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मुस्लिम पीड़ित का नैरेटिव VS सच्चाई: ओलंपियन शाहिद के घर पर कार्रवाई ‘मुआवजा’ और ‘सहमति’ से हुई, फिर भी लिबरल-वामपंथी और सपा-कांग्रेसी गैंग ने फैलाया प्रोपेगेंडा

ओलंपिक विजेता हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद के घर बुलडोजर से ढहाने पर लिबरल-वामपंथी-विपक्ष और इस्लामी कट्टरपंथी ने खूब रोना रोया
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ओलंपिक पदक विजेता और पद्मश्री से सम्मानित हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद के पुश्तैनी मकान पर बुलडोजर चलाया गया। प्रशासन ने कहा कि पुलिस लाइन से कचहरी तक सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है और इसी कड़ी में 13 मकानों को गिराने की कार्रवाई हुई।

इन्हीं मकानों की सूची में मोहम्मद शाहिद का घर भी शामिल था। अब मोहम्मद शाहिद के घर ढहाने को लेकर लिबरल-वामपंथी गैंग ने जबरन विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों और लिबरल-वामपंथी गैंग ने बुलडोजर की इस कार्रवाई को बीजेपी सरकार के खिलाफ मुद्दा बना लिया और इसे ‘मुस्लिम पीड़ित’ के नैरेटिव से जोड़कर खूब प्रचारित किया।

मोहम्मद शाहिद के घर पर बुलडोजर चलाने का विरोध

विपक्ष ने बीजेपी को ‘जुल्मी सरकार’ बताते हुए ‘नाइंसाफी’ करने के इल्जाम लगाए, जो उनकी नजर में ‘अमानवीय’ तरीके से बुलडोजर कार्रवाई कर रही है। इस्लामी कट्टरपंथियों यहाँ ‘मुस्लिम पीड़ित’ का राग अलापने लग गए। दलितों के हितैषी बनने वाले चंद्रशेखर आजाद ने बीजेपी पर खिलाड़ियों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए परिवार को मुआवजा देने की माँग की।

समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “जुल्म करनेवाले न भूलें नाइंसाफी की भी एक उम्र होती है।” उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “पूरा घर जमींदोज कर दिया। ये सिर्फ एक घर नहीं था बल्कि देश की खेल विरासत की पहचान थी। काशी की धरती पर प्रतिभाओं और सम्मानित विभूतियों का अपमान करने वाली भाजपा सरकार को जनता माफ नहीं करेगी।”

कांग्रेस नेता मोहम्मद वसीम ने ‘देश में मुसलमानों की हालत’ पर सवाल उठाए। इस्लामी कट्टरपंथी भी विरोध की इस दौड़ में पीछे नहीं रहे और योगी सरकार से मोहम्मद शाहिद के घर ढहाने के पीछे कारण पूछा। एक X यूजर मंजर हुसैन ने लिखा, “एक राष्ट्रीय नायक का घर अब मलबे में पड़ा है। सीएम योगी, कोई जवाब है?”

लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथी संगठनों का शोर

मामले को हवा देने के लिए इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों और लिबरल पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर भी मोर्चा खोला। X पर मोहम्मद शाहिद के घर बुलडोजर चलाने के कई वीडियो पोस्ट किए गए। इनमें एक वीडियो में मुस्लिम व्यक्ति पुलिस अधिकारी के हाथ जोड़कर रहा है। इस वीडियो को लिबरल गैंग और इस्लामी मीडिया ने गलत संदर्भों के साथ जमकर वायरल किया।

राणा अय्यूब ने अपने X अकाउंट पर ये वीडियो पोस्ट कर लिखा, “उत्तर प्रदेश में, हॉकी के दिग्गज मोहम्मद शाहिद का घर उन 13 घरों में से एक था जिन्हें बुलडोजर से गिरा दिया गया। क्या आपको उन लोगों की चुप्पी सुनाई दे रही है जिन्हें बोलना चाहिए?”

कांग्रेस इकोसिस्टम भी मोहम्मद शाहिद के घर पर बुलडोजर चलाए जाने का विरोध करता नजर आया है। खुद को ‘गाँधीवादी’ बताने वाले सैयद फैसल इकबाल कहते हैं, “अगर यह इस्लामोफोबिया नहीं है, तो और क्या है? जब एक राष्ट्रीय नायक के परिवार को भी नहीं बख्शा जाता और जिन्हें बोलना चाहिए वे चुप रहते हैं – तो उनकी चुप्पी मिलीभगत है।”

यहाँ तक की अखिलेश यादव, चंद्रशेखर आजाद, लुटियन्स मीडिया ने भी इस वीडियो को पोस्ट कर बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए ‘मुस्लिम-विरोधी होने की छवि पेश की’ और सोशल मीडियो पर लोगों की सहानूभूति बँटोरी।

इसी तरह वाराणसी की एक प्रशासनिक कार्रवाई विपक्ष और लिबरल-वामपंथी के लिए बीजेपी सरकार को घेरने का नया मुद्दा बन गई। वो भी बिना किसी असलियत के ज्ञान के, यही लोग जो सरकार पर विकास को लेकर सवाल उठाते हैं और धर्म की राजनीति का आरोप लगाते हैं। यहाँ साफ नजर आता है कि धर्म की राजनीति कहाँ से आती है और कैसे मुस्लिम-विरोधी प्रोपेगेंडा को हवा दी जाती है।

लिबरल-वामपंथी गैंग को आखिर चिंता किस बात की है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस पूरे विवाद में जितने लिबरल, वामपंथी, इस्लामी कट्टरपंथी और कांग्रेसी हंगामा मचा रहे हैं, उन्हें असल में चिंता किस बात की है? क्योंकि मोहम्मद शाहिद की बीवी परवीन को इस कार्रवाई पर कोई आपत्ति नहीं है। मीडिया से बात करते हुए परवीन ने साफ कहा कि प्रशासन से उन्हें मुआवजा मिल चुका है और वे इस कार्रवाई से सहमत हैं। परवीन ने यह भी कहा, “सिर्फ हमारा घर नहीं बल्कि इलाके में दूसरे मकान भी तोड़े गए हैं।”

इतना ही नहीं घर के कुल 9 हिस्सेदारों में से 6 लोगों को बाकायदा मुआवजा दिया जा चुका है। यानि परिवार के भीतर से विरोध की कोई आवाज नहीं उठी लेकिन बाहर बैठे कथित सेक्युलर जमात और ‘खेल विरासत’ का रोना रोने वाले नेताओं को यह मौका मिल गया कि वे सरकार पर इल्जाम लगाने लगें। सवाल ये है कि जब परिवार खुद संतुष्ट है तो यह लिबरल-वामपंथी जमात क्यों मातम मना रही है?

मुस्लिम व्यक्ति का घर तोड़ा गया?

यहाँ एक और बड़ा झूठ फैलाया गया कि केवल मोहम्मद शाहिद का घर तोड़ा गया क्योंकि वो एक मुस्लिम हैं और सरकार मुस्लिम-विरोधी है। जबकि असलियत यह है कि पुलिस लाइन से कचहरी तक सड़क परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए 13 मकानों को ध्वस्त किया गया। इन्हीं में मोहम्मद शाहिद का घर भी शामिल था। यानि प्रशासन ने किसी मुस्लिम को टारगेट नहीं किया बल्कि योजना के मुताबिक सभी 13 मकान तोड़े, न कि धर्म के आधार पर।

और हाँ, योगी सरकार का बुलडोजर हमेशा कानून के दायरे में ही चलता है। इस मामले में भी परिवार को पहले ही नोटिस दिया गया था। उस नोटिस में साफ-साफ लिखा था कि सड़क चौड़ीकरण के लिए जिन हिस्सों की जरूरत है, उन पर मालिकों की सहमति ली जा चुकी है। अब जब परिवार सहमत था और मुआवजा भी मिल चुका था तो फिर ‘जुल्म’ और ‘नाइंसाफी’ का झूठा नैरेटिव खड़ा करने का क्या औचित्य है?

पूरा घर जमींदोज नहीं, केवल एक हिस्सा गिराया

जहाँ तक पूरा घर जमींदोज करने की बात है और वायरल वीडियो में मुस्लिम व्यक्ति के गिड़गिड़ाने की बात है। तो PWD ने साफ कहा है कि चार मंजिला घर का केवल एक हिस्सा गिराया गया है और उनको मुआवजा दिया जा चुका है।

सरकार ने मुआवजा पहले ही दे दिया है। मोहम्मद शाहिद के घर में 9 हिस्सेदार बताए गए। इनमें से 6 को मुआवजा दे दिया गया जबकि बाकी 3 अलग-अलग वजहों से पैसा लेने से इनकार कर दिया। प्रशासन ने अपनी कार्रवाई के दौरान केवल उसी हिस्से को ढहाया जिसे मुआवजा मिल गया था। जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया, उनके हिस्से को नहीं छेड़ा गया है।

यानी विपक्ष और लिबरल मीडिया का यह आरोप भी पूरी तरह झूठा है कि ‘पूरा घर जमींदोज’ कर दिया गया। सच यही है कि प्रशासन ने सिर्फ उतना ही हिस्सा गिराया, जिसका भुगतान पहले से कर दिया गया था।

यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही है जैसी किसी भी विकास परियोजना में होती है। लेकिन चूँकि यहाँ मामला एक मुस्लिम खिलाड़ी का था तो कांग्रेस, वामपंथी, लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथी गैंग ने इसे मुस्लिम पीड़ित बनाम बीजेपी सरकार का एजेंडा खड़ा करने का मौका समझा और इसे भुनाने की कोशिश में जुट गए।

ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग का काला सच : गोरी लड़कियाँ कचरा और वेश्या, इनका कैसे भी यूज करो…, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल: एलन मस्क ने कहा- सरकार के लोगों को भी जेल में डालो

फिर से चर्चा में आया ग्रूमिंग गैंग
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। ग्रूमिंग गैंग चलाने वाले दरिंदों का साफ मानना था कि श्वेत लड़कियाँ कचरा और वेश्या हैं इनका इस्तेमाल कैसे भी हो सकता है।

मानवाधिकार से लेकर यूएनओ तक सब खामोश क्यों? क्या मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा महिलाओं का इसी तरह शोषण होता रहेगा? क्या महिलाओं का कोई आत्म-सम्मान नहीं? आखिर कब तक महिलाएं इन जेहादियों का शिकार होती रहेंगी? इस गंभीर समस्या पर विश्व को एकजुट होकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करनी होगी।     

हैरानी की बात ये है कि लड़कियों को टारगेट करने वाले अपना धंधा एक दशक तक ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों (लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, रोशडेल, रोदरहैम आदि) में चलाते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई एक्शन तक नहीं लिया। नतीजतन 1997 से 2013 तक एशियाई देशों (मुख्यत: पाकिस्तान) के इस्लामी कट्टरपंथी 1400 लड़कियों को अपने निशाना बना चुके थे। मामले का खुलासा आखिर में तब हुआ कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया। इन्हीं लोगों की पहल से इस मामले में एक स्वतंत्र रिपोर्ट आई जिसने इस मुद्दे को उठाया।

पीड़ितों की आपबीती

आज एक बार फिर अगर ये मामला दोबारा चर्चा में है तो इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर रॉदरहैम बाल यौन शोषण कांड की रिपोर्ट शेयर हो रही है। लोगों को फिर बताया जा रहा है कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीड़िताओं को अलग-अलग ढंग से प्रताड़ित किया और जब वो अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास गईं तो उनकी कोई सुनवाई तक नहीं हुई। यहाँ तक पीड़िताओं के अभिभावकों के साथ भी अभद्रता की गई।
रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक पीड़िता का बयान है। इस बयान के अनुसार 15 साल की उम्र में लड़की किसी बशरत हुसैन के साथ रिश्ते में थी। इस रिश्ते के दौरान ही उसे पता चला था कि बशरत के भाइयों के बीच और साउथ योर्कशायर पुलिस थाने के अधिकारियों का आपस में उठना-बैठना है।
इसी तरह एक अन्य मामले में एक रेप पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ उसके बाद उसे सर्जरी तक करवानी पड़ी थी, लेकिन न्याय की माँग लेकर जब वो पुलिस के पास गए तो एक अधिकारी ने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें कहा कि इस घटना से उनकी बेटी को सबक मिलेगा।
अन्य मामले में एक लापता हुई लड़की के पिता को अधिकारी द्वारा कहा गया था कि रोथरहैम में तो अपनी उम्र से बड़े एशियाई बॉयफ्रेंड बनाने को लड़कियों ने फैशन बना लिया है। घबराने की बात नहीं है लड़की खुद आ जाएगी।
एक वीडियो भी वायरल है जिसमें एक पीड़ित पिता अपनी आपबीती बता रहा है। सुन सकते हैं कि पीड़ित पिता कहता है कि एक बार उन्हें कॉल आई कि उनकी बेटी को कहाँ रखा गया है। वो चूँकि उस जगह के करीब ही थे तो वो उस अपार्टमेंट में गए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और फिर अंदर देखा तो कुछ लोग पर्दे के पीछे थे। इसके बाद पुलिस भी वहाँ 5 मिनट के भीतर आ गई लेकिन उन्होंने आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया और सवाल पूछा- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो।” इसके बाद पुलिस फिर उस पिता को उनके घर लेकर गई और वहाँ भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ग्रूमिंग गैंग पर बोले एलन मस्क और जेके रॉलिंग

इन्हीं ग्रूमिंग गैंग की रिपोर्ट देखकर मामले पर प्रतिक्रिया एलन मस्क से लेकर हैरी पॉटर को लिखने वाली जे के रॉलिंग तक ने दी है। एलन मस्क ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ब्रिटेन में तो सत्ता के सभी स्तरों के बहुत से लोगों को इसके लिए जेल में होना चाहिए। उन्होंने खुलेआम ये प्रतिक्रिया ब्रिटिश लेबर पार्टी की मंत्री रही जेस फिलिप्स को लेकर दी जिन्होंने एक समय में मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच का विरोध किया था। वहीं जेके रॉलिंग भी कहती हैं कि इस पूरे मामले में पुलिस का भ्रष्टाचार विश्वास से भी परे है। उन्होंने इस गैंग का नाम ग्रूमिंग गैंग रखे जाने पर भी सवाल उठाए।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के संदिग्धों पर कार्रवाई

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई एक विशेष पुलिस टास्कफोर्स द्वारा की गई, जिसे अप्रैल 2023 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा स्थापित किया गया था। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य बाल यौन शोषण और ग्रूमिंग से संबंधित मामलों की जाँच को बेहतर बनाना और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना था।

यह टास्कफोर्स इंग्लैंड और वेल्स के सभी 43 पुलिस बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और डेटा विश्लेषक शामिल हैं, जो ग्रूमिंग गैंग के मामलों की जाँच पहले भी कर चुके हैं। इस टास्कफोर्स की वजह से 4,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा चुकी है। 

‘मुस्लिम कट्टरपंथियों ने बहकाया, माफ कर दो’: हिंदू लड़कियों को रेप की धमकी देने वाला जहाँगीर अब जोड़ कर लगा रहा जय श्रीराम के नारे; देखिए Video

                                                                 साभार ट्वीट शॉट 
सोशल मीडिया पर हिंदुत्व की बात करने वालों के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथी अक्सर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते दिखते हैं। हाल में यही काम अजहान जहाँगीर नाम के बीटेक छात्र ने किया। अजहान ने सोशल मीडिया पर दो हिंदू लड़कियों को खुलेआम रेप की धमकियाँ दी और उनके लिए अश्लील भाषा का प्रयोग किया।

जब लोगों ने उसके कमेंट के स्क्रीनशॉट लेकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू किया तो अजहान घबरा गया और उसको अपना करियर बर्बाद होने का डर सताने लगा। इसके बाद उसने न केवल हाथ जोड़ हिंदुओं से माफी माँगी, बल्कि कहा कि वो सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहेगा।

अजहान ने उसका कमेंट वायरल होने के बाद एक वीडियो अपलोड की है। कैप्शन में लिखा है- “मुझसे गलती हो गई, मैं सभी हिंदुओं से माफी माँगता हूँ, मेरा करियर बर्बाद हो जाएगा।”

वीडियो में वो कहता नजर आया- “मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मैं हाथ जोड़कर श्रेया जी और प्रतीक्षा जी से माफी माँगता हूँ। मैंने अपने कौम के कुछ नफरती लोगों के बहकावे में आकर ये सब ट्वीट कर दिया था। मैं आगे से सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहूँगा।”

अजहान ने आगे कहा, “जिन लड़कियों को मैंने रेप धमकियाँ दीं उनसे मैं हाथ जोड़कर माफी माँगता हूँ। अपने कौम के कट्टरवाद लोगों से इन्फ्लुएंस होकर मैंने ये सब कह दिया था। मैं आगे से अपनी पढ़ाई पर ध्यान दूँगा। बाकी चीजों से कोसों दूर रहूँगा। जय श्रीराम। मुझे माफ कर दें।”

खबर में जोड़े गए स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि अजहान ने प्रतीक्षा और श्रेया नाम की लड़कियों के लिए कैसी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। बाद में जब हिंदुत्व नाइट नाम की एक नेटीजन ने इस मुद्दे को उठाया और पूछा कि ये लड़का अजहान जहाँगीर स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी में पढ़ता है। क्या सच में यूनिवर्सिटी ऐसे छात्रों को सपोर्ट करती हैं। अगर नहीं, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। ये लोग कैंपस में पढ़ने वाली महिलाओं के लिए भी खतरा है। इसी ट्वीट के बाद अजहान की वीडियो सामने आई।

उत्तर प्रदेश : अशांति फ़ैलाने वाले मोहम्मद जुबैर पर UP में FIR: आरोप- मुस्लिमों को भड़का कर डासना मंदिर पर करवाया हमला, यति नरसिंहानंद की हत्या की रची साजिश; आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए

यति नरसिंहानंद की रिहाई और मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की माँग को लेकर गाजियाबाद में प्रदर्शन (फोटो साभार: ऑपइंडिया)
गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर पर 4 अक्टूबर 2024, शुक्रवार के दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि यह भीड़ मंदिर में घुसने की कोशिश कर रही थी और उन्मादी नारे लगा रही थी। पुलिस ने किसी तरह मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। इस घटना से हिंदू समुदाय में गुस्सा फैल गया, और उन्होंने हिंसा भड़काने वालों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को इस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की जा चुकी है। हालाँकि, लोगों की माँग थी कि आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है।

भाजपा नेत्री डॉ. उदिता त्यागी, जो खुद को इस घटना की चश्मदीद और पीड़ित बता रही हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 7 सितंबर 2024 को दी गई इस शिकायत में उन्होंने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से कहा कि डासना मंदिर पर हमला एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को इस हमले के लिए मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और अरशद मदनी ने भड़काया था। इस हमले में बाहर से आए मुस्लिमों की भी संलिप्तता बताई गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

डॉ. उदिता का दावा है कि इस हिंसा के पीछे यति नरसिंहानंद गिरी की हत्या की साजिश थी। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद को 5 अक्टूबर को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। डॉ. उदिता ने माँग की है कि हमलावरों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनकी इस शिकायत पर मंदिर के अंदर मौजूद हिंदू समाज के दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं। ये वो लोग बताए जा रहे हैं जो हमले के समय डासना मंदिर के अंदर मौजूद थे।

इस शिकायत के बाद मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद के कवि नगर थाने में केस दर्ज हुआ है। यह केस भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 228, 299, 356(3) और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है।

डॉ. उदिता ने अपने वीडियो बयान में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यति नरसिंहानंद सरस्वती को रिहा करने और मोहम्मद जुबैर पर केस दर्ज करने सहित हमलावरों पर NSA न लगने की स्थिति में 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित की जाएगी। उदिता के मुताबिक, यह महापंचायत ऐतिहासिक होगी।

डॉ. उदिता ने पुलिस कमिश्नर को एक और शिकायत दी, जिसमें मोहम्मद जुबैर की कई कथित गतिविधियों का जिक्र किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जुबैर ने 10 हिंदूवादी लोगों की एक सूची बनाई है, जो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस सूची में उनका नाम भी शामिल है, और उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। उन्होंने नूपुर शर्मा केस का हवाला देते हुए कहा कि जुबैर उस मामले में 6 निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार था।

अवलोकन करें:- 

उत्तर प्रदेश : जब रूस से लौटे समाजवादी पार्टी यूथ विंग अध्यक्ष इंजीनियर दीपक त्यागी को लव जिहाद

डॉ. उदिता का मानना है कि अगर मोहम्मद जुबैर को जेल नहीं भेजा गया, तो वह कई हिंदुओं के जीवन के लिए खतरा बना रहेगा। डॉ. उदिता के अलावा, हिंदू रक्षा दल ने भी यति नरसिंहानंद की रिहाई की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मंदिर पर हमला करने वाली भीड़ पर सख्त कार्रवाई की माँग की। इस दौरान हिंदू संगठनों से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद रहे। ऑपइंडिया के पास इस ज्ञापन की प्रति मौजूद है।

अर्चना तिवारी ‘पत्रकार’ नहीं, उस पर एक्शन ले कश्मीर पुलिस, क्योंकि उससे बात करते ही बाहर आ जाता है कश्मीरियों का ‘जहर’ लेकिन यास्मीन खान की पत्रकारिता माशाअल्लाह!

                       यास्मीन खान और अर्चना तिवारी (फोटो साभार: दोनों पत्रकारों के सोशल मीडिया अकॉउंट)
जम्मू-कश्मीर में चल रहे विधानसभा चुनावों में इस समय कई पत्रकार ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इस दौरान वो जनता से कुछ सवाल करते हैं और बदले में जो जवाब आता है वो उस व्यक्ति विशेष की निजी राय होती है। ‘द राजधर्म’ की रिपोर्टर अर्चना तिवारी भी इस समय ग्राउंड पर ही हैं। वह लगातार कश्मीरी वोटरों से बात करते हुए उनकी राय अपने दर्शकों तक पहुँचा रही हैं।

इस रिपोर्टिंग के दौरान कभी हँसी-मजाक करते हुए कभी गंभीर रहते हुए अर्चना अपने सवाल करती हैं और सामने वाला शख्स उसका जवाब देता है। हाल में इसी सवाल-जवाब के क्रम में अर्चना तिवारी से एक मुश्ताक नाम का इस्लामी कट्टरपंथी टकरा गया। उसने खुलेआम कैमरे पर बोला कि अगर हिंदू उनकी जमीन पर आएँगे, रहेंगे, शराब पीएँगे तो वो लोग हिंदुओं को मारेंगे। इसके साथ उसने वीडियो में ये भी साफ-साफ कहा कि अगर उनके क्षेत्र में हिंदू मंदिर बना तो उन्हें (मुसलमानों को) उसे जलाना ही पड़ेगा।

इस वीडियो के पब्लिक होने के बाद कइयों ने इसे साझा करते हुए अपनी चिंता जताई और सोचने लगे कि 90 के दशक में ऐसी ही मानसिकता से भरे लोग कश्मीर में रहे होंगे इसलिए पंडितों का नरसंहार हुआ। ये सोच गलत भी नहीं जान पड़ती।

जब एक शख्स खुलेआम कैमरे पर इस तरह की बातें कर रहा है, अपनी नफरत दिखा रहा है तो सोचने वाली बात है कि एक हिंदू के मन में और क्या आ सकता है? अर्चना तिवारी ने अपनी वीडियो में बार-बार उस मुश्ताक को समझाना चाहा कि वो हिंदू हैं और उन्हें जब समस्या नहीं होती कि मुस्लिम रहें तो फिर मुस्लिमों को क्या परेशानी है।

अर्चना की बात सुन मुश्ताक एक बार नहीं, बार-बार यही दोहराता रहा कि वो मुसलमान है और उसे इस बात से प्रॉब्लम है कि कोई हिंदू मंदिर बने और हिंदू वहाँ पूजा पाठ करें।

मुश्ताक की वीडियो देखने के बाद जब कश्मीर में मुस्लिमों की कट्टर मानसिकता पर फिर सवाल उठने लगे तो इसे देख एक मुस्लिम महिला पत्रकार इससे बिदक गईं। महिला पत्रकार का नाम यास्मीन खान है। X पर मौजूद उनकी पब्लिक प्रोफाइल के बायो में लिखा है कि जामिया से पढ़ीं यास्मीन खान मुस्लिम मिरर, ग्रेटर कश्मीर, सलाम टीवी न्यूज, बतौर पत्रकार काम किया है और फिर ‘आवाज द वॉयस’ के लिए जम्मू-कश्मीर में रिपोर्ट कर रही हैं।

यास्मीन अर्चना तिवारी को पत्रकार नहीं मानतीं और चाहती हैं कि कश्मीर में ग्राउंड रिपोर्ट करने के लिए उन्हें जेल भेज दिया जाना चाहिए क्योंकि अर्चना की रिपोर्टिंग से कश्मीरियों का गलत चेहरा दुनिया के सामने आ रहा है। अपने ट्वीट में यास्मीन ने बिना अर्चना के नाम का उल्लेख करते हुए लिखा- “कश्मीर में एक व्यथित करने वाला प्रयास चल रहा है। एक यट्यूबर सड़कों पर उतरकर मासूम, कम-पढ़े लिखे लोगों से मंदिर, मस्जिद और शराब जैसे संवेदनशील मुद्दों पर उनकी विचार पूछ रही हैं। लोगों की समझ की कमी का फायदा उठाते हुए अपना नैरेटिव चला रही है। इससे हमारी कश्मीरियों को खतरा है। मेरा अनुरोध है कि श्रीनगर पुलिस ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तार करे और हमारे समुदाय को इस खतरे से बचाएँ।”

यास्मीन ने बड़ी चालाकी से अपने एक्स पर ये ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने अर्चना का नाम तो नहीं लिखा लेकिन जो कंटेंट का विवरण उन्होंने दिया है उससे साफ है कि वो द राजधर्म वाली अर्चना तिवारी और मुश्ताक के बीच हुई बातचीत का ही जिक्र कर रही हैं। ट्वीट में वह हिंदुओं का मंदिर जलाने की बात खुलेआम कहने वाले मुश्ताक को मासूम कह रही है वहीं दूसरी ओर चुप-चाप उसकी बात सुनने वाली अर्चना तिवारी के लिए कश्मीर पुलिस को उकसा रही हैं कि वो उन्हें गिरफ्तार करें।

हैरानी की बात ये है कि इतनी अनुभवी पत्रकार होने के बावजूद यास्मीन सही गलत में फर्क नहीं समझ पा रहीं। अगर कोई उनके इस रवैये को देख उन्हें निष्पक्ष पत्रकार न कहकर मजहब के काम करने वाली पत्रकार कहे तो क्या गलत होगा?

वायरल वीडियो देखने पर साफ पता चलता है कि मुश्ताक से अर्चना ने बस ये सवाल किए थे कि भाजपा की किन बातों के कारण वो लोग उन्हें वोट नहीं देंगे… ये सवाल तो कोई घुमा फिराकर नहीं पूछा गया था। मगर, इस सीधे से सवाल का जवाब में अगर हिंदू घृणा दिखाई जाए…तो इसमें अर्चना की गलती क्या है और क्यों उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

अपने ट्वीट पर तो उन्होंने कश्मीर में रिपोर्टिंग के दौरान उस कश्मीरी उमर की वीडियो भी डाली है जो भारतीय सेना के जवानों को हीरो समझता है, मानता है कि जवान देश की जनता के लिए शहीद होते हैं, जिसका फेवरेट क्रिकेटर विराट कोहली है।

उन्होंने उस बुजुर्ग व्यक्ति की भी वीडियो डाली है जो कहते हैं कि इतने सालों में अब कश्मीर में शांति दिखने लगी है।

अब इन लोगों की प्रतिक्रिया डालना अगर गलत नहीं है या उनसे पूछे सवाल गलत नहीं हैं तो फिर मुश्ताक से किए गए सवाल कैसे गलत हो सकते हैं या उस शख्स से किए गए सवाल कैसे गलत हो सकते हैं जो जवाब में बस ये बोले कि उन्हें हिंदू किसी कीमत पर नहीं चाहिए।

सवाल करना और जवाब पूछना… यही प्रक्रिया तो ग्राउंड पर रहते हुए हर पत्रकार फॉलो करता है। वो भी चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान तो खासकर लोगों के मन टटोले जाते हैं कि उन्हें किस पार्टी का क्या काम पसंद है क्या नहीं। इसमें गिरफ्तारी की बात कैसे आ गईं?

कहीं अपने आपको कश्मीरी पत्रकार कहने वाली यास्मीन खान को अर्चना तिवारी से समस्या इसलिए हो रही है क्योंकि उनकी रिपोर्टिंग के जरिए कट्टरपंथ में सने लोग और उनकी हिंदू घृणा से लबरेज विचार सामने आ रहे है।

यास्मीन कहती हैं कि अर्चना कश्मीर के भोले-भाले लोगों अपने जाल में फँसा रही हैं और उनसे ऐसी बातें उगलवा रही हैं। उन्हें ये चिंता नहीं है कि कश्मीर के लोगों के मन में हिंदुओं के प्रति कितना जहर घुला हुआ है, उनकी समस्या ये है कि अगर कश्मीर के कट्टरपंथी मुस्लिम अगर ऐसी सोच रखे भी हुए हैं तो इसका पता दुनिया को नहीं चलना चाहिए ताकि यास्मीन जैसे लोग पत्थरबाजों को मासूम कहने वाला अपना जमकर नैरेटिव चला सकें।

इन लोगों की यसी मानसिकता वजह है कि ये आज भी बातें कश्मीर और कश्मीरियत की करते हैं लेकिन कश्मीर की भलाई के लिए हटाए गए आर्टिकल 370 के फैसले को नहीं पचा पाए हैं। उनकी इसी मंशा को परखते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने मेनिफेस्टो में घोषणा भी की है कि अगर उनकी सरकार आती है तो वो अनुच्छेद 370 को लेकर आएँगे। शायद यास्मीन जैसों को लगता है कि अनुच्छेद 370 आने के बाद दोबारा से उनका दौर आ जाएगा।

हिंदुओं की आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान पर ‘झूठा’ ईशनिंदा का केस, गिरफ्तारी के बाद बात लिंचिंग तक पहुँची

                                                 नाजिया इलाही खान को मिल रही धमकियाँ
नूपुर शर्मा विवाद से लगातार मुस्लिम कट्टरपंथियों पर हमले करने वाली नाज़िया इलाही खान निशाने पर रही हैं। नूपुर विवाद पर सोशल मीडिया पर अकेली नाज़िया ही नहीं एक्स मुस्लिम भी लगातार कट्टरपंथियों और देश में तुष्टिकरण करने वालों को भी नहीं बख्शा। कई बार लिखा कि अनेकों मौलानाओं/इमामों और इस्लामिक विद्वानों को Jaipur Dialogue, Sach और NewsNation पर 'इस्लाम क्या कहता है' पर एक्स मुस्लिमों के आगे बेबस देखा। 
सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान को 10 सितंबर को ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया। उनके विरुद्ध शिकायत वकील नूर महविश ने दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा था कि नाजिया देश में सांप्रदायिक हिंसा और मजहबी तनाव पैदा करना चाहती हैं। महविश ने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 353 और 362 के तहत केस को दर्ज कराया था। इस मामले में अलीपुर कोर्ट में पेश होने के बाद नाजिया को भले जमानत मिल गई लेकिन कट्टरपंथियों की नफरत उनके लिए कम नहीं हुई।

नाजिया पर ये केस 3 अगस्त 2024 को दिए एक इंटरव्यू के बाद दर्ज हुआ था। अपने इंटरव्यू में उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि आखिर हिंदू नाम से मुस्लिम दुकान क्यों खोल रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि आखिर वो सलीम जो हिंदुओं को काफिर समझता है, उसने महादेव के नाम पर ढाबा क्यों खोला है।

जब पत्रकार ने उनसे कहा कि ये तो लोगों की इच्छा है कि वो क्या नाम रखेंगें, क्या नहीं… इस पर नाजिया ने कहा था कि फिर तो हिंदू भी अपनी मनमर्जी का नाम लिख सकते हैं।

नाजिया ने इस दौरान कुछ उदाहरण ऐसे दिए जिन्हें लेकर विवाद उपजा। उन्होंने कहा था कि अगर हिंदू कोई मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम रख लेंगे तो हल्ला मच जाएगा और गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा सिर तन से जुदा के नारे लगने लगेंगे।

वीडियो में हालाँकि सुना जा सकता है कि नाजिया सिर्फ मुस्लिम नाम लगाकर उदाहरण दे रही हैं उन्होंने कहीं पैंगबर मोहम्मद के बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम जोड़ सिर्फ पूछा कि क्या अच्छा लगेगा अगर हिंदू ऐसे नाम से दुकान खोल लें। मगर, इस्लामी कट्टरपंथी इसी बात से नाराज हो गए और मामला थाने तक पहुँच गया।

नाजिया ने अपनी वीडियो में थूक जिहाद का खतरा बताते हुए कहा था कि नाम बदलकर कारोबार करने की क्या जरूरत है जिसके मन में चोर होता है वो ही ऐसा करता है। इस दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ के फैसले का समर्थन किया था जहाँ दुकानों पर मालिक का असली नाम लिखने को कहा गया था।

इस इंटरव्यू के बाद इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें सोशल मीडिया पर गाली देने लगे। क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी अंजुम खान तक ने उनके खिलाफ जहर उगला। अपनी स्टोरी में अंजुम ने कहा- “अगर नबी के शान में गुस्ताखी होने पर आपको गुस्सा नहीं आता तो अपना ईमान मर चुका है और अगर आपका ईमान जिंदा है तो नाजिया की गिरफ्तारी की माँग करिए।”

इसी तरह अन्य मुस्लिम समूहों ने भी नाजिया के खिलाफ जहर उगला। नतीजा ये हुआ कि नाजिया को धमकियाँ आने लगीं। एजाज असलम नाम के मुस्लिम यूट्यूबर ने भी धमकी दी।

4 सितंबर को सोशल मीडिया पर नाजिया ने बताया जहाँ पूरा देश आरजी कर अस्पताल की डॉक्टर के लिए इंसाफ माँग रहा है, वहीं बंगाल के मुस्लिम उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कोलकाता पुलिस और टीएमसी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया था। 

उन्होंने ये भी बताया कि जब उन्हें अलीपुर कोर्ट ले जाया जा रहा था तब लोगों ने उनकी लिंचिंग की कोशिश की। उन्होंने कहा, “पहले मुझे पोर्ट एरिया गार्डन रीच पुलिस स्टेशन से झूठे ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया, फिर कोलकाता पुलिस के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन के अधिकारी की मिलीभगत से अलीपुर कोर्ट में लाखों मुसलमानों को इकट्ठा करके मेरी मॉब लिंचिंग की साजिश रची गई। मेरा गला काटने की साजिश में कई टीएमसी विधायक, मुस्लिम महिला टीएमसी नेता का सीधा हाथ है!”

‘हिन्दू काफिर और मुशरिक, बहुदेववादियों को मिलेगी सजा’: बिहार सरकार से फंडिंग पा रहे मदरसों में पढ़ाई जा रहीं पाकिस्तान में छपी किताबें; आखिर पाकिस्तानी किताबें कैसे आ रही हैं ?

बिहार सरकार से पैसे पा रहे कई मदरसों में पढ़ाया जा रहा है कि काफिर हिन्दुओं को मिलेगी सजा (चित्र - X/@KanoongoPriyank)
बिहार के कुछ मदरसों में मज़हबी कट्टरपंथ की शिक्षा दिए जाने का मामला सामने आया है। रविवार (18 अगस्त, 2024) को यह खुलासा राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने किया है। उन्होंने बताया कि इन मदरसों में हिन्दुओं को काफिर बताया जाता है। यहाँ पढ़ाई जाने वाली कई पुस्तकें तो पाकिस्तान में छपी पाई गईं हैं। खास बात तो ये है कि इन मदरसों को राज्य सरकार पैसे भी दे रही है। प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड को भंग करने की भी माँग उठाई है।

प्रियांक कानूनगो ने रविवार को अपने ‘X’ हैंडल पर कई स्क्रीनशॉट शेयर किए। इन स्क्रीनशॉट के साथ उन्होंने कैप्शन के तौर पर लिखा, “बिहार राज्य में सरकारी फ़ंडिंग से चलने वाले मदरसों में तालिमुल इस्लाम व ऐसी ही अन्य किताबें पढ़ाई जा रहीं हैं। इस किताब में ग़ैर इस्लामिकों को काफ़िर बताया गया है। इन मदरसों में हिंदू बच्चों को भी दाख़िला दिए जाने की सूचना मिली है परंतु बिहार सरकार संख्या अनुपात की अधिकारिक जानकारी नहीं दे रही है।”

प्रियांक कानूनगो ने बिहार मदरसा बोर्ड के हवाले से आगे बताया कि मदरसे का पाठ्यक्रम यूनिसेफ ने तैयार किया है। उन्होंने इसे यूनिसेफ और मदरसा बोर्ड द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण की पराकाष्ठा करार दिया है। बकौल प्रियांक बच्चों के संरक्षण के नाम पर दान और सरकारों से मिले अनुदान से कट्टरवादी पाठ्यक्रम बनाना यूनिसेफ़ का काम नहीं है। उन्होंने यह हरकत भारत के संविधान के खिलाफ बताते हुए मामले की जाँच और निगरानी संयुक्त राष्ट्र द्वारा कराए जाने की माँग उठाई है।”

प्रियांक कानूनगो के मुताबिक बिहार में मौजूद मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल अनेक किताबें पाकिस्तान में छपवाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि मदरसा किसी भी रूप में बच्चों की बुनियादी शिक्षा की जगह नहीं हैं। बच्चों की पढ़ाई स्कूलों में कराए जाने की वकालत करते हुए उन्होंने कम से कम हिन्दू बच्चों को मदरसरों में न पढ़ाने की अपील की है। अंत में प्रियांक कानूनगो ने मदरसा बोर्ड भंग करने की माँग की है। अपने इस ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ उनके कार्यालयों व संयुक्त राष्ट्र संघ को टैग किया है।

क्या छपा है किताबों में

प्रियांक कानूनगो ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं उसके ऊपर तालीम उल इस्लाम (इस्लाम की शिक्षा) हेडलाइन दी गई है। इसके पहले सवाल में ‘तुम्हें किसने बनाया है’ के जवाब में लिखा है ‘अल्लाह ने मुझे और दुनिया की हर चीज बनाई’। एक अन्य सवाल था कि अल्लाह ने दुनिया कैसे बनाई जिसके जवाब में लिखा गया है कि अपनी ताकत और हुक्म से। जो अल्लाह को नहीं मानते उन्हें इस किताब में ‘काफिर’ और किसी और को पूजने वाले लोगों को मुशरिक बताया गया है।
इसी किताब में एक और सवाल कर के पूछा गया है कि क्या बहुदेववादी (एक से ज्यादा देवताओं को मानने वाले) मोक्ष को प्राप्त होते हैं? इसके जवाब में लिखा गया है कि ‘कभी नहीं’। साथ ही कहा गया है कि बहुदेववादियों को सजा मिलती है। इसके अलावा किताबों के कई पन्नों पर इस्लामी प्रतीक छपे हुए हैं। इन प्रतीकों में सऊदी अरब की मस्जिद अल नवाबी भी शामिल है।

उत्तर प्रदेश : ‘आज बांग्लादेश है, कल भारत होगा’: महताब अंसारी ने शेयर किया भीड़ से घिरी चीखती महिला का वीडियो; क्या 2014 में अगर मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते भारत इस्लामिक राष्ट्र बन गया होता? देखिए वीडियो

                  आज बांग्लादेश कल भारत जैसी रील शेयर करने वाला महताब मुज़फ्फरनगर में गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में एक युवक ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में एक महिला को चीखते हुए सुना जा सकता है। वीडियो शेयर करने का आरोप महताब अंसारी पर लगा है। उसने लिखा कि जो बांग्लादेश में हुआ वो भारत में होगा। हिन्दू संगठनों ने महताब पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई। रविवार (11 अगस्त, 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए महताब को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर के थाना क्षेत्र भोपा का है। यहाँ के गाँव तिस्सा में महताब अंसारी नाम का युवक रहता है। आरोप है कि महताब ने 10 अगस्त (शनिवार) को अपने फेसबुक पर एक आपत्तिजनक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में कुछ लोगों से घिरी एक महिला बाहर चीख रही है। वहीं घर के अंदर से कोई व्यक्ति उस घटनाक्रम का वीडियो बना रहा है। जिन लोगों से महिला घिरी है उनके हाथों में हथियार नजर आ रहे हैं। आसपास कुछ बच्चों के भी रोने की आवाज बीच में सुनाई दे रही है।

मुज़फ्फरनगर के पत्रकार समर ठाकुर ने रविवार (11 अगस्त, 2024) को इस वीडियो को अपने ‘@SudarshanTvMzn’ वाले हैंडल से ‘X’ प्रोफ़ाइल पर शेयर किया। मुज़फ्फरनगर पुलिस को टैग करते हुए उन्होंने लिखा, “बांग्लादेश का यह वीडियो मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र से सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया बताया जा रहा है। जिसमें दर्शाया गया है कि आज जो बांग्लादेश में हो रहा है कल भारत में होगा।” वीडियो के कैप्शन में मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा हुआ है कि ‘आज बांग्लादेश है, कल भारत होगा।’

मुज़फ्फरनगर पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज कर के गिरफ्तारी कर ली गई है। वहीं स्वामी यशवीर ने बताया कि पहले आरोपित पर हल्की धाराएँ लगा कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया लेकिन जब आंदोलन की चेतावनी दी गई तो पुलिस ने कड़ी धाराओं में कार्रवाई की। स्वामी यशवीर ने एलान किया था कि अगर महताब अंसारी पर गंभीर धाराओं में एक्शन नहीं हुआ तो वो आरोपित के घर तक जाएँगे।

उत्तर प्रदेश : ‘मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी…’: बरेली के हसीब अंसारी ने WhatsApp स्टेट्स लगा कर किया मौलवियों और फिरकों का जिक्र


उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में भड़काऊ व्हाट्सएप्प स्टेट्स लगा कर माहौल खराब करने का मामला सामने आया है। यहाँ हिन्दू संगठनों ने हसीब अंसारी नाम के एक युवक की शिकायत पुलिस से की है। स्टेट्स में हसीब ने मुस्लिमों के एकजुट हो जाने के बाद सभी के काबू से बाहर हो जाने जैसी बातें लिखी हुई हैं। हसीब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठ रही है। शनिवार (3 अगस्त, 2024) को पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र नवाबगंज का है। यहाँ के रहने वाले हसीब अंसारी ने शनिवार को अपने व्हाट्सएप्प पर भड़काऊ स्टेटस लगाया। इस में हसीब ने लिखा, “मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी रोक नहीं मिलेगा। शुक्र मनाओ कि मुसलमान फिरके-फिरके में पड़े हुए हैं और ये मौलवी इन्हें एक नहीं होने दे रहे हैं।” हसीब अंसारी ने इस स्टेट्स के ऊपर बड़े-बड़े शब्दों में लिख कर लोगों से इसे हर हाल में शेयर करने की गुजारिश भी की है।

हसीब अंसारी की इस हरकत को ‘कट्टर हिन्दू गौ सेवक बरेली उत्तर प्रदेश’ नाम के हैंडल ने अपने X प्रोफ़ाइल @Surenda83898725 से शेयर किया है। उन्होंने इस हरकत को माहौल को खराब करने वाली बताया और बरेली पुलिस को टैग करते हुए हसीब अंसारी पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है। बरेली पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी नवाबगंज को निर्देशित किया जा चुका है।

जिस स्टेट्स को हसीब अंसारी ने अपने व्हाट्सएप पर लगाया है उसके बैकग्राउंड में किसी मज़हबी इबादतगाह के आगे कुछ लोग खड़े दिख रहे हैं। एक लाल रंग का झंडा भी दिखाई दे रहा है। बैकग्राउंड में दिख रहा दृश्य कहाँ और कब की घटना है इस बारे में अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। बरेली के VHP कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने जानकारी दी कि हसीब अंसारी ने मौलाना वाली पढ़ाई कर रखी थी, और पूर्व में मौलाना वाला कार्य भी कर चुका है।

उत्तर प्रदेश : लड़की के कपड़े उतारते इमाम का Video… कहा – अल्लाह से करो तौबा वरना तुम्हें मुसलमान मार देंगे

  लड़की से रेप की कोशिश और तौबा न करने पर कत्ल की धमकी देते हुए रामपुर की मस्जिद के इमाम का वीडियो वायरल
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में साल भर पहले हिन्दू धर्म में घर वापसी करने वाली मुस्लिम लड़की ने अपने रिश्तेदारों पर गैंगरेप की FIR दर्ज करवाई है। इसी के साथ पीड़िता ने रामपुर शहर के बेगम बाग़ इलाके में पड़ने वाली एक मस्जिद की भी शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है। इस मस्जिद में न सिर्फ छोटी बच्चियों के गैंगरेप बल्कि हथियारों की तस्करी होने का भी आरोप लगाया गया है। मस्जिद का इमाम रईस बताया जा रहा है जिसके कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

इन वीडियो में इमाम रईस कथित तौर पर न सिर्फ हथियारों और अश्लील किताबों के आगे बैठा नजर आ रहा है बल्कि वो ‘घर वापसी’ करने वाली लड़की को अल्लाह का डर भी दिखा रहा है।

आरोप – अफसरों में औरतें सप्लाई करके कमाई

सोशल मीडिया के माध्यम से ऑपइंडिया को मिले कई वीडियो में से एक में कथित तौर पर रईस इमाम नग्न हालत में किसी लड़की से बात करता दिखाई दे रहा है। उसके आगे कुछ अवैध हथियार और कारतूस बिखरे दिखाई दे रहे हैं। सामने कंडोम और अश्लील किताबें भी दिखाई दे रहीं हैं जिसमें मॉडल्स की अधनंगी तस्वीरें छपी हुई हैं। इस वीडियो में मौलाना बोल रहा, “ये सप्लाई करते हैं औरतें। ले कर जाते हैं अफसरों में। इसी तरीके से ये पैसा कमा रहे हैं। बाकी इन्होंने ही मर्डर करा था ये तो सबको पता है। सारी दुनिया जानती है। मेरे कहने का काम है, मैं कह दूँगा। जिस जगह जरूरत पड़े वहाँ मुझ से कहलवा लियो।”
इसी दौरान स्पीकर पर चल रहे फोन में कोई पूछता है कि क्या इमाम रईस कोर्ट में बोलेगा? जवाब में रईस ने 2 बार कहा कि वह ये तमाम बातें कोर्ट में भी बोलने को तैयार है। एक अन्य वीडियो में मौलाना के आगे बैठी लड़की ने मस्जिद में बच्चियों के रेप की बात कही तो इमाम रईस ने कहा कि वो सब कुछ बताने को तैयार है। वह किसी चमरौआ गाँव में हुई हत्या और फिर जमीन कब्ज़े की बात भी उसके द्वारा कही जा रही है। रोते हुए वीडियो बना रही लड़की ने अपनी माँ के साथ 14 साल तक रेप की वजह पूछी तो इमाम रईस बोला, “पहले कह देती तो मैं सब बता देता। किस जगह मैंने साथ नहीं दिया तुम्हारा।”
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि मर्डर उसके सगे मामा का हुआ था। यह हत्या 350 बीघे जमीन को कब्ज़ा करने के लिए हुई थी। पीड़िता ने हत्या का आरोपित अपने मृतक मामा के चचेरे भाइयों पर लगा था जिसमें मुख्य आरोपित इम्तियाज है। आरोप है कि लड़की के मामा को मार कर फिर उसकी माँ को 14 वर्षों तक बंधक बनाए रखा गया। इस दौरान इमाम रईस वाली मस्जिद में ही लड़की की माँ का 5 साल तक बलात्कार किए जाने का आरोप है। पीड़िता के पिता की साल 2012 में ही मौत हो चुकी थी।

धमकी – ‘तौबा करो वरना मुसलमान मार देंगे तुम्हें’

ऑपइंडिया को मिले एक अन्य वीडियो में पीड़िता और इमाम रईस आमने-सामने बैठे हैं। पीड़िता ने पूछा कि क्या मुस्लिम उसे मार देंगे? इमाम ने कहा, “हाँ, बिलकुल मार देंगे। मकसद यही है कि अल्लाह से तौबा करो। ये करो कि अल्लाह मुझ से जो गलती हो गई उसे माफ़ कर देना। धोखे से या किसी डर की वजह से मैं बनी इसलिए अल्लाह मुझे माफ़ कर दे। कबर का अजीब बहुत सख्त है। अल्लाह बन्दों पर रहम करने वाला है।”

मुस्लिमों से छिप रहा वसीम रिज़वी

वीडियो बना रही लड़की ने आगे पूछा कि जो हिन्दू पैदा हुए हैं क्या अल्लाह उन्हें भी माफ़ नहीं करेगा? इस पर इमाम रईस ने जवाब दिया, “उन्हें क्यों करेगा माफ़? जो कलमे का शरीक नहीं है उसे कोई भी हो। ऐसे-ऐसे लोगों का क़त्ल कर दिया गया है जिनके डंके बजते थे।” इमाम रईस ने नाम लिए बिना वसीम रिज़वी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ का वो शिया मुस्लिमों के डर से छिपा फिर रहा है जो कहता था कि मैं तो हिन्दू हो गया। इमाम रईस इसी वीडियो में आगे बोला, “जो कलमा पढ़ा होगा वो दोजख (नरक) में ज़रूर जाएगा लेकिन अल्लाह निकाल देगा उसमें से उन्हें।”
लड़की ने सामने बैठे इमाम रईस से पूछा कि अगर वो पूजा कर ले तो क्या होगा? इस सवाल पर इमाम बोला, “जब अल्लाह ने मुसलमान बनाया है तो उसमें हर जगह फतवा दिया है कि कत्ल गैर-मुस्लिमों का क़त्ल कर दो। ये फतवा निकला हुआ है। ये हदीस है।”

दूर-दूर की बच्चियाँ हैं मदरसे में

इमाम रईस का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में इमाम किसी मदरसे का जिक्र कर रहा है। रईस बोला कि उसमें दूर-दूर से आईं 800-900 बच्चियाँ हैं। जब वीडियो बना रही लड़की पूछती है कि उन बच्चियों को बाहर क्यों नहीं निकलने दिया जाता तो रईस बोला कि अगर ये छूट मिली तो कई भाग जाएँगी। इमाम रईस ने यह भी दावा किया कि पहले एकाध केस भागने के हो गए तब से अंदर से बहुत सख्ती कर दी गई है। बकौल इमाम, लड़कियों को आपस में साथ बैठने और बोलने भर की छूट है लेकिन बाहर निकलने पर मनाही है।
इमाम रईस इसी वीडियो में आगे कह रहा है कि भारत में अलीगढ़ के बाद ऐसा दूसरा मदरसा यही है। उसने बताया कि यहाँ से फ़ाज़िला हो कर लड़कियों को अलीगढ़ भेजा जाता है। दावा किया गया कि रामपुर में बने इस मदरसे में कम से कम 200 कमरे हैं और सबमें लड़कियाँ भरी हैं। इमाम रईस ने विकल्प के तौर पर यह भी बताया कि अगर लड़की मदरसे न रहना चाहे और सिर्फ वहाँ पढ़ने के मकसद से आए तो वो किसी मकसूद भाई के यहाँ उसके रहने का इंतजाम करवा देगा। इमाम रईस ने अपनी फीस 6 हजार रुपए बताया।
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि यह मदरसा रामपुर जिले के सिविल लाइंस क्षेत्र में मौजूद है। पीड़िता ने यह भी कहा कि वह चाहती है कि वहाँ से बच्चियों को मुक्त करवाया जाए क्योंकि वो इमाम रईस जैसे कई लोगों के चंगुल में फँसी हुई हैं।

रेप की कोशिश करता दिखा इमाम

ऑपइंडिया को 2 अन्य वीडियो भी मिले हैं। इन दोनों वीडियो में इमाम रईस किसी लड़की से रेप का प्रयास करता दिख रहा है। वह नींद में लग रही किसी लड़की के कपड़े उतार कर पहले उसे नंगा करता है और बाद में उस से रेप की कोशिश करता है। थोड़ी देर बाद एक अन्य वीडियो में इमाम रईस पाजामा बाँधने की कोशिश करता दिख रहा है। वह पॉलीथिन में कुछ छिपाने की भी कोशिश करता दिख रहा है। एक अन्य वीडियो में इमाम रईस को तमाम साम्प्रदायिक बातों वाली वीडियो भी स्क्रॉल कर के सुनते देखा जा सकता है।
अवलोकन करें:- 
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि उसकी माँ को इमाम रईस ने अपनी मस्जिद में लगभग 5 साल तक रखा था। आरोप है कि इस दौरान उसने कई लोगों के साथ मिल कर पीड़िता की माँ का गैंगरेप किया था। पीड़िता का दावा है कि ये तमाम वीडियो फरवरी 2024 महीने के हैं। बकौल पीड़िता वह रिश्तेदारों और इमाम की वजह से 14 साल तक बंधक बन कर गैंगरेप झेली अपनी माँ को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही है। (साभार: राहुल पाण्डेय,  http://www.opindia.com)