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तमिलनाडु : सब-इंस्पेक्टर ने कूड़ेदान में फेंका तिरंगा झंडा, फैंस को अंदर नहीं ले जाने दिया गया राष्ट्रध्वज: वायरल वीडियो के आधार पर आरोप, पाकिस्तान का था मैच

वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी तिरंगे को कूड़ेदान से निकालते हुए दिखता है (चित्र साभार: @annamalai_k/X)
तमिलनाडु के चेन्नई से एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर द्वारा तिरंगे झंडे को कूड़ेदान में फेंकने और उसका अनादर करने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अब सब-इंस्पेक्टर को ट्रांसफर कर दिया गया है।

सबसे पहले तमिल न्यूज ’24×7′ नाम के एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल ने एक वीडियो डाला जिसमें एक पुलिस वाला दो तिरंगों को एक कूड़ेदान से निकाल कर अपनी गाड़ी में डाल कर जाता हुआ दिखता है। हालाँकि, इस अकाउंट ने कुछ देर के बाद यह वीडियो हटा दी।

सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों ने यह वीडियो डाउनलोड कर ली थी और उन्होंने इस मामले को उठाना चालू किया। मामले में सामने आया कि 23 अक्टूबर को चेन्नई के चेपक स्टेडियम में आयोजित अफगानिस्तान बनाम पाकिस्तान मैच के दौरान ड्यूटी पर लगे इस पुलिसकर्मी ने भारतीय तिरंगा अंदर ले जाने से मना किया था।

उसने तिरंगा कूड़ेदान में भी फेंका लेकिन आसपास मौजूद लोगों के विरोध के पश्चात उन्हें उठा कर लाया और अपनी गाड़ी में रख लिया। कई फैन्स ने यह भी आरोप लगाए कि उन्हें इस मैच के दौरान तिरंगा स्टेडियम के अंदर नहीं ले जाने दिया गया।

पुलिसकर्मी द्वारा तिरंगे के अपमान के इस मामले ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश मंत्री एसजी सूर्या ने इस मामले पर ट्वीट किया और कहा कि एक तो पुलिसकर्मी ने तिरंगा ले जाने नहीं दिया और फिर उसे कूड़ेदान में फेंक दिया। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से इस मामले पर कार्रवाई करने को कहा।

तमिलनाडु भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी इस मामले पर ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि पहले उदय स्टालिन को मैच के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारों से दिक्कत थी और अब ‘तमिलनाडु क्रिकेट असोसिएशन’ ने एक कदम आगे बढ़ कर तिरंगे का अपमान किया। अन्नामलाई ने इस पर कार्रवाई ना होने पर कड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी।

क्रिकेट फैन्स और भाजपा नेताओं के इन आरोपों पर डीएमके समर्थक सफाई पेश करने लगे। ट्विटर पर मौजूद एक पेज ‘द्रविड़ियन इनसाइट्स’ ने दावा किया कि BCCI ने स्टेडियम के अंदर डंडे में लगा हुआ तिरंगा ले जाने पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। इसी पेज ने भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष विनोद नेता का फोटो डाला जिसमें वह स्टेडियम के अन्दर झंडा पकड़े हुए खड़े हैं।

हालाँकि, लोगों ने स्पष्ट किया कि भाजपा नेता वहाँ पुलिसकर्मी वाले कांड के बाद पहुँचे थे। इस मामले में पुलिसकर्मी की पहचान कर उस पर कार्रवाई भी की गई है। भाजपा नेता एसजी सूर्या ने बताया कि पुलिसकर्मी की पहचान सब-इंस्पेक्टर नागार्जुन के रूप में हुई है। उन्होंने तिरंगे का अपमान करने वाले का मात्र ट्रांसफर करने और कोई कड़ी कार्रवाई न करने पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर प्रश्न भी उठाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि पुलिसकर्मी को कंट्रोल रूम में ट्रांसफर कर दिया गया है। तमिलनाडु पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टेडियम के अन्दर तिरंगा ले जाने पर कोई रोकटोक नहीं थी। फैन्स को अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत का झंडा ले जाने की अनुमति दी गई थी।


तमिलनाडु : 18 वनवासी महिलाओं से रेप, 32 साल बाद 215 सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को जेल

                                                 32 साल बाद कोर्ट से वनवासी महिलाओं को न्याय
एक साथ एक ही मामले में 215 सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को अब जेल में चक्की पिसनी होगी। यह मामला है तमिलनाडु के वाचथी गाँव (Vachathi) का। 1992 में यहाँ एक ही दिन में 18 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था। मद्रास उच्च न्यायालय ने अब इस मामले में सभी 215 सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की सजा को बरकरार रखा, जो इन लोगों को सत्र न्यायालय से मिली थी। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने दोषियों की अपील को खारिज कर दिया।

वाचथी (Vachathi) गाँव में बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के साथ-साथ मारपीट, संपत्ति का नुकसान, मवेशियों को जान से मारने आदि के लिए जिन 215 सरकारी कर्मचारियों को सजा सुनाई गई है, उनमें कुछ क्लास वन अधिकारी भी हैं। मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले से पहले सत्र न्यायालय ने इस मामले में 4 आईएफएस अधिकारियों सहित वन विभाग के 126 कर्मचारियों, 84 पुलिसकर्मियों और राजस्व विभाग के 5 लोगों को दोषी ठहराया था।

मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को इस मामले में फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जिन 18 महिलाओं के साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों ने बलात्कार किया, उन सबको 10-10 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर दिए जाएँ। जज ने यह भी आदेश दिया कि जो बलात्कार के दोषी पाए गए हैं, उन सब से मुआवजे की 50 प्रतिशत रकम वसूली जाए। सभी दोषियों को 1 से लेकर 10 साल तक की सजा सुनाई गई है।

न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने वाचथी गाँव में 1992 में वनवासियों के खिलाफ बलात्कार और क्रूरता के मामले में सभी 215 दोषियों की अपील खारिज करते हुए कहा:

“सभी आपराधिक अपीलों को खारिज किया जाता है। सरकार बलात्कार के प्रत्येक पीड़ित को 10 लाख रुपए का मुआवजा दे। यदि पीड़ित जीवित नहीं है तो उनके परिजनों को मुआवजा दिया जाए। जो रेप के दोषी हैं, उनसे मुआवजे की 50 फीसदी रकम वसूली जाए। पीड़ितों को स्वरोजगार या किसी अन्य माध्यम से उपयुक्त नौकरियाँ भी दी जाए। तत्कालीन जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला वन अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।”

वाचथी गाँव के लोगों के खिलाफ तस्करी का जो आरोप लगाया गया था, मद्रास उच्च न्यायालय ने उसे भी खारिज कर दिया।

वाचथी केस: कब, क्या, कितने अपराधी

20 जून 1992 की घटना है। तब चंदन तस्कर वीरप्पन जिंदा था। तमिलनाडु के वन और राजस्व विभाग को सूचना मिली कि चंदन की लकड़ी की कटाई और तस्करी की जा रही है। तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के वाचथी गाँव में इस सूचना के आधार पर छापेमारी की गई।
इसी दौरान तमिलनाडु के वन और राजस्व विभाग के तब के अधिकारी और कर्मचारियों ने 18 महिलाओं के साथ बलात्कार किया था। कई वनवासियों के घर उजाड़ दिए थे। उनकी संपत्तियों को तहस-नहस कर दिया था, मवेशियों को माक डाला था।
वाचथी गाँव में 155 वनकर्मी (इसमें भारतीय वन सेवा के 4 क्लास वन अधिकारी भी), 108 पुलिसकर्मी और 6 राजस्व अधिकारियों की टीम ने छापा मारा था। मतलब कुल 269 सरकारी कर्मचारी इस छापेमारी का हिस्सा थे। 1992 से लेकर 2023 तक कुल 32 साल की केस-कचहरी में 54 आरोपितों की मृत्यु भी हो गई।

चेन्नई :AR रहमान के कंसर्ट में महिलाओं के यौन शोषण : किसी का स्तन दबोचा, कोई गश खाकर गिर पड़ी…

चेन्नई में AR रहमान के म्यूजिक कंसर्ट में भगदड़, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में संगीत निर्देशक AR रहमान के कंसर्ट में भगदड़ मच गई और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। कई महिलाओं ने इस कंसर्ट के आने बुरे अनुभव साझा किए हैं। 31 साल की एक फिल्म निर्देशक ने बताया कि कंसर्ट के दौरान उन्हें पैनिक अटैक आया, जिसके बाद उन्होंने एक व्यक्ति को ‘अन्ना’ (बड़ा भाई) कह कर संबोधित किया और पूछा कि बाहर जाने का रास्ता किधर से है। महिला ने बताया, “उसने मेरी आँखों में देखा और अगली चीज मुझे याद है कि उसके हाथ मेरे स्तन के ऊपर थे और उसने मुझे दबोच लिया।

पीड़िता ने बताया कि वो वहीं खड़ी की कड़ी रह गई और एक इंच भी इधर-उधर नहीं खिसक सकी। उसने इसे एक ऐसा डरावना और आघात पहुँचाने वाला अनुभव करार दिया, जिससे वो शायद ही बाहर निकल सके। सिर्फ यही महला नहीं, बल्कि AR रहमान के इस कंसर्ट में छेड़खानी को लेकर कई अन्य महिलाओं ने शिकायत की है। ये कंसर्ट ‘मराकुम्मा नेंजम’ (अर्थ – क्या दिल कभी भूलेगा?) नाम से चेन्नई के ECR (ईस्ट कोस्ट रोड) में आयोजित किया गया था।

एक व्यक्ति ने बताया कि उसने कभी नहीं सोचा था कि AR रहमान के किसी कंसर्ट में लोग शो को रोकने के लिए चिल्लाएँगे। कई लोग टिकट मिलने के बावजूद भीतर नहीं जा सके। जो अंदर गए, उनमें से कइयों को पैनिक अटैक आया। कइयों को घुटन महसूस हुई। कई बच्चे भी खो गए। पीड़ितों ने बताया कि ट्रैफिक का भी ठीक से प्रबंधन नहीं किया गया था। शाम 7:30 बजे ही लोग घर जाने लगे। बताया जा रहा है कि आयोजनों ने भी क्षमता से ज़्यादा टिकट्स भेजे हैं।

चेन्नई के एक NGO में काम करने वाली 23 वर्षीय महिला ने बताया कि कंसर्ट शुरू होने से पहले ही भगदड़ मच गई थी। टिकट होने के बावजूद कंसर्ट में घुसने के लिए टैग लेने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ी। कई जब भीतर घुसे तो देखा कि सीट फुल है। खड़े होने तक की जगह नहीं थी। ताम्बरम के पुलिस कमिश्नर ने मामले के जाँच के आदेश दिए हैं। आयोजक ‘ACTC इवेंट्स’ ने इन सबके बावजूद कंसर्ट को ‘बड़ी सफलता’ बताते हुए अपनी पीठ थपथपाई, और ‘जो अटेंड न कर पाए’, उनसे माफ़ी माँगी।

आयोजकों ने महिलाओं के साथ छेड़खानी पर कुछ नहीं कहा। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में बच्चों को अभिभावकों से बिछड़ कर रोते हुए देखा जा सकता है। लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। एक 22 वर्षीय महिला वकील ने बताया कि उनकी और उनके माँ को आधे घंटे के भीतर कई बार गलत तरीके से छुआ गया, जब वो बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने खुद को मानसिक, शारीरिक और भावुक रूप से एक थकी हुई पीड़िता करार दिया।

एक बुजुर्ग महिला बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। मेडिकल मदद की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। कुछ महिलाएँ रोने लगीं। प्रबंधन के लिए काफी कम वॉलंटियर्स मौजूद थे। एक अर्थराइटिस की मरीज ने बताया कि उन्हें 3 किलोमीटर चलने के बाद कई घंटे पैदल खड़ा रहना पड़ा, क्योंकि कोई मदद करने वाला नहीं था। हालाँकि, AR रहमान ने बाद में इन घटनाओं के लिए माफ़ी माँगते हुए कहा है कि वो किसी पर उँगली नहीं उठाना चाहते, लेकिन शहर बड़ा हो रहा है और संगीत के प्रति दीवानगी भी बढ़ रही है।

एक महिला ने कहा कि वो कभी अब जीवन में किसी कंसर्ट में नहीं जाएगी। वहीं एक 45 वर्षीय महिला ने बताया कि उनकी बेटी अब तक सदमे में है। पवित्रा नाम की एक पीड़िता ने लिखा कि उसके भीतर AR रहमान का जो फैन था, वो अब मर गया है। चारुलता रंगराजन नाम की महिला ने अपनी उँगलियों के निशान दिखाते हुए बताया कि कैसे उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ। वीडियो में पीड़ितों ने इस कंसर्ट को पैसों की वसूली करार दिया। बताया जा रहा है कि कंसर्ट में लगभग 50,000 लोग पहुँच गए थे।

कुछ पीड़ितों ने पूछा कि AR रहमान जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे हैं, सिर्फ ‘सॉरी’ कह देने से क्या हो जाएगा। हालाँकि, एक इंटरव्यू में एआर रहमान ने दावा किया कि वो इस घटना को लेकर बेहद दुःखी हैं और इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने कहा कि एक संगीत निर्देशक के रूप में उनका काम लोगों का मनोरंजन था, उन्हें लगा कि बाकी चीजों का ख्याल रख लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एक प्राथमिक विषय है और वहाँ महिलाएँ-बच्चे थे। AR रहमान ने कहा है कि जो लोग टिकट होने के बावजूद कंसर्ट में नहीं आ पाए, वो उन्हें ईमेल पर टिकट की कॉपी और अपनी शिकायतें भेजें, उसका निदान किया जाएगा।


तमिलनाडु : जाॅब स्कैम में गिरफ्तार हुए मंत्री सेंथिल बालाजी को गवर्नर द्वारा बर्खास्त करने पर मुख्यमंत्री स्टालिन भड़के

सेंथिल बालाजी को मंत्रिपरिषद से गवर्नर ने हटाया
तमिलनाडु के बिजली मंत्री सेंथिल बालाजी को जॉब स्कैम में गिरफ्तार किए जाने के बाद अब गवर्नर आर.एन रवि ने उन्हें मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया है। गवर्नर के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री स्टालिन भड़के हुए हैं। उन्होंने धमकी दी है कि इस मुद्दे का सामना वो कानूनी रूप से करेंगे।

सेंथिल बालाजी के गिरफ्तार होने के बाद तमिलनाडु राजभवन ने बयान जारी कर कहा कि मंत्री वी सेंथिल बालाजी नौकरियों के बदले पैसे लेने और मनी लॉन्ड्रिंग सहित भ्रष्टाचार के कई मामलों में गंभीर आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में राज्यपाल ने उन्हें तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया है।

राजभवन के बयान में कहा गया कि थिरु वी सेंथिल बालाजी एक मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाँच को प्रभावित कर रहे हैं और कानून और न्याय की उचित प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत कुछ और आपराधिक मामलों की जाँच राज्य पुलिस की ओर से की जा रही है। ऐसे में आशंकाएँ हैं कि मंत्रिपरिषद में सेंथिल बालाजी के मंत्रिमंडल में बने रहने से निष्पक्ष जाँच पर सीधा प्रभाव पड़ेगा और इससे राज्य में संवैधानिक तंत्र टूट सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए राज्यपाल ने उनको तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।

राजभवन के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, “राज्यपाल के पास किसी मंत्री को कैबिनेट से बर्खास्त करने का कोई अधिकार नहीं है, हम कानूनी रूप से इस मुद्दे का सामना करेंगे।”

जॉब स्कैम मामले में 13 जून की करीब सुबह 7 बजे ईडी ने सेंथिल बालाजी के घर पर छापा मारा था। इसकी सूचना मिलने पर बालाजी टैक्सी पकड़ कर घर गए। इसके बाद शुरू हुई लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जब ED ने सेंथिल बालाजी को हिरासत में लिया, तब उन्होंने सीने में दर्द होने की शिकायत की।

इसके बाद उन्हें मेडिकल जाँच के लिए चेन्नई के ओमंदुरार सरकारी हॉस्पिटल ले जाया गया। जहाँ वह रोते हुए नजर आए। इस दौरान मंत्री के समर्थक हॉस्पिटल के बाहर नारेबाजी करते दिखाई दिए। उनकी शिकायत के बाद अस्पताल में उनकी बायपास सर्जरी हुई थी। बाद में उन्हें 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा गया और फिर हिरासत को बढ़ाकर 12 जुलाई तक कर दिया गया।

#Go Back Stalin… बिहार पहुँच रहे तमिलनाडु मुख्यमंत्री के खिलाफ हर जिले में विरोध प्रदर्शन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना में विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है, जिसमें शामिल होने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन भी आ रहे हैं। बता दें कि तमिलनाडु में बिहारियों की प्रताड़ना का आरोप लगा कर वीडियो शेयर करने वाले बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप को तमिलनाडु की जेल में ही रखा गया है। उन पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा दिया गया है। इसे लेकर एमके स्टालिन का बिहार में विरोध हो रहा है।

सोशल मीडिया पर भी लोग ‘Go Back Stalin’ ट्रेंड करा रहे हैं। इससे पहले नीतीश कुमार भी तमिलनाडु के पूर्व CM करुणाननिधि के मेमोरियल के उद्घाटन के लिए वहाँ जाने वाले थे, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें ये योजना रद्द करनी पड़ी। बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और जल संसाधन मंत्री संजय झा उनकी तरफ से इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। पटना में शुक्रवार (23 जून, 2023) को 20 विपक्षी दलों की बड़ी बैठक होने वाली है।

राजनीतिक विश्लेषक चंदन शर्मा ने लिखा, आप में से कितने लोगों को आज भी मनीष कश्यप याद हैं? विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए तमिलनाडु का मुख्यमंत्री स्टालिन 23 जून को बिहार आ रहा है। आपको याद करना होगा स्टालिन ने हमारे भाई मनीष कश्यप पर NSA लगाया है!” उधर ‘ब्राह्मण ऑफ भारत’ नामक ट्विटर पेज ने भी इस ट्रेंड को आगे बढ़ाया। बिहार के कई लोग स्टालिन के पटना दौरे का विरोध कर रहे हैं।

 ‘पाञ्चजन्य’ के पत्रकार रितेश कश्यप ने लिखा, “मनीष कश्यप को जेल से रिहा करने को लेकर, बिहार के लोगों ने चलाया #GoBackStalin का ट्रेंड ! आपको बता दें कि बिहार में विपक्षी एकता को लेकर महागठबंधन की बैठक की जा रही है जिसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन भी आ रहे हैं। बिहार के जाने-माने पत्रकार मनीष कश्यप तमिलनाडु के जेल में बंद है। उन्हीं के समर्थन मे पूरे बिहार में स्टालिन के खिलाफ आक्रोश देखा जा रहा है और यह ट्रेंड चलाया जा रहा है।”

RJJP (राष्ट्रीय जन-जन पार्टी) की गया यूनिट ने ऐलान किया कि 23 जून को स्टालिन का विरोध बिहार में जम के होना चाहिए, अगर बिहारियों को लगता है की मनीष कश्यप के साथ गलत हुआ है। ‘EWS कम्युनिटी’ नामक ट्विटर पेज ने ऐलान किया कि आशुतोष कुमार के नेतृत्व में 23 जून को बिहार के हर एक जिले और खासकर पटना में जोरदार विरोध किया जाएगा। 23 जून को स्टालिन के विरोध में बिहारवासियों का आक्रोश देखने को मिलेगा, ये तय है।

संविधान का मजाक बनाते क्षेत्रीय दल : कर्नाटक के बाद तमिलनाडु ने किया गुजरात के AMUL ब्रांड का विरोध, राजनीति के लिए क्षेत्रवाद की आग को दी जा रही हवा

बात बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किये जाने काम को संविधान के विरुद्ध बताने वाले अपने-अपने तरीके से देखिए किस प्रकार संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं।  

गुजरात की मिल्क कॉपरेटिव सोसायटी अमूल (AMUL) का मामला कर्नाटक से होते हुए तमिलनाडु तक पहुँच गया है। यह व्यवसायिक से ज्यादा राजनीतिक नजर आ रहा है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले अमूल बनाम राज्य की नंदिनी (Nandini) को लेकर राजनीति हुई थी। अब इस राजनीति में तमिलनाडु भी कूद गया है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं डीएमके के नेता एमके स्टालिन (MK Stalin) ने केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि अमूल को आविन के मिल्क शेड क्षेत्र से दूध खरीदने से रोकने का निर्देश दिया जाए। स्टालिन ने यह पत्र स्थानीय सहकारी क्षेत्र को बचाने के नाम पर लिखी है और अमूल का विरोध किया है। अमूल के विरोध की मुख्य वजह उसका गुजरात से होना है।

यही कारण है कि भाजपा और उसके नेताओं, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से विरोधी भाव रखने वाले लोग अब गुजरात के इस दूध उत्पाद का का भी विरोध करने लगे हैं। इसके लिए ये नेता स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय की विभाजनकारी राजनीति को हवा दे रहे हैं। बंगाल में ममता बनर्जी, बिहार में जदयू और राजद, कर्नाटक में कॉन्ग्रेस एवं जेडीएस, तमिलनाडु में स्टालिन, महाराष्ट्र में MNS जैसे क्षेत्रीय नेता क्षेत्रवाद को अपनी राजनीति का केंद्र बनाकर रखा है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह को लिखे अपने पत्र में एमके स्टालिन ने लिखा, “अन्य राज्यों की मजबूत डेयरी सहकारी समितियों की तरह तमिलनाडु में भी सन 1981 से तीन स्तरीय डेयरी सहकारी प्रणाली प्रभावी ढंग से काम कर रही है। आविन हमारा सर्वोच्च सहकारी विपणन संघ है। आविन सहकारी के दायरे में 9,673 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। वे लगभग 4.5 लाख सदस्यों से 35 LLPD दूध खरीदते हैं।”

स्टालिन ने आगे लिखा, “हाल ही में यह हमारे संज्ञान में आया है कि कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (अमूल) ने कृष्णागिरी जिले में चिलिंग सेंटर और एक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिए अपने बहुराज्यीय सहकारी लाइसेंस का उपयोग किया है। यह हमारे राज्य के कृष्णागिरी, धर्मपुरी, वेल्लोर, रानीपेट, तिरुपथुर, कांचीपुरम और तिरुवल्लूर जिलों और उसके आसपास के FPO और SHG के माध्यम से दूध खरीद योजना बना रहा है। इस तरह की क्रॉस-प्रोक्योरमेंट ‘ऑपरेशन व्हाइट फ्लड’ की भावना के खिलाफ है और देश में दूध की कमी के मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला है।”

हिंदी का विरोध कर इसे क्षेत्रीय अस्मिता से जोड़ने वाले एमके स्टालिन अब आर्थिक क्षेत्र में भी इसे आजमा रहे हैं। इसी तहत उन्होंने Amul बनाम Aavin के जरिए अब स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय की आग को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि वे अमित शाह से राज्य में अमूल के ऑपरेशन को रोकने की माँग की है। इस तरह की माँग करके क्षेत्रीयता की आग भड़काकर अपनी राजनीति चमकाने वाले स्टालिन पहले नेता नहीं हैं।

महाराष्ट्र में राज ठाकरे

जब राज ठाकरे ने अपनी पार्टी ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ (MNS) की शुरुआत की थी तो उन्होंने साफ कर दिया था कि उनका कार्यक्षेत्र ‘महाराष्ट्र’ पर केंद्रित होगा। मराठी वोटों को उनकी भूख ने धार्मिक मुद्दों को भी दरकिनार कर दिया, जिसको लेकर शिवसेना का निर्माण किया गया था। राज ठाकरे ने नासिक जिले में स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर के हालिया विवाद में मराठी मुस्लिमों को लुभाने की कोशिश की।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में मुस्लिमों द्वारा लोबान दिखाने और चादर चढ़ाने की कोशिश का बचाव करते हुए राज ठाकरे ने कहा, “अगर यह सदियों पुरानी परंपरा है तो इस पर रोक लगाना बेमानी है। यह त्र्यंबकेश्वर के लोगों का मुद्दा है। महाराष्ट्र में सैकड़ों मंदिर और मस्जिद हैं, जहाँ इस तरह का आपसी समन्वय देखने को मिलेगा। हमारा धर्म इतना कमजोर नहीं है कि किसी दूसरे धर्म का व्यक्ति मंदिर में प्रवेश कर जाए तो वह भ्रष्ट हो जाए। मैं विभिन्न मस्जिदों में गया हूँ। हमारे कुछ मंदिरों में एक निश्चित जाति के लोगों को ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति है।”
राज ठाकरे दरअसल मराठी लोगों की राजनीति पर फोकस कर रहे हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं। यही कारण है कि त्र्यंबकेश्वर की घटना को वो आपसी सौहार्द्र बताकर मराठी मुस्लिमों को अपनी तरफ खींचने का प्रयास कर रहे हैं। कभी हिंदुत्व की वकालत करने वाले राज ठाकरे महाराष्ट्र के दंगों को नजरअंदाज करते हुए कहा, “मराठी मुस्लिम जहाँ भी रहते हैं, वहाँ कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं है। यह मेरा अनुभव है। वे शांति से रहते हैं। कुछ लोग इस सद्भाव को भंग कर रहे हैं। एक हिंदू बहुल राज्य में हिंदू कैसे खतरे में हो सकता है?”
ये वही राज ठाकरे हैं, जिन्होंने MNS के गठन के शुरुआती दिनों में मराठी बनाम गैर-मराठी का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। उनकी पार्टी बिहार और उत्तर प्रदेश से मुंबई और आसपास के शहरों जैसे ठाणे, पुणे और नासिक में काम कर रहे लोगों की नौकरी छिनकर स्थानीय मराठी लोगों देने की बात करते थे। उनकी पार्टी के कार्यकर्ता यूपी-बिहार के लोगों से आए दिन मारपीट करते थे। वे कहते थे कि इन्हीं लोगों के कारण मुंबई आदि शहरों में अपराध बढ़ा है।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस और JDS

राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद कॉन्ग्रेस कई मौकों पर स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय राजनीति का खेल खेला है। कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक में चुनावों से पहले अमूल बनाम Nandini दूध ब्रांड का खेल खेलकर कन्नड़ बनाम गुजरात की राजनीति करने की कोशिश की थी। उसने जनता दल सेक्युलर द्वारा किए जा रहे अमूल के विरोध का खूब साथ दिया। इसको लेकर कॉन्ग्रेस ने खूब फेक न्यूज फैलाए।
दरअसल, दिसंबर 2022 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अमूल और नंदिनी के बीच अधिक सहयोग अपील की थी। नंदिनी का स्वामित्व कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) के पास है। उन्होंने कहा था, “अमूल और केएमएफ मिलकर यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे कि राज्य के हर गाँव में एक प्राथमिक डेयरी हो। कर्नाटक में सहकारी डेयरी को बढ़ावा देने के लिए अमूल और केएमएफ को मिलकर काम करना होगा।”
इस बयान को इस तरह लोगों के सामने रखा गया कि अमूल जल्द ही नंदिनी को खरीद सकता है। इस तरह स्थानीय डेयरी ब्रांड नंदिनी को कर्नाटक की पहचान और संस्कृति से जोड़ दिया गया। इसको मुद्दा बनाकर राज्य में क्षेत्रवाद की खूब आग भड़काई गई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उस समय कन्नडिगों से अमूल ब्रांड का बहिष्कार करने की अपील की थी। वहीं, कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने इसे एक बड़ी साजिश बताया था।
जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने तो यहाँ तक कह दिया, “अमूल को केंद्र सरकार के समर्थन से पिछले दरवाजे से कर्नाटक में स्थापित किया जा रहा है। अमूल कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) और किसानों का गला घोंट रहा है। कन्नड़ लोगों को अमूल के खिलाफ बगावत करनी चाहिए। हमारे लोगों और ग्राहकों को प्राथमिकता पर नंदिनी उत्पादों का उपयोग करना चाहिए और किसानों की आजीविका को बचाना चाहिए।”

बिहार में JDU और RJD

साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड), तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल और कॉन्ग्रेस ने भाजपा के खिलाफ महागठबंधन तैयार किया था। इन नेताओं ने अमित शाह और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को ‘बाहरी’ बताते हुए बिहार के लोगों से महागठबंधन को वोट देने के लिए कहा था। नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने इस प्रोपेगेंडा को खूब फैलाया। यहाँ भी नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की पीएम मोदी और अमित शाह के प्रति नफरत साफ दिखी।
नीतीश कुमार भाजपा के सहयोग से बिहार में सरकार का आनंद उठाते रहे हैं। हालाँकि, साल 2013 में उन्होंने NDA छोड़ दिया। उसके बाद साल 2017 में वे राजद और कॉन्ग्रेस से गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ आ मिले।हालांकि, मौका देखकर वे एक बार फिर साल 2022 में भाजपा से अलग होकर महागठबंधन का हिस्सा बन गए। वे अब भी गुजरात बनाम स्थानीय नेता का राग समय-समय पर अलापते रहते हैं।

बंगाल में ममता बनर्जी

क्षेत्रवाद की आग भड़काने में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी पीछे नहीं हैं। साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने कहा था, “गुजराती (नरेंद्र मोदी और अमित शाह) यूपी और बिहार से गुंडे लाकर बंगाल पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।” हावड़ा की एक चुनावी रैली में उन्होंने यह भी कहा था कि वे बंगाल को गुजरात नहीं बनने देंगी।
इसी तरह साल वह 2019 में राज्य में हुई हिंसा के लिए उन्होंने ‘बाहरी लोगों’ को जिम्मेदार ठहराया है। इसी तरह के क्षेत्रवाद को उन्होंने साल 2021 के चुनावों के दौरान भी बढ़ावा दिया। उन्होंने बंगाली समुदाय के भीतर भय पैदा करने की खूब कोशिश की। उन्होंने यहाँ तक कहा कि बंगाल की संस्कृति और भाषा को दूसरे राज्यों के प्रवासियों द्वारा नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

यूपी में अखिलेश यादव की सपा और राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस

साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी ने अपनी-अपनी विरासत को बचाने के लिए गठबंधन किया और इस गठबंधन को ‘यूपी के लड़के’ के रूप में प्रचारित किया। चूँकि उस दौरान राहुल गाँधी भी अमेठी से सांसद थे और अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे तो दोनों को खुद को यूपी के स्थानीय के रूप में प्रचारित किया।
इन दोनों नेताओं ने सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन पीएम मोदी, अमित शाह को परोक्ष रूप स बाहरी साबित करने की खूब कोशिश की थी। चुनावी रैलियों के दौरान वे दोनों नेताओं को गुजराती कहते थे। अखिलेश यादव ने उन्हें ‘गुजरात के गधे’ कहा था। इसका करारा जवाब देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्हें गधे से प्रेरणा लेने पर गर्व है, जो बिना किसी पूर्वाग्रह और अपनी परवाह किए दिन रात अपने मालिक की सेवा करता है। मोदी ने कहा था, “देश की जनता मालिक है। मैं उनके लिए अथक रूप से काम करता हूँ और आगे भी करता रहूँगा।”
इस तरह देश में क्षेत्रीय दल अपनी राजनीतिक स्वार्थ के लिए क्षेत्रीयता की आग को खूब हवा देते रहे हैं। चाहे वह पंजाब हो या केरल, हर जगह भाजपा से मुकाबला करने के लिए वाजिब मुद्दों के अभाव में इस तरह के मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। एमके स्टालिन ने भी Amul बनाम Aavin के नाम पर केंद्र को पत्र लिखकर अपने राज्य में एक और मुद्दे को हवा देने की कोशिश की है।

तमिलनाडु : ‘जिस जज ने राहुल गाँधी को सज़ा सुनाई, सत्ता में आने पर उसकी जीभ काट डालेंगे’: कांग्रेस नेता

सजा सुनाने वाले जज को कॉन्ग्रेस नेता की धमकी (फोटो साभार- एएनआई)
तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने ऐलान किया कि सत्ता में आते ही उस जज की जीभ काट ली जाएगी जिन्होंने राहुल गाँधी को 2 साल की सजा सुनाई थी। धमकी देने वाले कांग्रेस नेता की पहचान मणिकंदन के तौर पर हुई है। पुलिस ने कांग्रेस नेता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। कांग्रेस नेता का यह वीडियो 6 अप्रैल, 2023 का बताया जा रहा है।

तमिलनाडु के डिंडीगुल में कांग्रेस की एससी/एसटी विंग की तरफ से राहुल गाँधी को अयोग्य ठहराने के खिलाफ प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। इस प्रदर्शन में कांग्रेस पार्टी जिला प्रमुख मणिकंदन भी शामिल हुए। सड़क पर उन्होंने स्थानीय भाषा में लोगों को संबोधित भी किया। इसी संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि सूरत की अदालत ने हमारे नेता (राहुल गाँधी) को दो साल की सजा सुनाई। उन्होंने कहा, “सुनिए जस्टिस एच वर्मा जब कांग्रेस सत्ता में आएगी तो हम आपकी जीभ काट देंगे।”

डिंडीगुल पुलिस ने मणिकंदन के खिलाफ आईपीसी की धारा 153बी समेत तीन धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने धमकी से संबंधित एक वीडियो भी जारी किया है। इसमें कांग्रेस नेताओं और वर्कर्स को हाथ में कांग्रेस का झंडा व बैनर लेकर प्रदर्शन करते देखा जा सकता है। कुछ लोग भी जमा हुए हैं जिन्हें मणिकंदन संबोधित कर रहे हैं।

मोदी सरनेम पर आपत्तिजनक बयानबाजी करने के मामले में 23 मार्च, 2023 को सूरत की जिला अदालत ने राहुल गाँधी को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें जमानत भी दे दी गई। उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया था। इस बीच राहुल गाँधी की संसद सदस्यता भी चली गई थी और उनसे सरकारी बंगला भी खाली करा लिया गया था। 

तमिलनाडु : 80 महिलाएँ, 200 आपत्तिजनक वीडियो… पादरी ने नाबालिग छात्राओं को भी नहीं बख़्शा

यौन शोषण करने के आरोप में पादरी
तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में एक पादरी को सोमवार (20 मार्च 2023) सुबह उसके नागरकोइल फार्महाउस से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पादरी का नाम बेनेडिक्ट एंटो (Benedict Anto) है। नर्सिंग कॉलेज की छात्रा की शिकायत के आधार पर कन्याकुमारी पुलिस ने बेनेडिक्ट एंटो के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वह पिछले कुछ दिनों से फरार चल रहा था। एंटो सोशल मीडिया पर अपनी अश्लील फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद से चर्चा में है।

सिरो मलंकारा कैथोलिक चर्च के पादरी पर कई महिलाओं के साथ अवैध संबंध का भी आरोप है। बताया जा रहा है कि एंटो के 16 से 50 उम्र की 80 महिलाओं के साथ करीब 200 आपत्तिजनक वीडियो सामने आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कन्याकुमारी जिले की साइबर पुलिस ने एक नर्सिंग कॉलेज की छात्रा द्वारा पादरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। लगभग एक हफ्ते पहले से पादरी की अश्लील वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। छात्रा ने अपनी शिकायत में बताया था कि पादरी बेनेडिक्ट एंटो उसे ऑनलाइन परेशान कर रहा था। जब भी वह चर्च में जाती थी, एंटो उसे गलत तरीके से छूता था।

कुछ दिन बाद एंटो ने उसकी माँ से उसका मोबाइल नंबर ले लिया। फिर वह उस पर वीडियो कॉल और व्हाट्सएप चैट करने का दबाव बनाने लगा। इसके बाद उसने उसे ऑनलाइन परेशान करना शुरू कर दिया।

जब छात्रा को पता चला कि एंटो उसकी तरह दूसरी लड़कियों को भी परेशान कर रहा है, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। हालाँकि, एंटो के अलावा कुछ और लोगों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। उसने अपनी शिकायत में तीन और लोगों का नाम भी लिया है। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने एंटो और अन्य लोगों पर आईटी एक्ट, महिला उत्पीड़न और धमकी देने संबंधी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और उसकी तलाश में जुट गए।

30 वर्षीय पादरी कन्याकुमारी जिले में नागरकोइल के पास मार्तंडम का रहने वाला है। वह विभिन्न राजनीतिक समूहों से जुड़ा हुआ है, जिसमें से एक नाम तमिलर काची सीमान (NTK) है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में से एक में वह एनटीके नेता सीमन उर्फ सेबेस्टियन, जो श्रीलंका के आतंकी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) का समर्थक है उसके साथ नजर आ रहा है।

बेनेडिक्ट एंटो के फेसबुक प्रोफाइल से पता चलता है कि वह सीमन का समर्थक है। उसने अपने घर में सीमन के साथ फोटो भी लगाई हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि वह मेक्कामंडपम पिलंकलाई में आरसी चर्च में पादरी है।

13 मार्च 2023 को सोशल मीडिया पर बेनेडिक्ट एंटो की एक वीडियो खूब वायरल हुआ, जिसमें वह एक लड़की को किस करते हुए नजर आ रहा है। वहीं, पादरी ने कुछ दिन पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उस पर हमला किया और उसका लैपटॉप व मोबाइल छीन लिया।

तमिलनाडु : ‘मैं हिंदी भाषियों को पीटूँगा, जल्दी ही ये सामान पैक कर भागेंगे’: प्रशांत किशोर ने वीडियो शेयर कर मुख्यमंत्री से पूछा- इन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई


राज ठाकरे द्वारा बिहारी को निकाले जाने पर सांप्रदायिक एकता के नाम पर हंगामा करने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्ष तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के विरुद्ध हंगामा करने पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं? क्या तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के विरुद्ध हिंसा करने से अनेकता में एकता हो रही है? जब संविधान की कसम खाने वाले ही चुप रहेंगे, फिर कसम न खाने वाले हिंसा को बढ़ावा दे तो कोई हैरानी की बात नहीं। 

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा (Violence against Hindi Speaking People) की बात को वहाँ की स्टालिन सरकार (MK Stalin Government) दबाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। इस मुद्दे को उठाने वाले सोशल मीडिया यूजर से लेकर मीडिया संस्थानों एवं पत्रकारों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करते हुए उन पर मुकदमा दर्ज कर रही है। अब तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने इस मामले को उठाया है।

बिहार में राजनीतिक जमीन तलाश रहे प्रशांत किशोर ने इस मामले में शुक्रवार (10 मार्च 2023) को एक ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने स्टालिन सरकार पर सवाल उठाया और पूछा कि तमिलनाडु में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ जहर उगलने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया, “नफरत और हिंसा भड़काने के लिए फर्जी वीडियो का इस्तेमाल करने वाले लोगों से कानून के मुताबिक निपटा जाना चाहिए, लेकिन यह उन लोगों को दोषमुक्त नहीं करता है जो खुले तौर पर तमिलनाडु में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा का आह्वान कर रहे हैं। सेंथामिजन सीमन जैसे उकसाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट के साथ सीमन का एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वह हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ विष उगल रहे हैं। ट्विटर प्रोफाइल के मुताबिक, सीमन ‘नाम तमिलार काटची (NTK)’ के मुख्य समन्वयक हैं। यह तमिलनाडु की एक प्रमुख पार्टी है। इसमें वे इस वीडियो में लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं।

प्रशांत किशोर द्वारा शेयर किए गए वीडियो में सेंथामिजन सीमन तमिल लोगों के एक समूह को संबोधित करते हुए कह रहे हैं, “हिंदी भाषी लोग बदहवासी में अपना सामान पैक करके यहाँ से भागेंगे। मुझे नहीं पता कि मैं कितनों को पीटूँगा। एक हफ्ते के अंदर वे अपना सामान बाँध लेंगे।”

तमिलनाडु में हिंदी भाषी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की बात वहाँ से लौट कर आए मजदूरों ने खुद सुनाई है। वे डरे हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि तमिलनाडु में स्थानीय लोगों दूसरे राज्यों से आए लोगों का नाम-पता पूछ-पूछकर पीट रहे हैं। इतना ही नहीं, वहाँ कुछ लोगों की हत्या की भी बात कही जा रही है। हालाँकि, तमिलनाडु की पुलिस हिंसा या हत्या की किसी भी बात को पूरी तरह नकार रही है।

तमिलनाडु पुलिस द्वारा हिंसा की बात नकारे जाने के बावजूद वहाँ से चोरी-छिपे लौटकर आ रहे लोग समस्या की भयावहता के बारे में बता रहे हैं। इस खबर को प्रकाशित करने के बाद तमिलनाडु पुलिस ने कई पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बिहार के नेता पप्पू यादव ने पत्रकारों पर केस का विरोध किया था।

क्या गठबंधन के चलते नीतीश-तेजस्वी द्वारा बिहारी मजदूरों मुद्दे पर तमिलनाडु की स्टालिन सरकार को बचाया जा रहा है ?

तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के साथ जो अत्याचार हो रहा है, वो काफी परेशान करने वाला है। लेकिन जिस तरह बिहारी मजदूरों पर हो रहे हमले को फर्जी बताकर उसे दबाने की कोशिश की जा रही है, वो उससे भी ज्यादा चिंताजनक है। सेक्युलर और लिबरल मीडिया गैंग तमिलनाडु से बिहार लौट रहे मजदूरों को झूठा साबित करने पर लगा हुआ है। वहीं तमिलनाडु पुलिस वायरल तस्वीरों और वीडियो को फर्जी बताकर लोगों पर कार्रवाई भी कर रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या तमिलनाडु से अपनी जान बचाकर भागे मजदूरों पर बिहार के मुख्यमंत्री डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भरोसा नहीं है ? क्या तमिलनाडु सरकार को बचाने के लिए अपने ही राज्य के लोगों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है ? क्या एक साजिश तहत बिहार लौटे मजदूरों को झूठा साबित कर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश जा रही है? इन सवालों का जवाब पीड़ित मजदूर ही दे रहे हैं।

तमिलनाडु की स्टालिन सरकार और पुलिस बिहारी मजदूरों पर हमले को फर्जी बता रही है। लेकिन तमिलनाडु से लौट रहे बिहार के लोग स्पष्ट कह रहे हैं कि वहां हालात बहुत खराब है। हिन्दी बोलने वाले लोगों की पिटाई हो रही है। वो किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग रहे हैं। दानापुर स्टेशन पर पहुंचे कुछ बिहारी मजदूरों से मीडिया ने बात की तो उन्होंने कहा कि हमारे साथ भी मारपीट की गई। इसकी वजह से काम छोड़कर भागना पड़ा है। पीड़ितों को कहना है कि ज्यादातर लोग पीटकर आ रहे हैं। बिहार के लोगों में काफी दहशत है। पीड़ित मजदूर खुद सरकार से सवाल कर रहे हैं।

 

तमिलनाडु में काम करने वाले मुजफ्फरपुर के उपेंद्र साहनी ने जो आपबीती बताई है, वो पूरे मामलों को फर्जी बताने वालों की पोल खोल रहा है। उपेंद्र ने कहा कि वो तमिलनाडु के तिरुपुर गए थे, जहां बिहारियों को मारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी आंखों से देखा कि बिहारियों को बेरहमी से मारा जा रहा है। कहा जा रहा है कि जितने हिन्दी वाले है, वो सभी तमिलनाडु छोड़कर भाग जाए। उपेंद्र दावा कर रहे हैं कि करीब 12 लोगों की हत्या हो चुकी है। तिरुपुर से पटना तक के रेल टिकट को दिखाते हुए उपेंद्र ने कहा कि वीडियो और तस्वीरों को फेक बताया जा रहा है, लेकिन वीडियो देखकर मेरा खून खौल रहा है। वहां लोगों को निर्ममता के साथ मारा जा रहा है। स्टेशन तक बिहारियों को आने नहीं दिया जा रहा है। मजदूर तमिलनाडु में काफी परेशान है, फिर भी मजाक बनाया जा रहा है। मैंने दो सहोदर भाइयों का मडर होते हुए देखा है। हत्या करने वालों को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर रही है।

पूरे तमिलनाडु में बिहारियों पर हमले हो रहे हैं। कोयंबुत्तूर से लौटे एक बिहारी मजदूर ने कहा कि वहां बहुत मारा-पीटा जा रहा है और काम नहीं करने दिया जा रहा है। कंपनी में काम करने के बाद निकलने पर डंडे से मारा जा रहा है। कई मजदूरों को चार दिनों से खाना तक नसीब नहीं हुआ। हालात ऐसे हो गए कि अपना मेहनताना भी छोड़कर भागना पड़ रहा है। तमिलनाडु से लौटे मजदूर अब सरकार से रोजगार की मांग कर रहे हैं। वे सवाल कर रहे हैं कि अगर बिहार में रोजगार होगा तो वो मरने के लिए तमिलनाडु क्यों जाएंगे ?

कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो तमिलनाडु पुलिस और मीडिया के एक वर्ग पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

 


तमिलनाडु : बिहारियों को दी जा रही गाली, ‘वेश्या के बेटे’ से लेकर ‘महिलाओं के जननांग’ तक

तमिलनाडु में बिहारी लोगों के प्रति नस्लवाद का माहौल देखने को मिल रहा है। हाल के दिनों में कई बिहारी मजदूरों की हत्याएँ हुई हैं और अनेकों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए एक टीम तमिलनाडु भेजने का निर्णय लिया है। इस बीच सामने आया है कि कैसे तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के लिए नस्लवादी टिप्पणियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आश्चर्य समस्त सेक्युलरिस्ट गैंग की चुप्पी साधने पर हो रहा है। अगर यही अप्रिय घटना किसी भाजपा शासित राज्य में हो रही होती, यही गैंग कोहराम मचाकर आसमान सिर पर उठाकर सियापा कर रहे होते। आपातकाल में कांग्रेस ने विपक्ष की गैर-मौजूदगी में संविधान में Secular शब्द जोड़ दिया, लेकिन आज तक यह नहीं मालूम कि Secular शब्द का भावार्थ क्या होता है, वही तुष्टिकरण और नस्लभेद चल रहा है। इन छद्दम सेक्युलरिस्टों ने Secular शब्द का मजाक बना दिया है। 

मीडिया संस्थान ‘The Commune’ ने एक खबर में बताया है कि बिहार के प्रवासियों के लिए तमिलनाडु में ‘पानी-पूड़ी’ और ‘पान मसाला’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर के नस्लवाद का परिचय दिया जा रहा है। बता दें कि जब तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की हत्याओं का मामला पूरे देश में गूँज रहा था, तब बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की 70वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे।

तमिलनाडु में भाषा के प्रति कट्टरता कई बार देखी जा चुकी है। क्षेत्रवाद के नाम पर भी हिंसा तो घटनाएँ हुई हैं। ऐसे में हिंदी बोलने वाली बिहारियों के प्रति वहाँ के एक कट्टर धड़े में घृणा पहले से ही है। बता दें कि द्रविड़ राजनीति ने राज्य के एक बड़े हिस्से में कट्टरता को जन्म दिया, जिस कारण ब्राह्मण विरोधी घृणा भी फैली। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक तमिल व्यक्ति को ट्रेन में एक बिहारी को गाली देते हुए देखा जा सकता है।

इसमें पहले वो पूछता है कि तुम हिंदी हो या तमिल? फिर पीछे से एक व्यक्ति कहता है कि हम सब हिंदी हैं। इसके बाद तमिल व्यक्ति कहता है, “मैं तुम सबको मार डालूँगा। तुमलोग यहाँ आते ही क्यों हो? मोदी के मुँह में अपना $%# घुसेड़ दूँगा। ” बीच-बीच में उसने तमिल में कुछ शब्दों का प्रयोग किया, जिसके अर्थ होंगे ‘वेश्या के बेटे, महिलाओं का जननांग’ इत्यादि। इसके बाद वो एक दूसरे व्यक्ति को थप्पड़ भी मारता है।

इसके बाद एक अन्य तमिल व्यक्ति कहता दिख रहा है कि ये लोग यहाँ काम करने आते हैं, लेकिन मारपीट करते हैं। जिस व्यक्ति ने कैमरा रखा होता है, वो कहता है कि ये सब मोदी का किया-धरा है। इस वीडियो में तमिलों को बिहारियों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। ये सब एक ट्रेन के अनारक्षित बोगी की घटना है। रेलवे पुलिस ने इस संबंध में FIR दर्ज किए जाने की बात कही है। केलमबक्कम में एक बंगाली को भी चोर बता कर उस पर हमला कर दिया गया।

बिहार सरकार इन घटनाओं की जाँच के लिए 4 सदस्यीय टीम तमिलनाडु भेज रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि घटना पर उनकी नजर है। उन्होंने ‘समाचार पत्रों’ के माध्यम से इन घटनाओं की जानकारी मिलने की बात बताते हुए कहा कि बिहार के वरिष्ठ अधिकारी तमिलनाडु में अपने समकक्षों से संपर्क में हैं। तिरुप्पुर की पुलिस का कहना है कि कई फेक वीडियोज भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं, ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उधर ‘साउथ इंडियन मिल एसोसिएशन (SIMA)’ ने बिहारियों से अपील की है कि वो दक्षिण भारत को छोड़ कर अपने घर नहीं लौटें। उनका कहना है कि अगर ये जारी रहा तो तमिलनाडु की पूरी की पूरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री ध्वस्त हो जाएगी। इन घटनाओं पर ‘Confederation of Indian Textile Industry (CITI)’ ने भी चिंता जताई है। हालाँकि, तमिलनाडु का प्रशासन कह रहा है कि अधिकतर फेक चीजें ऑनलाइन शेयर हो रही हैं।

‘जिंदा है LTTE वाला प्रभाकरन’: पाझा नेदुमारन, पूर्व कांग्रेस नेता का दावा, श्रीलंका ने 2009 में मार गिराने का किया था दावा

आतंकवादी संगठन लिट्टे चीफ प्रभाकरन 
आतंकवादी संगठन लिट्टे के चीफ प्रभाकरन के जिंदा होने का दावा किया गया है। यह दावा पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और ‘वर्ल्ड कन्फेडरेशन ऑफ तमिल’ के अध्यक्ष पाझा नेदुमारन ने किया है। नेदुमारन कहा है कि प्रभाकरन उनके संपर्क में है और जल्द ही सामने आएगा। श्रीलंकाई सरकार ने मई 2009 में प्रभाकरन के मारे जाने की घोषणा की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 फरवरी 2023 को तमिलनाडू के तंजावुर में मीडिया से बात करते हुए पाझा नेदुमारन ने कहा है कि श्रीलंका की वर्तमान स्थिति और राजपक्षे सरकार के खिलाफ विद्रोह को देखते हुए प्रभाकरन के सामने आने का सही समय आ गया है। प्रभाकरन जल्द ही सबके सामने आएगा।

पाझा नेदुमारन ने यह भी कहा है कि उन्हें दुनिया भर की तमिल आबादी के सामने यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि प्रभाकरन बहुत अच्छा काम कर रहा है और वह जिंदा है। इससे प्रभाकरन को लेकर चल रहीं अफवाहों को विराम मिलेगा। प्रभाकरन जल्द ही तमिलों के बेहतर जीवन के लिए कुछ नया करेगा। इसलिए दुनिया भर के तमिलों को एकजुट हो जाना चाहिए।

नेदुमारन ने आगे कहा है कि प्रभाकरन और लिट्टे ने भारत का विरोध करने वाले किसी भी देश को कभी भी अपनी जमीन पर पैर नहीं रखने दिया। उन्होंने कहा, “न ही ऐसे किसी देश से उसका कोई संबंध रहा जो भारत का विरोधी हो। इसीलिए, भारत सरकार को श्रीलंका में चीन की मजबूत होती स्थिति को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।” उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह प्रभाकरन के परिवार के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि प्रभाकरन फिलहाल अपनी पत्नी और बेटी के साथ रह रहा है। उसको लेकर यह जानकारी वह प्रभाकरन के परिवार की स्वीकृति के बाद दे रहे हैं।

वेलुपिल्लई प्रभाकरन श्रीलंकाई तमिल गुरिल्ला और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे (LTTE) का संस्थापक है। वह श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में एक स्वतंत्र तमिल राज्य बनाने की माँग करता था। लिट्टे के कारण करीब तीन दशक तक श्रीलंका गृह युद्ध की आग में जलता रहा। हालाँकि इसके बाद श्रीलंकाई सेना ने मई 2009 में प्रभाकरन को मौत के घाट उतार दिया।

प्रभाकरन की मौत को लेकर अलग-अलग तरह के दावे होते रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि सेना से घिरने के बाद उसने खुद को गोली मार ली थी। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में सेना द्वारा उसको मौत के घाट उतारने की बात कही गई थी। हालाँकि, बीते 14 साल में प्रभाकरन के जीवित होने को लेकर पहली बार दावा किया गया है।

तमिलनाडु : ‘100 साल पुराने 3 मंदिरों को मैंने ही तोड़ा: मनमोहन सरकार में मंत्री रहे बालू ने गिनाए लक्ष्मी-सरस्वती-पार्वती मंदिर के नाम

                                                      वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट
टीआर बालू का एक बयान वायरल हो रहा है। इसमें वे तीन मंदिरों को तोड़ने की बात कर रहे हैं। डीएमके सांसद बालू मनमोहन सिंह की पहली सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अपनी पार्टी के नेता स्टालिन को छूने पर हाथ काटने की धमकी दी थी।

बालू का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। बीजेपी के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी इसे ट्वीट किया है। इस वीडियो में बालू एक सभा को संबोधित करते दिख रहे हैं। वे कहते हैं, “मैंने 100 साल पुराने सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती मंदिर को तोड़ा है। ये तीनों मंदिर मेरे निर्वाचन क्षेत्र में जीएसटी रोड (ग्रैंड सदर्न ट्रंक रोड) पर थे।”

यह वीडियो वीडियो मदुरै की एक जनसभा का बताया जा रही है। इसे ट्वीट करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने कहा है कि DMK नेताओं को मंदिर तोड़ने पर फक्र है, जबकि वे मंदिरों को सरकारी कब्ज़े से निकालना चाहते हैं। अन्नामलाई ने अपने ट्वीट में HR&CE (हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम) को भंग करने की भी बात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बालू ने सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट के समर्थन में सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। रामसेतु को नुकसान पहुॅंचने की वजह से हिंदूवादी संगठन इस प्रोजेक्ट के विरोध में हैं। वहीं डीएमके चाहती है कि यह परियोजना जल्द से जल्द शुरू हो।

इसी कड़ी में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक परियोजना के लिए मंदिरों को तोड़े जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मेरे निर्वाचन क्षेत्र में जीएसटी रोड पर सरस्वती मंदिर, लक्ष्मी मंदिर और पार्वती मंदिर को तोड़ा गया। मैंने ही इन तीनों मंदिरों को तोड़ा। मुझे पता है कि मुझे वोट नहीं मिलेंगे, लेकिन मुझे यह भी पता है कि मुझे वोट कैसे मिलेंगे। मेरे समर्थकों ने मुझे चेतावनी भी दी थी कि अगर मंदिर तोड़े गए तो मुझे वोट नहीं मिलेंगे। लेकिन मैंने उनसे कहा कि कोई दूसरा रास्ता नहीं है।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बालू ने अपने संबोधन में मस्जिद का भी जिक्र किया। साथ ही यह भी कहा कि मंदिर गिराने से नाराज लोगों को उन्होंने उससे भी बड़े और भव्य मंदिर बनवाने का भरोसा दिया और उसे बनवाया भी। गौरतलब है कि DMK के वरिष्ठ नेता बालू ने इससे पहले शनिवार (28 जनवरी 2023) को अपनी पार्टी के अध्यक्ष स्टालिन को छूने पर हाथ काट लेने की धमकी दी थी।

TV शो में फिर उगली गई हिंदू देवताओं के लिए घृणा

मदुरई में हुई हिंदूफोबिक रैली का टीवी शो में बचाव
आए दिन लगभग हर रोज सोशल मीडिया, टीवी और विभिन्न मंच पर हिंदू धर्म के देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया जाता है। ऐसा ही एक मामला फिर देखने को मिला है। जहाँ तमिलनाडु के विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) पार्टी के प्रवक्ता विक्रमन ने भगवान कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने बीते दिनों उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा मदुरई में की गई रैली में हिंदू विरोधी नारों का बचाव करते हुए अपनी टिप्पणी की। इस रैली में पूछा गया था कि आखिर कृष्णा और अय्प्पा भगवान कैसे हो सकते हैं।

हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने से हिन्दू विरोधी क्या साबित करना चाहते हैं? दूसरे, हिन्दू देवी-देवतों पर अभद्र टिप्पणी करने वाले क्या अपने मृतक शरीर को अग्नि को समर्पित नहीं  करने पर अपनी इच्छा जाहिर करेंगे, क्योकि अग्नि भी भगवान है? तीसरे, अपने अंतिम समय राम नाम सत्य है नहीं बोले जाने पर भी कुछ कहकर जाएंगे या फिर अपने अंतिम समय इन्ही भगवानों की शरण में जाएंगे?

टाइम्स नॉउ पर डिबेट के दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण पर गोपियों ने अनैतिक संबंध रखने का आरोप लगाया। विक्रमन ने कहा, “कृष्णा का युवा करियर वृंदावन की महिलाओं के साथ अवैध (अनैतिक) प्रेमसंबंधों से भरा हुआ था। इसे रासलीला कहा गया।” इस दौरान उन्होंने ‘पुराण’ का हवाला दिया।

हिंदू कार्यकर्ता राहुल ईश्वर ने इस पर दुख और आपत्ति जताते हुए कहा कि वो इस तरह से किसी के भगवान का अपमान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पुराण एक प्रतीकात्मक वर्णन है। उसे वैसे ही नहीं लिया जा सकता, जैसे कि इसमें कहा गया कि रावण के दस सिर थे। इसका मतलब यह नहीं हुआ कि उसके वाकई में दस सिर थे। इसका अर्थ यह होता है कि उसके पास दस सिर के बरारबर बुद्धिमत्ता थी। इससे यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि वह काफी विद्वान था। 

इसी तरह जब कोई कहता है कि अयप्पा, शिव और विष्णु के पुत्र हैं तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि शिव ने विष्णु से शादी की थी। यह उन दोनों की चमत्कारिक आध्यात्मिक शक्ति से उत्पन्न हुए थे। इसी तरह कृष्ण का गोपियों के साथ आध्यात्मिक संबंध था न कि अनैतिक। हिंदू देवी-देवताओं के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना हिंदूफोबिया के अलावा और कुछ भी नहीं है। इस तरह के लोग हिंदू सभ्यता और मान्यता को नीचा दिखाना चाहते हैं। इसलिए इस तरह की अभद्र, अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं।

पिछले दिनों गुजरात के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट फैकेल्टी एक प्रदर्शनी में कुछ छात्रों द्वारा लगाई गई हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें आपत्तिजनक थीं। प्रदर्शनी में हिंदू देवी-देवताओं और भारत के कुछ राष्ट्रीय चिन्हों के चित्रों को रेप केसों से जोड़ा गया था। इतना ही नहीं, हिंदू देवी और देवताओं के चित्र बनाने के लिए उन अखबारों का प्रयोग किया गया था, जिन पर रेप की खबरें छपी हुई थी।


तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हुई 500 साल पुरानी भगवान हनुमान की मूर्ति आएगी भारत, बिहार से चोरी हुई भगवान बुद्ध की मूर्ति भी इटली ने लौटाई

              500 साल पुरानी भगवान हनुमान की मूर्ति अब लौटेगी देश (फोटो साभार: @kishanreddybjp)
तमिलनाडु में करीब एक दशक पहले चोरी हुई भगवान हनुमान की मूर्ति मिल गई है। 14वीं-15वीं शताब्दी के विजयनगर साम्राज्य के दौरान की इस प्राचीन मूर्ति को चुराकर तस्करी के जरिए विदेश में बेचा गया था। केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी का कहना है कि यह मूर्ति विदेश से जल्द भारत लाई जाएगी। 500 साल पुरानी इस मूर्ति को एक व्यक्ति ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में खोज निकाली है।

केंद्रीय मंत्री ने मूर्ति के बारे में दी जानकारी

केंद्रीय मंत्री ने अपने एक ट्वीट में फरवरी 23 को कहा, “पाँच सौ साल पुरानी भगवान हनुमान की कांस्य प्रतिमा को तमिलनाडु के एक मंदिर से चुरा लिया गया था। इसे अब भारत लाया जाएगा। चुराई गई प्रतिमा को अमेरिकी होमलैंड सेक्युरिटी ने प्राप्त किया। यूएस सीडीए ने अब इसे कैनबरा में भारतीय हाई कमीशन को सौंप दिया है।” रेड्डी ने आगे कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारतीय धरोहरों को वापस लाने का काम चलता रहेगा।

2012 में तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हुई थी

ASI के मुताबिक 9 अप्रैल 2012 को इस मूर्ति को अरियालुर जिले के वेल्लूर गाँव में स्थित वर्धराजा पेरूमल मंदिर से चुरा लिया गया। साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया में इसकी करीब 29 लाख रुपए में नीलामी हुई। बाद में जाँच पड़ताल के बाद पता चला कि यह मूर्ति तमिलनाडु के मंदिर से चुराई गई है। सूत्रों का कहना है कि मूर्ति की नीलामी करने वाले ऑक्शन हाउस और इसे खरीदने वाले व्यक्ति को यह पता नहीं था कि यह मूर्ति भारत से चुराकर यहाँ लाई गई है। पिछले सात वर्षों में सरकार ने ऐसे करीब 212 धरोहरों एवं कलाकृतियों को वापस लाने में सफलता पाई है।
इसके अलावा, दशकों पहले बिहार से चोरी हुई भगवान बुद्ध की एक प्रमुख कलाकृति इटली में प्राप्त हुई है। बिहार के देवीस्थान कुंडलपुर मंदिर से चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर पद्मपाणि (बुद्ध) की मूर्ति को मिलान में भारतीय वाणिज्य दूतावास को सौंप दिया गया है। एक महीने के भीतर इसे भारत पहुँचने की भी संभावना है।

कनाडा से वापस लाई गई थी 100 साल पहले चोरी हुई माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति

पिछले दिनों तकरीबन 100 साल पहले चोरी हुई माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति को कनाडा से वापस लाया गया। ऐसा कहा गया कि मूर्ति को साल 1913 में काशी के एक घाट से चोरी किया गया था। फिर यहाँ से इसे कनाडा ले जाया गया। इसके बाद यह मैकेंजी आर्ट गैलरी में रेजिना विश्वविद्यालय (Regina University) के संग्रहालय में रखी गई थी।