Showing posts with label #Guwahati. Show all posts
Showing posts with label #Guwahati. Show all posts

असम : कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा रैली में महिला नेता के सामने करते रहे अश्लील इशारे, हँसते रहे कांग्रेसी नेता

                               भूपेन बोरा अश्लील इशारा करते (साभार - एक्स/@Namami_Bharatam)
असम में राजनीतिक माहौल गरमाने के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा पर रैली के दौरान महिला नेता के सामने अश्लील हाथ का इशारा करने का आरोप लगा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

भूपेन बोरा पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ के दौरान अनुचित हाथ का इशारा करते दिखे। उस समय कांग्रेस नेता गौरव गोगोई बस पर खड़े होकर जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वीडियो में दिखता है कि भूपेन बोरा, असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया और कांग्रेस नेता मीरा बोरठाकुर से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान बोरा ने अपने दाहिने हाथ से बेहद आपत्तिजनक इशारा किया।

मीरा बोरठाकुर ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन बोरा ने इशारा जारी रखा। वहीं, देबब्रत सैकिया को इस दौरान मुस्कुराते हुए भी देखा गया।

मीडिया को संबोधित करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को इस घटना की कड़ी आलोचना की और सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक महिला के प्रति किया गया यह अश्लील इशारा पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह सम्मान की गंभीर कमी को दर्शाता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “अगर कांग्रेस सच में महिलाओं की गरिमा के लिए खड़ी है, तो उसे भूपेन बोरा को तुरंत पार्टी से निष्कासित करना चाहिए। इस तरह का व्यवहार राजनीति में स्वीकार्य नहीं है, खासकर उनके जैसे वरिष्ठ नेता से।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि वे कल्पना भी नहीं कर सकते कि राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने वरिष्ठ पार्टी नेताओं, जिनमें एक महिला नेता भी शामिल थीं, उनकी मौजूदगी में ऐसा इशारा किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “ऐसे लोग महिला मामलों के मंत्री, सामाजिक मामलों के मंत्री बनने की सोच रखते हैं, यहाँ तक कि मुख्यमंत्री बनने के सपने देखते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर इस तरह का अशोभनीय इशारा कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वह कैबिनेट बैठक के बाद होने वाली अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर विस्तार से बात करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले को महिला आयोग के पास भेज दिया गया है और आयोग से इसे गंभीरता से संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया है।

इसके अलावा, हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों और डिजिटल पोर्टलों ने इस वीडियो को प्रसारित नहीं किया और कार्यक्रम के फुटेज से क्लिप को हटा दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह संभव है कि मीडिया की नजर इस घटना पर नहीं पड़ी हो।

असम : पूर्वोतर की जिस तलवार से टकराने के बाद जान बचाकर भागा खिलजी, कामरूप के हिंदू शासक राजा पृथु के नाम होगा गुवाहाटी का सबसे लंबा फ्लाईओवर

                   असम के राजा पृथु के नाम पर गुवाहाटी में बनेगा सबसे लंबा फ्लाईओवर:(साभार: AI)
भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि मुस्लिम तुष्टिकरण के आगे माथा टेक कुर्सी के भूखे नेता और उनकी पार्टियों ने अपने ही देश के गौरवशाली इतिहास को दरकिनार कर आक्रांताओं को महान बताकर गुमराह कर हिन्दू और मुसलमानों के बीच नफरत की दीवार खड़ी करने का दुस्साहस किया। अब कालचक्र ऐसा घूम रहा है कि देश का गौरवशाली इतिहास सामने आना शुरू हो गया है। जिससे मुस्लिम कट्टरपंथियों के माथा टेकने वाले बौखला रहे हैं।  

भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बड़ी घोषणा की है। इसके तहत गुवाहाटी में बन रहा सबसे लंबा फ्लाईओवर (दीघलीपुखुरी से नूनमाटी तक) अब महाराजा पृथु के नाम पर रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला असम की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों को हमारे वीरतापूर्ण इतिहास से प्रेरित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद बिन खिलजी को हराने वाले महाराजा पृथु

महाराजा पृथु को राजा पृथु या विश्वसुंदर देव के नाम से भी जाना जाता है। वे 12वीं और 13वीं सदी में प्राचीन कामरूप (वर्तमान असम) के शासक थे। राजा पृथु ने 1206 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के सिपहसालार मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी को हराया था।

बख्तियार खिलजी वही आक्रांता था, जिसने नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा के बड़े केंद्रों को नष्ट कर दिया था और 10,000 से ज्यादा बौद्ध भिक्षुओं की हत्या की थी। बिना किसी खास प्रतिरोध के पूर्व की ओर बढ़ने के बाद, जब खिलजी की फौज ने कामरूप में प्रवेश करने का प्रयास किया, तो उसे भयंकर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा।

मिनहाज सिराज-अल-दीन द्वारा लिखित फ़ारसी इतिहास ‘तबाकत-ए-नासिरी’ सहित ऐतिहासिक स्रोतों और कनाई बसासी और कन्हाई बोरोक्सी बुआ जिल जैसे स्थलों के शिलालेखों में उल्लेख है कि आक्रमणकारी फौज का पूरी तरह से सफाया कर दिया गया था और असम की संप्रभुता सुरक्षित रही। कई फौजी पीछे हटने से पहले ही दुर्गम इलाकों में मारे गए थे।

उसने बिना किसी युद्ध के बंगाल पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद उसने 1206 ईस्वी में तिब्बत पर आक्रमण करने की योजना बनाई, ताकि बौद्ध मठों के खजाने को लूट सके। वह दक्षिण पूर्व एशिया के साथ कामरूप और सिक्किम से होकर जाने वाले पारंपरिक व्यापार मार्ग पर भी कब्जा करना चाहता था।

खिलजी ने राजा पृथु और उनकी सेना की वीरता के बारे में सुना था और जानता था कि उनके राज्य से होकर गुजरना असंभव होगा। अतः उसने कामरूप के विरुद्ध लड़ने के बजाय, तिब्बत पर आक्रमण करने के लिए राजा पृथु के पास हाथ मिलाने का पैगाम भेजा।

कामरूप राजा ने खिलजी के साथ सहमति जताते हुए कहा कि वह भी रेशम मार्ग पर नियंत्रण के लिए दक्षिणी तिब्बत पर भी आक्रमण करना चाहते हैं। इसके बाद खिलजी और राजा पृथु संयुक्त आक्रमण के लिए सहमत हो गए, लेकिन राजा पृथु ने सलाह दी कि मॉनसून के मौसम में पहाड़ों से होकर जाना खतरनाक होगा, इसलिए कुछ समय इंतजार करना चाहिए।

जब तक खिलजी के आदमी राजा पृथु का संदेश लेकर लौटे, तब तक वह काफी आगे बढ़ चुका था और वर्तमान सिलीगुड़ी के पास डेरा डाले हुए था। खिलजी ने उनकी सलाह को नजरअंदाज कर दिया और एक स्थानीय गाइड ‘मेच’ के जरिए भूटान के रास्ते से तिब्बत जाने की कोशिश की। यात्रा शुरू होने से पहले खिलजी ने मेच का धर्मांतरण करा दिया था।

रास्ते में तिब्बती गुरिल्ला सेनाओं ने उसकी फौज पर हमला कर दिया। भारी बारिश और बीमारियों के चलते उसकी फौज कमजोर हो गई। कई फौजी बीमारी से मर गए। हालात इतने खराब थे कि बख्तियार खिलजी की फौज ने घोड़ों को खाने के लिए मार डाला। उसी रास्ते से वापस लौटने में असमर्थ, खिलजी ने कामरूप के रास्ते लौटने का फैसला किया।

राजा पृथु की युद्धनीति

राजा पृथु को इस घटनाक्रम की जानकारी थी क्योंकि उनके जासूस नियमित रूप से जानकारी दे रहे थे। वह अपनी सलाह की अनदेखी करने के लिए खिलजी से पहले से ही क्रोधित थे और उन्हें अंदेशा था कि आक्रमणकारी उनके राज्य को लूटकर अपनी आपूर्ति बढ़ाएँगे। 

जब खिलजी लौटने के लिए कामरूप की ओर बढ़ा, तो राजा पृथु ने पहले ही सारी तैयारी कर रखी थी। उन्होंने स्कॉर्च्ड अर्थ रणनीति अपनाई और यानी रास्ते में सभी संसाधनों को नष्ट कर दिया, ताकि दुश्मन को कोई मदद न मिल सके। पुलों को तोड़ दिया गया और राशन समेत रास्तों को जला दिया गया।

युद्ध में लगभग 12,000 घुड़सवार और 20,000 पैदल पौजी मारे गए। खिलजी किसी तरह जान बचाकर कुछ सौ फौजियों के साथ भाग निकला। इसके बाद खिलजी ने नए क्षेत्रों पर विजय पाने का उत्साह खो दिया और फिर कभी किसी युद्ध में नहीं गया। अंत में खिलजी अपने ही एक सिपहसालार अली मर्दान खिलजी के हाथों मारा गया।

राजा पृथु ने असम की भूमि को बाहरी आक्रमणों से बचाया। हालाँकि 1228 में दिल्ली सल्तनत के शासक इल्तुतमिश के बेटे नासिरुद्दीन महमूद से युद्ध में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार स्वीकारने के बजाय उन्होंने अपने किले के एक जलकुंड में कूदकर स्वाभिमानपूर्वक जीवन त्याग दिया।

आज भी 27 मार्च को असम में ‘महाविजय दिवस’ मनाया जाता है। यह वही दिन है जब पृथु ने बख्तियार खिलजी की फौज को हराया था। महाविजय दिवस मध्यकालीन भारत के सबसे आक्रामक सैन्य अभियानों में से एक के विरुद्ध राज्य के प्रतिरोध और उत्तरजीविता का स्मरणोत्सव है।

सीएम ने कहा- राजा पृथु ने असम को दिल्ली सल्तनत का हिस्सा होने से बचाया

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि राजा पृथु का योगदान बहुत कम जाना जाता है, जबकि उन्होंने असम को दिल्ली सल्तनत का हिस्सा बनने से बचाया। उन्होंने कहा कि जैसे अहोम साम्राज्य के सेनापति लाचित बरफुकन को मुगलों के खिलाफ जीत के लिए जाना जाता है, वैसे ही पृथु को भी उनके साहस और रणनीति के लिए याद किया जाना चाहिए।
नए फ्लाईओवर का नाम महाराजा पृथु के नाम पर रखने से पहले हेमंत बिस्वा शर्मा सरकार द्वारा गुवाहाटी में एक नए फ्लाईओवर का नाम महाभारत कालीन राजा भगदत्त के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया था। भगदत्त असुर राजा नरकासुर के पुत्र थे और कुरुक्षेत्र महायुद्ध में कौरवों की ओर से भाग लिया था। उन्होंने हाथियों के एक बड़े दल सहित एक अक्षौहिणी सेना का योगदान दिया था।
अब दिघलीपुखुरी–नूनमाटी फ्लाईओवर को महाराजा पृथु फ्लाईओवर नाम देकर सरकार उनके अदम्य साहस को सम्मान दे रही है, साथ ही नई पीढ़ी को उनके बारे में जागरूक करने का प्रयास कर रही है।

‘तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख’, जिस वजाहत कादरी ने करवाई शर्मिष्ठा पर FIR, वो लगातार करता है हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान: दर्ज हुए अब 3 केस, लेकिन कोलकाता पुलिस नहीं ले रही कोई एक्शन, क्यों? मुस्लिम कट्टरपंथियों का एक ही काम है कि सनातन धर्म के विरुद्ध जहर उगलो, हिन्दू इस्लाम के खिलाफ बोले तो "सिर से तन जुदा गैंग" को आगे करो

                               वजाहत खान और शर्मिश्ता पनोली (फोटो साभार - ऑपइंडिया इंग्लिश)
पश्चिम बंगाल पुलिस ने जिस वजाहत खान कादरी रशीदी की शिकायत पर लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार किया है, अब उसकी घिनौनी हरकतें सामने आ रही हैं। हिंदू देवी-देवताओं के अपमान, अभद्र टिप्पणियों और उसके सोशल मीडिया पर उगले गए जहर को लेकर वजाहत खान कादरी रशीदी के खिलाफ 3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। 2 एफआईआर दिल्ली में और एक एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।

बंगाल में अब तक जितने भी हिन्दू विरोधी दंगे होने पर पुलिस द्वारा दंगाइयों पर कोई कार्यवाही नहीं करना साफ साबित करता है कि बंगाल पुलिस मुस्लिम कट्टरपंथियों के इशारे पर काम करती है और केंद्रीय गृह मंत्रालय को इन सब हरकतों का संज्ञान लेकर कार्यवाही करनी चाहिए। जिस कट्टरपंथी की शिकायत पर बंगाल पुलिस सतर्कता दिखाते शर्मिष्ठा को गिरफ्तार करती है वही पुलिस उसी अपराध में वज़ाहत को क्यों नहीं गिरफ्तार करती? आखिर कट्टरपंथी कब तक victim card खेलकर अराजकता फैलाते रहेंगे? हिन्दू देवी-देवताओं को चाहे जो कुछ कहो लेकिन इनके इस्लाम पर कोई टिप्पणी नहीं होनी चाहिए, क्यों?       

एक चैनल शायद टीवी9 पर एक चर्चा के दौरान एक मौलाना द्वारा भगवान कृष्ण पर गलत  टिप्पणी करने पर आचार्य विक्रमादित्य जी द्वारा सबूत माँगने पर मौलाना ने जहाँ उलटी-पुल्टी बात करते ही लाइव शो में इतना मारा कि चर्चा में मौजूद कोई मौलाना बीच बचाव करवाने की हिम्मत नहीं कर सका। यानि इन कट्टरपंथियों का एक ही काम है कि सनातन धर्म के विरुद्ध जहर उगलो।     

हालाँकि, अब वज़ाहत खान खुद मुश्किलों में घिर गया है। इंटरनेट यूजर्स की जाँच में यह तथ्य सामने आया कि वज़ाहत खान कादरी रशीदी नाम का जो व्यक्ति पैगंबर मोहम्मद और इस्लाम के कथित अपमान से नाराज़ होकर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ़ कार्रवाई की माँग कर रहा था, वह खुद सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म और हिंदू देवी-देवताओं का बार-बार अपमान करता रहा है।

 शर्मिष्ठा ने जिस टिप्पणी के लिए माफ़ी माँग ली थी, उसी को आधार बनाकर रशीदी फ़ाउंडेशन के सह-संस्थापक वज़ाहत खान कादरी रशीदी ने कोलकाता पुलिस में उसके खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी और कोलकाता पुलिस ने शर्मिष्ठा को 1500 किमी दूर गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया था। वज़ाहत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी की माँग की थी, शिकायत दर्ज कराने की जानकारी साझा की थी और बाद में उनकी गिरफ्तारी का जश्न भी मनाया था।  

लेकिन अब उस वजाहत के कई आपत्तिजनक पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें वो हिंदू देवी-देवताओं के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करता था। इन पोस्ट्स में से कई को वज़ाहत ने बाद में डिलीट भी कर दिया। उसने अपनी पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म के खिलाफ अपमान जनक भाषा का प्रयोग किया। उसके कुछ पोस्ट इस प्रकार हैं..

“एक हिंदू अपनी साली को अंग अंग पर रंग लगाते हुए और अपने दोस्तों को भी उसके साथ ऐसा करने का निमंत्रण देते हुए… सी हिंदुओं… यहीं है इनकी असलियत… बलात्कारी संस्कृति”

“नहीं वो उसकी बात कर रहा है जिसकी 16108 राखेलो के साथ रंग रसिया मनाता था…या चुपके-चुपके लड़कियों को नहाते हुए देखता था…”

“मेरे पास आपके लिए कुछ है… पहले अपने धर्म के बारे में पढ़ो। मूत्र पीने वाले मैल हैं।”

“तुझ जैसी &^$^&* पेट की औलाद रसूल के बारे में बारे में बात करे ये जेब नहीं देता…तू इसकी बात कर, तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख…सच्चाई देख, वहम में मत जी… $%टू साले, तूने जो भी कहा वो सब तो झूठ और बहुत है लेकिन ये तेरे ही किताब का है सच पढ़, सुवर के पिल्ले”

                                                  

 वज़ाहत खान के ट्विटर पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इन आपत्तिजनक पोस्ट्स के आधार पर एडवोकेट विनीत जिंदल ने वज़ाहत खान के खिलाफ़ दिल्ली पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने वज़ाहत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 194, 195, 356 और आईटी एक्ट की धाराओं 66, 67, 69 के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग की है।

उन्होंने ऑनलाइन शिकायत में लिखा, “मैं सोशल मीडिया पर वज़ाहत खान कादरी रशीदी नामक व्यक्ति द्वारा प्रसारित की जा रही बेहद आपत्तिजनक, घृणित और अपमानजनक पोस्ट की एक सीरीज के बारे में एक औपचारिक शिकायत दर्ज करने के लिए लिख रहा हूँ, जिनके प्रोफ़ाइल और पोस्ट ट्विटर (अब एक्स) जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।

उन्होंने आगे कहा की व्यक्ति ने हिंदू समुदाय, उसकी मान्यताओं, प्रथाओं और भगवान कृष्ण सहित पूजनीय व्यक्तियों को निशाना बनाते हुए अभद्र भाषा वाले बार-बार पोस्ट किए हैं। पवित्र ग्रंथों और देवताओं का मज़ाक उड़ाते हुए यौन रूप से स्पष्ट और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया है। सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से सांप्रदायिक उकसावे की कार्रवाई की गई है। धार्मिक भावनाओं का उपहास करने और उन्हें भड़काने के उद्देश्य से ग्राफ़िक गलत सूचना और मॉर्फ़ की गई तस्वीरें।

एडवोकेट विनीत जिंदल के आनुसार सामग्री में बलात्कारी संस्कृति, मूत्र पीने वाले और हिंदू त्योहारों, देवताओं और मंदिरों (जैसे, कामाख्या देवी मंदिर) पर अपमानजनक टिप्पणी जैसे अपमानजनक शब्द शामिल हैं। ये पोस्ट धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का एक स्पष्ट और जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है, जो 194,195,356 बीएनएस और आईटी अधिनियम की धारा 66,67,69 के तहत दंडनीय अपराध है। इसलिए उपरोक्त व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मैं तैयार हूँ। मैं आगे कोई भी जानकारी देने या आवश्यकतानुसार जाँच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए भी तैयार हूँ”।

अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने कोलकाता में रहने वाले वजाहत खान के खिलाफ दिल्ली में साकेत पुलिस के साइबर अपराध में दूसरी शिकायत दर्ज कराई है।

उन्होंने लिखा कि कोलकाता स्थित रशीदी फाउंडेशन के सह-संस्थापक वज़ाहत खान कादरी रशीदी के खिलाफ़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर हिंदू धर्म, देवी-देवताओं, त्योहारों और संस्कृति को निशाना बनाकर आपत्तिजनक, अपमानजनक और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई है। जिंदल ने कहा कि इन पोस्टों से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं, जिसमें वह स्वयं भी शामिल हैं, और इनसे सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका है।

इस बीच, वजाहत के खिलाफ तीसरी एफआईआर भी दर्ज हुई है। वजाहत के खिलाफ तीसरी एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज कराई गई है। वायस ऑफ असम और सांतनु सैकिया ने ये एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें कामाख्य मंदिर पर दिए उसके घृषित पोस्ट को आधार बनाया गया है।

कथित रूप से, वज़ाहत खान ने अब अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसे कई आपत्तिजनक पोस्ट डिलीट कर दिए हैं। इसी तरह, शर्मिष्ठा पनोली ने भी अपने कथित आपत्तिजनक वीडियो को डिलीट कर दिया था और सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगी थी। इसके बावजूद, पश्चिम बंगाल पुलिस ने शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार करने के लिए 1500 किलोमीटर दूर चली गई और कोलकाता की अलीपुर कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया जबकि वज़ाहत खान जो वही कोलकाता में मौजूद है उसके खिलाफ बंगाल पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।