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गैर-मुस्लिमों पर हिंसा के लिए उकसाती थी जो Islamic Ethics of Warfare मजहबी किताब, दिल्ली की रेखा सरकार ने जब्त करवाया

      दिल्ली सरकार ने 'इस्लामिक एथिक्स ऑफ वॉरफेयर' नाम की किताब को किया जब्त (साभार: ANI/Amazon)
"चलो देर आए दुरुस्त आए" यानि जो काम कई साल हो जाना चाहिए था चलो उसकी शुरुआत हो गयी है। दिल्ली की बीजेपी सरकार ने इस्लामिक कट्टरपंथी और उनके आकाओं पर जो कुठाराघात करने का काम किया है वह ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। जिन बातों का उल्लेख मुस्लिम लेखक अनवर शेख ने अपनी किताबों में किया था Islamic Ethics of Warfare तो सिर्फ एक हल्की-सी झांकी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अभी फिल्म का ट्रेलर और पूरी फिल्म बाकी है। 

अयातुल्लाह खेमैनी सलमान रुश्दी के खिलाफ तो फतवा देने की हिम्मत कर सका लेकिन अनवर शेख पर नहीं। जबकि खेमानी की जिंदगी में अनवर ने 2 या 3 किताबों का प्रकाशन कर दिया था। अगर भारत एवं अन्य सरकारों ने अनवर को गंभीरता से लिया होता शायद आतंकवाद नहीं होता। गैर-मुस्लिमों पर अत्याचार नहीं होते। लेकिन सभी तुष्टिकरण कर मालपुए खाने में लगे रहे। उसी का अंजाम है कि आतंकवाद एक नासूर बन चूका है। बस संक्षेप में इतना ही कहना है कि अनवर शेख के अधूरे काम को पूरा कर रही है अली सीना की किताब Understanding Mohammad And Muslim, इसके खिलाफ भी फतवा देने की किसी में अब तक हिम्मत नहीं। मेरे अनुभव से अली सीना की किताब अनवर शेख की किताबों का संकलन है। किताब के Preface में सीना का कहना है कि किताब पढ़कर मुसलमान इस्लाम छोड़ रहे हैं जबकि कहा ये जा रहा है कि अनवर शेख को पढ़कर। 

खैर, इस अति गंभीर मुद्दे पर सरकार को बहुत काम करना है। बहुत छापेमारी भी करनी है। जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भिड़ के छत्ते को छेड़ा है तो केन्द्रीय गृह मंत्री और सुप्रीम कोर्ट को पत्थरबाजों पर blind firing के आदेश और इसके खिलाफ खड़े होने वाले दलाल वकीलों पर भी सख्त आदेश देने के लिए बोलिए।       

दिल्ली की बीजेपी सरकार ने ‘इस्लामिक एथिक्स ऑफ वॉरफेयर’ नाम की किताब को जब्त करने के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह किताब मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाती है और सशस्त्र विद्रोह करने को उकसाती है। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किताब को जब्त किया है। 

दिल्ली सरकार के गृह विभाग से जारी आदेश में कहा गया, “सरकार के ध्यान में बात आई है कि ‘इस्लामिक एथिक्स ऑफ वॉरफेयर’ नाम की किताब लोगों, खासकर विशेष समुदायों के लोगों को हथियार उठाने और हिंसक सोच की तरफ भड़काती है। यह किताब कट्टर विचारधारा को बढ़ावा देती है, जिससे देश की सुरक्षा और जनता की शांति को खतरा हो सकता है।”

आदेश में यह भी कहा गया है कि सबूतों और जाँच में यह साफ पता चला है कि इस किताब में मजहबी बातों का गलत इस्तेमाल करके हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की गई है, इसीलिए तुरंत कार्ऱवाई करना जरूरी है। इसीलिए दिल्ली सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 98 के तहत किताब और इसकी सारी कॉपियों को जब्त किया है।

किताब में क्या लिखा?

दिल्ली सरकार के आदेश के मुताबिक, यह किताब सिर्फ इस्लाम को सबसे श्रेष्ठ मानती है और दूसरे धर्मों के खिलाफ लड़ाई की बात करती है। इसमें दूसरे धर्मों की मान्यताओं पर हमला करके अलग-अलग धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुश्मनी फैलाई गई है। साथ ही इस किताब में लोगों को कट्टर बनाने के लिए कुरान और अन्य मजहबी किताबें को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। इससे लोगों में अलगाव की भावना पैदा की गई और हिंसा व आतंकवाद की सोच को बढ़ावा दिया गया है।

इसके अलावा यह भी पाया गया कि यह किताब भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ गलत और भ्रामक जानकारी फैलाती है। इसीलिए किताब पर BNS, 2023 की धारा 196, 197(1)(c), 197(1)(d) भी लागू की गई है।

दिल्ली गाजीपुर मंडी से भेजा ‘सड़ा’ मांस होता है जम्मू-कश्मीर के रेस्टोरेंट्स में इस्तेमाल, केमिकल पोतकर दिखाते हैं फ्रेश: FDA ने 12000 किलो मीट पकड़ा, दुकान-होटलों के लाइसेंस रद्द

                                         सड़ा हुआ मांस जब्त किया गया तस्वीर (फोटो साभार : FreePressKashmir,)
जम्मू-कश्मीर में खाने-पीने की चीजों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यहां सड़ा हुआ मांस, नकली पनीर और एक्सपायर मिठाइयाँ बेची जा रही थीं। कुछ दिन पहले प्रशासन ने भारी मात्रा में सड़ा और बासी मांस जब्त किया था। ये मांस त्योहारों के मौके पर होटलों और रेस्टोरेंट्स में सप्लाई किया जाना था।

बात उन दिनों की है जब दिल्ली की जामा मस्जिद पर मुर्गा मंडी लगती थी। गली के कुछ लोग इकट्ठे होकर दिल्ली दूध योजना का बोतलों वाला दूध लेने जाते थे। एक दिन देखा कि देखते-देखते 7/8 ट्रे का मुर्गा मरता गया। मैंने अपने साथी को बोला कि "यार ये तो दुकानदार का टकड़ा नुकसान हो गया", इतना ही कहना था कि पीछे से दलाल ने कंधे पर हाथ लगकर कहा "आप कुछ फरमा रहे थे", सोंचा "करो भलाई मिली बुराई", दलाल ने कहा "डरिए नहीं, ये जितना भी मुर्गा है सफाई कर्मचारी ले जाकर होटल वालों को 2 रूपए के हिसाब से बेच देंगे और शाम को हम और आप बड़ी शान से 20 में यही मुर्गा खाकर आएंगे।"         

अगस्त की शुरुआत से अब तक जम्मू-कश्मीर की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 12,000 किलो से ज़्यादा एक्सपायर मछली और चिकन पकड़ा है। इन सभी को नष्ट कर दिया गया है। यह मामला सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा है और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं।

 इस घटना के बाद खाने की चीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। अब स्थानीय लोग और पर्यटक रेस्टोरेंट में मांस से बनी चीजें जैसे वजवान खाना छोड़ रहे हैं। इसकी जगह लोग अब डोसा, राजमा चावल जैसी शाकाहारी चीजें खाना पसंद कर रहे हैं। पहले होटल वाले मांस वाले खाने से अच्छा मुनाफा कमाते थे। लेकिन सड़े हुए मांस का मामला सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा है। अब ज़्यादातर लोग मांस से दूरी बना रहे हैं।

कैसे हुआ सड़े हुए मांस का खुलासा?

कश्मीर में सड़े हुए मांस की सप्लाई पर कार्रवाई अगस्त 2025 की शुरुआत में शुरू हुई। एक मांस कारोबारी ने एक लोकल न्यूज चैनल को इसकी जानकारी दी। उसने बताया कि दिल्ली की गाज़ीपुर मंडी से खराब मांस जम्मू-कश्मीर के बाजारों में भेजा जा रहा है। गाज़ीपुर मंडी एशिया की सबसे बड़ी पशु मंडी मानी जाती है।

इस सूत्र ने बताया कि जो मांस रेस्तरां वाले लेने से मना कर देते हैं, उसे मांस माफिया खरीद लेते हैं। ये मांस FSSAI के नियमों के मुताबिक ठीक नहीं होता। माफिया इस सड़े मांस को केमिकल्स से धोता है। इसमें क्लोराइड, अमोनियम हाइड्रॉक्साइड और नाइट्रेट जैसे खतरनाक रसायन मिलाए जाते हैं। इससे मांस बाहर से ताजा और लाल दिखने लगता है।

इसके बाद उस मांस को आइस बॉक्स में पैक किया जाता है। फिर ट्रकों के जरिए जम्मू-कश्मीर के बाजारों में भेजा जाता है। वहां यह मांस खाने-पीने का सामान बेचने वाले व्यापारियों को दिया जाता है। ये लोग इसे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों को बेचते हैं। फिर ग्राहक, चाहे वो स्थानीय हों या पर्यटक, बिना कुछ जाने वही मांस खा लेते हैं। उन्हें लगता है कि मांस ताजा और सेहतमंद है, लेकिन असल में वो सड़ा हुआ और केमिकल से रंगा होता है।

जब यह मामला सामने आया तो फूड डिपार्टमेंट हरकत में आया। रेस्टोरेंट, होटल, ढाबों और ठेलों पर छापेमारी शुरू हुई। जाँच में सामने आया कि सड़े मांस का यह धंधा बहुत बड़े स्तर पर चल रहा था।

कुछ ही समय में पुलिस ने हजारों किलो सड़ा मांस बरामद किया। ये मांस बिना किसी लेबल के था और ऊपर से सिंथेटिक रंग चढ़ाया गया था ताकि यह ताजा लगे। जैसे-जैसे कार्रवाई तेज हुई, कुछ दुकानदारों ने सड़ा हुआ मांस पानी में फेंकना शुरु कर दिया, ताकि पकड़े न जाएँ। कई जगहों पर नालों और तालाबों में खराब मांस तैरता मिला। पुलिस की सख्ती से घबराकर दुकानदार माल छिपाने लगे।

इस बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने फूड सेफ्टी अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। उन्होंने जरूरी निर्देश जारी किए। पुलिस उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है जो सड़ा हुआ मांस बेच या जमा कर रहे हैं।

अब राज्य की सीमाओं के पास लैब बनाए गए हैं जहाँ मांस की जाँच की जा रही है। इसके अलावा बाजारों में मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन भी लगाई गई हैं। इन वैनों से होटल और ढाबों में बिकने वाले मांस की जाँच की जा रही है।

इस घटना के बाद अब मांस बाजार को ज़्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा रहा है। सरकार ने मांस बेचने वालों, सप्लायरों और व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन कराने का आदेश दिया है। अब बिना रजिस्ट्रेशन कोई मांस नहीं बेच सकेगा।

फूड डिपार्टमेंट ने कहा है कि पैक किए गए मांस पर साफ-साफ जानकारी होनी चाहिए। उस पर बनने की तारीख, बैच नंबर, खत्म होने की तारीख और बनाने वाली कंपनी का नाम लिखा होना ज़रूरी है। इसके अलावा फ्रोजन मांस को -18 डिग्री तापमान में रखना अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों को भारी जुर्माना देना होगा। यह जुर्माना 5 से 10 लाख रुपए तक हो सकता है या फिर 6 साल तक की जेल भी हो सकती है।

फूड सेफ्टी कश्मीर के असिस्टेंट कमिश्नर हिलाल अहमद मीर के मुताबिक, सिर्फ एक हफ्ते में गांदरबल, पुलवामा और श्रीनगर से 3000 किलो से ज्यादा सड़ा मांस बरामद किया गया है। उन्होंने बताया कि अब सड़ा मांस सड़कों के किनारे, नालों और नदी-नालों में भी मिल रहा है। जैसे ही निगरानी बढ़ी तो गलत काम करने वाले लोग मांस को छिपाने लगे और उसे इधर-उधर फेंकने लगे।

सिर्फ सड़ा मांस ही नहीं, फूड सेफ्टी विभाग ने 2500 कबाब भी जब्त किए हैं। ये कबाब ऐसे फ्रोजन मांस से बनाए गए थे, जिसमें गलत और खतरनाक रंग मिलाया गया था। श्रीनगर में 150 किलो मटन के गोले (गुश्ताबा) भी नष्ट किए गए हैं। यह सारा माल लोगों की सेहत के लिए खतरनाक था।

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

26 अगस्त 2025 को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। कोर्ट ने वकील मीर उमर द्वारा दायर की गई याचिका के लिए वरिष्ठ वकील जहाँगीर इकबाल गनई को कोर्ट का सहायक नियुक्त किया। यह याचिका एडवोकेट मीर उमर ने दायर की थी। याचिका में यह आरोप लगाया गया कि जम्मू-कश्मीर, खासकर कश्मीर घाटी में सड़ा, गंदा और बीमार मांस और पोल्ट्री लंबे समय से तस्करी के जरिए लाया जा रहा है।

कोर्ट ने इस याचिका और उसमें दिए गए तथ्यों को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि सड़े मांस और पोल्ट्री के साथ-साथ बिना निगरानी के बिकने वाले अन्य खाद्य पदार्थ भी जनता की सेहत के लिए खतरा हैं। यह मामला सीधे आम लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 2017 में कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर ने एक आदेश जारी किया था। उस आदेश में सड़ा हुआ मांस और पोल्ट्री घाटी में लाने पर पूरी तरह से रोक लगाने को कहा गया था। लेकिन इसके बावजूद कई सालों से गंदा और बीमार मांस गैरकानूनी तरीके से लाया जा रहा है। कोर्ट के आदेश होने के बावजूद ज़िम्मेदार अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं।

याचिका में यह भी कहा गया कि विभाग में कर्मचारियों और संसाधनों की भारी कमी है। इस वजह से फूड सेफ्टी के नियमों को ठीक से लागू नहीं किया जा पा रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार ने भी इस मामले में लापरवाही बरती है। खासकर फूड सेफ्टी ऑफिसरों की भर्ती के मामले में सरकार ने ज़रूरी कदम नहीं उठाए।

इस बीच जम्मू-कश्मीर की फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की कमिश्नर स्मिता सेठी ने कोर्ट को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि त्योहारों से पहले लगातार छापे मारे जा रहे हैं। इन छापों में 12,000 किलो मांस जब्त किया गया है। इसके अलावा 21 क्विंटल नकली पनीर और 440 क्विंटल एक्सपायर रसगुल्ला भी पकड़ा गया है। यह सारी कार्रवाई लोगों की सेहत को ध्यान में रखकर की जा रही है।

स्मिता सेठी ने बताया कि 25 अगस्त 2025 को जम्मू में एक बड़ी रेड की गई थी। 26 अगस्त 2025 को करीब 100 किलो नकली पनीर जब्त किया गया। अब तक कुल 12,000 किलो मांस, 21 क्विंटल नकली पनीर और 440 क्विंटल एक्सपायर रसगुल्ले जब्त किए जा चुके हैं। रसगुल्ले एक्सपायर थे, फटे हुए टिन में रखे गए थे और उन पर कोई पैकिंग या लेबल नहीं था। ये ठंडे गोदामों में बिना सही तरीके से रखे गए थे और बाजार में बेचने की तैयारी थी। चूंकि इन्हें ठीक से स्टोर नहीं किया गया था, इसलिए सब नष्ट कर दिए गए।

जिन दुकानों या फैक्ट्रियों ने नियमों का उल्लंघन किया और सड़ा मांस बेचा, उनके लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं। इनमें श्रीनगर की अल-तक़वा फूड्स, आरिफ एंटरप्राइजेस, सनशाइन फूड्स, अनमोल फूड्स, और अनंतनाग की डोमिनोज़ पिज्जा, शौन शाही बिरयानी, शान फिश फ्राई, बिस्मिल्लाह स्वीट्स और खंडे पोल्ट्री शामिल हैं। अधिकारियों ने साफ कहा है कि ऐसे काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छापेमारी के बाद भोजनालयों में ग्राहकों की कमी

इस साल 22 अप्रैल 2025 में पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित इस्लामी आतंकियों ने बड़ा हमला किया था। इस हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आतंकियों ने सिर्फ इसलिए उन्हें निशाना बनाया क्योंकि वे हिंदू थे। उस समय जम्मू-कश्मीर में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा था और विकास हो रहा था। लेकिन इस हमले के बाद होटल बुकिंग और यात्राएँ बड़ी संख्या में रद्द होने लगीं। इससे पर्यटन को बड़ा झटका लगा, जबकि कश्मीर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर ही टिका है।

धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए और पर्यटक फिर से घाटी आने लगे। लेकिन अब सड़े मांस का मामला सामने आने से पर्यटन की छवि को फिर से नुकसान पहुँचा है। इससे पर्यटकों के मन में डर और अविश्वास पैदा हुआ है। इस गिरते भरोसे को दोबारा पाने के लिए कश्मीर के रेस्टोरेंट्स अब फेमस फूड व्लॉगर्स की मदद ले रहे हैं। ये व्लॉगर्स यह दिखाते हैं कि मांस कहाँ से लाया जा रहा है और सफाई के क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं।

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच राजस्थान में मिला 2000 किलो विस्फोटक, लावारिस गाड़ी से पुलिस ने किया बरामद: जयपुर का मामला, FIR दर्ज

                 विस्फोटक भरी गाड़ी (बाएँ) को पुलिस ने जब्त कर लिया है (प्रतीकात्मक फोटो साभार: Jagran)
राजस्थान के भीतर एक गाड़ी में 2 हजार किलोग्राम से अधिक विस्फोटक मिला है। यह विस्फोटक एक लावारिस गाड़ी में रखा गया था। विस्फोटक को पुलिस ने जब्त कर लिया है। पुलिस इस विस्फोटक के मालिक का पता लगाने का प्रयास कर रही है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विस्फोटक जयपुर में जयपुर-भरतपुर हाईवे पर खड़े एक पिकअप से बरामद हुआ है। इस पिकअप से 2075 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और ऑप्टी स्टार विस्फोटक जब्त किया गया है। यह बरामदगी 10 मई 2025 की रात करीब 2.30 बजे मोहनपुरा पुलिया के पास आगरा रोड पर एक दुकान से बरामद हुआ है।

पुलिस ने बताया कि यहाँ एक लावारिस सफेद रंग का पिकअप ट्रक खड़ा था। इस गाड़ी का स्टीयरिंग लॉक था और भीतर कई संदिग्ध डिब्बे दिखाई दे रहे थे। पुलिस को ट्रक से 63 डिब्बे मिले। इसमें मौजूद हर डिब्बे में 12 बंडल थे, जिनका वजन 25 किलोग्राम था। पुलिस ने ऐसे 756 बंडल बरामद किए।

डिब्बों पर ऑप्टी स्टार एक्सप्लोसिव क्लासिक का लेबल लगा था। यहाँ इसके अलावा 10 प्लास्टिक बैग भी मिले। 50 किलोग्राम वजनी इन बैग पर अमोनियम नाइट्रेट का लेबल लगा था। जाँच में पुष्टि हुई कि बरामद किया गया सामान विस्फोटक सामग्री था।

पुलिस ने इस बरामदगी के बाद पिकअप के रजिस्ट्रेशन नंबर की जाँच की। इसमें पता चला कि पिकअप भीलवाड़ा के ईश्वर सिंह के नाम से रजिस्टर्ड है। पुलिस ने पिकअप के मालिक और ड्राइवर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क स्थापित नहीं हो पाया। पुलिस ने पिकअप को जब्त कर लिया है।

पुलिस ने अब मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता करने का प्रयास कर रही है कि विस्फोटक कहाँ से आए और इसका उपयोग कहाँ किया जाना था ? यह भी पता लगाने का प्रयास हो रहा है कि इसका इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि में तो नहीं होना था। यह सावधानी भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े हुए तनाव के चलते और भी बढ़ गई है।

प्रयागराज के जिस मदरसे में छपते थे जाली नोट, उसे तुर्की-अरब से करोड़ों की फंडिंग: फर्जी आधार कार्ड का भी धंधा, 630 छात्रों की तलाश

प्रयागराज के जिस मदरसे में बरामद हुए नकली नोट उसे विदेश से हुई है करोड़ों रुपयों की फंडिंग (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के जिस मदरसे में नकली नोट छापने की मशीन पकड़ी गई थी वहाँ के बारे में जाँच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जाँच एजेंसियों को अब उन 630 छात्रों की तलाश है जो यहाँ से पढ़ाई कर के निकले हैं। आशंका जताई जा रही है कि मौलवी तफसीरुल इन इन सभी का ब्रेनवॉश किया होगा। इस मदरसे को हर साल लगभग 48 लाख रुपए विदेशों में फंडिंग मिलने की भी जानकारी सामने आई है। मामले की पड़ताल में पुलिस के अलावा ATS और IB की टीमें भी जुट गईं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मदरसे में नकली नोट छापने के साथ RSS को आतंकी संगठन बताया जाता था वहाँ से अब तक लगभग 630 छात्र पढ़ाई कर के निकल चुके हैं। मौलवी तफसीरुल मदरसे में लगभग 6 साल से पढ़ा रहा था। प्रतिवर्ष औसतन 105 छात्र मदरसे से पढ़ाई कर के निकले हैं। जाँच एजेंसियों को आशंका है कि मौलवी तफसीरुल ने इन्हें भी कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया होगा। ये छात्र देश के अलग-अलग राज्यों में हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस के साथ ATS और IB की टीमें भी इनकी खोज में 6 प्रदेशों में गईं हैं।

ATS ने बुधवार (4 सितंबर, 2024) को प्रयागराज पहुँच कर जाँच शुरू की है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम 28 अगस्त को ही प्रयागराज पहुँच चुकी थी। अब तक हुई जाँच में यह सामने आया है कि मदरसे में हर साल विदेशों से लाखों रुपए भेजे जाते थे। तुर्की और सऊदी अरब मिला कर प्रतिवर्ष 48 लाख रुपए भेजे जाने के प्रमाण भी मिले हैं। अब तक हुई कुल फंडिंग 2 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। मदरसा कमिटी के मैनेजर शाहिद के मुताबिक, ये पैसे दूसरे देशों से मदद के तौर पर भेजी जाती है।

इसी से मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों की तालीम से ले कर उनके रहने आदि के खर्च व मेंटेनेंस का हिसाब-किताब किया जाता है।

जाँच एजेंसियों ने पैसे भेजने वालों की पहचान उजागर नहीं की है लेकिन उनके पाकिस्तान ने कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। ATS और IB की टीमें यह पता लगाने में भी जुटी हैं कि जिस खाते में विदेशों से पैसे आते थे उन्हें हैंडल कौन करता था। विदेशों से पैसे मँगाने के मामले में अब तक 12 बैंक खाते रडार पर हैं। मदरसे के प्रिंसिपल मौलवी तफसीरुल के परिजनों और रिश्तेदारों के भी खातों की डिटेल तलब की गई है। अन्य खातेदारों में अधिकतर मदरसा कमेटी से जुड़े हुए लोग हैं। इस बावत संबंधित बैंकों से भी लेन-देन का ब्यौरा तलब किया गया है।

इसी केस में मौलवी के साथ पकड़े गए ओडिशा के अब्दुल जहीर के पास मिला आधार कार्ड फर्जी बताया जा रहा है। उसे नकली नोट की ही तरह जाली आधार कार्ड बनाने का एक्सपर्ट माना जा रहा। IB की पूछताछ में अब्दुल जहीर ने कबूल किया है कि फर्जी आधार कार्ड बनाने के रैकेट में ओडिशा में मौजूद उसका भाई भी शामिल है। मदरसे से जुड़े कुछ लोगों का पिछले 5 वर्षों से अलग-अलग देशों में आना-जाना लगा हुआ है। इनके साथ कुछ अन्य राज्यों से भी मदरसे का कनेक्शन पाया गया है। जाँच एजेंसियाँ इन सभी लोगों की पड़ताल में जुटी हैं।

राजस्थान : ट्रॉली में भर-भर कर जब्त हुए पत्थर, ईदगाह बवाल में छतों पर थी पूरी तैयारी: अब तक 65 के खिलाफ FIR, 51 गिरफ्तार

         जोधपुर हिंसा, आरोपितों के घरों की छतों पर मिले भारी मात्रा में पत्थर (फोटो साभार : अमर उजाला/भास्कर)
राजस्थान के जोधपुर में शुक्रवार (21 जून 2024) को बवाल हो गया। तनाव को देखते हुए रविवार (23 जून 2024) को प्रशासन ने हिंसा के आरोपितों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया और ड्रोन से इलाके की छानबीन की, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की आँखें खुली की खुली रह गई, क्योंकि कई छतों पर भारी मात्रा में पत्थर मिले हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसा के दौरान पत्थरबाजी में हुआ था।

जिन स्थानों से पत्थरों का जखीरा बरामद हो, उसे जमींदोज़ ही नहीं बल्कि जब तक इन्हे मिलने वाली हर सरकारी सुविधा से वंचित नहीं किया जाएगा, तब तक ये उपद्रवी और इनके समर्थक सुधरने वाले नहीं। ये हाल है अपने आपको गरीब, मजलूम और डरा हुआ बताने वालों का। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते शुक्रवार को जोधपुर के सूरसागर थाना इलाके में स्थित एक ईदगाह का गेट हिंदू मोहल्ले की तरफ खोले जाने का विरोध हुआ, तो मुस्लिमों ने जमकर पथराव किए। इस पथराव में कई गाड़ियाँ टूट गई, तो एक दुकान को भी आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा की इन घटनाओं में एक महिला की आँख की रोशनी चली गई। इस मामले में अब तक 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिसमें से 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इस बीच, पूरे इलाके में तनाव बरकरार है।

इस तनाव के बीच, पुलिस प्रशासन ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र में स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। इस बीच सामने आया कि लोगों ने घरों पर पथराव करने के लिए पत्थर जमा कर रखे थे। पुलिस के अनुसार यह पत्थर करीब दो ट्रॉली थे। इस खुलासे के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि विवाद को लेकर लोगों ने पहले ही पथराव करने की प्लानिंग कर रखी थी। इस दौरान जोधपुर के 5 थाना क्षेत्रों में धारा 144 लागू होने के कारण क्षेत्र रविवार को सन्नाटा छाया रहा। वहीं पुलिस बलों ने पूरी स्थिति पर नियंत्रण रखा।

पुलिस के अनुसार चिन्हित मकान पर करीब दो ट्रॉली पत्थर बरामद हुआ है। इस मामले में पुलिस ने घरों के लोगों को नामजद किया है और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी हैं। घरों के ऊपर पत्थर मिलने की घटना से चर्चा तेज हो गई है कि लोगों ने इस विवाद को देखते हुए पहले से ही पथराव करने की प्लानिंग बना ली थी।

सूरसागर क्षेत्र में पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने पूरे इलाके में पुलिस तैनात कर धारा 144 लागू कर दी। इसको लेकर अब तक पुलिस 51 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के अधिकारी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की छानबीन की जा रही हैं। हिंसा के इस मामले में अब तक 51 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, तो 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

दूसरे राज्यों के 63 बच्चों को ट्रक में लादकर भेजा जा रहा था महाराष्ट्र के मदरसे; ड्राइवर फरार

नाबालिग मुस्लिम बच्चे
महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार (17 मई 2023) को कोल्हापुर शहर में 63 नाबालिग मुस्लिम लड़कों को ले जा रहे एक ट्रक को रोक कर पकड़ लिया। इन मुस्लिम लड़कों की उम्र 7 से 13 साल के बीच है। ये सारे बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के हैं। इन्हें बिहार से ट्रेन के जरिए शहर में लाया गया था।

जानकारी के अनुसार, इन लड़कों को तालीम के लिए कोल्हापुर जिले के अजरा स्थित एक मदरसे में भेजा जा रहा था। यह घटना तब सामने आई, जब एक हिंदू संगठन के सदस्य विजयेंद्र माने ने शहर के रुईकर कॉलोनी में ट्रक को देखकर संदेह जताया। ट्रक चालक से पूछने पर वे मौके से फरार हो गए। इसके बाद माने का शक और गहरा गया।

विजयेंद्र माने ने पुलिस और हिंदू संगठनों के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाया। हिंदू संगठन के लोगों ने इस मामले में पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने बच्चों को हिरासत में लिया और कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उन्हें सौंपे गए ट्रेन टिकटों की जाँच की। पूछताछ के दौरान नाबालिग लड़कों ने खुलासा किया कि उनमें से कुछ बिहार से, कुछ उत्तर प्रदेश से और कुछ पश्चिम बंगाल से हैं।

हिंदूवादी संगठनों ने इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कई प्रासंगिक सवाल पूछे- ये बच्चे कौन हैं, कोल्हापुर क्यों आए थे, क्या उन्हें मजबूर किया गया था, ट्रक में क्यों ले जाया जा रहा था आदि। संगठनों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

ट्रक को रोकने में पुलिस की मदद करने वाले हिंदू संगठन के सदस्यों में विजयेंद्र माने, विजय खाड़े, विवेक वोरा, नितिन मिसाल, अनिकेत पाटिल, अनिकेत मोदकी, सुनील पाटिल, प्रसाद पटोले, अमेय भालकर, बजरंग दल के बांदा सालुंखे, प्रशांत कागले, अनिल चौगुले, सुजीत पाटिल और अवधूत भाटे प्रमुख हैं। बीजेपी से जुड़े विजयेंद्र माने ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्रों के पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं थे।

विजयेंद्र माने ने कहा, “मैंने ट्रक को आज सुबह रुइकर कॉलोनी में देखा, क्योंकि यह महाराजा होटल नाम के एक होटल के सामने खड़ा था। मैंने बच्चों से पूछा कि वे कौन हैं, वे यहाँ क्यों आए हैं। लेकिन उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। बाद में पता चला कि उन्हें कोल्हापुर के अजरा के एक मदरसे में ले जाया जा रहा था। उनके पास कोई पहचान पत्र भी नहीं है।”

कोल्हापुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी मंगेश चव्हाण ने पुष्टि की है कि छात्रों को आगे की प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में जाँच की। हमें पता चला कि ये छात्र लंबे समय से अज़रा मदरसा में पढ़ रहे हैं। उन्हें छुट्टियों में उनके घर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल भेजा गया था। अब उन्हें वापस लाया गया है।”

हालाँकि, पुलिस ने यह भी कहा कि मामले की विस्तृत जाँच की जाएगी और छात्रों को राज्य बाल कल्याण संघ द्वारा गठित समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। कुछ मीडिया संगठनों का दावा है कि कुल 69 नाबालिग मुस्लिम लड़के थे, जबकि अन्य ने कहा है कि 63 नाबालिग मुस्लिम छात्रों को हिरासत में लिया गया है।


दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को जब्त करेगी केंद्र सरकार

मुस्लिम वोट बैंक को खुश रखने के लिए बनाया वक़्फ़ बोर्ड हिन्दुओं के कितना घातक होगा, कांग्रेस में नेता बन रहे किसी हिन्दू ने हिन्दू हित के बारे में क्यों नहीं सोंचा? क्या कांग्रेस में हिन्दू जयचन्द की भूमिका निभा रहे थे? अगर 1400 वर्ष आये इस्लाम की इतनी भूमि हो सकती है, इस्लाम से शताब्दियों पूर्व से भारत में जो हिन्दू सम्राट शासन के युग वाली भूमि कहाँ है? ये तो वही बात हो रही है कि अपनी ही भूमि से हिन्दुओं को बेदखल कर वक़्फ़ बोर्ड द्वारा अधिकार करने से रोकना होगा। मुस्लिम तुष्टिकरण की इस कड़ी को तोडना होगा। हिन्दुओं को उन सभी कांग्रेसी हिन्दू नेताओं को जवाबदेही बनाना होगा। आखिर हिन्दुओं के साथ इतना खतरनाक खिलवाड़ क्यों किया?   

केंद्र सरकार ने दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) से जुड़ी 123 संपत्तियों को अपने अधिकार में लेने का ऐलान किया है। दिल्ली वक्फ बोर्ड की इन संपत्तियों में मस्जिद, कब्रिस्तान और दरगाह शामिल हैं। केंद्र के इस फैसले पर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने कहा है कि वह सरकार को इन संपत्तियों पर कब्जा नहीं करने देंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वक्फ बोर्ड की यह संपत्तियाँ केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के कब्जे में रहेंगी। इस मामले में, उप भूमि और विकास अधिकारी ने 8 फरवरी, 2023 को वक्फ बोर्ड को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को सभी मामलों से ‘मुक्त’ करने के बारे में कहा गया है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति में इस कब्जे को लेकर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय ने कहा है कि रिटायर्ड जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में गैर-अधिसूचित वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर कहा गया है कि उसे दिल्ली वक्फ बोर्ड से कोई प्रतिनिधित्व या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। भूमि एवं विकास कार्यालय के पत्र के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने इस समिति का गठन किया था।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को जब्त करने को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक और बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) ने कहा है कि वह संपत्तियों पर कब्जा नहीं होने देंगे। अमानतुल्लाह ने ट्वीट कर कहा है, “अदालत में हमने 123 वक्फ संपत्ति पर पहले ही आवाज उठाई है। उच्च न्यायालय में हमारी रिट याचिका संख्या 1961/2022 लंबित है। कुछ लोगों द्वारा इस बारे में झूठ फैलाया जा रहा है। इसका सबूत आप सबके सामने है। हम वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं होने देंगे।”

अमानतुल्लाह खान ने 18 फरवरी 2023 को केंद्रीय मंत्रालय के उप भूमि और विकास अधिकारी को दिए जवाब में कहा है कि दो सदस्यीय समिति के गठन के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड ने जनवरी 2022 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मुस्लिम इन 123 संपत्तियों का उपयोग कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड की तरफ से नियुक्त प्रबंध समिति या मुतवल्ली इन सभी संपत्तियों की देखरेख करते हैं।

ये सभी संपत्तियाँ कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड को दे दी गईं थीं। इन संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को देने को लेकर ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अगस्त 2014 में हाई कोर्ट ने आदेश का पालन करते हुए मंत्रालय ने हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने ही दिल्ली वक्फ बोर्ड के सभी हित धारकों और प्रभावितों के पक्ष को सुनते हुए रिपोर्ट जारी की है।