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पानी के लिए तरस रहा पाकिस्तान, 4 बार पत्र लिखकर भारत से लगाई गुहार: सिंधु जल समझौता रद्द होने के बाद बाँध सूखे, खेती-बाड़ी और बिजली के चौपट होने का खतरा

                                                                                                          प्रतीकात्मक फोटो साभार: WION
भारत के सिंधु जल समझौता निलंबित करने का असर पाकिस्तान पर दिखने लगा है। भीषण गर्मी में पाकिस्तान के बाँध सूख रहे हैं। इन बाँधों से पानी भी कम छोड़ा जा रहा है। इसके चलते पाकिस्तान में खेती पर असर पढ़ने की संभावना है। पानी कम होने का असर सीधे-सीधे आँकड़ों में भी दिखा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में सिंधु नदी पर बने बाँधों से इस वर्ष कम पानी छोड़ा जा रहा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें लगभग 15% की कमी आई है। इस बात की पुष्टि आधिकारिक डाटा से हुई है। यह कमी बीते सप्ताह (1 जून 2025-8 जून 2025) में आई है।

सूखे पाकिस्तान के बाँध

पाकिस्तान में सिंधु नदी के सहारे ही खेती और बाकी उद्योग चलते हैं। यह पाकिस्तान के पंजाब समेत बाकी राज्यों की जीवनरेखा सरीखी है। इसी पर कई बाँध भी बनाए गए हैं। अब पाकिस्तान के पंजाब में सिंधु से छोड़ा जाने वाला पानी मात्र 1.24 लाख क्यूसेक रह गया है। पिछले वर्ष यह 1.44 लाख क्यूसेक था।

पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण तरबेला बाँध भी सूख रहा है। तरबेला बाँध में सिंधु नदी का स्तर वर्तमान में 1465 मीटर पर है। यह इसके डेड लेवल 1402 मीटर से थोड़ा ही ऊपर है। किसी बाँध का डेड लेवल वह स्तर होता है, जहाँ से पानी को आगे भेजने के लिए पम्प का इस्तेमाल होता है।

इससे ऊपर के स्तर से पानी स्वयं ही आगे बह जाता है। यह हाल सिर्फ तरबेला बाँध का ही नहीं है बल्कि सिंधु नदी पर ही बने चश्मा बाँध का भी यही हाल है। पाकिस्तान के मियांवाली में बने इस बाँध में पानी का स्तर, डेड लेवल मात्र से 6 मीटर ही ऊपर है। यहाँ डेड लेवल 638 मीटर का है, जबकि यहाँ पानी का स्तर 644 मीटर है।

इस भीषण गर्मी में पानी की लगातार माँग बढ़ने वाली है, ऐसे में जल्द ही पाकिस्तान को और पानी इन बाँधों से छोड़ना पड़ेगा। तब यह डेड लेवल पर जा सकते हैं। पाकिस्तान के एक और महत्वपूर्ण मंगला बाँध में भी यही हाल है। यह झेलम नदी पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बना है।

इसमें भी डेड लेवल 1050 मीटर के निकट ही 1163 मीटर पर पानी आ चुका है। इस पानी की कमी से पाकिस्तान में केवल खेती ही नहीं बल्कि बिजली का उत्पादन भी प्रभावित होने वाला है। पाकिस्तान इन बाँधों से बनने वाली पनबिजली पर बड़े स्तर पर निर्भर है।

खरीफ बुवाई में 21% पानी की कमी

पाकिस्तान का पंजाब और सिंध प्रांत बड़े स्तर पर सिंधु नदी से आने वाले पानी पर निर्भर है, इसी से यहाँ खेती होती है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट कहती है कि 10 जून, 2025 तक चलने वाली खरीफ की बुवाई में 21% पानी की कमी पाकिस्तान को इस वर्ष झेलनी पड़ेगी। यह असर सीधे तौर पर भारत के एक्शन का होगा।

पानी की कमी से परेशान पाकिस्तान अब लगातार भारत से सिंधु जल समझौते पर बात करने की गुहार लगा रहा है। उसने सिंधु जल समझौता निलंबित किए जाने के बाद 4 बार भारत को पत्र लिख कर ऐसा ना करने की गुहार लगाई है। पाकिस्तान ने यह पत्र भारत के जलशक्ति मंत्रालय को लिखे हैं। हालाँकि, भारत अपने स्टैंड पर कायम है।

क्या है सिन्धु जल समझौता?

भारत और पाकिस्तान, एक ही भूभाग का हिस्सा है। भारत से कई नदियाँ बह कर पाकिस्तान जाती हैं। सिंधु नदी तंत्र की नदियाँ पाकिस्तान के पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। इन्हीं के पानी के बँटवारे को लेकर किया गया समझौता सिंधु जल समझौता कहलाता है।

यह समझौता वर्ष 1960 में हुआ था। इसके लिए लगभग एक दशक तक बातचीत पाकिस्तान और भारत के बीच चली थी। तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तानाशाह अयूब खान ने इसको मंजूरी दी थी। सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु नदी तंत्र की 6 नदियों (व्यास, रावी, सतलुज, सिन्धु, चेनाब और झेलम) के पानी का बँटवारा होता है।

इस जल समझौते के अनुसार, पूर्वी नदियाँ (व्यास, रावी और सतलुज) के पानी पर पूरा अधिकार भारत का है। यानी इनमें बहने वाले पानी का वह किसी भी तरह से इस्तेमाल कर सकता है। भारत इन नदियों पर बाँध बना सकता है, उनकी जलधाराएँ मोड़ सकता है, उनसे नहरें निकाल सकता है और पूरा उपयोग कर सकता है।

सिंधु जल समझौते के अनुच्छेद 2 का खंड (1) कहता है, “पूर्वी नदियों का पूरा पानी भारत के अप्रतिबंधित उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा, सिवाय इसके कि इस अनुच्छेद में अन्यथा अलग से उसके लिए कोई प्रावधान किया गया हो।” पूर्वी नदियों को लेकर पाकिस्तान को दखलअंदाजी करने का कोई अधिकार नहीं है।

इसको लेकर भी अनुच्छेद 2 के खंड (2) में प्रावधान है। इसमें लिखा है, “घरेलू उपयोग को छोड़कर, पाकिस्तान सतलुज और रावी नदियों के पानी को बहने देने के लिए बाध्य होगा और उन स्थानों पर इनके पानी में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होने देगा, जहाँ ये पाकिस्तान में बहती हैं और अभी तक पूरी तरह से पाकिस्तान में प्रवेश नहीं कर पाई हैं।”

दरअसल, यह नदियाँ पाकिस्तान में अंतिम रूप से घुसने से पहले कई बार दोनों सीमाओं के इधर-उधर बहती हैं। पूर्वी नदियों के अलावा बाक़ी पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) के पानी पर पूरा अधिकार पाकिस्तान का है। समझौता के अनुसार, भारत इन नदियों को लेकर कोई भी रोक नहीं लगा सकता।

समझौते का अनुच्छेद 3 का भाग (2) कहता है, “भारत पश्चिमी नदियों के जल को बहने देने के लिए बाध्य होगा, और इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा, कुछ परिस्थितियों को छोड़ कर।” यह परिस्थितियाँ घरेलू उपयोग और कृषि उपयोग से जुड़ी हुई हैं।

इस समझौते के तहत इन 6 नदियों के लगभग 70%-80% पानी पर पाकिस्तान को जबकि 20%-30% पानी पर भारत को अधिकार मिलता है। इसको लेकर पहले भी प्रश्न उठाए जाते रहे हैं कि इसका सीधा फायदा पाकिस्तान को मिला है और भारत का इससे कोई लाभ नहीं है।

अब जब भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को हुए पहलगाम हमले के बाद ने यह समझौता रद्द कर दिया है, तो पाकिस्तान में पानी की कमी साफ़ तौर पर दिखने लगी है।

दिल्ली : सरकार के ही सर्वे खोल रहे पोल ; पानी संकट के लिए केजरीवाल सरकार ही जिम्मेदार : न सप्लाई करने की क्षमता बढ़ाई, न पानी सफाई की क्षमता बढ़ाई, न सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए, न दिया बजट

अपनी कमियों का ढीगरा दूसरों पर फोड़ने की बजाए, पानी अनशन पर बैठी पानी मंत्री आतिशी मार्लेना अनशन स्वांग को छोड़ धरातल पर काम करो। तुम्हारी अपनी ही सरकार के सर्वे ही तुम्हारी लापरवाही की पोल खोल रही है। और आरोप हरियाणा पर लगा रही हो। पूर्व मुख्यमंत्रियों मदन लाल खुराना से लेकर शीला दीक्षित द्वारा water treatments पर जितना काम हुआ है, अगर उसी पर नियमित काम किया होता, यह समस्या नहीं होती। दोनों मुख्यमंत्रियों ने विरोधियों के सरकारें होते हुए भी कभी इस तरह की किल्लत नहीं होने दी। दिल्लीवासियों को बताओ वाटर ट्रीटमेंट में कितनी मिट्टी जमा है? क्यों नहीं नियमित रूप से उनकी सफाई करवाई जाती? यमुना की सफाई छोड़ो, water treatments की ही सफाई करवा लो। जब तक तुम्हारी सरकार धरातल पर काम नहीं करेगी, कोई सरकार इस समस्या को दूर नहीं कर सकती। शर्म करो जनता पानी को तरस रही है और तुम अनशन की नौटंकी कर रही हो। अगर शर्म हो अनशन से उठो और water treatments की सफाई करवाओ। देखो दो दिन में समस्या का समाधान हो जाएगा।    

भीषण गर्मी के बीच देश की राजधानी दिल्ली जल संकट से जूझ रही है। देश की राजधानी में रहने वाली जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा चिलचिलाती धूप के बीच पानी के लिए तरस रहा है। दिल्ली के VIP इलाकों में भी पानी के टैंकरों के पीछे-पीछे बच्चे और बूढ़े तक भाग रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से आने वाला पानी गंदा है। दरअसल, यह पूरी अव्यवस्था की स्थिति क्यों है, इसकी पोल अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खुद के दस्तावेज खोलते हैं।

केजरीवाल सरकार द्वारा जनता में रखे गए कागज ही बताते हैं कि बीते 9-10 वर्षों में दिल्ली में पानी की आपूर्ति बढ़ाने पर कोई काम नहीं हुआ है। दिल्ली पानी आपूर्ति पर किए जाने वाले खर्चे भी कमी कर दी गई है। उस पर जितने खर्चे की योजना बन रही है, उसका आधा ही पैसा उसे दिया जा रहा है। इस बीच दिल्ली की जनसंख्या बढ़ती जा रही है।

पानी आपूर्ति बढ़ाने पर कोई काम नहीं

राजधानी में पानी की माँग भी इन वर्षों में लगभग 30% तक बढ़ गई है, लेकिन धरना-प्रदर्शन वाली सरकार जमीन पर कुछ भी नहीं कर पाई है। अरविन्द केजरीवाल की सरकार के दावों की पोल उन्होंने खुद दिल्ली के आर्थिक सर्वे में खोली है। इस आर्थिक सर्वे में कई चौंकाने वाले खुलासे हैं।

दूसरे राज्यों पर अपनी नाकामी का ठीकरा फोड़ने वाले केजरीवाल ने 2015 में स्थायी रूप से सत्ता में आने के बाद से दिल्ली में जल आपूर्ति क्षमता में कोई वृद्धि नहीं की है। इस क्षेत्र में उनका काम एकदम नगण्य है। उनसे पहले सत्ता में रहने वाली शीला दीक्षित के मुकाबले वह कहीं नहीं ठहरते।

दिल्ली को अलग-अलग स्रोतों पानी से मिलता है और इसे ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके भेजा जाता है। दिल्ली सरकार का 2023-24 का आर्थिक सर्वे बताता है कि वर्ष 2006 में दिल्ली में इस पानी साफ करने की क्षमता कुल 650 मिलियन गैलन/दिन थी। यह शीला दीक्षित सरकार के दौरान यह प्रति वर्ष बढ़ रही थी।

वर्ष 2015 तक आते आते यह क्षमता 906 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी थी। यानी 2006 से 2013 के बीच दिल्ली में पानी साफ करने की क्षमता में 39% बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद केजरीवाल सत्ता में आ गए और मुफ्त पानी का वादा भी किया। 2015 के बाद से 2024 तक लगातार केजरीवाल लगातार सत्ता में हैं।

                                                                                                            BG साभार: oneindia

उनके शासनकाल के दौरान दिल्ली की पानी साफ करने की क्षमता में मात्र 40 मिलियन गैलन/दिन की वृद्धि हुई और यह क्षमता 946 मिलियन गैलन/दिन पहुँच पाई। यानी जहाँ 2006-15 के बीच वृद्धि 39% हुई थी तो वहीं 2015-2024 में यह मात्र 4% रह गई। ऊपर दिए गए ग्राफ से यह तुलना आसानी से समझी जा सकती है।

पानी की माँग 9 सालों में 26% बढ़ी

केजरीवाल सरकार की इस शिथिलता का खामियाजा दिल्लीवासियों को भुगतना पड़ रहा है। केजरीवाल सरकार की इस नाकामी के बीच दिल्ली में पानी की माँग प्रति वर्ष बढ़ती जा रही है। दिल्ली में वर्ष 2006 में पानी की माँग 963 मिलियन गैलन/दिन थी, यह 2015 तक बढ़ कर 1020 मिलियन गैलन/दिन हो गई। 2023-24 के लिए दिल्ली की पानी माँग और बढ़ कर 1290 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी है।
                                                                                                        BG साभार: The Hans India
ऐसे में साफ़ होता है कि जहाँ 2015 में दिल्ली पानी की रोजाना माँग का 94% पानी साफ करने की क्षमता उसके पास थी तो वहीं 2024 तक आते-आते यह 73% हो चुकी है। यानी दिल्ली वर्तमान में जितना पानी चाहती है, उतना पानी साफ करने की उसके पास क्षमता नहीं है। वर्तमान में दिल्ली की एक चौथाई पानी की माँग पूरे करने के साधन उसके पास नहीं हैं। दिल्ली की केजरीवाल सरकार इसका इलाज करने के बजाय अपने मंत्रियों को धरने पर बिठाने और दूसरे राज्यों पर दोष डालने में लगी हुई है।

सीवर ट्रीटमेंट क्षमता पर भी काम नहीं

केजरीवाल सरकार ने पानी साफ करने की क्षमता बढ़ाने पर तो नहीं ही काम किया, उन्होंने दिल्ली से निकलने वाले सीवरेज को साफ करने पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। दिल्ली के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता कमोबेश उतनी ही है, जितनी वह 2015 में हुआ करती थी। 2006 में दिल्ली के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 512 मिलियन गैलन/दिन हुआ करती थी। यह 2015 आते-आते 613 मिलियन गैलन/दिन हो चुकी थी। यानी इसमें 6 वर्ष के भीतर लगभग 100 मिलियन गैलन/ दिन की वृद्धि हुई थी।
                                                                                                                              BG साभार: HT
दिल्ली सरकार का 2023-24 का आर्थिक सर्वे बताता है कि मार्च 2023 में 632 मिलियन गैलन/दिन की क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट हैं। यानी 2015 से 2023 के बीच केजरीवाल सरकार ने मात्र 19 मिलियन गैलन/दिन सीवर ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने का काम किया है जबकि उनकी पूर्ववर्ती सरकार ने 100 मिलियन गैलन/दिन क्षमता बढ़ाई थी।
 दिल्ली सीवर से आने वाले पानी की सफाई को लेकर निवेश ना करना दिल्ली को दो तरह से नुकसान पहुँचा रहा है। पहला तो यह है कि गंदा पानी साफ होकर वापस दिल्ली वासियों को नहीं मिल पा रहा, जिससे पानी की कमी में और बढ़त हो रही है। वहीं इस गंदे पानी के साफ पानी के स्रोत में मिलने से और भी समस्या हो रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि लम्बे समय ऐसा नहीं किया जाता तो साफ़ साफ पानी के स्रोतों की क्षमता भी कम हो जाती है।

पानी के लिए खर्चे में भी कमी कर रही सरकार

केजरीवाल सरकार जहाँ एक ओर लम्बे चौड़े वादे करती हैं तो वहीं जमीन पर काम करने के दौरान उसके सारे वादे हिरन हो जाते हैं। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वे ने ही बताया है कि जितना पैसे की योजनाएँ दिल्ली में प्रति वर्ष बनाई जा रही हैं, उतना खर्च नहीं हो रहा। पिछले तीन वर्षों में इसमें भारी गिरावट आई है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, 2020-21 के दौरान दिल्ली पानी की कमी को पूरा करने के लिए 4004 करोड़ रूपए खर्च करने की योजना बनाई गई थी। इसके मुकाबले 3584 करोड़ रूपए की ही धनराशि जारी की गई।
अवलोकन करें:-
वर्ष 2021-22 के दौरान 2951 करोड़ रूपए खर्च की मंजूरी दी गई थी लेकिन इस वर्ष मात्र 1892 करोड़ रूपए ही जारी किए गए। 2022-23 में तो जितना बजट मंजूर हुआ उसकी आधी धनराशि ही जारी की गई। 2022-23 में दिल्ली में पानी से सम्बन्धित सुविधाओं पर 6344 करोड़ रूपए के खर्चे की मंजूरी दी गई थी। इसकी तुलना में मात्र 3171 करोड़ रूपए ही जारी किए गए।
पानी साफ करने की नई क्षमताओं का विकास ना करना, सीवर व्यवस्था को ना बढ़ाना और पानी की आपूर्ति पर खर्च ना करना दिल्ली में वर्तमान जल संकट का बड़ा कारण है। दिल्ली की AAP सरकार इस नाकामी का ठीकरा हरियाणा और हिमाचल प्रदेश पर फोड़ कर बचना चाह रही है। उसके मंत्री केंद्र सरकार को पत्र लिख रहे हैं, आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं लेकिन जमीन पर काम नहीं कर रहे। मात्र जुबानी जमा खर्च करके ही काम चलाया जा रहा है।

दिल्ली जल संकट : पानी के लिए तरसते आम आदमी को दिखाया ठेंगा: सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की हिमाचल सरकार का खेला; दिल्ली को देने के लिए पानी नहीं


पार्टियां जिस तरह मलाई खाने के लिए 'हम प्याला हम नवाले' रहती है ,लेकिन जन सुविधाओं के नाम पर सुप्रीम कोर्ट तक में रोज एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नज़र आ रहे हैं। जनता पानी से तड़प-तड़प कर मरती है, परवाह नहीं, लेकिन अपनी गन्दी सियासत से बाज नहीं आ रहे। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में जल संकट को लेकर एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें हर रोज राज्य सरकारें ही अपनी बातों से पलट जा रही हैं। शुरुआत में दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट ये कहकर पहुँची थी कि हिमाचल प्रदेश सरकार उसे 136 क्यूसेक पानी दे रही है, लेकिन हरियाणा सरकार उसे दिल्ली में नहीं आने दे रही है। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी है ही नहीं, तो वो दिल्ली को क्या ही देगा?

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जब टैंकर माफिया के मुद्दे पर घेरा और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पूछा, तो पहले तो दिल्ली सरकार ने ये बहाना बनाया कि टैंकर माफिया पर उसका बस नहीं चलता, क्योंकि दिल्ली पुलिस उसके कब्जे में नहीं है, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को डाँटा कि अगर तुम कार्रवाई नहीं कर सकते, तो हम दिल्ली पुलिस को कार्रवाई का आदेश देंगे, इसके बाद अब दिल्ली सरकार ने कहा है कि टैंकर माफिया तो यमुना के उस पार यानी हरियाणा से ऑपरेट करते हैं, वो दिल्ली सरकार का इलाका ही नहीं है।

वैसे, ये साफ है कि लोकसभा चुनाव तक दिल्ली और हिमाचल की सत्ताधारी पार्टियाँ एक पक्ष में खड़ी थी। उन्होंने हरियाणा को घेरने की भरपूर कोशिश की। हिमाचल प्रदेश सरकार के वादे को लेकर दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी और कहा था कि हिमाचल सरकार पानी दे रही है, लेकिन हरियाणा उसे दिल्ली तक नहीं पहुँचने दे रहा, लेकिन अब जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अलग-अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, तो सुप्रीम कोर्ट में भी हिमाचल सरकार पलट गई और कहा कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी नहीं है। ऐसे में पार्टियों और सरकारों की आपसी नूरा-कुश्ती में आम जनता पिस रही है और वो प्यास से तड़प रही है।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सरकार को डाँट भी लगाई थी कि कोर्ट में सरकार झूठ बोल रही है। दिल्ली सरकार न तो टैंकर माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रही है और न ही जल संकट से निपटने के लिए कोई स्थाई कदम उठा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने तो यहाँ तक कहा था कि दिल्ली सरकार अगर कार्रवाई नहीं कर रही है, तो बता दे, खुद सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस को टैंकर माफिया के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देगी। अब सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने एक और दावा किया है कि दिल्ली में सक्रिय टैंकर माफिया सारे हरियाणा वाले हैं और वो दिल्ली को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

बहरहाल, अभी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो अपर यमुना रिवर बोर्ड से अपील करे कि वो ज्यादा पानी दिल्ली के लिए छोड़े। चूँकि सुप्रीम कोर्ट पानी के बँटवारे की एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए यमुना के पानी के बँटवारे की जिम्मेदारी अपर यमुना रिवर बोर्ड पर छोड़ दें। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि वो जल संकट से निपटने की क्या कोशिशें कर रही है, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने हलफनामा दायर किया है और कहा है कि वो दिल्ली में पानी की बर्बादी रोकने के लिए कदम तो उठा रही है, लेकिन यमुना पार सक्रिय हरियाणा के टैंकर माफिया की वजह से पानी ही नहीं मिल पा रहा है और वो उनके खिलाफ कोई कदम इसलिए नहीं उठा पा रही, क्योंकि वो इलाका हरियाणा का है।

अगर हरियाणा से पानी/टैंकर माफिया पानी चोरी कर रहा है तो दिल्ली सरकार ने दिल्ली में कम होते पानी पर  दिल्लीवासियों के हित में क्या कार्यवाही की? क्यों नहीं हरियाणा सरकार या राज्यपाल को क्यों नहीं शिकायत की?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार(जून 12) को ही सभी सरकारों को डाँट लगाई थी कि वो उसके सामने झूठ बोला जा रहा है, लेकिन दिल्ली में सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी और हिमाचल की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की सरकारें अब भी अपना बयान बदलती जा रही हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या कदम उठाती है, ये देखने वाली बात होगी।

पानी संकट : सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली सरकार को फटकार : ‘आपने टैंकर माफिया के खिलाफ क्या कदम उठाए, या हम दें पुलिस को आदेश?’ क्या अब तिहाड़वासी को दिल्लीवासियों की परवाह नहीं?

                                                  दिल्ली में जल संकट पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट

छल, कपट और झूठ बोल कर केजरीवाल सरकार कब तक चलती रहेगी? आज दिल्ली पानी संकट से झूझ रही, लेकिन केजरीवाल सरकार अपनी blame game से जनता को पागल बनाने से बाज नहीं आ रही। अपनी नाकामियों को दूसरों पर डाल रही है। दिल्ली में पानी संकट की असली वजह है कई सालों से यमुना नहीं का साफ न होना। चाहे देश की सारी नदियों का पानी दिल्ली छोड़ दिया दिक्कत वही रहेगी। गहराई न होने की वजह से यमुना में आया पानी ऊपर ही ऊपर बह दिल्ली से बाहर निकल रहा है, कुछ पानी टैंकर माफिया लेकर धंधा चला रहे हैं। लोक सभा चुनाव से पहले अरविन्द केजरीवाल को दिल्लीवासियों की बहुत फ़िक्र थी, रोज सन्देश भेजे जा रहे थे, लेकिन अब तिहाड़वासी को दिल्लीवासियों की परवाह नहीं।  
दिल्ली में आम जनता पानी का संकट झेल रही है। टैंकर माफिया अपने ‘आम’ में जुटा है और दिल्ली सरकार सो रही है। ऐसे में ये मामला पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, जिसके दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि दिल्ली में पानी का संकट हर साल क्यों आता है? दिल्ली की सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कर रही है? यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा है कि दिल्ली सरकार ने टैंकर माफिया के खिलाफ अबतक क्या कदम उठाए? अगर दिल्ली सरकार इसी तरह टैंकर माफिया के सामने नाकाम रही, तो हम दिल्ली पुलिस को सीधे माफिया से निपटने का आदेश देंगे।

दरअसल, ये मामला दिल्ली सरकार की तरफ से ही सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है कि हिमाचल प्रदेश द्वारा दिल्ली के लिए छोड़ा गया पानी हरियाणा आगे ही नहीं बढ़ने दे रहा है। ऐसे में हरियाणा सरकार को सुप्रीम कोर्ट निर्देश दे कि वो पानी छोड़े।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की अवकाशकालीन पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करते हुए कहा कि पानी की समस्या को लेकर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर करना चाहिए, और कोर्ट ने एक-2 दिन में हलफनामा दायर करने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी देखा कि हरियाणा के पास जो पानी था, वो दिल्ली आ चुका है, जबकि दिल्ली का दावा है कि हिमाचल प्रदेश ने उसके लिए 137 क्यूसेक पानी छोड़ा है। लेकिन हरियाणा कह रहा है कि उसके पास अतिरिक्त पानी है ही नहीं। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को घेरा है।

इसी दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने ‘टैंकर माफिया’ और पानी की बर्बादी को लेकर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि टैंकर माफिया के खिलाफ सरकार ने क्या कदम उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘दिल्ली में टैंकर माफिया काम कर रहा और आप कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अगर दिल्ली सरकार कार्रवाई नहीं कर सकती है, तो हम दिल्ली पुलिस से कार्रवाई करने के लिए कह सकते हैं।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में जल संकट से लोग परेशान हैं। हम हर न्यूज चैनल पर तस्वीरें देख रहे हैं और कोर्ट में झूठे बयान दिए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि पानी हिमाचल प्रदेश से आ रहा है तो दिल्ली में पानी कहाँ जा रहा है? इतना पानी का रिसाव, टैंकर माफिया आदि हैं, इस संबंध में आपने क्या उपाय किए हैं। उसे हलफनामा दायर कर हमारे (सुप्रीम कोर्ट) सामने रखा जाए।

हथिनी बैराज से डबल सप्लाई, फिर भी पानी को तरस रही दिल्ली: क्या टैंकर माफिया को फायदा पहुँचाने के लिए AAP की सरकार ने पैदा किया संकट? 600 करोड़ रूपए के मुनाफे वाला जल बोर्ड 73000 करोड़ रूपए के घाटे में क्यों चला गया? क्या ये भी हरियाणा की वजह से ?

दिल्ली में पानी की भीषण समस्या
उत्तर भारत भीषण गर्मी और तेज धूप समेत लू का सामना कर रहा है। आसमान से आग बरस रही है, गरम हवाएँ चल रही हैं। राजधानी दिल्ली के कुछ इलाकों का पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा है। इन सब समस्याओं के बीच अब दिल्ली में जल संकट भी आ गया है।

आज दिल्ली दो प्रकोपों से झूझ रही है, एक  प्रकृति द्वारा भीषण गर्मी और दूसरे अरविन्द केजरीवाल द्वारा पानी संकट। आखिर दिल्ली चुनाव संपन्न होते ही पानी संकट क्यों आया? केजरीवाल अपने झूठ और चालबाज़ी से सबको पागल बनाते रहे। गर्मी होती है, पानी की समस्या, बारिशों में बाढ़ और सर्दियों में प्रदुषण। जब से दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की सरकार बनी है दिल्ली वालों को किसी न किसी समस्या में उलझा कर अपने घोटालों में लगे रहे। 

केजरीवाल सरकार बताए कितने सालों से यमुना नदी की सफाई नहीं हुई है? बाढ़ के दिनों में बाढ़ का पानी शहरों में पहुँचने पर लिखा था कि यमुना की सफाई न होने की वजह से यमुना ऊपर ही ऊपर बह रही है। छठ पूजा के समय यमुना की हालत देख अरविन्द केजरीवाल की आंखे नहीं खुली। हरियाणा द्वारा जरुरत से ज्यादा पानी देने पर भी हरियाणा पर दोष? क्या हरियाणा अपनी जनता को प्यासा मरने दे? क्यों नहीं यमुना की सफाई करवाई गई, ताकि यमुना में पानी रुके ना कि बह जाए।  

बीते कुछ दिनों से राजधानी दिल्ली से डरावनी तस्वीरें आ रही हैं। राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में पानी का भीषण संकट आ गया है। पानी की आपूर्ति के लिए लोग तरस रहे हैं। पानी के दौड़ते लोगों की डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक पानी के टैंकर के पीछे सैकड़ों लोग भाग रहे हैं।

कोने-कोने में भीषण जल संकट, डरावनी तस्वीरें

चाणक्यपुरी के संजय कैम्प से लेकर गीता कॉलोनी तक और ओखला से लेकर वसंत कुंज तक, दसियों ऐसे इलाके हैं जहाँ पानी का गंभीर संकट है। रोहिणी, कैलाश विहार, बेगम विहार, बेगमपुर, पटेल नगर समेत तमाम इलाके जल संकट की चपेट में हैं। चाणक्यपुरी से आने वाली तस्वीरें तो काफी असहज करने वाली हैं। यहाँ पानी के एक टैंकर के पीछे बच्चे से लेकर बूढ़े तक दौड़ रहे हैं और पाइप डालने का प्रयास कर रहे हैं।
इस पूरी कवायद में कोई सफल हो रहा है तो कोई प्यासा रह जा रहा है। कहीं महिलाएँ पानी के बर्तन लेकर खड़ी हो रही हैं, कहीं लोगों में कुछ लीटर पानी के लिए बहस हो रही है। मारपीट तक की नौबत आ रही है। पानी के लिए तरसने वाले बता रहे हैं कि दिन भर में पानी का एक टैंकर आ रहा है, जिसमें पानी लेने वालों की संख्या सैकड़ों में है। निवासी बता रहे हैं कि उन्हें पीने से लेकर नहाने और खाना बनाने तक के पानी में समस्या हो रही है।

AAP फिर से ‘ब्लेम गेम में जुटी’

जहाँ एक ओर दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत है, वहीं दिल्ली में पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार दिल्ली जल बोर्ड अकर्मण्य साबित हो रहा है। दिल्ली जल बोर्ड AAP सरकार के अंतर्गत आता है। AAP सरकार पानी की इस दिक्कत को सुलझाने और लोगों को राहत पहुँचाने की बजाय फिर से एक बार फिर दोष मढ़ने के लिए आगे आ गई है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी का पूरा अमला यह साबित करने पर जुटा हुआ है कि यह पानी की किल्लत इसके फेलियर नहीं बल्कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पानी ना देने की वजह से हो रही है।
आतिशी लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के यह बता रही हैं कि हरियाणा उन्हें कम पानी दे रहा है, इस कारण से दिल्ली में पानी की कमी हो रही है, उनका कहना है कि दिल्ली यमुना के पानी पर निर्भर है और उसका पानी घटा दिया गया है। हरियाणा से अधिक पानी लेने के लिए दिल्ली की AAP सरकार सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच गई है। यहाँ AAP सरकार ने याचिका लगाई है कि उन्हें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश अधिक पानी दें। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा है।

क्या है इस दावे की सच्चाई?

दिल्ली की AAP सरकार हरियाणा पर यमुना का पानी नहीं देने का आरोप लगा रही है। दिल्ली में हरियाणा से आने वाला यमुना का पानी यमुना नगर में स्थित हथिनी कुंड बैराज से आता है। यहाँ उत्तराखंड से आने वाली यमुना नदी का पानी बैराज के माध्यम से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को भेजा जाता है। हथिनी कुंड बैराज की पूर्वी नहर से पानी उत्तर प्रदेश जबकि पश्चिमी नहर से दिल्ली और हरियाणा को पानी भेजा जाता है। हथिनी कुंड बैराज के अधिकारियों ने दिल्ली को कम पानी भेजने की बात को सिरे से नकार दिया।
हथिनी कुंड बैराज के XEN अधिकारी विजय गर्ग ने ऑपइंडिया को बताया कि दिल्ली को वर्तमान में 761 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। सामान्यतः दिल्ली को नवम्बर से जून के बीच 381 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। इसे अब बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की पानी की माँग लगातार पूरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली इस संबंध में करनाल से अपनी आवश्यकता बताती है और उसी हिसाब से हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़ दिया जाता है। पानी कम छोड़ने जैसी बात सत्य नहीं है।
पानी कम छोड़ने पर उन्होंने बताया कि जैसी भी उपलब्धता होती है, वैसा ही निर्णय लिया जाता है। यदि नदी में पानी कम आता है तो दिल्ली हरियाणा और उत्तर प्रदेश सभी को कम पानी भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में यह अधिक हो जाता है। उनका कहना है कि दिल्ली के पानी में कोई कमी नहीं की जा रही है। हरियाणा के सिंचाई मंत्री अभय सिंह यादव ने बताया है कि वर्तमान में दिल्ली को समझौते से अधिक पानी की आपूर्ति हो रही है, इसके बाद भी AAP इस पर राजनीति कर रही है।
वहीं दूसरी ओर यह भी सामने आया है कि दिल्ली की पानी की आपूर्ति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले वजीराबाद ट्रीटमेंट प्लांट की भी सफाई पिछले 10 वर्षों से नहीं हुई है। इस ट्रीटमेंट प्लांट में अब बड़े स्तर पर गाद जम गई है जिसके कारण इसकी पानी स्टोर करने की क्षमता घट गई है। ऐसे में यहाँ कम पानी साफ़ हो रहा है और आपूर्ति घट गई है।

भाजपा ने लगाया टैंकर माफिया को बढ़ाने का आरोप

दिल्ली  के इस जल संकट को लेकर भाजपा ने AAP सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया है। भाजपा ने AAP सरकार पर कुप्रबन्धन का आरोप लगाया है। दिल्ली की भाजपा नेता बांसुरी स्वराज ने कहा है कि दिल्ली  जल बोर्ड 2013 में 600 करोड़ रूपए के मुनाफे में था, वह अब 73000 करोड़ रूपए के घाटे में चला गया है।
उन्होंने कहा कि यह पूरा संकट AAP ने खुद ही खड़ा किया है। स्वराज ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरा जल संकट दिल्ली  में भ्रष्टाचार करने और टैंकर माफिया को फायदा पहुँचाने के लिए लाया गया है।

कस्टडी से मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के जल मंत्री को कैसे जारी किया आदेश? ED करेगी जाँच, आतिशी से हो सकती है पूछताछ

दिल्ली शराब नीति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहा था कि वे जेल से सरकार चलाएँगे। इसके बाद सीएम केजरीवाल ईडी की हिरासत से रविवार (24 मार्च 2024) को अपना पहला आदेश जारी किया है। यह आदेश जल मंत्रालय से संबंधित था। अब इस आदेश का ईडी ने संज्ञान लिया है।

दरअसल, मुख्यमंत्री केजरीवाल के आदेश के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने आदेश का जिक्र करते हुए कहा था कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के कुछ इलाकों में पानी और सीवर से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया है। उन्होंने गर्मी के मौसम में पानी के टैंकरों की पर्याप्त व्यवस्था करने का आदेश दिया है।

केजरीवाल ने अपने नोट में लिखा था, “मुझे पता चला है कि दिल्ली के इलाकों में पानी और सीवर की काफी समस्या हो रही है। इसको लेकर मैं चिंतित हूँ। चूँकि मैं जेल में हूँ, इस वजह से लोगों को जरा भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए। गर्मियाँ आ रही हैं। जहाँ पानी की कमी है, वहाँ उचित संख्या में टैंकरों का इंतजाम कीजिए। मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को आदेश दीजिए ताकि जनता को किसी तरह की परेशानी ना हो।”

उन्होंने अपने नोट में आगे लिखा था, “जनता की समस्याओं का तुरंत और समुचित समाधान होना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उपराज्यपाल महोदय का भी सहयोग लें। वे भी आपकी मदद जरूर करेंगे।” आतिशी ने बताया था कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने यह नोट अपने वकील के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा था। बता दें कि सीएम केजरीवाल को 28 मार्च तक ईडी की रिमांड पर हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ED अपनी जाँच में पता लगाने की कोशिश करेगी कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के आदेश उनकी हिरासत अवधि के दौरान विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के आदेश के अनुरूप थे। इसके साथ ही केंद्रीय एजेंसी इसकी भी जाँच करेगी कि सीएम केजरीवाल ने इस पत्र को लिखा कैसे।

ईडी ने कहा कि वह पार्टी के दावे की जाँच करेगी, क्योंकि हिरासत में लिए गए लोगों के लिए किसी भी स्टेशनरी की अनुमति नहीं है। सूत्रों ने कहा कि आतिशी से कथित ‘आदेश’ के स्रोत और इसे किसने लाया और उन्हें कब और दिया इसके बारे में पूछताछ करेगी। सूत्रों ने कहा कि एजेंसी सीसीटीवी फुटेज के जरिए दावे की पुष्टि करेगी।

55 साल के अरविंद केजरीवाल को हिरासत में भेजते समय अदालत ने उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और निजी सहायक बिभव कुमार को हर दिन शाम 6 बजे से 7 बजे के बीच मिलने की अनुमति दी है। इसके साथ ही उन्हें अपने वकील से मिलने के लिए आधे घंटे का समय निर्धारित किया है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा भेजे गए निर्देश को पढ़ने के बाद भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोला था। भाजपा ने कहा था कि यह चिंताजनक है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उनके कार्यालय से एक आदेश जारी किया गया है। भाजपा के मनजिंदर सिंह सिरसा ने पत्र के फर्जी होने का दावा करते हुए उपराज्यपाल से इस पर गौर करने का आग्रह किया।

सिरसा ने कहा, “सीएम ईडी की हिरासत में हैं और उन्हें बाहर का भोजन और दवा लेने के लिए भी अदालत से अनुमति लेनी होगी। इस स्थिति में, कौन मुख्यमंत्री से संपर्क किया गया था? और यह अधिकार वह केवल अपने प्रमुख सचिव को ही दे सकते हैं। फिर आदेश आतिशी जी तक कैसे पहुँचा? मुख्यमंत्री कार्यालय को हाईजैक कर लिया गया है।”

सिरसा ने आगे कहा, “आतिशी जी, यह कोई शराब की दुकान नहीं है, जहाँ कोई भी बोतल ले सके। यह मुख्यमंत्री का कार्यालय है, जिसे केवल मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा अनुमति प्राप्त अधिकारी द्वारा ही संचालित किया जा सकता है। इस आदेश में कोई संख्या नहीं है और किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं। शराब घोटाला की तरह, यह एक पत्र घोटाला है।”