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उत्तर प्रदेश : कांग्रेस की ‘ब्राह्मण पॉलिटिक्स’ को तगड़ा झटका: BJP में जितिन प्रसाद

                                             कांग्रेस छोड़ भाजपा सदस्यता ग्रहण करते जितिन प्रसाद 
एक तरफ कांग्रेस मोदी विरोधी पार्टियों से सांठगांठ कर योगी और मोदी को हटाने के लिए परिश्रम कर रही हैं, तो विपरीत इसके लोग कांग्रेस को ही छोड़ रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि मोदी विरोध भी बेसिर-पैर का हो रहा है, वास्तविक मुद्दे उठाने का किसी में साहस नहीं। क्योकि बीजारोपण तो मोदी विरोधियों ने ही किया था। दिल्ली में भी कांग्रेस लगभग हाशिए पर ही है, कुछ भाजपा की शरण में तो कुछ आम आदमी पार्टी में। ठीक वही स्थिति अब उत्तर प्रदेश में भी हो गयी है। जैसाकि कयास लगाए जा रहे हैं कि 2024 चुनाव आते-आते कांग्रेस की स्थिति किसी क्षेत्रीय पार्टी जैसी ही होने वाली है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि 2029 के चुनाव आते-आते कांग्रेस की राष्ट्रीयता ही समाप्त न हो जाए। क्योकि इस समय कांग्रेस राष्ट्रीय बनाए रखने के हाशिये के बहुत निकट आती जा रही है। 

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े नेता जितिन प्रसाद भाजपा में शामिल हो गए हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इसे बड़े फेरबदल के रूप में देखा जा रहा है। दोपहर में भाजपा मुख्यालय में जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने का कार्यक्रम हुआ। शाहजहाँपुर में अच्छी पैठ रखने वाले जितिन प्रसाद फ़िलहाल दिल्ली में ही थे।

इस अवसर पर जितिन प्रसाद ने कहा कि उनकी तीन पुश्तें कांग्रेस से जुड़ी रही हैं, इसीलिए उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद ये महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 8-10 वर्षों में उन्हें महसूस हुआ है कि एक ही पार्टी ऐसी है जो पूरी तरह राष्ट्रीय है और वो है भारतीय जनता पार्टी। जितिन प्रसाद ने कहा कि अन्य राजनीतिक दल क्षेत्रीय हैं, लेकिन भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है। उन्होंने कहा कि यही एक पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कठिन परिस्थिति में देशहित के लिए खड़े हैं।

47 वर्षीय जितिन प्रसाद कांग्रेस के उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने आलाकमान को पत्र लिख कर संगठन में चुनाव कराने और बदलाव की माँग की थी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के ही कुछ कांग्रेस नेता उनके पीछे पड़ गए थे। जितिन प्रसाद को ब्राह्मणों के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने के लिए भी जाना जाता है। हाल ही में उन्होंने जब ‘ब्रह्म चेतना संवाद’ कार्यक्रम की घोषणा की थी तो उनकी ही पार्टी ने खुद को इससे अलग कर लिया था।

कांग्रेस ने कहा था कि इससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं है और ये जितिन प्रसाद का निजी मसला है। जितिन प्रसाद 2004 में शाहजहाँपुर और 2009 में धौरहरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। ये क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जिले लखीमपुर खेरी और सीतापुर में स्थित है। पहले देहरादून के दून स्कूल और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज शाहजहाँपुर ऑफ कॉमर्स से शिक्षा प्राप्त करने वाले जितिन यूपी के बड़े कांग्रेस नेता रहे जितेन्द्र प्रसाद के पुत्र हैं।

कांग्रेस पार्टी में बतौर उपाध्यक्ष काम करने वाले जितेन्द्र प्रसाद की बात करें तो भारत के दो प्रधानमंत्रियों राजीव गाँधी और पीवी नरसिंहा राव -के राजनीतिक सलाहकार रह चुके थे। 2001 में 62 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था। 2000 में उन्होंने सोनिया गाँधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार मिली थी। शाहजहाँपुर से 4 बार सांसद रहे जितेंद्र प्रसाद राज्यसभा और यूपी विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने अगस्त 2020 में ही ट्वीट कर के आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस में जितिन प्रसाद को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है, वो भी आधिकारिक रूप से। उन्होंने तभी आगाह किया था कि कांग्रेस को अब भाजपा को निशाना बनाते हुए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करनी चाहिए, लेकिन वो अपनों को ही निशाना बनाने में व्यस्त है। आज उनकी चेतावनी का असर दिखा और एक बड़े नेता ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया।

जितिन प्रसाद को केंद्रीय केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भाजपा की सदस्यता दिलाई। यूपीए-2 में जितिन प्रसाद को पेट्रोलियम और सड़क-परिवहन जैसे अहम मंत्रालय की बतौर राज्य मंत्री जिम्मेदारी मिली थी। लेकिन, 2014 लोकसभा चुनाव में मिली हार ने उनको राजनीतिक गलियारे से किनारे के दिया था। प्रभारी प्रियंका गाँधी और प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू द्वारा गठित समितियों में उन्हें जगह नहीं दी गई थी।

कई बार सार्वजनिक रूप से भी उन्होंने पार्टी के रवैये के प्रति नाराजगी जताई थी। पार्टी की लखीमपुर खीरी यूनिट ने उन्हें निष्काषित करने का प्रस्ताव भी भेजा था। 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल में पार्टी का प्रभारी बना कर उत्तर प्रदेश से दूर कर दिया गया था, जिससे वो नाराज थे। हालाँकि, तब उन्होंने भाजपा में शामिल होने वाले सवाल को ‘काल्पनिक’ करार दिया था। कभी उनके पिता ने कांग्रेस में वंशवाद को लेकर आवाज़ उठाई थी। ब्रेन हेमरेज के कारण उनकी मृत्यु हुई थी।

दरअसल, सीताराम केसरी को बेइज्जत कर पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने के बाद से कांग्रेस का ग्राफ निरंतर नीचे ही आ रहा है, जिसे परिवार भक्त अभी तक नहीं समझ रहे। वह मात्र एक गुलाम बन परिवार की जी-हुजूरी में लगे हुए हैं। परिवार भक्तों की ऑंखें तब भी नहीं खुल रही, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे महामहिम प्रणब मुख़र्जी ने अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि सोनिया हिन्दू विरोधी एवं गुलाम पसंद है। जो परिवार की जी-हजूरी से मना करते हैं, उन्हें किसी न किसी रूप में अपमानित किया जाता है।  

मध्य प्रदेश : किसानों के कर्जे माफ़ न होने पर राहुल गाँधी को माफी माँगनी चाहिए : लक्ष्मण सिंह, कांग्रेस नेता

दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहते हैं, जब बुरा वक़्त आता है, तो साया भी साथ छोड़ देता है। लगता है कांग्रेस भी उसी दौर से गुजर रही है। कोई पार्टी को छोड़ रहा है तो कोई पार्टी में ही रहकर मोदी का गुणगान कर रहा है। 
मध्यप्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने किसानों की कर्जमाफी के आधार पर राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया है। दरअसल, लक्ष्मण सिंह ने आवाज उठाई है कि राहुल गाँधी को मध्य प्रदेश के किसानों से माफी माँगनी चाहिए, क्योंकि वो अपने कर्ज माफी के वादे को पूरा करने में असफल रहे, जिसके बलबूते पर उन्होंने प्रदेश में सरकार बनाई थी।
Image result for rahul gandhiउन्होंने कहा, “चूँकि वादा पूरा होने में अभी समय है, इसलिए राहुल गाँधी को 10 दिनों के भीतर सभी किसानों के कर्ज माफ करने की विफलता के लिए माफी माँगनी चाहिए।” लक्ष्मण सिंह के मुताबिक इस तरह के वादे कभी नहीं किए जाने चाहिए।
5 बार सांसद और 2 बार विधायक रह चुके लक्ष्मण सिंह ने कहा- अब समय है कि आगे वादे करने की बजाय, उचित समय बताया जाए कि किसानों का पूरा कर्ज कब माफ कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी लक्ष्मण सिंह ने इसी मुद्दे पर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव के दौरान राहुल गाँधी को 10 दिनों के भीतर क़र्ज़माफ़ी का वादा नहीं करना चाहिए था।

आँकड़े गिनाते हुए कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने कहा कि 45 हज़ार करोड़ की क़र्ज़ माफ़ी आसान काम नहीं है। लक्ष्मण सिंह के अनुसार, इस वर्ष किसानों की क़र्ज़ माफ़ी किसी भी क़ीमत पर नहीं हो सकती।
इस बयान के सुर्खियों में आने के बाद इसे मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी बीच मध्य प्रदेश के एक मंत्री ने ही उनके भाई दिग्विजय सिंह पर परदे के पीछे से सरकार में दखल देने का आरोप लगाया है। इसके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के लिए उनके समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, और फिलहाल कमलनाथ मध्य प्रदेश में सरकार और संगठन, दोनों के मुखिया बने हुए हैं। इसलिए ऐसे में जब दिग्विजय, सिंधिया और कमलनाथ के त्रिकोण में मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत उलझी हुई है, तब लक्ष्मण सिंह का बयान मायने रखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जनसंख्या, जितिन प्रसाद
कांग्रेस के जितिन प्रसाद ने मोदी का समर्थन करते पार्टी को याद दिलाया 1998 AICC का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताने के बाद अब पूर्व मंत्री और कांग्रेस के युवा लेकिन प्रसिद्ध नेता जितिन प्रसाद ने भी इसी तर्ज पर जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। जितिन प्रसाद के पीएम मोदी की बात को समर्थन देने के बाद कांग्रेस में हलचल बढ़ गई है। उन्होंने कहा है कि अब देश में दो बच्चों के मानक पर व्यापक बहस होनी चाहिए। साथ ही इस संबंध में सरकार को कानून लेकर आना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी की मूलभूत जरूरतों को सुनिश्चित किया जा सके।
जितिन प्रसाद ने इस दौरान देशहित का हवाला देते हुए इस मुद्दे को राष्ट्रीय मुद्दा बताया। उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस के लोगों AICC के उस प्रस्ताव की भी याद दिलाई, जब 1998 में कांग्रेस ने पंचमढ़ी शिविर में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर व्यापक बहस और पॉलिसी बनाने की बात कही थी।
कांग्रेस में तब फैसला लिया गया था कि 1 जनवरी 2000 के बाद से किसी भी कांग्रेस नेता के अगर 2 बच्चे से ज्यादा होते हैं तो उन्हें न तो पार्टी में कोई पद दिया जाएगा और न ही उन्हें चुनाव में टिकट दिया जाएगा।
इसके अलावा जितिन ने अपने दूसरे ट्वीट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए लिखा, “शुरुआत में कांग्रेस कार्यकर्ता दो बच्चों के मानक पर जनसंख्या नियंत्रण उपायों को अपनाने के लिए 10 परिवारों को प्रेरित करें।
पीछे भी इस संबंध में 1 सितंबर को जितिन प्रसाद ने ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चर्चा कराने की बात शुरू की थी और अब एक बार फिर उन्होंने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए आवाज उठाई है।


जितिन ने इस संबंध में मीडिया से बातचीत करते हुए ये भी कहा है कि ये कहना गलत है कि जनसंख्या नियंत्रण पीएम मोदी का आइडिया है, क्योंकि 1998 में इसे उनके वरिष्ठों ने सोचा था और डॉक्यूमेंट किया था। लेकिन बता दें कि अभी हाल फिलहाल में जनसंख्या को लेकर चिंता प्रधानमंत्री मोदी के अलावा किसी और पार्टी द्वारा नहीं जताई गई है, इसलिए प्रसाद की गुहार को पीएम मोदी की चिंता के तर्ज पर ही विस्तार के रूप देखा जा रहा है।