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विपक्ष में हिन्दुओं को सताया गज़वा-ए-हिन्द का डर; आगरा का धर्मांतरण गिरोह निकला ‘छांगुर पीर’ से भी ज्यादा खतरनाक, ISIS के पैटर्न पर करता था ब्रेनवॉश: PFI से लेकर PAK तक कनेक्शन, 6 राज्यों में छापे के बाद 10 गिरफ्तार

                               धर्मांतरण गैंग के पकड़े गए 10 लोग, उत्तर प्रदेश पुलिस ने 6 राज्यों से इन्हें दबोचा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस जिस तरह मुस्लिम कट्टरपंथियों के धर्मातरण गैंग का पर्दाफाश होने से समस्त विपक्ष में भी बड़ी हलचल शुरू हो चुकी है। सिर्फ सत्ता के लिए किये जा रहे मुस्लिम तुष्टिकरण पर सोंचने पर मजबूर हो रहे हैं। 
जिस तरह लव जिहाद और इस्लामीकरण गैंग सामने आ रहे हैं किसी मुस्लिम कट्टरपंथी और गंगा-जमुनी तहजीब के पाखंडी नारों से हिन्दुओं को गुमराह करने वालों की बोलती बंद है। जिससे विपक्ष में सनातन प्रेमी सतर्क होकर अंदरखाने योगी और मोदी के पीछे जाने का मन बना रहे हैं। उनमे मंथन शुरू हो गया कि अगर इस नाजुक समय पर योगी-मोदी का साथ नहीं दिया देश में हिन्दुओं का अस्तित्व घोर संकट में पड़ जायेगा। हमारी आने वाली पीढ़ियां पानी पी-पीकर हमें धिक्कारेंगी।   

उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाल ही में ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में छह राज्यों से 10 लोग गिरफ्तार हुए। यह नेटवर्क लव जिहाद के जरिए धर्मांतरण कराने, विदेशों से फंडिंग हासिल करने और कट्टरता फैलाने का काम कर रहा था। पुलिस मानती है कि यह तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठन इस्तेमाल करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें कनाडा, UAE और अमेरिका से फंडिंग मिलती थी। यह मामला आगरा की दो लापता बहनों की जाँच से सामने आया।

जाँच में 7 लोगों के खिलाफ सबूत मिले। उनके खिलाफ वारंट जारी हुए। फिर पुलिस ने 11 टीमें छह राज्यों में भेजीं। आगरा पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। यह गिरोह बलरामपुर के छांगुर पीर वाले गैंग से भी खतरनाक बताया जा रहा है।

आगरा पुलिस कमिश्नर ने जानकारी दी कि इस गिरोह में हर सदस्य का काम तय था। कुछ लोग ब्रेनवॉश करते थे। कुछ पैसा जमा करते थे और विदेशों से आए फंड को दूसरों तक पहुँचाते थे। कुछ सदस्य गिरोह के लोगों को छिपने की जगह देते थे। कुछ कानूनी सलाह देते थे और कुछ नए फोन व सिम का इंतजाम करते थे।

कैसे शुरू हुई जाँच?

मार्च 2025 में आगरा के सदर बाजार थाने में दो सगी बहनों के गायब होने की शिकायत दर्ज की गई थी। इनमें एक की उम्र 33 और एक की 18 साल थी। शुरुआत में यह गुमशुदगी का मामला था, लेकिन बाद में इसे अपहरण में बदल दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, दोनों बहनें अपना फोन नहीं ले गई थीं और सोशल मीडिया पर अपने असली नामों से एक्टिव नहीं थी, इसलिए पुलिस के लिए उनका पता लगाना मुश्किल था। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त ने इस ऑपरेशन की कमान संभाली।

I’D से खुली धर्मांतरण की पोल

पुलिस को परिवार से जो भी जानकारी प्राप्त थी उसी के आधार पर साइबर सेल ने काम करना शुरू किया था। उन्हें इंस्टाग्राम पर एक ‘कनेक्टिंग रिवर्ट आईडी‘ मिली। आईडी की जब जाँच की गई, तब कोलकाता लोकेशन का पता चला।

इस आईडी से जो भी लोग जुड़े थे उनकी जाँच की गई। पुलिस की एक महिला दारोगा ने फेक नाम बताकर खुद का धर्मांतरण के लिए संपर्क किया। फिर महिला दरोगा को आईडी से जवाब आता है। जवाब देने वाली एक महिला होती है। यहीं से पुलिस को आयशा का सुराग मिलता है। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी भी हाथ लगती है।

छह राज्यों में एक साथ छापेमारी

लापता बहनों को खोजने के लिए पुलिस ने ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। कोलकाता में बहनों के होने का मजबूत सुराग था। इसलिए वहाँ एसीपी के साथ चार टीमें भेजी गईं। दिल्ली, राजस्थान, गोवा, उत्तराखंड और यूपी के बाकी इलाकों में भी टीमें भेजी गईं, जिनमें चार से पाँच पुलिसकर्मी थे।
गोवा के लिए पुलिस एयरप्लेन से भी गई। एक ही समय पर पुलिस ने सभी 6 राज्यों में छापा मारा। 50 पुलिसकर्मियों ने चार दिन तक दिन-रात काम किया और आखिरकार बहनें मिल गईं, साथ ही इस गिरोह के लोग भी पकड़े गए।

कैसे काम करता था यह गिरोह?

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही व्यवस्थित था। ये लोग लव जिहाद करते थे। यानी, लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाते थे। फिर उन्हें धर्म बदलने के लिए उकसाते थे। वे धर्म बदलने के कागजात भी बनाते थे। लड़कियों को कट्टर भी बनाते थे।
अवलोकन करें:-
इस्लामिक धर्मातरण और जेहादी हरकतों के लिए हमारी अदालतें और पिछली कांग्रेस सरकारें जिम्मेदार ;

इन्हें विदेशों से पैसा मिलता था। ये पैसे को सही जगह लगाते थे। छिपने के लिए सुरक्षित घर भी देते थे। कानूनी सलाह भी देते थे। नए फोन और सिम का भी इंतजाम करते थे। यह गिरोह दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, गोवा, देहरादून और यूपी के कई शहरों में फैला था।

मुल्ला अफरोज ने की थी संभल हिंसा में बिलाल-अयान की हत्या, दुबई में रहने वाले गाड़ी चोर शारिक साठा का है गुर्गा: पुलिस पर फायरिंग का आरोप लगाने वालों के मुँह सिले, 9 पत्थरबाज भी पकड़ाए

पुलिस की गिरफ्त में मुल्ला अफरोज (फोटो साभार: Amrit Vichar)

उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा पर सारे योगी विरोधी चील-कौओं की तरह चिल्ला-चुल्ली कर रहे थे, लेकिन दंगाइयों की पकड़-धकड़ में मुसलमानों के ही लपेटे में आने पर सारे योगी विरोधियों की बोलती बंद। बहुत हिन्दू-मुसलमान कर योगी पर कीजड़ फेंक रहे थे अब किसी की आवाज़ नहीं निकल रही, सबके मुंह में दही जम गया। यानि दंगा हुआ नहीं था करवाया गया था। सोंचा पुलिस पकड़ नहीं पायेगी। लेकिन अब वही उत्तर प्रदेश है और वही उत्तर प्रदेश पुलिस।     

संभल में नवम्बर में माह में हुई हिंसा में दो लोगों की हत्या करने के आरोपित मुल्ला अफरोज को पुलिस ने पकड़ा है। मुल्ला अफरोज ने पुलिस को निशाना बनाकर गोली चलाई थी लेकिन यह दो मुस्लिम युवकों के लगी, जिससे वह मारे गए। अफरोज शारिक साठा गैंग का गुर्गा है। पुलिस ने उसके पास से हथियार भी बरामद किए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार(19 नवम्बर, 2025) को मुल्ला अफरोज को पकड़ा है। वह संभल शहर का ही रहने वाला है। उसके पास से पुलिस को 32 बोर की एक पिस्टल और पुलिस से लूटे गए कारतूस भी बरामद हुए हैं। मुल्ला अफरोज दुबई में रहने वाले ऑटोलिफ्टर गैंग के सरगना शारिक साठा का गुर्गा है।

उसने पुलिस पूछताछ में बताया है कि शारिक साठा ने ही उन लोगों को हथियार मुहैया करवाए थे और हिंसा की साजिश रची थी। मुल्ला अफरोज ने बताया है कि शारिक साठा ने एक साथी के जरिए हिंसा का पूरा प्लान खींचा था और 24 नवम्बर, 2024 को मस्जिद के बाहर नेताओं द्वारा इकट्ठा भीड़ को निशाना बनाने की बात कही थी।

मुल्ला अफरोज ने बताया है कि इस साजिश के तहत 10-20 लोगों की हत्या की जानी थी, जिसमें आमलोगों और पुलिस को निशाना बनाया जाना था। मुल्ला अफरोज के अलावा और भी लोगों को इस काम के लिए हथियार मिले थे। जब 24 नवम्बर, 2024 को मस्जिद के बाहर मुस्लिम भीड़ ने हिंसा चालू की तो इसी में शामिल अफरोज फायरिंग करने लगा।

अफरोज ने पुलिस को निशाना बनाया लेकिन भगदड़ मचने के कारण यह गोली बिलाल और अयान को लग गई और वह मौके पर ही मारे गए। इस हत्या के लिए उसने 32 बोर का एक हथियार उपयोग किया था। इसके बाद वह छिप गया था। पुलिस ने अब उसे ढूंढ निकाला है।

मुल्ला अफरोज की गिरफ्तारी के बाद इस हिंसा में हुई मौतों के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताने वालों के भी मुँह सिल गए हैं। पुलिस पहले ही बता चुकी है कि आपसी फायरिंग में ही इस हिंसा में 4 लोग मारे गए थे। हालाँकि, मृतकों के परिवार समेत बाकी कॉन्ग्रेस के नेताओं ने पुलिस वालों पर ही मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी।

पुलिस शारिक साठा गैंग की भी संलिप्तता भी बता चुकी है। शारिक साठा संभल का रहने वाला है और देश के कुख्यात ऑटोलिफ्टर में से एक है। वह भारत से लक्ज़री गाड़ियाँ चुरा कर नेपाल और बाकी जगह भेजता था। उसे पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था लेकिन बाद में वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे दुबई भाग गया था।

पुलिस ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज के अलावा 9 पत्थरबाज भी पकड़े हैं। इन सभी को पुलिस ने जेल भेज दिया है। पुलिस ने बताया है कि अब तक वह हिंसा मामले में 70 उपद्रवी पकड़ चुकी है। पुलिस इस हिंसा के बाकी आरोपितों की भी पहचान कर दबिश दे रही है।

महाकुंभ से पहले ठगी करने वाले सक्रिय, होटल डील के नाम पर कर रहे फर्जीवाड़ा: यूपी पुलिस ने शॉर्ट फिल्म बना कर बुकिंग का सही तरीका बताकर किया जागरूक

                   उत्तर प्रदेश पुलिस ने महाकुंभ में होटल सही ढंग से बुक करने का तरीका बताया 
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी, 2025 से महाकुंभ शुरू हो रहा है। इस महाकुंभ में देश-विदेश से श्रद्धालु आने वाले हैं। इस महाकुंभ से पहले ही कई जालसाज भी ठगी की जुगत में हैं। वह फर्जी वेबसाइट और एड के माध्यम से महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को होटल या अन्य सुविधाओं के लिए ठगने की जुगत लगा रहे हैं। ठगी का ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आ भी चुका है। अब उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन ठगों से निपटने और जनता को जागरुक करने के लिए प्रयास चालू कर दिए हैं। 

उत्तर प्रदेश पुलिस ने क्या समझाया?

उत्तर प्रदेश पुलिस ने महाकुंभ के दौरान लोगों से होटल के नाम पर ठगी ना हो, यह पक्का करने के लिए डिजिटल तरीके अपनाए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने महाकुंभ से कुछ ही दिन पहले एक छोटी फिल्म बनाई है। इसमें बताया गया है कि कैसे महाकुंभ के लिए होटल बुक करना है और कैसे जालसाजों से बचना है। इस शॉर्ट फिल्म में एक्टर संजय मिश्रा भी हैं। इस शॉर्ट फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे होटल बुक करने के नाम पर एक परिवार ठगी का शिकार होता है।

इसमें दिखाया गया है कि कैसे ठग उनसे ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर पैसा लेकर गायब हो जाते हैं और जब परिवार असल में यहाँ पहुँचता है, तब ना कोई फ़ोन मिलता है और ना ही कोई मौजूद होता है। फिल्म में लालच देकर ठगी करने वालों से सावधान किया गया है। यूपी पुलिस की इस फिल्म में एक्टर संजय मिश्रा ने बताया है कि बिना किसी के झाँसे में आए महाकुंभ की वेबसाइट पर जाकर सारी बुकिंग की जा सकती है।

कैसे करें महाकुंभ के लिए बुकिंग?

उत्तर प्रदेश सरकार महाकुंभ 2025 को डिजिटल महाकुंभ के तौर पर आयोजित कर रही है। महाकुंभ की सारी जानकारी और सुविधाएँ एक ही जगह पर हों, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने kumbh.gov.in वेबसाइट बनाई है। इस वेबसाइट पर महाकुंभ की जानकारी के साथ ही होटल या कॉटेज बुकिंग के लिए भी विकल्प मौजूद हैं। यह वेबसाइट हिंदी में भी उपलब्ध है। इसमें ‘यात्रा एवं ठहराव’ नाम से एक अलग विकल्प दिया गया है।

इस विकल्प पर क्लिक करते ही ‘कहाँ ठहरें’ नाम से आए विकल्प पर सारी जानकारी मौजूद है कि कहाँ-कहाँ रुकने की व्यवस्थाएँ हैं। इसी में बुक करें नाम से विकल्प दिया गया है। यह UPSTDC की वेबसाइट पर ले जाता है। यहाँ से महाकुंभ के लिए बताए गए टेंट या फिर प्रयागराज के होटल बुक कर सकते हैं। इसी वेबसाइट पर महाकुंभ के दौरान नाव बुक करने का भी विकल्प मौजूद है। उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ के लिए विशेष टेंट सिटी बसाई है। 

उत्तर प्रदेश : श्रावस्ती के मदरसे में नकली नोट की छपाई, अपनी 5 बीवियों से मार्केट में खपाने का धंधा करवाता था मुबारक अली: यूट्यूब से सीख बहराइच तक फैलाया काला कारोबार

                                   मदरसा संचालक गिरफ्तार (फोटो साभार: Aajtak & aAMRUJALA)
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में एक मदरसा संचालक अपनी पाँच बीवियों के जरिए नकली नोट का धंधा चला रहा था। वह प्रिंटर से ही मदरसे के भीतर नकली नोट छापता था और फिर अपनी बीवियों को पकड़ा देता था। इसके यह जगह-जगह यह नोट खपा देती थीं। उसके गैंग में 4 और लोग शामिल थे। पुलिस ने उनके पास से नकली नोट छापने की मशीन और हजारों के नकली नोट बरामद किए थे। उनके पास से अवैध हथियार भी बरामद हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रावस्ती के हरदत्त नगर इलाके में लक्ष्मणपुर इलाके में चल रहे एक मदरसे में हाल ही में छापा मारा। यहाँ से मदरसे के संचालक मुबारक अली और उसके गुर्गे पकड़े गए। इनके पास से ₹34500 नकली नोट बरामद किए। इसके अलावा इनके पास से एक प्रिंटर भी बरामद हुआ। साथ ही नोट छापने की और सामग्री भी मिली। इनके पास से एक तमंचा भी मिला। पुलिस ने इनसे पूछताछ की तो असलियत का खुलासा हुआ।

पुलिस ने बताया कि मदरसा संचालक मुबारक अली इस गैंग का सरगना था, यही नोट छापने का पूरा काम देखता था। यह नोट पहले प्रिंटर से मदरसे के एक कमरे में छापे जाते और फिर इनको असली नोट जैसा दिखाने के लिए तैयार किया जाता। नोट छापने के लिए अच्छे क्वालिटी का कागज भी यूज होता था। यह ₹500 के अलावा छोटे नोट भी छापते थे ताकि किसी को शक ना हो। मुबारक अली की पाँच बीवियाँ हैं। इनमें से दो अलग-अलग जगह मदरसों में ही पढ़ाती हैं। मुबारक अली फर्जी नोट छाप कर इन पाँचों को देता था।

इसके बाद यह बाजार में यह नोट खपा देती थीं, इसके लिए यह रात के अँधेरे का फायदा उठाती थी। उसकी बीवियों पर पुलिस ने अभी कार्रवाई नहीं की है। गैंग में शामिल बाकी लोग भी यही काम करते थे। मुबारक अली ने यह नोट छापना यूट्यूब से सीखा था। उसके गैंग में जलील, धर्मराज, अवधेश और रामसेवक हैं। इनमें से कुछ पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं। इनके पास से ₹500, ₹200 और ₹100 के नकली नोट पाए गए हैं। इनके पास ₹14500 के असली नोट भी मिले हैं।

 यह सिर्फ नकली नोट छाप कर खुद नहीं चलाते थे बल्कि दूसरों को भी इस धंधे में शामिल होने को लेकर झाँसा देते थे। यह उन्हें ₹1000 के बदले ₹2000 के बकली नोट देने का वादा करते थे। पुलिस अब इस मामले में जाँच कर रही है। वह पता लगा रही है कि इस धंधे में और कौन शामिल रहा है।

उत्तर प्रदेश : नहीं थम रहा दबे मन्दिरों का मिलना ; शायद इसीलिए सनातन विरोधी संविधान और लोकतंत्र खतरे में का शोर मचा रहे हैं? दबी हुई मूर्तियां चीख-चीख कर अपना प्रभुत्व दर्शा रही है

                                            मुरादाबाद का मंदिर और मूर्तियाँ (फोटो साभार: Jagran)
जिस तरह उत्तर प्रदेश में दबे या दबाए गए मन्दिरों का मिलना शुरू हुआ है सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सबको आंखें और दिमाग को खोलकर बोलना होगा कि किस तरह सनातन विरोधियों ने मुस्लिम तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक सनातन को दबाने का दुस्साहस किया था। उन्हें नहीं मालूम था कि कभी समय चक्र भी घुमेगा और जब घुमेगा इनके कुकर्म सामने आएंगे। जनता को सच्चाई से मीलों दूर रख तुष्टिकरण कर अपनी तिजोरियां भर मालपुए खाते रहे। आज सच्चाई का सूर्य उदय होने से इन तुष्टिकरण करने वालों की नींद ही नहीं रोटी तो क्या पानी पीना भी मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि जनता को संविधान और लोकतंत्र खतरे में का डर बैठा अपनी बंद होती दुकानों को खुला रखने का प्रयास किया जा रहा है। 

सनातन विरोधियों को इतना ज्ञान होना चाहिए कि मूर्ति कोई पत्थर का टुकड़ा या रोड़ा नहीं होती। जब उसकी मन्त्रों से प्राणप्रतिष्ठा की जाती है वह एक मूर्ति बन जाती है, अगर तुष्टिकरण करते उस मूर्ति को किसी भी आकार में दबा दिया जाता है, कभी न कभी वही मूर्ति अपना प्रभाव दिखाने लगती है। वह मुर्दा नहीं बन जाती कि जमीन में दफ़न कर दिया, कुछ समय बाद मिट्टी में मिल जाएगा, मूर्खो वह भगवान/देवी की मूर्ति है कोई पत्थर का टुकड़ा/रोड़ा नहीं।       

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक मुस्लिम बहुल इलाके में हिन्दू मंदिर मिला है। यह मंदिर पिछले लगभग 4 दशक से बंद पड़ा था। इस मंदिर में शिवलिंग कई खंडित मूर्तियाँ भी मिली हैं। इसमें कोई जा ना पाए, इसके लिए दीवार भी बना दी गई थी। प्रशासन ने अब दीवाल तोड़कर मंदिर का जीर्णोद्धार चालू कर दिया है। मंदिर 1980 में हुए भीषण दंगों के बाद बंद कर दिया गया था। तब यहाँ के पुजारी की हत्या कर उन्हें आग में झोंक दिया गया था।

परदादा ने बनवाया, पोते ने हटवाया कब्जा

मुरादाबाद में यह मंदिर झब्बू का नाला इलाके में मिला है। यहाँ अधिकांश आबादी मुस्लिमों की है। इस मंदिर को लेकर पुजारी के परपोते सेवाराम ने डीएम से शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत में बताया था कि मंदिर को उनके परदादा भीमसेन ने बनवाया था और इसके बाद उनका ही परिवार इसमें पूजा करता था। उन्होंने कहा था कि 1980 के दंगे में इस मंदिर को बंद करके प्रवेश द्वार पर दीवाल बनवा दी गई थी और अब यहाँ लोग नहीं जाते। उन्होंने मंदिर को खोलने की माँग करते हुए स्थानीय लोगों के साथ प्रदर्शन भी किया था।

खंडित मूर्तियाँ, बनवा दी पार्किंग

इसके बाद सोमवार (30 दिसम्बर, 2024) को यहाँ मुरादाबाद नगर निगम और प्रशासन की टीम दल-बल के साथ पहुँची। उसने मंदिर की दीवाल तोड़ी। इसके बाद यहाँ इकट्ठा हुई मिट्टी को हटाया गया। मंदिर का स्वरूप इसके बाद दिखा। यहाँ दीवाल पर बनाई हुई बजरंग बली की प्रतिमा मिली। यहाँ से शिवलिंग भी है जिसके पास लेकिन नंदी की मूर्ति थी। माँ दुर्गा और काली की प्रतिमाएँ खंडित थी। जो मूर्तियाँ दीवाल में बनवाई गई थीं उनको भी तोड़ दिया गया था। मंदिर में तीन फीट का पक्का फर्श बनवा दिया गया था। यहाँ की जमीन पर अब पार्किंग चलती थी।
प्रशासन ने मंदिर की खुदाई करवाई है और फर्श तुड़वाया है। अंदर से काफी बड़ा मंदिर सामने आया है। प्रशासन अब मंदिर का जीर्णोद्धार करवा रहा है। यहाँ जल्द ही काम पूरा कर पूजा चालू करवा दी जाएगी। स्थानीय हिन्दुओं को अपना मंदिर वापस पाकर प्रसन्नता है लेकिन इससे कड़वी यादें भी ताजा हो गई हैं। मंदिर के निर्माण को लेकर शिकायत देने वाले सेवाराम इसके वापस मिलने और बुरी हालत देख कर रो पड़े। उन्होंने बताया कि उनके परदादा भीमसेन ने इस मंदिर के निर्माण के जमीन दी थी।

किन्नर ने उठा रखा था पूजा का बीड़ा

तब इस झब्बू का नाला इलाके में हिन्दू आबादी बसा करती थी। सेवाराम ने बताया कि उनके दादा गंगासरन यहाँ पूजा करते थे। 1980 में जब मुरादाबाद में ईद के बाद भीषण दंगा भड़का तो यह इलाका हिन्दुओं से खाली हो गया। सेवाराम ने आरोप लगाया कि दंगाइयों ने उनके दादा गंगासरन को मार दिया और उनकी लाश आग में झोंक दी। इससे उनका शव तक नहीं मिला। इसी के साथ मंदिर बंद हो गया और यहाँ दीवाल बना दी गई। इलाके से धीमे-धीमे सारे हिन्दू चले गए। तब से यह मंदिर बंद था।
यहाँ कुछ समय पहले एक हिन्दू किन्नर आकर बसी थीं। उनका नाम मोहिनी किन्नर है। मोहिनी किन्नर ने बताया कि उनसे मंदिर की यह हालत देखी नहीं गई और उन्होंने बाहर के हिस्से में रंगाई पुताई करवाई। इसके लिए भी पुलिस की मदद लेनी पड़ी थी। मोहिनी किन्नर ने बताया कि वह यहाँ रोज दिया बाती करती थीं और साथ ही दिवाली पर मंदिर की दीवाल कि सजावट करवाती थीं। अब वह और सेवाराम का परिवार अपने मंदिर को वापस पाकर काफी प्रसन्न हैं।

1980 के दंगे में मरे थे 83 लोग

यह मंदिर जिस 1980 के दंगे के बाद बंद किया गया था। उसमें 83 लोग मारे गए थे। 13 अगस्त 1980 को यह दंगा हुआ था। इसको लेकर 2023 में जाँच रिपोर्ट योगी सरकार ने सार्वजनिक की थी। इससे पहले तक दंगे की रिपोर्ट को इसलिए दबा कर रखा गया था क्योंकि इससे असल जिम्मेदार लोगों की पहचान हो जाती। मुरादाबाद में कांग्रेस और मुस्लिम लीग दो बड़े खिलाड़ी थे। मुस्लिम लीग की जमात का नेतृत्व शमीम अहमद और हामिद हुसैन उर्फ अज्जी और उनके समर्थक कर रहे थे, जो उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लीग को फिर से खड़ा करना चाहते थे।
वहीं, कांग्रेसी हाफिज मोहम्मद सिद्दीकी की अगुवाई में काम कर रहे थे। इस रिपोर्ट में हिंदू पक्ष के 6 लोगों के लिखित बयान दर्ज हैं, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि ये हिंसा अचानक नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित थी। मुरादाबाद में भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष हरिओम शर्मा का भी बयान इस रिपोर्ट में दर्ज है, जिन्होंने कहा था कि ये हिंसा बहुत बड़ी साजिश का महज एक हिस्सा भर ही थी। इस हिंसा के लिए मुस्लिम पक्ष को बाहरी देशों, इस्लामी संगठनों जैसे मुस्लिम लीग, जमीयत उलेमा-ए-हिंसा और तबलीगी-ए-इस्लाम ने फंडिंग की थी।
इसके दंगे से तीन महीने पहले से ही कई हिंसक घटनाएँ हो रही थीं। गहराए तनाव का फायदा मुस्लिम लीग और कांग्रेस के नेताओं ने 13 अगस्त 1980 को ईद के दिन उठाया। उन्होंने अपने समर्थकों के माध्यम से सुअरों वाली घटना को अंजाम दिया और पूरे मुरादाबाद को दंगों की चपेट में धकेल दिया। भाजपा नेता हरिओम शर्मा ने उस दिन को याद करते हुए बयान में बताया है कि ईद के मौके पर ईदगाह के पास लगाए गए शिविरों में मुस्लिमों की भीड़ ने आग लगा दी।
इसमें उन 2 शिविरों को छोड़ दिया गया, जिन्हें मुस्लिम लीग चला रही थी। उस दौरान मुस्लिम लीग के नेता अपने शिविरों (कैंप) के पास ही थे, जबकि उन्हें नमाज में शामिल होना था। इस बात से साफ है कि वो दंगों के प्रति पहले से जानते थे और सारी साजिश उनकी रची हुई थी। हालाँकि, इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि ईदगाह में सुअर गए थे। इतना नहीं, इसके अलावा एक और अफवाह फैलाई गई कि पुलिस ने सैकड़ों मुस्लिमों को ईदगाह के अंदर मार दिया है।

उत्तर प्रदेश : मोहम्मद जुबैर के खिलाफ FIR, भारत की एकता-अखंडता को खतरे में डालने का मामला

              मोहम्मद जुबैर ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत माँगी है (फोटो साभार: TOI & File Photo)
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को बताया है कि उसने फर्जी खबरें फैलाने वाले तथाकथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर पर भारत की एकता और अखंडता को नुकसान पहुँचाने के लिए मामला दर्ज किया है। यह जानकारी जुबैर के मामले की जाँच कर रहे उत्तर प्रदेश पुलिस के अफसर ने दी है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को दिए गए एक हलफनामे में बताया है कि उसने भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह धाराएँ समुदायों में वैमनस्य बढ़ाने, सबूत के साथ छेड़छाड़ और मानहानि समेत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने से सम्बन्धित हैं। उस पर आईटी एक्ट की धाराएँ भी जोड़ दी गई हैं।

यह हलफनामा देने का आदेश हाई कोर्ट ने 25 नवम्बर, 2024 को हुई पिछली सुनवाई को दिया था। पुलिस ने बुधवार (27 नवम्बर, 2024) को यह हलफनामा कोर्ट को सौंपा है। मोहम्मद जुबैर इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँचा है।

मोहम्मद जुबैर के खिलाफ यह FIR उदिता त्यागी ने दर्ज करवाई है। जुबैर पेर आरोप है कि उसने डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का एक पुराना वीडियो साझा किया और मुस्लिम भीड़ को भड़काया। इस वीडियो में कथित तौर पर यति नरसिंहानंद ने इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया था।

इस वीडियो को डाले जाने के बाद मुस्लिम भीड़ डासना मंदिर के बाहर इकट्ठा हुई और बवाल काटा। देश के बाकी कई हिस्सों में भी मुस्लिमों ने खूब हंगामा किया। कई जगह पर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। इन हमलों में कई पुलिसवाले भी घायल हुए थे।

उदिता त्यागी ने इस मामले में मोहम्मद जुबैर पर कार्रवाई की माँग की है। उदिता त्यागी यति नरसिंहानंद सरस्वती फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। उदिता त्यागी ने इस मामले पर कहा है कि अगर उत्तर प्रदेश के सरकारी वकीलों ने सही पक्ष रखा तो मोहम्मद जुबैर को जेल जाने से कोई नहीं बचा पाएगा।

उत्तर प्रदेश : अशांति फ़ैलाने वाले मोहम्मद जुबैर पर UP में FIR: आरोप- मुस्लिमों को भड़का कर डासना मंदिर पर करवाया हमला, यति नरसिंहानंद की हत्या की रची साजिश; आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए

यति नरसिंहानंद की रिहाई और मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की माँग को लेकर गाजियाबाद में प्रदर्शन (फोटो साभार: ऑपइंडिया)
गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर पर 4 अक्टूबर 2024, शुक्रवार के दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि यह भीड़ मंदिर में घुसने की कोशिश कर रही थी और उन्मादी नारे लगा रही थी। पुलिस ने किसी तरह मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। इस घटना से हिंदू समुदाय में गुस्सा फैल गया, और उन्होंने हिंसा भड़काने वालों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को इस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की जा चुकी है। हालाँकि, लोगों की माँग थी कि आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है।

भाजपा नेत्री डॉ. उदिता त्यागी, जो खुद को इस घटना की चश्मदीद और पीड़ित बता रही हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 7 सितंबर 2024 को दी गई इस शिकायत में उन्होंने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से कहा कि डासना मंदिर पर हमला एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को इस हमले के लिए मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और अरशद मदनी ने भड़काया था। इस हमले में बाहर से आए मुस्लिमों की भी संलिप्तता बताई गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

डॉ. उदिता का दावा है कि इस हिंसा के पीछे यति नरसिंहानंद गिरी की हत्या की साजिश थी। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद को 5 अक्टूबर को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। डॉ. उदिता ने माँग की है कि हमलावरों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनकी इस शिकायत पर मंदिर के अंदर मौजूद हिंदू समाज के दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं। ये वो लोग बताए जा रहे हैं जो हमले के समय डासना मंदिर के अंदर मौजूद थे।

इस शिकायत के बाद मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद के कवि नगर थाने में केस दर्ज हुआ है। यह केस भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 228, 299, 356(3) और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है।

डॉ. उदिता ने अपने वीडियो बयान में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यति नरसिंहानंद सरस्वती को रिहा करने और मोहम्मद जुबैर पर केस दर्ज करने सहित हमलावरों पर NSA न लगने की स्थिति में 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित की जाएगी। उदिता के मुताबिक, यह महापंचायत ऐतिहासिक होगी।

डॉ. उदिता ने पुलिस कमिश्नर को एक और शिकायत दी, जिसमें मोहम्मद जुबैर की कई कथित गतिविधियों का जिक्र किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जुबैर ने 10 हिंदूवादी लोगों की एक सूची बनाई है, जो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस सूची में उनका नाम भी शामिल है, और उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। उन्होंने नूपुर शर्मा केस का हवाला देते हुए कहा कि जुबैर उस मामले में 6 निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार था।

अवलोकन करें:- 

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डॉ. उदिता का मानना है कि अगर मोहम्मद जुबैर को जेल नहीं भेजा गया, तो वह कई हिंदुओं के जीवन के लिए खतरा बना रहेगा। डॉ. उदिता के अलावा, हिंदू रक्षा दल ने भी यति नरसिंहानंद की रिहाई की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मंदिर पर हमला करने वाली भीड़ पर सख्त कार्रवाई की माँग की। इस दौरान हिंदू संगठनों से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद रहे। ऑपइंडिया के पास इस ज्ञापन की प्रति मौजूद है।

उत्तर प्रदेश : सपा नेताओं और कट्टर इस्लामियों ने चुनाव के समय UP Police का बता वायरल किया पंजाब का वीडियो

सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसे उत्तर प्रदेश का बताया जा रहा है। इस वीडियो में एक युवक द्वारा किसी महिला को पहले डाँटते, फिर पीटते हुए देखा जा सकता है। समाजवादी पार्टी से जुड़े कई नेताओं व कुछ कट्टर इस्लामी हैंडलों ने इसे UP पुलिस विरोधी रूप और रंग देने का प्रयास किया है। इन लोगों ने वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को UP कैडर IPS अधिकारी आशीष तिवारी बताया है। अब चर्चा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पंजाब के वीडियो को प्रदेश का बताने वाले पर कठोर कार्यवाही किये जाने की गुहार लगा रही है, ताकि भविष्य में कोई काली करतूत करने की हिम्मत न कर सके, क्योकि इससे पुलिस की छवि ख़राब हो रही है। ऑपइंडिया ने इस वीडियो की पड़ताल की।

समाजवादी पार्टी की सरकार में राजयमंत्री के ओहदे पर रह चुके नेता आईपी सिंह ने 21 सेकेंड लम्बे इस वीडियो को शुक्रवार (31 मई 2024) को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। वीडियो में महिला की पिटाई के दौरान पास ही खड़ा एक अन्य व्यक्ति सब चुपचाप देखता है। सामने मौजूद कोई अन्य व्यक्ति चुपके से पूरी घटना रिकॉर्ड करता है, जो बाद में वायरल हो गई। इस वीडियो की आड़ में सपा नेता आईपी सिंह ने UP की योगी सरकार तक को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।

आईपी सिंह की ही तरह उनकी पार्टी के यासर शाह, राघवेंद्र यादव, सत्या यादव और राहुल यादव आदि ने भी इसे IPS आशीष तिवारी से जुड़ी घटना बतानी शुरू कर दी। मामले को कथित तौर पर UP पुलिस व योगी सरकार से जुड़ने की आहट पाकर कुछ समुदाय विशेष के लोग भी सक्रिय हो गए। इनमें फिरदौस फिजा प्रमुख हैं। अपने X हैंडल से फिरदौस ने पुलिस अधिकारी पर की गई कार्रवाई का अपडेट तक पूछ डाला। खास बात यह है कि भारत के इस मसले में फिरदौस ने #Netanyahu, #Rafah और #Genocide जैसे हैशटैग लगाए।

 X के अलावा भी इस वीडियो को कुछ अन्य लोगों ने सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्मों पर शेयर किया है।

वायरल वीडियो की सच्चाई

ऑपइंडिया ने इस वायरल वीडियो की पड़ताल की। अपनी पड़ताल के दौरान हमने पाया कि 27 मई 2024 को UP पुलिस द्वारा इस घटना पर सफाई दी गई है। पुलिस ने बताया, “यह वीडियो उत्तर प्रदेश से न होकर थाना जीरकपुर, मोहाली, पंजाब में सन् 2018 की घटना से संबंधित है।”
जब हम इस वीडियो की तह तक गए तो पता चला कि जिसे UP कैडर IPS आशीष तिवारी बताया जा रहा है, वो असल में पंजाब का AIG आशीष कपूर है।
जब हम इस वीडियो की तह तक गए तो पता चला कि जिसे UP कैडर IPS आशीष तिवारी बताया जा रहा है, वो असल में पंजाब का AIG आशीष कपूर है।
आशीष कपूर पूर्व में 1 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के मामले में सस्पेंड भी किया जा चुका था। साल 2023 में यह वीडियो पहली बार वायरल होने के बाद आशीष कपूर पर FIR भी दर्ज कर ली गई थी। जिस महिला की पिटाई हो रही है, उसने आशीष कपूर पर केस दर्ज करवाया था। केस में उसने आशीष पर खुद से जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। बाद में आशीष कपूर को जेल भी काटनी पड़ी थी। साल 2022 में पंजाब कैडर अधिकारी आशीष कपूर बर्खास्त भी कर दिए गए थे।
इस पूरे मामले पर ऑपइंडिया ने आईपीएस आशीष तिवारी से बात की। आशीष तिवारी उच्च शिक्षा के लिए फिलहाल अमेरिका में हैं। उन्होंने बताया कि वीडियो वायरल होते ही सूचना पुलिस मुख्यालय को भेज दी गई थी, जिसका पुलिस ने खंडन भी कर दिया है।
आशीष तिवारी ने अपील भी की है कि लोग किसी भी खबर को बिना सोचे-समझे और पूरी सच्चाई जाने बिना शेयर अथवा विश्वास करने से बचें। अतः हमारी पड़ताल में यह निकल कर सामने आया कि वायरल हो रहा वीडियो UP के आईपीएस आशीष तिवारी के बजाय पंजाब कैडर के अधिकारी आशीष कपूर का है।

दिल्ली : योगी के राज्य में पेट्रोल पंप पर बाप-बेटे द्वारा गुंडई करने के बाद बेटे समेत फरार हुए AAP विधायक अमानतुल्लाह खान; घर पर पहुँची यूपी पुलिस तो गेट पर लगा मिला ताला,

अमानतुल्लाह खान के घर पहुँची यूपी पुलिस, कोई नहीं मिला
आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान ने योगी आदित्यनाथ की सीमा में पेट्रोल पंप पर यह समझ गुंडागर्दी तो कर ली, दिल्ली विधायक हूँ, कुछ नहीं होगा, लेकिन भूल गया कि क्षेत्र अरविन्द केजरीवाल का नहीं योगी का है, जो गुंडों के पर कतरना जानता है। 

उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली के ओखला से AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के घर पर दस्तक दी है। शनिवार (11 मई, 2024) को यूपी पुलिस ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) के MLA के बाटला हाउस स्थित आवास पर पहुँची। विधायक अपने बेटे के साथ ही कुछ दिनों से घर से गायब हैं। यूपी पुलिस ने कहा है कि अमानतुल्लाह खान और उनके बेटे जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी को लेकर दोनों बाप-बेटे के खिलाफ नोएडा पुलिस ने FIR दर्ज कर रखी है।

नोएडा पुलिस जब अमानतुल्लाह खान के घर पहुँची तो वहाँ ताला लगा हुआ है। ऐसे में पुलिस घर पर नोटिस चस्पा कर लौट गई। आरोप है कि नोएडा के सेक्टर-95 स्थित विधायक का बेटा अनस पेट्रोल पंप पर अपनी कार लेकर पहुँचा था, जहाँ वहाँ उसने लाइन में आगे लगी गाड़ी को आगे बढ़ा कर अपनी गाड़ी में पहले तेल भरने की ज़िद की। सेल्समैन ने नियम का उल्लंघन करने से नकार दिया। इस दौरान अनस और कार में बैठे उसके साथियों ने मारपीट शुरू कर दी।

इसके बाद खुद विधायक अमानतुल्लाह खान वहाँ पहुँचे और उन्होंने पेट्रोल पंप के मैनेजर को धमकाया। दोनों ही घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसी क्रम में ACP अरविन्द कुमार के नेतृत्व में 25 पुलिसकर्मियों की टीम अमानतुल्लाह खान के घर पहुँची। कोतवाली फेज वन और कोतवाली सेक्टर-24 के प्रभारी निरीक्षक ने भी दिल्ली के जामिया मिलिया थाने में उपस्थिति दर्ज कराई। एक एसीपी और 3 थाना प्रभारी 25 सदस्यीय पुलिस दल का नेतृत्व कर रहे थे।

अमानतुल्लाह खान के घर पर नोटिस रिसीव करने के लिए भी कोई नहीं था। इसे चस्पा कर पुलिस वापस लौट आई। नोएडा पुलिस पता लगा रही है कि अमानतुल्लाह खान का किन-किन चुनावी कार्यक्रमों में जाना है। वो तय चुनावी कार्यक्रमों में भी नहीं पहुँच रहे हैं। जाँच के लिए बाप-बेटे से संपर्क नहीं हो पा रहा है, फोन पर भी वो अनुपलब्ध हैं। पुलिस ने मारपीट व धमकी के गवाह जुटा लिए हैं, CCTV फुटेज भी खँगाल लिए गए हैं। FIR में धाराएँ बढ़ाई जा सकती हैं, पुलिस की कई टीमें उनकी खोज में लगी हुई हैं।


प्रकाश राज और RJ सायमा सहित पूरा गिरोह उतरा कानून का उल्लंघन करने वाले मोहम्मद ज़ुबैर के समर्थन में: मासूम बच्चों का वीडियो वायरल कर किया था

                     आरजे सायमा, मोहम्मद जुबैर और प्रकाश राज (दाएँ से बाएँ) (फोटो साभार :                                                                                                                        ट्विटर__sayema/starsunfolded/IMBD)
फेक न्यूज की फैक्ट्री चलाने वाले कथित फैक्ट चेकर जुबैर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से उसकी गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई है। आम लोग जहां एक पीड़ित बच्चे का वीडियो शेयर कर उसकी पहचान उजागर करने वाले और वीडियो को एडिट कर समाज में जहर घोलने वाले जुबैर की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, तो पूरा वामपंथी गिरोह उसके बचाव में खुलकर उतर आया है। इस लिस्ट में प्रकाश राज, आरजे सायमा, सीमा चिश्ती जैसे नाम हैं।

सबसे पहले पढ़िए सायमा का ट्वीट, जिसने कौशिक राज के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यूपी पुलिस को गलत ठहरा दिया। सायमा ने लिखा, “क्या समय आ गया है, तृप्ति त्यागी नाबालिग के साथ अपराध करने के बाद भी खूब सपोर्ट पा रही है, तो इस खबर को सामने लाने वाले पर ही पुलिस ‘अटैक’ कर रही है।” सायमा ने ‘आई स्टैंड विद जुबैर’ का हैशटैग भी आगे बढ़ाया है।

वहीं, वामपंथी मीडिया संस्थान द वायर की संपादक सीमा चिश्ती को जुबैर इसलिए बेचारे लगने लगे, क्योंकि जुबैर ने आग लगाकर पानी डाल दिया था। उसका एडिट किया हुआ वीडियो सारी दुनिया में घूमने के बाद। अब सीमा चिश्ती यूपी पुलिस पर ही सवाल उठा रही हैं, पढ़िए ट्वीट…

हालाँकि प्रकाश राज के ट्वीट करते ही लोगों ने जम कर लताड़ लगाई। प्रकाश राज ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि वो जुबैर का समर्थन करने के लिए इस हैशटैग को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी आई स्टैंड विद जुबैर हैशटैग के साथ ट्वीट करने की अपील की।

प्रकाश राज कई मामलों में बुरी तरह से एक्सपोज हो चुके हैं, जो एक्स (पूर्व में ट्विटर) की आम जनता भी उन्हें उसी तरह आड़े हाथों लेती है। प्रकाश राज के ट्वीट के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने प्रकाश राज को उसकी असल औकात याद दिला ली। देखिए कुछ ट्वीट्स…

दिनेश भट्ट नाम के एक यूजर ने प्रकाश राज पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने प्रकाश राज को रिप्लाई देते हुए लिखा, “एक ऐसा मूर्ख जो अपनी मक्कारी भरी हरकतों से आज तक एक निम्न स्तरीय जंतु की तरह रेंग रहा है, जिसका मन मस्तिष्क घटियापन से भरा हुआ है, वो एक ऐसे बेयर रूपी मक्कार को सहारा देकर खड़े होने की बात कर रहा है, पहले तुम मेरे खड़े हुए कड़क जंतु का सहारा लेकर अपने पृष्ठ भाग को रख कर बैठ जाओ, तुम्हारे पृष्ठ भाग की खुजली के साथ साथ तुम्हारी मानसिक खुजली भी दूर हो जाएगी।।”

अनूप रावत लिखते हैं, “फॉर्म भरते वक्त फादर वाली जगह पर अब्दुल तो नहीं लिखते हो?”

जॉन कबीर एक तस्वीर के माध्यम से बोल रहे हैं कि तुम कुछ भी करो, हमें क्या मतलब है।

योगी आदित्यनाथ नाम से बने एक पेरोडी अकाउंट से अलग ही वीडियो शेयर किया गया है। कैप्शन में उस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हालत की तुलना प्रकाश राज और जुबैर से की गई है।

मोहम्मद ज़ुबैर ने वीडियो के जरिए फैलाया था प्रोपेगंडा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर पुलिस थाने में AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर पर FIR दर्ज की है। ये मामला खुब्बापुर गाँव स्थित ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ के वायरल वीडियो से जुड़ा है। वीडियो में शिक्षिका तृप्ता त्यागी बैठी हुई दिख रही है। साथ ही एक मुस्लिम बच्चे को दूसरे बच्चों से पिटवाया जाता है। वीडियो उस मुस्लिम बच्चे के चचेरे बड़े भाई ने ही बनाया था। वीडियो में वो हँसता हुआ सुनाई दे रहा है। वही शिक्षा के पास अपने भाई की शिकायत लेकर आया था।

वहीं मोहम्मद ज़ुबैर ने इस मामले में वीडियो वायरल किया था, लेकिन बच्चों के चेहरों को ब्लर नहीं किया था। इस FIR में बताया गया है कि AltNews के पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा ‘किशोर न्याय अधिनियम’ का उल्लंघन करते हुए बच्चे की पहचान उजागर की गई है। इसके लिए उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की माँग की गई है। ये FIR सोमवार (28 अगस्त, 2023) को दर्ज की गई है। मोहम्मद ज़ुबैर ने बाद में इस वीडियो को डिलीट कर लिया था, लेकिन माफ़ी तक नहीं माँगी थी।

स्वतंत्रता दिवस पर UP के मदरसे में मौलाना ने कहा- ‘हमें मज़हबी और कुरान की आजादी चाहिए’: ऐसी आजादी पर हम पहले भी लात मारते थे, अब भी मारते हैं

           मदरसे से मौलाना अब्दुर्रहमान और हरदोई के ASP दुर्गेश सिंह (साभार- स्क्रीनशॉट ऑफ़ वायरल वीडियो)
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक मौलाना ने 15 अगस्त के दिन मस्जिद में माइक से एक विवादित बयान दिया, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मौलाना आजादी को लेकर आपत्तिजनक बातें कहता हुआ दिख रहा है। इसके साथ ही वह मुस्लिमों के लिए मजहबी आजादी की माँग कर रहा है।

मौलाना ने कहा, “ऐसी आजादी पर हम कल भी लात मारते थे, आज भी लात मारते हैं।” मौलाना का नाम अब्दुर्रहमान जामई बताया जा रहा है। वहीं, मौलाना के इस विवादित बयान का वीडियो सामने आने के बाद हिन्दू संगठनों में रोष है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से आरोपित मौलाना के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

 

‘हमें मजहबी आजादी चाहिए’

मौलाना अब्दुर्रहमान जामई ने अपने विवादित बयान में कहा, “इस्लाम के जनाजे निकाले जा रहे हैं। कुर्बानी पर पाबंदी लगाई जा रही है। कब्रिस्तान के ऊपर कब्जा किया जा रहा है। लाउडस्पीकर पर अजान पढ़ने पर मुकदमा हो रहा है। कुरान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। यह कैसी जम्हूरियत है, यह कैसी आजादी है।”
मौलाना अब्दुर्रहमान यहीं नहीं रुका। उसने आगे कहा, “यह तो मुसलमानों के मजहबी मामलों में घुसपैठ है। अगर आजादी इसी का नाम है तो हम ऐसी आजादी के तलबगार नहीं हैं। ऐसी आजादी पर हम कल भी लात मारते थे, आज भी लात मारते हैं।”
वायरल वीडियो में अब्दुर्रहमान जामई यह भी कहता दिख रहा है, “हमें मजहबी आजादी चाहिए। हमें कुरान की आजादी चाहिए। हमें इबादत और गाँव की हिफाजत चाहिए। हमें इज्जत और आबरू की हिफाजत चाहिए। हमें इस्लाम की हिफाजत चाहिए। इस जम्हूरी मुल्क में किसी के मामलात में घुसपैठ हो रही है। आज हिंदुस्तान में यही हो रहा है।"
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना ने यह विवादित तकरीर गोपामऊ की लाल पीर मस्जिद के अंदर स्थित मदरसे में 15 अगस्त को दिया था। वहीं, हिन्दू संगठन वीडियो सामने आने के बाद से भड़के हुए हैं। हिन्दू संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जिला प्रशासन ने मौलाना के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की तो वे लोग आंदोलन करेंगे। 
हरदोई पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान में लेते हुए मामले की जाँच शुरू कर दी है। हरदोई के अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश सिंह ने कहा कि मौलाना अब्दुर्रहमान जामई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पर तथ्यों की जाँच करके कार्रवाई की जा रही है।