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कंडोम खरीदना हुआ पाकिस्तान की ‘औकात’ से बाहर, रेट सस्ते कराने IMF के पास पहुँचा तो मिली दुत्कार


दुनिया के 5वें सबसे अधिक आबादी वाले मुल्क पाकिस्तान में बढ़ती आबादी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच आवाम के लिए गर्भनिरोधक साधन आज भी महँगे और पहुँच से दूर की चीज बने हुए हैं। पाई-पाई को मोहताज पाकिस्तान में हालात ऐसे हैं कि एक साधारण कंडोम का पैकेट भी बड़ी आबादी की पहुँच से बाहर है। इस संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान ने एक योजना बनाई कि गर्भनिरोधक उत्पादों पर लगने वाला 18 प्रतिशत जनरल सेल्स टैक्स (GST) हटाकर उन्हें सस्ता किया जाए लेकिन अब यह योजना भी अधर में लटक गई है।

IMF ने कंडोम पर GST हटाने से किया मना

 दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान सरकार को बड़ा झटका देते हुए गर्भनिरोधक उत्पादों पर GST हटाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देश की तेजी से बढ़ती आबादी को लेकर खुले मंच से चिंता जता चुके हैं। पाकिस्तान की आबादी सालाना करीब 2.55 प्रतिशत की खतरनाक रफ्तार से बढ़ रही है और यह पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और भारी बोझ डाल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघीय राजस्व बोर्ड (FBR) ने IMF के सामने प्रस्ताव रखा था कि कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक साधनों से 18% GST हटाया जाए जिससे आने वाले बजट से पहले कीमतें कम की जा सकें। IMF ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि प्रधानमंत्री का अगस्त 2025 का निर्देश भी कागजों तक सीमित रह गया।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई महीने पहले ही FBR को निर्देश दिया था कि वह IMF के साथ इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए। इसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने कई दौर की बातचीत की लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों ने साफ कर दिया कि IMF अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

IMF के अधिकारियों ने बंद दरवाजों के पीछे हुई बातचीत में साफ शब्दों में पाकिस्तानी प्रतिनिधियों को बता दिया कि गर्भनिरोधक उत्पादों पर किसी भी तरह की टैक्स राहत पर 2026-27 के बजट से पहले विचार ही नहीं किया जाएगा। यानी आम जनता को राहत देने की बात फिलहाल पूरी तरह टाल दी गई है।

पाकिस्तानी पक्ष ने बातचीत के दौरान सिर्फ कंडोम और गर्भनिरोधक साधनों पर ही नहीं बल्कि महिलाओं की जरूरत से जुड़े सैनिटरी पैड और शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले बेबी डायपर पर भी GST घटाने का प्रस्ताव रखा था। हालाँकि, IMF ने इन सभी सुझावों को सख्ती से खारिज कर दिया। IMF का तर्क था कि इन उत्पादों से सरकार को होने वाली टैक्स आय बहुत बड़ी है और इसे छोड़ना उनके हिसाब से ‘आर्थिक अनुशासन’ के खिलाफ होगा।

खास तौर पर बेबी डायपर को लेकर IMF ने कड़ा रुख अपनाया। अधिकारियों के मुताबिक, IMF ने यह दलील दी कि बेबी डायपर का टैक्स बेस करीब 100 अरब पाकिस्तानी रुपए के आसपास है और इसमें किसी भी तरह की छूट देने से सरकारी राजस्व को बड़ा झटका लग सकता है। यानी बच्चों की बुनियादी जरूरत भी पाकिस्तान में सिर्फ एक ‘रेवेन्यू आइटम’ बनकर रह गई है।

इस फैसले का सीधा असर आम पाकिस्तानी परिवारों पर पड़ रहा है। महँगाई पहले ही आसमान छू रही है, स्वास्थ्य सुविधाएँ बदहाल हैं और अब परिवार नियोजन के साधन भी महँगे बने रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भनिरोधक तक आसान पहुँच न होने से अनियोजित जन्म बढ़ेंगे, जिससे गरीबी, बेरोजगारी और कुपोषण जैसी समस्याएँ और गहराएँगी।

बढ़ती आबादी का ‘राष्ट्रीय आपातकाल’

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या फंड (UNPF) के आँकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान की मौजूदा जनसंख्या 25.5 करोड़ के आस-पास है। इसमें 36.4% आबादी 0-14 वर्ष के बीच है जबकि 59.6% आबादी 15-64 साल के बीच की है। वहीं, देश की 4% आबादी की उम्र 65 वर्ष से अधिक है।

सतही तौर पर पाकिस्तान में बढ़ती आबादी का खतरा ना दिखे लेकिन पाकिस्तान के आर्थिक हालात आबादी के बोझ को सहने लायक नहीं बचे हैं। विश्व बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक, पाकिस्तान की आबादी में करीब 45% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने को मजबूर है।

खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आबादी के संकट को स्वीकार किया है। अगस्त 2025 में एक बैठक के दौरान उन्होंने देश में बढ़ती जनसंख्या दर को ‘चिंताजनक और खतरनाक रुझान’ बताया और कहा है कि इससे निपटने के लिए तुरंत राष्ट्रीय नीति की जरूरत है।

पाकिस्तान की आबादी के संकट को खुद सरकार ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ मान रही है। जुलाई 2025 में पाकिस्तान के योजना, विकास और विशेष पहल मंत्री एहसान इकबाल ने जनसंख्या प्रबंधन पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए साफ शब्दों में कहा कि आबादी का मामला देश के लिए बेहद गंभीर और खतरनाक रूप ले चुका है। बैठक में बोलते हुए एहसान इकबाल ने माना कि जनसंख्या नियोजन का असर नागरिक के जीवन के हर पहलू पर पड़ता है अब चाहे वह स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो या रोजगार।

इकबाल ने कहा कि मौजूदा 2.55% की सालाना जनसंख्या वृद्धि दर के हिसाब से 2050 तक पाकिस्तान की आबादी 38.6 करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है। यह अनुमान साफ संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान पर जनसंख्या का दबाव कई गुना बढ़ने वाला है। वह भी ऐसे समय में जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक बदहाली, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।

पाकिस्तान में बढ़ती आबादी से और बढ़ता संकट

पाकिस्तान की आबादी अब उसका संकट बनती जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार से लेकर खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास पर इसका गंभीर असर दिखाई पड़ रहा है। जुलाई 2025 में पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने विश्व जनसंख्या दिवस 2025 पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान में आबादी बढ़ने की रफ्तार ‘खतरनाक स्तर’ तक पहुँच चुकी है।

इसी दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने जनसंख्या संकट के गंभीर नतीजों की ओर इशारा करते हुए चौंकाने वाले आँकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि देश में 2.5 करोड़ से अधिक बच्चे सिर्फ इसलिए स्कूल से बाहर हैं क्योंकि बढ़ती आबादी का दबाव शिक्षा व्यवस्था झेल नहीं पा रही। यह आँकड़ा अपने आप में पाकिस्तान के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जहाँ अगली पीढ़ी बिना शिक्षा के आगे बढ़ रही है।

सरकारी अस्पतालों की हालत पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि वहाँ मरीजों की भीड़ किसी सार्वजनिक रैली जैसी दिखाई देती है। यह बयान पाकिस्तान की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई बयान करता है, जहाँ अस्पताल इलाज के केंद्र कम और अव्यवस्था की तस्वीर ज्यादा बन चुके हैं। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने भी जनसंख्या वृद्धि के आर्थिक असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित आबादी देश के संसाधनों, सामाजिक ढाँचे और आर्थिक स्थिरता पर भारी दबाव डाल रही है।

पाकिस्तान में UNFPA के प्रतिनिधि Luay Shabaneh ने करीब एक हफ्ते पहले ‘डॉन’ में लिखा, “25 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में बेसिक रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विस तक पहुँच लोगों के लिए आज भी एक संघर्ष है। 16% शादीशुदा महिलाओं को आज भी फैमिली प्लानिंग की सुविधा नहीं मिलती है और गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने की दर लगभग 32% पर अटकी हुई है।” उन्होंने लिखा, “पाकिस्तान में सालाना 3.5 मिलियन अनचाही प्रेग्नेंसी होती हैं और इनमें से 61% का नतीजा इंड्यूस्ड अबॉर्शन (गर्भपात) होता है, जो अक्सर असुरक्षित होता है।”

पाकिस्तान में ‘प्रजनन संकट’

IMF से पाकिस्तान को मिला झटका इसलिए भी मुश्किलें बढ़ाने वाला है क्योंकि पाकिस्तान अनचाही प्रेग्नेंसी से जूझ रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल पाकिस्तान में करीब 1 करोड़ 27 लाख गर्भधारण होते हैं। इनमें से लगभग 60 लाख गर्भ ऐसे होते हैं, जिनकी योजना पहले से नहीं बनाई गई होती। यानी औसतन हर साल होने वाला हर दूसरा गर्भ अनचाहा होता है। यह स्थिति साफ दिखाती है कि देश में प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ, गर्भनिरोधक साधनों तक पहुँच और परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता कितनी कमजोर है।

पाकिस्तान के फेडरल हेल्थ सेक्रेटरी हामिद याक़ूब शेख ने इसे राष्ट्रीय आपात स्थिति बताया है। उनके मुताबिक बिना योजना के होने वाले जन्म सिर्फ जनसंख्या का मसला नहीं हैं बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण व्यवस्था पर सीधा असर डालने वाली विकास की बड़ी समस्या है। आजादी के 77 साल में पाकिस्तान की आबादी 7 गुना बढ़ गई है जबकि अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक विकास की रफ्तार कछुए जैसी है।

पाकिस्तान में गर्भनिरोधकों की पहुँच को लेकर पहले से ही संकट है और IMF ने इसे और बढ़ा दिया है। ग्रामीण और गरीब इलाकों में रहने वाली लाखों महिलाओं तक आधुनिक गर्भनिरोधक साधन नहीं पहुँच सके हैं। पाकिस्तान में कम साक्षरता और स्वास्थ्य शिक्षा की कमी के चलते गर्भनिरोधक को लेकर कई गलत धारणाएँ फैली हुई हैं। बहुत-सी महिलाओं को लगता है कि परिवार नियोजन से हमेशा के लिए बाँझपन हो जाता है या फिर यह धर्म के खिलाफ है।

एक बड़ी समस्या महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर भी है। कब-कितने बच्चे पैदा हो महिलाओं को पाकिस्तान में इसका अधिकार ही नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वो अपने फैसले खुद नहीं ले पाती हैं।

ऐसी अनचाही प्रेगनेंसी का असर हर स्तर पर दिखता है। अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है, मातृ-मृत्यु दर बढ़ी हुई है और करीब 40% बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। बेरोजगारी-गरीबी भी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में पहले से खस्ताहाल आर्थिक ढाँचे पर बोझ बढ़ता ही जा रहा है। अपने आर्थिक फैसलों के लिए IMF पर मजबूर पाकिस्तान की समस्याएँ दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं।

क्या पाकिस्तान की बढ़ती आबादी भारत के लिए चिंता की बात है?

1944 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के फिलाडेल्फिया घोषणा पत्र में संगठन के सिद्धांतों में कहा गया था कि ‘कहीं भी गरीबी, हर जगह समृद्धि के लिए एक खतरा है’। यह बात आज भी लागू होती है। यही समस्या भारत के लिए भी है। पाकिस्तान की तेजी से बढ़ती आबादी भारत के लिए सबसे पहले सुरक्षा के लिहाज से चिंता पैदा करती है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार 2050 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 35 करोड़ तक जा सकती है। इतनी बड़ी आबादी को रोजगार, शिक्षा और संसाधन न मिलने की स्थिति में आंतरिक अस्थिरता बढ़ना तय है। पड़ोसी होने के नाते इसका असर सबसे अधिक भारत पर ही पड़ने की संभावना है।

पाकिस्तान की बढ़ती आबादी के साथ पानी, जमीन और रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। अधिकतर इलाकों में संसाधनों की कमी पहले से ही मुश्किलें पैदा कर रही है। आगे चलकर अगर परिस्थितियाँ बिगड़ती हैं तो में सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ, तस्करी और अपराध बढ़ने की आशंका रहती है। भारत-पाकिस्तान सीमा पहले ही संवेदनशील है और यदि पाकिस्तान में जनसंख्या दबाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर भारत की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।

पुणे के पब ने कस्टमर को ‘कंडोम- ORS पैकेट’ के साथ न्यू ईयर पार्टी में आने कहा : AIDS से कर रहे जागरूक

          न्यू ईयर पार्टी के लिए कंडोम बाँटने पर घिरा पुणे का पब (प्रतीकात्मक चित्र साभार- X/Times 360 News)
न्यू ईयर की पार्टी में कंडोम और ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के साथ ग्राहकों को आने का निमंत्रण पुणे का एक पब दे रहा है। उसने अपने रेगुलर कस्टमर को इसके पैकेट भी भेजे हैं। विवाद खड़ा होने पर पब ने अपने कदम का बचाव किया है। वहीं युवा कांग्रेस ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

पब पर पुणे की सांस्कृति और शैक्षणिक विरासत के साथ खिलवाड़ के आरोप लग रहे हैं। हाई स्पिरिट्स कैफे नाम रेस्तरां सह पब पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित है। पब ने कहा है कि इन सामानों को बाँटने का मकसद युवाओं में जागरूकता पैदा करना है। सुरक्षा और जिम्मेदारी से नए साल का जश्न मनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पब ग्राहकों को नए साल के जश्न के निमंत्रण के तौर पर कंडोम और ORS का पैकेट बाँट रहा है। पब की तरफ से आए बयान में इस कदम को ‘सेफ्टी एंड सेलिब्रेशन’ का नाम दिया गया है। यह भी कहा कि वे इस अभियान के तहत लोगों को AIDS जैसी बीमारियों के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं।

पब की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि उन्होंने जिस बैग में ये दोनों चीजें उपहार स्वरूप रखीं थीं, उसमें ध्वनि उपकरण और शराब पी कर गाड़ी न चलाने जैसे दिशा-निर्देश से जुड़ी बुकलेट भी है। महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अक्षय जैन ने हाई स्प्रिट्स कैफे पर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पुणे पुलिस कमिश्नर के पास इसकी शिकायत दर्ज करवाई है।

पुलिस को दी गई शिकायत में अक्षय जैन ने बताया कि हाई स्प्रिट्स कैफे की हरकत महाराष्ट्र की संस्कृति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कामों को बढ़ावा देने से युवाओं में गलत संदेश जाता है जो एक अच्छे समाज के लिए सही नहीं है। फिलहाल पुणे पुलिस इस शिकायत पर जाँच कर रही है।

पुणे : समोसे में कंडोम, पत्थर, तंबाकू भर कर्मचारियों को खिलाया: कैंटीन कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने से भड़का था कंपनी का मालिक रहीम शेख

पुणे में समोसे के अंदर कंडोम और पत्थर भर कर बेचने वाले रहीम शेख सहित 5 लोगों पर FIR (चित्र साभार- AI/gencraft.com)
आखिर ये जेहादी मुसलमान को किस मोड़ पर लेकर जा रहे हैं? कभी खाने के सामान में थूक! क्या ये जेहादी चाहते हैं कि सभी गैर-मुस्लिम मुस्लिम दुकानदारों का बहिष्कार करें? क्या इस तरह के घिनौने अपराध से मुसलमान को संदेह के घेरे में खड़ा करना चाहते हैं? क्यों मुसलमानों को तबाही की ओर धकेल रहे हो?
महाराष्ट्र के पुणे में एक कम्पनी की कैंटीन में समोसे के अंदर कंडोम, पत्थर और तम्बाकू जैसी चीजें मिलने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। 1 आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। आरोपितों के नाम रहीम शेख, अजहर शेख, मजार शेख, अजर शेख और विक्की शेख हैं। बताया जा रहा है कि सभी आरोपितों ने कंपनी द्वारा अपना कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने से नाराज हो कर ऐसा कदम उठाया था। घटना बुधवार (27 मार्च, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पुणे के पिंपरी चिंचवड इलाके की है। यहाँ के चिखली स्थित एक कम्पनी के अधिकारी कीर्तिकुमार शंकरराव देसाई ने रविवार (7 मार्च, 2024 ) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। चिखली थाने में दी गई इस शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनकी कम्पनी को चिखली की ही एक अन्य बड़ी कम्पनी से खाना सप्लाई का ऑर्डर मिला है। इसी ऑर्डर में समोसे की सप्लाई के लिए कीर्तिकुमार ने SRS एंटरप्राइजेज नाम की एक कम्पनी के साथ समझौता कर लिया।

SRS कम्पनी के मालिक का नाम रही शेख है। कीर्तिकुमार के अनुसार, SRS कम्पनी से सप्लाई हो रहे समोसे में एक दिन घावों पर लगाने वाली पट्टी निकली। इसकी शिकायत मिलने के बाद कीर्तिकुमार की कम्पनी ने रहीम खान की कम्पनी SRS से अपना अनुबंध समाप्त कर लिया और समोसे सप्लाई करने का ऑर्डर पुणे की एक अन्य कम्पनी मनोहर इंटरप्राइजेज को दे दिया। SRS का मालिक रहीम खान इस बात से नाराज हो गया। उसने अपने साथियों अज़हर शेख और मजार शेख के साथ मिल कर बड़ी साजिश रच डाली। 

27 मार्च, 2024 को रहीम खान ने अपने मजदूरों को ऑर्डर दे कर समोसे में कंडोम, गुटखा और पत्थर भरवा दिए। इस समोसे को रहीम ने सुबह साढ़े 7 से 9 बजे के बीच चिखली स्थित उसी कम्पनी में बँटवा दिए जहाँ से उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने वाला था। जब कम्पनी के स्टाफ ने इसकी शिकायत की तो कीर्तिकुमार ने 7 मार्च को इसकी शिकायत पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई। पुलिस ने रहीम शेख, फ़िरोज़ शेख, विक्की शेख, अजर शेख और मजार शेख के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

इन सभी पर IPC की धारा 328, 120- बी और 34 के तहत कार्रवाई की गई है। अब तक 1 आरोपित को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। मामले की जाँच की जा रही है।

अवलोकन करें:-

वडोदरा : गोमांस भरकर समोसा बेच रहा था ‘हुसैनी समोसे वाला’

हाल ही में गुजरात के वडोदरा से भी इसी प्रकार का मामला सामने आया था। तब चिपवाड इलाके में मौजूद ‘हुसैनी समोसे वाला’ की दुकान से उठाए गए सैम्पल में गोमांस मिलने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर के 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जिनकी पहचान युसूफ शेख, नसीम शेख, हनीफ भाटियारा, दिलावर पठान मोइन हबदल और मोबिन शेख के तौर पर हुई है। यह धंधा बिना लाइसेंस के एक बिल्डिंग के 5वें फ्लोर पर चल रहा था। ‘हुसैन समोसे वाला’ वडोदरा की कई दुकानों पर कच्चे समोसे सप्लाई करता था जहाँ दुकानदार इसे तलकर ग्राहकों को बेचते थे।

Health : Some Unknown Side Effects Of Condoms

A male condom, also known as an external condom, is one of the most popular means of birth control. It is inexpensive, easy to use and provides additional protection from sexually transmitted infections (STIs) during vaginal, oral or anal sex.

Condom is rolled over an erected penis as a barrier to block the sperm from fertilising the egg or transferring the virus in case of sexually transmitted infections. It is effective in 99 per cent of cases. Male condoms are absolutely safe to use, except in a few cases, where it may lead to some side effects. Here are a few things you must be prepared for if you use condoms during intercourse.

Condoms are made of thin latex (rubber), polyurethane or polyisoprene, designed to prevent pregnancy by stopping sperm from fertilising an egg. But latex can trigger an allergy in any of the partners. It may lead to rash, hives and a runny nose. In severe cases, it can even tighten the airways and decrease blood pressure. If you or your partner is allergic to latex, then you must opt for a polyurethane or lambskin condom. The other two condoms are a bit more expensive than the latex one.

Reduced sensitivity

Condoms available these days are generally extra thin to heighten sensitivity during the lovemaking session. Still, some people complain about reduced sensitivity when using condoms as a contraceptive method. They claim that the pleasure during sexual intercourse is reduced due to the latex barrier. In such a case we would recommend using oral contraception and IUD. But these methods are better if you are engaged with one partner as they do not prevent STIs.

Unwanted pregnancy and STIs

Condoms are not 100 per cent effective in preventing pregnancies and STIs. During sex, if the condoms tear or come off then there is a risk of pregnancy and STIs. It is generally caused by excessive friction. So, look for rupture before using a condom and use water-based lubricant. You can also use other methods of contraception for better results.

Risk of slipping out

An external condom is rolled on an erect penis and should be pulled out of the vagina immediately after ejaculation. Once the penis becomes flaccid the condom may slip accidentally, releasing the semen into the vagina. It may lead to unwanted pregnancies and STIs. Pulling out the barrier at the right time might get difficult for people at times.

Things to remember

Not everyone who uses condoms as a means of birth control suffers from these side effects. Only in a few instances, a person may face such challenges. In such a case, they may opt for other methods of contraception like oral contraceptive pills, intrauterine devices (IUD), or diaphragm. Using condoms when getting intimate is the surest way to prevent pregnancy and Sexually Transmitted Infections (STI). So, if you haven't experienced any symptoms ever, do not refrain from using it and learn the right way to use it.
Credit : https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/health-fitness/health-news/here-are-some-unknown-side-effects-of-condoms

मुस्लिम करते हैं सबसे ज्यादा कंडोम इस्तेमाल: जनसंख्या असंतुलन पर ओवैसी


हाल ही में जनसंख्या असंतुलन पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख्य मोहन भागवत के बयान पर असहमति जताते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सबसे ज्यादा कंडोम मुस्लिम इस्तेमाल करते हैं। ओवैसी के मुताबिक मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ने के बजाए घट रही है। उन्होंने लोगों से टेंशन न लेने की भी अपील की है।

इसी दौरान उन्होंने एक TV डिबेट का हवाला देते हुए भाजपा नेताओं के पिता पर सवाल खड़ा किया और उनके द्वारा पैदा किए गए बच्चों का जिक्र किया। ओवैसी ने यह बयान शनिवार (8 अक्टूबर 2022) को हैदराबाद के दारुलसलाम नाम से आयोजित सभा में दिया।

जनसंख्या असंतुलन पर क्या बोले ओवैसी?

अपने बयान में ओवैसी ने डॉ मोहन भगवत को सम्बोधित करते हुए कहा, “तुम बेवजह टेंशन में मत आओ क्योंकि मुस्लिमों की आबादी बढ़ नहीं बल्कि घट रही है।” इसी दौरान उन्होंने TV डिबेट में इस मुद्दे पर मुस्लिमों को लेकर होने वाली बहस को भी बेवजह बताया। ओवैसी ने एक डिबेट का हवाला देते हुए सवाल किया कि भाजपा नेताओं के पिता ने कितने बच्चे पैदा किए थे। इसी भाषण में ओवैसी ने मोहन भागवत से आँकड़ों पर बात करने के लिए भी कहा।
ओवैसी ने आगे कहा कि मुस्लिम बच्चों का TFR (टोटल फर्टिलिटी रेट) गिर रहा है। उन्होंने बताया कि इसके चलते मुस्लिमों में 2 बच्चों के बीच जन्म का अंतर जिसे स्पेंसिंग बोलते हैं, वो भी बाकियों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। ओवैसी के बताया कि मोहन भागवत इस बात पर नहीं बोलेंगे कि सबसे ज्यादा कंडोम का इस्तेमाल तो मुस्लिम ही करते हैं। ओवैसी के इस भाषण पर वहाँ मौजूद भीड़ जोर-जोर से चिल्ला कर उनकी बातों को समर्थन दे रही थी।
इसी सभा में ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में हो रहे मदरसों के सर्वे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस देश में मदरसों को निशाना बनाया जा रहा। मौलाना और मौलवियों से ओवैसी ने लोगों से जिहाद और फसाद में फर्क बताने के लिए भी कहा। इसी सभा में ओवैसी ने कहा कि आज के भारत में किसी मुस्लिम की कीमत सड़क के किनारे चल रहे कुत्ते से कम है। उन्होंने लोगों से सियासी ताकत बढ़ाने की अपील की।

ईरान का हिजाब विवाद उनका आंतरिक मामला: ओवैसी

ईरान में हिजाब को ले कर चल रहे विवाद पर ओवैसी ने कहा कि ये उनके देश का मामला है। उन्होंने कहा कि ये ईरान नहीं बल्कि भारत मेरे बाप का मुल्क है। ओवैसी का कहना है कि भारत में मुस्लिम बहन बेटियों को हिजाब पहनने से मना किया जा रहा है और इसके लिए समानता की दुहाई दी जाती है। उन्होंने कहा कि अब्बा आदम सबसे पहले भारत में आए थे।

पत्थरबाजों के घर पर बुलडोजर का विरोध

इसी सभा में ओवैसी ने पत्थरबाजों के घरों पर बुलडोजर चलने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर सभी निर्णय सरकार को ही लेने हैं तो अदालतें क्यों बनी हैं। चेतावनी भरे लहजे में ओवैसी ने कहा कि याद रहे सत्ता हमेशा किसी के पास नहीं रहती। इनके लिए ओवैसी ने राजीव गाँधी, इंदिरा गाँधी और नेहरू का हवाला भी दिया।
विजयदशमी (5 अक्टूबर 2022) के दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) पर जोर देते हुए इसके लिए एक समान कानून की पैरवी की थी। तब उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि आबादी के ही असंतुलन से इंडोनेशिया से ईस्ट तिमोर, सूडान व सर्बिया से कोसोवा नाम के नए देश बन चुके हैं।

‘क्या कंडोम भी देना पड़ेगा मुफ्त’? : IAS अफसर हरजोत कौर की विवादित टिप्पणी पर महिला आयोग सख्त

                                    IAS ऑफिसर हरजोत कौर (फाइल फोटो साभार: बिहार न्यूज़रूम)
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने पटना में आयोजित ‘सशक्त बेटी समृद्ध बिहार’ वर्कशॉप में छात्राओं को संवेदनहीन जवाब देने वाली आईएएस अधिकारी हरजोत कौर बम्हरा से स्पष्टीकरण माँगा है। एक स्कूली छात्रा द्वारा सैनिटरी पैड की माँग करने पर बिहार महिला बाल विकास निगम की एमडी ने कहा था, “कंडोम भी चाहती हैं।” इस टिप्पणी के लिए हरजोत कौर (IAS Harjot Kaur) से लिखित स्पष्टीकरण माँगा गया है। आईएएस अधिकारी को सात दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है।

बिहार की बेटियों को जागरूक करने के लिए 27 सितंबर, 2022 को पटना में ‘सशक्त बेटी समृद्ध बिहार’ वर्कशॉप का आयोजन किया गया था। वर्कशॉप का उद्देश्य लैंगिक असमानता मिटाने वाली सरकारी योजनाओं से बच्चियों को जागरूक कराना था। इस कार्यशाला में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 9 और 10 की लड़कियाँ शामिल हुईं थीं। इस दौरान जब एक छात्रा ने महिला आईएएस (IAS) ऑफिसर हरजोत कौर बम्हरा से बिहार सरकार की योजनाओं से जुड़े सवाल पूछे तो वह आगबबूला हो गईं।

‘कंडोम भी मुफ्त में देना पड़ेगा’

छात्रा ने पूछा था कि क्या सरकार 20-30 रुपए का सैनिटरी पैड नहीं दे सकती? इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास निगम की एमडी हरजोत कौर बम्हरा ने कहा था कि इस माँग का कोई अंत नहीं है। उन्होंने कहा, “आज आप 20-30 रुपए का सैनिटरी पैड माँग रही हो। कल को आप कहेंगी जींस-पैंट भी दे दो। परसों सुंदर जूते क्यों नहीं दे सकते हैं? जब परिवार नियोजन की बात आएगी तो निरोध भी मुफ्त में भी देना पड़ेगा।”
वह अपनी बात को जारी रखते हुए लड़कियों से आगे कहती हैं, “खुद सक्षम बनो। आपको सरकार से कुछ भी लेने की जरूरत क्यों है? यह सोचने का गलत तरीका है। आप लोग खुद से कुछ करने का सोचो, खुद से कुछ पैसे कमाने का तरीका सीखो, स्वावलंबी बनो।” इस पर छात्रा कहती है कि जो सरकार के हित में है, कम से कम उसे तो दे। सरकार को पैसा इसलिए देना चाहिए, क्योंकि वह हमसे वोट लेने आती है। इस पर आगबबूला होते हुए हरजोत कौर ने कहा था, “बेवकूफी की भी हद होती है। मत दो वोट। चली जाओ पाकिस्तान। वोट तुम पैसों के लिए देती हो क्या! सुविधाओं के बदले में देती हो क्या! बताओ!”

पश्चिम बंगाल : युवाओं द्वारा नशे के लिए हो रहा कंडोम का इस्तेमाल

एक समय था जब महीने में 3/4 दिन शराब की दुकाने बंद होने के कारण नशेड़ी स्प्रिट और नींद की गोलियों आदि का इस्तेमाल करते थे, लेकिन आज जब ऐसी कोई बात न होने पर नशेड़ियों द्वारा नशे के लिए कंडोम का इस्तेमाल करने का बहुत ही चौकाने वाला समाचार है।  
सामान्यतया कंडोम का इस्तेमाल सुरक्षित यौन संबंधों के लिए किया जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल से इसके जरिए नशा करने का मामला सामने आया है। अचानक से कंडोम की बड़ी माँग ने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। स्थिति ये है कि दुर्गापुर शहर में मेडिकल स्टोर्स पर कंडोम आते ही खत्म हो जा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्गापुर जिले के सिटी सेंटर, बेनाचिती, मुचिपारा, बिधाननगर, सी जोन, ए जोन में कुछ लोग धड़ल्ले से फ्लेवर्ड कंडोम खरीद रहे हैं। जब एक दुकानदार ने इसके बारे में जानने की कोशिश की तो पता चला कि नशे के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि पहले प्रतिदिन केवल 3-4 कंडोम ही बिकते थे, लेकिन अब तो एक झटके में सभी बिक जा रहे हैं।

कैसे होता है कंडोम से नशा 

कंडोम से नशे की एक प्रक्रिया है। इसको लेकर दुर्गापुर मंडल में काम करने वाले धीमान मंडल बताते हैं कि कंडोम में कुछ महकने वाले यौगिक पाए जाते हैं, लेकिन जब एल्कोहल तैयार करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है तो ये टूट जाता है। इसके इस्तेमाल से नशा जैसा महसूस होता है। ये लोगों को लती बनाने के लिए काफी होते हैं। धीमान के मुताबिक, डेंड्राइट में भी यही सुगन्धित पदार्थ पाया जाता है, इसलिए कई लोग उसका भी नशे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

दुर्गापुर आरई मेडिकल कॉलेज स्कूल के केमिस्ट्री विभाग के शिक्षक नूरुल हक के मुताबिक, कंडोम को गर्म पानी में लंबे समय तक भिगोकर रखने से इसमें मौजूद कार्बनिक अणु अल्कोहल यौगिक के तौर पर टूट जाते हैं। इसी से नशा होता है। इसी तरह से नाइजीरिया में टूथपेस्ट और जूते की माँग अचानक से 6 गुणा तक बढ़ गई थी। इसका इस्तेमाल भी नशे के लिए किया गया था। बहरहाल अब प्रशासन की चिंताएँ बढ़ी हुई हैं।