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एक ‘पत्रकार’ ने कहा- रं#@, दूसरे ने कहा- गला काट देंगे: महाराष्ट्र की एक्टिविस्ट नाजिया इलाही खान को इस्लामी कट्टरपंथियों ने दी जान से मारने की धमकी, शेयर किए वीडियो


महाराष्ट्र की एक्टिविस्ट नाजिया इलाही खान को इस्लामी कट्टरपंथियों ने जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। नाजिया इलाही खान ने कहा कि दो मुस्लिम युवक ने अलग-अलग वीडियो बनाकर उन्हें धमकियाँ और गालियाँ दीं। अपने एक्स अकाउंट पर क्लिप शेयर करते हुए नाजिया खान ने लिखा कि उनमें से एक व्यक्ति मुस्लिम पत्रकार था और दूसरे ने खुलेआम गला काटने की धमकी दी।

सुप्रीम कोर्ट की वकील नाज़िया वो दबंग महिला है जो मुस्लिम कुरीतियों पर बड़ी बेबाकी से बोलती हैं, जिस वजह से कट्टरपंथी इनसे बहुत दुखी रहते हैं। वैसे मुस्लिम कुरीतियों पर पाकिस्तान की आरजू काज़मी आदि और भी अनेक मुस्लिम महिलाएं है जो कट्टरपंथियों पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। 72 हूरों, सर तन से जुदा, बुर्का/हिजाब हो या नकाब या फिर औरतों का मर्दों के साथ खड़े होकर नमाज नहीं पढ़ने पर कट्टरपंथियों पर जब जोरदार हमला करती हैं देखते ही बनता है।  

इन बेबाक महिलाओं और जितने भी exMuslim हैं सभी का मानना है कि मुल्लाओं ने मुसलमानों को इतना ज्यादा डरा कर रखा हुआ है कि सच सुनने की आदत नहीं। जो सच बोलता है सर तन से जुदा गैंग को सड़क पर उतर माहौल ख़राब कर देते हैं। और आम मुसलमान समझता है कि इस्लाम की तौहीन हुई है।       

नाजिया ने गाली-गलौज करने वाले मुस्लिम ‘पत्रकार’ का वीडियो किया शेयर

पहली वीडियो शेयर करते हुए नाजिया ने लिखा, “ये सलमान हैं, एक मुस्लिम पत्रकार! ये शायद महाराष्ट्र से हैं! ये पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का प्रतिनिधित्व करते हैं, फिर भी इस रिपोर्ट में ये मुझे वेश्या कह रहे हैं! क्या किसी मुस्लिम पत्रकार के लिए किसी महिला पर गंदी और अपमानजनक बातें कहना जायज है? इसीलिए ये खुलेआम मुझे वेश्या कह रहे हैं!”

नाजिया द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सलमान नाम का व्यक्ति को अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते सुना जा सकता है। वह कहता है कि नाजिया की हरकतों ने उसे इतना गुस्सा दिलाया कि उसका मन उसे मारने का हुआ, लेकिन वह मजबूर था इसीलिए ऐसा नहीं कर सका। इसके बाद उसने नाजिया के परिवार और परवरिश पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर यह ऐसी है तो इसकी माँ कैसी होगी।”

नाजिया का नाम लेते हुए सलमान ने कहा, “पीछे जो महिला दिखाई दे रही है, वह नाजिया इलाही खान है। वह न तो खान है, न नाजिया है और न ही उसका इलाही नाम से कोई नाता है।” इसके बाद उसने नाजिया के लिए एक अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘रं**’ कहा। उसने यह भी कहा कि वह यह शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहता था, लेकिन उसे ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

एक मुस्लिम युवक ने गला काटने की दी धमकी

ऐसी ही धमकी भरी एक और वाडियो नाजिया इलाही खान ने शेयर की, जिसकी पहचान उन्होंने महाराष्ट्र के औरंगाबाद के अब्दुल के रूप में बताई। अब्दुल ने नाजिया को सीधे जान से मारने की धमकी दी।

वीडियो शेयर करते हुए नाजिया ने लिखा, “यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद का अब्दुल है, जो मेरा गला काटने की धमकी देते हुए वीडियो बना रहा है! और वह जेल जाने को भी तैयार है!”

वीडियो में अब्दुल कहता है, “तू कौन होती है हमरा नबी के खिलाफ बोलने वाली। तेरा ऐसा हाल करूँगा कि कभी नहीं भूलेगी। चाहे जेल क्यों न जाना पड़े।”

एक्टिविस्ट नाजिया इलाही खान ने इन दोनों वीडियो को उन धमकियों और गालियों के उदाहरण के रूप में साझा किया, जो उनके अनुसार उन्हें सोशल मीडिया पर कुछ मुस्लिम यूजर्स की ओर से मिल रही हैं। ये घटनाएँ नाजिया इलाही खान से जुड़े विवादों की लंबी श्रृंखला में एक नया अध्याय हैं। वह अक्सर सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर होने वाली तीखी बहसों के केंद्र में रही हैं। फिलहाल, उनके द्वारा साझा किए गए इन दोनों वीडियो पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी किसी भी एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और सम्मान: अब इजराइल से मिला सर्वोच्च सम्मान


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता के नए प्रतिमान बना रहे हैं। दुनिया के सबसे सम्मानित नेता पीएम मोदी को एक और सम्मान से सम्मानित किया गया है। अब उन्हें इजराइल के सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’से नवाजा गया। 25 फरवरी को पीएम मोदी की इजराइल की राजकीय यात्रा एक ऐतिहासिक उपलब्धि की गवाह बनी। पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत और इजरायल की दोस्ती को समर्पित किया। यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रधानमंत्री के सशक्त वैश्विक नेतृत्व और भारत-इजराइल के बीच दशकों पुराने राजनयिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उनके प्रयासों के लिए दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी को अब तक 30 देशों से 30 अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें इससे पहले ओमान के सर्वोच्च अवार्ड, इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान, श्रीलंका मित्र विभूषण पुरस्कार, मॉरीशस से द ग्रांड कमांडर ऑफ ऑर्डर ऑफ स्टार एंड की ऑफ इंडियन ओशन, बारबाडोस से ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस, कुवैत से द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर, डोमिनिका से डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर, गयाना से ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस, नाइजीरिया से द ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर और रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल मिल चुके हैं।

25.02.2026
इजराइल के सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में बेहतरीन योगदान के चलते इजराइल के सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत-इजरायल साझेदारी बनाने में पीएम मोदी की खास भूमिका को सही पहचान देता है। पीएम मोदी ने इजरायल के सर्वोच्च सम्मान मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे नेसेट मेडल पाकर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। मैं इसे विनम्रता और आभार के साथ स्वीकार करता हूं। यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि भारत-इजरायल की दोस्ती पर मुहर है। यह उन साझा मूल्यों को दिखाता है, जो हमारे दोनों देशों को रास्ता दिखाते हैं।” पीएम मोदी ने सम्मानित होने से पहले इजरायली संसद नेसेट को संबोधित किया और इस सम्मान के लिए इजरायल की संसद का आभार जताया।

18.12.2025
ओमान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’
ओमान के सुल्तान सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद ने प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओमान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि ओमान के विकास में भारतीय समुदाय के योगदान और भारत की बढ़ती वैश्विक साख के प्रति ओमान के गहरे सम्मान का प्रतीक है। इस गौरवशाली उपलब्धि पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मान उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि भारत की 140 करोड़ जनता और ओमान में रह रहे लाखों परिश्रमी भारतीयों के सामर्थ्य का सम्मान है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ‘मैत्री’ और भरोसे के रिश्ते को समर्पित किया।

16.12.2025
इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’
प्रधानमंत्री डॉ अबी अहमद ने प्रधानमंत्री मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया। यह सम्मान उन्हें भारत-इथियोपिया साझेदारी को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है। इस पुरस्कार को प्राप्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘अभी-अभी मुझे ‘Great Honour Nishan of Ethiopia’ के रूप में, इस देश का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया है। विश्व की अति-प्राचीन और समृद्ध सभ्यता द्वारा सम्मानित किया जाना, मेरे लिए बहुत गौरव की बात है। मैं सभी भारतवासियों की ओर से इस सम्मान को पूरी विनम्रता और कृतज्ञता से ग्रहण करता हूँ । यह सम्मान उन अनगिनत भारतीयों का है जिन्होंने हमारी साझेदारी को आकार दिया।’

तब्लीगी जमात ने डॉक्टर शाहीन को विस्फोटक खरीदने के लिए दिया था जकात का पैसा; 25-30 जमातियों के फोन हुए ऑफ

                                       तब्लीगी जमात और जिहादी डॉक्टर शाहीन (साभार-mint)
दिल्ली ब्लास्ट की जाँच में कितने गद्दार और कट्टरपंथी संस्थाएं आएंगी कह पाना बहुत मुश्किल है। दरअसल, दशकों से चल रहे गद्दारों और उनके समर्थकों का भांडा फूटना अब शुरू हुआ है। वैसे गद्दारों को पकड़ने का शंखनाद 1965 में हुए इंडो-पाक युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कर दिया था। देश का दुर्भाग्य, ताशकंत से उनका मृतक शरीर आया। अन्यथा देश की स्थिति वह नहीं होती जो आज है। दूसरे, यह भी शंका व्यक्त की गयी थी कि गद्दारों पर प्रहार करना ही उनकी अकाल मृत्यु का कारण हो। 
खैर, 2024 चुनावों के दौरान चर्चा थी कि मोदी सरकार के तीसरी बार बनने पर वक़्फ़ बोर्ड, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमात जैसी कट्टरपंथी संस्थाओं को बंद कर देना चाहिए। समय बहुत बलवान होता है, वक़्फ़ बोर्ड पर तो काम चल ही रहा अब दिल्ली ब्लास्ट में पकडे जाने वाले आतंकवादियों के तार कट्टरपंथियों से जुड़ने के साफ सबूत आ रहे हैं। जो मुसलमान जकात के नाम पर धन लुटाते हैं वह धन गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की मदद करने की बजाए देश में दंगे और आतंकवाद को बढ़ावा और पकडे जाने पर दंगाइयों और आतंकवादियों की वकालत करने वाले वकीलों पर खर्च हो रही है। मजे की बात यह है कि वकील भी हिन्दू को ही खरीदते हैं। ताकि  दंगाई और आतंकवादी को जमानत या फिर रिहाई मिलने पर कहे "भाई मुक़दमा लड़ने वाले हिन्दू वकील थे। जितनी फ़ीस बोली दे दी।"       

जिहादी डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल की अहम किरदार शाहीन का तबलीगी जमात से कनेक्शन सामने आने पर खुफिया विभाग अलर्ट हो गया है। खुलासा हुआ है कि फरीदाबाद से गिरफ्तार महिला डॉक्टर शाहीन को तब्लीगी जमात से टेरर फंडिंग की जाती थी। इसके बाद जमात आने जाने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

इसके अलावा, जमात को हर आने जाने वाले व्यक्ति का नाम, पता, मोबाइल नंबर और फोटो खुफिया विभाग और एटीएस को सौंपने के लिए कहा गया है। कोरोना काल से पहले भी इस तरह की कवायद की जाती थी, लेकिन बीच में ढील बरती जा रही थी।

दिल्ली कार विस्फोट के जिहादी डॉक्टर उमर, मुफ्ती इरफान, डॉक्टर शाहीन और दूसरे लोगों का कनेक्शन जमात से जुड़ गया है। जानकारी के मुताबिक, फरीदाबाद में मिला विस्फोटक भी इन्ही पैसों से खरीदा गया था। टेरर फंडिंग से ही आतंकी विदेश जाते थे और जरूरी सामान खरीदते थे। इस रकम का एक बड़ा हिस्सा आतंकियों को तैयार करने में खर्च होता था।

जिहादी महिला डॉक्टर शाहीन के 7 खातों में पिछले 7 साल में 1.55 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। इनमें 2014 में 9 लाख, 2015 में 6 लाख, 2016 में 11 लाख और 2017 में 19 लाख का ट्रांजेक्शन हुआ। अब ये पैसे किसने भेजे और किसे दिए गए, इसका पता खुफिया एजेंसियाँ लगा रही है।

आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद 25- 30 मोबाइल नंबर ऐसे मिले हैं, जो स्विच ऑफ हैं। खुफिया एजेंसियाँ ऐसे डेटा खँगाल रही हैं, जो जमात और आतंकियों को जोड़ रहा था।

दिल्ली, श्रीनगर, पहलगाम, पठानकोट, सहारनपुर, हापुड़, मुरादाबाद, बिजनौर से लेकर दुबई, ओमान तक के तार जुड़ रहे हैं। यहाँ आतंकी गुपचुप तरीके से बैठकें करते थे।

अवलोकन करें:-

क्या कांग्रेस की भूपेंद्र हुड्डा सरकार ने 60 करोड़ रूपए कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल इंचार्ज जावद को
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खुफिया एजेंसियों को कई ऐसे संस्थानों का पता चला है, जो मुस्लिम देशों में हैं। इनकी खातों को अब खंगाला जा रहा है। एजेंसियों को इसकी रिपोर्ट जल्द मिलने की संभावना है। 

अरविंद केजरीवाल ने खालिस्तानी संगठन से लिए 133 करोड़ रूपए, उप-राज्यपाल ने की NIA जाँच की सिफारिश: USA के गुरुद्वारा में बैठक, पन्नू के SFJ से डील;केजरीवाल तो एक झांकी है, many heads to roll from almirah.

अमेरिका में गुरूद्वारे में खालिस्तानियों से साठगांठ करते अरविन्द केजरीवाल 

अरविन्द केजरीवाल की गिरफ़्तारी होने पर लिखा था कि ईमानदारी का चोला ओढ़े घूम रहे केजरीवाल की RAW एवं अन्य सुरक्षा जाँच एजेंसियों द्वारा भी जाँच करनी चाहिए। 26 जनवरी को लाल किला पर हुए हंगामे के बाद तथाकथित किसान आंदोलन को समर्थन दे रही किसी भी पार्टी ने समर्थन वापस नहीं लिया। जो अति गम्भीर मसला था। देशहित में समस्त पार्टियों को केंद्र सरकार के साथ खड़ा होकर लाल किला पर उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त से कार्यवाही करने के लिए प्रोत्साहित करना था, किसी पार्टी ने नहीं ऐसा किया। सब अपना स्वार्थ साधने मोदी सरकार घेरते नज़र आए। अब कल(मई 6) दिल्ली के उपराज्यपाल ने जो NIA द्वारा केजरीवाल की जाँच करने का आदेश भी बहुत देर से आया। केजरीवाल तो एक झांकी है, many heads to roll from almirah.  

दिल्ली शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। आरोप है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ने खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ से फंडिंग ली है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसकी आतंक निरोधी एजेंसी NIA से जाँच कराने की सिफारिश की है।

दरअसल, इस संबंध में उपराज्यपाल को एक शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP को देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने और खालिस्तान समर्थक भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए फंड मिले थे। इसके लिए खालिस्तानी आतंकी समूहों से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 133.60 करोड़ रुपए) मिले थे।

दरअसल, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव आशू मोंगिया और आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मुनीश कुमार रायजादा ने इस संबंध में 1 अप्रैल 2024 को उपराज्यपाल को पत्र लिखा था। इसमें आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर लेने का आरोप लगाया गया था।

पत्र में कहा गया था कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने यह रकम 2014 से लेकर 2022 के बीच में खालिस्तानी संगठन से ली है। इसमें यह भी कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल और खालिस्तान समर्थक सिखों के बीच साल 2014 में अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित गुरुद्वारा रिचमंड हिल्स में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में केजरीवाल ने खालिस्तानी देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने का वादा किया था।

उपराज्यपाल द्वारा केंद्रीय गृह सचिव को NIA जाँच के लिए लिखी गई चिट्ठी के अनुसार, भुल्लर को रिहा करने के बदले में अरविंद केजरीवाल ने अपनी आम आदमी पार्टी के लिए वित्तीय सहायता की माँग की थी। इस बैठक की तस्वीरें रायजादा ने अपने सोशल मीडिया साइट X (पहले ट्विटर) पर साल 2014 में साझा भी की थी।

आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मनीश कुमार रायजादा और आशू मोंगिया द्वारा लिखी गई चिट्ठी के आधार पर उपराज्य ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 27 जनवरी 2014 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर प्रोफेसर भुल्लर को क्षमा देने की भी अपील की थी।