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उत्तर प्रदेश : बरेली में साजिश के तहत भड़काई गई हिंसा : पत्थरों का ढेर, पेट्रोल वाली बोतलें और 5 दिनों की प्लानिंग

                                                   बरेली में हिंसा (फोटो साभार: दैनिक जागरण)
उत्तर प्रदेश के बरेली में जुमे की नमाज के बाद 26 सितंबर 2025 को ‘I Love Muhammad’ को लेकर प्रदर्शन के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंसा और पथराव किया है। इस हिंसा पर अब लगातार पुलिस अधिकारियों की और से बड़े खुलासे किए जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि यह हिंसा प्लान बनाकर की गई थी।

सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि अक्सर मुस्लिम कट्टरपंथी और इनके समर्थक दंगाइयों को बचाने "बाहरी लोगों" द्वारा दंगा करने का बचाव करने वालों को बेनकाब करने tear gas के दो राउंड के बाद तीसरा राउंड जब तक blind firing का नहीं होगा दंगों पर अंकुश नहीं पाया जा सकता। दूसरे, blind firing में जख्मी होने वाले सभी स्थानीय ही मिलेंगे बाहरी नहीं। उसके बाद कोई किसी बच्चे या महिला को पत्थरबाज़ी करने आगे नहीं करेगा। 

सोशल मीडिया पर ज्योतिषों द्वारा यह भी चर्चा चल रही जो योग बन रहे हैं वह आंदोलन और दंगा जीवियों के लिए बहुत ही दर्दनाक होने वाला है। मानवाधिकार का शोर भी खूब मचेगा लेकिन सभी औंधे मुंह गिरेंगे।

     

कैसे शुरू हुई हिंसा ?

26 सितंबर 2025 को दोपहर 2 बजे आला हजरत मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद कुछ लोग ‘I Love Muhammad’  लिखे पोस्टर लेकर बाहर आए। इसके बाद नौमहला मस्जिद में 3 बजे तक नमाज हुई। नमाज के बाद भीड़ इस्लामिया ग्राउंड की ओर बढ़ने लगी। पुलिस ने रोका तो पथराव शुरू हो गया।

धीरे-धीरे यह विवाद शहर के कई इलाकों में फैल गया, जिसमें नौमहला मस्जिद, शहर कोतवाली, नॉवेल्टी चौराहा, आजमनगर, जिला अस्पताल रोड, श्यामगंज मार्केट, बिहारीपुर शामिल है। इन इलाकों के साथ-साथ पूरे बरेली शहर के बाजार बंद करा दिए गए। माहौल इतना बिगड़ा कि शहर में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हो गए।

प्लान बनाकर कट्टरपंथियों ने किया बवाल

घटना के बाद करीब 10 हजार पुलिसकर्मी, PAC और पैरामिलिट्री फोर्स बरेली में तैनात की गई। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बैरिकेडिंग कर दी गई। माहौल बिगड़ने के बाद पुलिस ने हिंसा रोकने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

DIG अजय कुमार साहनी ने बताया, “बाहर से भी कुछ लोग आए थे। अभी फोटो-वीडियो के आधार पर देखा जा रहा है कि कौन लोग थे और कहाँ से आए थे। निश्चित रूप से इसमें FIR दर्ज होगी। इसके पीछे जो भी जिम्मेदार लोग हैं, सबके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार की कोई परमिशन नहीं थी।”

उन्होंने कहा, “सबको पहले ही बता दिया गया था कि यहाँ किसी तरह की धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। 90 प्रतिशत लोगों ने इस बात को समझा और नमाज पढ़कर घर लौट गए। लेकिन, बाद में कुछ शरारती तत्व प्लान बनाकर आए और उन्होंने बवाल किया।”

DIG ने आगे कहा, “फायरिंग की घटनाओं में छर्रे लगे हैं। कुछ हथियार भी बरामद किए गए हैं। यह साफ है कि पहले से साजिश की गई थी। तभी अचानक इतने लोग सामने आए और पूरी तैयारी के साथ आए। ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है। मीडिया कर्मियों और प्रेस के लोगों को भी चोटें आई हैं। पथराव सबने देखा और वीडियो फुटेज की कवरेज भी की।”

इस हिंसा में 10 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। वहीं कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, गिरफ्तारी की संख्या एकत्र की जा रही है। कुछ हथियार भी बरामद किए गए हैं, कुछ जगह फायरिंग के भी प्रमाण मिले हैं।

पुलिस को मिलीं खाली बोतलों से आ रही थी पेट्रोल की बदबू

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यहाँ तक भी दावा किया गया है कि बरेली में हिंसा की प्लानिंग पिछले करीब 5 दिनों से चल रही थी। साथ ही, इस प्रदर्शन के आयोजक के खिलाफ NSA लगाने की भी कार्रवाई पुलिस शुरू करने जा रही है। वहीं, पुलिस ने इस भीड़ को इकट्ठा करने वाले मौलाना तौकीर रजा को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं, पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से पत्थरों का ढेर, कारतूस का खोखा, जिंदा कारतूस, एक तमंचा, लाठी-डंडा और खाली बोतल मिली हैं। इन खाली बोतलों से पेट्रोल की बदबू आ रही थी।

पाकिस्तान में आतंकी अड्डों को निशाना बनाकर ध्वस्त करने वाले मोदी जी भारत में बने पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों पर Operation Sindoor कब? ग्वालियर और विदिशा के बाद झांसी में शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव, 4 दिनों में तीसरी घटना; उत्तर प्रदेश में वंदे भारत एक्सप्रेस फिर पत्थरबाजी का शिकार; 10 साल की बच्ची चोटिल, प्रयागराज में मुकदमा

पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डों पर Operation Sindoor से बमबारी कर वाह-वाही लूटने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ही देश में बने पाकिस्तानों में पल रहे आतंकियों पर कब कार्यवाही होगी? कभी ट्रेन पर पत्थरबाज़ी, रेलवे ट्रैक पर रॉड या पत्थर रखना, हिन्दू त्यौहारों पर किसी न किसी बहाने दंगा करना और शोभा यात्राओं पर पत्थरबाज़ी करने वाले कोई शरारती तत्व नहीं आतंकियों के sleeper cell हैं। जिस तरह पाकिस्तान पर पानी बम फेंका है उसी तरह इन जेहादियों की हर सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए साथ में इनके समर्थकों की भी। 

गौरतलब यह है कि अब मार्च में होली तक हिन्दुओं के त्यौहारों की लाइन है। केंद्र और राज्य सरकारों और अदालतों को इस समस्या की गंभीरता का संज्ञान लेना चाहिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह पुलिस को सख्त दिशा और निर्देश देने चाहिए।        

उपद्रवियों ने तीसरी बार शताब्दी एक्सप्रेस(12001) पर पथराव किया इससे खिड़की का शीशा टूट गया गनीमत रही कि किसी यात्री को चोट नहीं आई ट्रेन में मौजूद आरपीएफ ने मौके पर पहुंच कर जांच-पड़ताल की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला टेप से शीशे को चिपका कर ट्रेन को रवाना कर दिया गया घटना बुधवार को झांसी रेल मंडल के करारी की है. घटना के बाद से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है

भोपाल से दिल्ली जा रही शताब्दी एक्सप्रेस पर एक बार फिर पथराव की घटना सामने आई है। ट्रेन को बीना और झाँसी के रास्ते में निशाना बनाया गया। यहाँ उपद्रवियों ने ट्रेन की खिड़की पर पत्थर फेंके, जिससे काँच चटक गया। ट्रेन को रोककर रेलवे पुलिस (आरपीएफ) ने जाँच शुरू की। फिर कुछ देर बाद चटके हुए काँच पर टेप लगाकर ट्रेन को रवाना कर दिया गया।

घटना बुधवार(25 जून 2025) शाम करीब 6.30 बजे झाँसी रेल मंडल के करारी क्षेत्र की है। ट्रेन नंबर 12001 मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित रानी कमलापति स्टेशन से नई दिल्ली जा रही थी। तेज रफ्तार पकड़ती ट्रेन को झाँसी के करारी क्षेत्र में उपद्रवियों ने निशाना बनाया। उपद्रवियों ने कोच C-6 पर पथराव किया। इससे ट्रेन में सवार यात्रियों ने पुलिस को सूचना दी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शताब्दी एक्सप्रेस को पहले भी दो बार पत्थरबाजी हुई है। इसी ट्रेन को ग्वालियर और विदिशा में अज्ञात लोगों ने पथराव किया था। इसके बाद पुलिस चौकन्ना हो गई है। पुलिस ने घटना के बाद ट्रेन की सुरक्षा बढ़ा दी है। अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

आवाज से यात्री सहम गए यात्रियों ने सुरक्षा बलों को सूचना दी घटना में किसी यात्री को कोई नुकसान नहीं हुआ ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को रोककर टीम ने जांच-पड़ताल की घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई. पत्थर फेंकने वालों की तलाश के लिए टीम का गठन कर दिया गया है इससे पहले भी उपद्रवी दो बार शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव कर चुके हैं

मध्य प्रदेश के विदिशा और फिर ग्वालियर के पास ट्रेन पर पत्थराव किए जा चुके हैं इन घटनाओं में भी शीशे टूट गए थे सुरक्षा टीमों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की घटनाएं होने से यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं

झांसी रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि बुधवार की शाम को घटना की जानकारी मिली थी सुरक्षा अधिकारियों ने यात्रियों से घटना की जानकारी ली थी आरपीएफ ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

उत्तर प्रदेश में वंदे भारत एक्सप्रेस फिर पत्थरबाजी का शिकार; 10 साल की बच्ची चोटिल, प्रयागराज में मुकदमा 

2 जून को देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है आए दिन देश के अलग-अलग स्थानों से वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की खबर सामने आती हैं उत्तर प्रदेश में तो अमूमन हर माह वंदे भारत पर पत्थर फेंकने की घटनाएं हो रही हैं

अब एक बार फिर इस ट्रेन पर पथराव किया गया है रायबरेली के पास हुए पथराव में सी-1 कोच में परिवार के साथ सफर कर रही एक 10 साल की बच्ची चोटिल भी हो गई यात्री ने इसकी शिकायत रेलवे में दर्ज कराई बता दें कि लखनऊ प्रयागराज रूट की वंदे भारत पर चार माह में पांचवीं बार पथराव किया गया है

जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज से लखनऊ आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर रविवार को पत्थर फेंकने की घटना हुई वंदे भारत एक्सप्रेस प्रयागराज से लखनऊ जा रही थी. रास्ते में रायबरेली स्टेशन के पास घटना हुई यात्री अतुल कुमार गौतम ने रेलवे के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी शिकायत दर्ज कराई

बताया कि पत्थर लगने से उनकी 10 साल की बेटी को गंभीर चोट आई है प्रयागराज रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के इंस्पेक्टर आरबी सिंह ने बताया कि वंदे भारत एक्सप्रेस के सी-1 कोच में रविवार को रायबरेली में पथराव की सूचना मिली थी ट्रेन के प्रयागराज पहुंचने पर कोच का निरीक्षण किया गया है यात्रियों के बयान दर्ज किए गए हैं अराजक तत्वों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है

वंदे भारत पर कब-कब फेंके गए पत्थर: इससे पहले 13 मई को भी प्रयागराज से लखनऊ जाते वक्त ऊंचाहार और लक्ष्मणपुर स्टेशनों के बीच सवांपुर नेवादा के पास वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी की गई थी 20 मई को भी रायबरेली में वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थर फेंका गया था इस घटना में ट्रेन के गार्ड का केबिन क्षतिग्रस्त हो गया था पांच मार्च को भी रायबरेली और 27 फरवरी को बछरावां और उतरेटिया स्टेशनों के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी की गई थी

अवलोकन करें:-

आखिर कब तक जेहादी उर्फ़ आतंकी हिन्दू त्यौहारों पर उपद्रव करते रहेंगे? संत तुकाराम-संत ज्ञानेश्व

हर बार रेलवे एक्ट के तहत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला लिखा जा रहा है रेलवे के अधिकारी भी पत्थरबाजी की घटनाओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं यही कारण है कि पत्थरबाजों के हौसले बुलंद हैं और आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं

मेरठ में ईद की नमाज के बाद आपस में भिड़ी मुस्लिम जमात, पहले लाठी-डंडे चले, फिर फायरिंग भी: 5 गिरफ्तार, Video


उत्तर प्रदेश के मेरठ में सिवालखास कस्बे में ईद की नमाज़ के बाद मुस्लिम समाज के दो पक्षों के बीच मारपीट हुई। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे पर डंडे से हमला किया, फिर पथराव हुआ और बीच में फायरिंग की आवाज भी सुनाई पड़ी। पूरी घटना में कई लोग घायल हो गए, कुछ के तो खून तक निकल आया। हिंसा की वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

घटना की सूचना पर जानी थाना समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची और मामला शांत कराया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि घायलों को मारपीट में मामूली चोटें आई हैं। गंभीर स्थिति नहीं है। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर ले ली है। मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

SP देहात राकेश कुमार ने बताया कि रविवार (30 मार्च 2025) को सिवालखास निवासी जाहिद का बाज़ार में नाजिम से कहासुनी हुई थी। उस समय तो मामला संभल गया। सोमवार को ईद की नमाज के बाद रास्ते में दोनों का आमना-सामना हो गया। दोनों तरफ से भारी संख्या में लोगों ने एक दूसरे पर पथराव किया। फायरिंग भी हुई। हालाँकि अभी तक किसी को गोली लगने की सूचना नहीं है।

मुस्लिम भीड़ चुन-चुनकर ढूँढ रही थी तुलसी के पौधे वाले घर, देवी-देवताओं की मूर्ति देख आग लगा रही थी: नागपुर हिंसा के बाद हिंदू पीड़ितों ने सुनाई आपबीती

                     नागपुर हिंसा में हिंदू प्रतीकों को निशाना बनाकर किए गए हमले (फोटो साभार: ZeeNews)
नागपुर में सोमवार (17 मार्च 2025) को हुई हिंदू विरोधी हिंसा ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। मुस्लिम भीड़ ने हिंदू घरों और गाड़ियों को निशाना बनाया, जिससे लोगों में डर और गुस्सा फैल गया। स्थानीय हिंदुओं ने बताया कि मुस्लिमों की भीड़ ने तुलसी के पौधे को तोड़ा और गाड़ियों में रखी भगवान की मूर्तियों को देखकर उन्हें आग के हवाले कर दिया।

टाइम्स नाउ नवभारत से बात करते हुए एक हिंदू महिला ने कहा, “उन्होंने तुलसी की कुंडी को फेंक दिया, गालियाँ दीं और भड़काऊँ नारे लगाए।” एक दूसरी महिला ने बताया, “वे चिल्ला रहे थे कि हिंदुओं को नागपुर में रहने नहीं देंगे।” ऑटो रिक्शा चालक को भी धमकी दी गई कि अंदर घुसा तो काट डालेंगे।

हिंदुओं ने खुलासा किया कि हमलावरों ने गाड़ियों पर स्वास्तिक और मूर्तियाँ देखकर उन्हें जलाया, जबकि मुस्लिम घरों और गाड़ियों को छुआ तक नहीं। गवाहों ने बताया कि नकाबपोश हमलावर पेट्रोल बम, पत्थर और हथियारों से लैस थे। एक चश्मदीद ने कहा, “उन्होंने बच्चों पर भी पत्थर फेंके, दो पुलिस गाड़ियों और सड़क निर्माण के क्रेन को आग लगा दी।”

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, भीड़ ने हिंदू पुलिस वालों को गालियाँ दीं और पेट्रोल बम से हमला किया। घायलों में ज्यादातर 24 से 40 साल के पुरुष हैं, जिनके सिर पर चोटें आईं। कई को सर्जरी की जरूरत पड़ी।

महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठे। एक महिला ने कहा, “अगर वे किसी को पकड़ लेते तो क्या होता?” भीड़ में ज्यादातर किशोर थे। फिलहाल अब तक पुलिस ने 84 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मास्टरमाइंड फहीम शमीम खान भी शामिल है। माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी के नागपुर शहर अध्यक्ष फहीम पर 500 से ज्यादा लोगों को भड़काने का आरोप है। डीसीपी लोहित मतानी ने बताया कि चार FIR दर्ज हुईं, जिसमें फहीम पर देशद्रोह का केस भी है। उसका भड़काऊ भाषण का वीडियो भी सामने आया है।

नागपुर हिंसा में बांग्लादेशी कनेक्शन भी उजागर हुआ। साइबर सेल ने 97 सोशल मीडिया अकाउंट्स पकड़े, जो अफवाह फैला रहे थे। इनमें से ज्यादातर बांग्लादेशी IP से चल रहे थे। एक पोस्ट में धमकी दी गई कि “सोमवार की हिंसा छोटी थी, आगे बड़ी होगी।” इसके बाद पुलिस की तरफ से 34 अकाउंट्स पर कार्रवाई हुई और 10 FIR दर्ज की गईं।

उधर, कॉन्ग्रेस ने हिंसा की जाँच के लिए कमेटी बनाई, जिसमें माणिकराव ठाकरे, हुसैन दलवाई, नितिन राउत, यशोमति ठाकुर और साजिद पठान जैसे नेता शामिल हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कॉन्ग्रेस सच ढूँढेगी या हमलावरों को बचाएगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा, “पुलिस पर हमला करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।” स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सुनियोजित हमला था, जिसमें हिंदुओं को निशाना बनाया गया।

मध्य प्रदेश : पहले से प्लान बना रखा था… FIR ने खोली महू की जामा मस्जिद के पास हुए हमले की साजिश: पहले से जमा कर रखे थे ईंट-पत्थर; इन जेहादियों के खरीदारों(आकाओं) को पकड़ो

                                                   महू में कई गाड़ियाँ भी तोड़ी-जलाई गईं
मध्य प्रदेश के महू में हिन्दुओं पर पथराव के मामले में दर्ज की गई FIR से मुस्लिमों की प्लानिंग का खुलासा हुआ है। चैंपियंस ट्रॉफी मैच के बाद जीत का जश्न मनाते लोगों पर पथराव की पहले से प्लानिंग की गई थी। इस मामले में 17 मुस्लिम नामजद आरोपित बनाए गए हैं।

महू में हुई हिंसा के बाद 10 मार्च, 2025 को महू थाने में FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में मुस्लिमों पर दंगा, मारपीट, हमला समेत अन्य कई धाराएँ लगाई गई हैं। FIR में 17 नामजद आरोपितों के साथ ही कई अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। FIR हमले के पीड़ित एक हिन्दू की तरफ से दर्ज करवाई गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

FIR में पीड़ित ने बताया है कि वह रविवार (9 मार्च) को चैंपियंस ट्रॉफी में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की जीत के बाद अपने कई दोस्तों के साथ जश्न मनाने निकला था। पीड़ित ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ शांतिपूर्वक जीत का जुलूस निकाल रहे थे।

पीड़ित ने बताया कि इसी दौरान मोती महल चौराहे पर बबलू, तैय्यब, गोलू, एहमद, पप्पू, अहमद, जमशेद, अब्दुल अनीस, शेरू, लल्लू, सैय्यद, इमरान, अफजल, सोहेल, रफीक और इमरान (2) समेत बाकी अज्ञात लोग आ गए। पीड़ित के अनुसार, इन मुस्लिमों ने पहले जीत का जश्न मना रहे हिन्दुओं को गालियाँ बकीं।

FIR के अनुसार मुस्लिमों ने कहा, “हमने तो पहले से प्लान बनाकर रखा था कि तुम सालों चिल्ला-चिल्लाकर जश्न मनाओगे तो आज तुम्हारा इलाज कर देंगे। हम सभी नें गालियाँ देने से मना किया तो सभी नें षडयंत्र पूर्वक इकट्ठा होकर ईंट-पत्थर जो पहले से इकट्ठा करके रखें थे, जिससे हम पर पथराव कर दिया।”

अब तक जितने भी दंगे हुए हैं सभी एक षड़यंत्र के तहत किये जाते हैं, कोई अचानक नहीं होते और victim card खेलते हुए जेहादी और इनके समर्थक सारा इल्जाम हिन्दुओं पर डाल अपने आपको बेगुनाह बताते फिरते हैं। सरकार को चाहिए अब तक जितने भी गिरफ्तार किये गए उनसे इनके आकाओं का नाम पूछ उन पर भी कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए। पत्थरों और पेट्रोल बम कोई एकदम नहीं होते। इनके आका इनको इनकी कीमत देकर सारा इंतजाम कर सामने इन जेहादियों को ले आते हैं। ये जेहादी बिकाऊ हैं इनके खरीदारों का जब तक इलाज नहीं होगा दंगा-फसाद बंद नहीं होंगे।    

पीड़ित ने बताया कि इस पथराव के चलते वह और उनके साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित ने यह भी बताया कि मुस्लिमों ने इसके बाद धमकी दी कि अगर हिन्दुओं ने दोबारा जुलूस निकाला तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। पीड़ितों की बसों में तोड़फोड़ की गई

पुलिस अब इस मामले में जाँच करके गिरफ्तारियाँ कर रही है। इंदौर एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया, “अभी एक FIR दर्ज हुई है, 17 लोग इसमें नामजद हैं। कुछ शिकायत और आई हैं। इन पर कार्रवाई हो रही हैं। 12 लोगों को पकड़ा गया है। बाकी को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। FIR में बलवा जैसी धाराएँ लगाई जा रही हैं।”

वहीं इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वत्सल ने 2 FIR की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि अब स्थिति सामान्य है। गौरतलब है कि रविवार को महू में भारतीय टीम की जीत का जश्न मनाते लोगों पर मुस्लिमों ने हमला कर दिया था, इसमें कई लोग घायल हुए थे।

अहमदाबाद : कौन सी मस्जिद (अहमदिया या बिस्मिल्लाह) से पहले दिया जाएगा अजान- इस पर भिड़े शिया और अल अदीस मुस्लिम: रमजान में एक-दूसरे पर बरसाए पत्थर


गुजरात के अहमदाबाद में रमजान के महीने में मुस्लिमों के दो गुटों के बीच खूब पत्थर चले। अजान देने को लेकर हुए विवाद में मस्जिद के बाहर काफी देर तक मुस्लिमों के बीच लड़ाई होती रही। लड़ाई में कई लोग घायल हुए हैं। मामला मुस्लिमों के दो फिरकों से जुड़ा हुआ है। इस लड़ाई झगड़े का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस झगड़े की वीडियो बीते कुछ दिनों से वायरल हो रही थी और बताया जा रहा था कि यह कर्णावती अहमदाबाद की है। इसमें पथराव होता दिख रहा था। हालाँकि, इसके विषय में पक्की जानकारी नहीं सामने आ रही थी। ऑपइंडिया के पास भी यह वीडियो आई थी।

ऑपइंडिया ने इस वीडियो के विषय में पता लगाने का प्रयास किया और इस कड़ी में अहमदाबाद पुलिस से सम्पर्क किया। अहमदाबाद पुलिस ने बताया कि यह वीडियो मुस्लिमों के बीच झड़प की ही है और उसे इस घटना के विषय में जानकारी है।

अहमदाबाद पुलिस ने बताया, “यह वीडियो 2 मार्च 2025 यानी पिछले रविवार शाम 6:30 बजे का है। अहमदाबाद के शाहपुर थाना क्षेत्र में पहले अज़ान देने के मुद्दे पर अहमदिया मुसलमानों और बिस्मिल्लाह मस्जिद के बीच झड़प हो गई। जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के दो कबीले अल अदीस और शिया आमने-सामने आ गए और दोनों में मारपीट शुरू हो गई।”

अहमदाबाद पुलिस ने आगे बताया, “बाद में दोनों गुटों के बीच समझौता हो गया।” अहमदाबाद पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस वीडियो की प्रामाणिकता और इसका अहमदाबाद से होना भी सही साबित हुआ है। यह भी पता चला कि यह घटना इसी रमजान महीने की है।

सनातन विरोधियों गुजरात मत दोहराओ : क्यों ताप्ती गंगा एक्सप्रेस ट्रेन से महाकुंभ जा रहे थे 36 श्रद्धालु, उस पर जलगाँव में बरसाए गए पत्थर?: खिड़की चकनाचूर, यात्री दहशत में आए

                           पथराव से ताप्ती गंगा एक्सप्रेस ट्रेन के सीसे टूटे (फोटो साभार: ETVBharat)
सूरत से बलिया जा रही ताप्ती गंगा एक्सप्रेस ट्रेन पर महाराष्ट्र के जलगाँव के पास पथराव की खबर है। इस ट्रेन में महाकुंभ मेले के लिए प्रयागराज जा रहे यात्री सवार थे। यह घटना रविवार (12 जनवरी 2024) को 15.17 बजे हुई, जब ट्रेन जलगाँव स्टेशन से आगे बढ़ी ही थी। अज्ञात लोगों द्वारा किए गए इस पथराव से बी-6 कोच की खिड़की का शीशा टूट गया। इस घटना से यात्रियों में डर का माहौल बन गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस ट्रेन के बी-6 कोच में सूरत के उधना से 36 श्रद्धालु सवार हुए थे, जिनमें 5 बच्चे, 6 बुजुर्ग, 13 महिलाएँ और 12 पुरुष शामिल थे। सभी श्रद्धालु महाकुंभ मेले के पहले शाही स्नान में हिस्सा लेने जा रहे थे। पथराव की सूचना तुरंत रेलवे पुलिस को दी गई, जिसके बाद मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

पत्थरबाज चाहे जिस बिल में घुसकर बैठ जाएं, मोदी सरकार पत्थरबाजों को उसी तरह सात तालों से निकाल लाएगी जिस तरह साबरमती ट्रेन में आग लगाकर गुजरात को दंगा की आग में झोंककर छुप गए थे, लेकिन खोज निकाला उसी तरह तुम्हें खोज निकालेगी। कोई तुम्हारा आका बचाने नहीं आएगा। गुजरात दंगों की तरह चीखते रहना कोई victim card काम नहीं आएगा। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मुद्दे पर संज्ञान लें। जब तक इन पत्थरबाजों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को नहीं छिनेगी, ये दंगाई ऐसे ही हिन्दू उत्सवों में उपद्रव करते रहेंगे। इनके समर्थन में बोलने वालों के विरुद्ध भी कार्यवाही बहुत जरुरी है। 

घटना के बाद बी-6 कोच के यात्रियों ने बताया कि अचानक तेज आवाज आई और खिड़की का काँच टूट गया। कुछ यात्रियों ने बताया कि पथराव के दौरान कई पत्थरों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे कोच में दहशत फैल गई। इस बीच, यात्रियों की तरफ से वीडियो रिलीज किया गया है, जिसमें कम से कम 2 खिड़कियों के सीसों को नुकसान पहुँचा है।

आरपीएफ इंस्पेक्टर ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि दोपहर बाद 15.17 मिनट पर ट्रेन प्लेटफॉर्म से बामुश्किल 16-17 कोच की दूरी तक ही आगे बढ़ी थी कि बाईं तरफ से पत्थर ट्रेन पर आया। भुसावल में ट्रेन की जाँच की गई, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। हालाँकि पत्थरबाज का अब तक पता नहीं चल पाया है।

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की चार सदस्यीय टीम ट्रेन में तैनात कर दी गई। रेलवे पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि यह हमला संभवतः असामाजिक तत्वों द्वारा किया गया हो सकता है। घटना के बाद से यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा का भरोसा दिया गया है।

41 दंगाई गिरफ्तार, 450 पत्थरबाजों की हुई पहचान… नकली पत्रकार असीम रज़ा की भी खुली कलई: संभल के उपद्रवियों को ‘नकाब’ भी बचा नहीं पा रहा

    संभल में अब तक 41 दंगाई गिरफ्तार करने के साथ पुलिस ने चिन्हित किए 450 उपद्रवी (चित्र साभार- अमर उजाला)
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने इस कार्रवाई में 41 दंगाई गिरफ्तार किए गए है। पुलिस ने लगभग 450 पत्थरबाजों को CCTV फुटेज व अन्य माध्यमों से चिन्हित किया है। इनकी तलाश जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल पुलिस ने 50 और उपद्रवियों की पहचान कर ली है। अब तक 450 ऐसे ही उपद्रवियों की पहचान हो चुकी है। इनमें से 100 के नाम भी पुलिस को पता चल गए हैं। संभल में हिंसा करने वाले दंगाइयों की पहचान में इसलिए भी समय लग रहा है क्योंकि उन्होंने हमले के वक्त नकाब पहन रखा था। संभल हिंसा मामले में हाल ही में एक पत्रकार को भी गिरफ्तार किया था। उसके बारे में भी कई जानकारियाँ सामने आई हैं।

पहले दी पुलिस को धमकी, फिर माफ़ी

संभल पुलिस ने 6 दिसंबर, 2024 को एक फर्जी पत्रकार असीम रज़ा जैदी को गिरफ्तार किया था। असीम जैदी हिंसा के बाद भड़काऊ वीडियो शेयर कर रहा था। उसने मुस्लिमों को इकट्ठा किया था और उन्हें उकसा रहा था। इस संबंध में सूचना संभल पुलिस को दी गई थी।
उसको रोकने के लिए जब पुलिस पहुँची तो वह धमकाने पर उतर आया। उसने सब इंस्पेक्टर संजीव को तक धमकी दे डाली। असीम जैदी ने सब इंस्पेक्टर जैदी से कहा, “मुझे जानते नहीं हो। मैं पत्रकार हूँ। अपनी एक खबर से तुमको बर्खास्त करवा दूँगा।” असीम ने ऊपर के अधिकारियों से भी दारोगा की शिकायत की धौंस दी। इसके बाद असीम को गिरफ्तार कर लिया गया।
असीम के खिलाफ इसके बाद पुलिस ने ही FIR दर्ज की। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिसकर्मियों ने इसके बाद असीम जैदी के दावों का सत्यापन भी करवाया कि आखिर वह कहाँ का पत्रकार है। जब असीम के बताए संस्थान से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह उनका कर्मचारी नहीं है।
पोल-पट्टी खुल जाने के बाद असीम जैदी पुलिस के आगे गिड़गिड़ा कर माफ़ी माँगने लगा। उसने यह भी माना कि वह पत्रकारिता के नाम पर फर्जीवाड़ा कर धंधा चला रहा था। असीम रजा के ऊपर अब फर्जीवाड़े समेत बाकी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

संवेदनशील इलाकों में हो रही घरों की तलाशी

संभल हिंसा के बाद पुलिस सतर्क को गई है। पुलिस की टीमें संवेदनशील मोहल्ले में चिन्हित किए गए घरों की तलाशी ले रहीं हैं। इसी तलाशी के दौरान सोमवार (10 दिसम्बर, 2024) को कई घरों से नशे की खेप और अवैध हथियार बरामद हुए थे।
तलाशी का यह अभियान नखासा के उस इलाके में चलाया गया था जहाँ सांसद जियाउर्रहमान बर्क का घर है। इसी कार्रवाई में मुल्ला आसिफ, महबर और ताजवर के परिजनों को पूछताछ के लिए थाने में तलब किया गया था। गौरतलब है कि 24 नवंबर को कोर्ट के आदेश पर जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुँची टीम पर अल्लाह हू अकबर चिल्लाती मुस्लिम भीड़ ने हमला बोल दिया था। इस हमले में लगभग 2 दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों में डिप्टी कलेक्टर और DSP भी शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश : संभल में घरों से निकले हथियार, छतों से पत्थरबाजी करने वाली औरतें भी गिरफ्तार: 2 मृतकों के शरीर में मिली वो गोलियाँ जो पुलिस नहीं करती इस्तेमाल

               संभल से 2 खातूनों के साथ गिरफ्तार दंगाइयों के घर से मिला है दोधार वाला हथियार 
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (24 नवंबर 2024) को जामा मस्जिद का सर्वे करने गई प्रशासनिक टीम पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। 28 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं जिसमें से कुछ की हालत गंभीर है। पुलिस ने दबिश दे कर कई उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है जिसमें महिलाएँ भी शामिल हैं। शहर में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। 2 थानों को मिला कर अब तक कुल 5 FIR दर्ज हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ,अब तक संभल में कुल 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसमें 3 मृतकों के नाम नईम, बिलाल और नोमान हैं। इन सभी को पत्थरबाजी में शामिल बताया जा रहा है। मिल रही जानकारी के मुताबिक, इसमें से 2 लोगों को 315 बोर की गोली लगी है। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने ऑपइंडिया को बताया कि पुलिस 315 बोर की गोली का इस्तेमाल नहीं करती है। पुलिस की पिस्टल या रायफल में से कोई भी हथियार इस बोर का नहीं होता है।

हिंसा के बाद से पुलिस लगातार दबिश दे रही है। अब तक 20 से अधिक हमलावरों को गिरफ्तार किया गया है जिसमें 2 महिलाएँ भी शामिल हैं। इन हमलावरों के घरों से हथियार भी बरामद हुए है। इसमें एक नए टाइप का भी हथियार है जिसमें दोनों तरफ से धार बनी हुई है। इन सभी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की जाएगी। हिंसा में शामिल तमाम अन्य लोगों की भी पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

SP आईपीएस कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि जिले की संभल तहसील क्षेत्र में एक दिन के लिए इंटरनेट सेवाएँ बाधित की गईं हैं। जिले में किसी भी बाहरी व्यक्ति अथवा नेता के बिना प्रशासनिक अनुमति के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कक्षा 12 तक के स्कूलों को भी सोमवार तक के लिए बंद कर दिया गया है। इस घटना पर मुरादाबाद परिक्षेत्र के कमिश्नर IAS आंजनेय सिंह ने मृतकों के परिजनों से पूछा है कि उनके घर का सदस्य पत्थरबाजी करने क्यों गया था?

आंजनेय सिंह ने यह भी कहा कि पुलिस पर पत्थर के साथ गोलियाँ भी बरसाई गईं हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस की तरफ से आँसू गैस के गोले छोड़े गए हैं। लगाए जा रहे आरोपों के संबंध में जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि पूरी रिकार्डिंग पुलिस के पास मौजूद है। उन्होंने कहा कि पत्थरबाज कोई धर्म-पुण्य का काम करने नहीं गए थे। जिले में फ़िलहाल के लिए ईंट और गिट्टी आदि की खरीदारी पर रोक लगा दी गई है।

जिले के सभी निवासियों को साफ़ हिदायत दी गई है कि अगर उनकी छतों पर कोई भी पत्थर और ज्वलनशील पदार्थ मिला तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिका को भी निर्देश मिला है कि सड़क पर बिखरे किसी भी सामान को फ़ौरन जब्त करे। इस हिंसा में लगभग 28 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनका इलाज करवाया जा रहा है। एक घायलों में SP के PRO और DSP अनुज विश्नोई भी शामिल हैं। एक कांस्टेबल के सिर में गंभीर चोट लगी है।

इस पूरे मामले में अब तक कुल 4 FIR दर्ज हुई हैं। इसमें से 3 FIR कोतवाली संभल जबकि एक अन्य नखासा थाने में हुई है। कोतवाली संभल में घायल SDM, SHO और 2 सब इंस्पेक्टरों की तहरीर पर मुकदमे दर्ज किए गए है। वहीं नखासा थाने में भी एक केस पुलिस की तहरीर पर दर्ज हुआ है। यहाँ हमलावरों ने पुलिस पर पत्थर फेंके थे। इसी दौरान पुलिस की एक बाइक को भी जला दिया गया था।

मोदी है तो अमरावती से हरिद्वार तक ‘सिर तन से जुदा’ गैंग का उपद्रव करना मुमकिन है; कहीं पुलिस पर हमला-कहीं भगवाधारी का फूँका पुतला: बोले बीजेपी MLA- डासना मंदिर पर हमला करने वालों का एनकाउंटर हो

अमरावती और हरिद्वार में यति नरसिंहानंद पर कार्रवाई की आड़ में मुस्लिम भीड़ का उपद्रव (चित्र- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानन्द को गुस्ताख़ करार देते हुए मुस्लिम भीड़ ने शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को देश के कई हिस्सों में हिंसा की। इसमें UP के बुलंदशहर और गाजियाबाद, महाराष्ट्र का अमरावती और उत्तराखंड का हरिद्वार शामिल हैं। अमरावती में भीड़ द्वारा थाने पर किए गए हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। कई सरकारी वाहनों को तोड़ डाला गया है।

'सिर तन से जुदा' गैंग केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद से जितना सक्रीय हुआ है, कभी नहीं हुआ। अगर मोदी सरकार समय रहते राज्य, केंद्र सरकारों से लेकर न्यायपलिकाएँ  होश में नहीं आयी, हिन्दुओं को मुंह सिलकर रहना पड़ेगा। कन्हैया लाल के कातिलों का क्या हुआ? नूपुर शर्मा के जिस बयान को विवादित बताया गया, उसमे मुस्लिम कट्टरपंथियों से कहीं अधिक केंद्र और सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। किसी में कट्टरपंथियों से यह पूछने की हिम्मत नहीं हुई कि किस सन्दर्भ में बात कही गयी, दूसरे जो कुछ नूपुर ने बोला वह तुम्हारी मजहबी किताबों के है या नहीं? लेकिन इस बात को कहने की हिम्मत TimesNow नवभारत चैनल पर एंकर सुशांत सिन्हा ने की। सिन्हा ने वायरल और original वीडियो दिखाकर मुल्ला, मौलवियों और इस्लामिक विद्यानों को खुली चुनौती दी थी। लेकिन 56 इंच वाली मोदी सरकार ने नूपुर को पार्टी से ही निकाल दिया। यही हाल बीजेपी ने तेलंगाना के गोशमहल विधायक टी राजा सिंह के साथ किया था, जब राजा ने कट्टरपंथियों को ईंट का पत्थर से दिया था। लेकिन वह लड़ाई राजा सिंह ने खुद लड़ी और ‘सिर तन से जुदा’ गैंग बिल में घुस गया। चुनाव से पहले राजा सिंह को पार्टी में वापस लिया और चुनाव भी जीते। लेकिन नूपुर के बाद राजा के साथ बीजेपी की हरकत से हिन्दू मतदाता में नाराजगी हो गयी और पार्टी को तेलंगाना विधान सभा चुनाव में कम से कम 30/35 सीटों का नुकसान हुआ।    

उस समय मोदी सरकार की जिम्मेदारी थी कि प्रेस कांफ्रेंस कर दोनों वीडियो दिखाती और सभी चैनलों को इसका सीधा प्रसारण करने को बोलती और साथ में यह भी कहती कि जो चैनल नहीं दिखाएगा 3 महीने के लिए सील कर दिया जाएगा। जितने भी कट्टरपंथी हैं सभी धराशाही हो गए होते। इस काम को करने के लिए 56 नहीं 56x2 सीना चाहिए। इसलिए मोदी है तो ‘सिर तन से जुदा’ गैंग उपद्रव करना मुमकिन है। 

अमरवती में कई पुलिसकर्मी घायल

जुमे की नमाज़ के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों में सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र का अमरावती रहा। यहाँ के नागपुरी गेट पुलिस स्टेशन पर शुक्रवार रात लगभग 8:30 पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग पहुँचे। इन्होंने यति नरसिंहानंद के खिलाफ शिकायती पत्र देकर केस दर्ज करने की माँग शुरू कर दी। पुलिस ने इस शिकायत पर FIR दर्ज कर ली।
अभी पुलिस जरूरी कार्रवाई कर ही रही थी कि हजारों की तादाद में पहुँची मुस्लिम भीड़ ने थाने को घेर लिया और उन्मादी नारे लगाने लगी। पुलिसकर्मी भीड़ को समझाने की कोशिश ही कर रहे थे कि अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पथराव के चलते कुल 21 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू करने के लिए अतिरिक्त फ़ोर्स को बुलाया गया।
फोर्स के आने तक हमलावर भीड़ ने पुलिस के 10 वाहनों को तोड़ डाला। बाद में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इस मामले में पुलिस ने 1200 उपद्रवियों पर केस दर्ज कर लिया है। कुछ हमलावरों को भी चिन्हित किया गया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299, 302 और 197 के तहत कार्रवाई की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CCTV फुटेज और अन्य माध्यमों से हमलावरों की पहचान की जा रही है। अब तक 26 हमलावरों को चिन्हित कर लिया गया है। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू कर दी गई है। इसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई है।

हरिद्वार में अल्लाह हु अकबर के नारे

मज़हबी उन्माद की लम्बी श्रृंखला की चपेट में उत्तराखंड का हरिद्वार भी आया। यहाँ दिन में यति नरसिंहानंद पर एक्शन की माँग की आड़ में जुटी मुस्लिम भीड़ ने भगवा वस्त्र का पुतला बनाया और इस पुतले को आग के हवाले करद दिया। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई। इसी के साथ रात में एक अन्य मुस्लिम भीड़ ने चौराहे पर जुटकर नारेबाजी की।
इस नारेबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाह हु अकबर’ जैसे भड़काऊ नारे के साथ-साथ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे भी लगा रही है। यह नारेबाजी पुलिस के सामने ही की गई है। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी भीड़ की ओर से लौटते दिख रहे हैं।

मंदिर पर हमला करने वालों का एनकाउंटर हो

उधर, गाजियाबाद में डासना मंदिर पर उन्मादी भीड़ के हमले के बाद आसपास के लोगों में आक्रोश पनप रहा है। शनिवार (5 अक्टूबर) को लोनी से भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर मंदिर पहुँचे। उन्होंने हमलावरों का एनकाउंटर करने की माँग की। भाजपा MLA ने कहा कि बेहतर होता कि हमले के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के बजाय गोलियाँ बरसातीं।
नंद किशोर के मुताबिक, नरसिंहानंद का बयान दुनिया भर में में हो रहे हिन्दुओं के साथ इस्लामी अत्याचारों की वजह से आया है। मंदिर घेरने को उन्होंने सनातन और हिन्दुओं की आस्था पर हमला बताया। विधायक का दावा है कि हमले में अधिकतर लोग बाहरी थे। नंदकिशोर ने कहा, “यहाँ का मुसलमान तो भगवान राम को मानने वाला है। ये बेचारे को बलत्कार से बचने के लिए मुस्लिम बन गए।”

कर्नाटक से हिमाचल तक कांग्रेस की सरकारें हिंदुओं की विरोधी, कर्नाटक में गणेश विसर्जन जुलूस पर पथराव

हिमाचल प्रदेश में हिन्दुओं ने जो एकता का प्रदर्शन किया जा रहा है, यदि यही एकता शेष भारत में हो गयी निश्चितरूप से 'सर तन से जुदा' और सनातन विरोधी कहीं किसी बिल में कभी बाहर न आने के लिए घुसकर बैठ जाएंगे।    
सनातन संस्कृति में यूं तो धार्मिक उत्सव और पर्व वर्षभर ही आते हैं, लेकिन पवित्र सावन माह से लेकर कार्तिक मास तक पर्वों की छटा ही अनौखी और मनोहारी होती है। श्रद्धा और आस्था का सैलाब मंदिरों और देवालयों में उमड़ता है। ऐसे समय में ही इंडिया गठबंधन की सोच वाले लेफ्ट लिबरल गैंग और उनके कांग्रेसी समर्थक हिंदुओं के विरोध पर उतारू हो जाते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के राज में जहां गणपति विसर्जन की शोभायात्रा पर पथराव करके माहौल को बिगाड़ने की कोशिशें हुईं। वहीं, हिमाचल प्रदेश में मुस्लिमपरस्ती में कांग्रेस सरकार ने सैकड़ों हिंदुओं पर ही लाठीचार्ज करवा दिया। शिमला के संजौली में हजारों की संख्या में हिंदू संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारी संजौली पहुंचे। सरकार के इशारे पर हिंदुओं को तितर-बितर करने के लिए शिमला पुलिस ने खूब लाठी चार्ज किया। वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया। इस दौरान कई लोग घायल भी हो गए। इसी के विरोध में शिमला के व्यापारियों ने आधे दिन बाजार भी बंद रखा।

कर्नाटक में गणपति विसर्जन जुलूस पर दरगाह के सामने पथराव
देशभर में गणेश चतुर्थी से शुरू हो गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। लेकिन कई जगह सनातन के विरोधियों को यह रास नहीं आ रहा है। इनकी नापाक हरकतें यहां तक हो गई हैं कि ये भगवान की शोभायात्रा, जुलुस पर पथराव करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। कर्नाटक के मांड्या के नागमंगला में बुधवार रात गणपति विसर्जन जुलूस पर कुछ कट्टरपंथियों ने पथराव कर दिया। रात करीब 8 बजे मैसूर रोड पर बनी दरगाह के सामने पहुंचने पर विसर्जन जुलूस पर लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इससे कई लोग चोटिल भी हो गए। इसके बाद में हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। इसके विरोध में इलाके की कुछ दुकानों और वहां खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी गई। पुलिस ने हिंदुओं की भीड़ लाठीचार्ज भी किया।

पिछले साल भी मैसूर रोड पर बनी दरगाह के सामने हुआ था हंगामा
कन्नड़ न्यूज चैनलों के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जुलूस पर पत्थरों के अलावा तलवार, रॉड और जूस की बॉटल से भी हमला किया गया। इस घटना में कई लोगों के अलावा 15 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। हिंदू समुदाय ने कार्रवाई की मांग करते हुए गणेश प्रतिमा को थाने के सामने रोक दिया था। पिछले साल भी बदरिकोप्पल के मैसूर रोड पर बनी इसी दरगाह के सामने हंगामा हुआ था। पुलिस ने बाद में 52 लोगों को हिरासत में लिया है। इलाके में 3 दिन के लिए BNS की धारा 163 (CrPC में यह धारा 144 थी) लागू कर दी गई है। घटना के विरोध में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने गुरुवार को बंद का आह्वान किया। इधर कलेक्टर ने नागमंगला में गुरुवार को स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी है।

अवैध मस्जिद निर्माण के बावजूद शिमला में अराजकता का तांडव
कर्नाटक की तरह हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार हिंदुओं के विरोध पर उतारू है। सरकार की तुष्टिकरण की नीति का यह आलम है कि अवैध मस्जिद के निर्माण का भी विरोध करने पर हिंदुओं पर लाठीचार्ज कराया जा रहा है। यही वजह है कि संजौली का मस्जिद विवाद सिर्फ हिमाचल तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे देश में छाया हुआ है। ये है कि अवैध निर्माण का मामला कल या आज का नहीं है, बल्कि कई साल पुराना है और शिमला नगर निगम की अदालत में लंबित है। साल 2010 से ये मामला नगर निगम कोर्ट में चल रहा है। ऐसी भी जानकारी है कि नगर निगम की कोर्ट में मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर नोटिस भी जारी किया, लेकिन फिर भी चार से पांच मंजिल अवैध तरीके से यहां खड़ी कर दी गईं। जब मामला इतना पुराना है तो अब 14 साल पहले लगी आग कि चिंगारी अचानक अब कैसे भड़की और हिंदू संगठनों को सड़कों पर क्यों उतरना पड़ा।

तुष्टिकरण में हिंदुओं पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के प्रयोग से कई हुए घायल
पिछले महीने यानी कि अगस्त माह की बात है। संजौली के मल्याणा क्षेत्र में एक दुकान पर काम करने वाले 37 वर्ष के विक्रम सिंह के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की थी। मारपीट करने वाले कुछ लोगों में मुस्लिम थे। मामला इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने विक्रम सिंह पर डंडे और रॉड से वार किया। इसके बाद पीड़ित बुरी तरह जख्मी हो गया। इसके बाद ऐसी सूचना सामने आई कि ये आरोपी वारदात को अंजाम देने के बाद उसी अवैध मस्जिद में आकर छिप गए। बस फिर क्या था, इस मामले ने देखते ही देखते तूल पकड़ लिया और फिर 14 साल पुराने अवैध निर्माण मामले की परतें खुलती गईं। शिमला के संजौली में हजारों की संख्या में हिंदू संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारी ने विरोध जताया। कांग्रेस सरकार की तुष्टिकरण की नीति के चलते शिमला पुलिस ने लोगों पर लाठी चार्ज किया। वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।

शिमला एसपी और अवैध मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई की मांग
इसी के विरोध में शिमला के व्यापारियों ने सुबह 10.00 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक बाजार बंद रखा। शिमला व्यापार मंडल ने शेर-ए-पंजाब चौक से सीटीओ चौक तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान व्यापारियों ने राज्य की कांग्रेस सरकार और शिमला जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके अलावा शिमला पुलिस अधीक्षक और शिमला पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। स्थानीय व्यापारी शिमला पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी की बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही जल्द से जल्द संजौली में बनी मस्जिद में हुए अवैध निर्माण पर भी जल्द कार्रवाई की मांग की है। सीटीओ चौक पर पहुंचकर व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने हनुमान चालीसा का भी पाठ किया।

शिमला के व्यापारियों और हिंदू संगठनों ने पढ़ी हनुमान चालीसा
मामला सियासत कर ही नहीं रहा, बल्कि दो धर्मों की लड़ाई में भी तब्दील हो गया। संजौली मस्जिद अवैध निर्माण का मामला इतना गर्मा गया कि हिंदू संगठनों का प्रदर्शन लगातार जारी है। चौड़ा मैदान से लेकर संजौली तक हजारों की संख्या में हिंदू संगठनों के लोगों ने अवैध रूप से बनी मस्जिद को तोड़ने की मांग की। देव भूमि क्षत्रिय संगठन की ओर से हिंदू संगठनों को संजौली चलो का एक आह्वान किया गया। यहीं नहीं, हिंदू संगठन के सदस्यों ने हनुमान चालीसा पढ़ा और हिंदू देवी-देवताओं के नारे भी लगाए। एक समय चौड़ा मैदान हर हर महादेव, राधे राधे से लेकर जय श्रीराम के नारों से गूंजता रहा।

मस्जिद में अवैध निर्माण को लेकर सियासी हलचल
मंत्री ही बोले- मस्जिद पूरी तरह अवैध
मस्जिद के अवैध निर्माण का मामला हिमाचल विधानसभा में भी गूंजा। यहां तक कि सुक्खू सरकार के मंत्री और कुसुंपटी के कांग्रेस विधायक अनिरूद्व सिंह ने पूरी मस्जिद को ही अवैध बता दिया। इस दौरान उन्होंने लव जिहाद का मुद्दा तो उठाया ही, साथ ही शिमला में रोहिंग्यों के होने का भी जिक्र कर दिया।
मोहब्बत की दुकान में नफरत ही नफरत-ओवेसी
संजौली मस्जिद विवाद को लेकर विधानसभा में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के ‘मोहब्बत की दुकान’ के नारे को लेकर तंज कसते हुए कहा कि हिमाचल कांग्रेस की मोहब्बत की दुकान में नफरत ही नफरत है।
विक्रमादित्य बोले- गिराई जाएगी मस्जिद
पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने एएनआई से एक बातचीत में कहा कि यदि कोर्ट मस्जिद को अवैध बताती है तो उसे गिराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में है। यदि यह अवैध पाई जाती है तो निश्चित तौर पर उसे कानून की प्रक्रिया के तहत तोड़ा जाएगा। हालांकि, ये म्यूनिसिपल कमिश्नर के आदेश के बाद ही किया जा सकता है।

सूरत : गणपति पंडाल पर मुस्लिम नाबालिगों ने किया पथराव, एक्शन लेने पर पुलिस पर भी हमला: सैंकड़ों हिंदू विरोध में उतरे, अब तक 27 गिरफ्तार

                                   सूरत में गणेश मंडप पर पथराव (फोटो साभार: गुजरात फर्स्ट, न्यूज18गुजराती)
गुजरात के सूरत के लालगेट इलाके में गणेश भगवान के मंडप पर पथराव की घटना प्रकाश में आई। आरोप है कि इस भड़काऊ हरकत को कुछ मुस्लिम समुदाय के नाबालिगों द्वारा अंजाम दिया गया। घटना के बाद जब हजारों हिंदू विरोध में सड़कों पर उतरे तो पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में कुछ गिरफ्तारियाँ कीं। हालाँकि इन गिरफ्तारियों से पहले मुस्लिम बहुल इलाके में उन्हें भी पत्थरों से निशाना बनाया गया।

कट्टरपंथियों द्वारा कहीं बच्चे तो कहीं औरतों को जो दंगा भड़काने में आगे किया जा रहा है, यह अच्छे संकेत नहीं है। राज्य और केंद्र सरकारों को बच्चे, औरतों और इन्हें उकसाने वालों पर पहाड़ बन टूटना होगा। हिमायत में आने वाले मुस्लिम वोटबैंक की गन्दी सियासत खेलने को भी हिरासत में लेकर सख्त कार्यवाही करनी होगी। दूसरे, पहले भी कई बार लिखा है कि दंगा प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस को ढोल पीटने के लिए हाथ में डंडा लेकर नहीं बल्कि blind firing के आर्डर देकर भेजा जाए।   

जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला लालगेट के वरियाली बाजार का है। यहाँ कुछ मुस्लिम समुदाय के नाबालिगों द्वारा गणेश मंडप पर पथराव किया गया। हिंदू समुदाय को जब ये सूचना मिली तो वो सबमें आक्रोश फैल गया। इस दौरान लागेट थाने का घेराव भी किया गया।

पथराव की घटना सबसे पहले 7 सितंबर को हुई थी और उसके बाद अगले दिन यानी 8 सितंबर को भी हुई। इसी के बाद हिंदुओं ने आपा खोया। हालाँकि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए कदम उठाए और उन्हें पकड़ने इलाके में भी गई। हालाँकि पुलिस को देखते ही आरोपितों के इलाके में पथराव होने लगा। पुलिस ने मशक्कत के बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

घटना के बारे में पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने कहा, “इससे ​​पहले यहाँ गणेश मंडप पर पथराव हुआ था। यहाँ मौजूद नाबालिग आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है, फिलहाल पुलिस की जाँच जारी है। शांति स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा। सभी आरोपितों का चेहरा सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले पर विधायक कांति बलार ने हिंदू युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आपके साथ हूँ। भारतीय जनता पार्टी आपके साथ है। हम इस तरह बार-बार पथराव बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिन लोगों को पकड़ लिया गया है उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।”

वहीं इस मामले पर गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने संज्ञान लिया। उन्होंने कहा, “जैसा कि मैंने वादा किया था, सूरज उगने से पहले हमने पत्थरबाजों को पकड़ लिया है! 27 पत्थरबाज गिरफ्तार किए गए हैं। सीसीटीवी, वीडियो विजुअल्स, ड्रोन विजुअल्स और अन्य तकनीकी निगरानी कार्य अभी भी जारी है। सभी आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।हमारी टीमें पत्थरबाजों की पहचान करने और उन्हें सजा दिलाने के लिए पूरी रात काम कर रही थी और अभी काम रही है।”

गणपति पंडाल में हुए पथराव की घटना के बाद गिरफ्तार हुए आरोपितों को लेकर बताया जा रहा है कि उनकी उम्र 15 साल से अधिक नहीं है। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है और साथ ही वो लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं जिन्होंने भड़काऊ नारेबाजी की थी।