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दिल्ली : 13 साल बाद फिर बनेंगे राशन कार्ड, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया ऐलान: आय सीमा बढ़ाने की भी तैयारी, जानें- आवेदन प्रक्रिया की डिटेल्स


दिल्ली के लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राजधानी में पिछले 13 वर्षों से रुकी हुई राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया अब फिर शुरू होने जा रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार (21 मई 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि 15 जून से नए राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का कहना है कि लंबे समय से राशन कार्ड का इंतजार कर रहे लोगों को अब राहत मिलेगी और पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जाएगी।

13 साल से रुके थे नए राशन कार्ड

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछले 13 वर्षों में दिल्ली के लाखों गरीब नागरिक राशन कार्ड बनवाने के लिए अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काटते रहे लेकिन पुराने शासन में उनके आवेदन लंबित पड़े रहे। उन्होंने बताया कि बीते 13 साल में करीब 3 लाख 72 हजार लोगों ने राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था लेकिन उनके कार्ड नहीं बनाए गए। अब इन सभी लोगों को नई डिजिटल व्यवस्था के तहत फिर से आवेदन करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रधानमंत्री की अंत्योदय योजना के तहत सभी पात्र लोगों तक राशन पहुँचाना है। इसके लिए पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाएगा।

राशन कार्ड के लिए आय सीमा बढ़ाने की तैयारी

दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड के लिए आय सीमा बढ़ाने का भी फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले परिवार की वार्षिक आय सीमा एक लाख रुपए थी जिसे बाद में बढ़ाकर 1.20 लाख रुपए किया गया था। अब सरकार इसे बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए सालाना करने की तैयारी कर रही है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल में चर्चा हो चुकी है और जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। अगर प्रस्ताव पारित हो जाता है तो सालाना 2.5 लाख रुपए तक की आय वाले परिवार भी राशन कार्ड बनवाने के पात्र हो जाएँगे।

ऑडिट में सामने आईं बड़ी गड़बड़ियाँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछले एक साल में राशन कार्ड धारकों का ऑडिट कराया जिसमें बड़ी संख्या में अनियमितताएँ सामने आईं। जाँच में पाया गया कि 1.44 लाख लोग तय आय सीमा से ऊपर होने के बावजूद राशन कार्ड का लाभ ले रहे थे। इसके अलावा करीब 35 हजार लोगों ने पिछले एक साल में राशन ही नहीं लिया था। सरकार के अनुसार, लगभग 29 हजार राशन कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर मिले जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। वहीं, 23 हजार से अधिक राशन कार्ड डुप्लीकेट पाए गए।

ऑडिट के दौरान कुल 7 लाख 72 हजार से अधिक अपात्र राशन कार्ड धारकों की पहचान की गई जिनके नाम योजना से हटा दिए गए हैं।

15 जून से आवेदन शुरू: पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल

दिल्ली सरकार के मुताबिक 15 जून से नए राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड की नई व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए राशन कार्ड के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन किए जा सकेंगे। आवेदन से लेकर राशन वितरण तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे और लाभार्थियों को पूरा राशन मिल सके।

सरकार का कहना है कि कोई भी व्यक्ति अपने घर के नजदीक से ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा। पहले आय प्रमाण पत्र को स्वयं घोषित करने की व्यवस्था थी जिससे गड़बड़ी की आशंका रहती थी। अब डिजिटल सत्यापन के जरिए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।

बिना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं मिलेगा राशन

रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दिल्ली खाद्य सुरक्षा नियम 2026 लागू किया है। इसके तहत राशन वितरण व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं।

राशन दुकानों पर पारंपरिक वजन मशीनों की जगह ई-वेइंग मशीनें लगाई जा रही हैं और राशन लेने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है। अब बिना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के राशन नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि इससे कम राशन मिलने, फर्जीवाड़े और वितरण में गड़बड़ियों जैसी शिकायतों पर रोक लगेगी।

असम : पूर्वोतर की जिस तलवार से टकराने के बाद जान बचाकर भागा खिलजी, कामरूप के हिंदू शासक राजा पृथु के नाम होगा गुवाहाटी का सबसे लंबा फ्लाईओवर

                   असम के राजा पृथु के नाम पर गुवाहाटी में बनेगा सबसे लंबा फ्लाईओवर:(साभार: AI)
भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि मुस्लिम तुष्टिकरण के आगे माथा टेक कुर्सी के भूखे नेता और उनकी पार्टियों ने अपने ही देश के गौरवशाली इतिहास को दरकिनार कर आक्रांताओं को महान बताकर गुमराह कर हिन्दू और मुसलमानों के बीच नफरत की दीवार खड़ी करने का दुस्साहस किया। अब कालचक्र ऐसा घूम रहा है कि देश का गौरवशाली इतिहास सामने आना शुरू हो गया है। जिससे मुस्लिम कट्टरपंथियों के माथा टेकने वाले बौखला रहे हैं।  

भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बड़ी घोषणा की है। इसके तहत गुवाहाटी में बन रहा सबसे लंबा फ्लाईओवर (दीघलीपुखुरी से नूनमाटी तक) अब महाराजा पृथु के नाम पर रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला असम की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों को हमारे वीरतापूर्ण इतिहास से प्रेरित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद बिन खिलजी को हराने वाले महाराजा पृथु

महाराजा पृथु को राजा पृथु या विश्वसुंदर देव के नाम से भी जाना जाता है। वे 12वीं और 13वीं सदी में प्राचीन कामरूप (वर्तमान असम) के शासक थे। राजा पृथु ने 1206 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के सिपहसालार मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी को हराया था।

बख्तियार खिलजी वही आक्रांता था, जिसने नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा के बड़े केंद्रों को नष्ट कर दिया था और 10,000 से ज्यादा बौद्ध भिक्षुओं की हत्या की थी। बिना किसी खास प्रतिरोध के पूर्व की ओर बढ़ने के बाद, जब खिलजी की फौज ने कामरूप में प्रवेश करने का प्रयास किया, तो उसे भयंकर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा।

मिनहाज सिराज-अल-दीन द्वारा लिखित फ़ारसी इतिहास ‘तबाकत-ए-नासिरी’ सहित ऐतिहासिक स्रोतों और कनाई बसासी और कन्हाई बोरोक्सी बुआ जिल जैसे स्थलों के शिलालेखों में उल्लेख है कि आक्रमणकारी फौज का पूरी तरह से सफाया कर दिया गया था और असम की संप्रभुता सुरक्षित रही। कई फौजी पीछे हटने से पहले ही दुर्गम इलाकों में मारे गए थे।

उसने बिना किसी युद्ध के बंगाल पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद उसने 1206 ईस्वी में तिब्बत पर आक्रमण करने की योजना बनाई, ताकि बौद्ध मठों के खजाने को लूट सके। वह दक्षिण पूर्व एशिया के साथ कामरूप और सिक्किम से होकर जाने वाले पारंपरिक व्यापार मार्ग पर भी कब्जा करना चाहता था।

खिलजी ने राजा पृथु और उनकी सेना की वीरता के बारे में सुना था और जानता था कि उनके राज्य से होकर गुजरना असंभव होगा। अतः उसने कामरूप के विरुद्ध लड़ने के बजाय, तिब्बत पर आक्रमण करने के लिए राजा पृथु के पास हाथ मिलाने का पैगाम भेजा।

कामरूप राजा ने खिलजी के साथ सहमति जताते हुए कहा कि वह भी रेशम मार्ग पर नियंत्रण के लिए दक्षिणी तिब्बत पर भी आक्रमण करना चाहते हैं। इसके बाद खिलजी और राजा पृथु संयुक्त आक्रमण के लिए सहमत हो गए, लेकिन राजा पृथु ने सलाह दी कि मॉनसून के मौसम में पहाड़ों से होकर जाना खतरनाक होगा, इसलिए कुछ समय इंतजार करना चाहिए।

जब तक खिलजी के आदमी राजा पृथु का संदेश लेकर लौटे, तब तक वह काफी आगे बढ़ चुका था और वर्तमान सिलीगुड़ी के पास डेरा डाले हुए था। खिलजी ने उनकी सलाह को नजरअंदाज कर दिया और एक स्थानीय गाइड ‘मेच’ के जरिए भूटान के रास्ते से तिब्बत जाने की कोशिश की। यात्रा शुरू होने से पहले खिलजी ने मेच का धर्मांतरण करा दिया था।

रास्ते में तिब्बती गुरिल्ला सेनाओं ने उसकी फौज पर हमला कर दिया। भारी बारिश और बीमारियों के चलते उसकी फौज कमजोर हो गई। कई फौजी बीमारी से मर गए। हालात इतने खराब थे कि बख्तियार खिलजी की फौज ने घोड़ों को खाने के लिए मार डाला। उसी रास्ते से वापस लौटने में असमर्थ, खिलजी ने कामरूप के रास्ते लौटने का फैसला किया।

राजा पृथु की युद्धनीति

राजा पृथु को इस घटनाक्रम की जानकारी थी क्योंकि उनके जासूस नियमित रूप से जानकारी दे रहे थे। वह अपनी सलाह की अनदेखी करने के लिए खिलजी से पहले से ही क्रोधित थे और उन्हें अंदेशा था कि आक्रमणकारी उनके राज्य को लूटकर अपनी आपूर्ति बढ़ाएँगे। 

जब खिलजी लौटने के लिए कामरूप की ओर बढ़ा, तो राजा पृथु ने पहले ही सारी तैयारी कर रखी थी। उन्होंने स्कॉर्च्ड अर्थ रणनीति अपनाई और यानी रास्ते में सभी संसाधनों को नष्ट कर दिया, ताकि दुश्मन को कोई मदद न मिल सके। पुलों को तोड़ दिया गया और राशन समेत रास्तों को जला दिया गया।

युद्ध में लगभग 12,000 घुड़सवार और 20,000 पैदल पौजी मारे गए। खिलजी किसी तरह जान बचाकर कुछ सौ फौजियों के साथ भाग निकला। इसके बाद खिलजी ने नए क्षेत्रों पर विजय पाने का उत्साह खो दिया और फिर कभी किसी युद्ध में नहीं गया। अंत में खिलजी अपने ही एक सिपहसालार अली मर्दान खिलजी के हाथों मारा गया।

राजा पृथु ने असम की भूमि को बाहरी आक्रमणों से बचाया। हालाँकि 1228 में दिल्ली सल्तनत के शासक इल्तुतमिश के बेटे नासिरुद्दीन महमूद से युद्ध में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार स्वीकारने के बजाय उन्होंने अपने किले के एक जलकुंड में कूदकर स्वाभिमानपूर्वक जीवन त्याग दिया।

आज भी 27 मार्च को असम में ‘महाविजय दिवस’ मनाया जाता है। यह वही दिन है जब पृथु ने बख्तियार खिलजी की फौज को हराया था। महाविजय दिवस मध्यकालीन भारत के सबसे आक्रामक सैन्य अभियानों में से एक के विरुद्ध राज्य के प्रतिरोध और उत्तरजीविता का स्मरणोत्सव है।

सीएम ने कहा- राजा पृथु ने असम को दिल्ली सल्तनत का हिस्सा होने से बचाया

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि राजा पृथु का योगदान बहुत कम जाना जाता है, जबकि उन्होंने असम को दिल्ली सल्तनत का हिस्सा बनने से बचाया। उन्होंने कहा कि जैसे अहोम साम्राज्य के सेनापति लाचित बरफुकन को मुगलों के खिलाफ जीत के लिए जाना जाता है, वैसे ही पृथु को भी उनके साहस और रणनीति के लिए याद किया जाना चाहिए।
नए फ्लाईओवर का नाम महाराजा पृथु के नाम पर रखने से पहले हेमंत बिस्वा शर्मा सरकार द्वारा गुवाहाटी में एक नए फ्लाईओवर का नाम महाभारत कालीन राजा भगदत्त के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया था। भगदत्त असुर राजा नरकासुर के पुत्र थे और कुरुक्षेत्र महायुद्ध में कौरवों की ओर से भाग लिया था। उन्होंने हाथियों के एक बड़े दल सहित एक अक्षौहिणी सेना का योगदान दिया था।
अब दिघलीपुखुरी–नूनमाटी फ्लाईओवर को महाराजा पृथु फ्लाईओवर नाम देकर सरकार उनके अदम्य साहस को सम्मान दे रही है, साथ ही नई पीढ़ी को उनके बारे में जागरूक करने का प्रयास कर रही है।

हरियाणा : लड़कियों की कॉलेज शिक्षा का खर्च उठाएगी सरकार! कम आय वाले परिवारों के लिए खट्टर का बड़ा ऐलान, प्राइवेट कॉलेजों में भी मिलेगी ये सुविधा

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने राज्य में कम आय वाले परिवारों की लड़कियों की कॉलेज शिक्षा को मुफ्त करने का ऐलान किया है। उन्होंने यह ऐलान पानीपत जिले के समालखा में किया है।

मुख्यमंत्री खट्टर समालखा में आयोजित ‘जन आशीर्वाद रैली‘ को संबोधित करने पहुँचे थे। समालखा में उन्होंने इस योजना का ऐलान किया। हरियाणा सरकार ऐसे परिवार, जिनकी वार्षिक आय 1.8 रूपए लाख से कम है उनकी बेटियों की कॉलेज में पढ़ाई का खर्चा वहन करेगी।

हरियाणा सरकार 1.8 लाख रूपए से लेकर 3 लाख रूपए के बीच है, ऐसी बेटियों की पढ़ाई का 50% खर्च सरकार वहन करेगी। हरियाणा सरकार की यह व्यवस्था सरकारी और निजी, दोनों तरह के कॉलेज पर लागू होगी। इसका अर्थ है कि पूरे प्रदेश में किसी भी तरह के कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियाँ इस योजना का लाभ ले सकेंगी।

इससे पहले मुख्यमंत्री खट्टर ने प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन को भी बढ़ा कर 3000 रूपए माह कर दिया था। यह व्यवस्था राज्य में 1 जनवरी 2024 से चालू होगी। इसके अलावा राज्य में 80 वर्ष से ऊपर के नागरिकों के लिए ‘वरिष्ठ नागरिक सेवा आश्रम योजना’ का ऐलान किया था।

समालखा में मुख्यमंत्री खट्टर ने कांग्रेस पर हमला भी बोला। उन्होंने कांग्रेस को देश में भ्रष्टाचार और अपराध की जनक भी बताया है। उनका कहना है कि जिस तरह प्रदेशों में कांग्रेस साफ़ हो रही है, उसका देश से भी खात्मा हो जाएगा। वह एक दिवसीय दौरे में पानीपत में ही स्थित ब्रह्मकुमारी संस्थान में भी पहुँचे। यहाँ मुख्यमंत्री ने ‘नशा मुक्त हरियाणा अभियान’ की शुरुआत की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री खट्टर ने ‘दादी चंद्रमणि यूनिवर्सल पीस ऑडिटोरियम’ का उद्घाटन और ‘मनमोहिनी भवन’ का शिलान्यास किया। साथ ही प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, पानीपत हेतु सरकार की तरफ से 21 लाख रूपए की अनुदान राशि देने की घोषणा की।