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मामला जबरन धर्म परिवर्तन और लव जिहाद का : तुष्टिकरणपस्त मीडिया ने अफाक अहमद के केस को दिया नया एंगल, छिपाई गई आरिफ-सादिक की करतूत

                            मीडिया रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट (साभार - ऑपइंडिया इंग्लिश)
हाल में इलाहाबाद कोर्ट की एक टिप्पणी पर मीडिया में जमकर खबरें चल रही हैं। हेडलाइन दी जा रही है कि कोर्ट ने कहा है कि वॉट्सऐप पर भेजे गए ‘अनकहे शब्द’ भी नफरत फैला सकते हैं। कई जगह इस हेडलाइन को ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे अदालत किसी के चुप रहने को भी दोषी बता रहा है, जबकि हकीकत यह है कि यह पूरा मामला लव जिहाद से जुड़ा है।

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी बिजनौर से जुड़े एक केस में की है जहाँ एक मुस्लिम युवक अफाक अहमद ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए ये जरूर कहा है, वॉट्सऐप पर भेजा गया कोई संदेश भले ही सीधे तौर पर धर्म का जिक्र न करे, लेकिन अगर उसमें अनकहे शब्दों और संकेतों के जरिए किसी समुदाय के खिलाफ नफरत, वैमनस्य या दुर्भावना फैलाने का भाव है, तो वह भी अपराध की श्रेणी में आएगा।”

कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा? 

पूरा मामला दरअसल लव जिहाद और जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़ा है। अफाक अहमद का भाई आरिफ अहमद फिलहाल जेल में है। उस पर आरोप है कि उसने एक हिंदू युवती से संबंध बनाकर उसे धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने की कोशिश की और उसे दुबई ले जाने की योजना थी।

यह शिकायत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता संदीप कौशिक ने दर्ज कराई थी। शुरुआती तौर पर मामूली धाराओं में दर्ज FIR बाद में गंभीर धाराओं में तब्दील कर दी गई, जिसमें बलात्कार, धोखाधड़ी, जहर देना, फर्जीवाड़ा, और धर्म परिवर्तन अधिनियम, 2021 के तहत अपराध शामिल हैं।

इसी गिरफ्तारी के बाद अफाक अहमद ने अपने परिचितों को एक वॉट्सऐप मैसेज भेजा। उसने लिखा कि उसके भाई को राजनीतिक दबाव में झूठे मामले में फँसाया गया है और उसके परिवार के बहिष्कार की बाट कही जा रही है। उसने यह भी लिखा कि “उसे डर है कि कहीं भीड़ उसे मार न दे” लेकिन साथ ही उसने अदालत और न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताया।

यह संदेश देखने में साधारण लगा पर अदालत ने इसे बहुत गंभीरता से लिया। जस्टिस जे जे मुनिर और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने कहा कि “संदेश के शब्द सीधे तौर पर धर्म का उल्लेख नहीं करते, लेकिन उसमें जो अनकहा संदेश है, वह साफ तौर पर यह धारणा देता है कि आरोपित का भाई मुसलमान होने की वजह से निशाना बनाया गया है।” अदालत ने कहा “यह वही ‘unsaid words’ हैं जो किसी खास समुदाय की धार्मिक भावनाएँ भड़का सकते हैं और दो समुदायों के बीच दुश्मनी, घृणा और अविश्वास का माहौल पैदा कर सकते हैं।”

कोर्ट ने साफ कहा कि भले ही यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(3) (धार्मिक स्थल पर अपराध) के अंतर्गत न आता हो, लेकिन धारा 353(2) के तहत यह अपराध बनता है क्योंकि यह संदेश नफरत फैलाने की क्षमता रखता है। अदालत ने कहा कि “यह मामला केवल एक व्यक्ति की निजी पीड़ा का नहीं है, बल्कि यह समाज के साम्प्रदायिक ताने-बाने को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।”

इसलिए कोर्ट ने अफाक अहमद की याचिका को खारिज करते हुए कहा, “मामला जाँच के योग्य है और इसे शुरुआती चरण में रोका नहीं जा सकता।”

यह पहला मौका नहीं है जब किसी मुस्लिम परिवार पर  लव जिहाद  के आरोपों के बाद ऐसे विवाद खड़े हुए हों। अदालत ने इस बार यह स्पष्ट किया कि धार्मिक पहचान के नाम पर खुद को पीड़ित बताने वाले बयान भी अप्रत्यक्ष रूप से नफरत फैलाने का जरिया बन सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि अफाक के परिवार पर एक नहीं बल्कि तीन-तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं, एक उसके भाई आरिफ पर, दूसरी खुद अफाक पर और तीसरी उनके चाचा सादिक पर, जिन्होंने स्थानीय चैनल पर बयान दिया था कि “उसके भतीजे को फँसाया गया है।”

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सुप्रीम कोर्ट की तानाशाही भारत का इस्लामीकरण करने को आमादा है; परदीवाला ने योगी के धर्म परिवर्
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सुभाष चन्द्र आज जिस तरह हिन्दू अपने सनातन के प्रति सजग हो रहा है उसके विपरीत सनातन विरोधी रोड़े अटकाने में लगे हुए ह....

RSS कार्यकर्ता संदीप कौशिक, जिन्होंने सबसे पहले शिकायत दर्ज कराई थी, उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा की “लड़की का परिवार डर के साये में था। मैंने एक जिम्मेदार नागरिक की तरह पुलिस में रिपोर्ट की। यह समाज की सुरक्षा का मामला था।”

असम : काली मंदिर के पास फिर फेंका गया गाय का कटा सिर, भड़क उठे हिंदू: पुलिस ने बोदिर अली, हजरत अली, तारा मिया, शजामल मियाँ और जहाँगीर आलम को किया गिरफ्तार

वैसे भारत में जेहादी अपनी नीचता दिखाने में कभी नहीं चूकते, लेकिन जब से मोदी सरकार ने पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है भारत में छिपे पाकिस्तानी sleeper cell अपने बिलों से बाहर आने शुरू हो रहे हैं। कोई छद्दम सेक्युलरिस्ट कुछ नहीं बोल रहा है और स्थिति एकदम विपरीत होती चील-कौओं की तरह सारा विपक्ष चिल्ला रहा होता। जनता को अब समझना होगा कि पाकिस्तान, दंगाई, आतंकवाद और विपक्ष सिक्के के एक ही पहलू हैं। इन्हे ना ही हिन्दुओं की चिंता है और ना ही देश की, इन्हें बस चिंता है अपनी कुर्सी और तिजोरी की।      
असम के लखीपुर में शनिवार (14 जून 2025) को काली मंदिर के पास फिर से गौमांस फेंके जाने की घटना हुई, जिससे इलाके में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने गाय का कटा सिर मंदिर परिसर में फेंक दिया।

ये दूसरा ऐसा मामला है, क्योंकि इससे पहले धुबरी में भी ऐसा ही कुछ हुआ था। लखीपुर के काली मंदिर के पास गाय का कटा हुआ सिर मिलने से स्थानीय लोग बहुत गुस्से में हैं।

पुलिस को जैसे ही इसकी खबर मिली, वो तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और गाय का कटा हुआ सिर अपने कब्जे में ले लिया। साथ ही पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी ताकि तनाव और न बढ़े।

इस मामले में पुलिस ने 5 इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस की गिरफ्त में आए इस्लामी कट्टरपंथियों के नाम हैं- बोदिर अली, हजरत अली, तारा मिया, शजामल मिया और जहाँगीर आलम।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद अपने ट्विटर (एक्स) पर इन गिरफ्तारियों की जानकारी दी।

स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि ये कोई नई बात नहीं है। पहले भी मुस्लिम चरमपंथियों ने वार्ड नंबर 10 के मंदिर परिसर में गौमांस फेंका था। उस वक्त भी लोगों ने खूब विरोध किया, तब जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जाँच शुरू की।

इससे पहले भी शुक्रवार 13 जून 2025 के अगले दिन मुस्लिम बहुल धुबरी इलाके में एक स्थानीय हनुमान मंदिर में एक गाय का कटा हुआ सिर पाया गया। इसके बाद वहाँ भी विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए। तनाव इतना अधिक बढ़ गया कि खुद असम के मुख्यमंत्री को वहाँ का दौरा करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने लोगों को आश्वासन देते हुए आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की बात कही और सीधा गोली मारने का आदेश जारी कर दिया। हालाँकि धुबरी की घटना पर पुलिस की रातभर चली जाँच में कुल 38 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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जो शांति भंग करे, उसे देखते ही गोली मारो… असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पुलिस को दिया सख
जो शांति भंग करे, उसे देखते ही गोली मारो… असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पुलिस को दिया सख
 

असम में बीते कई दिनों से मुस्लिम चरमपंथियों द्वारा हिन्दू मंदिरों को टारगेट करके बार-बार गौमांस फेंकने का प्रयास किया जा रहा है और हिन्दूओं की आस्था का मज़ाक उड़ाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश : अशांति फ़ैलाने वाले मोहम्मद जुबैर पर UP में FIR: आरोप- मुस्लिमों को भड़का कर डासना मंदिर पर करवाया हमला, यति नरसिंहानंद की हत्या की रची साजिश; आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए

यति नरसिंहानंद की रिहाई और मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की माँग को लेकर गाजियाबाद में प्रदर्शन (फोटो साभार: ऑपइंडिया)
गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर पर 4 अक्टूबर 2024, शुक्रवार के दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि यह भीड़ मंदिर में घुसने की कोशिश कर रही थी और उन्मादी नारे लगा रही थी। पुलिस ने किसी तरह मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। इस घटना से हिंदू समुदाय में गुस्सा फैल गया, और उन्होंने हिंसा भड़काने वालों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को इस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की जा चुकी है। हालाँकि, लोगों की माँग थी कि आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है।

भाजपा नेत्री डॉ. उदिता त्यागी, जो खुद को इस घटना की चश्मदीद और पीड़ित बता रही हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 7 सितंबर 2024 को दी गई इस शिकायत में उन्होंने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से कहा कि डासना मंदिर पर हमला एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को इस हमले के लिए मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और अरशद मदनी ने भड़काया था। इस हमले में बाहर से आए मुस्लिमों की भी संलिप्तता बताई गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

डॉ. उदिता का दावा है कि इस हिंसा के पीछे यति नरसिंहानंद गिरी की हत्या की साजिश थी। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद को 5 अक्टूबर को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। डॉ. उदिता ने माँग की है कि हमलावरों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनकी इस शिकायत पर मंदिर के अंदर मौजूद हिंदू समाज के दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं। ये वो लोग बताए जा रहे हैं जो हमले के समय डासना मंदिर के अंदर मौजूद थे।

इस शिकायत के बाद मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद के कवि नगर थाने में केस दर्ज हुआ है। यह केस भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 228, 299, 356(3) और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है।

डॉ. उदिता ने अपने वीडियो बयान में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यति नरसिंहानंद सरस्वती को रिहा करने और मोहम्मद जुबैर पर केस दर्ज करने सहित हमलावरों पर NSA न लगने की स्थिति में 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित की जाएगी। उदिता के मुताबिक, यह महापंचायत ऐतिहासिक होगी।

डॉ. उदिता ने पुलिस कमिश्नर को एक और शिकायत दी, जिसमें मोहम्मद जुबैर की कई कथित गतिविधियों का जिक्र किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जुबैर ने 10 हिंदूवादी लोगों की एक सूची बनाई है, जो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस सूची में उनका नाम भी शामिल है, और उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। उन्होंने नूपुर शर्मा केस का हवाला देते हुए कहा कि जुबैर उस मामले में 6 निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार था।

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डॉ. उदिता का मानना है कि अगर मोहम्मद जुबैर को जेल नहीं भेजा गया, तो वह कई हिंदुओं के जीवन के लिए खतरा बना रहेगा। डॉ. उदिता के अलावा, हिंदू रक्षा दल ने भी यति नरसिंहानंद की रिहाई की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मंदिर पर हमला करने वाली भीड़ पर सख्त कार्रवाई की माँग की। इस दौरान हिंदू संगठनों से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद रहे। ऑपइंडिया के पास इस ज्ञापन की प्रति मौजूद है।

मोदी है तो अमरावती से हरिद्वार तक ‘सिर तन से जुदा’ गैंग का उपद्रव करना मुमकिन है; कहीं पुलिस पर हमला-कहीं भगवाधारी का फूँका पुतला: बोले बीजेपी MLA- डासना मंदिर पर हमला करने वालों का एनकाउंटर हो

अमरावती और हरिद्वार में यति नरसिंहानंद पर कार्रवाई की आड़ में मुस्लिम भीड़ का उपद्रव (चित्र- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानन्द को गुस्ताख़ करार देते हुए मुस्लिम भीड़ ने शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को देश के कई हिस्सों में हिंसा की। इसमें UP के बुलंदशहर और गाजियाबाद, महाराष्ट्र का अमरावती और उत्तराखंड का हरिद्वार शामिल हैं। अमरावती में भीड़ द्वारा थाने पर किए गए हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। कई सरकारी वाहनों को तोड़ डाला गया है।

'सिर तन से जुदा' गैंग केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद से जितना सक्रीय हुआ है, कभी नहीं हुआ। अगर मोदी सरकार समय रहते राज्य, केंद्र सरकारों से लेकर न्यायपलिकाएँ  होश में नहीं आयी, हिन्दुओं को मुंह सिलकर रहना पड़ेगा। कन्हैया लाल के कातिलों का क्या हुआ? नूपुर शर्मा के जिस बयान को विवादित बताया गया, उसमे मुस्लिम कट्टरपंथियों से कहीं अधिक केंद्र और सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। किसी में कट्टरपंथियों से यह पूछने की हिम्मत नहीं हुई कि किस सन्दर्भ में बात कही गयी, दूसरे जो कुछ नूपुर ने बोला वह तुम्हारी मजहबी किताबों के है या नहीं? लेकिन इस बात को कहने की हिम्मत TimesNow नवभारत चैनल पर एंकर सुशांत सिन्हा ने की। सिन्हा ने वायरल और original वीडियो दिखाकर मुल्ला, मौलवियों और इस्लामिक विद्यानों को खुली चुनौती दी थी। लेकिन 56 इंच वाली मोदी सरकार ने नूपुर को पार्टी से ही निकाल दिया। यही हाल बीजेपी ने तेलंगाना के गोशमहल विधायक टी राजा सिंह के साथ किया था, जब राजा ने कट्टरपंथियों को ईंट का पत्थर से दिया था। लेकिन वह लड़ाई राजा सिंह ने खुद लड़ी और ‘सिर तन से जुदा’ गैंग बिल में घुस गया। चुनाव से पहले राजा सिंह को पार्टी में वापस लिया और चुनाव भी जीते। लेकिन नूपुर के बाद राजा के साथ बीजेपी की हरकत से हिन्दू मतदाता में नाराजगी हो गयी और पार्टी को तेलंगाना विधान सभा चुनाव में कम से कम 30/35 सीटों का नुकसान हुआ।    

उस समय मोदी सरकार की जिम्मेदारी थी कि प्रेस कांफ्रेंस कर दोनों वीडियो दिखाती और सभी चैनलों को इसका सीधा प्रसारण करने को बोलती और साथ में यह भी कहती कि जो चैनल नहीं दिखाएगा 3 महीने के लिए सील कर दिया जाएगा। जितने भी कट्टरपंथी हैं सभी धराशाही हो गए होते। इस काम को करने के लिए 56 नहीं 56x2 सीना चाहिए। इसलिए मोदी है तो ‘सिर तन से जुदा’ गैंग उपद्रव करना मुमकिन है। 

अमरवती में कई पुलिसकर्मी घायल

जुमे की नमाज़ के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों में सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र का अमरावती रहा। यहाँ के नागपुरी गेट पुलिस स्टेशन पर शुक्रवार रात लगभग 8:30 पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग पहुँचे। इन्होंने यति नरसिंहानंद के खिलाफ शिकायती पत्र देकर केस दर्ज करने की माँग शुरू कर दी। पुलिस ने इस शिकायत पर FIR दर्ज कर ली।
अभी पुलिस जरूरी कार्रवाई कर ही रही थी कि हजारों की तादाद में पहुँची मुस्लिम भीड़ ने थाने को घेर लिया और उन्मादी नारे लगाने लगी। पुलिसकर्मी भीड़ को समझाने की कोशिश ही कर रहे थे कि अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पथराव के चलते कुल 21 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू करने के लिए अतिरिक्त फ़ोर्स को बुलाया गया।
फोर्स के आने तक हमलावर भीड़ ने पुलिस के 10 वाहनों को तोड़ डाला। बाद में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इस मामले में पुलिस ने 1200 उपद्रवियों पर केस दर्ज कर लिया है। कुछ हमलावरों को भी चिन्हित किया गया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299, 302 और 197 के तहत कार्रवाई की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CCTV फुटेज और अन्य माध्यमों से हमलावरों की पहचान की जा रही है। अब तक 26 हमलावरों को चिन्हित कर लिया गया है। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू कर दी गई है। इसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई है।

हरिद्वार में अल्लाह हु अकबर के नारे

मज़हबी उन्माद की लम्बी श्रृंखला की चपेट में उत्तराखंड का हरिद्वार भी आया। यहाँ दिन में यति नरसिंहानंद पर एक्शन की माँग की आड़ में जुटी मुस्लिम भीड़ ने भगवा वस्त्र का पुतला बनाया और इस पुतले को आग के हवाले करद दिया। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई। इसी के साथ रात में एक अन्य मुस्लिम भीड़ ने चौराहे पर जुटकर नारेबाजी की।
इस नारेबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाह हु अकबर’ जैसे भड़काऊ नारे के साथ-साथ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे भी लगा रही है। यह नारेबाजी पुलिस के सामने ही की गई है। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी भीड़ की ओर से लौटते दिख रहे हैं।

मंदिर पर हमला करने वालों का एनकाउंटर हो

उधर, गाजियाबाद में डासना मंदिर पर उन्मादी भीड़ के हमले के बाद आसपास के लोगों में आक्रोश पनप रहा है। शनिवार (5 अक्टूबर) को लोनी से भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर मंदिर पहुँचे। उन्होंने हमलावरों का एनकाउंटर करने की माँग की। भाजपा MLA ने कहा कि बेहतर होता कि हमले के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के बजाय गोलियाँ बरसातीं।
नंद किशोर के मुताबिक, नरसिंहानंद का बयान दुनिया भर में में हो रहे हिन्दुओं के साथ इस्लामी अत्याचारों की वजह से आया है। मंदिर घेरने को उन्होंने सनातन और हिन्दुओं की आस्था पर हमला बताया। विधायक का दावा है कि हमले में अधिकतर लोग बाहरी थे। नंदकिशोर ने कहा, “यहाँ का मुसलमान तो भगवान राम को मानने वाला है। ये बेचारे को बलत्कार से बचने के लिए मुस्लिम बन गए।”

राजस्थान : ट्रॉली में भर-भर कर जब्त हुए पत्थर, ईदगाह बवाल में छतों पर थी पूरी तैयारी: अब तक 65 के खिलाफ FIR, 51 गिरफ्तार

         जोधपुर हिंसा, आरोपितों के घरों की छतों पर मिले भारी मात्रा में पत्थर (फोटो साभार : अमर उजाला/भास्कर)
राजस्थान के जोधपुर में शुक्रवार (21 जून 2024) को बवाल हो गया। तनाव को देखते हुए रविवार (23 जून 2024) को प्रशासन ने हिंसा के आरोपितों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया और ड्रोन से इलाके की छानबीन की, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की आँखें खुली की खुली रह गई, क्योंकि कई छतों पर भारी मात्रा में पत्थर मिले हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसा के दौरान पत्थरबाजी में हुआ था।

जिन स्थानों से पत्थरों का जखीरा बरामद हो, उसे जमींदोज़ ही नहीं बल्कि जब तक इन्हे मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से वंचित नहीं किया जाएगा, तब तक ये उपद्रवी और इनके समर्थक सुधरने वाले नहीं। ये हाल है अपने आपको गरीब, मजलूम और डरा हुआ बताने वालों का। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते शुक्रवार को जोधपुर के सूरसागर थाना इलाके में स्थित एक ईदगाह का गेट हिंदू मोहल्ले की तरफ खोले जाने का विरोध हुआ, तो मुस्लिमों ने जमकर पथराव किए। इस पथराव में कई गाड़ियाँ टूट गई, तो एक दुकान को भी आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा की इन घटनाओं में एक महिला की आँख की रोशनी चली गई। इस मामले में अब तक 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिसमें से 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इस बीच, पूरे इलाके में तनाव बरकरार है।

इस तनाव के बीच, पुलिस प्रशासन ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र में स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। इस बीच सामने आया कि लोगों ने घरों पर पथराव करने के लिए पत्थर जमा कर रखे थे। पुलिस के अनुसार यह पत्थर करीब दो ट्रॉली थे। इस खुलासे के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि विवाद को लेकर लोगों ने पहले ही पथराव करने की प्लानिंग कर रखी थी। इस दौरान जोधपुर के 5 थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू होने के कारण क्षेत्र रविवार को सन्नाटा छाया रहा। वहीं पुलिस बलों ने पूरी स्थिति पर नियंत्रण रखा।

पुलिस के अनुसार चिन्हित मकान पर करीब दो ट्रॉली पत्थर बरामद हुआ है। इस मामले में पुलिस ने घरों के लोगों को नामजद किया है और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी हैं। घरों के ऊपर पत्थर मिलने की घटना से चर्चा तेज हो गई है कि लोगों ने इस विवाद को देखते हुए पहले से ही पथराव करने की प्लानिंग बना ली थी।

सूरसागर क्षेत्र में पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने पूरे इलाके में पुलिस तैनात कर धारा 144 लागू कर दी। इसको लेकर अब तक पुलिस 51 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के अधिकारी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की छानबीन की जा रही हैं। हिंसा के इस मामले में अब तक 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, तो 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

हैदराबाद : हमले के शिकार गोरक्षकों से मिलने जा रहे भाजपा विधायक T राजा सिंह गिरफ्तार: आरोप- मूकदर्शक बनी रही थी तेलंगाना पुलिस

मेडक जिले में हिंसा के शिकार भाजपा कार्यकर्ताओं से मिलने जा रहे विधायक टी राजा सिंह हैदराबाद एयरपोर्ट पर गिरफ्तार 
तेलंगाना पुलिस ने रविवार (16 जून 2024) को हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी हैदराबाद के राजीव गाँधी एयरपोर्ट से की गई है। राजा सिंह मेडक जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं से मिलने जा रहे थे। इन पर गायों को बचाने के दौरान गो तस्करों ने शनिवार (15 जून) को हमला कर दिया था।

ऑपइंडिया से बात करते हुए राजा सिंह ने बताया कि उनको 2 दिनों तक हाउस अरेस्ट करने की तैयारी की गई है। अपनी गिरफ्तारी की जानकारी खुद MLA राजा सिंह ने अपने X हैंडल पर साझा की है। इसी के साथ उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है, जो हैदराबाद एयरपोर्ट का लग रहा है। वीडियो में राजा सिंह अपने कुछ साथियों के साथ चल रहे हैं।

उनके साथ पुलिस के कई स्टाफ भी मौजूद हैं। वीडियो के आखिर में राजा सिंह पुलिस के साथ एयरपोर्ट के बाहर आते हैं। यहाँ थोड़ी देर की बातचीत के बाद पुलिस उन्हें कार में बैठाकर ले जाती है। सोशल मीडिया पर लोग तेलंगाना पुलिस की इस कार्रवाई पर नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना की है।

मेदक में शनिवार को भड़की थी हिंसा

जिस घटना को लेकर राजा सिंह मेडक जा रहे थे वो शनिवार (15 जून) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ के रामदास चौरस्ता इलाके में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गाय लेकर जा रहे कुछ लोगों को रोक दिया। ये कार्यकर्ता आरोपितों को गो-तस्कर बताते हुए धरना देने लगे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोग भी जमा होने लगे।
कुछ ही देर में दोनों पक्षों में झड़प हो गई। इस झड़प में 2 लोग घायल हो गए, जिनको इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में भी इलाज के दौरान कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। हिन्दू संगठन के एक कार्यकर्ता को चाकू मारे जाने की भी खबर है। झड़प के बाद दोनों पक्ष खुद को सही और विपक्षी को गलत बता रहे हैं।
दोनों पक्षों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन भी किया है। कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की भी खबरें हैं। हंगामे को देखते हुए दुकानें और पेट्रोल पम्पों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है। फिलहाल हालत तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में हैं।

गुरुग्राम में हिन्दू संगठनों के नाम से पोस्टर लगाने वाला निकला आसिफ, ‘झुग्गी खाली करें मुस्लिम, वरना होगा बहन-बीवी का बलात्कार’: कांग्रेस-सपा ने हिन्दुओं को कहा भला-बुरा

VHP और बजरंग दल को बदनाम करने के लिए आसिफ (बाएँ) ने लगाए धमकी वाले पोस्टर
गुरुग्राम के सेक्टर 69- A क्षेत्र में 26-27 अगस्त 2023 की रात लगे कुछ पोस्टरों से माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इन पोस्टरों में ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) और ‘बजरंग दल’ के नाम से झुग्गी-झोपड़ी खाली करने की धमकी लिखी थी। धमकी में झुग्गियाँ खाली करने की डेडलाइन 28 अगस्त रखी गई थी। इन पोस्टरों को ले कर इस्लामी और वामपंथी समूहों सहित कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं ने हिन्दू संगठनों को बदनाम करने की पूरी कोशिश की।

आखिरकार इस पूरी साजिश की जड़ में आसिफ नाम का एक कबाड़ी शामिल मिला। पुलिस ने आसिफ को गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार कर लिया।

कबाड़ कारोबार पर बादशाहत की चाहत

मामला गुरुग्राम के थाना क्षेत्र बादशाहपुर का है। 22 सितंबर, 2023 को गुरुग्राम पुलिस ने आसिफ की गिरफ्तारी की सूचना सार्वजनिक की। पुलिस ने बताया कि 26-27 अगस्त की रात लगे पोस्टरों की FIR 28 अगस्त को दर्ज हुई थी। मामले की जाँच क्राइम ब्रांच ने की थी। पुलिस ने धमकी भरे पोस्टरों को लगाने के आरोप में उत्तराखंड के उधमसिंहनगर के गाँव सरकहड निवासी आसिफ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आसिफ ने बताया कि उसकी कबाड़ की दुकान गुरुग्राम के सेक्टर 69 के पास है। दुकान के पास एक अन्य कबाड़ी की भी दुकान है।
पुलिस के मुताबिक, आसिफ ने बताया कि वह कबाड़ के काम में आसपास कोई कम्पटीशन नहीं चाहता था। वह पड़ोस के दुकानदार को भगाना चाहता था। इसी साजिश के तहत उसने पड़ोसी की दुकान के आगे धमकी भरे पोस्टर चिपका दिए थे। आसिफ ने पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसे जेल भी भेज दिया गया है। हालाँकि, केस में अभी जाँच जारी है।

आसिफ की साजिश को कट्टरपंथी, वामपंथी और राजनैतिक हवा

बड़े-बड़े शब्दों में सूचना हेडिंग के साथ इस पोस्टर में लिखा था, “सारे झुग्गी वालों को सूचित किया जाता है 28-08-2023 तक खाली कर के चले जाओ वरना इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अगर नहीं गए तो अपनी मौत का जिम्मेदार खुद होगा। जितना जल्दी हो सके तुम सब खाली कर दो। साले मुल्ले लोगों की बहन-बीवी का बलात्कार होगा। अगर इज्जत बचाना है तो बचा लोग। तुम्हारे पास दो दिन हैं। फिर मत चिल्लाना।” पोस्टर के अंत में बहन की गालियाँ देते हुए नीचे लिखा, “तुम्हारा बाप बजरंग दल।” लगभग इन्हीं शब्दों के साथ लिखे एक अन्य पोस्टर में नीचे विश्व हिन्दू परिषद लिख दिया गया था। हाथ से लिखे इन पोस्टरों को गोंद से चिपकाया गया था।
आफरीन नाम के हैंडल ने नूहं हिंसा के दौरान फर्जी ट्वीट कर के बिना माफ़ी माँगे डिलीट करने वाले पुनीत कुमार सिंह के ‘बोलता हिंदुस्तान’ की इस मुद्दे पर बनी खबर शेयर की। 31 अगस्त को कैप्शन में उन्होंने लिखा था, “ये ज़रूर सड़े हुए नारंगी संतरों के छिलकों का काम है क्या पुलिस इस मामले की जाँच करेगी? या जब यह मामला खराब हो जाएगा तब एक्शन लेगी पुलिस, वो भी सिर्फ़ मुसलमानों पर, क्योंकि धमकी मुस्लिमों को मिल रही हैं। अभी खामोश रहिए क्योंकि खट्टर सरकार और गुड़गांव (गुरुग्राम) पुलिस सो रही है।”
NDTV ने तो बाकायदा इस पर एक शो बना डाला। NDTV के एंकर मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वालों की गिरफ्तारी की माँग जोर-शोर से उठाते दिखे। NDTV ने इसी शो में मुस्लिम कामगारों को डरा हुआ घोषित कर दिया। NDTV ने अपने शो में नफरती पोस्टर लगाने की वजह झुग्गी में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मुस्लिम समुदाय का होना बताया। 3 मिनट से अधिक लम्बे 
इसी शो में यह भी बताते का प्रयास हुआ कि नूहं हिंसा में भी मुस्लिम ही पीड़ित हैं।
गुरुग्राम में रहने वाले बिहार के अररिया से कॉन्ग्रेस नेता बदरे आलम ने इस खबर को शेयर किया। 31 अगस्त को उन्होंने लिखा, “दिल्ली से सटे हुए हरियाणा गुरुग्राम में मुस्लिम कामगार डरे हुए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर 70 के पास एक मुसलमान की झुग्गी में धमकी भरी पोस्टर लगाए गए। कहा जा रहा है कि वह यहाँ छोड़ कर चले जाएँ वरना झुग्गी जला दी जाएगी।”
लगातार हिन्दू संगठनों के खिलाफ भ्रामक खबरें छापने वाले पोर्टल ‘जर्नो मिरर’ ने तो 29 अगस्त को इस मामले में हिन्दू संगठनों को दोषी ठहरा दिया था। पुलिस जाँच का इंतज़ार किए बिना ही सीधे तौर पर मीडिया संस्थान ने इन पोस्टरों के पीछे VHP और ‘बजरंग दल’ वालों को जिम्मेदार बता डाला था।
                                                               चित्र- journomirror.com
इन सभी के अलावा सदफ आफरीन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता संतोष कुमार यादव और कॉन्ग्रेस नेता डॉ अरुणेश कुमार यादव ने भी इस मुद्दे पर बिना पुलिस की जाँच रिपोर्ट आए ही हंगामा मचाना शुरू कर दिया। कुछ के निशाने पर हरियाणा सरकार थी तो कुछ के हिंदूवादी संगठन। इन सभी के ट्वीट 28 अगस्त से 1 सितंबर के बीच सिलसिलेवार ढंग से आए।
                                                चित्र साभार- ट्विटर पोस्ट के स्क्रीनशॉट्स

27 अगस्त को ही आ चुका था आसिफ का नाम

इस मामले में इस्लामी, वामपंथी हैंडलों, NDTV के अलावा कॉन्ग्रेसी और समाजवादी पार्टी नेताओं ने हंगामे की शुरुआत 28 अगस्त से की। लेकिन, ख़ास बात ये है कि घटना में आसिफ कबाड़ी का नाम एक दिन पहले 27 अगस्त को ही आ चुका था। 27 अगस्त, 2023 को ही मोजेद अली नाम के शिकायतकर्ता ने पुलिस में आसिफ के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवा दी थी। मोज़ेद अली की ही दुकान पर 26-27 सितंबर को आसिफ ने VHP और बजरंग दल के नाम से धमकी भरे पोस्टर चिपकाए थे। पुलिस में दर्ज कराई गई FIR में मोज़ेद अली ने पोस्टर चिपकाने के पीछे आसिफ के होने की आशंका जताई थी।
                                                                     FIR कॉपी
मोज़ेद ने यह भी बताया था कि 3-4 दिन पहले आसिफ ने उन्हें धमकी दे कर कबाड़ी की दुकान बंद करने के लिए कहा था। FIR में आसिफ पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया गया। आसिफ को नामजद करते हुए पुलिस ने FIR में IPC की धारा 188, 294, 295- A, 504 और 506 लगाई थी। मोज़ेद अली उसी ऋषि पंडित की झुग्गी में रहते हैं जिसे खाली करने के पोस्टर लगाए गए थे। शिकायतकर्ता मोज़ेद मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले हैं। वह सेक्टर 69 गुरुग्राम में चाय-पानी बेचते हैं और कबाड़ का काम करते हैं।

कई हिन्दू हुए हैं ऐसी साजिशों के शिकार

ऑपइंडिया ने इस मामले में गुरुग्राम निवासी और ‘हरियाणा प्रदेश शिवसेना युवा मोर्चा’ (शिंदे गुट) अध्यक्ष रितुराज अग्रवाल से बात की। ऋतुराज ने बताया कि भले ही इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने खुलासा करते हुए असल आरोपित आसिफ को पकड़ लिया लेकिन इस से पहले भी ऐसी कई साजिशें हो चुकी हैं। शिवसेना नेता का दावा है कि उन साजिशों के शिकार कई हिन्दू संगठन के सदस्यों को कानूनी कार्रवाई झेलना पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस जगह यह पोस्टर लगाए गए उसके आसपास के सेक्टरों में कुछ माह पहले खुले में नमाज़ को ले कर भी तनातनी हुई थी।

नूहं से जोड़ कर थी सनसनी फैलाने की साजिश

ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘विश्व हिन्दू परिषद’ गुरुग्राम के जिला मंत्री यशवंत ने पोस्टर लगाने और उसे वायरल करने की टाइमिंग पर सवाल खड़ा किया। यशवंत ने हमें बताया कि हिन्दू संगठनों ने 28 अगस्त को अधूरी बृजमंडल यात्रा को पूरा करने का संकल्प लिया था। इस बीच 26-27 की रात ये पोस्टर लग गए। ऐसा तब हुआ जब पुलिस हाई अलर्ट पर थी। यशवंत ने आशंका जताई कि इस पूरे मामले को बृजमंडल यात्रा से जोड़ कर बड़ी सनसनी की साजिश रही होगी। उन्होंने हमें बताया कि वो जल्द ही पुलिस को ज्ञापन दे कर इस मामले की गहराई से जाँच करने की माँग करेंगे।
VHP नेता ने यह भी बताया कि जैसे ही ये पोस्टर घटना के बाद वायरल हुए थे तभी उन लोगों ने खुल कर लोगों और मीडिया के साथ प्रशासन को भी बता दिया था कि ऐसी हरकतें VHP या बजरंग दल नहीं करते। यशवंत ने तनाव के माहौल में पुलिस द्वारा रखे धैर्य और अंत में सही कार्रवाई की तारीफ की।                                                         (साभार)

बिहार : कहीं महावीरी शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी, कहीं मस्जिद से निकली भीड़ ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

सीवान में महावीरी शोभायात्रा पर मस्जिद से पुलिस के सामने पथराव (चित्र साभार- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
बिहार के सीवान जिले में महावीरी अखाड़ा की शोभायात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं पर पथराव किया गया है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फ़ैल गया। हालात सँभालने पहुँचे पुलिस बल पर भी पथराव की सूचना है। इस झड़प के चलते दोनों पक्षों के एक दर्जन लोग घायल हो गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। घटना में आधे दर्जन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस द्वारा अब तक कुल 10 आरोपितों को हिरासत में लेने की सूचना है। घटना 8 सितम्बर, 2022 की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बड़हरिया थानाक्षेत्र का है। घटना के दिन यहाँ पुरानी बाजार इलाके में महावीरी शोभा यात्रा निकली थी। जब यह यात्रा मस्जिद के सामने से गुजरी तब किसी बात को ले कर मुस्लिम पक्ष से शोभा यात्रा में शामिल लोगों का विवाद हो गया। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोग मस्जिद पर चढ़ कर पत्थरबाजी करने लगे। इस पथराव से अफरातरफी मच गई और कुछ लोग घायल हो गए। इस हमले के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि हमले के जवाब में शोभायात्रा में शामिल लोगों ने भी खुद का बचाव करने के लिए पत्थर फेंके। इसी बीच पान की एक गुमटी को आग के हवाले कर दिया गया। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने हालात काबू करने की कोशिश की तो उपद्रवियों ने उन पर भी पत्थर फेंके। इस पत्थरबाजी के चलते 2 पुलिसकर्मियों के सिर फट गए। अब तक पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के कुल 10 आरोपित हिरासत में लेने की सूचना है जिनसे पूछताछ की जा रही है।

बड़हरिया थाने के प्रभारी प्रभाकर के मुताबिक, पथराव और आगजनी की घटना में शामिल लोगों की शिनाख्त करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हमले के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पटना में भी पुलिस पर हमला

वहीं एक अन्य घटनाक्रम में बिहार की राजधानी पटना में पुलिस पर हमले की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में पुलिस वालों को भागना पड़ा लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा कर के पिटाई की। मामला पीर बहोर थानाक्षेत्र का है। यहाँ शिया मस्जिद के पास हथियारों से लैस 4 संदिग्धों की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी थी। आरोपितों की तलाशी के दौरान आस-पास की भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल कर संदिग्धों को छुड़ा लिया।
बाद में भीड़ ने थाने पर पहुँच कर हंगामा भी किया। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपितों पर FIR दर्ज की है, जिसमें पुलिस पर हमले और सरकारी कार्यों में बाधा डालने की धाराएँ लगाई गईं है। थाना प्रभारी के मुताबिक घायल कांस्टेबल सुभाष का इलाज करवाया जा रहा है। आरोपितों की पहचान वीडियो और CCTV फुटेज के आधार पर करवाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश : जौनपुर में मुहर्रम के जुलूस में गूँजे ‘सर तन से जुदा’ के नारे

                                                                                                              फोटो साभार: हिंदुस्तान
इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद (Islamic Prophet Muhammad) के नाम पर शुरू हुआ आतंक का उपद्रव रूकने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में उदयपुर के कन्हैया लाल (Kanhaiya Lal) की गला काटकर हत्या के बाद यह खेल अभी भी जारी है। यूपी के जौनपुर में अब ‘सर तन से जुदा’ के आपत्तिजनक नारे लगाए जाने की घटना सामने आई है।

आतंकी नारे लगाए जाने की घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। यह घटना मुहर्रम के दिन की बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि मुहर्रम के दिन ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाकर सांप्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश की गई।

घटना जौनपुर के मीरगंज थाना क्षेत्र के करियाँव बाजार का है। 10 अगस्त 2022 के दिन शाम को मुस्लिमों का एक हुजूम ताजिया दफन करने जा रहा था। इस दौरान मुस्लिम युवकों ने ये आपत्तिजनक नारे लगाए। आरोप है कि नारेबाजी करते हुए मुस्लिमों ने दूसरे समुदाय के लोगों को उकसाया गया।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। एसपी ग्रामीण शैलेन्द्र सिंह के निर्देश पर थानाध्यक्ष मीरगंज ने करियाँव के चार लोगों- मोहम्मद शकील, मोहम्मद अब्दुल, मोहम्मद जीशान और मोहम्मद हारिस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।  

इसके पहले जौनपुर के ही सुरेरी थाना क्षेत्र में मुहर्रम के दिन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के राष्ट्र विरोधी नारे लगाए गए थे। इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो के आधार पर पुलिस मामले की जाँच कर ही रही थी कि जिले के मछली शहर तहसील अंतर्गत मीरगंज का यह वीडियो सामने आया है।

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ वाले वीडियो के मामले में छानबीन के बाद पता चला कि कर्बला पहुँचने से पहले ताजियादारों ने नुक्कड़ नाटक किया था। इस नुक्कड़ नाटक में दो युवक हिंदुस्तान और पाकिस्तान का रोल कर रहे थे। SP देहात शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया, “वायरल वीडियो 9 अगस्त का है। नुक्कड़ नाटक के दौरान नारे लगे थे। किसी ने नुक्कड़ नाटक का सिर्फ 1 अंश का वीडियो वायरल कर दिया।”

गुजरात : सूरत के सिविल अस्पताल में अवैध मजार

देश भर में अतिक्रमण के एक से बढ़कर एक मामले सामने आ रहे हैं, जो आश्चर्यचकित करते हैं। गुजरात में सूरत (Gujarat, Surat) के सिविल अस्पताल में एक अवैध मजार बनाकर अतिक्रमण करने की कोशिश की गई है। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को पत्र लिखकर परिसर में स्थित इस अवैध मजार को हटाने का अनुरोध किया है। मजार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि अस्पताल के परिसर में स्थित एक मजार है और इसके चारों ओर एक ठोस निर्माण किया जा रहा है। हालाँकि, अस्पताल के अधिकारियों ने अब पुलिस को पत्र लिखकर इस अवैध निर्माण को हटाने का अनुरोध किया है।

सूरत के पुलिस आयुक्त को लिखे एक पत्र की कॉपी ऑपइंडिया के उपलब्ध है। इस पत्र में अस्पताल के अधिकारियों ने लिखा है कि रेडियोलॉजी विभाग के पीछे और किडनी बिल्डिंग के बगल में स्थित ऑक्सीजन प्लांट के पास एक मजार है। इस मजार का निर्माण कुछ असामाजिक तत्वों ने अवैध रूप से किया है।

                                           अस्पताल के अधिकारियों द्वारा पुलिस को लिखा गया पत्र

पत्र में कहा गया है, “यह अनधिकृत मजार 17.5 x 17.5 फीट क्षेत्र में फैला है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि कृपया इसे देखें और सरकारी संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाएँ।” पत्र में पुलिस से असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने का स्पष्ट अनुरोध किया गया है।

                                                      मजार के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद का प्रदर्शन

नाम न छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि मजार परिसर में कब से है, लेकिन उन्होंने अब पुलिस से अवैध निर्माण को हटाने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद द्वारा अस्पताल परिसर में मजार के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया है। इस सप्ताह की शुरुआत में विहिप कार्यकर्ताओं ने अनधिकृत मजार के बारे में अस्पताल के अधिकारियों को एक लिखित आवेदन दिया था।  साभार (महेश पुरोहित के इनपुट्स के साथ)