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ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन : मस्जिद से इमाम को उठाया, सिर में 3 गोली मारी, लाश झाड़ियों से बरामद

            शिया बहुल ईरान में सुन्नी मौलवी की मस्जिद से अपहरण कर के हत्या (चित्र साभार- parstoday.com)
शिया मुस्लिम बहुल ईरान में एक सुन्नी मौलवी के हत्या की खबर है। बताया जा रहा है कि कत्ल किए जाने से पहले मौलवी का अपहरण किया गया था। मृतक मौलवी का नाम अब्दुल वहीद है जिनकी लाश एक सड़क के किनारे झाडियों में मिली है। मौलवी अब्दुल वहीद को सिर में गोली मारी गई है। मौलवी का अपहरण गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को एक बिना नंबर प्लेट वाली कार से किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दक्षिण-पूर्वी सिस्तान की है। यहाँ सुन्नी मौलवी अब्दुल वहीद को कुछ समय पहले क्रांति विरोधी समूह ने मौत की धमकी दी थी। गुरुवार को अचानक ही एक कार एक मस्जिद में पहुँची। इस मस्जिद का नाम इमाम हुसैन मस्जिद था जहाँ मौलवी नमाज़ पढ़ाने वाले इमाम की हैसियत से आया-जाया करते थे। यहाँ से अपहरण हुए मौलवी की लाश बाद में रिगी खाश काउंटी में बरामद हुई। मौलवी के सिर में 3 गोलियाँ मारी गईं।
इमाम के अलावा मौलवी अब्दुल वाहिद मस्जिद के पास ही मौजूद एक मदरसे के टीचर भी थे। प्रांतीय सुरक्षा परिषद के मुताबिक मौलवी की लाश शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को बरामद हुई थी जिनकी हत्या की जाँच करवाई जा रही है। बताया जा रहा है कि सुन्नी मौलवी की हत्या के बाद सिस्तान क्षेत्र में तनाव फ़ैल गया है। जिस जगह मौलवी की लाश मिली है वो काफी सुनसान जगह है। घटना की जानकारी होने पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।
16 सितम्बर 2022 को ईरानी महिला महसा अमीनी की पुलिस टार्चर के बाद मौत के बाद ईरान अशांति के दौर से गुजर रहा है। वहाँ लगातार मौलवियों पर हमले किए जा रहे हैं। कहीं उनका अपहरण हो रहा है तो कहीं उनके सिर पर बँधे साफे को हाथ मारकर गिराया जा रहा है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में कई लोगों की मौत हो चुकी हैं। हिंसा ईरान के लगभग सभी बड़े शहरो में फ़ैल गई यही और हजारों लोग सड़को पर रूढ़िवाद का विरोध कर रहे हैं।

ईरान : स्तन, नितंब, गुप्तांग… हिजाब विरोधी महिलाओं को खास जगहों पर टारगेट कर फौजी मार रहे गोली: डॉक्टर-नर्सों के हवाले से दावा

                                                                                                      साभार: The Guardian/Mint
इस्लामिक देश ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि महिला प्रदर्शनकारियों के विशेष जगह को टागरेट कर फौज निशाना बना रही है। घायल महिला प्रदर्शनकारियों का इलाज करने वाले डॉक्टर-नर्सों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। बताया गया है कि फौजी महिलाओं के चेहरे, स्तन और गुप्तांगों को निशाना बनाकर शॉटगन पैलेट्स (एक प्रकार की गोली या छर्रे) दाग रही है।

द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईरान में कई डॉक्टर और नर्स हिजाब विरोधी प्रदर्शन में घायल हुए लोगों का इलाज कर रहे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए ये लोग गुप्त रूप से इलाज कर रहे हैं। घायलों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स का कहना है कि उन्होंने नोटिस किया है कि ईरानी फौज महिलाओं के गुप्तांगों को निशाना बना रही है।

रिपोर्ट में डॉक्टर्स के हवाले से कहा गया है कि उपचार के लिए आने वाली औरतों के पैर, नितंब, पीठ, स्तन और गुप्तांगों पर घाव देखे जा रहे हैं। ईरान के इस्फ़हान प्रांत के एक डॉक्टर ने कहा है, “ईरानी सेना के सुरक्षा अधिकारी पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग तरीकों से टारगेट कर रहे हैं। वे महिलाओं की सुंदरता को नष्ट करना चाहते हैं।”

डॉक्टर ने यह भी कहा है, “करीब 20 साल की एक महिला का मैंने इलाज किया था। उसके जननांगों में दो पैलेट्स मारे गए थे, जबकि भीतरी जाँघ में दस पैलेट्स लगे थे। इन 10 पैलेट्स को मैंने आसानी से हटा दिया गया था, लेकिन वे दो पैलेट्स सबसे बड़ी समस्या बन हुए थे। दरअसल, ये पैलेट्स उसके मूत्रमार्ग और वजाइना के बीच में फँसे हुए थे।”

द गार्जियन से हुई बातचीत में डॉक्टर ने यह भी कहा, “उस महिला को वजाइनल इंफेक्शन होने का खतरा था, इसलिए मैंने उसे एक विश्वसनीय स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाने के लिए कहा। घायल हुए महिला ने मुझे बताया था कि जब वह विरोध कर रही थी, तब करीब 10 सुरक्षा अधिकारियों ने उसे घेर लिया था। इसके बाद, उसकी जाँघों और वजाइना में पैलेट्स मारे थे।”

                                            ईरानी सेना की ‘क्रूरता’ में घायल प्रदर्शनकारी (फोटो: द गार्जियन)

ईरान की कट्टरपंथी सरकार की क्रूरता की कुछ फोटोज भी सामने आईं हैं। इन फोटोज में महिलाओं के शरीर पर पैलेट्स की बौछार साफ-साफ देखी जा सकती है। कहा जा रहा है कि इन पर ये पैलेट्स काफी करीब से मारे गए थे।

ईरान में इसी साल 13 सितंबर को महसा अमिनी नाम की एक ईरानी महिला को हिजाब न पहनने के कारण गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद, 16 सितंबर को पुलिस कस्टडी में उसकी मौत गई थी। महसा अमीनी की मौत के बाद से ईरान गृह युद्ध की स्थिति में है। वहाँ, लगातार हिजाब विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं।

हालात यह हैं कि ईरान के लगभग हर शहर में महिलाएँ हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरी हुई हैं। ईरान में महिलाएँ सरकार के लिए मुश्किल का सबसे बड़ा सबब बन गई हैं। न तो वो हिजाब पहनने को तैयार हैं और न ही बाल ढंकने को तैयार हैं। शुरुआत में इस प्रदर्शन में सिर्फ महिलाएँ शामिल थीं। लेकिन, धीरे-धीरे पुरुषों का एक बड़ा वर्ग भी शामिल हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह अंतिम सांस तक अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे। प्रदर्शन अब ईरान के सभी 31 प्रांतों के 164 शहरों में फैल चुका है।

हिजाब विरोधी प्रदर्शन से ईरान में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। प्रदर्शनों से घबराई हुई इब्राहिम रईसी सरकार दमन पर उतारू है। कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा वाली सरकार ने वहाँ इंटरनेट सर्विस भी बंद कर दी थी। यही कारण है कि वहाँ से काफी कम जानकारी सामने आ रही है।

ईरान : ‘मुल्लों को भागना ही पड़ेगा’(the mullahs must get lost): हिजाब विरोधी प्रदर्शन में महिलाओं का नारा

                                          ब्राजील में प्रदर्शन करते ईरानी (फोटो साभार: AP)
ईरान में जैसे-जैसे इस्लामी का दमन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे वहाँ की महिलाओं एवं लोगों का हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन (Iran Anti-Hijab Protest) तेज होता जा रहा है। हिजाब जलाते-जलाते ईरान के लोग सर्वोच्च नेता और धार्मिक गुरु अयातुल्लाह अली खुमेनाई (Ayatollah Ali Khomeini) की तस्वीर जलाने लगे। उनका नारा ‘महिलाओं के अधिकार’ से आगे बढ़कर ‘मुल्ला भाग जाओ’।

देश भर में इंटरनेट सेवा बंद करने के बावजूद महिलाएँ बिना हिजाब के शनिवार (15 अक्टूबर 2022) को राजधानी तेहरान की सड़कों पर उमड़ पड़ीं। इस दौरान उन्होंने नारे लगाए, “Guns, tanks, fireworks; the mullahs must get lost” यानी बंदूक, टैंक या बम इस्तेमाल करो, लेकिन मुल्ला (खुमेनाई का इस्लामी शासन) को भागना पड़ेगा।

महिलाओं के तेहरान मार्च मार्च का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं, तेहरान के पश्चिम में हमदान शहर में एक ऐतिहासिक गोल चक्कर के पास हजारों लोग इकट्ठा होकर नारे लगाए और सुरक्षा बलों को देख सीटियाँ बजाई एवं उन पर प्रोजेक्टाइल फेंके।

वहीं, कुर्दिस्तान प्रांत में महसा अमिनी के गृह नगर साकेज और पश्चिम अजरबैजान के महाबाद में दुकानदारों ने हड़ताल की। उधर खुमेनाई और उनकी सरकार ने ईरान में विरोध प्रदर्शन को भड़काने के लिए अमेरिका और इज़राइल सहित देश के दुश्मनों पर लगाया है।

उधर पुरस्कार विजेता ईरानी फिल्म निर्माता मनी हघीघी (Mani Haghighi) पर ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के कारण प्रतिबंधित कर दिया है। हघीघी की फिल्म ‘नॉयर थ्रिलर सब्सट्रैक्शन’ प्रतिष्ठित लंदन फिल्म समारोह में 15 अक्टूबर 2022 को प्रदर्शित हुई।

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हघीघी 14 अक्टूबर 2022 से कलाकारों एवं एथलीटों वाली ईरानी हस्तियों की उस सूची में शामिल हो गए, जिन्हें प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए गिरफ्तार किया गया है या उनकी ईरान में यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया है।

उन्होंने कहा, “शायद अधिकारियों ने सोचा था कि मुझे यहाँ रखकर वे मुझ पर कड़ी नज़र रख सकते हैं या फिर शायद मुझे धमकाने और मुझे चुप कराने के लिए ऐसा किया गया हो” उन्होंने कहा कि हिजाब विरोधी युवाओं का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में ईरान की ‘मुल्ला सरकार’ के लिए मुसीबतें बनने वाला है।

ईरान की पुलिस प्रदर्शनकारी महिलाओं को पकड़ कर उन्हें मानसिक अस्पतालों में भेज रही है। इसके साथ ही सरकार का दमन भी लगातार जारी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि सितंबर मध्य से शुरू हुए इस आंदोलन में 3 अक्टूबर तक 144 लोग मारे गए हैं, जिनमें 23 बच्चे भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षाबल जानबूझकर बच्चों एवं किशोरों का निशाना बना रहे हैं।

महसा अमीनी की हत्या के बाद से महिलाएँ सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही हैं। वे हिजाब फेंककर, जलाकर और अपने बालों को काटकर हिजाब के लिए इस्लामी सरकार का विरोध कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमेनाई की तस्वीरें भी जलाईं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को देश-दुनिया से भर से भारी समर्थन मिल रहा है।

भारत से भी ईरानी की महिलाओं को लगातार समर्थन मिल रहा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी ने हिजाब (Hijab) का विरोध किया है। वहीं, बॉलीवुड में काम करने वाली ईरानी अभिनेत्री एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए अपने कपड़े उतार दिए। इसका एक वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया।

13 सितंबर को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हिरासत में उसे इतना मारा गया कि वह कोमा में चली गई। तीन दिन बाद यानी 16 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

तुर्की तक पहुँचा ईरान का हिजाब विरोधी प्रदर्शन : पूर्व राष्ट्रपति की बेटी गिरफ्तार

                       पूर्व राष्ट्रपति की बेटी फाजेह और तुर्की की गायिका मलेक (फोटो साभार: AFP/स्क्रीनशॉट)
हिजाब को उतार फेंक अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने वाली ईरान (Anti-Hijab Protest in Iran) की महिलाओं के खिलाफ वहाँ की इस्लामी सरकार बर्बरतापूर्वक व्यवहार कर रही है। हालाँकि, महिलाएँ भी किसी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है और शरिया कानून का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार कर रही हैं।

पूरे ईरान में जारी महिलाओं के प्रदर्शन के बीच वहाँ की पुलिस ने पूर्व राष्ट्रपति अली अकबर हाशमी रफसंजानी (Ali Akbar Hashemi Rafsanjani) की बेटी फाजेह हाशमी (Faezeh Hashemi) को गिरफ्तार कर लिया है। फाजेह पर आरोप लगाया गया है कि वह ईरान की राजधानी तेहरान में महिला प्रदर्शनकारियों को उकसा रही हैं।

वहीं, हिजाब को लेकर ईरान की महिलाओं के समर्थन में तुर्की की प्रसिद्ध गायिका मलेक मोस्सो (Melek Mosso) ने एक स्टेज शो के दौरान सार्वजनिक रूप से अपने बाल को काट दिया। आज बाल मुस्लिम महिलाओं की आजादी का प्रतीक बन गया है।

हिजाब के खिलाफ संघर्ष में ईरान की महिलाओं को दुनिया भर से समर्थन मिल रहा है। इसमें समाज के उच्च तबके से लेकर निचले पायदान के लोग भी शामिल है। दुनिया भर के लोग अलग-अलग तरीकों से ईरानी महिलाओं के प्रति समर्थन जता रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ईरान की नीतियों की आलोचक रही हैं। उन्हें साल 2009 में विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किया गया था। उसी साल उन्हें बेअदबी और सरकार के खिलाफ काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का भी आरोप लगाया गया था।

हाशमी के पिता अली अकबर हाशमी रफसंजानी ईरान में इस्लामी शासन की स्थापना करने वाले लोगों में शामिल रहे हैं। वे ईरान के दो बार राष्ट्रपति रहे। अली अकबर की साल 2017 में निधन हो चुका है।

ईरान में 13 सितंबर 2022 को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्हेें पीट-पीट कर कोमा में पहुँचा दिया गया था। गिरफ्तारी के दिन बाद यानी 16 सितंबर को महसा की मौत हो गई थी। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

ईरान के लगभग हर शहर में महिलाएँ मोरल पुलिसिंग और हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर गई हैं। ईरान में महिलाएँ सरकार के लिए मुश्किल का सबसे बड़ा सबब बन गई हैं। न तो वो हिजाब पहनने को तैयार हैं और न ही बाल ढँकने को तैयार हैं। इसी तरह प्रदर्शन करने वाली एक युवती को वहाँ की पुलिस ने 6 गोलियाँ दाग दीं। उस युवती की मौत के बाद आंदोलन और उग्र हो गया है।

हिजाब विरोधी प्रदर्शन से ईरान में अब तक चार महिलाओं समेत करीब 76 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनों से घबराई इब्राहिम रईसी सरकार दमन पर उतारू है। कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा वाली सरकार ने कुछ दिन पहले ईरान में इंटरनेट भी बंद कर दिया था। इसके कारण वहाँ से काफी कम जानकारी सामने आ रही है।

ईरान : हिजाब विरोधी प्रदर्शन कर रही हदीस नजफी की गोली मारकर हत्या

                                                                                                       फोटो साभार: पॉइंट ऑफ न्यूज
बिना हिजाब के ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों (Anti Hijab Protests) की अगुवाई कर रही हदीस नजफी (Hadis Najafi) की सुरक्षाबलों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हदीस नजफी सिर्फ 20 साल की थीं और ईरान की राजधानी तेहरान के पास कराज शहर में हिजाब का विरोध कर रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हदीस नजफी को 6 गोलियाँ मारी गईं हैं। ये गोलियाँ सीने, चेहरे और गर्दन में लगी हैं। हदीस ईरान में हिजाब विरोध प्रदर्शन का प्रतीक बनने वाली लड़कियों में से एक थीं। जब उनका पुलिस से सामना हुआ तो वह बिना हिजाब का विरोध कर रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में हदीस नजफी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले अपने बालों को रबर बैंड से बाँधते हुए दिखाई दे रही हैं।

हदीस की मौत से पहले ईरानी पत्रकार मसीह अलीनेजाद (Masih Alinejad) ने ट्वीट किया था, “यह ईरानी महिला सुरक्षाबलों के सामने आमने-सामने खड़े होने को तैयार हो रही है। ईरानी शासन के पास बंदूकें और गोलियाँ हैं, लेकिन वे हमारे बालों से डरते हैं। उन्होंने थोड़े से बालों के लिए महसा अमीनी को मार डाला। आइए बाल क्रांति करें। हमारे बाल इस्लामी तानाशाहों को गिरा देंगे।”

हालाँकि, इसके बाद ईरानी पत्रकार को हदीस नजफी से जुड़ा एक ट्वीट करना पड़ा। यह ट्वीट हदीस की मौत से जुड़ा हुआ था। पत्रकार ने लिखा, “21 साल की हदीस नजफी लड़की महसा अमिनी की तरह एक और प्रतीक बनना चाहिए, क्योंकि वह अत्याचार के सामने चुप नहीं रहीं। महसा की क्रूर मौत का विरोध करने के लिए उन्हें मार दिया गया। मैं दुनिया से हदीस नजफी की आवाज बनने का आह्वान करती हूँ। रियल हीरो।”

13 सितंबर को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्हेें पीट-पीट कर कोमा में पहुँचा दिया गया था। गिरफ्तारी के दिन बाद यानी 16 सितंबर को महसा की मौत हो गई थी। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

ईरान के लगभग हर शहर में महिलाएँ मोरल पुलिसिंग और हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर गई हैं। ईरान में महिलाएँ सरकार के लिए मुश्किल का सबसे बड़ा सबब बन गई हैं। न तो वो हिजाब पहनने को तैयार हैं और न ही बाल ढँकने को तैयार हैं।

हिजाब विरोधी प्रदर्शन से ईरान में अब तक चार महिलाओं समेत करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनों से घबराई इब्राहिम रईसी सरकार दमन पर उतारू है। कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा वाली सरकार ने कुछ दिन पहले ईरान में इंटरनेट भी बंद कर दिया था। इसके कारण वहाँ से काफी कम जानकारी सामने आ रही है।