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उत्तर प्रदेश : दलित बच्चियों के कपड़े उतार प्राइवेट पार्ट नोचता मोहम्मद अली, शाजिया की धमकी: बाथरूम में मिले कंडोम, 13 का यौन शोषण; दलितों के हितैषी खामोश

किसी हिन्दू द्वारा किसी दलित पर अत्याचार होने पर सडकों पर उतरने वाला दलित प्रेमी गैंग शाहजहांपुर में मुस्लिम द्वारा दलित बच्चियों का यौन शोषण करने पर क्यों खामोश है? कहाँ गया उनका दलित प्रेम? ऐसी जात-पात की गन्दी सियासत करने पर तुम्हे शर्म आनी चाहिए। अगर यही काम किसी हिन्दू ने किया होता क्या तब भी इसी तरह खामोश रहते? आखिर ऐसी दोगली और गन्दी सियासत क्यों?

उत्तर प्रदेश के शाहजहॉंपुर जिले में 12 बच्चियों के यौन शोषण का मामला सामने आया है। पीड़िताओं में कुछ दलित समुदाय से भी हैं। मामले में मुख्य आरोपित मोहम्मद अली है जो कम्प्यूटर टीचर के पद पर तैनात हैं। इसी स्कूल की सहायक अध्यापिका शाजिया अली पर भी मोहम्मद अली की करतूतों को छिपाने का आरोप है। घटना सोमवार (8 मई, 2023) की है। पुलिस ने बताया कि प्रिंसिपल सहित कुल 3 लोगों पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है।

मुख्य आरोपित मोहम्मद अली को गिरफ्तार कर लिया गया है। अली की बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। स्कूल के एक अन्य शिक्षक ने बताया कि मोहम्मद अली सिर्फ हिन्दू छात्राओं को ही निशाना बनाता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला तिलहर थाना क्षेत्र के रायखुर्द का है। यहाँ के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली 13 बच्चियों के अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल में उनकी बेटियों का यौन शोषण किया जाता है। स्कूल में कम्प्यूटर की क्लास लेने वाले मोहम्मद अली पर आरोप है कि वह बच्चियों के प्राइवेट पार्ट से छेड़छाड़ करता है। स्कूल के बाथरूम से बाल, ब्लेड और कंडोम भी मिलने की बात कही जा रही है। स्कूल की बच्चियों बाथरूम जाने से भी डरती थीं।

इसी स्कूल की सहायक टीचर शाजिया पर भी इस बात का दबाव बनाने का आरोप है कि वो अपने साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के बारे में किसी को कुछ न बताएँ।

पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद अली और शाजिया के साथ स्कूल प्रिंसिपल अनिल कुमार को भी नामजद किया है। अनिल कुमार पर आरोप है कि उन्होंने शिकायत होने के बावजूद शाजिया और मोहम्मद अली पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसी स्कूल की एक अन्य पर महिला टीचर नीरजा ने इस घटना को सत्य बताया है। उन्होंने कहा कि बच्चियों ने सबसे पहले उन्हें ही अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार की जानकारी दी। महिला टीचर के मुताबिक, स्कूल में ‘लव जिहाद’ चलाया जा रहा था। आरोप है कि मोहम्मद अली अपनी बात न मानने पर बच्चियों को फेल करने की भी धमकी देता था।

आरोप लगाने वाली अध्यापिका के मुताबिक मोहम्मद अली न सिर्फ बच्चियों के प्राइवेट पार्ट को छूता था उसे नोचता-खसोटता भी था। पीड़ित बच्चियाँ अलग-अलग क्लास की हैं। एक पीड़िता की माँ ने बताया कि उनकी बेटी का कच्छा निकाल कर आरोपित ने किसी से कुछ भी न बताने की धमकी दी। आखिरकार इस मामले में ग्राम प्रधान की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है। तिलहर के डिप्टी SP प्रियांक जैन के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपितों पर 354, 352, 120 B, SC/ST और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी शाहजहाँपुर कुमार गौरव ने बताया कि मोहम्मद अली को बरख़ास्त करने की भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहीं अन्य नामजद प्रिंसिपल अनिल कुमार और अध्यापिका शाजिया को सस्पेंड कर दिया गया है।

खात्रा हाशमी को तालिबान ने बनाया ‘जिंदा लाश’

अफगानिस्तान की खात्रा हाशमी को तालिबानियों ने अँधा कर दिया,
अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद महिलाओं की स्थिति खासी दयनीय हो गई है। तालिबान से पीड़ित रहीं एक महिला अधिकारी ने अपना दर्द बयाँ किया है। वो फ़िलहाल दिल्ली में रह रही हैं। पैसों के लालच में उसके अब्बू ने मात्र 7 साल की उम्र में बड़े उम्र के व्यक्ति के साथ उसकी शादी तय कर दी थी और 12 साला की उम्र में निकाह करा दिया था। अब्बू द्वारा न पढ़ाने-लिखाने के बावजूद वो अपनी मेहनत से अफगानिस्तान में पुलिस अधिकारी बनीं।

हालाँकि, अफगानिस्तान में एक महिला का इस तरह से तरक्की करना तालिबानियों को रास नहीं आया और वो फोन कॉल कर-कर के धमकियाँ देने लगे। 2020 के शुरुआत में पुलिस थाने से घर जाते समय उन पर गोलीबारी की गई। 9 गोलियाँ उनके शरीर पर लगीं। ये वो समय था, जब तालिबान मुल्क पर कब्जे की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। उनके शरीर में 10 बार चाकू से वार किया गया। बेहोशी की हालत में उनकी दोनों आँखें निकाल ली गईं। महिला ने कहा कि अब वो ‘ज़िंदा लाश’ बन कर रह गई हैं।

उक्त महिला का नाम खात्रा हाशमी है, जो फ़िलहाल ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (NAB)’ के लिए काम करती हैं। ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनके साथ ये दरिंदगी हुई थी, तब वो गर्भवती थीं। जब उन्हें होश आया, तो वो पूरी तरह अंधी हो चुकी थीं। वो अपना पहला वेतन भी अपने आँखों से नहीं देख पाई थीं। मात्र 3 महीने की नौकरी के बाद उनके साथ ये वीभत्स्ता हुई थी। उनके शरीर में अब भी बुलेट के टुकड़ों की वजह से दर्द रहता है, जिसका इलाज भी चल रहा है।

 उनकी 2 साल की बेटी भी है, जो उनके साथ ही रहती है। उनका कहना है कि महिलाओं-बच्चों की तालिबान से हिफाजत के लिए ही पुलिस फ़ोर्स जॉइन किया था, लेकिन हुआ कुछ और ही। उनका कहना है कि तालिबानी ये नहीं चाहते कि महिलाएँ नौकरी करें, वो चाहते हैं कि लड़कियाँ घर में कैद रहें। 3 नकाबपोश तालिबानियों ने उन पर हमला किया था। उनके पहले पति, दो बेटे और एक बेटी अफगानिस्तान में ही रहती है।

तालिबानी उनसे पूछने आते हैं कि उनकी अम्मी लौटी या नहीं। दिल्ली में खात्रा हासमी ने दूसरी शादी भी की है। पहले पति की उम्र 80 साल से अधिक हो गई है और वो उन्हें तलाक भी दे चुके हैं। फिर भी वो और बच्चे पैदा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उन बच्चों से मिलने का उनका दिल करता है, लेकिन ये सम्भव नहीं हो पाता। खात्रा हाशमी को तालिबानी अब भी खोज रहे हैं। जब उन पर हमला हुआ था, तब उन्होंने अपनी साँसें रोक ली थीं और तालिबानी उन्हें मरा हुआ समझ कर चले गए थे।


वेश्याओं के साथ सेक्स करते हैं मोहम्मद शमी: विरोध करने पर मेरी पिटाई करते थे : बीवी हसीन जहाँ

क्रिकेट जगत में शायद मोहम्मद शमी ही ऐसे खिलाडी हैं, जिनका पति-पत्नी विवाद काफी समय से चर्चा में चल रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट में बीबी द्वारा वैश्याओं के साथ सेक्स करने की बात ने शमी के चरित्र पर ही कीचड़ फेंक सनसनी मचा दी है। 
भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी वेश्याओं के साथ संबंध बनाते हैं। विदेशी दौरों पर होटल रूम में वेश्याओं को लेकर आते हैं। यह बात उनकी बीवी हसीन जहाँ ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कही है। उन्होंने शमी की गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

याचिका में कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें शमी के खिलाफ वारंट पर रोक के सत्र न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा गया था। कोलकाता हाईकोर्ट ने इस संबंध में 28 मार्च 2023 को हसीन जहाँ की याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल की एक स्थानीय अदालत द्वारा शमी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाने की चुनौती दी थी।

क्रिकेटर की बीवी ने अपने वकील दीपक प्रकाश, नचिकेता वाजपेयी और दिव्यांगना मलिक वाजपेयी के जरिए मंगलवार (2 मई 2023) सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें उन्होंने (हसीन जहाँ) शमी पर दहेज की माँग करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि शमी बीसीसीआई से जुड़े विदेशी दौरों पर बोर्ड की तरफ से मुहैया कराए गए होटल के कमरों में वेश्याओं को लाते थे। विरोध करने पर हसीन जहाँ की पिटाई करते थे। उन्हें टॉर्चर करते थे।

हसीन जहाँ के अनुसार, शमी ने वेश्याओं के संपर्क में रहने और उनसे अवैध संबंध बनाने के लिए अपने दूसरे मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। उस फोन को कोलकाता की लाल बाजार पुलिस ने जब्त कर लिया है। याचिका में यह भी कहा गया है, “शमी अभी भी वेश्याओं के साथ यौन गतिविधियों में शामिल हैं। पिछले 4 साल से इस मामले में सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है। शमी निचली अदालत में पेश नहीं हुए और जमानत के लिए आवेदन भी नहीं किया।”

29 अगस्त 2019 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अलीपुर द्वारा शमी के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था। क्रिकेटर ने उस आदेश को सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके बाद 9 सिंतबर 2019 को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और आपराधिक मुकदमे की पूरी कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद शमी की बीवी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था, जहाँ उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

साल 2018 में मोहम्मद शमी के खिलाफ उनकी बीवी हसीन जहाँ खुलकर मीडिया के सामने आई थीं। तब उन्होंने शमी पर न सिर्फ अपनी प्रताड़ना, बल्कि मैच फिक्सिंग का भी आरोप लगाया था। उस समय शमी ने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि उनकी बीवी को कौन भड़का रहा है। मैच फिक्सिंग के आरोपों पर शमी ने कहा था कि वे देश से गद्दारी के बजाए मरना पसंद करेंगे। बाद में शमी और हसीन जहाँ अलग-अलग हो गए थे। कोलकाता की अलीपुर जिला अदालत ने 23 जनवरी 2023 को अपने निर्णय में मोहम्मद शमी को आदेश दिया था कि वो हर महीने हसीन जहाँ को 50 हजार रुपए गुजारा भत्ता के तौर पर दें।

‘मेरे पिता ही मेरा यौन शोषण करते थे’ : स्वाति मालीवाल, अध्यक्ष, दिल्ली महिला आयोग

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने अपने पिता पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। स्वाति इंडिया हैबिटेट सेंटर में शनिवार (11 मार्च 2023) को दिल्ली महिला आयोग द्वारा आयोजित एक प्रोग्राम में पहुँची हुई थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी माँ, मौसी, मौसा जी और नाना-नानी ने उन्हें इस मुसीबत से बाहर निकाला। स्वाति ने अपने पिता पर पिटाई का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि अपने पिता से बचने के लिए वे बिस्तर के नीचे छिप जाती थीं।

दिल्ली महिला आयोग द्वारा आयोजित समारोह के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए स्वाति मालीवाल ने कहा, “मेरे पिता मेरा यौन शोषण किया करते थे जब मैं छोटी थी। बहुत मारते-पीटते थे।” स्वाति ने कहा कि जब वे घर आते थे तो बहुत डर लगता था। कई बार बिस्तर के नीचे छिप जाती थी। प्लानिंग करती थी कि किस तरीके से महिलाओं को उनका हक दिलाऊँगी। महिलाओं और बच्चियों का शोषण करने वालों को सबक सिखाऊँगी।

पत्रकारों से बात करते हुए स्वाति आगे कहती हैं, “मुझे आज भी याद है। वो (पिता) मेरी चोटी पकड़ कर दीवार पर सिर मार देते थे। बहुत चोट लगती थी। खून बहता रहता था। बहुत तड़पती थी।” उन्होंने कहा कि अत्याचार सहने वाला इंसान दूसरें के दर्द को समझ पाता है। उसके अंदर एक ऐसी आग पैदा होती है कि पूरा सिस्टम हिला पाता है।

स्वाति दिल्ली महिला आयोग द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में शिरकत करने पहुँची थीं। दिल्ली महिला आयोग की तरफ से संघर्ष करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। अवार्ड पाने वाली महिलाओं को संबोधित करते हुए स्वाति ने कहा कि महिलाओं को किसी भी तरह का अत्याचार नहीं सहना चाहिए। शोषण कोई घर का व्यक्ति करे या बाहर का उसके खिलाफ आवाज जरूर उठानी चाहिए।

मदरसा प्रिंसिपल निजामुद्दीन की मसाज : लुँगी घुटनों के ऊपर, जांघ तक तेल की मालिश

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में महिला से मसाज करवाते मदरसे के प्रिंसिपल का वीडियो वायरल (चित्र - वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में एक व्यक्ति का किसी महिला से मसाज करवाने का वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो लगभग 1 मिनट 41 सेकेण्ड का है। इस वीडियो में एक मौलानानुमा व्यक्ति चारपाई पर लेटा हुआ है जिसका मसाज सलवार सूट पहने एक महिला कर रही है। दावा किया जा रहा है कि मसाज करवाने का शख्स एक मदरसे का प्रिंसिपल है जिसका नाम निजामुद्दीन है, जबकि मसाज करने वाली महिला उसी मदरसे में बच्चे के लिए खाना आदि बनाने वाली रसोइयाँ है। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

हालाँकि यह वीडियो कब का है इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। मीडिया रिपोर्ट्स ही यह दावा कर कर रही हैं कि वायरल हो रहा वीडियो एक मदरसे का है। सिद्धार्थनगर जिले के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है। उन्होंने वीडियो में दिख रहे प्रिंसिपल को नोटिस देते हुए स्पष्टीकरण माँगा है। उनका कहना है कि जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वीडियो मालिश हो रहे कमरे में मौजूद किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा बनाई गई है। दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि जिस मदरसे की यह वीडियो है वह सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। यहाँ पर दीनी तालीम के अलावा छात्रों को आईटीआई व सिलाई और कढ़ाई की भी ट्रेनिंग दी जाती है। सिद्धार्थनगर पुलिस ने भी इस वीडियो का संज्ञान लिया है। पुलिस ने SHO बांसी को जाँच और जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में जानने के लिए जब SHO बांसी को सम्पर्क किया तब उनका फोन बंद आया। इसी मामले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का भी फोन स्विच ऑफ़ बताया। उपरोक्त अधिकारियों के वर्जन आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा। फिलहाल, बांसी सिद्धार्थनगर के हिन्दू पदाधिकारी हरिशंकर चौरसिया ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग हिन्दू संतों में दिन भर कमी निकालते हैं। उन्होंने कहा कि वो पुलिस से आरोपित प्रिंसिपल पर कड़ी कार्रवाई की आशा करते हैं।

ईरान : उल्टी, बदन दर्द, तेज बुखार…: लड़कियाँ न जा पाएँ स्कूल इसलिए उन्हें दिया गया जहर, 4 महीने में 50+ छात्राएँ बीमार

ईरान में स्कूल जाने वाली कई लड़कियों को जहर देकर मार डालने की साजिश का खुलासा हुआ है। यह करतूत किसकी है इस बात का पता फ़िलहाल नहीं चल पाया है। इस मामले में अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि भी नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि इस हरकत के पीछे कुछ कट्टरपंथी हैं जो ईरान के स्कूलों को बंद करवाना चाह रहे हैं। अभी तक सभी बीमार छात्र सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोम शहर में इस बात का खुलासा तब हुआ जब स्कूल जाने वाली लड़कियाँ एक के बाद एक बीमार होने लगीं। कुछ ही समय बाद इन लड़कियों की सँख्या 50 पहुँच गई। पहली घटना नवम्बर 2022 की बताई जा रही। तब कोम शहर के ही एक स्कूल में एक साथ लगभग 18 लड़कियों के बीमार होने की घटना सामने आई। तब उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। यहाँ उन सभी लड़कियों को उलटी, पेट दर्द, हाथों-पैरों में तेज दर्ज के साथ साँस लेने में दिक्कत महसूस हुई थी।

अंतिम घटना 22 फरवरी 2023 (बुधवार) को कोम शहर के एक स्कूल में दर्ज की गई थी। यहाँ एक ही स्कूल की 15 लड़कियों की तबियत अचानक बिगड़ गई थी। सभी में एक जैसी बीमारी के लक्षण पाए गए थे। पहली और अंतिम घटना के बीच कई अन्य स्कूलों में इसी प्रकार की वारदात हुई। लगभग हर वारदात में पीड़ित छात्रों ने एक जैसी परेशानी महसूस की। हालाँकि बीमार होने वाले छात्रों में कुछ लड़के भी थे लेकिन लड़कियों की तादाद अधिक थी।

इन घटनाओं के बाद कुछ अभिभावकों ने लड़कियों को जहर दिए जाने की आशंका जताई। इस शक पर अधिकारियों ने जाँच शुरू की। शुरुआती जाँच में स्थानीय अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार का जहर न मिलने की जानकारी दी गई। लड़कियों के माता-पिता इस जाँच से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया। हालाँकि गनीमत से अभी तक इस हरकत से किसी छात्रा की मौत नहीं हुई लेकिन लोगों में काफी नाराजगी फ़ैल गई। लोगों की नाराजगी देखते हुए ईरान सरकार ने इस मामले की बड़े स्तर पर जाँच करवाई।

इस जाँच के बाद ईरान के उप शिक्षा मंत्री युनेस पनाही ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ लोगों द्वारा छात्रों को केमिकल के माध्यम से जहर दिया जा रहा था। उन्होने आगे बताया कि छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योकि घटना में प्रयोग हुआ केमिकल बहुत हानिकारक नहीं है। अभी तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

‘पहाड़न है, घंटे के हिसाब से देती है…’ को लेकर यूट्यूबर भुवन बाम पर NCW ने दिए FIR के आदेश

भुवन बाम की महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी पर NCW सख्त
(फोटो साभार: हिंदुस्तान टाइम्स/NCW)
कॉमेडी के नाम पर द्विअर्थी संवाद करने वाले यूट्यूबर भुवन बाम की मुश्किलें बढ़ रही हैं। पहाड़ी महिलाओं पर भुवन द्वारा की गई टिप्पणी पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया है और इस मामले में कार्रवाई को लेकर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखी है। इसके साथ ही केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस संबंध में गुरुवार (31 मार्च 2022) को ट्वीट कर कहा, “NCWIndia ने इसका संज्ञान लिया है। अध्यक्ष रेखा शर्मा ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में सख्त कार्रवाई करने के लिए लिखा है। NCW ने महिलाओं की गरिमा के उल्लंघन के लिए YouTube चैनल के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव को भी लिखा है।”

भुवन बाम का वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया और इसे महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की थी। पहाड़ी पांडा चैनल के आशीष नौटियाल ने इस क्लिप को साझा करते हुए महिला आयोग अध्यक्ष रेखा शर्मा से सवाल किया है कि क्या वो इस तरह महिला विरोधी टिप्पणी करने वाले भुवन बाम के ख़िलाफ़ कार्रवाई के निर्देश दे सकती हैं।

भुवन बाम का विवादित वीडियो

25 मार्च 2022 को ‘बीबी की वाइन्स’ नाम के अपने यूट्यूब चैनल पर भुवन बाम ने एक वीडियो अपलोड किया था। ‘ऑटोमैटिक गाड़ी’ वाले टाइटल के साथ अपलोड किए गए इस वीडियो में भुवन बाम को पिता के कैरेक्टर में गाड़ी के नाम पर द्विअर्थी बातें करते सुना जा सकता है। वे कहते हैं- “दो लाख का बजट है मेरा। कोई मॉडल बढ़िया बताइए।” इसके बाद सामने से सवाल-जवाब होते हैं और पहाड़न शब्द आता है और फिर वीडियो में ‘कितना देती है’… ‘पीछे से भी ले सकते हैं’ … ‘जिगोलो’ जैसे शब्द यूज करते सुना जा सकता है।

30 मार्च तक इस वीडियो को 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया है। वहीं, इसे 1.9 मिलियन लाइक्स मिल चुके हैं। भुवन बाम का चैनल भी भारत के जाने माने यूट्यूब चैनल्स में से एक है। उनके खुद 25.3 मिलियन सब्सक्राइबर हैं। हालिया वीडियो उनकी 7 मिनट 15 सेकेंड की है। इसमें पहाड़न महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी को 5 मिनट 39 सेकेंड के बाद सुन सकते हैं। यही वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है।

‘…यहीं बंधक बना लेंगे’: झारखंड मुक्ति मोर्चा के MLA ने दी महिला थानेदार को धमकी

पुलिसकर्मियों को धमकाते हुए झारखंड JMM विधायक जिग्गा सोरो (चित्र साभार - संजीवनी समाचार)

झारखंड के राँची में JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के विधायक जिग्गा होरो ने एक महिला थानेदार को बंधक बना लेने की धमकी दी है। महिला इंस्पेक्टर का नाम ममता कुमारी है। इस धमकी का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है।

विधायक जिग्गा होरो की लगातार डांट सुन कर महिला पुलिस अधिकारी वहाँ से चुपचाप चली गईं। इसके बाद भी विधायक मौके पर मौजूद बाकी पुलिसकर्मियों को डांटते रहे। वीडियो गुरुवार (17 मार्च) का बताया जा रहा है। विधायक जिग्गा होरो के अनुसार किसी का उग्रवादी बनना उसकी मजबूरी होती है। 

धमकी देने वाले विधायक जिग्गा सुसारन होरो (Jiga Susaran Horo) सिसई विधानसभा से निर्वाचित हैं। वायरल वीडियो में वो महिला इंस्पेक्टर को कह रहे हैं:

“ज्यादा होशियार मत बनो, नहीं तो यहीं बंधक बना लेंगे। किस चीज की ड्यूटी करते हो आप जो टाइम से एक्शन नहीं लेते। छेड़ो नहीं, वरना छोड़ेगा नहीं। तमाशा बना कर रखे हैं आप लोग। ड्रामा मत कीजिए, रात को आप को हम फोन किए थे। कोई गवर्नर हैं क्या? जब मामला कोर्ट में है तो आप छापेमारी कर रहे हैं। हम बता दे रहे हैं कि हम आपकी छापेमारी करवा देंगे।”

इस दौरान महिला पुलिसकर्मी ने अपनी सफाई में कोई जवाब देना चाहा तो उसे डाँट कर चुप करा दिया गया।

उग्रवादी बनना मजबूरी – JMM विधायक

JMM विधायक जिग्गा होरो ने पुलिसकर्मियों को डांटते हुए आतंकी बनना किसी की मजबूरी बताया है। उन्होंने कहा, “आप लोग चाहते हैं कि यहाँ का लड़का आतंकवादी बन जाए। फिर वो जंगल चला जाए। मजबूरी में आदमी क्या करेगा। जंगल चला जाएगा। उग्रवादी बनेगा और लूटेगा। मारेगा और काटेगा। पढ़ने के लिए जगह नहीं मिलेगा। वैसे भी यहाँ अतिक्रमण किया जा रहा है। यहाँ का जंगल लूटा जा रहा है। यहाँ के आदिवासियों की जमीनों को लूटा जा रहा है। अगर यूथ छेड़ोगे तो राँची को पागल कर देगा। यही चाहते हो क्या कि बच्चे बदमाश बन जाएँ। जब ये जंगल चले जाएँगे तब आप छापेमारी करिएगा?”

विधायक का बयान और झारखंड पुलिस एसोसिएशन

महिला पुलिसकर्मी ममता कुमारी के खिलाफ JMM विधायक जिग्गा होरो की बयानबाजी के खिलाफ झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने रोष जताया है। एक पत्रकार वार्ता में झारखंड पुलिस एसोसिएशन के केंद्रीय महामंत्री अक्षय कुमार राम ने कहा, “महिला थाना प्रभारी के ऐसा व्यवहार निंदनीय ही नहीं बल्कि अपराध के समान है। विधायक का ऐसा बर्ताव सिर्फ महिला पुलिसकर्मी ही नहीं बल्कि तमाम महिलाओं का भी अपमान है।”
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने इसकी लिखित शिकायत झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो से करने की बात की है। साथ ही विधायक जिग्गा होरो के आचरण की जाँच कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग भी की जाएगी।
16 मार्च को झारखंड की राजधानी राँची में लगभग 250 लोगों की भीड़ नवीन सरना कॉलेज के हॉस्टल को खाली करवाने पहुँची थी। इस भीड़ का नेतृत्व बिशु उरांव नाम का व्यक्ति कर रहा था, जो हॉस्टल की जमीन को अपना बताता है। इस दौरान हॉस्टल में जम कर हंगामा हुआ। हॉस्टल के पीछे की दीवार को तोड़ दिया गया। वहाँ मौजूद छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की गई।
घटना के बाद बिशु उरांव समेत 250 अज्ञात के खिलाफ सुखदेवनगर थाने में FIR दर्ज की गई। इन सभी हमलावरों पर हथियारों से लैस होने और 50 लाख की रंगदारी माँगने का भी आरोप लगा है। विधायक जिग्गा होरो इस मामले में पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। उनके साथ मांडर विधायक बंधु तिर्की, खिजरी विधायक राजेश कच्छप, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक सुखदेव भगत और अन्य नेता मौजूद थे।


‘स्तनों को घूरते हैं, अश्लील कमेंट करते हैं’- एलन मस्क की कंपनी टेस्ला में महिला कर्मचारियों का यौन उत्पीड़न

                                                     साभार: Reuters
दुनियां का शायद ही ऐसा कोना होगा, जहां महिलाओं का यौन शोषण न होता हो। टेस्ला इंक अपनी इलेक्ट्रिक कार के लिए दुनिया भर में मशहूर है। एलन मस्क के स्वामित्व वाली टेस्ला से जुड़ी एक खबर फिर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ की महिला कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। इलेक्ट्रिक कार निर्माता के कैलीफोर्निया स्थित फ्रेमोंट कारखाने में काम करने वाली एक महिला, जेसिका बार्राजा ने इसके खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

38 वर्षीय जेसिका बार्राजा ने ​ऑकलैंड की एक अदालत में 18 नवंबर 2021 को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि टेस्ला में नाइट शिफ्ट में काम करने के दौरान सहकर्मियों और सुपरवाइजर ने उन पर और अन्य महिलाओं पर कई बार आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की और उन्हें गंदे इशारे किए। बार्राजा कहती हैं कि उन्होंने कई बार कंपनी की एचआर से सुपरवाइजर और सहकर्मियों के खिलाफ शिकायत की, लेकिन उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायत के अनुसार, वह तीन साल से फैक्टरी में किए जा रहे इस तरह के व्यवहार से मानसिक रूप से परेशान हैं और वह यह सोचकर काम पर लौटने से डरती हैं कि उन्हें किसी भी प्रकार से शारीरिक नुकसान पहुँचाया जा सकता है। बर्राजा का कहना है कि वह अब पहले जैसी नहीं रही हैं और अब वह दवा और थैरेपी पर निर्भर हैं।

शादीशुदा और दो बच्चों की माँ बर्राजा का कहना है कि कंपनी के पुरुष कर्मचारी उन्हें रोजाना प्रपोज करते हैं। उनके स्तनों को घूरते हैं और ‘ओनियन बूटी’ या ‘कोक बॉटल’ कहकर कमेंट करते हैं। इतना ही नहीं, जानबूझकर उनके शरीर को छूने का प्रयास करते हैं और इसे एक एक्सीडेंट के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि 28 सितंबर को एक आदमी उनके पीछे झुक गया और अपना पैर उसकी जांघों के बीच रख दिया।

टेस्ला ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बार्राजा का मामला सबसे पहले ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने कवर किया था। हालाँकि, यह पहला मामला नहीं है जब टेस्ला पर इस तरह के आरोप लगे हैं। टेस्ला पर इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। फ्रेमोंट कारखाने में भेदभाव के आरोप वर्षों से लगते रहे हैं, लेकिन अधिकांश कर्मचारी इन्हें सामने लाने से डरते हैं और किसी से इसका जिक्र करने से बचते हैं।

पाकिस्तान : मिलाद-उल-नबी के जुलूस में महिला को ‘हूर’ बना कर लगाई प्रदर्शनी

पाकिस्तान में बिना बुर्के के महिला को 'हूर' बना कर लगाई प्रदर्शनी
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया है। मुल्तान शहर का ये वीडियो मिलाद-उल-नबी त्योहार के दिन का है। चेनाब नदी के किनारे स्थित इस पाकिस्तान के सातवें सबसे बड़े शहर से आए वीडियो में एक महिला को सजा-धजा कर बैठे दिखाया गया है और उसके आसपास कुछ लोग खड़े हैं। वहाँ एक प्रदर्शनी सी लगाई गई है। बताया जा रहा है कि उक्त महिला को ‘हूर’ बना कर वहाँ बिठाया गया था।

पाक अधिकृत कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजाकिया ने भी इस वीडियो को शेयर किया और इसकी निंदा की। वीडियो में देखा जा सकता है कि इस्लामी जुलूस में कई लोग हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। महिला को ‘हूर’ बना कर बिठाया गया है और वहाँ कई फोटोग्राफर मौजूद हैं। ज्ञात हो कि इस्लामी कट्टरपंथियों में मान्यता है कि जिहाद करते हुए मरने के बाद जन्नत में 72 हूरें मिलती हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा में भी ये मामला उठा, जहाँ PTI (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) के एक विधायक ने इस हरकत के खिलाफ ‘मोशन ऑफ एडजर्नमेंट’ फ़ाइल किया। अल्लामा हिशाम इलाही जहीर नाम के एक मौलवी ने इस घटना की निंदा करते हुए इस्लाम के तमाम बड़े मौलानाओं और संस्थाओं को आड़े हाथों लिया है कि वो इसके खिलाफ आवाज़ क्यों नहीं उठा रहे?

 

वीडियो में देखा जा सकता है कि लाउडस्पीकर बजा कर कई लोग नाच रहे हैं, जिनमें कुछ महिलाएँ भी शामिल हैं। उक्त मौलवी ने कहा कि एक महिला को बिना हिजाब-बुर्का के बिठा कर तमाशा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में अजान हो रही है और बाहर नाच-गाना और भांगड़ा चल रहा है, जो रसूल अल्लाह का अपमान है। उन्होंने कहा कि तमाम उलेमा और मौलाना इन्हें रोक क्यों नहीं रहे हैं?

अफगानी भी कम नहीं: 12 साल की बच्ची को बीबी बना रहे 60 साल के बुड्ढे

                                                  प्रतीकात्मक 
अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद हैरान करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। एक तरफ तालिबान है जो औरतों के अधिकारों का दमन कर रहा है। घर-घर बच्चियों की तलाश कर जबरन उनका निकाह कराया जा रहा है। दूसरी तरफ आम अफगानी भी हैं जो इस हालात का फायदा उठाकर छोटी बच्चियों का शोषण कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब देखा गया है कि दूसरे मुल्कों में शरण लेने पहुँचे 60-60 साल के पुरुष 12-12 साल की बच्ची को बीवी बनाकर ला रहे हैं।

तालिबान से बचने के नाम पर अफगानिस्तान से निकल कर दुबई और अमेरिका में शरण लेने आए कुछ अफगानियों की ये करतूत उजागर हुई है। अधिकारियों के संज्ञान में कई ऐसे मामले आए हैं जब कुछ अफगानी ‘बुजुर्गों’ ने छोटी-छोटी बच्चियों को तालिबान के चंगुल से बचाने का हवाला देकर उनसे रेप किया और उनसे निकाह कर लिया। छोटी लड़कियों ने दुबई में खुद अधिकारियों को आपबीती सुनाते हुए कहा कि कैसे अफगानिस्तान से निकलने के लिए उनसे जबरन निकाह कर उनका रेप किया गया।

Yahoo न्यूज में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन अधिकारी अब ऐसे मामलों पर संज्ञान ले रहे हैं जिनमें दावा किया गया है कि काबुल से अफगानिस्तानी अपने साथ छोटी लड़कियों को बीवी बना कर लाए हैं। अधिकारियों की कोशिश है कि बच्चियों को कैसे भी बचाया जा सके। एक अधिकारी जो ऐसी रिपोर्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं, वे बताते हैं कि विदेशों में जाँच प्रक्रिया बेहद बेकार है। उनके मुताबिक, “आज ऐसे 60 साल के लोग हैं जो 12 साल की लड़की के साथ हैं और कहते हैं- ये मेरी बीवी है।”

अमेरिका ने 124, 000 अफगानियों को उनके देश से निकाला है। अब उनके पास ये चुनौती है कि वो किसे एंट्री देंगे? प्रेस सचिव जेन साकी ने 1 सितंबर को कहा था कि अमेरिका में आने वाले लोगों के बैकग्राउंड को चेक किए बिना उन्हें नहीं रखा जाएगा। लेकिन सामने आई रिपोर्ट्स ऐसी प्रक्रिया पर शक पैदा कर रही है।

सवाल ये किया जा रहा है कि जब पूर्व में अफगानिस्तान में शादी की उम्र लड़कियों की 16 साल तय थी तो फिर 12 साल की लड़कियों से शादी कैसे सही है। एक अधिकारी कहते हैं, “हमारी नजर में ये वैध शादियाँ नहीं हैं। ये लड़कियाँ तालिबान से बचाई गई हैं या फिर किसी और गलत इरादे (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) से यहाँ लाई गई हैं। हम पक्का नहीं कह सकते। लेकिन ये हमारी चिंताएँ हैं।”

सीबीपी अधिकारियों द्वारा ऐसी बच्चियों से संबंधी रिपोर्ट्स पर ध्यान दिया जाना बायडेन प्रशासन के उस ढीले रवैए को दिखा रहा है जो उन्होंने इस मुश्किल वक्त में भी दिखाया। मालूम हो कि अभी यौन शोषण या मानव तस्करी के मामले दर्ज नहीं किए गए हैं। हालाँकि, भरोसा दिलाया जा रहा है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इस बीच इस मुद्दे पर टिप्पणी से इनकार किया है। उन्होंने रेस्क्यू किए गए अफगानियों और जाँच प्रक्रिया का का बचाव करते हुए कहा, “खुफिया, कानून प्रवर्तन, और आतंकवाद विरोधी पेशेवर सभी एसआईवी आवेदकों और अन्य कमजोर अफगानों के लिए स्क्रीनिंग और सुरक्षा जाँच कर रहे हैं। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका में शरण पाने से पहले दोनों बायोग्राफिक और बायोमेट्रिक डेटा की समीक्षा शामिल है।”

इससे पहले यह भी पता चला था कि अमेरिकी प्रशासन अफ़ग़ान बच्चों को उस वयस्क के साथ रहने की अनुमति दे रहा है जिसके साथ वे संयुक्त राज्य अमेरिका में आए थे ताकि हिरासत में जाने से नाबालिगों को बचाया जा सके। सीएनएन ने बुधवार को बताया कि स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने गाइडेंस जारी की है जिसमें तरीके बताए गए हैं कि कैसे अफगानी बच्चों को उनके केयरगिवर्स से अलग न होने दिया जाए। मालूम हो कि इस नई रिपोर्ट का खुलासा Associated Press की रिपोर्ट के बाद हुआ था।

‘खराब खाना’ बनाने पर महिला को जला डाला, लड़कियों को ताबूत में भर कर सेक्स स्लेव बना रहा तालिबान: नाज़िला अयूबी, महिला वकील का खुलासा

तालिबान ने भले ही आश्वासन दिया हो कि वो महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार करेगा, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। तालिबान ने महिलाओं को ‘इस्लाम के हिसाब से शिक्षा का अधिकार’ देने व उनका सम्मान करने की बात कही है। लेकिन, अफगानिस्तान की ही एक पूर्व महिला जज ने तालिबान की करतूतों का खुलासा करते हुए बताया कि मुल्क के महिलाओं की तालिबानियों द्वारा हत्या की जा रही है।

कुछ अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों ने अफगानिस्तान की महिलाओं से बात कर के जाना है कि उनके साथ वहाँ किस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। अफगानिस्तान की एक महिला वकील ने बताया कि उत्तरी अफगानिस्तान में एक महिला को सिर्फ इसीलिए आग में जला डाला गया क्योंकि तालिबानियों को उसका बनाया भोजन पसंद नहीं आया था। उस पर खराब खाना पकाने का आरोप लगा कर ये ‘सज़ा’ दी गई।

तालिबानी स्थानीय परिवारों पर दबाव बना रहे हैं कि वो उनके लिए स्वादिष्ट भोजन पकाएँ और खिलाएँ। साथ ही ताबूतों में भर कर कई युवतियों को पड़ोसी मुल्कों में भेजा गया है, ताकि उनका इस्तेमाल सेक्स स्लेव के रूप में किया जा सके। साथ ही परिवारों पर अपने घर की युवतियों और बच्चियों तक की शादी तालिबानियों से करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। महिला वकील ने कहा कि तालिबान ने जो दुनिया को आश्वासन दिया है, वो जमीन पर कहीं मिल नहीं रहा।

उक्त वकील ने अफगानिस्तान छोड़ दिया है, क्योंकि महिला अधिकार की बातें करने पर उनकी जान पर खतरा बन आया था और अब भी तालिबानी उन्हें खोज रहे हैं। उन्होंने बताया कि काबुल पर तालिबान के कब्जे से एक दिन पहले तक वो एक ‘शक्तिशाली स्थिति’ में थीं, लेकिन उसके बाद वो समाज में कुछ भी नहीं रह गईं। किराने की दुकान पर भी जाने के लिए उन्हें अपने पड़ोसी के एक 4 साल के बच्चे को साथ लेना पड़ता था, क्योंकि यही शरिया का नियम है।

कुछ ही दिनों पहले अफगानिस्तान के सरकारी टीवी चैनल की एंकर खादिजा अमीन को उनके महिला होने के कारण बर्खास्त कर दिया गया था और उनकी जगह पुरुष तालिबानी एंकर को बैठने को कहा गया था। 28 साल की खादिजा अमीन ने बताया था, “मैं एक पत्रकार हूँ और मुझे काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। अब मैं आगे क्‍या करूँगी। अगली पीढ़ी के लिए कुछ भी नहीं है। हमने पिछले 20 साल में जो कुछ भी हासिल किया है, वह सब खत्‍म हो गया। तालिबान तालिबान हैं, उनके अंदर कोई बदलाव नहीं आया है।”

तालिबान ने महिलाओं पर लागू किए ये 10 घिनौने नियम

तालिबानी राज (Taliban Rule) में महिलाओं के लिए ऐसे कठिन नियम-कानून (talibani rules for girls) बनाए जाते हैं, जो मानवाधिकारों का भी सीधा हनन है। शरिया कानून के मुताबिक महिलाओं के तमाम अधिकार छीन लिए जाते हैं। साल 2001 में जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन था, महिलाओं (Afghan women) ने बहुत कुछ सहा है। एक बार फिर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में महिलाओं और लड़कियों को उन्हीं नियमों के मुताबिक रहना होगा। 

महिलाएं सड़कों पर किसी भी करीबी रिश्तेदार के बगैर नहीं निकल सकती। 
महिलाओं को घर के बाहर निकलने पर बुर्का पहनना ही होगा। 

पुरुषों को महिलाओं के आने की आहट न सुनाई दे, इसलिए हाई हील्स नहीं पहनी जा सकती। 

सार्वजनिक जगह पर अजनबियों के सामने महिला की आवाज़ सुनाई नहीं देनी चाहिए। 

ग्राउंड फ्लोर के घरों में खिड़कियां पेंट होनी चाहिए, ताकि बाहर से घर के अंदर की महिलाएं दिखाई न दें। 

महिलाएं तस्वीर नहीं खिंचवा सकती हैं, न ही उनकी तस्वीरें अखबारों, किताबों और घर में लगी हुई दिखनी चाहिए। 

महिला शब्द को किसी भी जगह के नाम से हटा दिया जाए। 
महिलाएं घर की बालकनी या खिड़की पर दिखाई नहीं देनी चाहिए। 
महिलाएं किसी भी सार्वजनिक एकत्रीकरण का हिस्सा नहीं होनी चाहिए। 
महिलाएं नेल पेंट नहीं लगा सकती हैं, न ही वे मर्जी से शादी करने का सोच सकती हैं। 

अगर नहीं माने नियम, तो खौफनाक सज़ा (Talibani Punishment)
तालिबान अपनी खौफनाक सज़ाओं के लिए भी काफी कुख्यात है। महिलाओं के लिए बनाए गए नियम कायदे को अगर किसी ने तोड़ा तो उसे क्रूर सज़ा का सामना करना पड़ता है। तालिबान राज के दौरान वहां महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर बेइज्ज़त किया जाना और पीट-पीटकर मार दिया जाना आम सज़ा थी। अडल्ट्री या अवैध संबंधों के लिए महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर मार दिया जाता है। कसे कपड़े पहनने पर भी यही सज़ा दी जाती है। कोई लड़की अगर अरेंज मैरिज से भागने की कोशिश करती है तो उसकी नाक और कान काटकर मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। अगर महिलाएं नेल पेंट कर लें तो उनकी उंगलियां काट देने तक की क्रूर सज़ा दी जाती है। 

पाकिस्तान : ‘एक कपड़े उतारता… दूसरा खींचता’: हवा में उछाला, मर्दों के लिए थी ‘खिलौना’ आयशा

                                                          पीड़िता ने सुनाई आपबीती
पाकिस्तान में 14 अगस्त के मौके पर मीनार-ए-पाकिस्तान के पास आयशा अकरम नामक टिकटॉकर महिला से बदसलूकी का मामला सामने आया। सैंकड़ों (300-400) की तादाद में कई पाकिस्तानी पुरुषों ने उनके साथ बेहूदगी की और बाद में उनके कपड़े फाड़ कर उनको हवा में उछाला जाने लगा। यह सब करीब ढाई घंटे तक चला।
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अब डेली पाकिस्तान को दिए अपने इंटरव्यू में पीड़िता आयशा ने आपबीती सुनाई है। उन्होंने बताया है कि लाहौर के ग्रेटर इकबाल पार्क में वह अपने साथियों के साथ वीडियो बनाने पहुँची थीं। वहीं शुरू में कुछ लोग उनके साथ सेल्फी लेने आए, जिसमें कोई बुराई नहीं थी, लेकिन बाद में भीड़ बढ़ती गई और खींचतान शुरू हो गई। भीड़ ने उन्हें और ग्रुप को तंग करना शुरू कर दिया। एक समय आया जब उन्हें एक छोटा तालाब मिला और उन्होंने सोचा कि अगर उन्हें बचना है तो उनको पानी में कूदना पड़ेगा। उनके साथी भी बोल रहे थे कि वह कूद जाएँ, लेकिन वह ऐसा न कर सकीं। उनके मुताबिक, “भीड़ में जो बचा रहा था वही उछाल रहा था। एक कपड़े उतारता था तो दूसरा बाकी बचे खींचने की कोशिश कर रहा था।”

पीड़िता कहती हैं कि उनके ग्रुप ने पुलिस को फोन भी किया था, लेकिन कोई वहाँ मौजूद ही नहीं था। उनके अनुसार, “मुझे 6:30 बजे से 9 बजे तक परेशान किया गया…भीड़ बाल खींच रही थी, मुझको उछाल रही थी।” अपने साथ हुई घटना को लेकर आयशा कहती हैं, “अगर महिला पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं है तो फिर कहाँ सुरक्षित होगी।” उनके मुताबिक भीड़ में मौजूद लोग उन्हें लगातार छू रहे थे और उन्हें एक खेलने की वस्तु समझ रहे थे। शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं था जहाँ खरोंच न लगी हो।

महिला बताती हैं कि उनके साथ हुई घटना ऐसी भी नहीं थी कि उन्होंने कोई आपत्तिजनक ड्रेस पहनी हुई हो, जिससे उनके साथ ये सब हुआ। उनके मुताबिक तो वो प्रॉपर ड्रेस में थीं, तब भी ये सब हुआ। उन्होंने कहा, “मैंने अश्लील कपड़े नहीं पहने हुए थे। मैंने कभी नहीं पहने और न ही मैं गंदे वीडियोज बनाती हूँ। मैं प्रॉपर कपड़ों में थी। मैंने उन्हें 14 अगस्त के लिए ही सिलवाया था। लेकिन मैं जब तक सब जान पाती उन्होंने उसे फाड़ दिया।”

पीड़िता याद करती हैं कि उन्होंने कैसे बार-बार मदद के लिए गुहार लगाई लेकिन घंटों तक कोई उन्हें बचाने नहीं आया। वह पूछती हैं, “ये सब क्यों हुआ, मैंने किसी का बुरा नहीं किया। कोई मुझे जानता भी नहीं था। क्या यही सजा है पाकिस्तान की बेटी होने की।”

वह कहती हैं कि उन्होंने जिंदा बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। वह करीब 6:30 बजे पार्क पहुँची थीं और मात्र 15 मिनट में ये सब शुरू हो गया। उन्होंने मीनार-ए-पाकिस्तान में जाकर शरण ली, लेकिन भीड़ ने वहाँ भी खोज लिया। उन्हें हवा में उछाला गया और पानी फेंका गया। उनका दुपट्टा कब गायब हुआ और चप्पलें कहाँ गई कुछ पता नहीं चला। हालत ऐसी हो गई थी कि उनको साँस नहीं आ रही थी। उन्होंने जीने की आस छोड़ दी थी। अब पीड़िता बस यही चाहती हैं कि आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई हो और वह खुद उन लोगों की कोर्ट में पहचान करें।

घटना का वीडियो वायरल 

महिला टिकटॉकर के साथ पाकिस्तान में हुई इस बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद भीड़ में शामिल लोगों की जमकर आलोचना हुई। घटना के बारे में बताते हुए महिला ने कहा कि हमला करने वाले लोगों की भीड़ उन्हें धक्का दे रही थी और खींच रही थी और उन्हें हवा में उछाला जा रहा था। महिला ने बताया कि उनके कपड़े भी फाड़ दिए गए थे, साथ ही उसकी अँगूठी और कानों की बालियाँ भी छीन ली गईं। इसके अलावा महिला के साथियों पर भी हमला किया गया और उनमें से एक का मोबाइल फोन और लगभग 15,000 रुपए भी छीन लिया गया। इस मामले में पुलिस ने महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और पुलिस को संदिग्धों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दे दिया गया है। पुलिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वीडियो फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है और महिला के साथ बदसलूकी कर उसके सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश : रवीना बानो को 3 दिन तक थर्ड डिग्री टॉर्चर, प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से दहेज के लिए एक विवाहिता को थर्ड डिग्री टॉर्चर देने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला का नाम रवीना बानो है। पुलिस को दी शिकायत में उसने अपने ससुराल के लोगों पर जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया है। उसके प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर चोटें आई है। साथ ही देवर और जेठ पर छेड़खानी का भी आरोप लगाया है।

मामला मैनपुरी जिले के भौगाँव थाना क्षेत्र के फाजलगंज मोहल्ला का है। पीड़िता के मुताबिक जब नसीम अली से उसका निकाह हुआ तो शुरुआत में सब ठीक था। कुछ दिन बाद ससुराल में दहेज के लिए उसकी प्रताड़ना शुरू हुई। उसके मायके वालों ने मॉंग पूरी करने में असमर्थता जताई तो निकाह टूटने की बात आ गई।

इसके बाद पारिवारिक पंचायत हुई और ससुराल वाले पीड़िता को घर ले आए। कुछ दिन सब ठीक रहने के बाद प्रताड़ना का फिर वही दौर शुरू हो गया। इससे आजिज आकर महिला ने पुलिस से शिकायत की तो कुछ दिनों के लिए प्रताड़ना बंद हो गई।

उसका आरोप है कि पहले भी कई बार मारपीट कर उसे घर से निकाला गया था। केस करने पर कुछ दिन सब ठीक रहा। पीड़िता के अनुसार अचानक से एक दिन ससुराल के लोगों मारने की नीयत से उसे टॉर्चर करना शुरू किया। उसने कहा, “ससुराल ले जाने के बाद मुझे बार-बार प्रताड़ित किया गया। लाठी-डंडों और लात-घूँसों से पीटा गया। थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाकर, हाथ बाँधकर फाँसी के फंदे पर लटकाने की भी कोशिश की। देवर मोहम्मद कमाल ने छेड़छाड़ भी की।”

पीड़िता ने आगे कहा, “जब मैंने इस मामले की शिकायत की तो सास-ससुर, जेठ-जेठानी, देवर और ननद ने मिलकर मारपीट की। तीन दिन तक घर में कैद रखा। इसके बाद मैं किसी तरह से जान बचाकर भोगाँव थाने पहुँची और शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, शांति भंग के मामले में मेरे पति को जमानत दे दी गई है।” पीड़िता ने कहा है कि उसे और उसके बच्चे की जान को खतरा है। महिला थाना प्रभारी एकता सिंह ने केस दर्ज मामले की जाँच शुरू कर दी है।

आम आदमी पार्टी में ही महिलाओं का अत्याधिक यौन शोषण क्यों?

                                     पार्टी पार्षद रमेश मटियाला के खिलाफ महिला ने दर्ज कराई शिकायत
अपनी चुनावी रैलियों में आम आदमी पार्टी संयोजक एवं दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल दो बातें कहते थे कि 'हमें सत्ता का लालच नहीं, हम देश की राजनीति बदल जनता को सुख देना चाहते हैं; दूसरे, तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के विरुद्ध 370 आरोपों की सूची दिखा उन्हें जेल भेजने भेजना आदि। लेकिन दुर्भाग्यवश, शीला दीक्षित तो अब परलोक गमन कर गयी, फाइल अपने आप ही बंद हो गयी। रही बात राजनीति बदलने की, राजनीती तो वाकई बदल दी। मुफ्त की रेवड़ियों के नाम पर सत्ता हथिया ली, परन्तु कभी कोई न कोई पार्टी नेता किसी न किसी अपराध में आकर, समाचारों में चर्चित रहते हैं। घोटाले तो दाल-रोटी हैं, जिस दिन सत्ता परिवर्तन होगा, कांग्रेस से अधिक केजरीवाल पार्टी के नाम घोटाले सामने आएंगे। 
जहां तक बात महिला सुरक्षा की है, राजनीती में यौन शोषण कोई नई बात नहीं, लेकिन जितना अधिक यौन शोषण इस पार्टी में हुआ है, शायद किसी भी अन्य पार्टी में नहीं। पता नहीं कितनी कोली यौन शोषण का शिकार हो चुकी हैं। कोई राशन कार्ड बनाता है, कोई कुछ और।  
केजरीवाल सरकार का महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े वादे करना, अपने घोषणा-पत्र में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि बताना एक कोरा झूठ है। दरअसल, आम आदमी पार्टी (AAP) की एक महिला कार्यकर्ता को उनकी ही पार्टी के नेता द्वारा पिटवाने और दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया है। 31 मई 2021 को मटियाला वार्ड से ‘आप’ के पार्षद रमेश मटियाला के खिलाफ दो अन्य कार्यकर्ताओं की मदद से अपनी ही पार्टी की महिला कार्यकर्ता के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। म​हिला ने बीते दिनों खुद फेसबुक पर भी अपनी आपबीती सुनाई थी।

कथित तौर पर 28 मई 2021 को हुई घटना के बाद ‘आप’ पार्षद के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। सोशल मीडिया पर पीड़िता एक वीडियो भी सामने आया है। वायरल वीडियो में पीड़िता का कहना है कि रमेश मटियाला ने पार्टी की दो महिला कार्यकर्ताओं को बुलाकर उनके सामने थप्पड़ मारने का कहा।

पीड़िता के अनुसार, जो आम आदमी पार्टी की सदस्य भी हैं, उन्होंने मटियाला में दिल्ली सरकार की मदद से आरटी-पीसीआर टेस्ट कैंप लगवाया था। महिला ने अकेले ही इस कैंप को लगवाया था, इसलिए उन्होंने अपनी फोटो वाला एक बैनर वहाँ लगा रखा था। घटना वाले दिन जब रमेश मटियाला वहाँ पहुँचे तो वह बैनर देखकर भड़क गए।

महिला कार्यकर्ता ने 28 मई 2021 को बताया कि रमेश मटियाला मुझे धमकी देते हैं कि मैंने अपना बैनर यहाँ क्यों लगवाया है, जबकि ये सब कुछ आयोजित करवाने वाली मैं हूँ, विधायक जी से बात करके इस कैंप को लगवाने वाली मैं हूँ। मटियाला में केवल एक ही जाँच कैंप था, लेकिन मैंने गुलाब जी से बात करके इसे लगवाया। सुबह से मैं यहाँ थी, पब्लिक के बीच में लोगों का टेस्ट करवा रही थी। इसी बीच दिल्ली जल बोर्ड के एक अधिकारी का मुझे कॉल आया और मैं कुछ अन्य जरूरी काम से वहाँ चली गई, लेकिन जब मैं वहाँ से आई तो मैंने देखा रमेश मटियाला यहाँ आया हुआ है। उसने अपनी उपस्थिति में दो महिला कार्यकार्ताओं को बुलवाया और मुझ पर हमला करवाया। रमेश ने उन्हें मुझे थप्पड़ मारने को भी कहा। इसके अलावा मेरे पोस्टर और बैनर जो मैंने टेस्ट कैंप के लिए लगवाया था, महिलाओं से उसे फाड़ने को कहा।

‘आप’ नेता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (चोट पहुँचाना), 341 (गलत तरीके से रोकना), 509 (गलत शब्दों का प्रयोग या किसी महिला को अपमानित करने का इरादा) और 506 (धमकी देना) के तहत दिल्ली के बिंदापुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, डीसीपी (द्वारका जिला) संतोष कुमार मीणा ने कहा कि हमें ‘आप’ पार्टी की कार्यकर्ता से शिकायत मिली थी। हमने एफआईआर दर्ज करने से पहले एक जाँच भी की है। वास्तव में क्या हुआ, यह पता लगाने के लिए आगे की जाँच भी जारी है।

आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए रिजनल हेड की नौकरी छोड़ने पर अफसोस जताते हुए महिला ने अरविंद केजरीवाल से सवाल किया, “आपकी पार्टी में महिलाएँ सुरक्षित क्यों नहीं हैं?” इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह आने वाले दिनों में किसी भी गिरफ्तारी से पहले पीड़िता को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाएगी। इस संबंध में संपर्क किए जाने पर रमेश मटियाला का कहना है कि उन्हें ऐसी किसी शिकायत या एफआईआर की जानकारी नहीं है। शिकायत खुद देखने के बाद ही वे इस पर प्रतिक्रिया दे पाएँगे।

‘प्लाज्मा के बदले में भेजी गुप्तांग की तस्वीरें

कोरोना जैसी बीमारी में भी मनचले किस तरह किसी की बीमारी का दुरूपयोग करते हैं, साबित करता है कि किन संस्कारों और माहौल में इनकी परवरिश हुई है। 
जहाँ कोरोना की दूसरी लहर से लोगों की जान जा रही है, वहीं मदद के लिए गुहार लगाने वालों के साथ कुछ लोग संवेदनहीन व्यवहार भी कर रहे हैं। मुंबई की एक महिला ने ऐसी ही अपनी आपबीती सुनाई है। महिला ने एक परिजन को कोविड-19 होने का बाद अपना नंबर सार्वजनिक किया था, ताकि प्लाज्मा थेरेपी के लिए ब्लड मिल सके। लेकिन, बदले में उसके नंबर पर कई लोगों ने अश्लील फोटो भेजे।

महिला ने ‘VICE’ में एक लेख के जरिए अपना अनुभव साझा किया है। मुंबई की रहने वाली महिला ने बताया कि कोरोना वायरस से उपजे खतरे का उसे सही अंदाज़ा तब लगा, जब इसने उसके परिवार में दस्तक दी। उसने यह भी बताया है कि किस तरह तमाम सावधानियाँ बरतने के बावजूद उनके परिजन संक्रमित हुए और उनका सामना ध्वस्त हो चुके स्वास्थ्य सिस्टम से हुआ।

इस महिला का नाम शास्वती सिवा है। पिछले सप्ताह उनके परिवार का एक सदस्य कोरोना पॉजिटिव हो गया। इसके बाद वह वेंटिलेटर की खोज में थीं, जिसकी महाराष्ट्र में किल्लत है। फिर उन्होंने ट्विटर पर मदद की गुहार लगाई। उनका संपर्क कुछ अच्छे लोगों से हुआ और 6 घंटे के भीतर वेंटिलेटर उपलब्ध भी हो गया। इसके 2 दिन बाद A+ ब्लड ग्रुप प्लाज्मा की ज़रूरत पड़ी। इसके लिए कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति की ज़रूरत थी।

रिपोर्ट नेगेटिव आने के 28 दिन बाद ही प्लाज्मा डोनेट किया जा सकता है। इसके बाद उनके एक ‘प्रभावशाली दोस्त’ ने सोशल मीडिया पर इसे डाल दिया और उनके फोन पर कई मैसेज आने लगे। कुछ अन्य लोकप्रिय हैंडल्स से भी ये शेयर किया गया। शास्वती लिखती हैं कि उन्हें अपना नंबर सार्वजनिक रूप से देख कर डर भी लगा, लेकिन फिर उन्हें दोस्तों ने बताया कि यही अंतिम विकल्प है और उन्होंने भी अपने परिजन का जीवन बचाने के लिए ये खतरा मोल लिया।

शास्वती ‘VICE’ में लिखती हैं कि जिस दिन उन्होंने इमरजेंसी रिक्वेस्ट डाला, उस दिन उनके पास हर मिनट 3-4 फोन कॉल्स आने लगे। वो ब्लड बैंक्स से बात कर रही थीं, डोनर्स का जुगाड़ कर रही थीं और दोस्तों से संपर्क बनाए हुए थीं। लेकिन, उस बीच एक व्यक्ति ने कॉल कर के पूछा कि वो SOS जारी करने वाले व्यक्ति को कैसे जानती हैं? फिर वो पूछने लगा कि क्या तुम सिंगल हो? इसके कुछ देर बाद एक और कॉल आया।

उधर से दो लोग धीरे-धीरे आपस में बात कर रहे थे, जिसके बाद एक ने फोन पर कहा कि तुम्हारी प्रोफ़ाइल पिक्चर बहुत अच्छी है। इसके बाद उनका पता, रिलेशनशिप और अन्य डिटेल्स पूछने के लिए कई फोन कॉल्स आए। शास्वती सिवा के अनुसार, एक व्यक्ति ने फोन पर किस करते हुए आवाज़ें भी निकालीं। वो लिखती हैं कि जब पारिवारिक इमरजेंसी में वो फँसी थीं, तब इस तरह की प्रताड़ना तोड़ देने वाली थी।

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जींद से कोरोना टीका साफ, अस्पताल में रखे 50,000 रूपए को हाथ तक नहीं लगाया,1710 डोज चोरी

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उन्होंने उन नंबरों को ब्लॉक किया। अगली सुबह सेकेंड्स के अंतराल में ही 7 लोगों के फोन कॉल आए। सबको ब्लॉक कर के शास्वती ने फोन साइलेंट कर के बगल में रख दिया। लेकिन, वो लिखती हैं कि जब उन्होंने व्हाट्सएप्प खोला तो वहाँ अश्लील तस्वीरें भरी पड़ी हुई थीं। कई अपरिचितों ने उन्हें अपने गुप्तांग (D#ck) की तस्वीरें भेज रखी थीं। तब तक उन्हें डोनर भी मिल चुका था। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी है कि वो कभी अपना नंबर सार्वजनिक न करें।

महाराष्ट्र : ‘8 सालों से प्रताड़ना, अश्लील वीडियो कॉल, गालियाँ और झूठे केस’: संजय राउत पर डॉक्टर स्वप्ना पाटकर के आरोप

                                             डॉक्टर स्वप्ना पाटकर ने संजय राउत पर लगाए गंभीर आरोप 
2015 में शिवसेना संस्थापक बालासाहब ठाकरे के जीवन पर एक मराठी फिल्म बनी थी। नाम था – ‘बालकाडु’। अब इस फिल्म की निर्माता डॉक्टर स्वप्ना पाटकर ने शिवसेना संसद संजय राउत पर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। स्वप्ना पेशे से साइकोलॉजिस्ट हैं। साथ ही वो ‘द रॉयल मराठी एंटरटेनमेंट’ नामक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वे 2013 में मराठी में मोटिवेशनल पुस्तक ‘जीवन फंडा’ भी लिख चुकी हैं।

अब स्वप्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने खुद को एक शिक्षित और सबल भारतीय महिला बताते हुए पत्र में लिखा है कि उन्हें सहानुभूति नहीं, बल्कि इंसाफ चाहिए। स्वप्ना पाटकर ने आरोप लगाया है कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के सह-संपादक संजय राउत पिछले 8 वर्षों से अपनी पार्टी के रुतबे और सिस्टम पर पकड़ का इस्तेमाल कर न सिर्फ उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, बल्कि उनके परिवार और रिश्तेदारों को भी प्रताड़ित कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में ‘माइंडवर्क्स ट्रेनिंग सिस्टम्स’ नामक काउंसलिंग क्लिनिक चलाने वाली डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि उन्हें अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में कई मामलों में पूछताछ के लिए बुलाया जाता है। उन्होंने लिखा है कि ‘शिवसेना भवन’ की तीसरी मंजिल पर बुला कर उनके रिश्तेदारों से मारपीट की गई और उनसे संपर्क काटने को मजबूर किया है। साथ ही सब ख़त्म करने के लिए 4 करोड़ रुपए की वसूली का प्रस्ताव रखने का आरोप भी लगाया गया है। स्वप्ना ने पत्र में लिखा है:

“पुलिस से पूछताछ करवा के भी जब संजय राउत की राक्षसी ख़ुशी को संतुष्टि नहीं मिलती तो मुझे परेशान, प्रताड़ित और बदनाम कर के मेरा चरित्र-हनन किया जाता है। वो कहते हैं कि पुलिस के पास जाओगी तो भी कुछ नहीं होगा। 2013 में मेरे ऊपर 2 बार हमला हुआ। जाँच अभी तक चल रही है। कोई आरोपित नहीं मिला। 2014 में ACP प्रफुल्ल भोंसले ने बिना कारण मेरे खिलाफ जाँच शुरू की। मुझ पर संजय राउत से फिरौती माँगने का आरोप लगाया गया। 2015 में मेरा पीछा करना शुरू किया गया। धमकियाँ मिलीं। मैं किससे बात करूँ और किससे नहीं, इस पर नियंत्रण करने की कोशिश की गई। मैं कहाँ जा रही हूँ, क्या कर रही हूँ – संजय राउत का सब पर ध्यान रहता था। मुझे रोज ईमेल भेज कर बताना होता था कि मैं कहाँ गई और किससे मिली। बात न मानने पर पुलिस का नया मामला बन जाता था।”

डॉक्टर स्वप्ना पाटकर मुंबई में ‘सैफरन 12’ नामक एक मल्टी क्यूनीन फैमिली रेस्तरां भी चलाती हैं। मार्च 2013 में हुए रेस्तरां के उद्घाटन में अभिनेता संजय दत्त, संगीतकार बप्पी लाहिरी, गायक सुरेश वाडेकर के अलावा दिलीप ताहिल और मुरली शर्मा जैसे वरिष्ठ चरित्र अभिनेता भी पहुँचे थे। सबसे बड़ी बात तो ये कि ‘सामना’ में वो ‘कॉर्पोरेट मंत्र’ और ‘आठवड्याचा मानुष’ नाम से कॉलम लिखा करती थीं।

अब स्वप्ना ने आरोप लगाया है कि राज्यसभा सांसद संजय राउत के इशारे पर पुलिस ने उन पर ‘धंधा करने’ का आरोप भी लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि 2017 में खुद संजय राउत ने फोन पर धमकी दी और 2018 में कॉन्ट्रैक्ट पर आदमी रख कर उनका पीछा कराया गया। बकौल स्वप्ना, उनके सोशल मीडिया हैंडल्स को हैक कर कभी सुसाइड नोट तो कभी अश्लील सामग्रियाँ डाली गईं, लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि संजय राउत के खिलाफ वो FIR दर्ज नहीं कर सकते।

उनका आरोप है कि उनके सहकर्मियों को झूठे मामलों में फँसा कर गिरफ्तार करवाया गया और उनका चरित्र प्रमाण-पत्र बनवाया गया। उन्होंने बताया कि वो ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ के पास भी लिखित शिकायत लेकर गई थीं, लेकिन पुलिस NCW का भी सम्मान नहीं करती है। पत्र में उन्होंने संजय राउत के लिए ‘दरिंदा’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए लिखा है कि उन्हें अब भी अश्लील वीडियो कॉल की जाती है और गालियाँ बकी जाती है।

बकौल स्वप्ना पाटकर, उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख और NCP सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को ‘संजय राउत की हरकतों’ के बारे में बताया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने मनसुख हिरेन और पूजा चव्हाण की संदिग्ध मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उनकी मौत होती है तो ये आत्महत्या नहीं होगी। जहाँ मनसुख हिरेन एंटीलिया केस में मृत पाए गए थे, TikTok स्टार पूजा चव्हाण की मौत के मामले में शिवसेना नेता वो महाराष्ट्र के वन मंत्री संजय राठौड़ का नाम सामने आया था।

डॉक्टर पाटकर ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से कई स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को मेल भेजने के बाद आए एक्नॉलेजमेंट को देखा जा सकता है। साथ ही उन्होंने एक चैट स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया कि संजय राउत उन्हें मैसेज भेजते हैं। उन्होंने मुंबई के जोन 8 के DCP को भी मेल लिखा था। उन्होंने कहा कि ट्विटर पर संजय राउत ने उन्हें ब्लॉक कर रखा हुआ है।