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दोगले पाकिस्तान ने ट्रंप की पीठ में घोंपा छुरा, ईरान के लिए खोले 6 रास्ते: हॉर्मुज की नाकाबंदी फेल


अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान ने ईरान के लिए व्यापार के छह नए रास्ते खोल दिए हैं। इससे ईरान को काफी राहत मिलेगी। खास बात यह है कि पाकिस्तान ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नाकाबंदी लागू की हुई है।

दरअसल, ईरान के लिए भेजे जाने वाले हजारों कंटेनर पाकिस्तान के बंदरगाहों पर फँसे हुए थे। इससे व्यापार पर भारी असर पड़ रहा था और कारोबारी परेशान था। इसीलिए अपना फायदा देखते हुए पाकिस्तान ने यह कदम उठाया। अब इन नए व्यापार के रास्तों के जरिए सामान आसानी से ईरान पहुँचाया जा सकेगा।

पाकिस्तान ने जिन व्यापार के रास्तों को दोबारा चालू किया है, वो हैं:

  • ग्वादर से गब्द
  • कराची/पोर्ट कासिम से लियारी, ओरमारा, पसनी होकर गब्द
  • कराची/पोर्ट कासिम से खुजदार, दलबंदिन होकर ताफ्तान
  • ग्वादरे से तुर्बत, होशाब, पंजगुर, नाग, बेसिमा, क्वेटा/लाकपास होकर ताफ्तान
  • ग्वादर से लियारी, खुजदार, क्वेटा/लाकपास होकर ताफ्तान
  • कराची/पोर्ट कासिम से ग्वादर होकर गब्द
इन नए रास्तों से पाकिस्तान के प्रमुख बंदरगाह, जैसे ग्वादर और पोर्ट कासिम, सीधे ईरान सीमा से जुड़ गए हैं। ये रास्ते ताफ्तान और गब्द जैसे अहम सीमा चौकियों तक पहुँचते हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है, जिसका अब दोनों देशों को बड़ा फायदा मिलेगा।
खास तौर पर ग्वादर से गब्द वाला रास्ता सबसे अहम माना जा रहा है। इस रास्ते से पहले जहाँ यात्रा में लगभग 18 घंटे लगते थे, वहीं अब यह दूरी केवल 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे व्यापार तेज होगा, समय बचेगा और दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

पाकिस्तान ने कैसे अमेरिका को दिया धोखा?

पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना इसीलिए की जा रही है क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है। खासकर सुरक्षा और क्षेत्रीय मामलों में दोनों देशों के रिश्ते मजबूत माने जाते हैं। लेकिन अब पाकिस्तान ने ऐसा रास्ता तैयार कर दिया है, जिससे ईरान पर अमेरिका की नाकाबंदी का असर काफी हद तक कम हो सकता है।
पाकिस्तान ने तीसरे देशों के सामान को कानूनी तौर पर अपने रास्ते ईरान भेजने की अनुमति दे दी है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका जो ईरान पर दबाव बनाना चाहता था, वह अब कमजोर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ हिमांशु जैन और ऋचा द्विवेदी जैसे जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान के इस फैसले ने अमेरिकी नाकाबंदी में एक ‘कानूनी छेद’ कर दिया है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर पाकिस्तान इस क्षेत्र में अमेरिका की रणनीति के साथ कितनी मजबूती से खड़ा है।

‘अगर ईरानी जहाज दिखे तो उड़ा देंगे’: ट्रंप ने होर्मुज रास्ते पर 15+ युद्धपोत किए तैनात, नाकाबंदी के बीच तेहरान ने कहा- भारतीय जहाजों को नहीं कोई होगी दिक्कत

                                      ट्रंप ने होर्मुज पर की नाकाबंदी (साभार : Indiatoday & deccanherald)
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसा खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने ईरान के समुद्री रास्तों की पूरी तरह नाकाबंद कर दी है। ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर ईरान की कोई भी नाव हमारे घेरे के पास आई, तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच बातचीत फेल होने के बाद कच्चे तेल की कीमत ₹8,500 (100 डॉलर) प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गई है और शेयर बाजार धड़ाम हो गया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के बीच ईरान ने भारत के साथ अपनी गहरी दोस्ती निभाते हुए बड़ी राहत दी है। ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने साफ किया है कि भारतीय जहाजों से कोई टोल टैक्स नहीं वसूला जा रहा है और भविष्य में भी उन्हें इस रास्ते से सुरक्षित निकलने दिया जाएगा।

ट्रंप की सख्त चेतावनी और समुद्र में हलचल

अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अपने 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ कहा कि ईरानी जहाजों को उसी तरह खत्म किया जाएगा जैसे समुद्र में ड्रग डीलरों को खत्म किया जाता है।
अमेरिका का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना है ताकि वह बातचीत की मेज पर आए। इस नाकाबंदी के शुरू होते ही समुद्र में असर दिखने लगा है। ‘रिच स्टारी’ और ‘ओस्ट्रिया’ जैसे बड़े तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया है और वे वापस लौट रहे हैं।

ईरान का पलटवार: ‘हम झुकेंगे नहीं’

ईरान ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। ईरान की संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि इस नाकाबंदी की वजह से दुनिया को जल्द ही $4-$5 के पेट्रोल वाले पुराने दिन याद आएँगे, यानी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं।
ईरान के दूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि वे शांति के लिए तैयार हैं लेकिन युद्ध के लिए भी पूरी तरह मुस्तैद हैं। ईरानी सेना (IRGC) ने धमकी दी है कि उनके पास ऐसे आधुनिक हथियार और तरीके हैं जिनका अमेरिका को अंदाजा भी नहीं है।

शांति वार्ता क्यों हुई फेल?

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक लंबी चर्चा चली, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु काम (यूरेनियम बनाना) पूरी तरह बंद कर दे, पर ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। हालाँकि, पाकिस्तान और अमेरिका के बड़े अफसरों का कहना है कि बातचीत अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और जल्द ही दोनों देश दोबारा मिल सकते हैं।

शांति वार्ता से पहले ट्रंप की युद्ध वाली चेतावनी: ‘बात बनी तो ठीक, नहीं तो अंजाम बुरा होगा’: ईरान बोला- शर्तें मानने पर ही होगी बातचीत शुरू

                           ट्रंप-ईरान के बीच शांति वार्ता होगी पाकिस्तान में (साभार : Aajtak, Jagran)
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार (11 अप्रैल 2026) को अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता होने जा रही है। इस महा-बैठक से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (समुद्री रास्ता) को तुरंत खोल दे, वरना अंजाम बुरा होगा।

ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान जंग हार चुका है और अब यह बातचीत ही उसका आखिरी मौका है। दूसरी तरफ, ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी अपनी कड़ी शर्तों के साथ इस्लामाबाद पहुँच चुका है।

ईरान की अपनी शर्तें और अमेरिका का कड़ा रुख

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ एक भारी-भरकम डेलीगेशन के साथ शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को ही इस्लामाबाद पहुँच गए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बातचीत तभी शुरू होगी जब अमेरिका उनकी शर्तें मानेगा।

ईरान की मुख्य माँगों में लेबनान में तुरंत युद्धविराम और अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड को जारी करना शामिल है। गलिबाफ ने कहा कि ईरान बातचीत तो चाहता है लेकिन उसे अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।

ट्रंप की युद्ध वाली चेतावनी

उधर, अमेरिका के तेवर और भी तीखे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी केवल समुद्री रास्तों को रोककर दुनिया को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में यहाँ तक कह दिया कि अमेरिकी युद्धपोतों को नए और घातक हथियारों से लैस कर दिया गया है।

अगर शनिवार (11 अप्रैल 2026) की बातचीत फेल होती है, तो अमेरिका ईरान पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह समुद्री रास्ते (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में ईरान को कोई ‘टोल टैक्स’ वसूलने नहीं देंगे।

पाकिस्तान के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

इस बातचीत की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘मेक-ऑर-ब्रेक’ (बनी तो बनी, नहीं तो बिगड़ी) वाली स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि पूरे मिडिल ईस्ट की शांति इसी बैठक पर टिकी है। पाकिस्तान चाहता है कि दोनों देश मिलकर किसी ठोस नतीजे पर पहुँचें ताकि लंबे समय से चल रहा तनाव खत्म हो सके।
इस चर्चा के लिए दोनों तरफ से दिग्गज नेता मैदान में उतर चुके हैं। ईरान की ओर से इस वार्ता का मोर्चा विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ संभाल रहे हैं, जिनके साथ ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं।
वहीं, अमेरिका की तरफ से टीम की अगुवाई खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, और उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद जारेड कुशनर और अनुभवी सैन्य रणनीतिकार वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर मौजूद हैं।
चूँकि पाकिस्तान इस पूरी बातचीत की मेजबानी कर रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार भी इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा बने रहेंगे।

क्या होगा आगे?

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या शनिवार (11 अप्रैल 2026) के बाद भी बातचीत का दौर चलेगा, तो उन्होंने सस्पेंस बनाए रखा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें 47 साल से सिर्फ बातें कर रही थीं, अब फैसला जल्द होगा।

अमेरिका का मुख्य मकसद यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना पाए और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर कब्जा न करे। अब सबकी निगाहें शनिवार की टेबल टॉक पर हैं कि क्या दुनिया को युद्ध से राहत मिलेगी या तनाव और बढ़ेगा।

‘उन्हें सिर्फ बातचीत के लिए जिंदा छोड़ा है’: शांति वार्ता से पहले ट्रंप की ईरान को धमकी, कहा- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टोल वसूलना बंद करे


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर अपनी मनमानी बंद करे। ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टैक्स या टोल (पारगमन शुल्क) वसूलने की इजाजत नहीं देगा।

ट्रंप ने तेहरान की इस कोशिश को ‘दुनिया से जबरदस्ती वसूली‘ करार दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा कि ईरान के पास अब कोई मजबूत दाँव नहीं बचा है।

ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि आज ईरान अगर सुरक्षित है, तो उसकी एकमात्र वजह यह है कि अमेरिका ने बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखे हैं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल दुनिया को डराने और अपनी सौदेबाजी करने के लिए कर रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।