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उत्तर प्रदेश : कलावा बाँध छिपाई पहचान, ईरम ने ‘महक’ नाम रखकर किया आकाओं के लिए काम: भारत में ISI कैसे खेल रहा जासूसी वाला खेल, वामपंथी सिर्फ हिंदुओं को बदनाम करने में जुटे

                                 हिंदू नाम की आड़ में जासूसी करने वालों से कौन पूछेगा धर्म?
गाजियाबाद से सामने आया जासूसी नेटवर्क सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उस नैरेटिव पर भी सीधा निशाना है जो एक खास दिशा में गढ़ा जाता रहा है। यह मामला बताता है कि सच्चाई कितनी परतों में छिपी होती है और कैसे उसे चुन-चुनकर तोड़ा-मरोड़ा जाता है।

हिन्दुओं को आतंकवादी हरकतों में बदनाम करने का पाकिस्तान ही नहीं भारत में सनातन विरोधी का बहुत गहरा रिश्ता है। अगर कसाब जिन्दा नहीं पकड़ा गया होता हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद कहकर हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले हिन्दू विरोधी पीछे नहीं हटते। भारत में पाकिस्तान के स्लीपर सेल ही नहीं हिन्दुत्व का चोला ओढे कालनेमियों की भी कमी नहीं। टीवी पर एक से बढ़कर एक श्लोक/चौपाई सुनाकर लोगों को भ्रमित करने वाले ही हिन्दुत्व और देश के दुश्मन हैं। मुस्लिम की मौत होने पर कोहराम मचाते हैं लेकिन जब किसी हिन्दू की मोबलीचिंग में हत्या होने पर इन सबकी बोलती ऐसे बंद रहती है जैसे कि इनके घरों में शोक हो।   

कौशांबी और साहिबाबाद से पकड़े गए इस गिरोह के तार सीधे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े मिले। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह नहीं थी कि ये लोग जासूसी कर रहे थे, बल्कि यह थी कि ये सब हिंदू नाम और पहचान की आड़ लेकर भारत के खिलाफ काम कर रहे थे। सरफराज ने खुद को जोरा सिंह बना लिया, शहजाद ने भट्टी और वकार ने विक्की जट नाम रख लिया। कौशांबी से पकड़े गए सुहेल ने खुद का नाम रोमियो, नौशाद ने लालू, समीर ने शूटर और एक औरत साने इरम बन गई महक।

यह सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं था। सुहेल कलावा बाँधता था, गले में रुद्राक्ष पहनता था, माथे पर टीका लगाता था। नौशाद और समीर भी इसी तरह की हिंदू पहचान लेकर घूमते थे। यानी साजिश यह थी कि हिंदू बनकर जासूसी करो और हिंदुओं का भरोसा जीतो और फिर उनसे भी जासूसी करवाओ। क्योंकि इस गिरोह में युवक गणेश और महिला मीरा का भी नाम सामने आया।

अब जब गाजियाबाद का पूरा नेटवर्क खुलकर सामने आ चुका है और साफ दिख रहा है कि किस तरह हिंदू नाम और पहचान को ढाल बनाकर जासूसी की जा रही थी, तब वे लोग कहाँ चले गए जो हर बार हिंदू नाम देखते ही उछल पड़ते हैं? वही लोग जो किसी एक नाम के आधार पर पूरी चर्चा का रुख मोड़ देते हैं, इस संगठित साजिश पर चुप रहे। न तो मजहब के आधार पर हेडलाइन बनी, न कोई किसी मजगब को निशाना बनाया गया और यहाँ तक कि देश हित में भी सवाल नहीं पूछे गए। यही बताता है कि समस्या नजरिए की है।

राजस्थान का ही मामला सामने रखिए। एयरफोर्स में काम करने वाला प्राइवेट कर्मचारी सुमित कुमार जासूसी के आरोप में पकड़ा गया। रिपोर्ट्स में साफ बताया गया कि उसका ब्रेनवॉश पाकिस्तानी हैंडलर्स ने किया था और उसे इसलिए चुना गया क्योंकि वह हिंदू था। उससे सत्संग और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए दूसरे हिंदुओं को ब्रेनवॉश करवाने की योजना बनाई गई। यानी यहाँ भी एक बड़ी साजिश थी, जिसमें हिंदू पहचान का इस्तेमाल एक औजार की तरह किया जा रहा था।  

लेकिन जैसे ही सुमित कुमार का नाम सामने आया, मीडिया और सोशल मीडिया पर वामपंथी अकाउंट्स ने बिना देर किए हेडलाइन बना दी- हिंदू निकला पाकिस्तानी जासूस। न कोई गहराई देखी गई, न कोई सोर्स जाँचा गया, न यह सवाल कि उसके पीछे कौन है? बस नाम देखा और हिंदुओं को बदनाम करने का पूरा नैरेटिव सेट कर दिया।

ये दो मामले सामने रखकर देखा जाए तो यही दोहरा रवैया सामने आ जाता है। जब गाजियाबाद में पूरा जासूसी नेटवर्क हिंदू नाम की आड़ में काम करता पकड़ा गया, तब यह बात नहीं उठती कि यह हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश है। तब यह नहीं कहा जाता कि देखो कैसे हिंदू पहचान का इस्तेमाल ढाल की तरह किया जा रहा है। लेकिन जैसे ही ऐसे मामलों में एक व्यक्ति का नाम हिंदू निकलता है, पूरी कहानी उसी पर टिक जाती है।

क्या कभी यह सवाल उठाया जाएगा कि जिन पाकिस्तानी आकाओं के इशारों पर ये सारे लोग काम कर रहे थे, उनकी मजहबी पहचान क्या है? क्या तब भी उतनी ही तेजी से हेडलाइन बनेगी? या फिर वहाँ चुप्पी ही साध ली जाएगी?

समस्या यह है कि कुछ लोगों के लिए सच्चाई मायने नहीं रखती, उन्हें सिर्फ मौका चाहिए। मौका हिंदुओं को घेरने का, उन्हें कटघरे में खड़ा करने का। और जैसे ही ऐसा कोई मौका दिखता है, पूरा इकोसिस्टम एक्टिव हो जाता है। तथ्यों की जाँच बाद में होती है, पहले फैसला सुना दिया जाता है।

गाजियाबाद का मामला इस पूरे खेल को उजागर करता है। यह दिखाता है कि कैसे दुश्मन ताकतें सिर्फ सीमापार पर ही नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक समाज के भीतर घुसकर भी काम कर रही हैं। और उससे भी ज्यादा खतरनाक यह है कि उनके इस खेल में देश की गिनी-चुनी मीडिया और वामपंथी लोग अपने नैरेटिव को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

गाजियाबाद की घटना एक चेतावनी है, हिंदुओं के लिए। यह उस सोच के लिए भी जो हर बार एक ही दिशा में देखने की आदत डाल चुकी है। अग अब भी यह नहीं समझा गया, तो अगली बार कोई और ‘हिंदू नाम’ फिर से इस्तेमाल होगा और कहानी फिर से उसी तरह मोड़ी जाएगी।

3 को दी फाँसी, 700 को किया गिरफ्तार… ईरान ने सीजफायर का भी नहीं किया लिहाज, इजरालयी एजेंटों को पकड़कर मौत की सजा देने में जुटा

                  ईरान में तीन लोगों को फाँसी दी गई ( फोटो साभार- @iran military, फाइल- @khamenei)
ईरान ने 12 दिनों तक चले इजरायल के साथ युद्ध के बाद अब कथित तौर पर जासूसी करने वालों को सजा देना शुरू कर दिया है। ईरान ने अपने तीन नागरिकों को फाँसी की सजा दी है जबकि करीब 700 लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

ईरान से आए इस समाचार का केन्द्र और राज्य सरकारों, निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट और आतंकियों/गद्दारों की वकालत करने वाले वकीलों को संज्ञान लेना चाहिए। जितनी जल्दी हो देश से गद्दारी करने वालों को ईरान की तर्ज पर कार्यवाही होनी चाहिए। देशहित में इनके लिए कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।     

जिन लोगों को फाँसी दी गई है उनके नाम हैं- इदरीस अली, आजाद शोजाई और रसूल अहमद रसूल। इनपर इजरायल के लिए जासूसी करने और देश में हथियार लाने का आरोप था। बुधवार (25 जून 2025) को उरमिया जेल में इनलोगों को फाँसी पर लटका दिया गया। ईरानी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है।

तुर्की की सीमा से सटा हुआ उरमिया ईरान के उत्तर पश्चिम में स्थित एक शहर है। उरमिया के जेल से फाँसी पर लटकाने से पहले की तीनों की तस्वीर जारी की गई। 13 जून 2025 को ईरान-इजरायल जंग के दौरान ईरान ने इजरायल के पक्ष में काम करने वालों को सख्त चेतावनी दी थी कि वो उन्हें नहीं छोड़ेंगे।

पिछले 12 दिनों में 700 लोग गिरफ्तार

ईरान ने पिछले 12 दिनों में करीब 700 लोगों को गिरफ्तार किया। इन पर इजरायल खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ को सीक्रेट जानकारी देने और ईरानी सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने में मदद करने का आरोप लगाया है।

ईरान का कहना है कि कई आरोपितों से अभी पूछताछ चल रही है जबकि कई से पूछताछ पूरी हो गई है। इन लोगों को जल्द ही सजा सुनाई जाएगी। ईरान ने इजरायल के साथ तनातनी के बाद ही अपने देश के नागरिकों को सख्त चेतावनी दी थी कि वो इजरायल के नेटवर्क का हिस्सा न बनें।

ये पहली बार नहीं है जब ईरान ने जासूसी के आरोप में अपने नागरिक को फाँसी की सजा दी हो। हाल ही में ईरान ने 3 लोगों को इजरायल का समर्थन करने के आरोप में फाँसी पर लटका दिया था।

ईरान के 14 परमाणु वैज्ञानिकों की हुई मौत

इजरायल और अमेरिका के हमलों में न सिर्फ ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया बल्कि बड़े बड़े परमाणु वैज्ञानिकों को भी मौत के घाट उतार दिया। दरअसल हमले का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना था क्योंकि ईरान परमाणु बम बनाने की कगार पर खड़ा था।

इससे इजरायल के अस्तित्व को खतरा है। इजरायल के खुफिया तंत्र का ईरान के अंदर नेटवर्क काफी मजबूत है। ऐसे में ईरान ऐसे लोगों को सजा देना चाहता है जो इजरायल को किसी भी तरह से मदद कर रहे थे।

एक ज्योति, नकाब कई… क्या दानिश पर मर मिटी थी पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाली भारत की यूट्यूबर? क्या पाकिस्तान ज्योति को भारत विरोधियों को परोस रहा था?

गाज़ी जिन्हे मुग़ल बादशाह बताया जाता है भारत पर कब्ज़ा करने अपने साथ फौज नहीं लाए थे क्योकि उनको मालूम था कि वहां बिकाऊ जयचन्द मौजूद हैं। इसी तरह ब्रिटिशर्स को मीर ज़ाफ़र मिल गए।  
यदि आपका सोशल मीडिया से वास्ता है तो शायद यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा (Youtuber Jyoti Malhotra) को जानते होंगे। शायद उसके चैनल ‘ट्रैवल विद जो (Travel with JO)’ का वीडियो भी देखा हो। अब खुलासा हुआ है कि यह ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान की जासूस है।

सोशल मीडिया से ही ज्योति ने नाम बनाया। सोशल मीडिया की गतिविधियों से ही वह एजेंसियों की रडार पर आई। उसका सोशल मीडिया प्रोफाइल खँगालते ही आपको एहसास हो जाएगा कि उसके लिए पाकिस्तान जाना और वहाँ के बड़े लोगों से मिल लेना कोई बड़ी बात नहीं थी।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि उसके पीछे किसका हाथ है? अब उसके ही एक वीडियो से पता चला है कि वह दिल्ली के पाकिस्तानी उच्चायोग में राजनयिक बनकर तैनात उस ISI जासूस एहसान उर रहीम उर्फ दानिश के सीधे संपर्क में थी, जिसे हाल ही में भारत ने देश छोड़ने का आदेश दिया था। दावा यह भी है कि दानिश पर ज्योति मर मिटी थी। यह भी कहा जा रहा है कि दानिश ही ज्योति के पाकिस्तान आने-जाने का खर्च उठाया करता था।

आश्चर्यजनक तौर पर ज्योति को पाकिस्तान का वीजा आसानी से मिल जाता था। वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज से उनके बगल में ऐसे खड़ी होकर बतियाती थी, जैसे गहरी यारी हो।

आश्चर्यजनक यह भी है कि जिस पहलगाम में हिंदुओं की इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर हत्या की थी, वहाँ की उसने अटैक से कुछ महीने पहले ही यात्रा की थी और वीडियो बनाए थे। पहलगाम अटैक के बाद एक वीडियो में उसने पीड़ितों और भारत सरकार को ही इसका जिम्मेदार ठहराने की कोशिश भी की थी।

 सोशल मीडिया पर ट्रैवल व्लॉगर ज्योति के कई चेहरे हैं। कभी वह लग्जरी लाइफ जीती नजर आती है। कभी वह मस्त​क पर चंदन किए धार्मिक स्थल की यात्रा करती दिखती है। लेकिन यह तथ्य बार-बार खटकता है कि हरियाणा के हिसार में 55 गज के एक घर में पली-बढ़ी लड़की अचानक से इतनी शान-शौकत वाली जिंदगी कैसे जीने लगी? भारत के दुश्मन मुल्क की हर जगह उसके पहुँच में कैसे आ गई?

दिल्ली में 20 हजार की नौकरी की, पिता कारपेंटर

ज्योति के यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो‘ के 3.77 लाख सब्सक्राइबर हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर उसे 1.31 लाख फॉलो करते हैं। उसके वीडियो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है इन्हें बनाने में मोटा खर्च हुआ होगा।

        दुबई घूमने गई ज्योति। यह तस्वीर 25 अक्टूबर 2024 की है। (फोटो साभार: Instagram-travelwithjo)

ज्योति हरियाणा की रहने वाली एक सामान्य घर की लड़की है। उसके पिता हरीश कुमार अभी भी सामान्य नौकरी करते हैं। यूट्यूबर ज्योति का हिसार की न्यू अग्रसेन कॉलोनी में सिर्फ 55 गज का घर है। इसमें तीन छोटे-छोटे कमरे बने हैं। पिता कारपेंटर की नौकरी करते हैं, मगर इस कमाई से घर नहीं चल पाता है। घर का खर्च चाचा की पेंशन से चलता था। ज्योति के माता-पिता का तलाक 20 साल पहले हो चुका है।

                       हरियाणा के हिसार स्थित अग्रेसन कॉलोनी में ज्योति का घर (साभार: DainikBhaskar)

कभी दिल्ली में ज्योति 20 हजार की नौकरी करती थी। कोरोना में नौकरी छूटी और वह हिसार लौट आई। इसके बाद उसने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया और अचानक से उसकी जिंदगी बदल गई।

सोशल मीडिया पर ‘धार्मिक-देशभक्त’ का नकाब

सोशल मीडिया पर ज्योति खुद को धार्मिक और देशभक्त दिखाने की पूरी कोशिश करती रही है। भारत के लगभग सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के वीडियो बनाए हैं। देशभक्ति गीतों पर तिरंगे के साथ रील्स भी पोस्ट की है। लेकिन विदेश जाते ही उसका नकाब उतर जाता था।  

पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर से लेकर भूटान के फर्टिलिटी टैंपल और ‘कंडोम कैफे‘ तक के उसने आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए हैं। इन वीडियो के थंबनेल भी अश्लील हैं।

  इस फोटो में ज्योति केरल एक होटल में हैं। तस्वीर इसी साल 19 फरवरी की है (साभार: Instagram-travelwithjo)

यूट्यूब चैनल पर पाकिस्तान के वीडियो की भरमार

ज्योति के यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो’ पर पाकिस्तान के कई वीडियो हैं। इनमें वहाँ की बस, ट्रेन, बाजार और संस्कृति को दिखाया गया है। इनमें ‘Indian Girl in Pakistan‘, ‘Indian Girl Exploring Lahore‘,’Indian Girl Ek Qatal Raaz Temple‘, ‘Indian Girl Rides Luxury Bus in Pakistan‘नाम से कई वीडियो हैं।

पाकिस्तान में कैसे बनाया नेटवर्क?

ज्योति ने पुलिस पूछताछ में कबूला है कि वह साल 2023 में पाकिस्तान का वीजा लगवाने दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन गई थी। वहाँ उसकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई। दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और बातचीत शुरू हो गई। इसके बाद ज्योति ने दो बार पाकिस्तान की यात्रा की। वहाँ दानिश के जानकार अली अहयान से मिली, जिसने उसके ठहरने और घूमने-फिरने का इंतजाम किया।

पाकिस्तान में अली अहयान ने उसे पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया अधिकारियों से मिलवाया। यहीं पर ज्योति की मुलाकात शाकिर और राणा शहबाज से भी हुई। शाकिर का नंबर उसने भारत लौटकर ‘जट रंधावा’ नाम से सेव कर लिया ताकि किसी को शक न हो। भारत लौटने के बाद वह व्हाट्सएप, स्नैपचैट और टेलीग्राम जैसे ऐप्स से लगातार पाकिस्तान से संपर्क में रही और देशविरोधी सूचनाएँ साझा करती रही।

दानिश की इफ्तार पार्टी की ‘खास मेहमान’

साल 2024 में ज्योति को पाकिस्तान हाई कमीशन से इफ्तार पार्टी का खास निमंत्रण मिला। वहाँ वह चीनी अधिकारियों से भी मिली। ज्योति ने इस कार्यक्रम का वीडियो खुद शेयर किया था, जिसमें वह दानिश के काफी नजदीक नजर आई। दानिश ने उसे पार्टी में रिसीव किया। वहाँ मौजूद अन्य मेहमानों से परिचय कराया और अपनी बीवी से भी मिलवाया।
इस 15 मिनट के वीडियो में ज्योति पाकिस्तान की व्यवस्था की तारीफ करती दिख रही है। वहाँ मौजूद भारतीयों से बातचीत कर रही है और पूछ रही है कि पाकिस्तान जाकर कैसा अनुभव रहा। आखिर में वीडियो का समापन दानिश और ज्योति मिलकर करते हैं। इसमें दानिश ने पार्टी में आने के लिए ज्योति का आभार भी जताया।
                 इफ्तार पार्टी में दानिश के साथ यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा (साभार: Youtube/Travel with JO)
ज्योति की पाकिस्तान हाई कमीशन में तैनात दानिश से बार-बार मुलाकात होती रही। पूछताछ में यह सामने आया कि दानिश, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का एजेंट था। भारत सरकार ने 13 मई 2025 को उसे अवांछित व्यक्ति घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया था।

दानिश के हाथों में खेल रही थी ज्योति?

दानिश का मकसद सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान की अच्छी छवि दिखाना और भारत विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देना था। इसी काम में उसने ज्योति का इस्तेमाल किया। ज्योति ने अपने सोशल मीडिया चैनलों पर ऐसे वीडियो और पोस्ट डाले हैं जिनका मकसद पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाना है।
खुलासा हुआ कि दानिश भारत के कई अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के संपर्क में भी था, जिन्हें उसने पैसे और सुविधाएँ देकर अपने पक्ष में किया। खासकर पहलगाम हमले के बाद जब भारत में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा था, तब दानिश की रणनीति थी कि सोशल मीडिया पर पाकिस्तान को शांतिप्रिय देश बताया जाए। ज्योति ने इस प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

जब मरियम नवाज की बगलगीर बनी ज्योति

पाकिस्तान पंजाब की पहली महिला मुख्यमंत्री मरियम नवाज का इंटरव्यू भी ज्योति ले चुकी है। गुरुद्वारा करतारपुर साहिब कॉरिडोर में मरियम नवाज के बगल में वह दिखाई पड़ती है।
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब कॉरिडोर में सीएम मरियम नवाज का इंटरव्यू लेती ज्योति (साभार: Youtube/Travel with JO)
दोनों काफी सहज अंदाज में बातचीत करते नजर आते हैं। 42 मिनट का यह वीडियो अप्रैल 2024 का है, जिसे 7.53 लाख दर्शक देख चुके हैं और करीब दो हजार कमेंट आए हैं। वीडियो में ज्योति कहती नजर आ रही कि वह यहाँ दूसरी बार आई हैं और यहाँ आकर उन्हें बहुत अच्छा महसूस होता है।

पाकिस्तान-चीन यात्रा के बाद हुआ शक

साल 2024 में ज्योति ने दो महीने के भीतर पाकिस्तान और चीन का दौरा किया। इसके बाद वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आई। वह 17 अप्रैल को पाकिस्तान गई। 15 मई को भारत वापस लौटी। पाकिस्तान से लौटने के 25 दिन बाद ही 10 जून 2024 को वह चीन चली गई। 09 जुलाई 2024 तक चीन में रही। फिर वहीं से 10 जुलाई को नेपाल में काठमांडू पहुँच गई।
   चीन की यात्रा के दौरान फ्लाइट में एयर होस्टेस के साथ ज्योति ने ली तस्वीर (साभार:  Instagram-travelwithjo)
इन यात्राओं के देखते हुए जाँच एजेंसी के अधिकारी अलर्ट हो गए। वह ज्योति को ट्रैक करने लगे। पुख्ता सबूत मिलते ही 15 मई 2025 को सुबह 9 बजे पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा। पिता और चाचा के मोबाइल जब्त कर लिए। ज्योति को थाने लेकर आई और पूछताछ की। रात 9 बजे उसे घर वापस भेज दिया। 17 मई को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

ISI के संपर्क में थी ज्योति?

फिलहाल ज्योति को पाँच दिन की रिमांड में लेकर पूछताछ की जा रही है। हिसार DSP कमलजीत ने बताया कि ज्योति पर अधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और BNS 152 के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा उसके मोबाइल और लैपटॉप से कई संदिग्ध सामग्री मिली है।
SP शशांक कुमार सावन ने पुष्टि की कि ज्योति ISI के संपर्क में थी। उसकी आय और खर्च में भारी अंतर है। बैंक खाते और सोशल मीडिया गतिविधियाँ खंगाली जा रही हैं। कुछ और सोशल मीडिया यूज़र्स भी जाँच के घेरे में है।

दिल्ली : “AAP” ही निकले असली जासूस, उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर जासूसी कराने का आरोप, एलजी ने केस दर्ज करने की दी मंजूरी

सियासत के अखाड़े में उतरने से पूर्व सोनिया गाँधी की सलाहकार समिति में रहे अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह आदि सियासत के हर हतकंडे सीखकर आये हैं। किसी की कब और कैसे जासूसी करनी है सब तरह का ज्ञान अर्जित कर उतरे हैं। स्मरण हो, सोनिया गाँधी किस तरह प्रणव मुख़र्जी की गुप्त कैमरों से जासूसी कर रही थी। उस समय केजरीवाल गिरोह सोनिया समिति के सदस्य थे। जब प्रणव दा को शक होने पर देखा तो दीवारों पर जगह-जगह कुछ चिपका हुआ था, जिसे यह कह दिया था कि चिनगाम थी। अब कोई पूछे क्या किसी मंत्रालय या मंत्री के निवास जाने वाले चाहे वह कोई भी हो-आम नागरिक से लेकर उच्च अधिकारी- क्या इतने फूहड़ होते है, जो चिनगाम कहीं भी थूक देंगे?  

दिल्ली की केजरीवाल सरकार एक के बाद एक नए आरोपों से घिरती जा रही है। अब मुख्यमंत्री केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर फीडबैक यूनिट के जरिए नेताओं की जासूसी कराने का आरोप लगा है। इससे केजरीवाल सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने जासूसी कांड की आगे जांच करने और मनीष सिसोदिया के खिलाफ केस दर्ज करने की मंजूरी दे दी है। इससे सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। बीजेपी केजरीवाल सरकार पर काफी हमलावर है और सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रही है।

अब ज्वलंत प्रश्न यह उत्पन्न होता कि एक चुनाव सिर पर होने पर ही क्यों इस तरह के गंभीर मुद्दे  सामने आते है, और चुनाव संपन्न होते ही ठंठे बस्ते में; चाहे वह सत्येंद्र जैन विवाद हो, दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे में दोषी आम आदमी पार्टी के नेता, या फिर शराब घोटाला आदि, क्यों नहीं गंभीरता से जाँच कर दोषियों को सजा दी जाती।   

बीजेपी ने तस्वीर शेयर कर सीएम केजरीवाल और डिप्टी सीएम सिसोदिया पर निशाना साधा है। दिल्ली बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक तस्वीर शेयर किया गया है। इस तस्वीर में दिल्ली के सीएम केजरीवाल और डिप्टी सीएम सिसोदिया को जासूस के रूप में पेश किया गया है। इस तस्वीर को शेयर करते हुए बीजेपी ने लिखा है – “AAP” ही निकले असली जासूस !

दरअसल सीबीआई ने दिल्ली सरकार की ‘फीडबैक यूनिट’ पर जासूसी का आरोप लगाते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल से डिप्टी सीएम सिसोदिया के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद उपराज्यपाल सक्सेना ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 के तहत सिसोदिया के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति दे दी। सीबीआई को शुरुआती जांच में सबूत मिले हैं कि ‘फीडबैक यूनिट’ ने राजनीतिक खुफिया जानकारी इकट्ठा की थी।

यह जानकारी सामने आने के बाद बीजेपी ने दिल्ली सरकार के खिलाफ कई पोस्टर जारी किए हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस फीडबैक यूनिट को हेड कर रहे हैं और ये अपनी सुविधा के मुताबिक दिल्ली वासियों की जासूसी करा रहे हैं। बीजेपी ने दोनों नेताओं को जासूस करार देते हुए फरवरी 9 को मुख्यमंत्री केजरीवाल के सरकारी आवास के सामने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने 2015 में विजिलेंस विभाग को मजबूती देने के लिए फीड बैक यूनिट का गठन किया था। तब यूनिट ने 20 अधिकारियों के साथ काम करना शुरू किया था। आरोप है कि फीड बैक यूनिट ने फरवरी 2016 से सितंबर 2016 तक राजनीतिक विरोधियों की जासूसी की। यूनिट ने न सिर्फ बीजेपी के बल्कि AAP से जुड़े नेताओं पर भी नजर रखी। इतना ही नहीं यूनिट के लिए एलजी से भी कोई अनुमति नहीं ली गई थी। यूनिट ने तय कामों के अलावा राजनीतिक खुफिया जानकारी भी इकट्ठा की थी।