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राम मंदिर पर BBC की भड़काऊ कवरेज पर ब्रिटिश संसद में ही इसके खिलाफ उठी माँग : बाबरी का रोना रो छिपाया 1527 वाला इतिहास

BBC की नकारात्मक कवरेज का ब्रिटेन में ही विरोध
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर UK (यूनाइटेड किंगडम) के सरकारी मीडिया संस्थान BBC (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन) की नकारात्मक कवरेज को लेकर उसका उसके ही देश में विरोध शुरू हो गया है। ब्रिटेन के सांसद ने 22 जनवरी, 2024 को हुए इस कार्यक्रम को लेकर BBC की कवरेज को पक्षपाती, भेदभावपूर्ण और भड़काऊ करार दिया है। सांसद बॉब ब्लैकमैन ने गुरुवार (1 फरवरी, 2024) को ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स में ‘BBC की निष्पक्षता पर बहस की माँग उठाई है। BBC द्वारा भड़काऊ रिपोर्टिंग करने का कारण जान कार्यवाही पर भी चर्चा चल रही है। आज जब भारत अपनी खोई अस्मिता को प्राप्त कर रहा है,BBC वास्तविकता को नकार भड़काऊ लोगों को ऊर्जा दे रहा है।   

कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से दुनिया भर के हिन्दू खुश हैं। उन्होंने इस पर दुःख जताया कि BBC ने इसे एक मस्जिद को तबाह कर के उस स्थल पर बनी हुई संरचना बता दिया, और मीडिया संस्थान ये भूल गया है कि 2000 वर्षों से भी अधिक समय पहले तक वहाँ भव्य मंदिर हुआ करता था। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए शहर में ही 5 एकड़ जमीन आवंटित की गई है।

सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि दुनिया भर में क्या चल रहा है, इस पर बीबीसी की कवरेज कितनी निष्पक्ष है इसका रिकॉर्ड लाया जाना चाहिए और इस पर बहस होनी चाहिए। ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स’ की नेता पोनी पैनी मॉर्डौंट ने कहा कि BBC की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। BBC को अपनी इस रिपोर्ट को लेकर सफाई भी प्रकाशित करनी पड़ी थी। इसमें उसने कहा था कि कुछ पाठकों को ने महसूस किया कि ये लेख पक्षपाती है और इसमें भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

BBC ने सफाई में आगे कहा कि जो कुछ हुआ उसका सटीक और निष्पक्ष विवरण बताया जाना चाहिए। मीडिया संस्थान ने इससे असहमति जताई कि ये लेख हिन्दुओं का अपमान कर रहा है। उसने बड़ी चालाकी से दिसंबर 1992 के बाबरी विध्वंस का तो जिक्र किया, लेकिन मीर बाक़ी द्वारा राम मंदिर को सन् 1527 में ध्वस्त किए जाने की घटना का जिक्र नहीं किया। बीबीसी लेस्टर और बर्मिंघम में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा में भी इस्लामी भीड़ का पक्ष लेकर हिन्दुओं को बदनाम करने वाली रिपोर्टिंग कर चुका है।

ब्रिटिश हिन्दुओं के अभियान ‘इनसाइट यूके’ ने भी बीबीसी को एक खुला पत्र लिखते हुए उसके कवरेज पर आपत्ति जताई। साथ ही लिखा कि मीडिया संस्थान ने ये छिपा लिया कि एक मुस्लिम आर्कियोलॉजिस्ट (KK मुहम्मद) ने बाबरी ढाँचे के नीचे राम मंदिर होने का पता लगाया, और सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाने वाले जजों में भी एक मुस्लिम जज (जस्टिस अब्दुल नज़ीर) थे। तमाम आलोचनाओं के बावजूद BBC अपनी सफाई में अपनी बात पर अड़ा रहा।

जिस खबर को लेकर आपत्ति जताई जा रही है, उसे गीता पांडेय और योगिता लिमये ने लिखा था। इस खबर का भड़काऊ शीर्षक था – “अयोध्या राम मंदिर: भारत के पीएम मोदी ने ढहाई गई बाबरी मस्जिद वाले स्थल पर हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया”। इस खबर में लिखा गया था कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से मुस्लिम डरे हुए हैं, इस कार्यक्रम ने उनकी ‘दर्दनाक यादें’ ताज़ा कर दी हैं। वहीं बाबरी ढाँचे के निर्माण को लेकर लिखा गया कि ‘हिन्दू ऐसा यकीन करते हैं’ कि राम मंदिर ढाह कर इसे बनाया गया था। जबकि, इसके साक्ष्य हर रूप में मौजूद हैं।


रानियों के काट डाले शीश, शिवलिंग पर निशान, कुएँ से निकले नरमुंड… जब राम जन्मभूमि को बचाने के लिए बाबर के बाद औरंगज़ेब से भिड़ा था भीटी राजपरिवार

                  ज्ञानवापी की तरह भीटी झारखंडी मंदिर में भी औरंगजेब ने काटा था शिवलिंग तोड़ी थीं मूर्तियाँ
अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को रामलला अपने भव्य मंदिर में स्थापित किए जा चुके हैं। इस अवसर पर जहाँ देश और दुनिया भर के हिन्दू दीवाली जैसा पर्व मना रहे हैं तो वहीं उन बलिदानियों को भी याद किया जा रहा है जिन्होंने 500 साल चले संघर्ष में राम के नाम पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इन बलिदानियों में सबसे पहला नाम भीटी के तत्कालीन राजा महताब सिंह का लिया जाता है। 1526-27 में उन्होंने मंदिर तोड़ने आए मीर बाकी के कई फौजियों को मार कर वीरगति पाई थी।

हालाँकि, इस रामभक्ति का गुस्सा मुगल बादशाहों ने उनकी प्रजा और भीटी के मंदिरों पर उतारा था। मुगल क्रूरता के चिह्न आज भी अम्बेडकरनगर जिले के भीटी तहसील क्षेत्र में जा कर देखे जा सकते हैं।

अपना पूरा जीवन क्रूर और मतांध मुगल बादशाहों के गुणगान में बिताने वाले वामपंथी इतिहासकारों में सम्भवतः अधिकतर भीटी गए भी नहीं होंगे। यहाँ न सिर्फ मंदिरों में घुस कर मूर्तियाँ तोड़ी गईं बल्कि महिलाओं व राजमहल के सेवकों का भी नरसंहार हुआ था। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि बाबर की मौत के सैकड़ों साल बाद औरंगज़ेब ने भीटी को रामभक्तों का गढ़ मान कर हमला किया था। ऑपइंडिया की टीम ने उन इलाकों का दौरा कर के तमाम साक्ष्यों को संकलित किया।

औरंगज़ेब को याद थे अपने पुरखों के दुश्मन

ऑपइंडिया ने सबसे पहले राजा महताब सिंह के महल का दौरा किया। महल में कई स्थानों पर टूट-फूट दिखी। महल के बाहर खड़े कुछ बुजुर्गों ने बताया कि वो मूलतः भीटी के रहने वाले हैं। उन्होंने हमें बताया कि महल के कई हिस्सों में हुई तोड़फोड़ मुगलों के समय की है। राजा महताब सिंह ने बाबर के कई फौजियों को रामजन्मभूमि की रक्षा करते हुए मार गिराया था। जन्मभूमि के लिए 1527 में हुए संघर्ष के लगभग 130 साल बाद बाबर का वंशज औरंगज़ेब गद्दी पर बैठा। उसने मंदिरों को ध्वस्त करना शुरू किया जिसमें पवित्र काशी विश्वनाथ भी शामिल था।
                             राजकुमार जयदत्त के महल में आज भी मौजूद हैं हमले के निशान
आसपास खड़े बुजुर्गों ने हमें बताया कि उसने उन हिन्दू राजाओं की भी लिस्ट बनाई थी जो उसके पूर्वजों से किसी भी समय काल में लड़े थे। इन नामों में भीटी नरेश महताब सिंह का नाम उसकी हिस्टलिस्ट में टॉप पर था। साल 1669 में जब औरंगज़ेब की फौजें काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने निकलीं थी तब रास्ते के बनाए नक़्शे में उसने भीटी को भी शामिल किया था। दिल्ली से निकली फौजों ने रास्ते में पड़ने वाले तमाम गाँव लूटे, हिन्दू महिलाओं से बलात्कार किए और मंदिरों को ध्वस्त किया।
                                                     झारखंडी महादेव मंदिर भीटी

शिवलिंग पर अभी भी मौजूद हैं चले आरे के निशान

स्थानीय निवासियों ने हमें भीटी महल से लगभग 2 किलोमीटर दूर उमराँवा रोड स्थित झारखंडी महादेव मंदिर के बारे में बताया। हम महादेव मंदिर पहुँचे तो वहाँ कुछ श्रद्धालु और मंदिर के पुजारी मौजूद मिले। मंदिर के पुजारी मुन्ना मिश्रा ने हमें बताया कि लगभग 250 साल पहले वह मंदिर औरंगज़ेब की क्रूरता का शिकार हो चुका है। हमें गर्भगृह ले जाया गया। गर्भगृह में एक अति प्राचीन शिवलिंग है जिसकी उम्र 1000 वर्ष से अधिक बताई जा रही है। शिवलिंग पर कई खरोंच के साथ तमाम जगहों पर काटे जाने के निशान मौजूद हैं। आज भी यह मंदिर स्थानीय हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। महाशिवरात्रि को यहाँ बड़ा मेला लगता है।
                                              इसी शिवलिंग को तोड़ने पहुँचा था औरंगज़ेब
मंदिर के पुजारी ने हमें आगे बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी मुगल फ़ौज शिवलिंग को काट नहीं पाई थी। इस से नाराज हो कर औरंगज़ेब के फरमान पर उसके फौजियों ने पूरे मंदिर को अपवित्र किया, दीवारों को गिराया और मूर्तियों को तोड़ डाला। बकौल पुजारी, महज कुछ वर्षों पहले तक औरंगज़ेब के हमले में तोड़ी गई मूर्तियाँ क्षत-विक्षत हालात में मंदिर के एक कोने में पड़ी थीं। पशु-पक्षियों द्वारा उन मूर्तियों पर गंदगी फैलाने से दुखी कुछ ग्रामीणों ने उसका विसर्जन अयोध्या ले जा कर सरयू नदी में कर दिया। इनमें लक्ष्मी, पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियाँ शामिल थीं।
                                                              आरे से काटा गया शिवलिंग

डीह पर कत्ल हुआ रानियों का, मार डाले गए सेवक

मंदिर के पुजारी ने दावा किया कि धर्मस्थल को तोड़ कर मुगल फ़ौज पास ही मौजूद गाँव (लगभग 1 किलोमीटर दूर) सोनारपुरवा की तरफ मुड़ी। यहाँ भीटी राजपरिवार के लिए सोने-चाँदी का काम करने वाले स्वर्णकार रहते थे। बताया गया कि तब रानियाँ मुगल फ़ौज से बचने के लिए इसी इलाके में छिपी हुई थीं। यहाँ पहुँच कर औरंगज़ेब के हमराहों ने पहले सोनारपुरवा को लूटा और फिर रानियों का उनके सेवकों सहित सिर काट डाला। बकौल पुजारी, कुछ समय पहले तक डीह की खुदाई में एक कुएँ के अंदर से नरमुंड मिले थे जो उसी औरंगज़ेब के हमले के समय के है।

चंदापुर डीह पर तोड़ी गईं मूर्तियाँ

झारखंडी मंदिर के पुजारी ने हमसे बातचीत में आगे दावा किया कि वहाँ से लगभग 3 किलोमीटर दूर कभी चंदापुर डीह पर भी हिन्दू देवी-देवता पूजे जाते थे। पहले से ही सारी जानकारी ले कर आई मुगल फ़ौज भीटी महल, झारखंडी मंदिर, सोनारपुरवा के बाद चंदापुर डीह की तरफ मुड़ी। यहाँ मौजूद धर्मस्थलों को तोड़ डाला गया। अभी कुछ ही दिन पहले खेती करने गए कुछ किसानों को मिट्टी में दबी भगवान विष्णु की एक मूर्ति मिली थी। हजारों वर्ष पुरानी यह मूर्ति एक निषाद परिवार में मौजूद बताई जा रही है। इस ऐतिहासिक जगह को अब किसानों को पट्टे पर दे दिया गया है। हालाँकि, दावा किया गया कि अगर उस जगह की विधिवत खुदाई तो तो और भी ऐतिहासिक चीजें मिल सकती हैं।

हमारे पुरखे लड़े और बलिदान हुए

मंदिर पर मौजूद स्थानीय ग्रामीण अजीत कुमार दुबे ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने दावा किया कि उनके बड़े-बुजुर्ग औरंगज़ेब के इस हमले के बारे में बताते हैं। तब न सिर्फ भीटी राजपरिवार के सैनिक बल्कि आसपास के ग्रामीणों ने भी मुगल फ़ौज से मुकाबला किया था। इस मुकाबले में कई ग्रामीण बलिदान हुए थे। तब औरंगज़ेब के भी कई हमलावर फौजी भी मारे गए थे। जिस झारखंडी मंदिर पर हमला हुआ था वहाँ भीटी राजपरिवार अक्सर पूजा-पाठ करने आया करता था। भीटी राजपरिवार ने बिसुही नदी के किनारे भी एक मंदिर बनवाया था।
अजीत ने दावा किया कि औरंगज़ेब के हमले की मुख्य वजह भीटी निवासियों द्वारा सवा सौ साल पहले राम के लिए दिखाया गया प्रेम और अपने राजा के साथ अयोध्या में किया किया गया बलिदान ही था। झारखंडी महादेव मंदिर के पास मौजूद भीटी बाजार, गाँव उमराँवा, दुखी दुबे का पुरवा और दुबाने का पुरवा गाँव के कई श्रद्धालु हमारे इंटरवियु के दौरान मंदिर परिस्सर में आए। उन सभी ने बताया कि मंदिर पर औरंगजेब द्वारा दिखाई गई क्रूरता से आज भी उनके मन में पीड़ा होती है। इस मंदिर के लिए स्थानीय भाजपा नेता ने टिन शेड और श्रद्धालुओं के बैठने आदि की भी व्यवस्था करवाई है।
                                      औरंगजेब की क्रूरता के शिकार झारखंडी मंदिर के नंदी
हालाँकि, औरंगज़ेब के द्वारा दिखाई गई यह क्रूरता भीटी राजपरिवार को विचलित नहीं कर पाई। औरंगज़ेब के हमले के लगभग 200 साल बाद भीटी के राजकुमार जयदत्त सिंह रामजन्मभूमि पर हमला करने निकले जिहादी मौलवी अमीर अली से संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस युद्ध में अमीर अली भी अपने तमाम साथियों सहित ढेर हो गया था।
(साभार : राहुल पाण्डेय, http://www.opindia.com)

‘जय श्री राम’ से चिढ़ी कांग्रेस नेता एंड्रिया डिसूजा, इस्लामी मुल्क क़तर से लगा रही एक्शन की गुहार: कह रही – ये लोकतंत्र की मौत है, सेक्युलर देश की मौत है

कांग्रेस किसी भी मुद्दे को लेकर मुस्लिम देशों से क्यों गुहार लगाती है? क्या कांग्रेस को देश की कानून व्यवस्था पर विश्वास नहीं? कहते हैं, बच्चा संस्कार माँ के पेट से सीख कर आता है, ठीक वही स्थिति कांग्रेस की है। क्योकि कांग्रेस किसी भारतीय ने नहीं बल्कि विदेशी(अंग्रेज़) द्वारा की गयी थी। यही कारण है कि कांग्रेस भारत के गौरवशाली इतिहास को धूमिल कर मुग़ल आक्रांताओं को महान मानती है। 
रामजन्मभूमि के विरुद्ध कितने वकीलों की फ़ौज खड़ी की गयी थी, खुदाई में मंदिर के प्रमाणों को कोर्ट से छुपाया गया, क्या कांग्रेस किसी हिन्दू एवं अन्य धर्मों के शांतिप्रिय का एक भी वोट की हक़दार है? दूसरे, कांग्रेस पर एकाधिकार किये नेहरू-गाँधी परिवार की पृष्ठभूमि को सार्वजनिक करने का समय आ गया है। 
कोई कांग्रेस से पूछे कि जिस राहुल का दादा(फिरोज जहांगीर खान) हो उसका दत्तात्रेय गोत्र कैसे हो गया? परिवार ने कब हिन्दू धर्म स्वीकार किया? जब फिरोज का अंतिम संस्कार(कब्र में दफनाया) मुस्लिम रीति-रिवाज़ से हुआ फिर उसी फिरोज के परिवार के किसी भी सदस्य का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति-रिवाज़ क्यों? किस आधार पर हिन्दू एवं मुसलमानों को धोखे में रखा जा रहा है? इस अति गंभीर मुद्दे पर सार्थक चर्चा की जरुरत है। जिसे कोई करने का साहस नहीं कर रहा, क्यों?   
कांग्रेस की नेता एंड्रिया डिसूजा, जो कि ट्विटर पर खुद को ‘रिया रिवील्ड‘ बताती हैं, एक व्यक्ति के ‘जय श्री राम’ लिखने से भड़क गई। उसके एक ट्वीट के जवाब में एक व्यक्ति ने ‘जय श्री राम’ लिखा तो वह इसे इस्लामोफोबिया बता कर उसे गिरफ्तार करने के लिए क़तर के विदेश मंत्रालय के पास दौड़ गई।

खुद को महाराष्ट्र कांग्रेस में मानवाधिकार मामलों की सचिव और AICWA की पदाधिकारी बताने वाली डिसूजा ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को शक्ति प्रदर्शन बता डाला। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में कुछ भी धार्मिक नहीं था भले ही यह वैदिक रीति रिवाज से हुई हो।

डिसूजा ने ट्विटर पर लिखा, “राम का जन्म किसके लिए ख़ुशी की बात नहीं होगा? लेकिन दुख की बात है और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह राम मंदिर की आड़ में शक्ति का खुला प्रदर्शन है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा धार्मिक नहीं है। जिस विषय की नींव में किसी कमजोर व्यक्ति को अपमानित करने की बात हो, वह धार्मिक नहीं है।

आगे उन्होंने लिखा, “भले ही इस भीड़ में मेरा धर्म, गाँव, परिवार और पूरे देश की जनता शामिल हो। मेरी शिक्षा मुझे मानवता और धार्मिकता के साथ खड़े रहने के लिए कहती है। यह लोकतंत्र की मौत है, धर्मनिरपेक्ष देश और भारत के विचार की मौत है।” उनके इस ट्वीट के जवाब में एक व्यक्ति ने कई बार ‘जय श्री राम’ लिख दिया।

राम का नाम देखने से डिसूजा भड़क गईं। वह इतना क्रुद्ध हुईं कि उन्होंने कतरी विदेश मंत्रालय को ट्विटर पर टैग कर दिया और इस व्यक्ति के खिलाफ एक्शन लेने की बात की। डिसूजा का दावा था कि यह व्यक्ति कतर में रहता है और इसका ‘जय श्री राम’ लिखना इस्लामोफोबिया के अंतर्गत आता है। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि किसी हिन्दू का अपने भगवान का नाम लेना किस प्रकार से इस्लामोफोबिया है। इसके बाद डिसूजा ने इस व्यक्ति को एक लंबा चौड़ा पैराग्राफ लिख कर जवाब भी दे डाला।

डिसूजा ने लिखा, “जय सिया राम। जय माँ दुर्गा, जय श्री कृष्ण, हर-हर महादेव! एक हिंदू हूँ और मैं अपने देवताओं से प्रेम करती हूँ। मेरा धर्म मेरा निजी विषय है, इससे किसी को कोई मतलब नहीं। मैं कमजोरों को दबाने के लिए अपने भगवान का अपमान नहीं करती। मैं लोगों पर अत्याचार करने या लोगों की हत्या करने में अपने भगवान के नाम का उपयोग नहीं करती, केवल नकली हिंदू ही ऐसा करते हैं। और आप निश्चित रूप से एक नकली हिन्दू हैं।” हालाँकि, वह यह लिखते समय भूल गई कि हिन्दू कारसेवकों पर ही इस देश में अत्याचार हुए हैं चाहे वह गोधरा हो या 1990 में मुलायम सिंह का अयोध्या में गोली चलवाना।

डिसूजा का क़तर के आगे मदद के लिए हाथ फैलाना कई लोगों को नागवार गुजरा और उन्होंने इसे देशद्रोह बताया। उन्होंने कहा कि इससे वह एक भारतीय की सुरक्षा को क़तर में खतरे में डाल रही हैं। अक्षत देवड़ा नाम के एक व्यक्ति ने लिखा, “@RiaRevealed ने कतर में एक भारतीय कामगार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कतर के मंत्रालय को टैग करके देशद्रोह किया है। मुंबई पुलिस कृपया उनकी सुरक्षा के साथ कुछ होने से पहले उचित कार्रवाई करे।” अन्य लोगों ने भी यही बात कही।

एक यूजर ने उनके जवाब में लिखा, “केवल ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए? कहाँ गयी तुम्हारी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता? और क्या तुम करोड़ों हिंदुओं को “इस्लामोफोबिक” कहोगी क्योंकि वह “जय श्री राम” का नारा लगाते हैं। मुझे लगता है कि तुम उस व्यक्ति को पसंद करोगी और प्यार करोगी जो “अल्लाह हू अकबर” कहेगा, भले ही वह हिंदू हो।”

वामपंथी और लिबल पत्रकार, कथित एक्टिविस्ट और प्रोपगैंडा फैलाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद से बिलबिलाए हुए हैं। डिसूजा ने भी उसी सूची में अपनी जगह बनाई है जिसमें आरफा खानम शेरवानी जैसे लोग पहले ही शामिल हो चुके हैं।

राम मंदिर के विरोध में 3 दिन तक अनशन पर बैठी मणिशंकर अय्यर की बेटी, कहा- ये मैंने मुस्लिमों के लिए किया

                             मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के विरुद्ध किया था उपवास
कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता मणिशंकर अय्यर अक्सर अपनी अनर्गल बयानबाजी के कारण जाने जाते रहे हैं। अब उनकी बेटी सुरन्या भी चर्चा में हैं। असल में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ सुरन्या अय्यर ने उपवास किया था। उन्होंने फेसबुक पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिख कर इस बारे में बताया भी है। प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन उनकी माँ ने एक चम्मच शहद पिला कर उनका अनशन तुड़वाया। उन्होंने दावा किया कि हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई एक दिन अपना खोया हुआ लहलहाता वसंत फिर से प्राप्त करेंगे।
इन्ही जैसे पाखंडी नेताओं और इनको समर्थन देने वाली पार्टियों के कारण जनता और कोर्ट के सामने सच्चाई न देने के कारण भारत का खोया अस्तित्व वापस नहीं आ पाया। अत्याचारी मुगलों को महान बताकर भारतीयों को गुमराह करते रहे। नरेंद्र मोदी को हराने पाकिस्तान जाकर उनके आगे गिड़गिड़ाते भी इनको तनिक भी शर्म नहीं। हिन्दू मुसलमानों को एक दूसरे को गलत इतिहास पढ़वा कर दुश्मन बनाने के ये ही लोग कसूरवार हैं।  

अनशन शुरू करते हुए उन्होंने लिखा था कि पहले से ही प्रदूषित दिल्ली की हवा में उग्र हिंदूवाद, दुर्भावना और जोर-जबरदस्ती भर गई है, और इसमें ‘आध्यात्मिक ज़हर’ घुल गया है। उन्होंने लिखा था कि वो ये अनशन भारत के मुस्लिम नागरिकों के लिए कर रही हैं। उन्होंने कहा था कि अयोध्या में हिन्दू राष्ट्रवाद के नाम पर जो भी हो रहा है उसकी वो निंदा करती हैं। उन्होंने इस दौरान ‘मुग़ल विरासतों’ से प्यार की बात करते हुए कहा था कि मुगलिया संरचनाओं के बिना वो दिल्ली की कल्पना भी नहीं कर सकतीं।

फेसबुक पर सुरन्या ने लिखा था, “दिल्ली सल्तनत ने भी भारत को बेशकीमती चीजें दी हैं, क्योंकि सूफी और अमीर खुसरो के अब्बा उनके साथ ही आए थे। उत्तर भारत की भाषा और संस्कृति खुसरो की एहसानमंद है। मुग़ल यहाँ मुस्लिमों को ही हरा कर आए थे। बाबर ने पंजाब में दौलत खान और दिल्ली में इब्राहिम लोदी को हराया। मुगलों ने राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध बनाए। मुगलों की नीति मंदिर तोड़ने की नहीं थी, उन्होंने तो मंदिर बनवाए। झूठ, हिंसा, द्वेष और प्रतिशोध पर बने मंदिर पर कोई कैसे ख़ुशी बना सकता है?”

Just broke fast with a teaspoon of honey from my mother's hands. Take heart all good people. We shall cajole the sullen earth. We shall win back the lost rain clouds. Showers of love will return, pouring down on our Beloved Nation as of yore. The garden of friendship will flower afresh. From the winter of our despair, Hindu-Muslim-Sikh-Issai will one day, One Sweet Day, emerge into that lost, blooming spring. Where the gentle Sun shines equally on each once again, in this place, which will always be our very own.

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सुरन्या अय्यर की बहन यामिनी ने भी ‘X’ पर भारतीय संविधान की प्रति शेयर की, कुछ ऐसा ही अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने किया था। सुरन्या खुद को बैरिस्टर बताती हैं और कहती हैं कि वो विदेशी एजेंसियों द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे बच्चों को बचाती हैं, उनके अधिकार के लिए लड़ती हैं। सुरन्या अय्यर ने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफ़ोर्ड’ से कानून की पढ़ाई की है, वहीं उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से गणित में BA की डिग्री ली। सुरन्या ने अब भरोसा जताया है कि एक दिन ‘दयालु सूर्य’ समान रूप से अपनी चमक बिखेरेगा और ये जगह फिर से हमारी अपनी होगी।

रामलला की हुई प्राण प्रतिष्ठा, वामपंथी-कट्टरपंथी गिरोह के उखड़े प्राण पखेरू: इस्लामी गिरोह कह रहा – फिर खड़ा होगा बाबरी; लेकिन नहीं बताएंगे बाबरी था कौन?

राना अय्यूब, अरफ़ा खानम शेरवानी और आइशी घोष का राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पर रुदन (फोटो साभार: इंस्टाग्राम हैंडल्स)
एक तरफ जहाँ सोमवार(22 जनवरी, 2024) को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर संपूर्ण हिन्दू समाज खुश नज़र आ रहा है, वहीं एक गिरोह के कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके दुःखों की कोई सीमा नहीं है। यहाँ तक कि सोशल मीडिया पर ‘बाबरी ज़िंदा है’ हैशटैग के साथ ट्रेंड भी चलाया गया। वहीं राना अय्यूब, अरफ़ा खानम, शेरवानी व आइशी घोष जैसों ने अपने देश को ही मृत करार दिया। इस गिरोह को 500 वर्षों के संघर्ष के बाद बने राम मंदिर से बड़ा ही दुःख है।

जितने भी छद्दम सेक्युलरिस्ट्स है, सभी बाबरी-बाबरी कहते हैं, नाम बाबर पर नहीं बाबरी क्यों?लेकिन नहीं बताते कि बाबरी कौन था? इसका उत्तर किसी हिन्दू पक्ष की तरफ से नहीं आना चाहिए, वरना 'सर तन से जुदा' गैंग लग जायेगा पीछे, इसका उत्तर इन्ही छद्दम सेक्युलरिस्ट्स से तरफ से आने दो, यह बहुत ज्वलंत प्रश्न है। कोई नहीं देगा, यही कारण है कि इन्हीं लोगों ने समस्त भारतीय मुस्लिम समाज को मुस्लिम देशों में बदनाम कर रखा है। देखिए वीडियो:

चंदा जमा कर के खा जाने का आरोप जिन पर लग चुका है, खुद को पत्रकार बताने वाली राना अय्यूब ने भी अपना ‘दर्द’ बयाँ किया। राना अय्यूब अक्सर विदेशी चैनलों पर बैठ कर भारत विरोधी बातें करती रहती हैं। राना अय्यूब ने लिखा, “ये दिन न सिर्फ सत्ताधारियों के क्रूर बहुसंख्यकवाद को प्रदर्शित करता है, बल्कि उनकी चुप्पी पर भी सवाल खड़े करेगा जो कभी संप्रदायिकता के खिलाफ लड़ते थे।” राना अय्यूब खुद इस्लामी कट्टरपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं।

इसी तरह ‘The Wire’ जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल के लिए काम करने वाली अरफ़ा खानम शेरवानी ने भी सोशल मीडिया पर आकर प्रलाप किया। उन्होंने लिखा, “1992 में हुए सांप्रदायिक दंगों की एक पीड़ित के रूप में मेरे आसपास जो भी हो रहा है वो सब काफी परेशान करने वाला, अशांत कर देने वाला और हतोत्साहित करने वाला है। मेरी पीढ़ी को श्राप मिला है कि उन्होंने 6 दिसंबर, 1992 और 22 जनवरी, 2024 को अपने जीवनकाल में देखा।”

इसी तरह वामपंथी नेता आइशी घोष भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ लिखती नज़र आईं। उन्होंने लिखा, “22 जनवरी, 2024 – एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का पतन। इसे याद रखा जाएगा।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने अयोध्या पहुँचे सेलिब्रिटज पर तंज कसते हुए लिखा, “ये रीढ़विहीन लोग पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उनके एजेंडे में फिट हो तो चाट भी सकते हैं। इसके राम के प्रति श्रद्धा से कोई लेना-देना नहीं है।” आइशी घोष JNU में हिंसा के लिए भी जानी जाती हैं।

इसी तरह, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ‘बाबरी ज़िंदा है’ ट्रेंड भी कराया गया। कोई 22 जनवरी, 2024 को ‘काला दिन’ बता रहा है, जबकि कोई लिख रहा है कि बाबरी मस्जिद उनके दिलों में ज़िंदा रहेगा। इस्लामी कट्टरपंथियों ने लिखा कि मस्जिद को मंदिर में तब्दील कर लोगे, लेकिन इस्लाम हमेशा रहेगा। इन लोगों ने लिखा कि हम न भूलेंगे, न माफ़ करेंगे। वहीं कुछ ने तो ‘इंशाअल्लाह’ लिखते हुए ये दावा भी कर डाला कि बाबरी मस्जिद को फिर से खड़ा किया जाएगा।

उधर अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब अयोध्या की गलियों में गोलियों को गड़गड़ाहट नहीं होगा, बल्कि दीपोत्सव होगा। उन्होंने कहा कि अब कोई अयोध्या की परिक्रमा में बाधा नहीं बन पाएगा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर वहीं बना, जहां बनाने का संकल्प लिया, आज हम सबकी आत्मा इस बात से प्रफुल्लित हो रही है। उत्तर प्रदेश के CM ने कहा कि आज के इस पावन अवसर पर भारत का हर गाँव अयोध्या है, हर जिह्वा पर राम है, हमारे रामलला सिंहासन पर विराज रहे हैं।


‘निजी जगहों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन के लाइव टेलीकास्ट के लिए पुलिस की अनुमति की ज़रूरत नहीं’: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा - राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लाइव प्रसारण के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं
मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है निजी जगहों पर कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लाइव प्रसारण के लिए सरकार या पुलिस की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है। तमिलनाडु में DMK की सरकार है, जिसके मंत्री उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म को खत्म करने की बात कर चुके हैं। भाजपा ने आरोप लगाया था कि वहाँ के मंदिरों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन विशेष पूजा का आयोजन करने या फिर विशेष प्रसाद वितरित करने से रोका जा रहा है। मंदिरों को धमकाया जा रहा है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लाइव टेलीकास्ट या फिर भजन के आयोजन के लिए सरकार या पुलिस की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे धर्म की विजय बताते हुए पेश किया। तमिलनाडु का HRCE विभाग वहाँ के मंदिरों की निगरानी करता है। प्राइवेट मंदिरों और मैरिज हॉल्स में भी ऐसे आयोजन हो सकते हैं। इसके लिए सिर्फ मंदिर के एग्जीक्यूटिव अधिकारी को सूचित करना होगा।

इसके बाद एग्जीक्यूटिव अधिकारी इसकी अनुमति देगा, साथ ही अगर कुछ पाबंदियाँ हैं तो इस बारे में भी बता दिया जाएगा। ‘विवेकानंद हिन्दू मूवमेंट’ ने इस संबंध में याचिका दायर की थी, जिस पर जजों ने अपने चैंबर में ही त्वरित सुनवाई की। पट्टाभिराम स्थित KKR कल्याण मंडपन में भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का लाइव टेलीकास्ट चल रहा है, पहले इसी संबंध में अनुमति वाला संशय था। पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाना पड़ा।

तमिलनाडु सरकार ने इस दौरान मद्रास उच्च न्यायालय में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर भीड़भाड़ ज़्यादा हो तो इसके लिए पुलिस को पूर्व में सूचित करना आवश्यक है। हालाँकि, सरकार के नियंत्रण वाले मंदिरों में इसके लिए अधिकारी को सूचित कर अनुमति लेनी होगी, जिसकी कुछ शर्तें भी होंगी। हाईकोर्ट ने कहा कि राम नाम के पाठ का आयोजन प्रतिबंधित नहीं है। साथ ही कहा कि ईश्वर भक्ति से शांति और एकता का सन्देश मिलना चाहिए, समाजिक सौहार्द बिगाड़े बिना।


तमिलनाडु : राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लाइव टेलीकास्ट पर बैन! BJP बोली – मंदिरों को धमकी, पूजा और विशेष प्रसाद पर भी प्रतिबंध

तमिलनाडु में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लाइव टेलीकास्ट पर बैन के बाद निशाने पर CM एमके स्टालिन की सरकार
तमिलनाडु में 22 जनवरी को होने वाले अयोध्या राम मंदिर कार्यक्रमों के लाइव टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (21 जनवरी, 2024) को इसे लेकर ट्वीट कर डीएमके सरकार पर हमला बोला है। हालाँकि, इसे लेकर अभी सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।

माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स पर सीतारमण ने कहा, “TN सरकार ने 22 जनवरी को अयोध्या राम मंदिर के कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण को देखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। TN में श्री राम के 200 से अधिक मंदिर हैं। HR&CE प्रबंधित मंदिरों में श्री राम के नाम पर किसी भी पूजा/भजन/प्रसादम/अन्नदानम की अनुमति नहीं है। पुलिस निजी तौर पर संचालित मंदिरों को भी कार्यक्रम आयोजित करने से रोक रही है। वे आयोजकों को धमकी दे रहे हैं कि वे पंडाल तोड़ देंगे। इस हिंदू विरोधी, घृणित कार्रवाई की कड़ी निंदा करती हूँ।”

सीतारमण ने अपने एक्स थ्रेड में आगे लिखा कि लोगों को भजन आयोजित करने, गरीबों को खाना खिलाने, मिठाइयाँ बाँटने और जश्न मनाने से रोका और धमकाया जा रहा है, जबकि वे केवल अयोध्या में राम मंदिर अभिषेक समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी को देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “तमिलनाडु सरकार अनौपचारिक लाइव टेलीकास्ट प्रतिबंध को उचित ठहराने के लिए कानून व्यवस्था के बिगड़ने का दावा कर रही है। यह एक झूठी और फर्जी कहानी है! अयोध्या फैसले के दिन कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं थी। देश-भर यह समस्या उस दिन भी नहीं थी जब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राम मंदिर का शिलान्यास किया था। तमिलनाडु में प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाने के लिए लोगों में उमड़े स्वैच्छिक भागीदारी और भावना ने हिंदू विरोधी DMK सरकार को बेहद परेशान कर दिया है!”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि केबल टीवी ऑपरेटरों को बताया गया है कि लाइव टेलीकास्ट के दौरान बिजली कटौती की संभावना है। वित्त मंत्री सीतारमण ने इसे I.N.D.I. गठबंधन के प्रमुख सहयोगी DMK का हिंदू विरोधी कदम बताया है।

वहीं तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने एक ट्वीट में कहा, “ऐसा लगता है कि धर्मनिरपेक्ष सरकार चलाने के नाम पर हिंदू विरोधी गतिविधियों में लगी डीएमके सरकार ने तमिलनाडु के मंदिरों में विशेष पूजा और भोजन प्रसाद पर प्रतिबंध लगा दिया है।”

उन्होंने इशारा किया, “द्रमुक सरकार को मंदिर प्रथाओं में हस्तक्षेप करने का क्या अधिकार है? इसके अलावा पुलिस को कहा गया है कि श्री राम की मूर्ति की स्थापना के मद्देनजर तमिलनाडु में मंदिर प्रशासन या जनता की ओर से कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं करने देना चाहिए और जनता के देखने के लिए बड़ी स्क्रीन के माध्यम से सीधा प्रसारण नहीं करना चाहिए।”

दरअसल रविवार सुबह ही पीएम मोदी धनुषकोडि के नजदीक अरिचल मुनई प्वाइंट गए हैं। कहा जाता है कि यहीं से राम सेतु का निर्माण हुआ था। इसके बाद वे श्री कोठंडारामा स्वामी मंदिर में पूजा और दर्शन किया। धनुषकोडी के कोठंडारामा नाम का मतल धनुषधारी राम है।

ऐसा कहा जाता है कि यहीं पर पहली बार विभीषण ने श्री राम से मिले उनसे शरण माँगी थी। कुछ किंवदंतियाँ हैं वहीं जगह जहाँ श्री राम ने विभीषण का राज्याभिषेक किया था।

तमिलनाडु में हिंदूओं और सनातन धर्म को लेकर इस तरह की घृणित राजनीति पहली बार नहीं हुई है। खुद तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे और मंत्री एमके उदयनिधि और सरकार के मंत्री सनातन के खिलाफ अभद्र बयानबाजी कर चुके हैं। सनातन को मिटाने का आह्वान कर चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ एचआर एंड सीई ने स्पष्टीकरण जारी किया है कि यह गलत सूचना फैलाई गई है कि धर्मार्थ विभाग ने तमिलनाडु के मंदिरों में कल राम के नाम पर पूजा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।


बिहार : पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी द्वारा राम मंदिर पर सवाल उठाते ही गिर गया पूरा मंच: आए थे दाएँ पैर में बेल्ट बाँध कर, अब बायाँ पैर भी घायल

खुद भी गिरे अनवर अंसारी, दूसरों को भी ले डूबे! (फोटो साभार: वीडियो स्क्रीन ग्रैब)
बिहार के गया में मुस्लिम समुदाय की एक सभा में JDU के पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की आलोचना करना भारी पड़ गया। जैसे ही उन्होंने रामलला के भव्य मंदिर और प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल उठाया, मंच भरभरा कर गिर गया। इसके कारण मंच पर मौजूद जेडीयू नेता सहित कई और लोग घायल हो गए।

ये सभा अतरी प्रखंड के डिहुरी गाँव में हो रही थी। यहाँ मुस्लिम समुदाय की तरफ से फ्रीडम फाइटर और पूर्व मंत्री अब्दुल कयूम अंसारी की 51वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही थी। कार्यक्रम में पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी मुख्य वक्ता थे।

पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने कहा, “22 जनवरी को श्रीरामचंद्र जी की प्राण प्रतिष्ठा है। वोट के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है। जिस दिन भगवान राम का जन्मदिन है, उस दिन प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन क्यों नहीं किया गया?” इसके बाद क्या हुआ, वीडियो में देख सकते हैं।

JDU नेता अली अनवर अंसारी के इतना कहते ही अचानक से मंच भरभरा कर गिर गया और मंच पर मौजूद सभी नेता जमीन पर आ गए। जिस दौरान मंच गिरा, वहाँ गिनती के 10-12 लोग ही बैठे थे, लेकिन किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला और पल भर में ही पूरा मंच जमीन पर आ गया।

मंच के गिरते ही ‘खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे’ की तरह पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने कहा, “दाहिने पैर में हम बेल्ट बाँधकर आए थे। आज बायाँ पैर भी चोटिल हो गया, लेकिन कोई बात नहीं है। नेताओं को इसी तरह से फँसाया जाता है। फिरोज साहब ने कहा कि 10 से 12 गाँव हैं। नेता तो लोभी होता ही है। हमें लगा कि मजमा लगेगा, इसलिए आ गए। जितने लोग आए सभी को आभार व्यक्त करते हैं।”

मंच के गिरने से पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी के बाएँ पैर में चोट आ गई। बताते चलें कि मंच गिरने से पहले ये कार्यक्रम सुचारू रूप से जारी था। कार्यक्रम दोपहर बाद शुरू हुआ था। मंच से भाषणबाजी जारी थी। अब्दुल कयूम अंसारी के कामों के कसीदे पढ़े जा रहे थे।

इसी दौरान मुख्य वक़्ता अंसारी की जुबान ने जैसे ही आराध्य में भगवान राम के समारोह पर सियासी बयानबाजी जारी की, रामलला पर सवाल उठाए, वैसे ही सब जमीन पर आ गिरे।

नरेंद्र मोदी को भगवान श्रीराम ने ही चुना, प्राण प्रतिष्ठा से पहले बोले आडवाणी: पांचजन्य-ऑर्गेनाइज़र सम्पादकीय मीटिंग में अडवाणी ने कहा था: "जब तक केंद्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की बहुमत की सरकारें नहीं होंगी मंदिर नहीं बनेगा"

90 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी के साथ वर्तमान पीएम मोदी (साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
राम मंदिर को जनआंदोलन में बदलने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि रथयात्रा के समय उन्हें अहसास हो गया था कि नियति ने तय कर दिया है कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा। उन्होंने खुद को सारथी बताया। साथ ही राममंदिर के सुख क्षण लाने के उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई भी दी। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आडवाणी भी मौजूद रहेंगे।

स्मरण आती है, माननीय श्री अडवाणी जी की वह बात, जब केंद्र में भाजपा के समर्थन से वी पी सिंह की सरकार बनने के बाद पाञ्चजन्य के तत्कालीन संपादक श्री तरुण विजय जी के निमंत्रण पर अडवाणी जी Panchajanya-Organiser के कार्यालय आये थे, तब दोनों सम्पादकियों की संयुक्त मीटिंग में अन्य बातों के चलते अयोध्या में प्रभु श्रीराम के जन्मस्थल पर मंदिर बनवाने पर प्रश्न करने पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था:"जब तक केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की बहुमत वाली सरकार नहीं होगी, तब तक शायद अयोध्या में राममंदिर केवल एक स्वप्न रहेगा।" कारण पूछने पर बोले कि "केंद्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकारें होने पर रोड़े अटकाने वाली सरकारें नहीं होंगी।"  कालचक्र ऐसा घुमा दोनों ही जगह सत्ता में भाजपा है और तब दिखने वाला "स्वप्न" आज इतिहास ही नहीं, रचने जा रहा, भारत के साथ-साथ समस्त विश्व का भूगोल बदलने जा रहा है।  

लालकृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से अपनी ‘रथयात्रा’ की शुरुआत की थी। इस रथयात्रा के संयोजक उस समय नरेंद्र मोदी थे। यह यात्रा 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के साथ समाप्त हुई थी। कहा जाता है कि जब विवादित ढाँचा टूटा था, उस समय लालकृष्ण आडवाणी अयोध्या में ही थे।

देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मंदिर सभी भारतीयों को भगवान राम के गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा, “उस समय (सितंबर 1990 में यात्रा शुरू होने के कुछ दिन बाद) मुझे लगा कि नियति ने तय कर लिया है कि एक दिन अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा… अब यह केवल समय की बात है।”

राष्ट्रधर्म नाम की एक पत्रिका से बात करते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने आगे कहा, “और, ‘रथयात्रा’ शुरू होने के कुछ कुछ दिनों बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं सिर्फ एक सारथी था। मुख्य संदेश यात्रा ही थी… वह ‘रथ’ पूजा के योग्य था, क्योंकि यह भगवान राम के जन्मस्थान पर जा रहा था।” उन्होंने रथयात्रा को अपने राजनीतिक करियर की सबसे निर्णायक और परिवर्तनकारी घटना बताया।

आडवाणी ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि यह रथयात्रा जनआंदोलन का रूप ले लेगी। इसे ‘खुद को खोजने’ का एक मौका बताते हुए उन्होंने कहा, “यात्रा के दौरान, कई अनुभव हुए जिन्होंने मेरे जीवन को प्रभावित किया। दूरदराज के गाँवों से ग्रामीण मेरे पास आते थे, रथ देखकर भावना से अभिभूत होते थे। वे नमस्कार करते थे। ‘राम’ का जाप करते थे और चले जाते थे। यह एक संदेश था।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए आडवाणी ने कहा कि कहा कि भगवान राम ने अपने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए नरेंद्र मोदी के रूप में अपना भक्त चुना, जिनकी देखरेख में मंदिर की इमारत बन रही है। उन्होंने कहा, “अब जब पीएम मोदी मंदिर का अभिषेक करेंगे तो वह भारत के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करेंगे।”

लालकृष्ण आडवाणी ने ये सारी बातें राष्ट्रधर्म नाम की एक मासिक पत्रि‍का से बातचीत में ये बातें कहीं। ‘श्रीराममंदिर: एक दिव्‍य स्‍वप्‍न की पूर्ति’ नाम से यह लेख 15 जनवरी 2024 को प्रकाशि‍त होगा। बता दें कि विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने पिछले दिनों कहा था कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में लालकृष्ण आडवाणी शामिल रहेंगे। 


मॉरीशस भी हुआ राममय, प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का उत्सव मनाने के लिए विशेष छुट्टी: प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ

                                                                                                                साभार: NBT/Firstpost
हिंदुओं का लगभग 500 वर्षों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। भगवान श्रीराम के नवनिर्मित मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इसको लेकर भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के हिंदुओं में उत्साह है। हिंदू समुदाय राममय है। हिंदुओं की बड़ी आबादी वाले देश मॉरीशस ने 22 जनवरी को छुट्टी की घोषणा की है।

भारत में अपनी कुर्सी की खातिर तुष्टिकरण कर रहे प्राण प्रतिष्ठा समारोह का विरोध करने वाले नेताओं और पार्टियों को शर्म आनी चाहिए कि जिस समारोह के विश्व, विशेषकर कुछ मुस्लिम देश, लाइव दिखाने के लिए उत्सुक है, वही ये राम विरोधी दुष्प्रचार कर जनता को गुमराह कर घिनौनी सियासत कर रहे हैं। नीचे दिए दो वीडियो(आंशिक) इन राम विरोधियों को बेनकाब कर रही है। सोनिया गाँधी कितनी हिन्दू विरोधी है, एक वीडियो में जिस हिन्दू विरोधी बिल का जिक्र है, इसके बारे में विस्तार से  कुछ समय पहले लिख चुका हूँ:- 


इन्ही आरिफ आजक़िया ने नूपुर शर्मा विवाद पर कट्टरपंथियों को लताड़ा था। 

मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ (Pravind Jugnauth) के नेतृत्व में मॉरीशस की कैबिनेट ने वहाँ हिंदू कर्मचारियों को 22 जनवरी को 2 घंटे की विशेष छुट्टी दी है। इस दौरान वे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर होने वाले स्थानीय कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे और लाइव टेलिकास्ट देख सकेंगे। इसके लिए मॉरीशस के हिंदू सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने माँग की थी।

प्रधानमंत्री जगन्नाथ की अध्यक्षता वाली मॉरीशस की कैबिनेट ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को एक आधिकारिक बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया है कि सोमवार 22 जनवरी 2024 की दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक, दो घंटे की विशेष छुट्टी देने का फैसला किया है। भारत में अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर यह फैसला लिया गया है।

बयान में कहा गया है कि यह हिंदुओं के लिए एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि यह भगवान राम की वापसी का प्रतीक है। ऐसे में मॉरीशस सरकार के हिंदू अधिकारी एवं कर्मचारी उस दिन 2 घंटे की विशेष घंटे की छुट्टी पर रहेंगे। पीएम प्रविंद जुगनाथ ने कहा कि यह भावनाओं और परंपराओं के सम्मान का छोटा सा प्रयास है।

मॉरीशस में हिंदुओं की आबादी लगभग 48.5 प्रतिशत है। यहाँ के हिंदुओं की जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं। अफ्रीकी महाद्वीप से सटा हिंद महासागर में स्थित बेहद खूबसूरत द्वीपीय देश मॉरीशस अकेला ऐसा देश है, जहाँ हिंदू धर्म के अनुयायी इतनी बड़ी संख्या में रहते हैं। अगर देश की आबादी के अनुपात में देखें तो भारत और नेपाल के बाद यहाँ सबसे अधिक हिंदू रहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह में भगवान रामलला की मूर्ति की स्थापना में शामिल होंगे। इस समारोह में सभी क्षेत्रों की हस्तियों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही इस प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में 50 से अधिक देशों के गणमान्य व्यक्तियों भी शामिल होंगे।

मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़ा यह समारोह 16 जनवरी 2024 से शुरू होकर सात दिनों तक चलेगा और 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा होगी। यह अनुष्ठान वैदिक रीति-रिवाजों से होगा। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिनों का विशेष व्रत भी रखा है।

इस भव्य समारोह में समाज के विभिन्न तबकों का प्रतिनिधित्व होगा। इसमें आने वाले लगभग 7000 मेहमानों में 4000 धर्माचार्य और लगभग 3000 अन्य लोग आएँगे। इनमें लगभग 50 पद्म सम्मानों से सम्मानित हस्तियाँ रहेंगी। इसके साथ ही इस मंदिर को बनाने वाले लगभग 300 श्रमिकों और दान देने वाले लोगों को भी अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है।  

इस्लामी देशो में लाइव प्रसारण: वैश्विक होगा राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह, एफिल टॉवर से लेकर टाइम्स स्क्वायर तक होगा राममय

शिकागो के मंदिर से लेकर फ्रांस के एफिल टॉवर तक, राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की हर जगह धूम
राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप तक के श्रद्धालु उत्साहित हैं। फ्रांस का एफिल टॉवर हो या न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर, हर जगह विशाल पर्दों पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के प्रसारण की तैयारी है। इतना ही नहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न इलाकों में कार रैली भी निकाली जाएगी। यहाँ तक कि इस्लामी मुल्कों में भी रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान का लाइव प्रसारण होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।

लोगों के उत्साह का आलम देखिए कि अयोध्या में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर विदेश तक में लोग इंतज़ार कर रहे हैं। इस तरह से अब ये एक वैश्विक कार्यक्रम बन रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नज़रें बनी हुई हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में 21 जनवरी, 2023 को ‘राम रथ यात्रा’ भी प्रस्तावित है, जिसमें पूरे यूरोप से श्रद्धालु जुट रहे हैं। साथ ही एफिल टॉवर के पास भी कार्यक्रम का आयोजन होगा। अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर तो राम मंदिर के शिलान्यास के कार्यक्रम का भी लाइव प्रसारण हुआ था, अब प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का होगा।

नॉर्थ अमेरिका के कई इलाकों, कनाडा में भी मंदिरों में 22 जनवरी को धार्मिक आयोजन होंगे, विशेष पूजा-अर्चना होगी। कैलिफोर्निया, वाशिंगटन और शिकागो सहित USA के कई शहरों में कार रैलियाँ होंगी। भारतीय समय के अनुसार 12:30 बजे कार्यक्रम होना है। उस दौरान जहाँ पेरिस में सुबह होगी, वहीं अमेरिका में रात होगी। चूँकि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद रामलला अपने मंदिर में विराजने जा रहे हैं, इसीलिए श्रद्धालुओं ने तैयारियाँ भी ख़ास कर के रखी हैं।

पेरिस में रहने वाले अविनाश मिश्रा ने बताया कि इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनते हुए यूरोप के लोग पेरिस में ‘राम रथ यात्रा’ में भाग लेंगे और एफिल टॉवर के पास प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखेंगे। उन्होंने इस यात्रा का नक्शा शेयर करते हुए श्रद्धालुओं से इसका हिस्सा बनने की अपील की। ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने भी इस कार्यक्रम से जुड़ी सूचना को रीट्वीट किया है। अविनाश ने कहा कि इस प्राण-प्रतिष्ठा आयोजन का लाइव प्रसारण देखना श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्य की बात है।

नॉर्थ अमेरिका और कनाडा में ‘द मांडू मंदिर एम्पावरमेंट काउंसिल’ ने कई देवस्थानों में कार्यक्रम की योजना बनाई है। वाशिंगटन और शिकागो के बाद अब कैलिफोर्निया में कार रैली होनी है। श्रद्धालुओं ने कहा कि भले ही वो सदेह अयोध्या में उपस्थित रहने में अक्षम हैं, लेकिन भगवान राम उनके हृदय में रहते हैं और वो उनकी वापसी से हर्षित हैं। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर एरिक एडम्स ने कहा कि ये एक हिन्दुओं की जनसंख्या को देखते हुए ये एक बहुत महत्वपूर्ण घटना है, ये आध्यात्मिकता के पथ पर बढ़ने और त्योहार मनाने का एक अच्छा अवसर है।

इतना ही नहीं, 160 अलग-अलग देशों में कई कार्यक्रमों का आयोजन होना है। VHP (विश्व हिन्दू परिषद) ने इसकी रूपरेखा तैयार की है। 50 देशों में बड़े आयोजन होने हैं। अमेरिका में 300, मॉरीशस में 100, UK में 25, ऑस्ट्रेलिया में 30 और कनाडा में 30 लोकेशनों से अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण होगा। आयरलैंड, फिजी, इंडोनेशिया और जर्मनी में भी बड़े-बड़े कार्यक्रम होंगे, जहाँ लाइव प्रसारण दिखाया जाएगा।

अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और फिजी समेत 50 देशों के प्रतिनिधियों को अयोध्या इस समारोह में उपस्थित रहने के लिए बुलाया गया है। इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसी इस्लामी मुल्कों में भी लाइव स्ट्रीमिंग की योजना है। हवन पूजा और हनुमान चालीसा पाठ जैसे कार्यक्रम 160 देशों में होने हैं। एक तरह से यूपी भी इस कार्यक्रम के जरिए विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। दुनिया भर में हिन्दू पुनरुत्थान की एक इस नई गाथा के लोग साक्षी बनेंगे।


‘मुस्लिम नहीं देगा हर बार कुर्बानी’ : राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ‘छद्दम सेकुलर’ नेता लगा रहे कट्टरपंथ की आग

                                              राम मंदिर से पहले मुस्लिम नताओं का जहर
अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जहाँ देश भर में खुशी का माहौल है। हर समुदाय उल्लास में डूबा है। मुस्लिम महिलाएँ तक भगवा वस्त्र पहन पहनकर अयोध्या के लिए रवाना हो रही हैं। ऐसे समय में खुद को सेकुलर बताने वाले कट्टरपंथी नेताओं ने भड़काऊ बयानबाजी की है। किसी ने मुस्लिमों को बाबरी के नाम पर भड़काया है तो किसी ने उन्हें राम मंदिर के नाम पर डराया है।

इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार मुसलमान कुर्बानी नहीं देगा। उन्होंने कहा, “हमसे हमारी मस्जिद छीनी जा रही है। इस बात को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा को हमारी अजान से भी दिक्कत है।”

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से तय था, जिसने ये निर्णय दिया उसे राज्यसभा भेज दिया गया।”

इसी तरह असम के बारपेटा के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने भी मुस्लिम युवाओं में डर फैलाते हुए कहा कि 20 से 25 जनवरी तक सारे मुसलमानों को अपने घर में रहना होगा।

उन्होंने कहा, “हमें सतर्क रहना होगा। मुसलमानों को 20 से 25 जनवरी तक यात्रा करने से बचना चाहिए। पूरी दुनिया राम जन्मभूमि में रामलला की मूर्ति स्थापित होते देखेगी। लाखों लोग बसों, ट्रेनों, हवाई जहाज आदि से यात्रा करेंगे। शांति बनाए रखनी होगी।” अजमल ने कहा, “इस दौरान हमें यात्रा करने से बचना होगा और घर ही रहना होगा। भाजपा मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन है। यह हमारे जीवन, आस्था, मस्जिदों, इस्लामी कानूनों और अजान की दुश्मन है।”

आखिर कट्टरपंथी और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स कब तक इतिहास की सच्चाई से मुंह मोड़ते रहेंगे? आखिर क्यों बेगुनाहों को बलि का बकरा बना रहे हो? ये लोग भूल रहे हैं कि काशी, मथुरा और कम से कम 3/4 विवादित स्थलों के हिन्दू धर्म में वापस आने पर कोई मुसलमान इनकी भड़काऊ बातों में आना वाला नहीं। इनकी दुकानें बंद होने के कगार पर पहुँच रही है। ये बदलते कालचक्र को पढ़ने एवं समझने में या तो असमर्थ हैं या फिर धमकियों से सच्चाई को बाहर आने से रोकने का असफल प्रयास कर रहे हैं। आखिर सच्चाई सामने आने से क्यों डर रहे हैं? इन्हे यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आज जब इनकी मस्जिदें अथवा दरगाह अपने असली रूप यानि मंदिर में परिवर्तित होने का दर्द हो रहा है, हिन्दुओं से पूछो, कितने वर्षों से अपने सीने में दबाए बैठे थे। सरकार को उन सभी इतिहासकारों को ब्लैकलिस्ट करना चाहिए जिन्होंने चंद चांदी के सिक्कों के लालच में सच्चाई को छुपाकर गलत इतिहास लिखा।  

जहाँ ये नेता राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर माहौल बिगाड़ने के प्रयास में लगे हैं। वहीं काशी की मुस्लिम महिलाएँ अयोध्या पहुँच रही हैं। कल ही खबर आई थी कि नाजनीन अंसारी नाम की महिला ने कहा कि धर्म परिवर्तन कर लेने से पुरखे नहीं बदल जाते। भगवान श्रीराम ही मुस्लिमों के पूर्वज हैं। नाजनीन ने कहा है कि वो मुस्लिमों से अपील करेंगी कि वो लोग भी राम ज्योति प्रजवलित करें।

जहाँ इतिहास में कभी नहीं हुआ किसी का अंतिम संस्कार, भरत ने वही जगह ढूँढ कर की राजा दशरथ की अंत्येष्टि: पुजारी बोले – पहले सब जर्जर था, मोदी-योगी ने बदल दिया

राजा दशरथ समाधि स्थल  जहाँ भगवान राम के वियोग में प्राण त्याग देने वाले राजा दशरथ का हुआ था अंतिम संस्कार
अयोध्या में निर्माणाधीन रामजन्मभूमि के गर्भगृह में 22 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में रामलला की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस अवसर पर पूरे देश में दीपावली जैसा माहौल होगा। ऑपइंडिया की टीम दिसंबर 2023 के अंतिम हफ्ते से अयोध्या में है। अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में हम लोगों को न सिर्फ गुमनाम बलिदानी बल्कि विस्मृत किए गए उन स्थलों के बारे में भी बताने का प्रयास कर रहे हैं जो भगवान राम से कहीं न कहीं संबंधित हैं। इन्हीं में से एक स्थान है राजा दशरथ समाधि स्थल।

यहीं पर वनवास गए राम के वियोग में प्राण त्यागने के बाद उनके पिता दशरथ का अंतिम संस्कार हुआ था। शनिवार (30 दिसंबर, 2023) को ऑपइंडिया की टीम ने दशरथ समाधि और उसके आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया।

राजा दशरथ अंत्येष्टि स्थल अयोध्या-आज़मगढ़ रोड पर पूरा बाजार क्षेत्र में स्थित है। अयोध्या से इस जगह की लगभग दूरी 12 किलोमीटर है। पुराणों में इस जगह का नाम बिल्वहरि घाट बताया गया है। मुख्य हाइवे से लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर उत्तर दिशा की तरफ बना यह स्थान एक घनी मिश्रित आबादी से गुजरता है। इसी मंदिर के बाद माझा क्षेत्र शुरू हो जाता है। माझा क्षेत्र वह इलाका कहा जाता है जो नदी के बढ़ने पर उसके दायरे में आ जाता है और यहाँ की जमीन रेतीली होती है। मंदिर से सटा हुआ सरयू नदी का विस्तार क्षेत्र है।

                                                राजा दशरथ समाधि स्थल प्रवेश द्वार

जहाँ रखा गया दशरथ का पार्थिव शरीर वहाँ बना है स्मारक

ऑपइंडिया ने पाया कि भगवा रंग में रंगी इस जगह की बाउंड्री की गई है। अंदर एक मंदिर है जिसमें बाकायदा विधि-विधान से पूजा-पाठ होता है। ऊँचाई पर चढ़ कर एक चबूतरानुमा स्मारक बना है। मंदिर के पुजारी व उत्तराधिकारी संदीप दास ने बताया कि जहाँ स्मारक है वहीं राजा दशरथ का पार्थिव शव रखा गया था और उनको मुखाग्नि दी गई थी। संदीप दास ने ऑपइंडिया को यह भी बताया कि तब सरयू नदी की मुख्य धारा मंदिर के ठीक बगल से गुजरती थी। हालाँकि, समय के साथ वह थोड़ी उत्तर दिशा में चली गई। अभी भी बरसात के मौसम में सरयू नदी मंदिर के बगल आ कर बहती है।
                                      राजा दशरथ की दाह संस्कार स्थली पर बना स्मारक
स्मारक के आसपास कई प्राचीन कालीन अस्त्र-शस्त्र रखे हुए हैं। संदीप दास का दावा है कि उन शस्त्रों पर सदियों से जंग नहीं लगा है। स्मारक के ऊपर प्रतीकत्मक तौर पर राम, लक्ष्मण, भारत द्वारा किया गया पिंडदान रखा हुआ है। इसी पर एक शिवलिंग भी बना हुआ है। बकौल पुजारी, राम ही नहीं उनके पूर्वज भी महादेव के भक्त रहे थे। संदीप दास के मुताबिक, अंतिम संस्कार के दौरान राजा दशरथ के पार्थिव शरीर में सिर का हिस्सा उत्तर नदी की तरफ और पैर दक्षिण की तरफ था। पैर की दिशा में स्मारक पर राजा दशरथ के चारों बेटों की चरण पादुकाएँ प्रतीकत्मक तौर पर बनी हुईं हैं।

यहाँ पहले किसी का नहीं हुआ था दाह संस्कार

राजा दशरथ का अंतिम संस्कार वहीं क्यों हुआ ? यह सवाल जब हमने पुजारी संदीप दास से पूछा तो उन्होंने इसकी कथा बताई। उन्होंने बताया कि पिता के देहांत के दौरान राम और लक्ष्मण माँ सीता वनवास काट रहे थे जबकि भरत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल में थे। पिता के देहांत की खबर सुन कर भरत और शत्रुघ्न अयोध्या आए। तब राजा के रूप में काम कर रहे भरत ने अपने मंत्रिमंडल की सभा बुलाई। उन्होंने अपने पिता के दाह संस्कार के लिए ऐसी जगह तलाशने के लिए कहा जहाँ उस से पहले इतिहास में किसी और का अंतिम संस्कार न हुआ हो।
पुजारी संदीप दास के मुताबिक राजा भरत और उनके मंत्रिमंडल को ऐसी जगह तलाशने में काफी समय लगा। इस दौरान राजा दशरथ के पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखा गया। आखिरकार लम्बी खोजबीन के बाद बिल्वहरि घाट पर वो जगह मिल ही गई जहाँ पहले इतिहास में किसी का भी अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। आज जहाँ दशरथ समाधि है वह वही जगह है जहाँ इतिहास और वर्तमान मिला कर सिर्फ राजा दशरथ की ही अंत्येष्टि हुई है। संदीप दास का यह भी दावा है कि वनवास काट कर लंका विजय के बाद भगवान राम भी अपने पिता के अंत्येष्टि स्थल पर गए थे और उन्होंने वहाँ वैदिक विधि-विधान से आवश्यक क्रिया-कलाप किए थे।
                                                       राजा दशरथ की दाह स्थली

मंदिर में मौजूद है भगवान राम की वंशावली

ऑपइंडिया की टीम ने जब मंदिर का भ्रमण किया तो पाया कि परिसर में शनिदेव का एक अन्य मंदिर भी मौजूद है। मंदिर की दीवालों पर रामचरितमानस और रामायण के साथ विभिन्न देवी-देवताओं के चालीसा की पट्टिकाएँ मौजूद हैं। इन्ही पट्टिकाओं में भगवान राम की वंशावली भी दिखी। यह वंशावली भगवान ब्रह्मा से शुरू हुई है और राम पर खत्म हुई है। भगवान राम की वंशावली में उनके पहले क्रमशः दशरथ, अज, रघु, दीर्घवाहु, खष्ट्रवाड, विश्वास, विश्वसह, लिविल, दशरथ, मूलक, अश्मक, सौदास, सुदास, सर्वकाम, ऋतुपर्ण, अयुतायु, सिधुदीप, अम्बरीश, नाभाग, श्रुति, सुहोत्र, भगीरथ, दिलीप, अंशुमान, असमंजस, सगर, बाहु, वृक, रुरुक, विजय, चच्चू, हरीता, रोहिताश्व, हरिश्चंद्र, सत्यव्रत, त्र्यारुणि, त्रिधन्वा, सुमन, हरतस्य, हयश्व, पृषदश्व, अनरष्य, त्रसददस्यु, पुरुकुत्स्य, अमित, निकुम्भ, हर्यश्व, दद्धाश्व, कुवलयाश्व, वृहदश्व, शाश्वत, युवनाश्व, चांद्र, विष्टराश्व, पृथु, अनेनाः, कुकुत्स्थ, पुरंजय, विकुक्षि, ईक्षयाकु, वैवस्वत, विवस्वान, कश्यप मरीचि और भगवान ब्रह्मा के नाम हैं।
                                                    भगवान राम की वंशावली
इस पट्टिका के मुताबिक सूर्यवंश का आरम्भ शुरू से क्रम नंबर (पीढ़ी संख्या) 5 पर मौजूद राजा वैवस्वत के समय में हुआ। वहीं इसी सूची के मुताबिक रघुकुल की शुरुआत क्रम संख्या (पीढ़ी नंबर) 60 पर मौजूद राजा रघु के काल से हुई। राजा रघु को सूर्यवंश का सबसे प्रतापी राजा माना गया है। उनके ही नाम का जिक्र कई बार ग्रंथों में भी आया है। इसी नाम के आधार पर ‘रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाय पर वचन न जाई’ चौपाई बनाई गई है।

जो काम योगी सरकार ने किया वो पहले कभी नहीं हुआ

मंदिर के पुजारी संदीप दास ने हमें बताया कि उनकी कई पीढ़ियाँ राजा दशरथ की अंत्येष्टि स्थल की रखरखाव और पूजा-पाठ करती आ रहीं है। स्थान को पवित्र और पौराणिक बताते हुए उन्होंने पिछली सरकारों द्वारा इसकी उपेक्षा का आरोप लगाया। संदीप दास का कहना है कि दशरथ समाधि के लिए जो काम मोदी और योगी सरकार ने कर दिया वो पहले करना तो दूर किसी ने सोचा भी नहीं था। पहले मंदिर में न सिर्फ पर्याप्त उजाले और पानी की दिक्कत थी बल्कि आने और जाने के लिए सड़क बेहद जर्जर हालत में थी।
                                                  मंदिर के पुजारी संदीप दास
अब मंदिर परिसर में एक छोटी सी धर्मशाला आदि बनवाई गई है। यह जगह मांगलिक आयोजनों के साथ धार्मिक सभा और कोई विकल्प न होने पर यात्रियों के ठहरने में काम आ रही है। फिलहाल दशरथ समाधि के बगल से गुजर रही सड़क जल्द ही चौड़ी की जाएगी। संदीप का कहना है कि वर्तमान सरकार मंदिर का जीर्णोद्धार करवाएगी और इसे भव्यता देगी। संदीप दास ने भावुक हो कर मंदिर परिसर से मोदी और योगी को आशीर्वाद भी दिया।
बताते चलें कि ऑपइंडिया की टीम दिसंबर 2023 के अंतिम सप्ताह से अयोध्या में है। यहाँ से हम आपको न सिर्फ रामजन्मभूमि आंदोलन के गुमनाम बलिदानी, विस्मृत घटनाएँ बल्कि अयोध्या के कई अनसुने लेकिन पवित्र स्थानों के बारे में विस्तार से बताएँगे। पिछली 2 रिपोर्ट में हमने पाठकों को रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के गुमनाम बलिदानियों के परिवार से परिचित करवाया है। इस कड़ी की अगली खबर जल्द ही प्रकाशित होगी।
                                                                                                                        (साभार)