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‘केरल CM विजयन की बेटी वीना और मोहम्मद रियास की शादी नाजायज’: मुस्लिम लीग

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, रियास-वीना की शादी और कल्लई (बाएँ से दाएँ)
केरल में कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (Indian Union Muslim League – IUML) के नेता अब्दुलर्रहमान कल्लई ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीना की PWD मंत्री मोहम्मद रियास से शादी को अवैध संबंध बताया है। गुरुवार (9 दिसंबर) को कोझिकोड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कल्लई ने यह विवादास्पद बयान दिया। इस दौरान उनके समर्थकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ जातिवादी नारे भी लगाए।

राज्य की सीपीएम सरकार के खिलाफ बोलते हुए IUML के राज्य सचिव कल्लई ने कहा, “डीवाईएफआई (डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया) के पूर्व अध्यक्ष (मोहम्मद रियास) मेरे क्षेत्र के पुथियापला (दूल्हे) हैं। उनकी पत्नी कौन है? यह भी कोई शादी है? यह तो अवैध संबंध है। ऐसा कहने का हम में साहस होना चाहिए। हम में सीएच मोहम्मद कोया जैसा साहस होना चाहिए।” दरअसल, कोया आईयूएमएल के नेता और वे राज्य के मुख्यमंत्री भी थे।

वीना और रियास ने पिछले साल जून में केरल के तिरुवनंतपुरम में शादी की थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी। शादी के दौरान रियास डीवाईएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। रियास ने इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में कोझीकोड की बेपोर विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने और अपने ससुर विजयन की अध्यक्षता वाले राज्य मंत्रिमंडल में पीडब्ल्यूडी मंत्री के रूप में शामिल हुए।

दरअसल, सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों का जिम्मा राज्य लोक सेवा आयोग को सौंपने का निर्णय लिया था। इसको लेकर राज्य भर में मुस्लिम और उनके संगठन विरोध कर रहे थे। इस विरोध को भूनाने के लिए कल्लई ने इस रैली का आयोजन किया था। इस दौरान उन्होंने आईयूएमएल कार्यकर्ताओं से इस शादी को अवैध कहने का साहस दिखाने की अपील की। कल्लई के ऐसा कहने के बाद रैली में शामिल मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री विजयन के खिलाफ जमकर जातिवादी नारे लगाए।

हालाँकि, विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री विजयन ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि सरकार के इस कदम को जल्दी में लागू नहीं किया जाएगा। आईयूएमएल समर्थकों और अन्य मुस्लिम संगठनों से मुलाकात के बाद विजयन ने कहा था कि भर्ती पर यथास्थिति बनी रहेगी।

कल्लई का बयान देने के बाद उनकी चारों तरफ निंदा होने लगी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने उन्हें खूब लताड़ा। वहीं, डीवाईएफआई ने भी रियास और वीना के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के लिए मुस्लिम लीग की आलोचना की। चारों तरफ से अपनी दुर्गति होती देख कल्लई ने शुक्रवार (10 दिसंबर) को माफी माँग ली। अपने बयान पर खेद जताते हुए कल्लई ने कहा कि वह अपने भाषण में केवल निजी जीवन के धार्मिक पक्ष का जिक्र कर रहे थे। इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।

केरल हाईकोर्ट ने पी विजयन सरकार से पूछा-मदरसा शिक्षकों को पेंशन क्यों दी जा रही है ?

राजनीतिक पार्टियां द्वारा सेकुलरिज्म का तुष्टिकरण के चलते किस प्रकार दुरूपयोग किया जा रहा है, केरल हाई कोर्ट ने इस पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। आज मुस्लिम वोट हथियाने के लिए इमामों को वेतन और मदरसा शिक्षकों को पेंशन आदि से अपनी ओर आकर्षित करने में लगी हुई हैं, लेकिन जब वही सुविधा हिन्दू मंदिरों से महंतों को देने की बात होती है, तुरंत साम्प्रदायिकता का रंग दे दिया जाता है। 
केरल हाई कोर्ट ने पिनराई विजयन की अगुवाई वाली लेफ्ट सरकार से पूछा है कि वह मदरसा शिक्षकों को पेंशन देते हुए एक धार्मिक गतिविधि का वित्तपोषण क्यों कर रही है। हाई कोर्ट ने ये टिप्पणी 1 जून को राज्य में मदरसा शिक्षकों को पेंशन प्रदान करने के सरकार के पहले के फैसले के खिलाफ एक याचिका पर विचार करते हुए पूछा। इसके साथ ही अदालत ने राज्य से यह स्पष्ट करने को कहा कि उसने केरल मदरसा शिक्षक कल्याण कोष में किसी प्रकार का कोई योगदान दिया है या नहीं?

उच्च न्यायालय के जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने लोकतंत्र, समानता, शाँति और धर्मनिरपेक्षता के लिए नागरिक संगठन के सचिव मनोज की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश जारी किया। इसमें केरल मदरसा शिक्षक कल्याण कोष अधिनियम, 2019 को रद्द करने की माँग की गई है। राज्य सरकार ने इस अधिनियम को मदरसा शिक्षकों को पेंशन समेत दूसरे लाभ देने के लिए पारित किया था।

‘मदरसों को फंडिंग धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ’

याचिकाकर्ता के वकील सी राजेंद्रन ने हाई कोर्ट में बताया कि उस अधिनियम को पढ़ने के बाद ये स्पष्ट हो गया है कि ये मदरसे केवल कुरान और इस्लाम से जुड़ी पाठ्यपुस्तकों से जुड़ी शिक्षाएँ देते हैं। ऐसे में इसके लिए भारी मात्रा में फंडिग करना पूरी तरह से असंवैधानिक और संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

पीठ ने कहा कि यह देखा जा रहा है कि केरल में जो मदरसे चल रहे हैं, वे उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलाए जा रहे मदरसों से अलग हैं जो कि धर्मनिरपेक्षता के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी देते रहे हैं। कोर्ट ने कहा, “केरल में ये मदरसे विशुद्ध रूप से एक धार्मिक गतिविधि में शामिल हैं। एक धार्मिक गतिविधि के लिए राज्य द्वारा धन का सहयोग करने का क्या कारण है?”

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि राज्य सरकार मदरसों की इस योजना के लिए पैसा दे रही है। यह कल्याण कोष मुख्य रूप से एक सदस्य को एक निश्चित राशि और पेंशन के भुगतान के लिए है, जिसने अपने 60 साल की आयुसीमा पूरी कर ली हो। इसके अलावा कम से कम पाँच साल के लिए मदरसे में अपना योगदान दिया हो।

इजरायल में सौम्या की मौत पर केरल CM की श्रद्धांजलि… फिर किया पोस्ट एडिट: BJP ने लगाया ‘कट्टरपंथियों’ से डरने का आरोप

                         केरल की सौम्या संतोष (बाएँ) की इजरायल में हमास के रॉकेट हमले में मौत हो गई थी।
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष में केरल की एक महिला की मौत के बाद राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के महासचिव ओमान चरमपंथियों के डर से अपनी फेसबुक पोस्ट में बदलाव करने को मजबूर होना पड़ा।

बीजेपी नेता शोभा सुरेंद्रन ने ट्वीट किया कि केरल में स्थिति इतनी खतरनाक हो गई है कि दोनों नेताओं को एक मलयाली की हत्या पर दुख व्यक्त करते हुए अपनी पोस्ट एडिट करनी पड़ी क्योंकि वे धार्मिक कट्टरपंथियों से डरते हैं।

बीजेपी ने लेफ्ट और कॉन्ग्रेस पर लगाया धार्मिक कट्टरपंथियों से डरने का आरोप

संघ परिवार ने आरोप लगाया कि सीएम पिनराई विजयन ने सौम्या संतोष की हत्या पर की गई अपनी पोस्ट से एक पैराग्राफ हटा दिया। वहीं चांडी की पहले की पोस्ट में कहा गया था कि ‘चरमपंथियों’ के हमले में सौम्या मारी गई थीं।’ लेकिन बाद में सोशल मीडिया में विरोध बढ़ने के बाद ‘चरमपंथ’ शब्द को हटा दिया गया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुदंरन ने पूछा कि क्या सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष सौम्या की हत्या पर इसलिए चुप हैं क्योंकि हमास चरमपंथी उनके सहयोगी हैं।

सोशल मीडिया में फिलिस्तीन के समर्थकों ने कॉन्ग्रेस को याद दिलाया कि इंदिरा गाँधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत के फिलिस्तीन के साथ कितने करीबी संबंध थे। उन्होंने इंदिरा के साथ फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के नेता यासिर अराफात की पुरानी तस्वीरें पोस्ट कीं।

सीपीएम ने की इजरायल की निंदा, फिलिस्तान के समर्थन की अपील

वहीं सीपीएम पोलित ब्यूरो ने फिलिस्तीन पर इजरायल के हमले के खिलाफ एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, ”गाजा पट्टी पर इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमले कई फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत का कारण बने।”
बयान में कहा गया है, “इजरायल फिलिस्तीनियों पर हमला करके पूर्वी यरुशलम के पूर्ण कब्जे की ओर बढ़ रहा है, जो यहाँ यहूदी बस्तियों के लिए रास्ता बनाने की कोशिशों का विरोध कर रहे थे।” इसमें कहा गया है कि “नेतन्याहू, जो लगातार इजरायल चुनावों में बहुमत हासिल करने में विफल रहे थे, उन्होंने अपने तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए ये हमले शुरू किए।”
बयान में कहा गया है, ”सीपीएम इन कृत्यों की निंदा करती है और भारत सरकार से फिलिस्तीन के लोगों का समर्थन करने की माँग की।” वहीं मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को सौम्या के शव को वापस लाने के लिए खत लिखा।
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इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा – ईद से पहले ‘पूरी तरह शांत कर देंगे’ ; फिलिस्तीनी आतंकी ठिकाने का 14
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केरल में मुस्लिम संगठनों ने गाजा क्षेत्र में हिंसा बढ़ने के बाद अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। कई संगठनों ने ईद-उल-फितर मनाते हुए फिलिस्तीन के लोगों के साथ खड़े होने की अपील की है। भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अदनान अबुल हयाजा, फिलिस्तीन के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए ईद-उल-फितर के दिन कोझिकोड में मुस्लिम यूथ लीग द्वारा आयोजित किए जाने वाले ऑनलाइन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।(साभार)

केरल चुनाव : कम्युनिस्ट सुलेमान द्वारा 19 साल की पाकिस्तानी बीवी की जानकारी छिपाने पर केरल के मुख्यमंत्री चुप क्यों?

पाकिस्तानी बीवी और केटी सुलेमान
(Image: V Muraleedharan/VMBJP
)
कोंडोट्टी में हुई चुनाव नामांकन की धोखाधड़ी के संबंध में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की चुप्पी पर विदेश मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने उनकी आलोचना की। कई रिपोर्ट्स के अनुसार सीपीआईएम समर्थित केटी सुलेमान हाजी ने केरल विधानसभा चुनाव के अपने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी नहीं दी। सुलेमान की दूसरी बीवी एक पाकिस्तानी है।

मातृभूमि में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च को चुनाव आयोग ने केटी सुलेमान हाजी का नामांकन आगामी जाँच तक रोक दिया क्योंकि वह अपनी दूसरी बीवी की जानकारी देने में असफल रहे।

मुस्लिम लीग के नेताओं ने सुलेमान के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी दो शादियाँ हो चुकी हैं और उसकी दूसरी बीवी विदेश में है। इन आरोपों के साथ दुबई में हुए सुलेमान के निकाह के कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। उनकी दूसरी बीवी हीरा मोहम्मद सफदर है जो रावलपिंडी, पाकिस्तान की निवासी हैं।

 

अपने ट्वीट में मुरलीधरन ने कहा, “केटी सुलेमान हाजी, कोंडोट्टी के सीपीआईएम समर्थित प्रत्याशी, जिन्होंने नामांकन में अपनी दूसरी बीवी की जानकारी छुपाई जो कि एक 19 वर्षीय पाकिस्तानी महिला है। स्वयं को लिबरल कहने वाले पिनाराई विजयन अब खुद चुप हैं, क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है?”

वे आगे कहते हैं कि केरल की जनता इस प्रश्न का उत्तर चाहती है जबकि एक प्रत्याशी ने विदेशी नागरिक की पहचान छुपाई है।

केरल में 6 अप्रैल को 140 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोजित होने वाले हैं। चुनाव परिणाम 2 मई को घोषित किया जाएगा।


NIA का खुलासा : UAE दूतावास की सील-राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर आतंक के लिए 10 महीने में 150 किलो सोने की तस्करी

150 किलो सोने की तस्करीराष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल सोना तस्करी मामले में आतंकी गतिविधि की संलिप्तता की आशंका जाहिर की है। NIA ने खुलासा किया है कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने में नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में कहा कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, “कई एजेंसियों द्वारा की गई शुरुआती जाँच से पता चला है कि गिरोह सितंबर 2019 से सोने की तस्करी कर रहा था। उन्होंने अब तक लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की थी। संदिग्धों से पूछताछ से उनके तौर-तरीके और अन्य लोगों पर प्रकाश डाला जा सकता है।”
एनआईए कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2020) को प्रमुख संदिग्धों स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर को 21 जुलाई तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। एनआईए ने मामले में दोनों को हिरासत में लेने की माँग की थी।
एनआईए ने केरल हाईकोर्ट को बताया था कि राजनयिक के सामान के जरिए सोने की तस्करी करने की कोशिश करने वाली महिला स्वप्ना सुरेश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हिरासत के आवेदन को आगे बढ़ाते हुए, एजेंसी ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक जाँच की थी और पाया था कि तस्करी का सोना आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता था। एनआईए के अनुसार, एक विस्तृत जाँच की आवश्यकता है क्योंकि इसमें भारत-यूएई द्विपक्षीय संबंध शामिल हैं। यूएई ने भी इस घटना की जाँच शुरू की है।
कोच्चि स्थित एनआईए अदालत को सूचित किया गया कि स्वप्ना सुरेश और सरिथ, जो पहले यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे, ने राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में सीखा और सोने की तस्करी करने के लिए इसे मॉडस ऑपरेंडी के रूप में इस्तेमाल किया।
अदालत की कार्यवाही के दौरान, एक अभियुक्त संदीप नायर ने दावा किया कि खेप को यूएई के राजनयिक को संबोधित किया गया था जिसका नाम राशिद अल शिमिली है। उन्होंने सवाल किया कि राजनयिक की भूमिका की जाँच क्यों नहीं की जा रही है।
सोने की तस्करी के मामले में रविवार (12 जुलाई, 2020) को सीमा शुल्क विशेष जाँच दल द्वारा मलप्पुरम स्थित व्यवसायी के टी रमीज की गिरफ्तारी से जाँच में और तेजी आने की उम्मीद है।
केरल में सोने की तस्करी के रैकेट के लिंचपिन माने जाने वाले रमीज को रविवार(12 जुलाई, 2020) की रात में पेरिन्थलम्ना के पास वेटाठूर में उसके निवास से गिरफ्तार किया गया था।
कस्टम अधिकारी के अनुसार, रमीज की गिरफ्तारी सोने की तस्करी मामले की जाँच की तेजी के लिए महत्वपूर्ण थी। इसने राज्य पर आरोप लगाया है कि तस्करी के रैकेट में एक अन्य प्रमुख खिलाड़ी स्वप्ना सुरेश का केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कार्यालय से घनिष्ठ संबंध है।
रमीज को एक निवेशक और राज्य में सोने की तस्करी का वितरक कहा जाता है और कस्टम अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि उसकी हिरासत में पूछताछ से सोने की तस्करी रैकेट में निवेशकों का ब्योरा मिल सकता है। इसके साथ ही तस्करी के समन्वय में शामिल प्रमुख कर्मी और स्वप्ना सुरेश एवं संदीप नायर की भागीदारी केे बारे में खुलासा हो सकता है।
स्वप्ना और सरिथ दोनों यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे और अज्ञात कारणों के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, उन्हें वहाँ काम करने के दौरान राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में पता चल गया था। बाद में, उन्होंने संदीप सहित अन्य संदिग्धों के साथ साजिश रची और 2019 में सोने की तस्करी शुरू कर दी।
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राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल में बड़े पैमाने पर सोना तस्करी को देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व पर खतरा बतात....
जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरिथ, स्वप्ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिश्नरेट, कोचीन द्वारा 14.82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

केरल : क्या आतंकी फंडिंग के लिए लाया गया सोना?

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राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल में बड़े पैमाने पर सोना तस्करी को देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व पर खतरा बताते हुए आतंकी कार्रवाई करार दिया है। गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद NIA ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) की आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। 
NIA ने प्रमुख संदिग्ध स्वप्‍ना सुरेश सहित चार लोगों के खिलाफ एक FIR दर्ज की। जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरित, स्वप्‍ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिशनरेट, कोचीन द्वारा 14.82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इसके साथ ही स्वप्ना सुरेश की अग्रिम जमानत याचिका पर केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार तक सुनवाई स्थगित कर दी है। केंद्र सरकार के वकील रवि प्रकाश ने अदालत से NIA एक्ट की धारा 21 का जिक्र करते हुए कहा, “चूँकि इसकी जाँच एनआईए कर रही है, इसलिए उच्च न्यायालय जमानत याचिका पर विचार नहीं कर सकता है और मामले को विशेष अदालत द्वारा निपटाया जाना चाहिए।” वहीं, एनआईए ने भी इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया है।
सीजीसी ने कहा कि जाँच के लिए स्वप्ना सुरेश से हिरासत में पूछताछ आवश्यक थी। वहीं कस्टम्स को सोर्स के जरिए जानकारी प्राप्त हुई कि तीन व्यक्ति, पी आर सरित, संदीप नायर और स्वप्ना सुरेश ने डिप्लोमैटिक अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सोने की तस्करी में शामिल थे।
तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर कार्गो के माध्यम से यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) से आए एक राजनयिक के सामान से 30 किलोग्राम सोना जब्त किया गया था। इसका मूल्य लगभग 15 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।
इसके बाद उस व्यक्ति सरित कुमार को कस्टम विभाग ने हिरासत में ले लिया। पूछताछ में सरित ने बताया कि वह लगभग एक साल से हवाई अड्डे से इस तरह का सामान ले जा रहा था। सरित ने बताया कि उनकी एक सहयोगी केरल सरकार के आईटी विभाग की एक कर्मचारी है जिसका नाम स्वप्ना सुरेश है। सुरेश से पूछताछ करने के लिए जब विभाग हरकत में आया तो पता चला कि वो सामान खोले जाने के एक दिन पहले से लापता है।
सीजीसी ने आगे कहा कि सरित और संध्या (संदीप नायर की पत्नी) के बयान, सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 के तहत दर्ज किए गए हैं। इन बयानों से पता चला कि स्वप्ना सुरेश सामान की डिलीवरी के लिए राजनयिक कागजात की व्यवस्था करने में शामिल थी।
स्वप्ना सुरेश के साथ मुख्यमंत्री के विजयन के नजदीकी को लेकर केरल में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्ष मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहा है। एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना तस्करी सीधे तौर पर देश की आर्थिक स्थिरता पर हमले की कोशिश है। साथ ही इसका उपयोग आतंकी फंडिंग के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 
मामला खुलने के बाद केरल के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को पद से हटा दिया गया है। स्वप्ना, एम शिवशंकर की करीबी है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय व सरकार के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले को रफा-दफा करने के लिए कस्टम के अधिकारियों पर दबाव बना रहे थे।
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केरल की कम्युनिस्ट सरकार का नाम एक बार फिर से एक बड़े स्कैंडल में आया है और इस बार सीधे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का ...
मामले में सरित को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है। केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से कस्टम अधिकारियों को फोन कॉल्स किए गए ताकि जाँच रोकी जा सके। उनका कहना है कि ये फोन कॉल मुख्यमंत्री के किसी क़रीबी ने ही किया था। CM विजयन ने इसे एक ‘बेहूदा’ आरोप करार दिया। उन्होंने कहा कि संदिग्ध बैकग्राउंड वाले लोगों को सीएमओ में कोई काम दिया ही नहीं जाता है।

केरल : ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ के नाम पर हुआ खेल : 30 Kg सोने की तस्करी

स्वप्ना सुरेश, केरल, विजयनकेरल की कम्युनिस्ट सरकार का नाम एक बार फिर से एक बड़े स्कैंडल में आया है और इस बार सीधे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का कार्यालय ही शक के घेरे में है। बताया गया है कि ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का सहारा लेकर सोने की तस्करी की गई और साथ ही एयरपोर्ट से भी इस सोने को पास कराने के लिए इसके सहारा लिया गया।
सोने की इस तस्करी में स्वप्ना सुरेश नामक अधिकारी का नाम आया है। बता दें कि दूसरे देशों के डिप्लोमेट्स को कई देश ‘इम्युनिटी’ प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें कुछ नियम-क़ानूनों और टैक्स से छूट मिलती है।
इसमें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के एक काफ़ी क़रीबी सहयोगी का नाम सामने आ रहा है, जिन्होंने राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के सार्वजनिक डेटा का विश्लेषण करने के लिए स्प्रिंकल्स इंक को जिम्मेदारी सौंपी थी। एम शिवशंकर नाम का यह अधिकारी मुख्यमंत्री का आईटी सेक्रेटरी है। अब वो ‘केरला स्टेट आईटी इंफ़्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ के स्पेस पार्क में बतौर ऑपरेशन्स मैनेजर कार्यरत स्वप्ना सुरेश को बचाने में लग गया है।
अपने डेली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि उन्हें स्वप्ना सुरेश के आईटी विभाग के अंदर काम दिए जाने की कोई जानकारी नहीं है। साथ ही सीएम ने बताया कि ये मामला अभी तक उनके संज्ञान में आया ही नहीं है। लेकिन, उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में कोई भी दोषी सज़ा से बच नहीं सकेगा। स्वप्ना UAE कॉन्सुलेट की सदस्य रही हैं, उन पर दस्तावेजों की हेराफेरी करने का आरोप है।


आरोप है कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर के गुरुवार (जुलाई 2, 2020) को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर के खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इतना सारा सोना डिप्लोमैटिक बैग में भर कर लाया गया था। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी सरित से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात रहा था। कहा जा रहा है कि 6 महीने पहले स्वप्ना को आईटी विभाग में इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे एम शिवशंकर ही है।
स्वप्ना को एक संवेदनशील स्पेस पार्क प्रोजेक्ट में काम दे दिया गया, बावजूद इसके कि उनके खिलाफ पहले से ही क्राइम ब्रांच का एक मामला चल रहा था। साथ ही इंटेलिजेंस विंग ने भी उनके खिलाफ बयान दिया था, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। कॉन्ग्रेस और भाजपा, राज्य की दोनों ही विपक्षी दलों ने कम्युनिस्ट सरकार पर स्वप्ना को बचाने का आरोप लगाया है। हालाँकि, कस्टम अधिकारियों ने स्वप्ना के आवास पर छापेमारी की है।
सरित को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है। केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से कस्टम अधिकारियों को फोन कॉल्स किए गए ताकि जाँच रोकी जा सके। उनका कहना है कि ये फोन कॉल मुख्यमंत्री के किसी क़रीबी ने ही किया था। CM विजयन ने इसे एक ‘बेहूदा’ आरोप करार दिया। उन्होंने कहा कि संदिग्ध बैकग्राउंड वाले लोगों को सीएमओ में कोई काम दिया ही नहीं जाता है।
कोरोना वायरस आपदा से निपटने को लेकर चल रही ख़बरों के कारण केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पहले से ही आलोचकों के निशाने पर हैं। आरोप है कि ख़बरें प्लांट की गईं कि एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग की जा रही है, जाँच के लिए अस्पताल की व्यवस्था है और मरीजों को स्थानीय अस्पतालों के आइसोलेशन वार्डस में ले जाया जा रहा है। इसके लिए मीडिया के एक वर्ग द्वारा केरल सरकार की पीठ थपथपाई गई।

जामिया की इस्लामी कट्टरपंथी आयशा पर टूट पड़े वामपंथी

आयशा रेना, केरल, पिनरई विजयन
आर.बी.एल.निगम 
जामिया मिलिया से शुरू हुई नागरिकता संशोधन कानून की लड़ाई भारत के अन्य प्रांतों में पहुँच लगता है पद-भ्रष्ट हो गयी है। अब लड़ाई CAA की बजाए भीम आर्मी के चंद्रशेखर की रिहाई की ओर मुड़ गयी है। 
जामिया मिलिया इस्लामिया की इस्लामी कट्टरपंथी छात्रा आयशा रेना अपने साथियों की रिहाई की माँग लिए केरल पहुँच गई हैं। केरल में वामपंथी नेताओं ने आयशा का कड़ा विरोध किया। बता दें कि जामिया हिंसा के कारण गिरफ़्तार किए गए उपद्रवियों की रिहाई के लिए आयशा लगातार विरोध प्रदर्शन में लगी हुई हैं। उनकी माँग है कि भीम आर्मी के चंद्रशेखर उर्फ़ रावण को जेल से रिहा किया जाए। लेकिन, जगह-जगह घूम-घूम कर विरोध प्रदर्शन करने वाली आयशा को अपनी ही दवा का स्वाद तब चखना पड़ा, जब केरल में सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने उनका ही विरोध किया।
दरअसल, आयशा ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर गंभीर आरोप लगाए थे। आतंकी याकूब मेमन की समर्थक आयशा ने केरल के मलप्पुरम में प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो देश में अल्पसंख्यक राजनीति को उभरते हुए देखना चाहती हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक राजनीति का अर्थ समझाते हुए बताया कि इसका आशय ‘मुस्लिम-बहुजन पॉलिटिक्स’ से है। उन्होंने माँग करते हुए कहा कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद को तुरंत रिहा किया जाए।


इस दौरान आयशा ने मुख्यमंत्री विजयन को लपेटे में लेते हुए कहा कि पिछले 2 हफ़्तों में केरल की सीपीएम सरकार ने बड़ी संख्या में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है। उन्होंने केरल पुलिस पर भी आरोप लगाया। आयशा ने कहा कि वो इन सभी छात्रों को रिहा किए जाने की माँग करती हैं। आयशा के इस बयान से भड़के सीपीएम कार्यकर्ताओं ने विरोध में नारेबाजी की और माफ़ी माँगने को कहा। सीपीएम कार्यकर्ताओं ने आयशा को घेर कर नारेबाजी की।
आयशा और लदीदा वही युवतियाँ हैं, जिन्हें जामिया हिंसा के दौरान पोस्टर गर्ल बना कर उभारने की कोशिश की गई थी। बरखा दत्त सहित कई पत्रकारों ने उन दोनों को हाइलाइट किया था। इसके लिए पूरा का पूरा ड्रामा रचा गया था, जिसमें एक उपद्रवी को बसाने के लिए दोनों युवतियों ने पुलिस से झड़प की थी। पूरी घटना को हाई क्वालिटी के कैमरे से शूट किया गया था।

केरल की वामपंथी सरकार का फिर यू-टर्न: कहा- रजस्वला महिलाएँ करेंगी मंदिर में प्रवेश

पिनाराई विजयन (फ़ाइल फोटो)
Related imageकेरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की वामपंथी सरकार ने सबरीमाला के मुद्दे पर एक बार फिर से यू-टर्न लेते हुए कहा है कि उनकी सबरीमाला के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को लागू करने के लिए नीति निर्माण करेगी जिसके तहत सभी उम्र की महिलाएँ सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करेंगी और वहाँ की मान्यता के अनुसार घुसकर उसे अपवित्र कर देंगी
सबरीमाला के भक्तों पर अत्याचार करने के बाद केरल के वामपंथियों ने जून 2019 में केंद्र सरकार से सबरीमाला के रीति-रिवाजों की रक्षा करता एक कानून बनाने को कहा था। जबकि यू-टर्न ले लेने के बाद अब वही वामपंथी कह रहे हैं कि हम सुप्रीम कोर्ट 2018 का फैसला मानेंगे। बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले में कहा गया था की सभी महिलाओं को अय्यप्पा भगवान के मंदिर में प्रवेश दिया जाना चाहिए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने नवंबर 4  को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कानून लाकर उसे बदलना हमारे लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘जल्लीकट्टू’ की तरह मूल अधिकार का हवाला देकर हम इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कोई कानून नहीं बना सकते। सबरीमाला में होने वाली साल की सबसे बड़ी तीर्थ यात्रा के दो हफ्ते पूर्व अपना यह बयान देते हुए मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि सभी भक्तों की सुरक्षा और शांति के लिए उनकी सरकार उपयोगी कदम उठाएगी।
कुछ दिन पहले केरल के मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि उनकी एलडीएफ सरकार श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुँचाने और सर्वोच्च न्यायलय के आदेश का पालन करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में कोई भी पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी। उनके मुताबिक अगर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उनसे माँग की जाती है तो इस विषय पर वे अपना विचार रखेंगे।
2018 में भी सीपीएम ने सर्वोच्च न्यायालय के उस विवादित फैसले का समर्थन किया था जिसने उस परंपरा को अवैध करार दिया था जिसके तहत केरल के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र सीमा वाली महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। उस वक़्त एक बड़ी संख्या वाली भीड़ ने न सिर्फ इस फैसले का विरोध किया था बल्कि इस परंपरा को जीवित रखने का भी प्रण लिया था।
इस स्थिति में राज्य की कानून-व्यवस्था को न संभाल पाने के चलते वामपंथी खेमे की काफी आलोचना हुई थी। सीपीआईएम के नेतृत्व वाले केरल प्रशासन ने जानबूझकर दो महिलाओं को स्वेच्छा से मंदिर में प्रवेश करा, प्राचीन परंपरा को तोड़कर मंदिर को ही दूषित कर दिया। यह वही प्रशासन है जिसने एक समय गैर-हिन्दुओं और कार्यकर्ताओं को मंदिर में घुसने के लिए मदद की है।
सबरीमाला के मामले में सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ने पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और वामपंथी सरकार सीधे आम लोगों के निशाने पर आई। लोगों ने अपने राज्य की सरकार के इस कदम को गलत माना। ऐसे ही एक मामले में सबरीमाला मंदिर से भक्तों को सुरक्षाबलों के दम पर घसीटकर निकालने की घटना पर केरल उच्च न्यायलय ने विजयन सरकार को फटकार भी लगाई थी।

Kerala Sexual Abuse Cases: Why Is The Communist Government So Indifferent?

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Over the last few months, Kerala has been in the headlines for cases of sexual violence. Some of the cases reported are from the church. Two recent cases, however, have exposed the Communist Party of India-Marxist (CPI-M)-led Left Democratic Front (LDF) as sexist and lackadaisical in matters of women security.
One such case is of a Democratic Youth Federation of India (DYFI) leader complaining about sexual abuse by CPI-M member in Kerala legislative assembly, P K Sasi. The DYFI leader has taken up her case with the higher-ups in CPI-M nationally, but no action has been forthcoming yet. To add to her woes, Kerala Women Commission chief M C Josephine has reacted to it by saying, “mistakes do happen”. While the National Commission for Women has registered a case, the buck is being passed between the Kerala Women’s Commission and the CPI-M.
Second is the case of a nun’s complaint against Jalandhar bishop of Missionaries of Jesus, Franco Mullakal. The nun complained in June that she was sexually abused and raped by him between 2014 and 2016 at a convent in Kuruvilangadu near Kottayam. The police have been investigating the case but the nuns, unhappy with its progress, have come out in the open seeking the arrest of Mullakal.
Nuns stage a protest seeking justice.The church has tried to protect the bishop, who himself is reportedly trying to lure the nun with cash and kind to withdraw the complaint. The Kerala High Court has now stepped in and has asked for the progress report in the case. On the other hand, the affected nun has had to face a verbal assault from independent member of legislative assembly P C George, while the Missionaries of Jesus, which reports to the Roman Catholic Church, has thrown its weight behind Mullakal. It has labelled him “innocent” and termed the nuns’ protests as being instigated by outside forces.
If anyone is surprised by this “we don’t care attitude” of the CPM-led government, then some recollections from recent history are in order. These will show that there is nothing new in the communist leadership discriminating against women and being dismissive of their concerns.
Going into the 1987 Kerala assembly elections, the CPI-M had projected K R Gowri Amma as the chief ministerial candidate. The LDF won the polls with 78 seats but Gowri Amma’s leadership was rejected by the CPI-M politburo. Instead, 70-year-old E K Nayanar was made the chief minister. Remember, he was the same Nayanar who was popular for his comment that “rape is as common in the US as drinking tea”. Finally, Gowri Amma, who belongs to the Ezhava community from which the CPI-M draws its strength, was shunted out and then expelled forcing her to float her own party.
Nayanar hadn’t finished with his rape comments yet. During his 1996-2001 term, the Suryanelli rape case or sex scandal rocked Kerala. Then his comments on the scandal was “why is there a fuss being made since rape happens all the time”. The prime accused Dharmarajan was a CPI-M worker. The case, in which former deputy chairman of Rajya Sabha P J Kurien’s name was also dragged in, was handled so badly that except the prime accused all the others got away. The poor 16-year-old victim and her family were reduced to shreds, leaving them in tatters forever.
When the Narendra Modi government came out with an ordinance on death penalty to those guilty of raping children, CPI-M politburo member Brinda Karat was the first to criticise it. While hitting out at the Centre for the ordinance, she said: “the actual issue is that those in government are defending the rapists." (Her allegation in reference to the Kathua case). Wonder if this was a reference to her own government in Kerala?
Last year, the Pinarayi Vijayan government showed great alacrity in arresting Congress MLA M Vincent for allegedly raping and stalking women. Why is that the communist government is not showing the same alacrity in the case of its own MLA Sasi or bishop Mullakal, in particular since he is trying to scuttle the case?


You are reang 1 of 7 free articles for this week. Only Swarajya sCPI-M’s own leader and former chief minister V S Achuthanandan moved the Kerala High Court in June this year challenging a lower court order that rejected further probe into the Ice Cream Parlour case. Achuthanandan has accused CPI-M’s own leader and former chief minister V S Achuthanandan moved the Kerala High Court in June this year challenging a lower court order that rejected further probe into the Ice Cream Parlour case. Achuthanandan has accused the Pinarayi government of trying to close the case without pursuing it to its logical end.the CPI-M’s own leader and former chief minister V S Achuthanandan moved the Kerala High Court in June this year challenging a lower court order that rejected further probe into the Ice Cream Parlour case. Achuthanandan has accused the Pinarayi government of trying to close the The church also has not covered itself with glory in the bishop Mullakal case. Last year, the church vehemently protested the rape of a nun in Kolkata by a Bangladesh national. Now, it is trying to protect the bishop. Why this diabolical stand onCPI-M’s own leader and former chief minister V S Achuthanandan moved the Kerala High Court in June this year challenging a lower court order that rejected further probe into the Ice Cream Parlour case. Achuthanandan has accused the Pinarayi government of trying to close the case without pursuing it to its logical end. the paIn May 2016, when a young girl belonging to a scheduled caste was raped and murdered at Perumbavoor in Kerala’s Ernakulam district, the CPI-M politburo issued a statement:
The politburo demands that the investigation into the brutal rape and appalling violence inflicted on the woman should be entrusted to an enquiry committee headed by a high-ranking woman police official. Immediate steps should be taken to apprehend the culprits and bring them to book through fast track courts in linNuns stage a protest seeking justice.es Nuns stage a protest seeking justice.witNuns stage a protest seeking justice.h tImage result for kerala rape cases he amendments brought into criminal laws after the Nirbhaya incident. Proceedings should also be launched against those who attempted to cover up the case.
CPI-M Politburo On 4 May 2016
Did the CPI-M politburo issue that statement because the state was headed for elections then? Has the CPI-M politburo read its own statements on various such sexual abuse cases. Why not follow their own statement in these cases?
The communist record on women safety remains dismal. It is up to the people to exert enough pressure on the Kerala government to do what it is reluctant to do – justice.rt of the church?case without pursuing it to its logical end. government of trying to close the case without pursuing it to its logical end.ubscribers have nlimited access to all our articles.