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छात्र झारखंड के, राष्ट्रगान बांग्लादेश-पाकिस्तान का, जनजातीय लड़कियों से ‘लव जिहाद’, फिर ‘लैंड जिहाद’: HC चिंतित, मरांडी ने की NIA जाँच की माँग

              झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाई आवाज़
झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आवाज़ उठाई है। बांग्लादेशी घुसपैठ के राज्य में क्या दुष्परिणाम हो रहे हैं, ये बताने के लिए उन्होंने 4 साल पुरानी एक खबर भी साझा की है। बता दें कि तब घाटशिला के एक स्कूल में बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि झारखंड को ‘मिनी बांग्लादेश’ बनाने की साजिश चरम पर है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तब अख़बार में छपी खबर की तस्वीर शेयर की। साथ ही उन्होंने लिखा, “LKG और UKG कक्षा के बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान रटवा कर नन्ही उम्र में ही ब्रेनवॉश किया जा रहा है। यह संयोग नहीं, बल्कि झारखंड की आदिवासी मूलवासी पहचान को मिटाने का खतरनाक प्रयोग है। देश विरोधी गतिविधि में संलिप्त इस स्कूल का संचालन और फंडिंग करने वाले गिरोह की सघनता से जाँच करने की आवश्यकता है।”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अपने संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों के फ़र्जी कागजात तैयार कर उन्हें झारखंड में बसाने वाली झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार से ऐसे संवेदनशील विषयों में कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस कारण उन्होंने NIA से अनुरोध किया है कि वो मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करें। बता दें कि जुलाई 2020 में जब ये मामला सामने आया था, तब भी ये काफी तूल पकड़ा था। उस समय भी आरोप लगाया गया था कि झारखंड में शिक्षा का इस्लामीकरण शुरू हो गया है।

हाल ही में झारखंड उच्च न्यायालय ने भी इस समस्या पर चिंता जताई है, जिसके बाद ये मामला फिर से गर्म हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिह्नित कर उनके प्रत्यर्पण के लिए एक एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा है। संथाल परगना क्षेत्र में ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ PIL पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ऐसा कहा। राज्य सरकार को 2 हफ़्तों के भीतर एफिडेविट दायर करने के लिए कहा गया है।

झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रभाव बढ़ने का सबसे अधिक खामियाजा जनजातीय समाज को भुगतना पड़ता है। मशरूम की तरह अवैध मदरसे उग रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ जा जनजातीय समाज की लड़कियों को फाँस कर शादी कर ली जाती है, फिर उन लड़कियों को पंचायत चुनाव में खड़ा कर दिया जाता है। जनप्रतिनिधि का पद परिवार में आ जाने के बाद ये लोग उसकी आड़ में ड्रग्स तक का धंधा भी करते हैं। साथ ही अन्य घुसपैठियों को सरकारी फायदे दिलाने के लिए उनके दस्तावेज भी बना दिए जाते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने जो खबर शेयर की है, वो ये बताता है कि कैसे शिक्षा व्यवस्था पर इस्लामी प्रभाव पड़ने के कारण बच्चे अपने देश की संस्कृति भूलते चले जाते हैं। ‘नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर’ नामक स्कूल में छात्रों को भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। अभिभावकों का कहना था कि वो अपने बच्चों को पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान नहीं पढ़ने देंगे। विद्यालय प्रबंधन को ये टास्क विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था।

अवलोकन करें:-

क्यों अदालतें कह रहीं- धर्मांतरण रोको, घुसपैठियों को भगाओ?

हमने बिहार में भी इसका प्रभाव देखा है, जहाँ सीमांचल में मुस्लिम आबादी बढ़ने और घुसपैठियों को शरण मिलने के बाद रविवार की जगह शुक्रवार (जुमा) के दिन साप्ताहिक अवकाश दिया जाने लगा। बड़ी बात ये है कि झारखंड वाली समस्या पर भाजपा विरोधी राजनीतिक दल भी चुप रहते हैं, जबकि वो खुद को पिछड़ों का रहनुमा कहते नहीं थकते हैं। जनजातीय समाज की समस्याओं पर उनकी चुप्पी मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर उनके झुकाव को प्रदर्शित करती है।

अरविंद केजरीवाल ने खालिस्तानी संगठन से लिए 133 करोड़ रूपए, उप-राज्यपाल ने की NIA जाँच की सिफारिश: USA के गुरुद्वारा में बैठक, पन्नू के SFJ से डील;केजरीवाल तो एक झांकी है, many heads to roll from almirah.

अमेरिका में गुरूद्वारे में खालिस्तानियों से साठगांठ करते अरविन्द केजरीवाल 

अरविन्द केजरीवाल की गिरफ़्तारी होने पर लिखा था कि ईमानदारी का चोला ओढ़े घूम रहे केजरीवाल की RAW एवं अन्य सुरक्षा जाँच एजेंसियों द्वारा भी जाँच करनी चाहिए। 26 जनवरी को लाल किला पर हुए हंगामे के बाद तथाकथित किसान आंदोलन को समर्थन दे रही किसी भी पार्टी ने समर्थन वापस नहीं लिया। जो अति गम्भीर मसला था। देशहित में समस्त पार्टियों को केंद्र सरकार के साथ खड़ा होकर लाल किला पर उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त से कार्यवाही करने के लिए प्रोत्साहित करना था, किसी पार्टी ने नहीं ऐसा किया। सब अपना स्वार्थ साधने मोदी सरकार घेरते नज़र आए। अब कल(मई 6) दिल्ली के उपराज्यपाल ने जो NIA द्वारा केजरीवाल की जाँच करने का आदेश भी बहुत देर से आया। केजरीवाल तो एक झांकी है, many heads to roll from almirah.  

दिल्ली शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। आरोप है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ने खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ से फंडिंग ली है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसकी आतंक निरोधी एजेंसी NIA से जाँच कराने की सिफारिश की है।

दरअसल, इस संबंध में उपराज्यपाल को एक शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP को देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने और खालिस्तान समर्थक भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए फंड मिले थे। इसके लिए खालिस्तानी आतंकी समूहों से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 133.60 करोड़ रुपए) मिले थे।

दरअसल, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव आशू मोंगिया और आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मुनीश कुमार रायजादा ने इस संबंध में 1 अप्रैल 2024 को उपराज्यपाल को पत्र लिखा था। इसमें आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर लेने का आरोप लगाया गया था।

पत्र में कहा गया था कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने यह रकम 2014 से लेकर 2022 के बीच में खालिस्तानी संगठन से ली है। इसमें यह भी कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल और खालिस्तान समर्थक सिखों के बीच साल 2014 में अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित गुरुद्वारा रिचमंड हिल्स में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में केजरीवाल ने खालिस्तानी देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने का वादा किया था।

उपराज्यपाल द्वारा केंद्रीय गृह सचिव को NIA जाँच के लिए लिखी गई चिट्ठी के अनुसार, भुल्लर को रिहा करने के बदले में अरविंद केजरीवाल ने अपनी आम आदमी पार्टी के लिए वित्तीय सहायता की माँग की थी। इस बैठक की तस्वीरें रायजादा ने अपने सोशल मीडिया साइट X (पहले ट्विटर) पर साल 2014 में साझा भी की थी।

आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मनीश कुमार रायजादा और आशू मोंगिया द्वारा लिखी गई चिट्ठी के आधार पर उपराज्य ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 27 जनवरी 2014 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर प्रोफेसर भुल्लर को क्षमा देने की भी अपील की थी।