ने ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार हत्याकांड में संलिप्तता से इनकार करते हुए दावा किया कि वो उस समय घटनास्थल से 100 किलोमीटर की दूरी पर था। निरंकारी चौक थाने में उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। कुछ CCTV फुटेज दिखा कर दावा किया कि वो टोल प्लाजा से गुजरा था। उसने कहा कि उसके गुजरने के 3 घंटे बाद ये घटना हुई और वो अगले दिन लौटा। उसने कहा कि उसे और पार्टी को बदनाम करने के लिए ये राजनीतिक प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है।
AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में पार्टी ने अपने कई नेता उतार दिए। AAP के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा ने जावेद अहमद पर दर्ज FIR पर सफाई देते हुए उल्टा बीजेपी पर ही पलटवार किया। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हरियाणा के लोग सिरे से खारिज करने लगे हैं। इसलिए बीजेपी अब षड्यंत्र रचना चाहती है और समाज को बाँटने का काम कर रही है। आज पूरा देश जानता है कि कौन दंगे भड़काता है और उसके बाद झूठी FIR कर दूसरे पार्टी के नेताओं को फँसाने का काम करते हैं।”

प्रदीप कुमार की हत्या में जावेद अहमद का हाथ: FIR

शिकायतकर्ता पवन कुमार ने एफआईआर में कहा है कि 31 जुलाई की रात लगभग 10.30 बजे प्रदीप कुमार और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वह स्विफ्ट डिजायर कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान इस्लामवादियों की भीड़ ने उनकी कार पर जानलेवा हमला कर दिया। उनकी कार के पीछे बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं की दो कारें और एक पुलिस वैन साथ चल रही थी। उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी कार सोहना रोड पर पहुँची तो पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों को खुद ही आगे बढ़ने के लिए कहा।
पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोहना क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सभी आवश्यक सुरक्षा जाँच कर ली है और रास्ता साफ है। पवन कुमार ने आगे कहा कि कुछ ही सेकंड में लगभग 150 इस्लामवादियों की भीड़ वहाँ आ गई और उनकी कार पर पथराव शुरू कर दिया। इसके कारण कार पर से उनका नियंत्रण हट गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। जब कार रुकी तो उन्हें कार से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भीड़ का नेतृत्व कर रहा जावेद अहमद चिल्लाया, “उन सभी को मार डालो, जो होगा मैं संभाल लूँगा।”
अवलोकन करें:-
पवन कुमार ने एफआईआर में कहा, “जावेद अहमद की शह पर लोहे की रॉड, पत्थर, बंदूकों और अन्य हथियारों से लैस 20-25 इस्लामवादी हमारी ओर बढ़े और हमें पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने प्रदीप के सिर पर रॉड मार दी और वह नीचे गिर गए। वहाँ पर गोलियाँ चलने लगी। तभी पुलिस की गाड़ी वहाँ आ गई।” शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आगे कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और अस्पताल लेकर जाने लगी तो उन्होंने देखा कि देखा कि इस्लामवादी प्रदीप कुमार को लगातार लोहे की छड़ों और लाठियों से पीट रहे थे।

अरावली की पहाड़ियों में छिपा था नूहं हिंसा का आरोपित आमिर, पुलिस ने एनकाउंटर के बाद किया गिरफ्तार

                           एनकाउंटर  के बाद पकड़ा गया नूहं हिंसा का आरोपित आमिर (फोटो साभार: AajTak)
हरियाणा के मेवात के नूहं में हुई हिंसा का आरोपित आमिर गिरफ्तार हो गया है। वह अरावली की पहाड़ियों में छिपा था। सोमवार (21 अगस्त, 2023) रात एनकाउंटर के बाद वह पकड़ा गया। उसके पैर में गोली लगी है। उसके पास से अवैध कट्टा समेत 5 कारतूस बरामद हुए हैं। आखिर किसकी शह पर आमिर ने दंगा को अंजाम दिया? दूसरे, दंगा करवाकर क्यों भागा? किसने उसको अवैध कट्टा और कारतूस दिलवाए? खट्टर सरकार को सख्ती से इसके साथ पेश आना चाहिए और इसको मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधाओं को छीन ब्लैकलिस्टेड करना होगा। 

नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आमिर के तावड़ू में अरावली की पहाड़ियों के बीच सीलखो पहाड़ में बने एक खंडहर में छिपे होने की सूचना पुलिस को मिली थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची। आमिर ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की।

फायरिंग में पुलिस की एक गोली आमिर के दाएँ पैर में जा लगी। इसके बाद वह गिर गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उसका इलाज नल्हड़ मेडिकल हॉस्पिटल में चल रहा है।

आज तक ने अपनी रिपोर्ट में आरोपित का नाम वसीम बताया है। उस पर ₹25000 का इनाम होने की जानकारी दी है। उस पर नूहं हिंसा के दौरान पुलिस से हथियार छीनकर फायरिंग करने का आरोप है। इसके अलावा तावड़ू में हत्या समेत दिल्ली-एनसीआर में करीब 100 आपराधिक घटनाओं में शामिल होने के भी आरोप हैं।

नूहं हिंसा के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 10 अगस्त को भी एनकाउंटर किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हुए हिंसक हमले के 2 आरोपित राजस्थान से नूहं लौट रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मुनसैद और सैकूल के रूप में हुई थी। गिरफ्तारी से पहले पुलिस और आरोपितों के बीच एनकाउंटर भी हुआ था। इस दौरान भी एक आरोपित को गोली लगी थी। आरोपितों के पास से कट्टा, कारतूस और बाइक बरामद हुई थी।

नूहं : गुरुकुल पर हमला करने वाले जेहादियों की पहचान क्यों छिपा रहे राजदीप सरदेसाई?


हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं की ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इस भीड़ ने वहाँ चुन-चुन कर हिन्दुओं, उनके प्रतिष्ठानों और संस्थाओं को निशाना बनाया था। इस दौरान नूहं के भादस में गुरुकुल पर भी हमला था। इसी मामले से शक्ति सैनी की हत्या की कड़ी भी जुड़ती है। इसी गुरुकुल पर हमला करने वालों को अपनी रिपोर्ट में ‘बाहरी’ बताकर राजदीप सरदेसाई मुस्लिमों का बचाव करने की कोशिश कर रहे थे।

ऑपइंडिया को जो जानकारी मिली है कि उसके अनुसार शक्ति सैनी को मुस्लिम भीड़ के हमले की जानकारी मिलने के बाद अपने भाई को बचाने मेवात के भादस स्थित गुरुकुल गए थे। उनके भाई यहाँ शिक्षक हैं। शक्ति गुरुकुल जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन कथित तौर पर रास्ते में ही दंगाई मुस्लिम भीड़ ने उन्हें उठा लिया। दोबारा अगले दिन 1 अगस्त की सुबह उनकी मौत की खबर घरवालों को मिली।

ऑपइंडिया को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि 31 जुलाई को 200-250 की मुस्लिम भीड़ ने दो बार गुरुकुल पर हमला किया था। पहले दोपहर के 2-2.30 के बीच हमला हुआ। यही से हमला कर लौट रही भीड़ ने बाद में कथित तौर पर बड़कली स्थित एक सरसों के तेल की फ़ैक्ट्री जला दी थी। यह फ़ैक्ट्री बीजेपी नेता शिवकुमार बंटी की बताई जा रही है। दंगाइयों ने बंटी के फ़ैक्ट्री में लूटपाट कर आग लगा दी। सैकड़ों कनस्तर तेल या तो लूट लिया गया या जला दिया गया। वहाँ कई टन खली भी मौजूद थी। आग इतनी भीषण थी कि दमकल विभाग इस पर अगली सुबह ही काबू पा सकी।

वहीं भादस के गुरुकुल पर हमले के मामले में बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ पेट्रोल बम, लाठी और हथियारों से लैश थी। उन्मादी भीड़ नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रही थी। दंगाई भीड़ में छोटे बच्चे भी थे जो दो छोटे समूहों में आकर घटना स्थल पर इकट्ठे हुए थे। दंगाई अपनी गाड़ियों के नंबर प्लेट पर पहले से ही ग्रीस लगा कर आए थे, जिससे उनकी तैयारियों का पता चलता है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गुरुकुल पर जब मुस्लिम भीड़ ने पहली बार हमला किया तो वहाँ 3 टीचर, 35 स्टूडेंट, आसपास के हिन्दुओं के अलावा नल्हड़ मंदिर के कई श्रद्धालुओं सहित करीब 150 लोग मौजूद थे। लोगों ने खुद को गुरुकुल के अंदर बंद कर लिया था, जबकि मुस्लिम भीड़ बाहर नारे लगा रही थी। उस समय कुछ स्थानीय लोगों और गुरुकुल में रहने वाले परिवारों के प्रतिरोध की वजह से मुस्लिम भीड़ पीछे हट गई थी। 

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, जब गुरुकुल पर हमला हुआ, तब वहाँ कोई पुलिस वाला नहीं था क्योंकि अधिकांश पुलिसकर्मी नल्हड़ मंदिर में श्रद्धालुओं को बचाने गए थे। शाम के करीब 6-6.30 बजे मुस्लिम भीड़ नेफिर से गुरुकुल पर हमला बोल दिया। हालाँकि, तब तक स्थानीय हिन्दू और आश्रम निवासी अपनी रक्षा को लेकर अलर्ट हो गए थे। इसके कारण थोड़े से प्रतिरोध के बाद मुस्लिम भीड़ को वापस लौटना पड़ा।

बताया जाता है कि शाम को हुए दूसरे हमले की जानकारी मिलने के बाद ही शक्ति सैनी घर से गुरुकुल के लिए निकले थे। कथित तौर पर मुस्लिम भीड़ ने उन्हें रास्ते से ही अगवा कर लिया। अगले दिन उनकी लाश मिली। शक्ति के एक भाई के अनुसार, “वे अपने भाई को बचाने गुरुकुल गए थे जो वहाँ टीचर हैं। लेकिन वे खुद ही मुस्लिम भीड़ के शिकार हो गए।” इस मामले में दर्ज FIR में उनके भाई ने बताया है कि पूरी घटना का विवरण दिया है।

गुरुकुल पर हमले के साजिशकर्ता का नाम सामने नहीं आया है। लेकिन स्थानीय विधायक मम्मन खान का घर गुरुकुल से करीब 50 मीटर ही दूर है। दावा है कि गुरुकुल पर हमला होते ही उनका परिवार घर से निकल गया। गौर करने वाली बात यह है कि नूहं हिंसा के बाद से मम्मन खान विवादों में हैं। हरियाणा विधानसभा में मोनू मानेसर को लेकर दिया गया उनका बयान भी मुस्लिमों को भड़काने की एक वजह बताई जा रही है।

गुरुकुल पर हमले का एक सिरा भादस गाँव के ही अख्तर के बेटे आमीन से भी जुड़ा है। उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन के भाई राशिद पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि राशिद को गो रक्षकों ने ही पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था। उस समय जब उसके घर पर छापेमारी हुई थी तो गो मांस भी बरामद हुआ था।

राजदीप सरदेसाई ने फैलाया झूठ, गाँव वालों ने बताई हकीकत

गुरुकुल के पुजारी से बात करते हुए राजदीप सरदेसाई बार-बार यही पूछ रहे थे कि हमला करने वाले बाहरी थे। पुजारी ने आस-पास के गाँव वाले जवाब को अनसुना करके वो फिर बचाने वाले मुस्लिम सरपंच की ओर बात ले गए।
हकीकत ये है कि जिस भादस गाँव में गुरुकुल है, उसी गाँव के अख्तर के बेटे अमीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन का भाई राशिद गोहत्यारा है। उस पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं।
राजदीप सरदेसाई के अनुसार नूहं में हिंदुओं पर हमले को लेकर केवल दो सिद्धांत हैं: 1. बजरंग दल ने मेवातियों को भड़काया और उन्होंने जवाबी कार्रवाई की। 2. मेवाती मुस्लिम गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ जवाबी हमला करने का इंतजार कर रहे थे।
हकीकत यह है कि हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले ही दंगाई मुस्लिम भीड़ गुरुकुल पर हमला कर चुकी थी। अगर बजरंग दल की जवाबी कार्रवाई और गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ ही दंगा किया गया तो बड़कली चौक पर दंगा जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले कैसे हो गई? गुरुकुल पर पहला हमला 2 से 2:30 बजे दोपहर के समय क्यों हुई? उस समय तो जलाभिषेक यात्रा आई भी नहीं थी।