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‘मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता देना शरिया कानून के खिलाफ’: AIMPLB सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और UCC को देगा चुनौती, NCW बोला- सभी महिलाओं के लिए हो एक कानून; डिबेट में तस्लीम रहमानी को मुंह काला करने के बोला,देखिए वीडियो

       मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने के निर्णय और UCC को चुनौती देगा AIMPLB (साभार: ऑपइंडिया अंग्रेजी)
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रविवार (14 जुलाई 2024) को कहा कि मुस्लिम महिलाओं से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को वह चुनौती देगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को इद्दत की अवधि के बाद भी गुजारा भत्ता माँगने की अनुमति दी थी। बोर्ड उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) को भी चुनौती देगा। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कहा है कि महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों में कानून एक समान होने चाहिए। चर्चा यह भी है कि अगर मुस्लिम महिला गुजारा भत्ते की हक़दार नहीं, फिर हज के लिए मिलने वाली सब्सिडी हलाल क्यों? हराम क्यों नहीं? 
दरअसल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कट्टरपंथी इस मुगालते में थे, कि सरकार राजीव गाँधी की तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदल देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और न ही कोई सम्भावना है। यह भी शक हो रहा है कि तीन तलाक के मुद्दे पर भले ही मर्दों ने औरतों को दबा दिया हो, लेकिन गुजारा भत्ते का मामला इस तरह गर्माने से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ही अस्तित्व पर सवाल उठने शुरू हो चुके हैं। यह भी कहा जा रहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक एनजीओ है, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा पाकिस्तान को तोड़ बांग्लादेश बनवाने पर मुस्लिम वोटबैंक को कांग्रेस से घिसकता देख इस एनजीओ को बनाया था। 

दरअसल, 14 जुलाई 2024 को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में इन दोनों मुद्दों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि बैठक में आठ प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसमें पास पहला प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही है।

इलियास ने कहा, “पहला प्रस्ताव हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में था। यह फैसला शरिया कानून से टकराता है। इस्लाम में शादी को पवित्र बंधन माना जाता है। इस्लाम तलाक को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘महिलाओं के हित’ में बताया जा रहा है, लेकिन शादी के नजरिए से यह फैसला महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।”

सैयद कासिम रसूल इलियास ने आगे कहा, “अगर तलाक के बाद भी पुरुष को गुजारा भत्ता देना है तो वह तलाक क्यों देगा? और अगर रिश्ते में कड़वाहट आ गई है तो इसका खामियाजा किसे भुगतना पड़ेगा? हम कानूनी समिति से सलाह-मशविरा करके इस फैसले को वापस लेने के बारे में विचार-विमर्श करेंगे।”

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 मुस्लिम विवाहित महिलाओं सहित सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होती है और वे इन प्रावधानों के तहत अपने पतियों से भरण-पोषण का दावा कर सकती हैं। इसको लेकर मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 इस धर्मनिरपेक्ष कानून पर लागू नहीं होगा।

वहीं, यूसीसी को लेकर कासिम इलियास ने कहा कि उनकी कानूनी टीम इसको लेकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “विविधता हमारे देश की पहचान है, जिसे हमारे संविधान ने सुरक्षित रखा है। यूसीसी इस विविधता को खत्म करने का प्रयास करती है। यूसीसी न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के भी खिलाफ है।”

उधर, मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं के लिए सभी धर्मों को कानून समान होने चाहिए। शर्मा ने कहा, “महिलाओं के अधिकार सार्वभौमिक होने चाहिए, धर्म के आधार पर निर्धारित नहीं होने चाहिए। महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों के कानून भी समान होने चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के बाद आपको गुजारा भत्ता मिलता है तो मुस्लिम महिला को यह क्यों नहीं मिलना चाहिए? मैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गई बात का स्वागत करती हूँ।” NCW प्रमुख ने कहा कि यह निर्णय इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि किसी भी महिला को कानून के तहत समर्थन और सुरक्षा के बिना नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

देश के लिए हुए बलिदान शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह की पत्नी की तस्वीर पर अमजद ने की अश्लील टिप्प्णी: NCW ने कहा- कार्रवाई कर रिपोर्ट दे दिल्ली पुलिस

बलिदानी अंशुमन सिंह की पत्नी पर अभद्र टिप्पणी
सियाचिन में बलिदान हुए कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी स्मृति सिंह और माँ मंजू सिंह यह सम्मान लेने राष्ट्रपति भवन पहुँची। इस दौरान इनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं। लोगों ने स्मृति के साहस और पीड़ा दोनों पर बात की, लेकिन इसी बीच एक कमेंट इतना भद्दा आया कि कोई सोच भी नहीं सकता था। ये कमेंट अमजद नाम के यूजर ने किया था। अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसी पर संज्ञान लेते हुए पुलिस को एक्शन के निर्देश दिए और मामले में एफआईआर करने को कहा।

8 जुलाई 2024 को जारी किए गए पत्र में राष्ट्रीय महिला आयोग ने अमजद की टिप्पणी को विशिष्ट कानूनी प्रावधानों का संदर्भ देते हुए उल्लंघन बताया। 

एनसीडब्लू ने आईपीसी की धारा 79 और आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 के उल्लंघन में कार्रवाई के निर्देश दिए। आयोग ने दिल्ली पुलिस से उस व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर जदर्ज करके उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार करने को कहा। वहीं आयोग ने मामले की निष्पक्ष एव समय पर जाँच की माँग भी की और एक्शन लिए जाने के बाद तीन दिन के भीतर इसकी रिपोर्ट आयोग को देने को कहा।

कीर्ति चक्र से सम्मानित बलिदानी अंशुमान की पत्नी पर किए गए अभद्र टिप्पणी के बाद अमजद का ट्वीट हर जगह वायरल हो गया। अब लोग अमजद के सोशल मीडिया हैंडल को खोजकर उसपर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इंस्टाग्राम पर डाली प्रोफ्राइल के अनुसार अमजद ने खुद का प्रोफेशन मेडिकल लाइन से जुड़ा बताया है और साथ ही खुद को मानवता की सेवा में तत्पर लिखा दिखाया है। हालाँकि उसकी स्मृति पर की गई टिप्पणी और वो दोनों मैच नहीं करते। लोग अमजद की सोच पर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही अन्य कमेंट भी शेयर कर रहे हैं जो अमजद जैसी मानसिकता वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर किए।

सियाचिन ग्लेशियर में 19 जुलाई 2023 की सुबह भारतीय सेना के कई टेंट में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इस पर काबू पाने की कोशिश में रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह बलिदान हो गए थे। वह यूपी में देवरिया के रहने वाले थे। उनकी शादी हादसे से 5 महीने पहले यानी 10 फरवरी 2023 को शादी हुई थी। अंशुमान इस घटना से 15 दिन पहले ही सियाचिन गए थे जिसके कुछ दिन बाद ही उनकी शहादत की खबर आई।

दिल्ली : ‘एक रात हमारे साथ सो जाओ तो ड्यूटी बढ़ा देंगे’: महिला कर्मचारियों ने खोली केजरीवाल के अस्पताल की सच्चाई, AAP विधायक का भी लिया नाम

बुराड़ी का अस्पताल और प्रदर्शन करती महिलाएं (चित्र साभार: HT & ScreenGrab form Viral Video)
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की मुसीबतें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। रहस्यमयी कोली कांड से लेकर राशन कार्ड कांड, फर्जी डिग्री, घरेलू अत्याचार, भ्रष्टाचार, शराब घोटाला से पीछा छूटा नहीं, दिल्ली हॉस्पिटल्स में नकली दवाइयों और अब हॉस्पिटल में नौकरी के लिए यौन शोषण आदि यानि दूसरे शब्दों के कहा जाए कि केजरीवाल वास्तव में परिवर्तन ला रहे हैं। अपराध का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहाँ केजरीवाल पार्टी लिप्त नहीं पायी जा रही हो। 
फर्जी सर्वे कराया है “आप” ने कि क्या जेल से सरकार चलानी चाहिए केजरीवाल को। ED को भी अभी स्वयं नहीं पता कि पूछताछ के बाद केजरीवाल की गिरफ़्तारी का आधार बनेगा या नहीं। लेकिन “आपियों” का propaganda चालू है : “मोदी डरा हुआ है केजरीवाल से, उसके कामों से और उसकी लोकप्रियता से, इसलिए मोदी “आप” को ख़त्म करना चाहता है”।
24 नवंबर, 2012  का केजरीवाल का एक ट्वीट बाजार में चल रहा है जिसमें उसने लिखा था 
“As a patriot Indian, my head hangs in shame when our corrupt leaders do not appear before ED and CBI even after multiple summons by the investigating agencies, when they should have resigned from their posts immediately as soon as the allegations were made”
अब जमाना बदल गया, 2012 में भ्रष्टाचार को मिटा कर साफ़ राजनीति लाने की कसमें खाते थे केजरीवाल लेकिन आज भ्रष्टाचार की दलदल में डुबकी लगाए हुए नई तरह की राजनीति शुरू कर दी है “जनाब” ने। कोई क्षेत्र ऐसा बचा होगा  जिसमें घोटाला न किया हो केजरीवाल और उसके लोगों ने लेकिन फिर भी स्वघोषित “ईमानदार” हैं

दिल्ली के बुराड़ी के एक सरकारी अस्पताल में महिला कर्मचारियों ने काम देने के एवज में शारीरिक शोषण किए जाने का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि उनके शीर्ष अधिकारी उन पर शारीरिक सम्बन्ध बनाने का दबाव बनाते हैं और ऐसा ना करने पर उनको प्रताड़ित किया जाता है। इस मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी संज्ञान लिया है।

बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल के बाहर महिलाएँ लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें अस्पताल में ड्यूटी नहीं दी जा रही है। उन्हें पूरी ड्यूटी दिए जाने के एवज में उनके अधिकारी उनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए कहते हैं और रिश्वत भी माँगते हैं।

महिलाओं ने कहा कि अस्पातल में AAP के स्थानीय विधायक संजीव झा के लोग भी हैं और उनके सहयोग से ये कुकर्म किया जाता है। महिलाओं के कहा कि संजीव झा के लोग पैसे लेकर-लेकर लोगों को नौकरी देते हैं। साथ ही आरोपितों को भी बचाते हैं। महिलाओं ने AAP विधायक और उसके लोगों पर गंभीर आरोप लगाए।

जानकारी के अनुसार, बुराड़ी स्थित दिल्ली सरकार के इस अस्पताल में मेडिकल के अतिरिक्त तमाम स्टाफ को आउटसोर्सिंग से रखा जाता है। इसके तहत एक कम्पनी ग्लोबल वेंचर यह काम करती है। इसका काम इन कर्मचारियों की भर्ती और उनके काम की देखरेख होता है। यह भी सामने आया है कि यहाँ कर्मचारियों को रखने के लिए रिश्वत ली गई।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक महिला ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में सुपरवाईजर और मैनेजर पद पर काम करने वाले नीरज शर्मा, राजकुमार और आदर्श नाम के शख्स पर ये आरोप लगाए गए हैं। एक महिला कर्मचारी का कहना है कि उसे इन अधिकारियों की करतूतों के बारे में सब पता है। महिलाओं के प्रदर्शन के इस वीडियो में उनके आरोप सुने जा सकते हैं।

महिला ने बताया है कि इस अस्पताल के बेसमेंट में ये अधिकारी महिला कर्मचारियों को बुलाते थे और उनका शारीरिक शोषण करते थे। उसका कहना था कि शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार ना होने वाली महिलाओं को अस्पताल में मात्र 15 दिन काम दिया जाता था।

अधिकारी महिलाओं से कहते थे कि उनके साथ एक रात सोने पर वह काम के दिन बढ़ाकर 20-25 कर देंगे। महिला का कहना है कि यदि अस्पताल के बेसमेंट के सीसीटीवी की जाँच करवाई जाए तो सारी सच्चाई बाहर आ जाएगी। प्रदर्शन करने वाली महिलाओं ने इस मामले में स्थानीय AAP विधायक संजीव झा का संबध बताया है।

महिला का कहना है कि नीरज और राजकुमार यहाँ काम करने वाली महिलाओं से एक-एक करके अकेले में मिलने को कहते थे। उन्हें इस विषय में आवाज उठाने से भी रोका जाता था। जिन महिलाओं ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया गया।

महिलाओं का कहना है कि उन्हें धमकाया भी गया है। इसके अलावा एक महिला से मारपीट की घटना भी सामने आई है। उसके साथ छेड़छाड़ और यौन शोषण किया गया और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई। इस मामले में महिला ने दिल्ली पुलिस के पास मामला भी दर्ज करवाया है।

इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने इस मामले में उत्तरी दिल्ली के डीसीपी से रिपोर्ट माँगी है।

दिल्ली पुलिस को की गई शिकायत में महिला ने 17 और 19 दिसम्बर 2023 को मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी के खिलाफ IPC की धारा 323, 354, 506, 509 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘रात को लड़का-लड़की सोता है तो उसी में न जाता है पानी भी, पढ़ी-लिखी लड़की कहती है कि निकलने लगे तो बाहर फेंक दो’: नीतीश कुमार के बयान पर NCW बोली – माफ़ी माँगिए


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में सेक्स को लेकर कुछ ऐसा बयान दिया कि अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया है। अब उन्होंने इसी तरह के बयान को विधान परिषद में भी दोहराया है। नीतीश कुमार ने कहा, “सबको अगर पढ़वाएँगे तभी न इसका होगा। अगर लड़की पढ़ जाएगी तो जानते हैं, लड़का-लड़की की जो होती है शादी, न लड़का रोज लड़की के साथ रात में सोता है न। सोता है तो उसी में न जाता है पानी भी, 35 में भी।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में सेक्स को लेकर कुछ ऐसा बयान दिया कि अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया है। अब उन्होंने इसी तरह के बयान को विधान परिषद में भी दोहराया है। नीतीश कुमार ने कहा, “सबको अगर पढ़वाएँगे तभी न इसका होगा। अगर लड़की पढ़ जाएगी तो जानते हैं, लड़का-लड़की की जो होती है शादी, न लड़का रोज लड़की के साथ रात में सोता है न। सोता है तो उसी में न जाता है पानी भी, 35 में भी।”

नीतीश कुमार ने आगे कहा, “उसी समय लड़की भी जब पढ़ी-लिखी रहती है तो कहती है कि ठीक है, रात में करो लेकिन अपना जो तुमको निकलने लगे तो बाहर निकाल कर फेंक दो। यही कर के लड़की सब अब सबको समझा रही है। ज़रा जान लीजिए। लड़की सब सभी को समझाती है कि अपने पति को कंट्रोल में रखिए।” इसी दौरान उन्होंने जनसंख्या वृद्धि दर कम होने के आँकड़े भी गिनाए। इस दौरान एक विधायक ने उन्हें याद दिलाया कि वो मुख्यमंत्री हैं, इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें।

इस पर उन्होंने विरोध करने वालों को बैठने के लिए कहा। अब NCW की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इन बयानों पर कहा है, “हम पूरे देश की महिलाओं की तरफ से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से त्वरित और स्पष्ट माफ़ी माँगने की माँग करते हैं। महिलाओं को जो सम्मान और प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए, विधानसभा में नीतीश कुमार के मूर्खतापूर्ण बयान इसका निरादर है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने जिस अपमानजनक और और तुच्छ भाषा का इस्तेमाल किया है, वो समाज पर एक कलंक है।”

NCW अध्यक्ष ने आगे कहा कि एक लोकतंत्र में जब कोई नेता इस तरह का बयान खुले रूप से दे सकता है, हम सोच सकते हैं कि उसके शासन में राज्य में किस तरह की भयावहता होगी। रेखा शर्मा ने कहा कि हम इस तरह के व्यवहार के खिलाफ सख्ती से खड़े हैं और जिम्मेदारी तय करने की माँग करते हैं। बता दें कि इससे पहले नीतीश कुमार ने सोमवार (7 नवंबर, 2023) को ही विधानसभा में भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था, जो आपत्ति का विषय बना।

इस बयान में उन्होंने कहा था, “अगर पढ़ लेगी लड़की और वो जब शादी होगा लड़का-लड़की में तो जो पुरुष है वो रोज रात में शादी के बाद करता है न। तो उसी में और पैदा हो जाता है। लेकिन, लड़की जब पढ़ लेती है तो उसको पता है कि करेगा। लेकिन, अंतिम में भीतर मत घुसाओ, उसको बाहर कर दो। करता तो है। तो उसी में आप समझ लीजिए, संख्या घट रही है। पहले 4.4 था, अब घटते-घटते पिछले साल के रिपोर्ट में ये 2.9 पर पहुँच गया है। बहुत जल्दी 2 के पास हम पहुँच जाएँगे।”

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बिहार : ‘पढ़ी-लिखी लड़की घुसाने देगी लेकिन बाहर निकाल देगी’: विधानसभा से विवाहित पुरुषों को नीतीश

नीतीश कुमार जनसंख्या वृद्धि दर की बात करते हुए ऐसा कह रहे थे। इस दौरान उन्होंने विधानसभा में कवरेज के लिए उपस्थित पत्रकारों को भी संबोधित करते हुए कहा कि वो उनके भाषण पर ध्यान दें। बिहार में सोमवार को ही जातिवार जनगणना के आँकड़े भी विधानसभा में टेबल पर रखे गए हैं। लेकिन, नीतीश कुमार के बयान और उस पर वहाँ लगे ठहाकों ने सब गुड़-गोबर कर दिया। इस दौरान उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी हँसते दिखे।

‘क्या कंडोम भी देना पड़ेगा मुफ्त’? : IAS अफसर हरजोत कौर की विवादित टिप्पणी पर महिला आयोग सख्त

                                    IAS ऑफिसर हरजोत कौर (फाइल फोटो साभार: बिहार न्यूज़रूम)
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने पटना में आयोजित ‘सशक्त बेटी समृद्ध बिहार’ वर्कशॉप में छात्राओं को संवेदनहीन जवाब देने वाली आईएएस अधिकारी हरजोत कौर बम्हरा से स्पष्टीकरण माँगा है। एक स्कूली छात्रा द्वारा सैनिटरी पैड की माँग करने पर बिहार महिला बाल विकास निगम की एमडी ने कहा था, “कंडोम भी चाहती हैं।” इस टिप्पणी के लिए हरजोत कौर (IAS Harjot Kaur) से लिखित स्पष्टीकरण माँगा गया है। आईएएस अधिकारी को सात दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है।

बिहार की बेटियों को जागरूक करने के लिए 27 सितंबर, 2022 को पटना में ‘सशक्त बेटी समृद्ध बिहार’ वर्कशॉप का आयोजन किया गया था। वर्कशॉप का उद्देश्य लैंगिक असमानता मिटाने वाली सरकारी योजनाओं से बच्चियों को जागरूक कराना था। इस कार्यशाला में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 9 और 10 की लड़कियाँ शामिल हुईं थीं। इस दौरान जब एक छात्रा ने महिला आईएएस (IAS) ऑफिसर हरजोत कौर बम्हरा से बिहार सरकार की योजनाओं से जुड़े सवाल पूछे तो वह आगबबूला हो गईं।

‘कंडोम भी मुफ्त में देना पड़ेगा’

छात्रा ने पूछा था कि क्या सरकार 20-30 रुपए का सैनिटरी पैड नहीं दे सकती? इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास निगम की एमडी हरजोत कौर बम्हरा ने कहा था कि इस माँग का कोई अंत नहीं है। उन्होंने कहा, “आज आप 20-30 रुपए का सैनिटरी पैड माँग रही हो। कल को आप कहेंगी जींस-पैंट भी दे दो। परसों सुंदर जूते क्यों नहीं दे सकते हैं? जब परिवार नियोजन की बात आएगी तो निरोध भी मुफ्त में भी देना पड़ेगा।”
वह अपनी बात को जारी रखते हुए लड़कियों से आगे कहती हैं, “खुद सक्षम बनो। आपको सरकार से कुछ भी लेने की जरूरत क्यों है? यह सोचने का गलत तरीका है। आप लोग खुद से कुछ करने का सोचो, खुद से कुछ पैसे कमाने का तरीका सीखो, स्वावलंबी बनो।” इस पर छात्रा कहती है कि जो सरकार के हित में है, कम से कम उसे तो दे। सरकार को पैसा इसलिए देना चाहिए, क्योंकि वह हमसे वोट लेने आती है। इस पर आगबबूला होते हुए हरजोत कौर ने कहा था, “बेवकूफी की भी हद होती है। मत दो वोट। चली जाओ पाकिस्तान। वोट तुम पैसों के लिए देती हो क्या! सुविधाओं के बदले में देती हो क्या! बताओ!”

नूपुर शर्मा पर अखिलेश यादव की ‘शरीर’ वाली टिप्पणी पर नींद से जागी महिला आयोग

                   सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (बाएँ ) एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा (दाएँ)
नूपुर शर्मा मुद्दे किस ओर जा रहा है या जायेगा कहना कठिन है। विदेशी मौलानाओं के नूपुर के पक्ष में बोलने के साथ-साथ केरल के राज्यपाल द्वारा मदरसों और देवबंद पर प्रहार करना कट्टरपंथियों के षड़यंत्र की ओर इशारा किया जा रहा है। मुसलमानों में भी दो मत हो रहे है, एक पक्ष का मानना है कि जब नूपुर ने हमारी ही इस्लामिक किताब के हवाले से तस्लीम रहमानी के उकसाने पर बात कही, फिर विवाद क्यों? उनका यह भी कहना है कि अगर यह मसला ख़त्म नहीं हुआ, वह मुसलमानों के बहुत खिलाफ जाने वाला है और उसके जिम्मेदार कोई नहीं, बल्कि नेता और मुस्लिम रहनुमा कहलाये जाने वाले होंगे। क्योकि अगर नूपुर ने गलत बयानबाज़ी की थी, ऐतराज उसी रात से होना था, 10 दिन बाद क्यों? जबकि कट्टरपंथी सोंच इसे पैगम्बर का अपमान मान रहे हैं। इतना ही नहीं, बॉलीवुड की 
लीना मनिमेकलाई ट्विटर पर माँ काली को सिगरेट पीते दिखाकर आग में घी डाल रहा है। 

जिसे देखो मौके पर चौका मारने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा। अब अखिलेश यादव की नूपुर पर "शरीर से भी माफ़ी" वाली टिप्पणी का राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लेकर योगी सरकार से इस पर कार्यवाही करने के लिए कहा है। महिला आयोग ने भी सुर्खियां बटोरने का अच्छा मौका तलाशा। इतने दिनों से उसे बलात्कार और तन से सर जुदा की धमकियाँ मिल रही, तब उन धमकियों का संज्ञान क्यों नहीं लिया? क्या बलात्कार या तन से सर जुदा होने का इंतज़ार किया जा रहा था? क्यों नहीं ऐसी मांग करने वालों सख्त कार्यवाही करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को लिखा? क्यों नहीं प्रेस कांफ्रेंस करके जिस इस्लामिक किताब के हवाले से नूपुर ने तस्लीम रहमानी को जवाब दिया, उस किताब के पृष्ठ की फोटो कॉपी मीडिया को देकर कट्टरपंथियों को  बेनकाब किया?   

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ ट्वीट करके समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बुरा फँस गए हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने अखिलेश यादव के ट्वीट पर संज्ञान लिया है। यह ट्वीट उन्होंने 1 जुलाई को किया था। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच को भी कहा। एनसीडब्ल्यू ने यह भी कहा है कि कार्रवाई के बाद आयोग को भी इससे अवगत कराया जाए।

एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने 4 जुलाई 2022 को यूपी पुलिस और डीजीपी यूपी को टैग करते हुए ट्वीट किया, “इस शख्स को देखिए जो खुद को एक पार्टी का नेता बताता है। वह लोगों को नूपुर शर्मा पर हमला करने के लिए उकसा रहा है। यूपी पुलिस और डीजीपी उसके खिलाफ कार्रवाई करें। माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध है कि उनके खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo Moto action) लें।”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने 1 जुलाई को नूपुर शर्मा के खिलाफ ट्वीट किया था, “सिर्फ मुख को नहीं शरीर को भी माफी माँगनी चाहिए। देश में अशांति और सौहार्द बिगाड़ने की सजा भी मिलनी चाहिए।”

पैगंबर मुहम्मद को लेकर की गई टिप्पणी के ​कारण बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पिछले महीने पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से उन्हें लगातार जान से मारने की ध​मकियाँ मिल रही हैं। इसी बीच 2 जुलाई को नुपूर शर्मा के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया था। कोलकाता की दो थानों की पुलिस ने नुपूर शर्मा को कुछ दिन पहले समन भेजकर उनसे वहाँ पेश होने को कहा था। हालाँकि जान का खतरा होने के कारण नुपूर थानों में नहीं गई, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने ये नोटिस जारी किया ताकि नुपूर देश छोड़कर कहीं न जा पाएँ।

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नूपुर शर्मा : मीडिया ,सर्वोच्च न्यायालय और विधिक व्यवस्थाएं ; देखें वीडियो
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नूपुर शर्मा : मीडिया ,सर्वोच्च न्यायालय और विधिक व्यवस्थाएं ; देखें वीडियो
देवेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट चेयरमैन उगता भारत समाचार पत्र लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया व्यवस्थापिका, न्यायपालि.....

हेमंत सोरेन पर लगे रेप के आरोपों का NCW ने लिया संज्ञान: मुंबई DGP से माँगा एक्शन का ब्योरा

राष्ट्रीय महिला आयोग ने हेमंत सोरेन पर लगाए गए दुष्कर्म के आरोप के मामले में संज्ञान लिया है। आयोग ने 17 दिसंबर, 2020 को कहा कि मीडिया रिपोर्ट में इसकी विस्‍तृत जानकारी दी गई है कि किस तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता ने मॉडल के साथ न सिर्फ दुष्‍कर्म किया, बल्कि इस अपराध को लेकर मुँह न खोलने की धमकी भी दी। इस मामले में आयोग ने महाराष्ट्र के डीजीपी से रिपोर्ट माँगी है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने मॉडल से कथित तौर पर रेप मामले में संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को चिट्ठी लिखी है। DGP को लिखे पत्र में उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस से सात साल में अब तक की गई कार्रवाई के पूरे ब्योरे की रिपोर्ट माँगी है।

ट्विटर पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, आयोग ने कहा, “हमें मुंबई की एक मॉडल द्वारा हेमंत सोरेन पर रेप के आरोप की खबरें मीडिया रिपोर्ट्स में पढ़ने को मिली हैं। मॉडल ने आरोप लगाया है कि 2013 में हेमंत सोरेन और सुरेश नागरे नाम के व्यक्ति द्वारा न सिर्फ उसका रेप किया गया बल्कि उसे और उसके परिवार को लगातार धमकियाँ दी गई। मॉडल से कहा गया कि अगर उसने रेप की घटना सार्वजनिक की तो परिणाम भुगतने होंगे।”

सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हो रहा है। पत्र में झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर बलात्कार के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही ‘Justice For Natasha (बदला हुआ नाम)’ भी ट्रेंड हो रहा है।

शेयर किए गए पत्र में पीड़िता ने लिखा है कि वो 2013 में अभिनेत्री बनने का ख्वाब लिए बॉलीवुड में एंट्री करना चाहती थी, तभी उसकी दोस्ती सुरेश नागरे नामक व्यक्ति से हुई।

पत्र के अनुसार, “बातचीत और व्यवहार के हिसाब से सुरेश नागरे एक अच्छा व्यक्ति प्रतीत होता था। एक कॉमन दोस्त के जरिए हमारी मुलाकात हुई थी। उसके बाद कुछ अन्य कार्यक्रमों और पार्टियों में हम मिले। उसने मुझे फिल्म क्षेत्र में करियर बनाने के लिए मेरा समर्थन किया और मुझे ऐसे ही कई युवाओं से मिलवाया, जो बॉलीवुड में नाम कमाना चाहते थे। वो ऐसा दिखाता था, जैसे उसके बड़े लोगों से अच्छे संपर्क हों।”

इस पत्र में, जिसे पीड़िता का बताया जा रहा है, आगे दावा किया गया है कि सितम्बर 5, 2013 को सुरेश ने उसे बांद्रा वेस्ट स्थित होटल ताज लैंड्स में ये कह कर बुलाया कि वो कुछ प्रभावशाली लोगों से मिलवाएगा, लेकिन जब वो वहाँ पहुँचीं तो 3 ही लोग थे। दावा किया गया है कि इनमें से एक झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन थे और वहीं पीड़िता के साथ बलात्कार हुआ। बता दें कि जुलाई 2013 से दिसंबर 2014 के बीच भी हेमंत मुख्यमंत्री थे, जिसके बाद वो राज्य में नेता प्रतिपक्ष बने।

पत्र में पीड़िता ने कहा कि जब वो पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने गई तो वहाँ भी उसे प्रताड़ित किया गया क्योंकि तब हेमंत सोरेन एक बड़े पद पर काबिज थे। उसने लिखा है कि सुरेश नागरे उसे फिर से हेमंत सोरेन के पास भेजने के लिए मैसेज कर रहा था, लेकिन वो नजरअंदाज करती रहीं। उसने बताया है कि इस मामले में बांद्रा पुलिस थाने में अक्टूबर 20, 2013 को आधा दर्जन से भी अधिक धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई गई थी।