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सावन में दिल्ली में नहीं बिकेगा मांस, सफाई से लेकर ट्रैफिक का रखा जाएगा ध्यान: दिल्ली सरकार का ऐलान

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हिंदू कैलेंडर के पवित्र महीने सावन के दौरान श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल लेकर विभिन्न मंदिरों में भगवान शिव को चढ़ाने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं। इस साल कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू होगी। 11 जुलाई से 23 जुलाई तक चलने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान, उत्तर प्रदेश की तर्ज़ पर अब दिल्ली में भी मीट की दुकानें बंद रहेंगी। इस बात की जानकारी मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने दी।  मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा कि इनमें से ज़्यादातर मीट की दुकानें वैसे भी अवैध हैं और कानून के मुताबिक इन्हें नहीं चलना चाहिए। लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान इन्हें खास तौर पर बंद रखा जाएगा। 

दिल्ली में सावन की काँवड यात्रा को लेकर बड़ी तैयारी चल रही है। 11 जुलाई 2025 से 31 जुलाई 2025 तक होने वाली इस यात्रा के दौरान दिल्ली में मीट और मछली की सभी दुकानें बंद रहेंगी। यह फैसला दिल्ली सरकार और नगर निगम ने लिया है।

दिल्ली के संस्कृति और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी ऐसा ही कदम उठाया गया है।

सरकार काँवडियों के स्वागत के लिए भव्य द्वार बना रही है और फूलों से स्वागत किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य मंत्री व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा करेंगे। सफाई और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।

इस बार काँवड समितियों को पहली बार आर्थिक मदद (50 हजार से 10 लाख रुपए तक) और 1200 यूनिट तक मुफ्त बिजली भी मिलेगी। दिल्ली से लगभग 2.5 करोड़ काँवड यात्री गुजरते हैं, जिनके लिए स्वास्थ्य, पानी और बिजली जैसी सुविधाएँ हर शिविर में होंगी।

हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह प्रतिबंध केवल तीर्थयात्रा मार्ग पर पड़ने वाली मांस की दुकानों पर ही लागू होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि इसको लेकर मांग की जरूरत नहीं है। कांवड़ यात्रा के दौरान इन्हें विशेष रूप से बंद रखा जाएगा। ये सभी अवैध दुकानें हैं और हम कांवड़ यात्रा के दौरान इन्हें संचालित करने की अनुमति नहीं दे सकते। 

पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि राज्य में कांवड़ यात्रा मार्ग पर कोई मांस न बेचा जाए। 26 जून को सरकार ने यह भी आदेश दिया कि तीर्थयात्रा मार्ग पर सभी भोजनालयों को अपने मालिकों के नाम प्रदर्शित करने होंगे। 

दूसरी ओर जंगपुरा से भाजपा विधायक तरविंदर सिंह मारवाह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली में कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी शराब और मांस की दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करने का अनुरोध किया था। विधायक ने कहा था कि शराब और मांस की दुकानों पर अस्थायी प्रतिबंध यात्रा की पवित्रता का सम्मान करेगा और किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोकेगा।  

हिंदुओं की आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान पर ‘झूठा’ ईशनिंदा का केस, गिरफ्तारी के बाद बात लिंचिंग तक पहुँची

                                                 नाजिया इलाही खान को मिल रही धमकियाँ
नूपुर शर्मा विवाद से लगातार मुस्लिम कट्टरपंथियों पर हमले करने वाली नाज़िया इलाही खान निशाने पर रही हैं। नूपुर विवाद पर सोशल मीडिया पर अकेली नाज़िया ही नहीं एक्स मुस्लिम भी लगातार कट्टरपंथियों और देश में तुष्टिकरण करने वालों को भी नहीं बख्शा। कई बार लिखा कि अनेकों मौलानाओं/इमामों और इस्लामिक विद्वानों को Jaipur Dialogue, Sach और NewsNation पर 'इस्लाम क्या कहता है' पर एक्स मुस्लिमों के आगे बेबस देखा। 
सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान को 10 सितंबर को ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया। उनके विरुद्ध शिकायत वकील नूर महविश ने दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा था कि नाजिया देश में सांप्रदायिक हिंसा और मजहबी तनाव पैदा करना चाहती हैं। महविश ने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 353 और 362 के तहत केस को दर्ज कराया था। इस मामले में अलीपुर कोर्ट में पेश होने के बाद नाजिया को भले जमानत मिल गई लेकिन कट्टरपंथियों की नफरत उनके लिए कम नहीं हुई।

नाजिया पर ये केस 3 अगस्त 2024 को दिए एक इंटरव्यू के बाद दर्ज हुआ था। अपने इंटरव्यू में उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि आखिर हिंदू नाम से मुस्लिम दुकान क्यों खोल रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि आखिर वो सलीम जो हिंदुओं को काफिर समझता है, उसने महादेव के नाम पर ढाबा क्यों खोला है।

जब पत्रकार ने उनसे कहा कि ये तो लोगों की इच्छा है कि वो क्या नाम रखेंगें, क्या नहीं… इस पर नाजिया ने कहा था कि फिर तो हिंदू भी अपनी मनमर्जी का नाम लिख सकते हैं।

नाजिया ने इस दौरान कुछ उदाहरण ऐसे दिए जिन्हें लेकर विवाद उपजा। उन्होंने कहा था कि अगर हिंदू कोई मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम रख लेंगे तो हल्ला मच जाएगा और गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा सिर तन से जुदा के नारे लगने लगेंगे।

वीडियो में हालाँकि सुना जा सकता है कि नाजिया सिर्फ मुस्लिम नाम लगाकर उदाहरण दे रही हैं उन्होंने कहीं पैंगबर मोहम्मद के बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम जोड़ सिर्फ पूछा कि क्या अच्छा लगेगा अगर हिंदू ऐसे नाम से दुकान खोल लें। मगर, इस्लामी कट्टरपंथी इसी बात से नाराज हो गए और मामला थाने तक पहुँच गया।

नाजिया ने अपनी वीडियो में थूक जिहाद का खतरा बताते हुए कहा था कि नाम बदलकर कारोबार करने की क्या जरूरत है जिसके मन में चोर होता है वो ही ऐसा करता है। इस दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ के फैसले का समर्थन किया था जहाँ दुकानों पर मालिक का असली नाम लिखने को कहा गया था।

इस इंटरव्यू के बाद इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें सोशल मीडिया पर गाली देने लगे। क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी अंजुम खान तक ने उनके खिलाफ जहर उगला। अपनी स्टोरी में अंजुम ने कहा- “अगर नबी के शान में गुस्ताखी होने पर आपको गुस्सा नहीं आता तो अपना ईमान मर चुका है और अगर आपका ईमान जिंदा है तो नाजिया की गिरफ्तारी की माँग करिए।”

इसी तरह अन्य मुस्लिम समूहों ने भी नाजिया के खिलाफ जहर उगला। नतीजा ये हुआ कि नाजिया को धमकियाँ आने लगीं। एजाज असलम नाम के मुस्लिम यूट्यूबर ने भी धमकी दी।

4 सितंबर को सोशल मीडिया पर नाजिया ने बताया जहाँ पूरा देश आरजी कर अस्पताल की डॉक्टर के लिए इंसाफ माँग रहा है, वहीं बंगाल के मुस्लिम उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कोलकाता पुलिस और टीएमसी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया था। 

उन्होंने ये भी बताया कि जब उन्हें अलीपुर कोर्ट ले जाया जा रहा था तब लोगों ने उनकी लिंचिंग की कोशिश की। उन्होंने कहा, “पहले मुझे पोर्ट एरिया गार्डन रीच पुलिस स्टेशन से झूठे ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया, फिर कोलकाता पुलिस के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन के अधिकारी की मिलीभगत से अलीपुर कोर्ट में लाखों मुसलमानों को इकट्ठा करके मेरी मॉब लिंचिंग की साजिश रची गई। मेरा गला काटने की साजिश में कई टीएमसी विधायक, मुस्लिम महिला टीएमसी नेता का सीधा हाथ है!”

काशी विश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर परिसर के दुकानदारों को लगाना होगा नेम प्लेट: बिहार के बोधगया की दुकानों में खुद ही लगाया बोर्ड

आज कई राज्यों द्वारा योगी जैसा मुख्यमंत्री की मांग करने का कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी सख्त फैसले को लेने में हिचकाते नहीं। कितने सालों पहले कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जनहित में कानून बनाकर अलमारी में सजाकर रखा हुआ था। अगर यह कानून उसी समय लागु हो गया होता, आज ये चीखा-चिल्ली नहीं होती। सब कुछ सामान्य रहता, क्योकि चीखा-चिल्ली करने वाली सभी पार्टियां प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यूपीए सरकार में शामिल थे। इस एपिसोड में एक बात खुलकर सामने आ गयी कि हिन्दुओं और हिन्दू देवी-देवताओं को अभद्र बोलने वाले उन्हीं के नाम से धंधा कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।    

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग में पड़ने वाले दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के योगी सरकार के निर्देश के बाद भले विपक्षी दल इस पर विवाद कर रहे हों, लेकिन यह नियम धीरे-धीरे पूरे उत्तर भारत में लागू हो रहा है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार के बाद यह मध्य प्रदेश के उज्जैन और बिहार के गया आदि जगहों पर नेम प्लेट लगने लगे हैं। इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने की माँग उठ रही है।

जब यूपीए ने अपने कार्यकाल में कानून बनाया है फिर इसे केवल मन्दिरों तक सीमित रखने की बजाए पूरे भारत में लागू करना चाहिए। योगी सरकार द्वारा विपक्ष द्वारा चील-कौओं की तरह मुस्लिम विरोधी बताकर चीखा-चिल्ली देख लगता है कि यूपीए सरकार ने शायद मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक इस कानून को लागु नहीं किया। यानि पिछली कांग्रेस समर्पित यूपीए भी असलियत जानती थी। आज I.N.D.I. गठबंधन में भी लगभग वही सभी पार्टियां है, जो यूपीए में शामिल थीं।  

उज्जैन में नेम प्लेट का आदेश

उज्जैन नगर निगम ने शनिवार (20 जुलाई 2024) को दुकान मालिकों को अपनी दुकानों के बाहर अपना नाम और मोबाइल नंबर की प्लेट लगाने का निर्देश दिया। उज्जैन के मेयर मुकेश ततवाल ने कहा कि इस आदेश का पहली बार उल्लंघन करने पर 2,000 रुपए और दूसरी बार 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। उन्होंने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
ततवाल ने कहा कि उज्जैन की मेयर-इन-काउंसिल ने 26 सितंबर 2002 को दुकानदारों को अपना नाम प्रदर्शित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इसे आपत्तियों और औपचारिकताओं के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया था। अब इस प्रस्ताव को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेयर ने कहा कि यह कदम एमपी दुकान स्थापना अधिनियम या गुमास्ता लाइसेंस में निहित है।
मेयर ने कहा, “उज्जैन एक धार्मिक और पवित्र शहर है। लोग यहाँ धार्मिक आस्था के साथ आते हैं। उन्हें उस दुकानदार के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे वे सामान खरीद रहे हैं। अगर कोई ग्राहक असंतुष्ट है या उसके साथ धोखा हुआ है तो दुकानदार के बारे में जानकारी होने से उसकी समस्या हल हो सकती है।”
वहीं, इंदौर से भाजपा विधायक रमेश मेंदोला ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुकानों के बाहर दुकानदार का नाम लिखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हर छोटा-बड़ा व्यक्ति अपना नाम बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। उन्होंने इसे आस्था के साथ-साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के दुकानों पर भी नेम प्लेट

वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ धाम के आसपास स्थित दुकानदारों को भी अपने नाम का बोर्ड लगाना होगा। गोदौलिया में शनिवार (20 जुलाई 2024) को पुलिस ने दुकानदारों से बात की और उन्हें अपना नाम लिखने के लिए कहा। काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र में लगभग 500 दुकानें हैं। इन दुकानों में लगभग 15 प्रतिशत दुकानें मुस्लिमों की हैं।
वहीं, राष्ट्रीय हिंदू दल के पदाधिकारियों ने भी दुकानों पर भगवा झंडा और आधार कार्ड रखने के लिए कहा है। उधर, उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने मंदिर के बाहर दुकानदारों को नाम लिखने की अपील की है। बता दें कि सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार लगभग 1 करोड़ लोगों के आने के अनुमान है।
प्रशासन के मुताबिक, इस आदेश के बाद अब मंदिर के बाहर स्थित दुकानदार श्रद्धालुओं को गुमराह करके पूजा सामग्री की बिक्री नहीं कर पाएँगे। दुकान मालिक का नाम लिखकर किराएदार दुकान संचालित नहीं कर सकेंगे। उन्हें बाहर अपना असली नाम-पता लिखना होगा। मंदिर के सामने देवी-देवताओं के नाम लिखकर गैर-धर्म के दुकानदार व्यवसाय करते मिले हैं। पुलिस ने उन्हें नोटिस थमाया है।
मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा, “यह आदेश सरकार के नहीं हैं। पुलिस विभाग ने दुकानदारों की पहचान के लिए सख्ती की है। सोशल मीडिया पर अक्सर ये दिखता है कि एक वर्ग के लोग मांस भी खा रहे हैं और शाकाहारी खाने का सामान भी बेच रहे हैं। ऐसे भी वीडियो देखने में आए हैं कि खाने पर पहले थूकते हैं, फिर बेच रहे हैं। ऐसे में एक वर्ग, जो सामान खरीद रहा है, उसकी आस्था को चोट पहुँचती है।”

बिहार के गया स्थित महाबोधि मंदिर के दुकानदारों ने लगाए नेम प्लेट

उत्तर प्रदेश में शुरू हुए इस नियम को लेकर भले ही विपक्ष राजनीति करे, लेकिन श्रद्धालुओं और दुकानदारों ने इसे सही बताया है। यही कारण है कि बिहार के गया स्थित प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के बाहर स्थित दुकानदारों ने अपने मन से दुकानों पर नेम प्लेट लगा ली है। हिंदू और मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी स्वेच्छा से फल की दुकानों के आगे ये नेमप्लेट लगा रखा है।
अवलोकन करें:-
सावन के महीने में बोधगया के महाबोधि मंदिर में भी काँवड़िया पहुँचते हैं और गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव पर जल और बेल पत्र चढ़ाते है। इसको देखते हुए स्थानीय दुकानदारों ने आपसी सहमति से दुकान के आगे नेम प्लेट लगाने का फैसला लिया है। यहाँ पर कुछ फल दुकानदार तो बीते 20 सालों से अपने दुकान पर अपना नाम लिखे हैं। उनका कहना है कि इससे उनके व्यापार पर फर्क नहीं पड़ता।